अपनी मम्मी की झांटो वाली चूत

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प्रेषक : निशित …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम निशित है और मेरी उम्र 19 साल है। में अपने मम्मी पापा का इकलोता लकी बॉय हूँ। मेरे पापा का नाम सुनील है, उनकी उम्र 45 साल है। मेरी मम्मी का नाम अंजलि है, उनकी उम्र 42 साल है, हम तीनों न्यू मुंबई में रहते है, हमारा न्यू मुंबई में एक फूड स्टोर है। अब में आपको जो सुनाने जा रहा हूँ, वो थोड़े समय पहले का मेरा पहला सेक्स अनुभव है। मुझे वो दिन अच्छी तरह से याद है जिस दिन शाम को पापा घर आए और हमें बताया कि मैंने एक नया फार्म लिया है, जो न्यू मुंबई से 40 किलोमीटर की दूरी पर है और में, मम्मी और पापा फार्म को देखने के लिए कल सुबह 5 बजे जा रहे है। तो मम्मी ने पूछा कि 5 बजे क्यों? तो पापा ने बताया कि यहाँ से फार्म तक जाने के लिए रोड़ अच्छा नहीं है और हमें शाम को वापस आना है।

फिर सुबह 5 बजे में, मम्मी और पापा हमारी मारुति कार से फार्म जाने के लिए निकल पड़े। अब मम्मी आगे की सीट पर पापा के साथ बैठी थी और में पापा की पीछे वाली सीट पर बैठा था। अब में आपको मेरे बारे में बताता हूँ, में जब 10वीं क्लास में था तो तब मैंने एक फिल्म देखी थी मेरा नाम जोकर, तो तब से में मेरी माँ को सॉफ्ट सेक्स की नज़र से देखता था और माँ मेरे साथ बहुत फ्रेंड्ली थी, में और मम्मी कभी-कभी पापा का मज़ाक भी उड़ाते थे। अब हम लोग फार्म से 20 किलोमीटर दूर थे और सुबह के 6 बजे थे, तो जब मैंने पीछे की सीट से मम्मी की तरफ देखा। तो मम्मी ने गर्मी के कारण कॉटन की ब्राउन पतली और ढीली पेंट और वाईट कलर की पारदर्शी कमर से थोड़ा नीचे तक का कुर्ता पहना था, जिसके अंदर पतली स्ट्रीप वाली वाईट लूज ब्रा पहनी थी। मम्मी की गांड बहुत बड़ी थी और बूब्स भी गोल, सॉफ्ट और लंबे थे। आज में पता नहीं मम्मी को कुछ ज़्यादा ही देख रहा था। मम्मी की मेरी तरफ फिलिंग सिर्फ़ एक बेटे की तरह थी।

फिर हम लोग सुबह 7 बजे फार्म पर पहुँच गये, उस फार्म का नाम रीवर पॉइंट था। फिर पापा ने बताया कि फार्म के बिल्कुल पीछे एक नदी है, जिसके कारण इसका नाम रीवर पॉइंट है। फिर हम लोगों ने कार से बाहर निकलकर देखा तो वो फार्म बहुत बड़ा था और उस फार्म की एक साईड अंगूर की फसल थी और दूसरी तरफ आम के पेड़ थे और वर्कर लोगों के रहने के लिए दो झोपड़े थे। फिर वहाँ धनीराम नाम का एक आदमी हमें अपने झोपड़े में ले गया और फिर हमने वहाँ चाय पी। फिर पापा मुझे और मम्मी को बोले कि जाओ तुम लोग थोड़ा फार्म देख लो में यहाँ नदी के पास काम चालू है, वो देखकर आता हूँ और फिर पापा धनीराम के साथ नदी की तरफ चले गये। अब वहाँ में, मम्मी और धनीराम की बीवी और उनके दो बच्चे बाहर खेल रहे थे।

