भाभी की गांड का उपहार

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प्रेषक : सन्नी …

हैल्लो दोस्तों, में भी आप सभी की तरह कामुकता डॉट कॉम का पिछले कुछ सालों से पाठक हूँ और में इन सेक्सी कहानियों को पढ़कर बहुत मज़े लेता आ रहा हूँ। दोस्तों जो लोग मुझे नहीं जानते में आप सभी को बता देता हूँ, मेरा नाम सन्नी है और में जम्मू का रहने वाला हूँ और में जम्मू के ही एक कॉलेज से बी.ए की पढ़ाई पूरी कर रहा हूँ। दोस्तों मेरी उम्र 24 साल, मेरी लम्बाई 5.9 और मेरा बदन हर दिन कसरत करने से बहुत गठीला गोरा बड़ा आकर्षक लगता है और मेरे लंड का आकार सात इंच लंबा और दो इंच मोटा है। अब में आप सभी को अपनी आज की उस घटना के बारे में बताता हूँ जिसके लिए में आज यहाँ आया हूँ। दोस्तों हम सभी लोग बहुत ही खुले विचारों के परिवार का एक हिस्सा है और हमारे दूर दूर के रिश्तेदार सर्दियों की छुट्टियों में कुछ दिनों के लिए हमारे साथ हो जाते थे। दोस्तों में अपने चचेरे भाई के साथ रह रहा था और वहीं मेरी एक दूर की भाभी थी, मतलब कि वो मेरे चचेरे भाई की पत्नी थी और उनके घर में सभी लोग उन्हे प्यार से शिवि कहते थे, लेकिन में उनको सिर्फ़ भाभी ही कहता था और मेरी भाभी की उम्र 37 साल थी, लेकिन वो अभी भी बड़ा सितम ढाती थी। वो दिखने में बहुत ही हॉट सेक्सी लगती थी और उनके बूब्स का आकार 36-30-42 है।

दोस्तों उनकी एक बेटी भी है, जिसका नाम कृति है और वो मुझे बहुत अच्छी लगती थी और उसके गोरे बदन पर जवानी का असर अब धीरे धीरे दिखना शुरू हो रहा था। दोस्तों में अक्सर मज़ाक में उसके शरीर के कुछ हिस्सों को छूकर मज़ा लेता था और कभी खेल खेल में उसको अपने गले से लगाकर में उसके उभरते हुए बूब्स को कसकर अपनी मुठ्ठी में जकड़ लेता था। दोस्तों वो भी मुझे मन ही मन बहुत चाहती थी और कई बार अकेले में मैंने अंधेरे में उसके साथ चूमना बूब्स को दबाकर मज़े लेने जैसे काम किए और उसकी चूत भी सहलाई और वो भी मेरे लंड को अपने नरम हाथों से सहलाती थी, लेकिन उसकी चुदाई करने का मुझे कभी कोई मौका नहीं मिला। एक बार गर्मियों के दिनों में हम लोग मेरे चचेरे भाई के घर (हिमाचल) से शिवि भाभी के घर (अमृतसर) चले गये। भाभी के पति (मतलब कि मेरे चचेरे भाई) उन दिनों अपने काम की वजह से कहीं दूसरे शहर में गए थे। दोस्तों हमारे साथ में कीर्ति, उसका छोटा भाई रमेश और मेरी उम्र का उसका एक चचेरे भाई विनय भी था। फिर बस से जाते समय कीर्ति, विनय और रमेश एक साथ बैठे हुए थे और में मेरी भाभी एक सीट पर बैठे थे। फिर रात को सोते सोते भाभी का सर गलती से गहरी नींद में मेरे कंधों पर बार बार आ रहा था।

