चाची की चूत का चबूतरा

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प्रेषक : मनोज …

हैल्लो दोस्तों, यह मेरे गाँव की एक दोस्त की कहानी है, जो में आज आप लोगों के साथ शेयर रहा हूँ, मुझे उम्मीद है आपको मेरी यह स्टोरी बहुत पसंद आएगी। अब में आपको ज्यादा बोर ना करते हुए सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ। अजीत अपनी 15 साल की उम्र में अनाथ हो गया था। अजीत को उसके चाचा चाची ने अपने गाँव में ले जाकर पाल पोसकर बड़ा किया था। उसके चाचा चाची को शादी के कई साल के बाद भी कोई संतान नहीं थी। अजीत के पिताजी के हिस्से में जमीन थी, लेकिन उसको कोई दूसरा आदमी जोतता था। अजीत के चाचा को अजीत के हिस्से की जमीन पर ज़्यादा इंटरेस्ट था और अजीत पर कम था। उसकी चाची बहुत कोमल हृदय की औरत थी और वो अजीत का हर तरह से देखभाल किया करती थी।

फिर बाद में अजीत को पता चला कि उसकी चाची को उससे प्यार भी था। अजीत के चाचा चाची एक छोटे से एक कमरे के मकान में रहते थे, वो हॉल में सोता था। उसकी चाची कमरे के अंदर सोती थी और उसका चाचा बाहर बरामदे में सोता था, क्योंकि अंदर कमरे में बहुत गर्मी हुआ करती थी। फिर एक रात अजीत को गर्मी से परेशान होने पर नींद नहीं आ रही थी। तो तब उसने देखा कि उसका चाचा उठकर चुपचाप उसकी चाची के कमरे में जा रहे है। फिर चाचा अंदर कमरे में जाकर चुपचाप चाची के पास लेट गये और धीरे से उनको जगा दिया। उन लोगों ने अपने कमरे का दरवाजा बंद नहीं किया था, क्योंकि वो लोग सोच रहे थे कि अजीत अपनी गहरी नींद में सो रहा होगा। अब कमरे में एक हल्की सी लाईट जल रही थी और उसकी रोशनी में अजीत को कमरे के अंदर का सब कुछ साफ-साफ दिख रहा था।

फिर चाचा ने जमीन पर चाची के पास बैठकर उनके कपड़ो को उतारना शुरू कर दिया। अब उन्होंने पहले चाची के ब्लाउज को और फिर ब्रा को उतार दिया था। फिर चाची खड़ी हो गयी। अब अजीत अपनी चाची की नंगी चूचीयों को देख रहा था। फिर उसके चाचा चाची की साड़ी को उठाकर उसके अंदर घुस गये और कुछ करने लगे थे। अब चाची उसके चाचा का साड़ी से ढका सिर पकड़कर अपनी कमर हिला रही थी।  फिर चाची धीरे से अपनी साड़ी उतारकर पूरी तरह से नंगी हो गयी। तो तब अजीत को यह देखकर बहुत हैरानी हुई कि उसका चाचा अपनी बीवी की चूत पर अपना मुँह लगाकर उसकी झांटो से भरी चूत चाट रहा है। फिर कुछ मिनटों के बाद चाचा ने अपनी बीवी को अपने पास जमीन पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गये थे। फिर ऊपर चढ़ने के बाद चाचा अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगे। अजीत ने पहले से ही सेक्स के बारे में सुन रखा था, लेकिन आज वो पहली बार चूत की चुदाई देख रहा था।

