आंटी की तड़पती चूत में बेलन डाला

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प्रेषक : मॅडी …

हैल्लो दोस्तों, में कामुकता डॉट कॉम का पिछले कुछ सालों से लगातार पाठक हूँ और मुझे सभी सेक्सी कहानी बहुत अच्छी लगती है, जिनको पढ़कर में बहुत मज़े करता हूँ और अभी तक में बहुत सारी कहानियों के मज़े ले चुका हूँ और आज में आपके सामने एक सच्ची कहानी लेकर आया हूँ, जो मेरे जीवन का पहला सेक्स अनुभव है। जिसको पढ़कर में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को बहुत मज़ा आएगा। दोस्तों में सबसे पहले अपना परिचय आप लोगों से करवा देता हूँ, उसके बाद हम आगे कहानी की तरफ बढ़ेगे। दोस्तों मेरा नाम मॅडी है और में 19 साल का हूँ। में दिखने में ठीकठाक हूँ और मुझमें बचपन से ही सेक्स में कुछ ज्यादा रूचि रही है। मैंने बहुत बार अपने पड़ोस में रहने वाली आंटी लड़कियों के बूब्स, गांड को चोरी-छिपे देखा और उनके मज़े लिए। ऐसा करने से मुझे संतुष्टि मिलती थी। दोस्तों मै पुणे में रहता हूँ और मेरी एक आंटी है वह पुणे में ही रहती है और वो किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती है। मेरी आंटी की उम्र करीब 35 साल की है और उनका कुछ सालों पहले तलाक हो गया था, लेकिन उनकी दो बेटियां है। जिसमें से बड़ी लड़की की उम्र 18 साल और छोटी वाली की उम्र करीब 14 साल है और वो दोनों लड़कियाँ पढ़ाई करती है, लेकिन आंटी का फिगर उन दोनों से काफी अच्छा है। उनके फिगर का आकार 40-32-36 है और उनकी भरी भरी गांड है। दोस्तों में जब भी उनके घर पर जाता हूँ तो बस में उनके बूब्स और गांड को ही देखा करता था और मेरी चोर नजर उनकी गोरी उभरी हुई छाती पर ज्यादा रहती और मुझे उनके आधे से ज्यादा खुले हुए बूब्स अपनी तरफ आकर्षित करते रहते में हमेशा उनको छूने दबाने के बारे में सोचता था और वैसे उनकी बड़ी बेटी के बूब्स का आकार 36-28-34 और उसकी भी बाहर निकली हुई गांड बहुत ही प्यारी थी। दोस्तों में आंटी को हमेशा अपनी सेक्सी निगाहों से देखता था, लेकिन उन्होंने कभी भी मेरी इस हरकत पर ज्यादा गौर नहीं किया, क्योंकि वो मुझे अपना बेटा मानती थी और इसलिए उनकी सोच मेरे लिए वैसे नहीं थी, वो तो बस अपने घर के कामों में लगी रहती थी और मेरी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देती थी, इसलिए में उसी बात का फायदा उठाकर अपनी आखें सेकता था।

एक दिन जब में उनसे मिलने उनके घर पर गया तो मैंने देखा कि वो उस दिन घर पर बिल्कुल अकेली थी, क्योंकि उनके बच्चे उस समय स्कूल गए हुए थे और उन्होंने हल्के नीले कलर की सिल्की साड़ी पहन रखी थी, जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी और उनका वो ब्लाउज जो उन्होंने पहना हुआ था वो बहुत ही छोटा था और उसका गला भी कुछ ज्यादा ही बड़ा था, जिसमे से उनके दोनों बूब्स के बीच से निकलती हुई वो पतली सड़क उन दोनों ऊँचे ऊँचे पहाड़ो के बीच की गहराई तक मुझे साफ साफ नज़र आ रही थी और जिसको में लगातार घूर घूरकर देखता रहा में उस गहराईयों में एकदम