भूखी शेरनी की प्यास मिटाई

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प्रेषक : संजय …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम संजय है और मेरी उम्र 24 है। में चेन्नई का रहने वाला हूँ और कुछ समय पहले में अपनी पढ़ाई की वजह से घर से बाहर गया और एक बार चेन्नई की एक कॉलनी से मेरे पास मैल आया, वो एक लड़की का मैल था और वो मेरे साथ चुदाई के मज़े लेना चाहती थी और फिर मैंने उससे उसकी उम्र पूछी तो में सुनकर एकदम हैरान रह गया, क्योंकि वो 18 साल की लड़की थी। फिर मैंने उससे पूछा कि क्या इससे पहले भी क्या कभी अपने सेक्स किया है? वो कहने लगी कि नहीं। फिर उसने मुझे अपना फोन नंबर दे दिया और उसके घर का पता बताकर आने के लिए बोल दिया जहाँ वो रहती थी। फिर में उसके घर के आसपास पहुँच गया। उस समय दोपहर के 12 बज रहे थे और मैंने उसको मोबाइल लगाया, तब उसने मुझसे पूछा कि आप अभी कहाँ है? मैंने बताया कि में यहाँ पर हूँ। तो वो बोली कि आप वहीं रूको में अभी आती हूँ।

फिर करीब दस मिनट के इंतज़ार के बाद मेरा मोबाइल बज़ा और जैसे ही मैंने अपनी पेंट की जेब से मोबाइल को निकालकर बात करनी चाही फोन कट हो गया, मैंने फोन नंबर देखा तो वो उसी लड़की का ही मिस कॉल था। तभी मेरे सामने एक बहुत ही सुंदर गोरी नाज़ुक जींस टी-शर्ट पहने स्कूटी पर सवार एक 18 साल की लड़की रुकी उसने मुझसे पूछा क्या आप ही संजय है? मैंने तुरंत कहाँ कि हाँ, उसने मुझसे बोला कि मेरा नाम ऋतु है बैठो स्कूटी पर। अब में उसको बहुत ही हैरानी से देख रहा था वो बहुत ही कमसिन और नाज़ुक बिल्कुल परी की तरह थी। उसके बूब्स करीब 28 इंच के होंगे और थोड़े छोटे आकार के ऊँचे उठे हुए और गांड 30 इंच की थी। में उसके साथ गाड़ी पर बैठकर चल पड़ा। फिर कुछ देर बाद हम दोनों एक आलीशान बंगले के अंदर जाकर रुक गये मैंने देखा कि उसके घर पर उस समय कोई भी नहीं था उसने दरवाज़ा खोला और मुझसे अंदर आने को कहा, अंदर आते ही दरवाजा वापस बंद कर दिया, उसका घर बहुत ही बड़ा था में देखकर समझ गया कि यह किसी अमीर आदमी की बेटी है। में उसके कहने पर सोफे पर बैठ गया मैंने उससे पूछा कि तुम किस क्लास में पढ़ती हो? तो वो बोली कि प्लीज आप मुझसे कुछ नहीं पूछना वो किसी बहुत ही समझदार लड़की की तरह बात कर रही थी, तो मैंने बोला ठीक है। अब वो मुझे बहुत ही कामुक नजरो से देखने लगी वो मेरे सामने ही खड़ी थी वो मुझे लगातार देखे ही जा रही थी और उसके साँसे ज़ोर ज़ोर से चल रही थी।

फिर धीरे धीरे वो मेरे पास आई और लंबी साँस लेकर मेरे सामने वो घुटनों के बल बैठ गई। उसके बाद उसने दोनों हाथ मेरी जांघ पर रखकर अपना सर मेरी गोद में रख दिया। फिर मैंने बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ रखा, उसने एक लंबी साँस ली और अपना सर मेरी गोद में दबा दिया। उसकी दोनों आंखे बंद थी और उसकी सांसे ज़ोर ज़ोर से चल रही थी। उसने अपने होंठो को मेरे लंड पर पेंट के ऊपर से ही लगाते हुए अपना सर घुमाकर वो अपने गाल को मेरे लंड से रगड़ने लगी। वो अपने दोनों हाथ मेरी कमर से लपेटे हुए थी और वो बहुत ही गरम हो चुकी थी और लगातार अपने होंठ और गाल मेरी कमर के नीचे जांघो के पास और मेरे लंड पर रगड़ रही थी। में अपने हाथ उसके सर से होते हुए उसकी गरम मुलायम पीठ पर घुमा रहा था।