फिर जल्दी ही उसके चाचा शांत हो गये और फिर थोड़ी देर के बाद उठकर बाहर बरामदे में सोने के लिए चले गये। फिर चाची थोड़ी देर के बाद कुछ बड़बड़ाकर बाथरूम में गयी और फिर नंगी ही वापस आ गयी। अब चाची नंगी ही अपने बिस्तर पर लेटकर अपने पैरों के बीच में कुछ करने लगी थी। अब उनका हाथ अपने पैरों के बीच में बहुत ज़ोर-ज़ोर से हिल रहा था और फिर थोड़ी देर के बाद चाची शांत होकर लेट गयी। फिर चाची मुड़कर अजीत की तरफ अपनी पीठ करके नंगी ही सो गयी। अब अपनी चाची की नंगी पीठ देख-देखकर और यह सोचते हुए कि उसने अभी-अभी क्या देखा? और अब अजीत अपने लंड पर अपना हाथ फैरने लगा था और फिर थोड़ी देर के बाद झड़कर सो गया। फिर अगले दिन अजीत की चाची ने ऐसा बर्ताव किया कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं है।

फिर यह सिलसिला ऐसे ही कुछ दिनों तक चलता रहा और अजीत अपने चाचा और चाची की चुदाई देखता रहा, लेकिन एक दिन जब अजीत के चाचा गाँव से बाहर गये थे। तब चाची ने अजीत से पूछा कि तुम क्यों रोज रात को हमारी कारवाही देख-देखकर मज़ा लूटते हो? में सोच रही हूँ कि में यह बात तुम्हारे चाचा से कह दूँ। तो तब अजीत यह बार सुनकर बहुत डर गया और अपनी चाची से यह सब बात चाचा से ना कहने के लिए बोला चाचा मुझको बहुत मारेंगे और मुझको अपने घर से निकाल देंगे, मेरे पास और कोई ठिकाना नहीं है, में कहाँ जाऊंगा? चाची प्लीज चाचा से यह बात मत कहना। तो तब चाची अजीत से बोली कि ठीक है में नहीं बोलूँगी, लेकिन में कहूँ वैसे ही करना पड़ेगा। तो तब अजीत बोला कि ठीक है तुम जो भी कहोगी में वैसे ही करूँगा।

फिर तब चाची बोली कि अजीत तुम तो जानते ही हो कि तुम्हारे चाचा जल्दी-जल्दी से अपना काम ख़त्म करके सोने चला जाता है और में कैसे अपने आपको अपनी उंगली से शांत करती हूँ? अब में चाहती हूँ कि तुम मुझे जब-जब कहूँ शांत करो, समझ गये। तो तब अजीत धीरे से अपनी चाची से बोला कि हाँ चाची में सब कुछ समझ गया, लेकिन में कुछ नहीं जानता हूँ। तो तब चाची अजीत से बोली कि में तुझे सब कुछ अभी आज से समझा दूँगी। फिर चाची अजीत को अपने कमरे ले गयी और फिर जमीन पर चटाई बिछाई और उस पर दो तकिए लगा दिए। अब वो अजीत के सामने खड़ी हो गयी थी और अपना ब्लाउज उतारने को बोली। अब अजीत बहुत घबराया हुआ था। अब उसके हाथ ब्लाउज के हुक खोलते वक़्त कांप रहे थे। फिर अजीत का डर देखकर चाची ने उसको धीरे-धीरे बातों से समझाया और फिर अपनी बाहों में भर लिया। अब चाची अजीत को अपने ब्लाउज की हुक खोलने में मदद करने लगी थी और फिर चची ने अपना ब्लाउस उतार दिया। फिर वो मुड़कर खड़ी हो गयी और अपनी ब्रा की हुक खोलने के लिए बोली। फिर जब चची की ब्रा का हुक खुल गया तो तब चाची फिर से अजीत के सामने हो गयी। अब चाची अपने दोनों हाथों से अपनी चूची और ब्रा पकड़कर खड़ी हो गयी थी और धीरे से अपनी ब्रा भी उतार दी।