फिर मुझे यह बहुत अच्छा लगा और मेरा लंड तनकर खड़ा हो गया था, लेकिन शिवि भाभी उस समय गहरी नींद में थी, इसलिए उनको कुछ भी पता नहीं था। फिर मैंने कुछ देर बाद चुपके से उनका एक हाथ उठाकर अपने लंड के ऊपर पेंट पर रख दिया और उनको नींद में होने की वजह से पता भी नहीं चला। फिर थोड़ी देर के बाद वो नींद में ही मेरा लंड दबाने लगी। फिर एकदम जब उनको महसूस हुआ कि वो क्या कर रही थी? तभी वो सकपकाकर ठीक से बैठ गयी और मेरी तरफ हल्का सा मुस्कुराकर देखने लगी। दोस्तों मुझे उनकी इस अदा पर बहुत प्यार आ रहा था और पहली बार मैंने देखा कि मेरी 37 साल की भाभी कितनी सुंदर है। अब मुझे लगा कि में उनको अभी चूम लूँ, लेकिन में अपने मन को मारकर रह गया। फिर दूसरे दिन सवेरे ही हम लोग अमृतसर पंहुच गए और मैंने अपनी भाभी को बिल्कुल भी महसूस नहीं होने दिया कि रात की लंड वाली बात के बारे में मुझे पता था। फिर घर पंहुचकर नहा धोकर हम सभी ने खाना खाया और उसके बाद हम केरम बोर्ड खेलने लगे थे। अब मैंने गौर किया कि जब भी हम दोनों अकेले होते, भाभी मेरे शरीर से अपना शरीर किसी भी बहाने से रगड़ देती थी और एक बार तो भाभी ने उनकी चूत वाला हिस्सा जानबूझ कर मेरे हाथ से रगड़ दिया और वो मुस्कुरा उठी।

फिर रात को हम लोग घर के आँगन में नीचे जमीन पर बिस्तर लगाकर सोने लगे और भाभी ने ऐसे सबके सोने का जुगाड़ किया कि सबसे पहले कृति, फिर उसके बाद विनय, फिर में, फिर रमेश और फिर भाभी सो गई। फिर हम सभी कुछ देर इधर उधर की बातें करते हुए सो गये। फिर देर रात को आधी नींद में मैंने ध्यान दिया कि भाभी उठकर मेरे और रमेश के बीच आकर लेट गयी, मेरा लंड पहले से ही ऐसे मौके देखता रहता है इसलिए वो अब तनकर खड़ा होने लगा था, लेकिन में सोने का बहाना करके लेटा ही रहा। फिर थोड़ी देर के बाद भाभी ने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया और वो उसको धीरे धीरे मसकने लगी थी, मेरा लंड अब और भी ज्यादा तन गया था। अब मैंने भी उनका हाथ मसला और वो तुरंत समझ गयी कि में जाग गया हूँ, लेकिन बाकी सभी लोग उस समय गहरी नींद में सो रहे थे। फिर भाभी ने मेरा हाथ अपनी छाती पर रख दिया। दोस्तों अब मुझे छूकर महसूस हुआ कि कृति के बूब्स तो थोड़े से उभरे हुए थे, लेकिन भाभी के बूब्स तो उससे भी अच्छे थे। अब में उनके बूब्स को ब्रा और ब्लाउज के ऊपर से ही सहलाने लगा था और मैंने भाभी की तरफ करवट कर ली और भाभी भी मेरी तरफ करवट करके मुझसे कहने लगी ओह्ह्ह मेरे सन्नी ऊह्ह्ह और वो मेरे होंठो को चूसने लगी थी।

दोस्तों मेरे लंड का तो अब बड़ा ही बुरा हाल था और यह सब तो आप लोग भी खुद ही समझ सकते हो कि उस समय मेरी क्या हालत रही होगी? में अब और भी ज़ोर ज़ोर से उनके बूब्स को अपने दोनों हाथों से मसलने दबाने लगा था। फिर वो मुझसे एकदम लिपट गयी और अब हम दोनों की साँसे तेज चलने के साथ ही फूलने भी लगी थी और बाकी बच्चे सो रहे थे, लेकिन फिर भी हम दोनों को डर लग रहा था। फिर भी मैंने भाभी का ब्लाउज खोल दिया और में दोनों बड़े आकार के एकदम मुलायम बूब्स को ब्रा के ऊपर से ही सहलाने लगा था और मेरे बहुत बार कोशिश करने के बाद भी ब्रा का हुक नहीं खुल पा रहा था। अब भाभी अपने नरम गुलाबी होंठो से मेरे होंठो को रगड़ रही थी और तभी मैंने महसूस किया कि भाभी मेरे पजामे के नाड़े को खोलकर उसके अंदर अपने एक हाथ को डालकर मेरे लंड को सहला रही थी जिसकी वजह से मुझे बड़ा मस्त मज़ा भी आ रहा था और में चकित भी था और मुझे डर भी लग रहा था। फिर भाभी ने मेरे कान में मुझसे कहा कि तुम्हारा लंड तो बहुत बड़ा और यह मोटा भी बहुत है, लेकिन आज नहीं चोद सकते। कल अच्छा प्लान बनाकर हम दोनों ही पूरे घर में अकेले होंगे और उसके बाद आगे का काम करेंगे।

