भाभी की चूत की चटनी – 2

0
loading...

प्रेषक : अजय ..

“भाभी की चूत की चटनी – 1” से आगे की कहानी …

फिर भाभी ने मेरे लंड को ज़ोर से मसल दिया। मेरे मुहं से आअहह निकल गयी और मैंने भी भाभी के बूब्स को ज़ोर से दबा दिया तो भाभी भी कराह उठी उउईई माँ हहाउफ्फ्फ और उसके बाद में चूत में उंगली को अंदर बाहर करने लगा और भाभी चूतड़ को हिला हिलाकर साथ देने लगी और में अंगूठे से मटर जैसे दाने को मसलने लगा। भाभी पूरे जोश में थी और सीईई करके सिसकियाँ ले रही थी कि जैसे मुहं में मिर्च खा रखी हो। तभी उन्होंने मुझे उल्टा होकर अपने ऊपर आने को बोला तो में समझ गया कि भाभी 69 पोज़िशन में आने को बोल रही है। मैंने इन सब के बारे में कामुकता डॉट कॉम पर कई बार पढ़ा है और ब्लूफिल्म में देखा भी था.. लेकिन पहली बार ही कर रहा था और बहुत बारीकी से सब कुछ सीख भी रहा था। में भाभी के ऊपर उल्टा लेट गया और भाभी की चूत को सहलाने लगा और चूमने लगा। फिर एक उंगली अंदर बाहर कर रहा था तो भाभी भी मेरे लंड के सुपाड़े को मुहं में भरकर चूसने लगी और हाथ से लंड को आगे पीछे करने लगी। में तो सातवें आसमान पर पहुंच गया था।

फिर में जीभ से भाभी की चूत के दाने को सहलाने और चाटने लगा और उंगली को बराबर चलाए जा रहा था.. पहले एक उंगली फिर दूसरी उंगली भी डाल दी चूँकि चूत गीली थी तो दोनों उंगली बड़ी आसानी से अंदर बाहर हो रही थी। भाभी अब चूतड़ को नचाने लगी और मेरे लंड के सुपाड़े को मुहं से निकाल कर बोली कि आहह और डाले जाओ मेरे राजा.. पूरा डाल दो इस मूसल को मेरी चूत में और मेरी चूत की चटनी बना दो। फिर यह सुनते ही में उठा और भाभी को किस करने लगा और होंठो को चूसा तो भाभी भी दुगने जोश में साथ दे रही थी और मुझे बाँहो में जकड़ लिया। फिर में उठा और पैरो के बीच में आकर उनकी जांघो को जितना हो सकता था चौड़ा किया और एक हाथ से चूत को फैलाया तो चिकनी चूत का गुलाबी छेद दिखने लगा और मैंने एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर सेट किया तो भाभी ने तुरंत नीचे से धक्का लगा दिया.. तो लंड नीचे फिसल गया.. क्योंकि भाभी की चूत थोड़ा तंग थी। ऊपर से भाभी बहुत ही ज्यादा जोश में थी।

फिर भाभी ने मेरा लंड अपने हाथ से पकड़कर अपनी चूत के छेद पर सेट किया और नीचे से उचकाया तो मैंने भी मौका देखकर ऊपर से एक धक्का लगा दिया.. तो लंड का सुपाड़ा चूत में घुस गया और इसी के साथ भाभी की एक जोरदार चीख निकल गयी आअहह म्ररररर गई ऊओिईइ माँ। तो में वहीं पर उसी पोज़िशन के रुक गया और भाभी से पूछा कि भाभी रोज तो करवाती हो.. फिर भी तुम्हारी इतनी कसी हुई चूत कैसे है? तो भाभी बोली कि मेरे राजा किसने बोला कि तुम्हारे भैया रोज रोज चोदते है? वो तो बस हफ्ते में एक बार या फिर दो बार कर लेते है और उनका लंड भी तुमसे पतला और सिर्फ़ लगभग 5 इंच का ही है.. उनका लंड होता तो पहले ही धक्के में पूरा का पूरा गप से अंदर और वो बस 10-15 धक्के लगाकर झड़ जाते है और लुढ़क जाते है और जब में बोलती हूँ कि मेरा अभी नहीं हुआ तो बोलते है कि अच्छा है तुम झड़ोगी तो कमज़ोरी आ जाएगी।