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अब अजीत अपनी फटी-फटी आँखों से अपनी चाची की नंगी चूचीयाँ देखने लगा था। यह पहला मौका था कि अजीत किसी औरत की नंगी चूचीयाँ देख रहा था और वो भी अपनी चाची की चूचीयाँ। फिर चाची ने अपनी दोनों चूचीयाँ अपने दोनों हाथों से उठाते हुए अजीत से पूछा कि तुम्हें यह चूचीयाँ पसंद है? और फिर चाची अपनी चूचीयों को अजीत के हाथों में थमाते हुए बोली कि लो इनको छूकर देखो,  इनसे खेलो। अब चाची देख रही थी कि अजीत कुछ हिचकिचा रहा है। फिर चाची ने अजीत के हाथों को पकड़कर अपनी चूचीयों से लगा दिया। अब अजीत उन चूचीयों की गर्मी और कड़कपन से उत्तेजित होकर उन चूचीयों से खेलने लगा था। अब अजीत उन चूचीयों की निप्पल को पकड़कर देखने लगा था। फिर चाची ने अजीत का सिर पकड़कर उसके चेहरे से अपनी चूचीयाँ रगड़ दी और बोलने लगी अजीत मेरी चूचीयों को चूसो जैसे एक बच्चा माँ का दूध पीता है वैसे ही तुम मेरी चूचीयों को चूसो। तो तब अजीत को जैसा बोला गया वो वैसे ही करने लगा।

फिर पहले तो उसने चाची के निप्पल को अपने मुँह में लिया और फिर थोड़ी सी चूची अपने मुँह में भरकर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा था। फिर चाची अपनी दूसरी चूची उसके मुँह से लगाकर बोली कि अब तुम दूसरी चूची को भी चूसो, अब मेरी साड़ी उतारो, अब में तुम्हें अपनी झांटो से भरी चूत दिखाऊँगी, में तुम्हें सब कुछ दिखाऊँगी, में तुम्हें आसमान की सैर करवाऊँगी। तो तभी अजीत ने अपनी चाची की साड़ी और फिर उनका पेटीकोट उतार दिया। अब चाची ने अपनी कमर हिला-हिलाकर अपना पेटीकोट उतार दिया था और अपना नंगी शरीर लेकर अजीत के सामने खड़ी हो गयी थी। फिर चाची ने अजीत का पजामा और उसका अंडरवेयर उतारकर उसको भी अपनी तरह नंगा कर दिया। अब अजीत अपनी चाची के सामने नंगा होकर खड़ा होने से शर्मा रहा था, लेकिन अब तक उसका लंड खड़ा हो चुका था और अपना सिर हिला-हिलाकर चाची की चूत को अपने पास बुला रहा था।  दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर चाची ने अजीत के खड़े लंड को अपने हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींचा और अजीत से बोली कि वाह तुम्हारा लंड तो तुम्हारी उम्र से कुछ ज़्यादा ही लम्बा और मोटा है क्यों है ना? फिर चाची ने झुककर अजीत के लंड को अपने होंठो से लगाकर चुम्मा और फिर अपने मुँह में भर लिया और उस पर अपनी जीभ फैरने लगी थी। फिर थोड़ी देर तक अजीत के लंड पर अपनी जीभ फैरने के बाद चाची बोली कि चलो तुम्हारी क्लास अभी से शुरू की जाए और फिर चाची ने जमीन पर बिछी चटाई पर लेटकर अपने दोनों पैरों को फैला दिया और अजीत को अपने दोनों पैरो के बीच में बैठने के लिए बोली। अब चाची ने अपनी गांड के नीचे एक तकिया रखने के बाद अपनी जाँघों को और खोल दिया था और अजीत से बोली कि थोड़ा और पास आकर मेरी चूत को देखो। अब अजीत का चेहरा अपनी चाची की चूत से करीब 6 इंच दूर था और उसकी नाक से अपनी चाची की चूत से निकलती हुई मस्त खुशबू सूंघ रहा था।