दोस्तों मुझसे यह बात कहकर मेरा हाथ पकड़कर अपनी साड़ी के अंदर चूत पर ले गयी और वो मेरे लंड के ऊपर नीचे अपनी मुठ्ठी को करके मुठ मारने लगी। अब में भी उसकी चूत को सहलाने और अपनी ऊँगली से चुदाई करने लगा था और उनकी चूत की झांटे सहला रहा था और तभी वो मुझसे एकदम चिपक गयी। फिर में कुछ देर बाद ही उसके हाथों में झड़ गया और वो नीचे आकर मेरे वीर्य को चाटने के बाद अधनंगी अवस्था में ही उठकर बाथरूम में चली गयी। फिर आकर दोबारा वो अपनी ठीक जगह पर आकर लेट गयी और अब भाभी और मेरे बीच रमेश सो रहा था। फिर दूसरे दिन सवेरे में उठते ही मन ही मन में सोच रहा था कि अब भाभी का आगे का क्या विचार है? जब हम दोनों अकेले घर पर होंगे उसके बाद में भाभी के साथ कैसे चुदाई करके मज़े लूँगा? तभी भाभी ने कृति से कहा कि तुम सब लोग शॉपिंग करने चले जाओ, विनय और सन्नी को किताब की दुकान और रमेश को खिलोनो की दुकान पर ले जाओ। अब में उनके मुहं से वो बात सुनकर बड़ा चकित हो गया और सोचने लगा कि हम सब चले गये तो भाभी तो घर में अकेली होगी। फिर थोड़ी देर में वो मौका देखकर मुझसे कहने लगी जब सब लोग जाने लगें तुम झूठा बहान बना देना कि तुम्हारा पेट दर्द हो रहा है और फिर तुम उन सभी के साथ मत जाना।

अब मैंने वो बात सुनकर उनको कहा वाह मान गया मेरी प्यारी भाभी आपने कितना अच्छा जाल बनाया है जिसमे सभी एक साथ फंस जाएँगे और किसी को हमारे ऊपर बिल्कुल भी शक नहीं होगा और मैंने उनके हाथ को धीरे से सहला दिया। फिर मैंने ध्यान देकर देखा कि भाभी ने उस समय ब्रा नहीं पहनी थी और अब मुझे रात की ब्रा ना खुलने की बात याद आ गई और मुझे हँसी आ गयी। फिर मैंने देखा कि भाभी सभी खिड़कियाँ बंद कर रही थी और कहने लगी कृति देखो कितनी मक्खियाँ बाहर से अंदर आ रही है। अब में तुरंत समझ गया कि भाभी का मेरे साथ अपनी चुदाई का विचार बन रहा है और सोचकर मेरा लंड थोड़ा थोड़ा खड़ा हो चला था। फिर मैंने जाते समय आखरी वक्त में अपने पेट दर्द का बहाना बना दिया और वो एकदम सफल रहा। अब कृति, विनय और रमेश बाजार के लिए घर से निकल पड़े और भाभी ने जब दरवाजे पर खड़े होकर देखा कि वो लोग बहुत दूर जा चुके थे, तभी तुरंत भाभी ने दरवाजा भी बंद कर दिया। अब हम दोनों पूरे घर में बिल्कुल अकेले थे और घर की सभी खिड़कियाँ दरवाजे भी बंद थे और उसी समय में भाभी के पास जाकर उनके बदन से चिपक गया। दोस्तों भाभी पहले से ही अपने ब्लाउज के बटन खोल चुकी थी और अब वो मुझे चूम रही थी और वो मुझसे कहने लगी।