तभी मैंने मौका अच्छा देखकर एक और जोरदार धक्का लगा दिया जिससे आधा लंड भाभी की चूत में समा गया भाभी की चीख निकालने ही वाली थी कि मैंने अपना हाथ भाभी के मुहं पर रख दिया और भाभी तड़पने लगी। तो में भाभी पर झुक गया और दूसरे हाथ से भाभी के बूब्स को सहलाने लगा और हाथ हटाकर भाभी के होंठ को चूसने लगा। तो भाभी ने अपने होंठ छुड़ाकर बोला कि में कहीं भागे थोड़े ना जा रही हूँ जो इतने बेरहमी से धक्के लगा रहे हो.. थोड़ा आराम से चोदोगे तो और भी मज़ा आएगा और इस मूसल जैसे बाबूराव को तो कोई भोसड़ीवाली रंडी ही एक बार में ले सकती है और में बीमार थी तो एक महीने से चुदी ही नहीं हूँ और तुम जालीमो की तरह मेरी चूत फाड़ने पर लग गये हो। में तो भाभी के मुहं से पहली बार चूत, चुदाई भोसड़ीवाली जैसे शब्द सुन रहा था और मुझे उस समय और भी अच्छा लग रहा था। फिर भाभी ने नारियल के तेल की बोतल की तरफ इशारा करते हुए बोला कि पहले तेल लगा लो फिर आराम से डालो इसे मेरी चूत में मेरे राजा। तो मैंने एक लंबी साँस ली और लंड बाहर निकाल लिया तो लंड को देखकर चौक गया क्योंकि लंड पर थोड़ा सा खून लगा था और दर्द भी हो रहा था तो मैंने सोचा कि मेरा पहली बार है इसलिए शायद मेरी वर्जिनिटी टूटने की निशानी है और लंड के सुपाड़े के नीचे की चमड़ी थोड़ी सी छिल गयी थी और मैंने भाभी को यह नहीं बताया वो और लेटी हुई थी तो उन्हें यह सब नहीं दिखा। फिर मैंने तेल की बोतल को उठाया और बोतल खोलकर ढेर सारा नारियल का तेल भाभी की चूत पर गिरा दिया और उंगली से पूरा अंदर तक तेल लगा दिया। भाभी की चूत अब तेल से लबालब हो गयी। फिर मैंने तेल अपने बाबूराव पर भी लगाया और बोतल को रख दिया और लंड को चूत के छेद पर सेट किया। तो भाभी अब थोड़ा मुस्कुराकर बोली अब डालो मेरे राजा.. लेकिन आराम से करना।

तो इतना कहने के बाद भाभी नीचे से खुद ही चूतड़ उछालने लगी तो मेरा सुपाड़ा चूत के अंदर चला गया और इस बार मुझे ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। फिर में घुटने के बल बैठे बैठे ही तेल हाथों में लेकर भाभी के बूब्स की मालिश करने लगा और तब तक भाभी ने आअहह करते करते नीचे से 2-3 बार और अपने चूतड़ को उछाला। तो आधा लंड आराम से चला गया और लंड अब चूत की दीवारो के बीच में फँस गया था और गरम चिकनी चूत तो भट्टी की तरह तप रही थी और एक अजीब सी मदहोशी जैसा आलम हो गया था और इतना अच्छा लग रहा था मानो चूत की दीवारो से लंड की सिकाई हो रही हो। फिर मुझे तो जोश आ गया और मैंने कसमसाती भाभी को कंधो से पकड़ा और होंठ को अपने मुहं में चूसते हुये लीप किस किया और ऐसा जकड़ा कि भाभी कुछ भी ना कर सके और इससे पहले की वो कुछ समझ पाती मैंने लंड को थोड़ा बाहर किया और जितनी मेरे में ताक़त थी उतनी ज़ोर का झटका देकर धक्का लगाया तो भाभी तड़पने लगी और अपने हाथों से मुझे हटाने की कोशिश करने लगी।

loading...