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फिर में और मम्मी फार्म की तरफ निकल पड़े। अब हम लोग आम के पेड़ो के नीचे से होते हुए फार्म के 1 किलोमीटर अंदर तक चले। फिर मम्मी ने कहा कि बस निशित अब में आगे नहीं चल पाऊँगी, तो फिर में और मम्मी वही आम के पेड़ो के नीचे बैठ गये। अब हमारे बिल्कुल पीछे अंगूर की फसल में पानी चल रहा था और ठंडी हवा चल रही थी। फिर अचानक से मम्मी ने मुझसे कहा कि निशित मुझे बहुत जोर से टॉयलेट लगी है, में क्या करूँ? तो तब मैंने मम्मी से कहा कि तुम एक काम करो, चलो वापस जाते है। तो मम्मी ने कहा कि में इतने समय तक रोक नहीं सकती निशित। तो फिर मैंने मम्मी से कहा कि आप एक काम करो वहाँ अंगूर की फसल में चली जाओं, में कही से पानी लेकर आता हूँ। तो मम्मी ने तुरंत मान लिया और वो अंगूर के कैबिन जैसे प्लांट से कवर जगह में चली गयी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब में वही खड़ा था, अब मेरा दिल बहुत जोरो से धड़क रहा था मुझे नहीं पता था कि में क्या करने जा रहा हूँ? फिर में पानी लाने की बजाए मम्मी के पीछे दबे पाँव अंगूर की फसल से बिल्कुल चिपककर खड़ा हो गया और अपने एक हाथ से अंगूर के प्लांट को धीरे से हटाया और देखा तो मम्मी मेरी आँखों से महज 2 मिनट की दूरी पर खड़ी अपनी पेंट के बटन खोल रही थी। फिर मम्मी ने अपनी पेंट के बटन खोलने के बाद अपनी पेंट कमर से नीचे सरका दी और अपनी गांड से सरकाते हुए अपने पैरो के नीचे से पूरी निकाल दी और अंगूर के प्लांट पर लटका दी। अब में तो बस देखते ही रह गया था, फिर जब मैंने मम्मी की गांड देखी तो दंग रह गया एकदम मिल्क वाईट कसी हुई दो जाघों के ऊपर बड़ी साईज़ की लाईट पिंक पेंटी में सजी हुई थी। मैंने पहले कभी किसी औरत को ऐसे नहीं देखा था, मम्मी की गांड के कूल्हें इतने बड़े थे की बड़ी साईज की पेंटी में भी समा नहीं पा रहे थे। फिर मैंने एक चीज़ और देखी कि मम्मी को आधी नंगी होने पर टॉयलेट नहीं आता, इसलिए मम्मी ने अपनी पूरी पेंट निकाल दी थी।

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फिर मम्मी अपनी पेंटी नीचे सरकाकर अपने घुटनों तक रखकर मेरी आँखो के सामने बैठ गयी। फिर जैसे ही मैंने मम्मी की काले बालों वाली चूत का हिस्सा देखा तो में सोच में पड़ गया कि क्या सचमुच औरत के भी दो पैरो के बीच में इतने बाल होते है? अब मम्मी मेरे बिल्कुल सामने बैठी थी। अब मुझे डर भी लग रहा था कि कही मम्मी मुझे देख ना ले और फिर अचानक से मम्मी ने आवाज़ दी निशित जाओ पानी लेकर आओं और मुझे ऐसे मत देखो मुझे शर्म आती है, वो ऐसा हंसते हुए बोली। तो में तुरंत दबे पाँव वहाँ से पानी लेने भागा, अब मेरा दिल और जोरो से धड़कने लगा था। फिर में कैसे भी करके एक पानी का भरा हुआ डब्बा लेकर आया और मम्मी को पास कर दिया। फिर थोड़ी देर के बाद मम्मी अंगूर की फसल से हंसती हुई मेरी तरफ आई और बोली कि अब यहाँ से चलो। तो मैंने मन ही मन में कहा कि थैंक गॉड मम्मी ने डाटा नहीं और मेरे दिल की धड़कन एकदम नॉर्मल हो गयी। फिर में और मम्मी वापस 1 किलोमीटर चलते हुए झोपड़े के पास आ गये और वहाँ आए तो पापा भी नदी से वापस आ चुके थी और आम के पेड़ के नीचे धनीराम के साथ चिकन बना रहे थे। फिर मम्मी भी चिकन बनाने में लग गयी और तो और मम्मी ने पापा को मेरे बारे में कुछ नहीं बताया ।।

धन्यवाद …

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