अब इस समय अपने पास बहुत समय है वो सभी लोग करीब दो घंटे से पहले वापस नहीं आने वाले। फिर भाभी ने जल्दी से मेरी पेंट की चेन खोली और मेरा लंड पेंट से बाहर निकालकर सहलाने लगी थी और मैंने उनकी साड़ी पेटिकोट को कमर से ऊपर कर दिया और फिर पहली बार उनकी नंगी चूत बिना किसी डर के देखी ओह्ह्ह। दोस्तों वाह क्या मस्त नज़ारा था? मेरी प्यारी भाभी की वो पतली लकीर वाली चूत का वो मनमोहक द्रश्य मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है और मुझे अपनी भाभी पर प्यार आ जाता है। अब में उनकी चूत के होंठो को खोलने लगा था। फिर भाभी मुझसे कहने लगी कि चलो बिस्तर पर आराम से करेंगे और वो मुझे मेरे होंठो पर चूमने लगी। अब मैंने उनकी साड़ी को उतार दिया उनका ब्लाउज तो पहले से ही खुला हुआ था। फिर भाभी ने मेरा साथ देते हुए अपने पेटिकोट का नाड़ा ढीला कर दिया और अपने पेटिकोट को भी नीचे गिरा दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने सिर्फ़ अधखुले ब्लाउज को पहने खड़ी थी और में पेंट शर्ट पहने था। में अभी नंगा नहीं था। फिर भाभी ने अपने ब्लाउज को भी उतार फेंका और वो पूरी नंगी होकर मुझसे लिपट गयी। अब मैंने उनकी गांड को सहलाते हुए उनको अपनी गोद में उठा लिया और भाभी मेरे गले में अपने दोनों हाथों को डालकर एकदम सिमट गयी और वो मेरे होंठो को चूमती रही।

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फिर जब में उन्हें अपनी गोद में लेकर बेडरूम में ले गया और मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटा दिया तो वो मुझसे कहने लगी कि सन्नी प्लीज अब तुम भी नंगे होकर मेरे ऊपर आ जाओ। अब मैंने हंसकर उनको कहा कि यह काम तो आपको ही करने होगा और फिर में पेंट शर्ट पहने अपनी नंगी भाभी के पास में लेट गया और सामने वाले बड़े आकार के कांच में हमारा सेक्स का वो द्रश्य साफ साफ दिख रहा था। दोस्तों वो क्या मस्त समा था? फिर भाभी ने जल्दी जल्दी मेरी पेंट, शर्ट को उतार दिया और अब मैंने भी उनका साथ देते हुए अपनी शर्ट को भी उतार दिया। दोस्तों भाभी मुझसे उम्र में पूरी 14 साल बड़ी थी, लेकिन वो क्या मस्त चीज़ नजर आ रही थी। फिर हम लोग थोड़ी देर एक दूसरे की बाहों में लिपटे एक दूसरे के शरीर से खेलते रहे और इधर उधर चूमते चाटते रहे। फिर मैंने उनको कहा कि भाभी मुझे आपकी चूत पास से छूकर देखनी है। अब भाभी कहने लगी कि हाँ तो देखो ना तुम मुझसे पूछते क्या हो? मुझसे यह बात कहकर भाभी ने तुरंत ही अपने दोनों पैरों को पूरा फैला दिया। दोस्तों वाह क्या मस्त द्रश्य था। उनकी चूत का दाना हीरे की तरह चमक रहा था और मैंने चूत को पूरी तरह फैलाकर बड़े अच्छे से उसका दर्शन किया जहाँ तक चूत के अंदर निगाह जा सकी में देखता गया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर भाभी ने अचानक से मेरे सर को पकड़कर अपनी चूत की तरफ खींचकर मुझसे कहा कि चूम लो तुम इसको सन्नी। अब भाभी के कहते ही उनकी चूत को चूमने लगा और अपने आप ही उसको चाटने भी लगा था और भाभी अपनी गांड को उठा उठाकर मुझसे अपनी चूत को चटवा रही थी और भाभी ऊऊईई करने लगी। अब में भाभी कहने लगा और तभी वो बीच में बोल पड़ी और कहने लगी तुम मुझे भाभी नहीं अब शिवि कहो सन्नी। फिर में खुश होकर चूत को अपनी जीभ से चाटते हुए बूब्स को भी रगड़ रहा था। मेरी प्यारी शिवी ऊऊईईई करने लगी और भाभी ने अपने दोनों पैरों से मेरे सर को जकड़ लिया और वो अपनी गांड को उठा उठाकर मेरे सर के बाल सहलाने लगी और मेरा लंड प्यास से तड़प रहा था। फिर मैंने कहा शिवि प्लीज तुम अब मेरे लंड का भी कुछ करो ना और शिवि बोली कि हाँ ठीक है में तुम्हारे ऊपर आ जाती हूँ उसके बाद हम एक दूसरे को असली मज़ा दे सकेंगे। फिर भाभी मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को जितना भी हो सकता था अपने मुहं में लेकर चूस रही थी जिसकी वजह से तो मुझे भी बड़ा मज़ा आने लगा था और भाभी को दुगना मज़ा आ रहा था।