खो गया था। फिर उन्होंने मुझसे बैठने के लिए कहा और चाय के लिए पूछा तभी मैंने चाय के लिए तुरंत उनको हाँ कर दिया और वो मेरे लिए चाय बनाने चली गई। फिर में उनके बेडरूम में बेड पर जाकर बैठा हुआ था और टीवी देख रहा था। फिर कुछ देर बाद मेरे लिए चाय ले आई और वो टीवी में चल रहे गाने में एकदम खो गई थी, इसलिए मुझे भी ध्यान नहीं रहा कि वो मुझे चाय का कप दे रही है और में कप को पकड़ना ही भूल गया। शायद यह सब मैंने जानबूझ कर किया और अचानक से वो गरम गरम चाय मेरी जांघ पर गिर गई और उन्होंने देखा तो वो बहुत ज्यादा घबरा गई बोली कि ओफ्फ्फ्फ़ भगवान यह क्या हो गया? गरम गरम चाय तुम्हारे ऊपर गिर गई, प्लीज मुझे माफ़ कर दो मेरा ध्यान कहीं दूसरी तरफ था। तुम रुको में अभी कुछ करती हूँ और वो बहुत डर गई इसलिए वो जल्दी से किचन में जाकर एक पानी की बोतल लेकर आ गई और मेरी जांघ पर वो ठंडा पानी डाल दिया और जल्दबाजी में कपड़ा ना मिलने की वजह से वो अब ठीक मेरे सामने आकर थोड़ा झुककर अपनी साड़ी के पल्लू से मेरी जांघ को साफ करने लगी और जब उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू अपनी छाती से हटाया तो मुझे उनके बूब्स साफ नज़र आ रहे थे। फिर जैसे ही धीरे धीरे वो झुकी तो उसकी वजह से अब मेरे घुटनों से उनके वो दोनों बड़े आकार के पपीते लटककर दब रहे थे, जिसकी वजह से मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया और पानी को साफ करते समय अचानक से उनका हाथ मेरे लंड पर जा लगा और वो मेरे लंड को भी पेंट के ऊपर से साफ करने लगी और अपने बूब्स को मेरे घुटनों के और ज्यादा पास करके ज़ोर से दबाने लगी। फिर कुछ देर बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैंने तुरंत उन्हे पकड़कर ज़ोर से उनके गुलाबी रसभरे होंठो पर एक फ्रेंच किस कर लिया में उनको बहुत जोश में देखकर सब कुछ भूलकर चूम रहा था और मेरे लंड अभी भी आंटी के हाथ में था और इसके अलावा मेरे घुटने उनके बूब्स को लगातार दबा रहे थे और जोश में आकर मेरे होंठ उनके होंठो को चूस रहे थे। फिर करीब 8-10 मिनट तक में उनके होंठो को चूसता रहा और इस बीच में 2-4 बार हम दोनों ने एक दूसरे को बीट मतलब एक दूसरे का थूक चाटा, जिससे मेरा और आंटी हम दोनों के होंठ पूरे गीले हो गये। फिर जब मैंने उसको किस करना बंद करके उसको छोड़ा तब तक वो मेरे लंड को मेरी पेंट के बाहर निकाल चुकी थी और फिर उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया और में जोश में आकर आआहह अहहहहा कर रहा था। फिर करीब 15-20 मिनट तक वो मेरा लंड लोलीपोप की तरह चूसती रही।