फिर चाची ने अपने हाथों से अपनी झांटो भरी चूत को और फैला दिया और अजीत से अपनी चूत के अंदर लाल-लाल हिस्सा देखने के लिए बोली और फिर अपने हाथों से अजीत को अपनी चूत के दाने को दिखाकर उसको चूसने के लिए बोली। तब अजीत ने अपनी चाची की चूत के दाने को अपने होंठो में लेकर चूसना शुरू किया और अब इससे उसको बहुत मज़ा मिलने लगा था। फिर चाची अपनी चूत के होंठो के बीच का हिस्सा भी अजीत से चाटने के लिए बोली। तो तब अजीत ने वैसा ही किया, अब वो अपनी जीभ अंदर तक डालकर अपनी जीभ घुमा-घुमाकर चूसने लगा था। अब अजीत को चाची की चूत का टेस्ट बहुत अच्छा लगने लगा था। अब वो बहुत गहराई तक और धीरे-धीरे चाची की चूत चूस रहा था। फिर थोड़ी देर तक चूत चुसाई के बाद चाची से रहा नहीं गया, तो तब चाची अजीत से चोदने के लिए बोली। तो तब अजीत ने अपनी चाची की चूत में अपना लंड डालकर चोदना शुरू कर दिया, पहले अजीत ने चाची जो जमीन पर लेटाया और फिर उनको कुत्तिया की तरफ झुकाकर और खुद उनके पीछे से और फिर खुद जमीन पर लेटकर और चाची को अपने ऊपर चढ़ाकर खूब चोदा।

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अब अजीत की जवानी अपने पूरे जोश में थी। अब वो रोज दिन में अपनी चाची की चूत को अपने लंड से शांत करता था और तब तक चाची को नहीं छोड़ता था जब तक चाची अपनी चूत चुदवाते चुदवाते थक नहीं जाती थी फिर चाची निढाल होकर चुपचाप जमीन पर लेट जाती और अपनी टाँगे फैलाकर अजीत से अपनी चूत पीछे से छोड़ने के बोलती तो तब अजीत धीरे से अपना खड़ा हुआ लंड उनकी चूत के अंदर उतार देता था और उनको अपने हाथों में भरकर अपना लंड जितना जा सके उतना डालकर रगड़ रगड़कर चोदता अब वो जैसे ही अपनी चुदाई की रफ़्तार बढ़ाता था तो उसकी चाची गालियाँ देने लगती अरे हरामजादे क्या तू अपनी चाची को मार ही डालेगा क्या? तेरा लंड तो पूरा गधे के लंड जैसा है है हाई में मरी जा रही हूँ छोड़ मुझे मेरी चूत में से अपना लंड निकाल ले मेरी चूत फटी जा रही है देख तेरे लंड के धक्के से मेरी गुलाबी चूत काली पड़ चुकी है तो तब अजीत अपना लंड चाची की चूत में जड़ तक डालकर झड़ गया।

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अब अजीत झड़ने के बाद चुपचप अपनी चाची की पीठ पर लेट गया तो तब अजीत को महसूस हुआ कि चाची की चूत में से पानी निकलकर उसके अंडों को गीला कर रहा है अब रात को जब अजीत के चाचा अपनी बीवी को चोदते थे तो तब अजीत उनकी चुदाई अंधेरे में लेटकर देखता था और अपने लंड पर हाथ फैरता रहता था। फिर जब चाचा अपनी बीवी को चोदकर बरामदे में सोने के लिए चले जाते थे तो तब चाची अजीत को अपने कमरे में बुला लेती थी और उससे अपनी चूत को फिर से चोदने के लिए बोलती थी फिर अजीत उस समय जब अपनी चाची को चोदता था तो अपने चाचा का वीर्य चाची की चूत से निकलकर उसके अंडों और जांघों तक फैल जाता था। फिर चाची और भतीजे की चुदाई का यह किस्सा बहुत दिनों तक चलता रहा।

एक दिन चाचा ने अजीत और उसकी चाची को रंगे हाथ चुदाई करते हुए पकड़ लिया तो तब चाचा ने अजीत को इसके लिए बहुत मारा और अगले दिन अजीत को अपने घर से निकाल दिया और फिर चाचा ने अपनी बीवी भी बहुत डांटा लेकिन उसने जो सुख अपनी चूत से दिए है यह सोचकर चाचा ने चाची को घर से नहीं निकाला था ।।

धन्यवाद …

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