फिर कुछ देर मेरा लंड चूसने के बाद भाभी मुझसे कहने लगी कि तुम अब अपने लंबे और मोटे लंड से मेरी चूत की प्यास को बुझाओ और यह कहकर वो सीधी होकर लेट गयी। अब में भाभी के दोनों पैरों के बीच में आ गया और अपना लंड मैंने उनकी बिना बालों की चूत पर रख दिया। भाभी ने मेरी कमर अपने दोनों पैरों से जकड़ ली और वो मेरी जीभ को चूसने लगी। दोस्तों मेरे लंड को चूत का छेद अपने आप मिल गया था और फिर भाभी अपनी गांड को ऊपर उठाकर मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर लेने की कोशिश करने लगी थी। अब मेरा लंड भाभी के थूक से तर था और भाभी की चूत भी अपना पानी छोड़ रही थी और तभी मैंने सांस खींचकर एक जोरदार धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा चार इंच लंड उनकी चूत में फिट हो गया और भाभी दर्द से मरी जा रही थी, लेकिन वो अपने होंठो को भींचकर अपना दर्द बर्दाश्त कर रही थी। फिर मैंने अपना लंड कुछ इंच बाहर निकालकर एक और ज़ोर का धक्का लगा दिया। इस बार और भाभी दर्द की वजह से चीख पड़ी ऊहह ऊउईईइ सन्नी तुम्हारा तो बहुत ज़्यादा बड़ा है, प्लीज तुम धीरे धीरे अपना लंड अपनी भाभी की चूत में डालो ऊऊह्ह्ह्ह। फिर में कुछ देर रुककर उनके होंठो को चूमने लगा था और नीचे से धक्के भी लगता रहा और मेरे दोनों हाथ जो अब तक खाली थे, में अब उनसे शिवि भाभी के बूब्स को मसल रहा था।

फिर कुछ देर के बाद भाभी का दर्द कम हुआ तो उसके बाद भाभी मुझसे कहने लगी कि अब में देखूं कि तुम्हारे लंड में कितना दम है? अब मैंने उनके मुहं से यह बात सुनकर जोश में आकर अपना पूरा लंड बाहर करके पूरी ताक़त से मैंने अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया और बोला लो फिर देखो मेरे लंड में कितना दम है, में धक्के पे धक्के लगा रहा था और भाभी दर्द से ओह्ह्ह आह्ह्ह्ह मारो मारो और ज़ोर से चोदो अपनी भाभी की चूत को तुम्हारा लंड मेरी चूत की जड़ तक पहुंच रहा है आह्ह्ह्हहह ऊऊईईईईईई। दोस्तों वाह क्या मस्त चूत थी भाभी की? में ज़ोर ज़ोर से धक्के देने लगा था और वो भी उनकी रफ़्तार से कमर को हिलाने लगी थी ओह्ह्ह्ह सन्नी तुम तो बहुत अच्छा मज़ा दे रहे हो, तुम तो किसी अनुभवी की तरह मेरी चुदाई कर रहे हो। अब में धक्के देते हुए उसके बूब्स को भी चूस रहा था ओह्ह्ह्ह वाह क्या मस्त सुगंध आ रही थी। फिर करीब 25 -30 धक्कों के बाद भाभी मुझसे कहने लगी, ऊह्ह्ह्ह सन्नी में अब झड़ने वाली हूँ और तेज मारो मेरी चूत आहह्ह्ह हाँ इस तरह हाँ और ज़ोर से बहुत अच्छे आईईई यह सब कहते हुए वो झड़ने लगी और में बिना रुके उनकी चूत को लगातार धक्के देकर चोदता फाड़ता रहा।