फिर दोस्तों मैंने भी ज्यादा देर ना करते हुए तुरंत दोनों बूब्स को उसके कपड़ो से बाहर निकाल लिया जिनको अपने सामने देखकर में बहुत चकित हुआ, क्योंकि कपड़ो से बाहर आने के बाद तो वो मेरी उम्मीद से भी ज्यादा बड़े आकार के एकदम गोरे थे और उनकी हल्के भूरे रंग की निप्पल मुझे अपनी तरफ आकर्षित करने लगी, जिसको देखकर में सब कुछ भूल चुका था और अब में दूसरी दुनिया में था और इसका मुझे कुछ नहीं पता कि में क्या और क्यों करने जा रहा हूँ? अब में उसके दोनों एकदम मुलायम बड़े आकार के बूब्स को अपने दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से निचोड़ रहा था, लेकिन ज्यादा बड़े आकार की वजह से वो मेरे हाथ में भी नहीं आ रहे थे, लेकिन थे और बहुत मजेदार बहुत सुंदर जिनको देखकर कोई भी उन्हें निचोड़ देने की इच्छा रखता है। फिर उसने अब पूरी तरह से गरम होकर मेरे लंड को अपने दांतों से हल्का हल्का काटना भी शुरू कर दिया था, जिसकी वजह से मेरे पूरे बदन में अजीब सी हरक़त एक हलचल होने लगी थी और फिर मैंने उसके एक निप्पल को अपने अंगूठे की सहायता से ज़ोर से दबा दिया, जिसकी वजह से उनके मुहं से बहुत ज़ोर से चीख बाहर निकल गयी और उन्होंने अब ज्यादा कामुक होकर मेरे लंड को तुरंत छोड़कर मेरे होंठो को फिर से किस करना और हल्का सा काटना शुरू कर दिया, लेकिन थोड़ी देर बाद एक बार फिर से वो मेरा लंड अपने मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी और में उनका इतना जोश और पागलपन देखकर खुद में भी पागल हो चुका और में अंदाजा लगा सकता था कि वो उस समय कितने जोश में थी। फिर वैसे भी उनको बहुत दिनों बाद किसी का लंड मिला था, जिसको देखकर वो अपने पूरे होश खो बैठी थी। अपने तलाक होने के बाद शायद वो पहली बार किसी का मतलब मेरा लंड छूकर लंड को अपने मुहं में लेकर चूस रही थी और मेरे बूब्स दबाने की वजह से वो बहुत अजीब सी आवाजे निकालकर वो मुझसे कह रही थी हाँ और ज़ोर से चूसो मेरे राजा उफ्फ्फ्फ वाह मज़ा आ गया, हाँ आज तुम इनको पूरी तरह से निचोड़कर इनका पूरा रस पी जाओ, में कब से इस पल का मज़ा लेने के लिए तरस रही थी। फिर मैंने इस दिन का कितना इंतजार किया? आह्ह्हह्ह हाँ थोड़ा और ज़ोर से दम लगाओ, वाह तुम तो बहुत अच्छी तरह से यह सब करना जानते हो और तुम इतने दिनों से कहाँ छुपे बैठे थे? दोस्तों वो यह सभी बातें कहकर खुद भी जोश में आकर मुझे भी जोश दिलवाकर दोबारा मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी और लगातार धीरे धीरे एक अनुभवी की तरह लंड को अंदर बाहर करने की वजह से जो मुझे सुख मिल रहा था। दोस्तों में उसको किसी भी शब्दों में लिखकर आप लोगो को नहीं बता सकता और फिर कुछ ही देर बाद मेरे लंड से निकला वो वीर्य का गरम लावा उसके मुँह के अंदर ही निकल गया और अब वो बहुत मज़े से मेरे लंड से निकले वीर्य को चाट रही थी और लंड को दोबारा अपने मुहं में लेकर बहुत जमकर चाट रही थी और उन्होंने मेरे लंड को बिल्कुल चमका दिया। अब में थककर बेड पर ही लेट गया और वो मेरे कपड़े उतारने लगी और उसने मेरे पूरे गरम जिस्म पर किस करना शुरू कर दिया, लेकिन उसने अभी तक साड़ी पहन रखी थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर में उठा और मैंने तुरंत उनका ब्लाउज उतारकर एक तरफ डाल दिया और उनकी काली कलर की सिल्की ब्रा को बिना समय गँवाए उतार दिया और अब मैंने धीरे धीरे उनको पूरा नंगा कर दिया था। फिर जब उनका गोरा कामुक बदन मेरी आखों के सामने आकर मुझे ललचा रहा था तो मैंने