भाभी को गर्म करके ठंडा कर डाला

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प्रेषक : विवेक …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विवेक वर्मा है और में दिल्ली का रहने वाला हूँ। दोस्तों मैंने अब तक पिछले कुछ सालों में कामुकता डॉट कॉम पर बहुत सारी सेक्सी सच्ची कहानियाँ पढ़ी है, जिनको पढ़कर मुझे बहुत मज़ा और वो मुझे अच्छी लगी और इसलिए आज में भी थोड़ी हिम्मत करके अपनी एक सच्ची घटना लिखने जा रहा हूँ। इस कहानी में मैंने अपने भाई के पड़ोस में रहने वाली उसकी हॉट सेक्सी पड़ोसन को बहुत मज़े लेकर चोदा और मुझे उसकी चुदाई करने में बहुत सुख एक अच्छा अनुभव मिला और इसलिए में उस अनुभव को आज आप सभी के लिए लेकर आया हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि मेरी इस घटना को पढ़कर आप लोगों को जरुर अच्छा लगेगा। अब आप सभी को ज्यादा बोर ना करते हुए में उस अपनी कहानी की तरफ आगे बढ़ता हूँ। दोस्तों यह बात उन दिनों की है, जब मैंने 12th के पेपर दिए थे और उसके बाद में कुछ समय जब तक कि मेरा परिणाम ना आ जाए, में तब तक फ्री था और इसलिए मैंने एक विचार बनाया। दोस्तों मेरे बड़े भाई, भाभी मुंबई में रहते है, मैंने अपना परिणाम आए उससे पहले में अपने कुछ दिन घूमने फिरने मज़े करने के लिए में मुंबई चला गया और वैसे पहले कभी भी में दिल्ली से कहीं बाहर भी नहीं गया था।

दोस्तों इसलिए यह मेरा अकेले कहीं जाने का पहला मौका था, लेकिन दोस्तों मुझे कभी इस बात की उम्मीद भी नहीं थी कि मेरा यह पहला मौका मेरा हमेशा के लिए यादगार सफर बन जाएगा। फिर में मुंबई स्टेशन पर पहुंच गया, मुझे वहां पर लेने के लिए मेरे भाई आए थे और वो मुझे देखकर बहुत खुश थे में उनके साथ घर चला गया। फिर जब घर पहुंचा तब में अपनी भाभी से मिला, वो भी मुझे देखकर मुझसे मिलकर बहुत खुश थी और फिर कुछ देर बाद मैंने हाथ मुहं धोकर उनके साथ बैठकर खाना खाया। दोस्तों मेरी भाभी और भैया बहुत अच्छे इंसान है, उन दोनों का व्यहवार मेरे लिए बहुत अच्छा था और इसलिए हम सभी आपस में बहुत हंसी मज़ाक भी किया करते है। फिर हम लोग बातें करने समय किसी को भी कुछ भी कह दिया करते थे, लेकिन हम सभी में से कोई भी बुरा नहीं मानते थे और हमारा वो हंसी मजाक ऐसे ही चलता रहा, हम सभी बड़े खुश थे। दोस्तों मेरी इस कहानी के सबसे मुख्य इंसान के बारे में मैंने आप लोगों को बताया ही नहीं कि यह हमारे पड़ोस में रहने वाली बड़ी सेक्सी भाभी थी, जिनका नाम सुजाता था। वो दिखने में बहुत मस्त माल होने के साथ साथ गोरे रंग के सुंदर चेहरे, एकदम गोल उभरे हुए बूब्स, बाहर की तरफ निकली बड़ी ही आकर्षक गांड और किसी को भी पहली बार में अपनी तरफ आकर्षित कर देने वाले कामुक बदन की मालकिन थी।