फिर करीब दस मिनट तक वो ऐसे ही मुझे चूमती रही। फिर मैंने उसके दोनों हाथ पकड़कर उसको उठाया तब भी उसकी आंखे बंद ही थी और उसके होंठ लगातार काँप रहे थे। मुझे उसकी वो हालत देखकर ऐसा लग रहा था मानो वो बरसों से सेक्स के लिए तड़प रही थी। उसकी साँसे तेज़ गति से चलने की वजह से और बहुत अधिक उत्तेजित हो जाने की वजह से उसका पूरा शरीर ढीला पड़ गया था और वो अब काँप रही थी। अब मैंने उसको बहुत प्यार से सोफे पर बैठाकर उसका सर अपनी बाहों में लेकर अपनी छाती से लगाया, उसके सर पर हाथ फिरते हुए उसके गाल को सहलाते हुए मैंने उसके होंठो पर अपने होंठो रख दिए। उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे वो नरम होंठो को में चूसने लगा। कुछ सेकिंड बाद वो भी मेरा साथ देने लगी और उसने एक हाथ मेरे सर के पीछे डालकर मुझे अपनी तरफ खींच लिया।

फिर करीब दस मिनट तक हम एक दूसरे को वैसे ही किस करते रहे। अब वो भी मुझे पूरी तरह जोश में आकर पूरा साथ देते हुए चूमने लगी। ऐसा करने में शायद उसको बड़ा मज़ा आ रहा था और कुछ देर बाद उसने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और वो मेरी छाती को चूमने लगी और पागलों की तरह प्यार करने लगी। फिर मैंने कुछ देर बाद अपने दोनों हाथों में उसका सर पकड़ लिया और अब मैंने उसको चूमना शुरू किया। में उसके होंठो से होते हुए उसकी गर्दन पर आकर चूमने लगा और मैंने उसके कान को अपने मुहं में भर लिया। में कान को चूसने चूमने लगा और ऐसा करते ही वो मछली की तरह तपड़ उठी और उसके बाद मैंने गर्दन से होते हुए उसके बूब्स पर अपने होंठ लगा दिए और में अपने एक हाथ से उसके एक बूब्स को मसलने लगा और उसके दूसरे बूब्स पर मैंने अपने होंठ लगाए हुए थे, जिसकी वजह से वो बहुत गरम होकर उत्तेजित हो गयी।

फिर कुछ देर बाद वो एकदम झटके के साथ मुझसे अलग हुई और पूरी तरह जोश में आकर एक ही झटके में उसने अपनी टीशर्ट को निकाल फेंका जिसकी वजह से वो अब मेरे सामने गुलाबी रंग की ब्रा में थी और उसने झटके से बिना हुक खोले ही तेज खींचकर अपनी ब्रा को भी निकाल दिया। उस ब्रा के निकलते ही मेरी आखों के सामने वो मनमोहक द्रश्य था जिसको में किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता। वाह क्या ग़ज़ब के बूब्स थे उसके जो एक ही बार में उछलकर उसकी बार से बाहर निकलकर मेरे सामने आ गये वो एकदम दूध जैसे सफेद रंग के थे। उसकी निप्पल हल्के गुलाबी रंग की थी और में वो सुंदर आकर्षक बूब्स उसकी निप्पल को देखकर एकदम हैरान हो गया, वो बहुत जल्दी में थी ब्रा को उतारते ही वो कुछ सेकिंड रुकी और मुझे अपनी लाचार नजरो से देखने लगी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब एक हाथ से उसने अपने एक बूब्स को पकड़ा और अपना एक हाथ उसने मेरी तरफ बढ़ाकर मेरे सर को पीछे से पकड़कर तेज़ी से अपनी तरफ खींचा और दूसरा हाथ जिसमे वो अपना बूब्स पकड़े हुए थी उस बूब्स को मेरे मुहं के पास लाकर एकदम से अपने बूब्स का निप्पल जबरदस्ती उसने मेरे मुहं में डाल दिया। निप्पल मेरे मुहं में जाते ही उसने एक गहरी साँस ली और मेरा सर ज़ोर से वो अपनी छाती पर दबाने लगी। अब में भी जोश में आकर उसके निप्पल को ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था। हम अभी भी सोफे पर बैठे थे और वो मेरी गोद में दोनों तरफ पर डालकर बैठी थी। अब उसने अपने हाथ में दूसरा बूब्स लिया और मेरे मुहं में से अपना पहला बूब्स बाहर निकालकर दूसरा बूब्स उसने मेरे मुहं में डाल दिया जिसकी वजह से में अब उसका दूसरा बूब्स चूसने लगा। मेरे ऐसा करने से उसको बहुत मस्त मज़ा आ रहा था।