उनके बदन को चाटना चूमना शुरू कर दिया। फिर कुछ देर चूमने के बाद में उठकर गया और एक बर्फ का टुकड़ा अपने साथ ले आया और अब में वो बर्फ का टुकड़ा उसके बदन पर फेरने लगा और अपने एक हाथ में बर्फ लेकर उसकी चूत पर भी लगाने लगा। इसके बाद में अब अपने दाँतों में बर्फ को लेकर उसकी चूत पर रगड़ने लगा, जिसकी वजह से वो चिल्ला रही आहहहह उफफ्फ्फ्फ़ तुम यह क्या कर रहे हो? ऊईईईइ माँ मुझे तो आज ऐसा लगता है कि तुम मेरी जान ही निकाल दोगे और तुम तो बहुत कुछ करना जानते हो, में तो तुम्हे नादान समझ रही थी। फिर अब वो अपनी गांड को लगातार ऊपर नीचे कर रही थी और तभी अचानक से वो बर्फ का टुकड़ा मुझसे छुटकर सीधा उनकी गीली चूत में फिसलकर अंदर चला गया जिसकी वजह से वो चीख उठी उछल पड़ी और मुझसे कहने लगी उह्ह्ह्ह आह्ह्ह् माँ मर गई, तुमने यह क्या किया? प्लीज इसको जल्दी बाहर निकालो वरना में मर ही जाउंगी थोड़ा जल्दी करो।

फिर मैंने अपनी एक ऊँगली को उनकी चूत में डालकर उस बर्फ के टुकड़े को चूत से बाहर निकाल ही रहा था, तभी ना जाने क्या सोचकर वो मुझसे बोली कि नहीं रहने दो उसको अंदर ही अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। फिर मैंने उस बर्फ के टुकड़े को चूत के अंदर ही रहने दिया और अब में उसकी चूत को चाटने लगा और कुछ ही सेकिंड में वो बर्फ का टुकड़ा चूत की गरमी से पिघल रहा था, जिसकी वजह से अब उस बर्फ का पानी और उनकी चूत का पानी मिलकर उस छेद से बाहर आ रहा था और जिसको में बड़े ही मज़े से चाट रहा था। उसकी चूत का वो खट्टा और ठंडा पानी बड़े ही मज़े का था और आंटी ज़ोर ज़ोर से चीख और चिल्ला रही थी उफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्हह्ह हाँ मादरचोद आज तू मेरी पूरी चूत को खा जा आईईईइ हाँ तू आज अपनी आंटी की चूत को पूरा का पूरा चूस ले, चोद दे इसको, अपनी जीभ को डाल दे पूरा अंदर हाँ और अंदर जाने दे। फिर मैंने ज़ोर ज़ोर से चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया, उसकी तरसती हुई चूत को अपने दांतों से हल्के से काटने लगा जिसकी वजह से आंटी कि आवाज़ भी तेज़ हो रही थी और दूसरी तरफ मेरे दोनों हाथ उनके 40 साईज़ के बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा रहे थे और मैंने ध्यान से देखा तो दोनों बूब्स पूरी तरह से लाल हो गये थे। फिर जिसकी वजह से अब उनका दूध भी निकलने लग गया था। फिर उनकी चूत को चाटने के बाद उन्होंने मुझे अपने ऊपर लेटा लिया और मुझसे कहा कि चल अब आजा मादरचोद आ तू मेरा दूध भी पी ले और में ज़ोर ज़ोर उनके बूब्स को चूसने लगा। उनका दूध भी बहुत ही स्वादिष्ट था। फिर करीब 15 मिनट तक उनके बूब्स को चूसने और दूध पीने के बाद मैंने उनको कुत्ते की तरह बैठने के लिए कहा वो तुरंत बैठ गई। फिर मैंने उनको चोदना शुरू किया और सबसे पहले मैंने उनकी गांड पर बहुत सारा मख्खन लगा दिया और अपने 6 इंच लंबे लंड को उनकी गांड के छेद पर रखकर ज़ोर से अंदर की तरफ दबाव बनाते हुए अंदर डाल दिया और वो चीख उठी वो मुझसे कहने लगी उफफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह प्लीज अब इसको बाहर निकालो मुझे दर्द हो रहा है आईईईई में मर जाउंगी प्लीज मेरी बात मान लो, लेकिन मैंने उनके बहुत बार कहने और मुझसे आग्रह करने के बाद भी अपने लंड को बाहर नहीं निकाला और अब में बहुत ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा। फिर थोड़ी ही देर बाद आंटी को भी मज़ा आने लगा और वो भी मस्ती से अपनी गांड को उठाकर ऊपर नीचे करने लगी और उस समय मेरे दोनों हाथ उसकी गांड पर थे और मेरा लंड उसकी गांड के अंदर था। फिर करीब दस मिनट धक्के देने के बाद मैंने अपना वीर्य उसकी गांड में ही निकाल दिया। फिर लंड अपने आप छोटा होकर बाहर निकल गया और में तब तक उनके बूब्स को मसल रहा था और जब लंड बाहर निकला तब आंटी लंड को अपनी जीभ से चाटने लगी और उन्होंने लंड को चाट चाटकर पूरा साफ कर दिया और उसके बाद में आंटी के ऊपर ही लेट गया और उनके होंठो को चूसने लगा और चूत में ऊँगली करता रहा।

फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों नंगे ही उठे और किचन में चले गये, वहाँ पर हमने थोड़ा जूस और दूध पी लिया तभी मेरे हाथ में रोटी बनाने का बेलन आ गया, जिसको मैंने तुरंत उसकी चूत में डाल दिया। फिर वो मुझसे कहने लगी कि यह बेलन बहुत छोटा है तुम तो अब अपना लंड मेरी चूत में डालो और मेरी जमकर चुदाई करो, मुझे वो सुख दे दो जिसके लिए में बहुत सालों से तड़प रही हूँ, मेरी चूत की प्यास मिटा दो और कर दो आज मेरी चूत को ठंडा, यह मुझे बहुत परेशान करती थी। फिर मैंने आंटी को अपनी बाहों में लेकर उनको जल्दी से किचन में ही नीचे लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख लिया और अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया। पहले धीरे-धीरे और फिर थोड़ी देर बाद में अपनी तरफ से ज़ोर ज़ोर से झटके देने लगा, जिसकी वजह से वो चीख उठी मादरचोद और ज़ोर से चोद, हाँ तू आज फाड़ दे मेरी चूत को आहहह म्‍म्म्मममम में मर गई। अब वो बहुत सेक्सी आवाज़ें निकाल रही थी, जिनकी वजह से में जोश में आकर और ज़ोर ज़ोर से अपने लंड को चूत में झटके दे रहा था। फिर करीब 8-10 मिनट चोदने के बाद मैंने उनसे कहा कि में अब झड़ने वाला हूँ बताओ में अपने वीर्य को कहाँ निकालूं? तो उसने मुझसे बोला कि तुम उसको मेरी चूत के अंदर ही डाल दो और फिर मैंने उसके कहने पर उसकी चूत के अंदर ही अपने वीर्य का फव्वारा छोड़ दिया और में आंटी के ऊपर ही लेट गया। में और आंटी दोनों ही थोड़ी सी थकान महसूस कर रहे थे, इसलिए मैंने उसके ऊपर लेटकर धीरे धीरे उसके बूब्स को चूसने लगा और वो मेरी इस चुदाई से बहुत खुश पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रही थी। फिर चुदाई के कुछ घंटो बाद मैंने उनको एक बार फिर से उनके बच्चे आने से पहले दोबारा चोदा और उसके बाद उन्होंने मेरी हर एक चुदाई में अपना पूरा पूरा साथ दिया। अब मुझे जब भी मौका मिलता में उनको जरुर चोदता और बहुत मजे करता ।।

धन्यवाद …

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