बर्थ-डे पार्टी और रंडियों का नाच

0
Loading...

प्रेषक : कुसुम …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम कुसुम है और मेरी पिछली स्टोरी “कॉलेज टूर” आपने पड़ी होगी। अब में अपने बारे में आपको दुबारा से बता देती हूँ। मेरा नाम कुसुम है, में कॉलेज में Ist ईयर आर्ट्स में पढ़ती हूँ, मेरी फिगर साईज 34-28-34 है। हमारे घर में मेरे मम्मी, पापा और भैया है, मेरी उम्र 19 साल है, रंग गोरा, चूची गोल है। दोस्तों में उस दिन तीन लोड़ो से चुदवाकर 6 बजे घर पहुँची, अब मेरी टांगे बहुत दुख रही थी और मेरा शरीर टूट रहा था, लेकिन मुझे मज़ा बहुत आया था। मेरी एक सहेली है हेमा, में उससे सारी बात शेयर करती हूँ, उसका बर्थ-डे 18 जून को था। फिर में उसके घर गयी तो वो तैयार हो रही थी। फिर मैंने उसे विश किया, वो बहुत खूबसूरत लग रही थी।

में : चलो पार्टी दो आज बर्थ-डे गर्ल, ऐसे ही नहीं तेरी जान छूटने वाली।

हेमा : पार्टी में तुम्हें शाम को दूँगी मेरी जान, अभी तो मैंने किसी और को पार्टी देने जाना है।

में : साली तेरा कहीं चुदने का प्रोग्राम तो नहीं है।

हेमा : हँसते हुए बोली कि हाँ आज में हमारे पुराने यारो को पार्टी देने जा रही हूँ राजेश, जितेन्द्र, समीर और संदीप (इन चारों से हम दोनों ही चुद चुकी थी)

में : क्या मुझे अपनी पार्टी में नहीं बुलाओगी?

हेमा : कमिनी, तू मुझे कभी अपने साथ ले जाती है, बाकि उनसे पूछ ले।

फिर मैंने जितेन्द्र को फोन किया, में गुस्से में तो थी ही।

जितेन्द्र : हाँ कुसुम।

में : कुसुम के बच्चे, अब मेरी चूत में काँटे आ गये क्या? पहले तो बड़ी जान-जान करते थे।

जितेन्द्र : क्या हुआ यार?

में : मुझे पहले ये बताओ मुझे हेमा की पार्टी में क्यों नहीं बुला रहे हो?

जितेन्द्र : ये बात है, तुम्हें कौन रोक सकता है? अच्छा है तुम दो होगी तो और ज़्यादा मज़ा आएगा।

में : ओके में आ रही हूँ आकर तुम सबको पूछती हूँ।

फिर तब हेमा बोली कि तो चल रही है मेरे साथ। में बोली कि हाँ और फिर में उसके बाथरूम में दुबारा से नहाकर आई और उसकी साड़ी बांध ली, मेरे उसका ब्लाउज टाईट था। फिर हेमा बोली कि साली दबवा-दबवाकर इतनी बड़ी कर ली, अब ब्रा उतारकर पहन ले, तो मैंने खाली ब्लाउज पहन लिया। फिर हेमा बोली कि पेंटी भी उतार दे, हरामजादी ऐसे सज रही है जैसे साली दुल्हन हो। तब मैंने कहा कि रानी दुल्हन भी लंड के लिए जाती है और में भी उसके लिए जा रही हूँ। फिर उसने स्कर्ट टॉप डाला और फिर हमने स्कूटी उठाई और जितेन्द्र के फ्लेट पर पहुँच गयी। अब जितेन्द्र हमें बाहर ही मिल गया था। फिर हम स्कूटी अंदर ले गये। फिर वो हमें हॉल में ले गया, अब वहाँ वो तीनों थे और एक टेबल पर छोटा सा केक और कुछ खाने का सामान रखा था और हल्का सा म्यूज़िक था और एक तरफ 3-4 टेबल जोड़कर बड़ी टेबल बना रखी थी।

फिर सबने हेमा को गले लगाकर विश किया। फिर राजेश बोला कि आज तो तुम दोनों ही बड़ी स्मार्ट लग रही है। फिर मैंने पूछा कि यार यह टेबल क्यों लगा रखी है? तो वो हँसने लगे और बोले कि यहाँ पर 2 रंडियाँ नाचेगी। फिर तब में बोली कि पहले तो अकेली हेमा को बुला रहे थे। तब वो बोला कि कोई बात नहीं, अब दो हो गयी है। फिर हेमा ने केक काटा, अब हम उसको केक खिला रहे थे। फिर जब समीर की बारी आई, तो हेमा ने अपना मुँह आगे किया, तो उसने केक वापस ले लिया और अपनी पैंट की चैन खोलकर अपना बाहर लंड निकाला और उससे बोला कि पहले इसकी हैप्पी बर्थ-डे कबूल कर और केक अपने लंड पर लगा लिया, तो तब हेमा बोली कि क्यों नहीं? यही तो हमारा राजा है, पहले इसकी विश कबूल करती हूँ और नीचे बैठकर उसके लंड को चूस-चूसकर साफ कर दिया।