फिर मैंने उसके बूब्स को चूसते हुए उसकी जींस के बटन खोल दिए और अब मैंने अपने दोनों हाथ उसकी गांड पर बांधते हुए उसको मजबूती से पकड़कर निप्पल को मुहं में लिए ही में खड़ा हो गया, उसको मैंने किसी छोटे बच्चे की तरह अपनी गोद में लेकर खड़ा रखा और में उसके बूब्स को चूस रहा था। फिर में कुछ देर बाद ऐसे ही घूम गया और सोफे की तरफ मुहं करके उसको सोफे पर मैंने सीधा लेटा दिया, लेकिन में अभी भी अपने मुहं में उसका निप्पल लिए हुए था। ऐसे ही उसके बूब्स को चूसते हुए मैंने उसकी पेंट को खींचकर उतार दिया और अब बो मेरे सामने बस पेंटी में थी। मैंने उसके बूब्स से अपना मुहं हटाकर उसकी नाभि से होते हुए उसकी चूत पर पहुंचकर मैंने अपने होंठ रख दिए और उसकी चूत पर होंठ रखते ही उसने अपनी गांड को बहुत ऊपर तक उठा दिया। अपने दोनों पैरों के सहारे वो अपनी गांड को ऊपर उठाए हुए थी और वो उस समय ऐसी लग रही थी मानो वो मुझसे कह रही हो कि खा जाओ तुम मेरी इस चूत को, में कुछ देर तक पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूमता रहा।

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फिर मैंने उसकी पेंटी को खींचकर उतार दिया। उसकी एकदम नंगी चूत को देखकर में बिल्कुल मस्त हो गया वाह क्या मस्त चूत थी, उस पर एक भी बाल नहीं था और वो बहुत फूली हुई बिल्कुल ब्रेड की तरह मलाई मुलायम एकदम कुंवारी चूत मेरे सामने थी, जिसको देखकर में चकित होकर अपने होश खो बैठा। अब मैंने उसकी चूत के मुहं पर हाथ लगाकर देखा तो वो झड़ चुकी थी और उसकी चूत से गरम चिकना पानी बाहर आकर बहने लगा था और फिर मैंने उसके दाने पर हाथ लगाया जिसको हाथ लगाते ही उसने मेरे दोनों हाथ ज़ोर से पकड़ लिए। में फिर भी उसके दाने से खेलता रहा और उसको सहलाता रहा तब उसने अपने नाख़ून मेरे हाथों में गड़ा दिए जिनसे खून निकलने लगा, लेकिन में तब भी नहीं रुका और में उसकी चूत के दाने को सहलाता मसलता ही रहा। अब उसने जोश में आकर मेरे सर के बाल ज़ोर से पकड़ लिए वो बिन पानी की मछली की तरह मचल रही थी और उसके मुहं से आईईईईइ सीईईईई की बहुत तेज आवाज़ निकल रही थी और बार बार वो अपने कूल्हों को ऊपर उठा रही थी, जिसकी मतलब यह था कि जब में उसके दाने को घिस रहा था। तब उसको सहन करना मुश्किल हो रहा था इसलिए उससे रहा नहीं गया, लेकिन उसकी वो तकलीफ़ बड़ी मीठी तकलीफ़ थी उसको तकलीफ़ तो हो रही थी, लेकिन उसका मज़ा भी उसको बहुत आ रहा था।

अब उसने अपने दोनों हाथों से मेरी पेंट के बटन खोले और पेंट को नीचे सरका दिया। में उससे अलग हुआ और तेज़ी से अपनी पेंट और अंडरवियर को निकालकर अलग कर दिया। अंडरवियर को उतारते ही मेरा लंबा मोटा लंड बाहर आकर हवा में लहराने लगा और उस समय मेरा लंड देखकर वो उठकर सोफे पर अपने दोनों घुटनों को मोड़कर बैठ गई और झट से उसने लपककर मेरा लड अपने हाथ में ले लिया वो कुछ देर मेरे लंड को प्यार से दुलारती रही अपने नरम हाथों को लगातार ऊपर नीचे करके मुठ मारती रही जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा मेरे लंड को जोश आने से वो अब हल्के हल्के झटके देने लगा था। फिर धीरे धीरे वो अपना मुहं मेरे लंड के पास ले आई और अपने नरम गुलाबी होंठ उसने मेरे लंड पर रखकर वो अब होंठो को लंड पर फेरने लगी और लंड को प्यार करने लगी।