तो में टस से मस नहीं हुआ अब मेरा पूरा लोड़ा भाभी की चूत में समा गया था। भाभी की आँखो मे आँसू आ गये में उसी पोज़िशन मे रुक गया और भाभी को चूचियों को सहलाने लगा और भाभी के बालों में हाथ फेरने लगा। जब मुझे लगा कि भाभी की चूत ने भी जब लंड को सेट होने की जगह दे दी तो मैंने भाभी के होंठ छोड़ दिए और उन्होंने छूटते ही गालियों की झड़ी लगा दी.. भोसड़ीवाले, बहनचोद, साले हरामी बोला था ना आराम से करने को गधे जैसा लंड लेकर साले ने एक झटके में मेरी चूत के अंदर घुसेड दिया। तो में उनके मुहं से गालियों को सुनकर सकपका गया और भाभी ने मुझे कभी गाली नहीं दी थी और ऊपर से लालुनिया शब्द तो मैंने पूछ ही लिया कि यह लालुनिया कौन है? तो वो बोली कि बहनचोद वही जिसमे तूने अपना लंड घुसेड़ा है उसी बेचारी को बोलते है लालुनिया। गलियां सुनकर मुझे भी जोश आ गया तो में भी बोला कि मदारचोद तू तो तरस रही थी ना अंदर लेने के लिए अब क्या हुआ.. गांड फट गयी? तो भाभी ने मुस्कुराते हुए बोला कि गांद नहीं फटी मेरे छोदू राजा.. लेकिन इतने ज़ोर से मत करो कि मेरी चूतरानी एकदम से फट ही जाए.. चलो अब आराम आराम से धक्के लगाओ। तो मैंने कहा कि ठीक है मेरी जान और में धीरे धीरे आगे पीछे होने लगा और यही कोई 8-10 धक्को के बाद भाभी भी मेरा साथ देने लगी और नीचे से अपनी कमर और चूतड़ हिला हिलाकर उछलने लगी और आअहह ऊमम्मह सस्स्शह आअहह सीईईईई मरी जान चोदो और जोर से। माँ कसम में भी धक्के मारने लगा और नीचे से भी थाप पड़ने लगी। अब कमरे में थप थप और पुच पुच की आवाज़े गूंजने लगी.. ऐसा नज़ारा था कि क्या बताऊँ? में सारा दर्द भुलाकर सुख के सागर में गोते लगा रहा था। भाभी ने तो मानो होश ही खो दिया था और चूतड़ को बहुत ज़ोर से उछालते हुए चुदवा रही थी और में भी पूरा लंड उनकी चूत में घुसा देता। फिर मैंने कहा कि भाभी तुम्हारी चूत भी बहुत मस्त है एकदम चिकनी गरम.. बस मज़ा आ गया। में दम लगाकर धक्के मारे जा रहा था। फिर लगभग 10 मिनट की जोरदार चुदाई के बाद भाभी का जिस्म अकड़ने जैसा हो गया और वो मुझे अपनी बाहों में जकड़ने लगी और जितनी ज़ोर से चूतड़ उछाल कर लंड अंदर ले सकती थी ले रही थी और आ उहह सस्स्शह चुदवा रही थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे हैं।

फिर मेरा भी शरीर अकड़ने लगा और लगा जैसे सारा खून लंड की तरफ प्रवाहित हो रहा है हाँलाकि मैंने कोई पोज़िशन नहीं बदली थी.. बस एक ही पोज़िशन में बिना रुके चुदाई कर रहा था। तो भाभी चिल्लाते हुए बोली कि चोदो मेरे राजा और जोर से में तो गई आहह। मैंने भी एकदम पूरा दम लगाया और बूब्स और होंठ छोड़कर कमर को एक हाथ से और कंधे को दूसरे हाथ से पकड़ते हुए धक्का मारा कि भाभी का पूरा शरीर चरमरा गया और वो कोई भी शब्द सही से नहीं बोल पा रही थी और भाभी ने भी मुझे दबोच लिया और मेरी कमर पर अपने पैर लपेट लिए.. जैसे कि वो सदा के लिए लंड को चूत में फिट कर देना चाहती हो और मेरे कानो को काटने लगी और चाटने लगी और आंड पर हाथ घुमाने लगी। भाभी ने ऐसा पकड़ा कि में हिल भी ना सकूँ और में भी एकदम चरम सीमा पर था और बस 8-10 धक्को की कमी थी.. फिर भाभी तो पानी छोड़ते हुए चूत को कभी सिकोड़ती तो कभी ढीला छोड़ रही थी।