फिर करीब 10-15 धक्को के बाद भाभी मुझसे कहने लगी सन्नी रूको, मैंने पूछा क्यों क्या हुआ? अब वो कहने लगी कि तुम्हारा लंड बहुत शानदार है पता नहीं फिर कब इससे में अपनी चूत की चुदाई का मज़ा लूँ इसलिए अब में तुम्हारा लंड अपनी गांड में भी लेकर महसूस करना कहती हूँ, क्या तुम मेरी गांड मारना पसंद करोगे? मैंने कहा कि नेकी और पूछ पूछ, इस अच्छे काम में देर किस बात की? और मैंने जैसे ही उनकी चूत से अपना लंड बाहर निकाला तो उनकी चूत से पानी भी निकलने लगा था। अब मैंने भाभी को अपने सामने घोड़ी बनने को कहा और वो कहने लगी कि नहीं में खड़ी होकर नीचे झुक जाती हूँ ऐसे में ज्यादा मज़ा आएगा और फिर वो उसी तरह से खड़ी हो गयी। फिर मैंने जब पीछे से उनकी गांड देखी तो में क्या बताऊँ क्या मस्त द्रश्य था? में तो देखकर पागल सा हो गया और जल्दी से में उनकी गांड के छेद में अपना लंड डालने लगा, लेकिन छेद छोटा होने की वजह से मेरा लंड उनकी गांड में नहीं जा रहा था और मेरा लंड कभी फिसलकर ऊपर तो कभी चूत में घुस रहा था। फिर में जाकर भाभी के कमरे से तेल लेकर आया, उनकी गांड और अपने लंड पर ठीक से लगा लिया। अब भाभी कहने लगी कि सन्नी अब देर मत करो अगर वो लोग आ गए तो मेरी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाएगी।

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फिर मैंने बिना देर किए अपना लंड भाभी की गांड पर लगाकर मैंने उनको पूछा मुझे लगता है कि आपने कभी गांड नहीं मरवाई है? वो कहने लगी कि हाँ आज में पहली बार ही तुम्हारा लंड इतना लंबा और मोटा लंड अपनी इस गांड को उपहार में देना चाहती हूँ प्लीज सन्नी अब देर ना करो। फिर मैंने अपने दोनों हाथ भाभी के पेट के आगे लाकर आपस में जकड़ लिया और एक ज़ोर का धक्का मारा जिसकी वजह से मेरा दो इंच लंड उनकी गांड में घुस गया और वो ज़ोर से चीख पड़ी आईईईईईई नहीं सन्नी मुझसे यह दर्द अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है, तुम्हारा लंड बहुत मोटा मेरे लिए दुखदाई है, में तुम्हे अपनी गांड का उपहार नहीं दे सकती, ऊफ्फ्फ्फ़ प्लीज अब तुम इसको बाहर निकालो। अब में कहने लगा हाँ ठीक है में अभी अपना लंड बाहर निकालता हूँ। तुम बिल्कुल भी हिलना मत, नहीं तो तुम्हे और भी तेज दर्द होगा। फिर में धीरे से अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसको बोला भाभी आप मुझे अपनी गांड उपहार में दो या ना दो, लेकिन में यह उपहार जरुर लेकर रहूँगा और मैंने एक और जोरदार धक्का उनकी गांड में मारकर अपना आधे से ज़्यादा लंड अंदर कर दिया। अब वो दर्द की वजह से रोने लगी थी और में उनसे कहने लगा कि प्लीज भाभी आप रोए नहीं, में थोड़ा और झुककर उनके बूब्स को सहलाते हुए उनका दर्द कम करने की कोशिश करने लगा।

अब में उनको कहने लगा, जैसे पहली बार चूत मरवाने में दर्द होता है उसी तरह से गांड मरवाने में भी वैसा ही दर्द होता है। फिर भाभी कहने लगी आआहह में सब समझती हूँ, लेकिन ऊऊहह ओह्ह्ह मुझे इतना दर्द होगा मैंने यह सोचा नहीं था आह्ह्ह्ह ठीक है तुम अब अपना उपहार ले लो जो होगा देखा जाएगा। फिर में धीरे धीरे भाभी की गांड में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा था और करीब पांच मिनट बाद के भाभी भी अपने कूल्हों को हिलाने लगी थी। अब में तुरंत समझ गया कि मैंने भाभी की गांड से अपना पूरा लंड बाहर निकालकर उनकी गांड में वापस डालने लगा वो हर धक्के पे ऊहह्ह्ह आह्ह्ह्ह मम्म्म ऊऊईईईईई कर रही थी। फिर वो मुझसे कहने लगी कि सन्नी तुम्हारे लंड का कोई जवाब नहीं है, कोई भी कुंवारी लड़की या शादीशुदा औरत तुम्हारे लंड से अपनी चुदाई करवाने के लिए कुछ भी कर जाएगी, लेकिन अगर उनको पता चल जाए कि तुम्हारे पास इतना लाज़वाब लंड है। दोस्तों मेरा लंड अपनी इतनी तारीफ सुनकर पूरे जोश में आकर गांड की धुनाई कर रहा था और भाभी हर धक्के पर आअहह आआअहह कर रही थी। फिर करीब बीस मिनट गांड मारने के बाद मेरा लंड और टाइट होगा और मैंने अपनी स्पीड को पहले से भी तेज कर दिया। दोस्तों भाभी अब मेरे हर एक धक्के को नहीं झेल पा रहा थी और उनके मुहं से ऊऊओफफफ्फ़ आआआअहह मर गयी की आवाज आने लगी थी।