फिर उसके बाद झट से लपककर पूरा लंड अपने मुहं में ले लिया। वो पागलों की तरह मेरा लंड चूस रही थी, जिसकी वजह से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर करीब दस मिनट तक मेरे लंड को चूसने के बाद उसने मेरा लंड अपने मुहं से बाहर निकाला और मेरा लंड हाथ में पकड़े हुए अपना हाथ नीचे ले गई उसके बाद मेरा लंड अपनी चूत से रगड़ने लगी और कुछ देर के बाद वो सिसकियाँ लेते हुए मुझसे बोली ऊउफ़्फ़्फ़्फ़ आह्ह्ह्ह प्लीज अब इसको जल्दी से अंदर डाल दो, इसके लिए में कितने दिनों से तरस रही हूँ। अब मुझसे बिल्कुल भी सहा नहीं जाता, प्लीज जल्दी से अंदर डाल दो। फिर मैंने उससे कहा कि तुम्हे थोड़ा सा दर्द सहना होगा। तुम उसको सहन कर लेना, क्योंकि अब मुझसे भी ज्यादा देर रुकना बड़ा मुश्किल है, में अब तुम्हारी चूत को वो मज़े देने जा रहा हूँ जिनको भुला पाना तुम्हारे लिए एकदम मुश्किल है तुम यह चुदाई सदा याद रखोगी लो अब तैयार हो जाओ।

फिर वो खुश होकर कहने लगी हाँ तुम मेरे इस दर्द कि बिल्कुल भी चिंता मत करो मेरे लिए मेरी सेक्स की तपड़ से ज्यादा कोई दर्द नहीं है, प्लीज जल्दी डाल दो ना, क्यों तुम मुझे इतना परेशान कर रहे हो? में उसकी तरफ देखकर हल्का सा मुस्कुराया और उसके बाद मेरे लंड ने अपना रास्ता तलाशा और चूत के दरवाजे पर आकर एक जोरदार धक्का दिया। लंड की उस ठोकर की वजह से उसको बड़ा तेज दर्द हुआ और उस दर्द की वजह से वो चीख पड़ी उसकी चीख पूरे कमरे में गूँज गई जिसको सुनकर में रुक गया। अभी मेरा लंड बस तीन इंच ही अंदर गया था और मुझे पता था कि मुझे कैसे आराम आराम से उसकी चुदाई का यह काम पूरा करना है? तभी मैंने महसूस किया कि उसकी चूत से खून निकलने लगा था, लेकिन मैंने उसको नहीं बताया और मैंने बड़े ही प्यार से उसको किस किया और उसके शांत होने का वैसे ही इंतज़ार करने लगा। कुछ देर बाद उसके चेहरे पर कुछ शांति देखकर मैंने उसको चूमते हुए धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किए। अब मेरे लंड बहादुर ने उसकी चूत में और अंदर जाने का अपना पूरा रास्ता बना लिया था। में उसकी कसी हुई चूत की चुदाई करके बहुत जोश में था और शायद यह चूत इससे पहले भी चुदाई का मज़ा चख चुकी थी, लेकिन मेरा लंड इसके लिए मोटा था।

अब करीब मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर जा चुका था और में लगातार धक्के मार रहा था, जिसकी वजह से अब उसको भी मज़ा आने लगा था। वो भी नीचे से अपनी गांड को ऊपर उछाल रही थी और वो पागलों की तरह मचल रही थी और अपनी गांड को ऊपर उठाकर अपनी गांड को घुमा भी रही थी। में तुरंत समझ गया कि वो मेरे लंड का अहसास अपनी चूत की सभी दीवारों पर छूकर मज़े ले रही है। दोस्तों ऐसी भूखी शेरनी भी बहुत कम मिलती है, मुझे भी उसके साथ यह सब करने में पूरा आनंद आ रहा था और में ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और वो भी अपनी दोनों आखों को बंद किए मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी। फिर करीब बीस मिनट तक चुदाई करने के बाद वो मुझसे कहने लगी कि मुझे अब तुम्हारे ऊपर आना है। मैंने उसको अपनी बाहों में जकड़कर सोफे पर पलटी मारी जिसकी वजह से अब वो मेरे ऊपर थी कुछ देर वो रुकी और चूत के अंदर मेरे लंड को अपनी गांड को हिलाकर फ्री किया और फिर वो शुरू हो गई।