फिर मैंने कहा कि मेरी जान में भी झड़ने वाला हूँ कहाँ निकालूँ? तो भाभी बोली कि बस धक्के बंद मत करो.. ऐसे ही चोदते रहो। तो मैंने धक्के लगाते हुए भाभी की चूत में अपने गर्म वीर्य की धार मार बैठा और तब तक धक्के लगता रहा जब तक लंड से आख़िरी कतरा नहीं निकल गया और फिर निढाल होकर भाभी के ऊपर लुड़क गया। हम दोनों की साँसे इतनी तेज थी कि कोई कुछ नहीं बोल पा रहा था और पसीने से लथपथ हम दोनों के नंगे जिस्म चिपके हुए थे और एक दूसरे के सीने की धड़कन को महसूस कर रहे थे। फिर हम दोनों लगभग 5 मिनट ऐसे ही पड़े रहे और लंड अपने आप ही सिकुड़कर चूत से बाहर आ गया और जब थोड़ी राहत महसूस हुई तो हम दोनों एक दूसरे को सहलाते हुए उठकर बैठे तो देखा कि भाभी की चूत से उनकी चूत के पानी में मिला हुआ मेरा माल सफेद झाग के साथ बाहर आ रहा था और मेरा लंड भी ऐसे ही झाग से सना हुआ था। तो भाभी ने बोला कि उउउइईई माँ और जल्दी से बाथरूम की तरफ जाने लगी और जैसे ही कदम बढ़ाया तो लड़खड़ा उठी तो मैंने लपक कर भाभी को पकड़ लिया.. एक तो बीमारी की वजह से पहले ही कमजोर थी और ऊपर से ऐसी जोरदार चुदाई के बाद तो किसी को भी आसमान के तारे नज़र आ जाए। फिर में भाभी को पकड़े पकड़े बाथरूम तक ले गया वहाँ पर भाभी ने बैठ कर पेशाब किया सुर्रर्रर्र की सिटी बजाते हुए और में पहली बार अपने सामने किसी औरत को नंगी ऐसे बैठकर पेशाब करते हुए देख रहा था और पेशाब के साथ अंदर का माल भी बाहर आने लगा और फिर उसके बाद जैसे ही मग से पानी चूत पर डाला तो भाभी चिल्ला उठी उउईईई माँ। तो मैंने पूछा कि क्या हुआ भाभी? तो वो बोली कि कुछ नहीं राजा यह तुम्हारे लंबे चौड़े बाबूराव की करतूत है.. मुझे लगता है चूत थोड़ा छिल गयी है और वहाँ पानी डालने पर जलन हो रही है। फिर में मुस्कुरा दिया और भाभी ने अपनी चूत साफ की और बोली कि आगे आओ तुम्हारे बाबूराव को भी नहला दूँ। तो मैंने बोला कि में कर लूँगा.. भाभी तुम जाओ। तो उन्होंने बैठे बैठे ही मेरा लंड जो कि सिकुड़ कर 3 इंच का हो गया था.. उसे आगे खींचा तो में आगे चला गया और जैसे ही भाभी के नज़दीक गया तो उनकी आँखे बड़ी हो गयी और बोली कि यह खून कैसे निकल गया और मेरे लंड को घुमाकर देखा तो सुपाड़े के नीचे लगी हुई चमड़ी छिल गयी थी.. तो वो यह देखकर मुस्कुरा दी और बोली कि आज तुम्हारा पहली बार था.. मैंने तो समझा था कि तुम पता नहीं कितनी लड़कियों को चोद चुके होगे.. लेकिन मुझे लगता है तुम्हारे बाबूराव का उद्घाटन मेरी चूत से ही होना था और फिर खुश होकर मेरे लंड को धोने लगी।

मुझे भी जलन हो रही थी तो मेरी भी आवाज़ निकल गई.. तब भाभी ने शरारत से एक दो मग पानी और डाल दिया तो मैंने भी मग भाभी से छीन लिया और उनके ऊपर पानी डालने लगा। वो अब मुझसे चिपक गई तो मैंने मग को वहीं पर रख दिया और हम दोनों बाथरूम से बाहर आकर बेड पर बैठ गये और जैसे ही घड़ी की तरफ देखा तो 12.30 बज रहे थे जो कि बच्चो के स्कूल की छुट्टी का समय हो गया और वो लगभग 5-10 मिनट में आने वाले थे.. तो भाभी ने अपने कपड़े पहन लिए और मैंने अपने। फिर हम दोनों पास में लेटे हुए एक दूसरे से छेड़खानी करने लगे और फिर थोड़ी देर के बाद बच्चे स्कूल से आ गये तो भाभी उनमे व्यस्त हो गयी और जब मेरी तरफ देखती तो मुस्कुरा देती।

फिर उस दिन के बाद जब भी हमे मौका मिलता बस हम शुरू हो जाते.. लेकिन पूरे कपड़े तभी निकालते जब किसी के आने का डर नहीं होता था.. मतलब सुबह जब बच्चे स्कूल में और भैया काम पर होते तो हमारे पास लगभग 3 घंटे होते थे और हम जमकर चुदाई करते थे और में डेली 2 बार तो भाभी को चोद ही लेता था। फिर में इंटरव्यू के लिये जाता तो भी भाभी को एक बार चोदकर ही जाता था और लगभग दो महीने के बाद मेरी नौकरी लग गयी तो में भी ऑफिस जाने लगा तो हमारी चुदाई कम हो गयी.. लेकिन कोई भी मौका हम छोड़ते नहीं थे और यह सिलसिला चला तो अभी तक रुकने का नाम ही नहीं लिया ।।

धन्यवाद …

loading...
इस कहानी को Whatsapp और Facebook पर शेयर करें ...

Comments are closed.