फिर में बोली कि काश मेरा भी बर्थ-डे होता। तो तब जितेन्द्र मुझे पकड़कर मेरे गाल पर किस करते हुए बोला कि तेरा भी मनाते है और फिर राजेश बोला कि शुरू करे। तब में बोली कि क्या करना है? तो वो बोला कि स्टेज पर नाचकर दिखाना है। तब में बोली कि यार पहले एक बार मेरी चुदाई कर दो। तो वो बोले कि नहीं और एक लोकल हरियानवी सेक्सी गाना लगा दिया और मुझको और हेमा को गोदी में उठाकर टेबल पर खड़ा कर दिया। फिर हम दोनों खड़ी रही, तो तब जितेन्द्र बोला कि क्या हुआ? तो में बोली कि यार शर्म आती है। तब राजेश बोला कि कुतिया रांड नाचते शर्म आती है, चुदते शर्म नहीं आती। तो तब समीर बोला कि यार हम सबका क़ब से देखने का मूड था, तुम्हारे होते हुए हमें और कहीं जाने की क्या जरूरत है? प्लीज यार।

Loading...

फिर तब हेमा बोली कि लेकिन हमें नाचना तो नहीं आता। तो तब संदीप बोला कि क्यों जितेन्द्र की बहन की शादी में तो खूब चूतड़ मटकाए थे? फिर हेमा ने मेरी तरफ देखा तो तब में बोली कि इनके लंड लगे हुए है ना इनकी बात तो माननी पड़ेगी और फिर हम दोनों नाचने लगी। अब वो अपने कपड़े उतारकर हमें देख रहे थे। फिर जितेन्द्र बोला कि हरामजादियों डांस करते-करते एक दूसरे के कपड़े उतारती जाओ। अब मैंने हेमा की स्कर्ट टॉप निकाल दिया था और फिर उसने मेरी साड़ी खींची। अब वो ब्रा पेंटी में और में पेटीकोट ब्लाउज में थी। फिर में डांस बंद करके नीचे आई और समीर का लंड अपने मुँह में ले लिया। तब समीर के मुँह से आह निकला और फिर साली हेमा भी नीचे आई और जितेन्द्र के लंड की मालिश करने लगी थी। अब हम सब पूरी तरह से गर्म हो चुके थे। अब राजेश मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरी चूचीयाँ दबाते हुए हुक खोल रहा था। अब में पागलों की तरह लंड आगे पीछे कर रही थी। अब राजेश का लंड मेरे हाथ में था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर 1-2 मिनट के बाद ही समीर ने अपने लंड की पिचकारी मेरे मुँह और चूचीयों पर मार दी, तो समीर के हटते ही राजेश ने मेरे मुँह में अपना लंड दे दिया। अब उधर संदीप का पानी निकल चुका था। अब जितेन्द्र हेमा के मुँह में और राजेश मेरे मुँह में जंगलियों की तरह धक्के मार रहे थे और फिर जल्दी ही वो भी झड़ गये। तब में बोली कि अब हमारा क्या होगा? फिर वो हमें गोदी में उठाकर बेडरूम में ले आए। अब में जितेन्द्र के गले में लटकी पड़ी थी। फिर जितेन्द्र मेरे गालों पर किस करता हुआ बोला कि तुम दोनों जब जाओगी, तो तब तुमसे चला भी नहीं जाएगा। फिर उन्होंने हम दोनों को बेड पर पटका और फिर संदीप मेरी और राजेश हेमा की टाँगो के बीच में आ गये और फिर वो दोनों हमारी चूत चूसने लगे थे। अब हमारे मुँह से श ऑश की आवाजे निकल रही थी। अब मेरे मुँह में समीर का लंड था।

Loading...

फिर समीर मेरे मुँह में धक्के मारता हुआ हेमा से बोला कि यार हम चारों ने तेरे लिए एक गिफ्ट सोचा है, लेकिन तुम्हें दर्द होगा। तब हेमा बोली कि क्या है गिफ्ट? तो तब जितेन्द्र बोला कि तुम सहने को तैयार हो तो बताए। तब हेमा कुछ इस तरह बोली कि देखो तुम हम दोनों को रंडी कह बुलाते हो ना तो फिर हमें रंडी की तरह ही यूज़ करो, हम दोनों हरामजादियाँ चीखे, रोए, कोई परवाह मत करो, क्यों कुसुम ठीक है ना, वैसे क्या करने वाले हो तुम? तो तब में बोली कि बिल्कुल सही। तब समीर बोला कि देखती जाओ। अब में झड़ने वाली थी और बोल रही थी खा जाओ मेरी चूत को। अब इधर समीर का लंड भी खड़ा हो चुका था और फिर थोड़ी देर में ही में और हेमा शांत पड़ गयी और लंबी-लंबी साँसे ले रही थी। फिर एकदम से समीर को पता नहीं क्या हुआ? और उसने हेमा के बाल पकड़कर उसको खड़ी करते हुए बोला कि साली हरामजादी सोने आई है, चल मादरचोद खड़ी हो, तो हेमा खड़ी हो गयी। अब जितेन्द्र नीचे लेटा था और फिर समीर बोला कि चल बैठ इस पर।