फिर उनको पहली बार देखकर में भी उनकी चुदाई के सपने देखने लगा था, लेकिन मुझे क्या पता था कि मेरा वो सपना इतनी जल्दी सच भी हो जाएगा। दोस्तों उनके पति मेरे बड़े भाई के साथ ही काम करते है और वो हमारी पड़ोसन थी, इसलिए उनसे बातें करना उनके घर पर आना जाना भी मेरी भाभी का और उनका भी यही हाल था। दोस्तों वो भी हमारे घर पर हर कभी आ जाती और मेरी उनसे भी बहुत कम समय में बहुत अच्छी जान पहचान हो गई थी और इसलिए में भी कभी कभी उनके घर भी आने, जाने लगा था। फिर में शुरुआत में अपनी पड़ोस वाली भाभी को भी अपनी भाभी की तरह इज्जत देने लगा था और में करीब इन सात आठ दिनों में उनसे ऐसे घुलमिल गया था, जैसे कि में वहीं पर बहुत सालों से रह रहा हूँ और उन्हे में बहुत पहले से जानता हूँ। अब मुझे उनके साथ रहना, बातें हंसी मजाक करना बहुत अच्छा लगने लगा था और वो भी मेरी किसी भी बात का कभी भी बुरा नहीं मानती थी। दोस्तों यह घटना मेरे साथ तब घटी जब में अपनी पड़ोसन भाभी के साथ घर पर अकेला था, क्योंकि मेरा भाई और पड़ोस में रहने वाले वो भैया एक ही कंपनी में एक ही पद पर काम करते थे और इसलिए उन दोनों को अपनी कंपनी के काम से मुंबई से 15 दिनों के लिए बाहर जाना था और वो दोनों चले भी गए।

फिर मेरी अच्छी किस्मत से मेरी भाभी को भी उनकी एक सहेली की शादी में पुणे जाना था, क्योंकि वो उनके अच्छे दोस्तों में से एक थी और इसलिए उनको एक सप्ताह के लिए वहां पर जाना था और इसलिए वो अपने कपड़े जाने की तैयारी करने लगी थी। फिर मुझसे उन्होंने कहा कि तुम भी मेरे साथ पुणे चलो, लेकिन मुझे ना जाने क्यों पुणे जाने का मन नहीं हुआ? इसलिए मैंने भाभी से कहा कि मुझे वहां पर कोई भी नहीं जानता इसलिए में वहां पर क्या करूंगा? आप ही चले जाओ। अब उन्होंने मुझसे कहा कि नहीं तुम भी मेरे साथ चलो और वो मुझे अपने साथ ले जाने के लिए दबाव देने लगी और फिर मैंने उनसे बहुत बार मना किया तब जाकर वो मान गई। फिर उन्होंने मुझसे सुजाता भाभी जो हमारे पड़ोस में रहती है उनको हमारे घर पर बुलाकर लाने के लिए कहा और में तुरंत पास में जाकर भाभी को हमारे घर पर बुलाकर ले आया। अब मेरी भाभी ने हमारी पड़ोसन भाभी से कहा कि में कुछ दिनों के लिए बाहर शादी में जा रही हूँ और मेरा वहां पर जाना बहुत जरूरी है, तुम मेरी इस मजबूरी को अच्छी तरह से समझती हो, इसलिए तुम क्या मेरे जाने के बाद विवेक की लिए उसके खाने का इंतजाम कर दोगी? अब सुजाता भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा कि कोई बात नहीं है, ऐसा सबके साथ चलता रहता है।

फिर वो मुस्कुराते हुए कहने लगी कि अगर आप भी मुझसे यह बात नहीं कहती तो भी में विवेक के लिए खाना बना देती और अगर हम लोग ही एक दूसरे के काम नहीं आयेंगे तो कौन आएगा? अब आप घर और विवेक की तरफ से बिल्कुल भी टेंशन ना ले और आप चली जाए, में आपके पीछे से सब कुछ ठीक तरह से सम्भाल लूंगी। अब विवेक भी मेरे साथ बहुत मज़े से खुश रहेगा, में अपनी तरफ से इसको कोई भी कमी नहीं आने दूंगी। फिर मेरी भाभी ने हमारी पड़ोसन को चाय बनाकर उसके साथ कुछ देर इधर उधर की बातें हंसी मजाक किया और उसके बाद वो उठकर चली गई। दोस्तों सच कहूँ तो में मन ही मन बहुत खुश था, क्योंकि मुझे मेरी पड़ोसन के साथ अकेले कुछ समय बिताने का मौका जो मिल गया था। अब में वैसे मन ही मन उसकी चुदाई के भी विचार बना रहा था और फिर मेरी भाभी उसके अगले दिन अपनी सहेली की शादी में चली गई। अब घर पर में अकेला था, कुछ देर बाद सुजाता भाभी ने मुझे मेरे घर पर आकर नाश्ता करने के लिए कहा और फिर में उनके घर पर चला गया। नाश्ता करने के कुछ देर बाद में अब अपने फ्लेट में जाने के लिए खड़ा हुआ ही था कि तभी सुजाता भाभी ने मुझसे कहा कि विवेक तुम वहां पर अकेले रहकर क्या करोगे? तुम भी यहीं पर मेरे साथ रहो में भी घर में अकेली ही हूँ।