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फिर में उनसे कहने लगा कि भाभी में अब झड़ने वाला हूँ क्या में तुम्हारी गांड में ही अपने वीर्य को निकाल दूँ? वो कहने लगी कि हाँ एक बूँद भी बाहर नहीं गिराना। दोस्तों तब तक में अपनी चरम सीमा पर आ गया था और मैंने भाभी की कमर में हाथ डालकर एक जोरदार धक्के से अपना पूरा लंड उनकी गांड की गहराईयों में पहुंचाकर अपना वीर्य निकालने लगा और जिसको निकलते हुए भाभी अपनी गांड में महसूस कर रही थी। फिर जब मैंने पूरी तरह से झाड़कर अपना लंड उनकी गांड से बाहर निकाला तब मैंने देखा कि उनकी गांड गांड ना होकर लाल रंग के बड़े से छेद में बदल चुकी थी। फिर मैंने भाभी को उनकी गांड को सामने लगे शीशे में देखने के लिए कहा और वो झुके हुए अपनी गांड को शीशे में देखकर बिल्कुल दंग हो गयी और वो मुझसे कहने लगी यह क्या मेरी गांड है? और इतना बोलते है दरवाजे की घंटी बज गई। अब हम दोनों तुरंत समझ गये कि वो लोग वापस आ गये है। फिर भाभी जल्दी से बाथरूम की तरफ अपने कपड़े उठाकर चली गये और में जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहनकर दरवाजा मैंने कुछ इस तरह से खोला जैसे में सो रहा था। फिर जब दरवाजा खुला तो कीर्ति मुझसे पूछने लगी तुमने इतनी देर क्यों लगाई? मैंने उसको बोला कि में सो रहा था और शायद भाभी बाथरूम में है।

तभी भाभी भी आ गयी और सबसे पूछते हुए वो पानी लाने चली गयी कि कौन क्या क्या लेकर आया है? जल्दी जल्दी में मेरी पेंट की चेन खुली रह गयी थी जिसको कीर्ति ने देख लिया था और वो हंस भी रही थी। फिर मैंने देखा तो जल्दी से सभी से नजर बचाते हुए मैंने अपनी पेंट की चेन को लगा लिया और फिर भाभी ने मुझे रसोई में इशारा करके अपने पास बुलाया और मुझे पकड़कर मेरे होंठो पर एक चुम्मा किया और वो मुझसे बोली सन्नी तुम्हारा जवाब नहीं है, आज रात को तुम अलग से सोना, में बाद में जब सभी लोग सो जाएँगे, तब में तुम्हारे पास आकर अपनी चूत और गांड दोनों तुम्हारे लंड से चुदाई के मज़े लूंगी, क्योंकि मेरा मन अभी भरा नहीं है, पहली बार तुम्हारे लंड को लेने के बाद से अब मेरी आग पहले से भी ज्यादा भड़क गई है और तुम्हे अब इसको हमेशा ऐसे ही दमदार चुदाई करके बुझाना होगा। फिर हम पानी लेकर बाहर आ गये और बातें करते हुए सामान देखने लगे उस रात को मैंने भाभी को तीन बार बहुत जमकर चोदा और बहुत जमकर मैंने उनकी गांड भी मारी, वाह क्या मस्त मज़ा आया सच में उनकी गांड चूत को मारने में, मेरा मन उस अनुभव के बाद खुश हो गया, क्योंकि वो मेरा सबसे अच्छा सेक्स अनुभव था, जिसके बारे में आज भी सोचकर मेरा लंड खड़ा हो जाता है ।।

धन्यवाद …

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