अब हेमा जितेन्द्र की तरफ अपना मुँह करके बैठने लगी थी। तब जितेन्द्र बोला कि ऐसे नहीं मेरे पैरो की तरफ अपना मुँह कर, तो हेमा दूसरी तरफ अपना मुँह करके उसके लंड पर बैठ गयी। अब धीरे-धीरे जितेन्द्र का पूरा लंड उसकी चूत में था। फिर राजेश ने हेमा की दोनों टांगे खींचकर उसकी चूची की तरफ मोड़ दी। अब हेमा जितेन्द्र के ऊपर दोहरी हुई पड़ी थी और अब उसकी चूत ऊपर की तरफ हो गयी थी और जितेन्द्र नीचे से लगा हुआ था। फिर समीर ने अपने लंड पर थूक लगाकर जितेन्द्र को रोकते हुए अपना लंड भी उसकी चूत के साथ सटा दिया तो हेमा चौक पड़ी और बोली कि ये क्या? पागल हो गये हो क्या? और फिर उसने उठने की कोशिश की, लेकिन उठ नहीं सकी। अब में भी समझ गयी थी कि इसकी चूत में दोनों के लंड जाएगे। फिर तभी समीर ने एक धक्का मारा तो वो बुरी तरह से चीखी हाईईईई माँ, आआआअ, अब उसकी आँखो में पानी आ गया था।

फिर राजेश ने उसकी दोनों टांगे चौड़ी कर दी तो तभी समीर ने एक और धक्का मारा तो उसका लंड और अंदर तक चला गया था। अब उसकी चूत का छेद डबल हो गया था। अब वो पागलों की तरह चीख रही थी आह माँ बचाओं, फाड़ दी मेरी चूत। तब जितेन्द्र बोला कि हरामजादी, रंडी तूने ही कहा था ना कि हम दोनों रंडिया है, हमें रंडी की तरह यूज़ करो, हम रोए या चीखे, लेकिन बिना परवाह किए चोदते जाना, क्यों अब कैसा लग रहा है? हमने कहा था ना तुम दोनों जब जाओगी तो अपनी टांगे चौड़ी करके चलोगी। फिर में उठकर भागने लगी तो संदीप ने मुझे पकड़ लिया और बोला कि रांड भागती कहाँ है साली? और मुझे पकड़कर मेरी चूचीयाँ चूसने लगा था। अब हेमा का चीखना कम हो गया था और अब सटासट लंड अंदर बाहर हो रहे थे। अब आह, ऊहहहहह की आवाज़े निकल रही थी, अब मेरी बारी थी।

फिर संदीप ने मुझे थोड़ा टेढ़ा लेटाया और पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया। फिर राजेश ने मेरे बराबर में लेटकर मेरी चूत में अपना लंड लगाया और बोला कि रेडी और में ना-ना करती रही, लेकिन उसने जोरदार धक्का मारा तो मुझे ऐसा लगा कि मेरी चूत को चाकू से कोई चीर रहा है। अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन उन्हें कोई तरस नहीं आ रहा था। अब मेरे भी धक्के पर धक्के पड़ रहे थे। अब में सैंडविच बनी हुई थी और फिर दर्द के साथ-साथ मुझे मज़ा भी आता गया। फिर जितेन्द्र हेमा से बोला कि कैसे लगा बर्थ-डे गिफ्ट? तो तब वो बोली कि अपनी हरामजादी को आज मारना था क्या जान? तो तब जितेन्द्र बोला कि लंड से कोई लड़की नहीं मरती है। फिर थोड़ी देर के बाद मेरा भी पानी निकल गया और मेरी चूत गीली हो गयी तो तब मुझे कुछ आराम मिला। अब हर 3-4 धक्को बाद में अपना पानी छोड़ देती थी और बोलती कि ज़ोर से करो। पहले जितेन्द्र झड़ा और फिर उसके बाद समीर, राजेश, संदीप झड़ गया। अब हम दोनों पड़ी थी और हमारी चूत में से खून और पानी आ रहा था। अब हम दोनों को बहुत मज़ा आया था और फिर हमने खूब मजे किए ।।

धन्यवाद …

Comments are closed.

error: Content is protected !!