फिर मैंने उसकी पतली कमर को अपने दोनों हाथों का सहारा देकर उसकी चुदाई का काम करना शुरू किया। वो लगातार ऊपर नीचे होने लगी और में उसके कूल्हों को धीरे धीरे सहलाते हुए उसका जोश बढ़ता गया। दोस्तों अब वो पागलो की तरह पूरी तरह जोश में आकर मेरे लंड के ऊपर उछलते हुए आगे पीछे हो रही थी उसके मुहं से वो आह्ह्ह्ह सीईईईईइ की आवाज़ तेज होती गई और फिर कुछ देर बाद उसने अपनी स्पीड को पहले से ज्यादा बढ़ा दिया और उसके मुहं से अजीब अजीब आवाजें निकलने लगी सीईईईई आह्ह्ह्ह हुम्म आह्ह्ह्ह वो और भी तेज़ी से आगे पीछे होते हुए शायद अब झड़ने वाली थी और ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे होते हुए आहहह आईईईइईई वो इतनी ज़ोर से चिल्लाई कि में इधर उधर देखने लगा। उसको बड़ा जबर्दस्त मज़ा आया और उसकी सारी भड़ास उसकी चीख के साथ ही निकल गई। मतलब मैंने उसका काम दिल से किया और उसने भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। अब वो कुछ शांत हो गई और उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई। वो ऐसे ही मेरा लंड उसकी चूत में डाले हुए मेरी छाती पर मादक अंदाज से मुस्कुराते हुए मुझसे चिपक गई। उसके चेहरे पर मुझे वो संतुष्टि साफ साफ नज़र आ रही थी जैसे उसको आज अपने जीवन की सारी खुशियाँ मिल गई हो और में बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ फेरने लगा। फिर कुछ देर बाद उसने घड़ी की तरफ देखा तो उसमें चार बज रहे थे।

फिर वो मुझसे कहने लगी कि 6 बज़े मेरी मम्मी, पापा वापस आ जाएगें। तो में तुरंत समझ गया कि मुझे जल्दी अपना यह काम पूरा खत्म करके यहाँ से निकलना होगा यह बात सोचकर मैंने उसको अपनी बाहों में जकड़कर उसके बाद पलटी मारी मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में था मैंने उसको एक बार फिर से चूमना शुरू कर दिया और में धक्के भी मारने लगा था, जिसकी वजह से वो जोश में आकर एक बार फिर से तैयार हो गई। उसको भी बड़ा मस्त मज़ा आने लगा और मैंने उसको करीब 30 मिनट तक चूमते हुए धक्के देकर चोदा और अपने वीर्य को उसकी चूत में लंड को अंदर बाहर करके निकालना शुरू किया और उसके बाद लंड को बाहर कर लिया और अपने ढेर सारे वीर्य को उसकी चूत के ऊपर और जांघ पर गिर दिया। अब मैंने उसकी तरफ देखा तो वो मेरी तरफ मुस्कुराने लगी और बोली कोई बात नहीं में साफ कर लूँगी। कुछ देर हम दोनों बाहों में बाहें डाले वैसे ही लेटे रहे उसके बाद हम उठे और बाथरूम में जाकर साफ करके कपड़े पहने।

फिर मैंने देखा कि वो बहुत खुश थी वो मुझसे बोली कि सच संजय जितना मज़ा तुमने मुझे दिया शायद जिंदगी में और कोई कभी नहीं दे सका, में तुम्हें कभी नहीं भूल सकती तुमने मुझे बड़ा मस्त मज़ा देकर पूरी तरह से खुश कर दिया है। अब मैंने उससे बोला कि याद रखना हो तो बस इस मज़े को याद रखना, लेकिन मुझे और मेरा मोबाइल नंबर याद नहीं रखना, हमारा बस यहीं तक का सम्बंध है, क्योंकि तुम्हारी सुरक्षा मेरे लिए बहुत ज़रूरी है। में जिंदगी में कभी किसी को मेरी वजह से परेशान नहीं होने देना चाहता। फिर मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो मुस्कुराई और उसने मेरा माथा चूमा और उसने फिर मुझे मेरे हाथ में एक लिफ़ाफ़ा दिया, जिसमे रुपये थे और उस समय 5:30 बज रहे थे। मैंने भी उसको किस किया और फिर में वहां से अपने घर के लिए निकल गया। वो दरवाजे पर खड़ी मुझे जाते हुए देखती रही, लेकिन मैंने उसको मुड़कर नहीं देखा ।।

धन्यवाद …

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