दोस्तों सच कहूँ तो में भी यही बात सोच रहा था कि में वहां पर क्या करूँगा? भाभी के साथ रहूँगा तो मुझे इनके ज्यादा पास आने का मौका और हो सकता है कि उनकी चुदाई का भी मौका मिल जाए। यह बात मन ही मन सोचकर बहुत खुश था और मैंने उनकी उस बात के लिए तुरंत हाँ कह दिया। फिर में रुक गया और हम दोनों इधर उधर की बातें करने लगे और बातों ही बातों में कुछ देर बाद भाभी ने मुझसे पूछा कि तुम्हारी क्या कोई गर्लफ्रेंड है? मैंने भी मजाक करते हुए उनसे कह दिया कि भाभी अभी तो में बच्चा ही हूँ मेरी कोई गर्लफ्रेंड कैसे हो सकती है? और वो मेरा यह जवाब सुनकर हंसने लगी और पता नहीं क्यों? दोस्तों अब मुझे उनसे बातें करने में बिल्कुल भी झिझक नहीं हो रही थी और इसलिए मैंने थोड़ी हिम्मत करके घूरते हुए उनकी छाती की तरफ देखा। अब में देखता रहा, उनके बूब्स आकार में बहुत बड़े थे उनके बूब्स का आकार 38-29-36 था और वो हमेशा घर में ही रहती है और कसे हुए कपड़े पहनती थी, बड़े गले के कपड़ो से उनकी ब्रा हमेशा साफ नज़र आती। फिर जब वो हंस रही थी, तब मैंने उनसे पूछा कि भाभी आपका कोई बॉयफ्रेंड अब भी है या शादी से पहले कोई था? वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर एकदम चुप हो गयी और कुछ देर बाद वो मुझसे कहने लगी कि नहीं विवेक ऐसा नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो।

अब हम दोनों ने बहुत देर तक इधर उधर की बातें की और फिर हमने दोपहर और उसके बाद रात का खाना भी खा लिया, मुझे पूरा दिन उनके साथ खत्म हो जाने के बारे में पता ही नहीं चला और फिर रात को में अपने फ्लॅट में सोने के लिए जा ही रहा था कि तभी भाभी ने एक बार फिर मुझसे कहा कि तुम यहीं पर सो जाओ वैसे भी में आज अकेली हूँ और मुझे रात को अकेले में बहुत डर भी लगता है। फिर मैंने तुरंत उनको हाँ कह दिया, उन्होंने मुझे मेरे सोने के लिए कमरा दिखाया और फिर कहा कि अगर रात को तुम्हे पानी की प्यास लगे तो तुम मेरे कमरे में बिना किसी झिझक के आ जाना, क्योंकि फ्रीज़ वहीं उनके कमरे में रखा हुआ था। अब मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है और फिर में अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गया। दोस्तों वैसे मुझे रात को कभी भी प्यास नहीं लगती, लेकिन ना जाने क्यों उस दिन मुझे रात को प्यास लगी और में देर रात को उठकर भाभी के कमरे में चला गया। फिर मैंने देखा कि उस समय कमरे में थोड़ा अँधेरा था, इसलिए मैंने अपने मोबाइल की लाइट को चालू किया और मुझे तब फ्रीज़ मिल गया, उसके बाद मैंने फ्रीज़ से पानी की बोतल निकालकर पानी पिया और फिर मैंने वापस बोतल को अपनी जगह पर रख दिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर जैसे ही में फ्रीज़ को बंद कर रहा था कि मुझे पास में पलंग पर सो रही भाभी मुझे फ्रीज़ के बल्ब की रोशनी से नजर आ रही थी, लेकिन अचानक उसी समय मेरी नजर उनके गोरे बदन पर पड़ी। अब मैंने देखा कि वो उस समय मेक्सी पहनकर सो रही थी और उस मेक्सी से उनके नंगे गोरे गोरे पैर नजर आ रहे थे और में अपनी बहुत चकित नजर से घूरकर देख रहा था ओह भगवान उनके वो पैर कितने चिकने और गोरे थे? और फिर मेरी नज़र थोड़ा सा ऊपर होते हुए उनके बूब्स तक पहुंच गई, तब मैंने देखा कि उनकी छाती से मेक्सी खुली हुई है और उस वजह से उनकी ब्रा भी मुझे साफ नजर आ रही है, वो हॉट सेक्सी द्रश्य देखकर मुझसे रहा नहीं गया और में कुछ देर देखकर मज़े लेकर फ्रीज़ को बंद करके वापस अपने कमरे में चला गया। दोस्तों गोरी बाहर की तरफ उभरती हुई छाती को देखकर मेरा लंड हरकत में आकर खड़ा हो गया और अब में उनकी चुदाई करने की बात को सोचकर अपने कमरे से बाहर आ गया, लेकिन उनके कमरे पर जाते ही मुझे अब अच्छा नहीं लगा, क्योंकि में भी उन्हे अपनी भाभी की तरह मानता था। फिर यह बात सोचकर मेरे कदम उसी समय वहीं पर रुक गए और रात भर सपने में मुझे वो नज़र आई, रात को में उनके बारे में सोचकर देरी से सोया था और इसलिए सुबह मेरी नींद नहीं खुली और अब सुबह के दस बज रहे थे।

फिर भाभी ने मेरे कमरे में आकर मुझे उठने के लिए कहा, तब उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मेरी तबीयत तो ठीक है? मैंने उनसे कहा कि हाँ एकदम ठीक है, तब वो मुझसे पूछने लगी कि फिर तुम इतना देर से क्यों उठे? मैंने उनसे कहा कि मुझे पता नहीं भाभी आज नींद मुझे कुछ ज्यादा ही आई। फिर उन्होंने कहा कि चलो अच्छा है कि तुम आराम से सोए और अब उन्होंने मुझसे कहा कि तुम जल्दी से अपने घर में जाकर नहाधोकर आ जाओ उसके बाद हम साथ में बैठकर नाश्ता करेगे। अब मैंने कहा कि हाँ ठीक है, उनसे यह बात कहकर में अपने घर पर चला गया और अपने सभी कामों को करने के बाद में एक बार फिर से भाभी के घर पर आ गया। फिर उसके बाद हम दोनों ने साथ में बैठकर नाश्ता किया और बातें हंसी मजाक करते करते दोबारा से फिर वही रात आ गयी। अब भाभी ने दोबारा मुझे पिछली रात की तरह अपने ही घर में सोने के लिए कहा और वो मुझसे बोली कि तुम्हे प्यास लेगे तो मेरे कमरे में आ जाना और वो चली गई। अब मुझे रात को नींद नहीं आई और पानी लेने के लिए दोबारा में पिछली रात की तरह उनके कमरे में चला गया और फिर से वही पुराना द्रश्य देखकर मेरी नियत खराब होने लगी थी।

दोस्तों मुझे अब भी भाभी की चुदाई करने का मन कर रहा था, लेकिन में आगे बढने की हिम्मत नहीं कर सका। फिर में दोबारा से उनको देखकर अपनी नियत को खराब करके कुछ देर देखकर वापस अपने कमरे में आ गया। फिर अगले दिन फिर वही रात आ गई, में पानी पीने के लिए उनके कमरे में गया, लेकिन दोस्तों इस बार द्रश्य कुछ और ही था, आज भाभी ने मेक्सी के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। उस वजह से उनका एक बूब्स बाहर आकर साफ दिख रहा था। अब मेरा लंड वो नजारा देखकर तनकर खड़ा हो गया और आज पहली बार मेरा लंड इतने जोश में था कुछ देर बाद में अपने कमरे में चला गया और अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं गया। फिर मैंने पहली बार जिंदगी में मुठ मारकर अपने लंड को शांत किया और में ना जाने कब वो बातें सोचकर सो गया। फिर अगले दिन वही रात आ गई और भाभी ने मुझसे मुस्कुराते हुए कहा कि तुम्हे अगर प्यास लेगे तो तुम मेरे कमरे में आ जाना और वो मेरी तरफ देखकर हंसती हुई चली गई। दोस्तों ना जाने क्यों मुझे इस बार उनका मेरी तरफ हंसकर देखना मुझसे यह बात बोलना सीधा मेरे दिल पर जा लगा और मुझे आगे बढ़ने की हिम्मत आ गई। फिर करीब आधे घंटे के बाद में उठकर उनके कमरे में चला गया। अब मैंने देखा कि आज तो कमरे के अंदर का नज़ारा कुछ और ही था और आज भाभी ब्रा और पेंटी में थी।

अब मुझसे वो मनमोहक द्रश्य देखकर बिल्कुल भी रहा नहीं गया। मैंने कम रौशनी का बल्ब चालू किया, उनका पूरा बदन उस लाल रौशनी में पूरी तरह से लाल हो गया। अब मुझसे रहा नहीं गया, मैंने आगे बढकर भाभी की गोरी भरी हुई जांघे छुकर महसूस किया, लेकिन भाभी की तरफ से बिल्कुल भी विरोध कोई भी हलचल ना देखकर मेरी हिम्मत अब ज्यादा बढ़ गई और इसलिए में कुछ देर बाद आगे बढकर उनके बूब्स को छूने लगा। फिर में बूब्स को छूने के साथ साथ अब धीरे धीरे दबाने भी लगा, लेकिन तब भी भाभी वैसे ही बिना किसी हलचल के चुपचाप पड़ी रही। अब में ज्यादा आगे बढ़ा इस बार मैंने उनकी पेंटी में अपना एक हाथ डाल दिया और अब मैंने उनकी चूत को छूकर महसूस किया वो मेरा पहला अनुभव था। दोस्तों उस समय में किसी के बूब्स, चूत या उसके बदन को पहली बार हाथ लगा रहा था और इसलिए में बहुत खुश होने के साथ अब बहुत गरम भी हो गया और तब मैंने महसूस किया कि उनकी चूत भी गरम होने के साथ गीली चिकनी मुझे महसूस हो रही थी, लेकिन में अब भी भाभी की चुदाई करने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था और इसलिए मुझे अब ऐसा लगा कि अब आज के लिए बहुत हो गया और शायद में यहाँ पर ज्यादा देर तक रहा तो भाभी को मेरे इस काम के बारे में पता चल जाएगा।

फिर यह बात मन ही मन सोचकर में उनके पलंग से अपने कमरे की तरफ जाने के लिए उठा, लेकिन उसी समय अचानक से मैंने देखा कि भाभी ने मेरे हाथ को पकड़ लिए और वो बहुत ही धीमी आवाज़ में कहने लगी कि तुम मुझे इस तरह से गरम करके अब कहाँ जा रहे हो? अब मुझे ठंडा भी तो करो।

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दोस्तों उनके मुहं से यह बात सुनकर अब तो मुझसे एक मिनट भी नहीं रुका गया और में सीधे ही भाभी के नरम गुलाबी होंठो को चूसने लगा। अब मेरा एक हाथ उनके बूब्स पर और एक हाथ उनकी गरम गीली चूत में था। में अपनी ऊँगली से उनकी चूत की गहराई को नाप रहा था। फिर भाभी भी जोश में आकर मेरे होंठो को चूसने लगी और उसी समय उन्होंने मेरी पेंट के अंदर अपना एक हाथ डालकर मेरा लंड पकड़ लिया जो कि अब पूरी तरह से उनकी चूत में जाकर उनकी मस्त जमकर चुदाई करने के लिए बड़ा बेचैन था। फिर मैंने ज्यादा देर ना करते हुए तुरंत भाभी की ब्रा-पेंटी और जल्दी से अपने कपड़े भी उतार दिए, जिसकी वजह से अब में और भाभी पूरी तरह से नंगे हो चुके थे। अब में दोबारा उनके बूब्स को चूसने लगा। उसके बाद में उनकी चूत को भी चाटने लगा और वो एकदम से तड़प उठी, में कुछ देर उनकी प्यासी चूत को चूसता चाटता रहा। अब उन्होंने मेरे लंड को अपने मुहं में ले लिया और वो भी मेरा लंड लोलीपोप की तरह चूसने लगी और कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे मेरा लंड उनकी चूत में डालकर चुदाई करने का इशरा किया। फिर मैंने बहुत खुश होकर उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया और फिर क्या था? मेरा लंड 6 इंच का है, मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के मार मारकर अपना पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया और में चुदाई करने लगा।

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अब भाभी के मुहं से आह्ह्हह्ह्ह्ह उफफ्फ्फ्फ़ हाँ थोड़ा और ज़ोर से करो आईईईई वाह मज़ा आ गया, जाने दो पूरा अंदर तक की आवाज़ निकल रही थी और वो मुझसे कहने लगी, मुझे तुम्हारी चुदाई अच्छी लगी, तुम्हारे भैया को तो मेरे लिए बिल्कुल भी समय नहीं मिलता वो अपने कामों में लगे रहते है और में हमेशा प्यासी अपनी चुदाई के लिए तरसती रहती हूँ उफफ्फ्फ्फ़ आज तुम मुझे पूरी तरह से खुश कर दो, आह्ह्हह्ह में मर गयी अह्ह्ह्हह्ह हाँ ज़ोर से चोदते रहो। फिर इतना कहकर वो अपनी गांड को उठाकर मेरे धक्कों का जवाब भी देने लगी और में उनका जोश देखकर बहुत खुश होकर लगातार धक्के देता रहा। अब मेरा पूरा लंड उनकी गीली चूत को चीरता हुआ उनकी बच्चेदानी को छू रहा था, वो सबसे अलग मज़ा कभी ना भूलने वाला एक अहसास था। दोस्तों अब मैंने भाभी से कहा कि भाभी मेरा वीर्य अब निकलने वाला है, बताओ में अब क्या करूं इसको कहाँ निकालूं? तब उन्होंने मुझसे कहा कि तुम मेरे मुहं में ही अपना वीर्य निकाल दो और फिर मैंने लंड को उनकी चूत से बाहर निकालकर उनके मुहं में दे दिया। फिर उन्होंने मेरा लंड चूसना शुरू किया कुछ सेकिंड के बाद मैंने अपना पूरा वीर्य उनके मुहं में निकाल दिया और वो मेरा सारा माल गटक गई, कुछ देर बाद हम दोनों थककर एक दूसरे से चिपककर ना जाने कब सो गए। दोस्तों हम दोनों ने जब तक मेरी भाभी नहीं आई तब तक हर दिन किसी भी समय बहुत जमकर सेक्स का पूरा पूरा मज़ा लिया और हर बार भाभी ने मेरा पूरा साथ भी दिया, क्योंकि वो मेरी चुदाई से बहुत संतुष्ट खुश थी और मुझे पहली बार किसी चूत की चुदाई करने का मौका मिल रहा था, इसलिए में उसका फायदा उठाता चला गया। फिर मेरी भाभी आ गई और हमारा चूत मारने का वो सिलसला वहीं पर खत्म हो गया, हमें ऐसा कोई भी मौका नहीं मिला जिसका हम फायदा उठाकर चुदाई के मज़े ले सकते और फिर कुछ दिनों के बाद मेरे भाई और उसके पति भी वापस आ गए, लेकिन अब हम पहले जैसे शांत हो चुके थे ताकि किसी को हमारे ऊपर कोई भी शक ना हो। फिर में कुछ दिन वहां पर रुककर अपने घर दिल्ली वापस आ गया, लेकिन आने से पहले मैंने सुजाता भाभी से मिलकर उनको अपना फोन नंबर दे दिया। दोस्तों वो मुझे आज भी अपना सबसे अच्छा दोस्त मानती है और हम दोनों एक दूसरे से अपनी सभी तरह की बातें किया करते है ।।

धन्यवाद …

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