चुदक्कड़ मामी और रंडी बहनें

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प्रेषक : सुधीर …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम सुधीर है और में चंडीगढ़ का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र बीस साल है और आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को अपने जीवन की एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, जिसने मेरा जीवन हमेशा के लिए बदल दिया। दोस्तों वैसे तो में भी पिछले कुछ सालो से सेक्सी कहानियों के मज़े लेता आ रहा हूँ और फिर एक दिन मेरे मन में अपनी भी इस घटना को सुनाने के बारे में विचार आ गया और आज वो घटना आप सभी के सामने है, मुझे पूरी उम्मीद है कि यह सभी पढ़ने वालो को जरुर पसंद आएगी प्लीज मुझसे होने वाली छोटी बड़ी गलती को माफ़ भी करें और अब कहानी को सुनकर मज़े ले। दोस्तों यह कुछ साल पहले की बात है, में अपनी दूर की रिश्ते की मामी और दो बहनो मतलब मामी की बेटियों के कहने पर उनके साथ कुल्लू चला गया और कुल्लू में मेरे परदादा हमारे नाम एक मकान छोड़ गये थे, इसलिए हमारा वहीं पर कुछ दिन रहने घूमने फिरने का मन था और हम लोगो के वहां पर पहुँचने के एक घंटे के बाद ही ज़बरदस्त बर्फ गिरना शुरू हो गई। फिर कुछ देर बाद उस मकान की बिजली भी खराब मौसम की वजह से चली गयी, में उस हल्के अंधेरे में टटोलता हुआ ऊपर चला गया और में हमारे लिए कंबल और कुछ चादरें ले आया।

फिर में जब नीचे पहुंचा तब तक मेरी मामी और बहानो ने आग जला रखी थी इसलिए ठंड का असर मुझे कम महसूस हो रहा था। फिर हम सब लोग आग के पास ही अपना बिस्तर लगाकर कंबल को अपने ऊपर डालकर लेट गये और कुछ देर बाद आग और उन कंबलो की गरमाहट से हमे नींद भी बड़ी मस्त आ गयी मेरी आंखे शायद मुश्किल से बीस मिनट ही लगी होगी, जब मेरी आंख खुली तब मैंने महसूस किया कि किसी का हाथ मेरे पजामे के ऊपर से मेरे लंड को सहला रहा है वो अहसास मुझे बड़ा अचम्भित कर गया और उस आग की मंद रौशनी की वजह से में यह बात तो अच्छी तरह से जान चुका था कि मेरी मामी और मेरी एक बहन जिसका नाम सीमा है, वो दोनों उस समय बड़ी गहरी नींद में सो रही थी। फिर उनके बाद अब बची मेरी दूसरी बहन जिसका नाम निशा था, वो उस समय मेरी पीठ के पीछे लेटी हुई थी में बड़ी अच्छी तरह से समझ चुका था कि यह हाथ उसी का था। अब मैंने बिना किसी विरोध के बहुत ही धीरे से अपनी करवट को बदला और उसके बाद मैंने अपने आपको निशा की मुस्कुराती हुई आँखों में देखते हुए महसूस किया कि उसको ना कोई लज्जा थी और ना ही कोई झिझक, बस उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट थी और मेरे आधे तने लंड पर उसका वो एक मुलायम हाथ जो लगातार धीरे धीरे मेरे लंड को सहलाते हुए उसके साथ खेल रहा था।

दोस्तों में उसको कुछ कहना चाहता था, लेकिन उसके पहले ही कंबल की गहराईयों से उसने अपना दूसरा हाथ बाहर निकाला और फिर अपनी एक उंगली को उसने अपने होंठो पर रखकर मुझे शांत रहने का इशारा किया। फिर यह सब करने के बाद वो धीरे से मेरे पास सरक आई, जिसकी वजह से उसका वो गरम गोरा जिस्म मेरे बदन से बिल्कुल चिपककर मुझे छूने लगा और अब अपनी कोहनी पर थोड़ा सा उठकर मामी और सीमा की तरफ देखते हुए वो अपने होंठ मेरे कान के पास ले आई। अब वो मुझसे कहने लगी मेरे इस जिस्म में बहुत बैचेन करने वाली आग लगी है जिसकी वजह से, वो मेरे कान को चूमते हुए फुसफुसाने लगी और बोली कि में पागल हो चुकी हूँ प्लीज इसको आज आप शांत कर दो। अब में बड़ी हैरानी में आकर धीरे से उसकी तरफ घुर्राने लगा, मैंने उसको कहा कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता यह सब गलत है हमे कोई देख लेगा। अब वो अपने सर को हिलाते हुए मुझसे कहने लगी कि उन्हे कभी कुछ भी पता नहीं चलेगा, में आपसे पक्का वादा करती हूँ और यह सब कहकर उसने मेरी गर्दन को चूम लिया। दोस्तों निशा थी तो उस समय सिर्फ 19 साल की, लेकिन उसके गदराए बदन के हर एक अंग से उसकी चढ़ती जवानी साफ साफ नजर आ रही थी। अब उसका वो सुंदर गोरा बदन उस पर उसके वो दो शानदार बड़े आकार के बूब्स और एक बड़ी ही मस्त गोलमटोल गांड उसको यह सब कुदरत ने दी थी।

अब निशा मेरी आँखों में अपनी आंखे डालकर देख रही थी, उसके बाद मैंने उसके हाथ को अब मेरे पजामे का नाड़ा खोलते हुए महसूस किया उसने अपने हाथ में फूँक मारी और उसके बाद उसने मेरे खुले हुए पजामे में अपने हाथ को अंदर डालकर मेरे लंड को पकड़ लिया। अब लंड को पजामे के बाहर निकालते हुए उसने एक बार फिर से मामी और सीमा की तरफ देखा उसके बाद वो मुझसे बोली कि उनकी तरफ आप नजर रखना और फिर वो उस कंबल में पूरा अंदर गुस गयी। दोस्तों उसका इरादा क्या है? यह बात जानने में मुझे केवल पांच सेकिंड ही लगे क्योंकि अब मेरे लंड को अचानक से बहुत गरमाहट महसूस हुई क्योंकि अब उसके होंठ मेरे लंड के टोपे के चारो तरफ घूम रहे थे और उसकी जीभ मेरे टोपे के चारो तरफ चाट रही थी। दोस्तों उसका एक हाथ अभी भी मेरे लंड को सहला रहा था और हम दोनों उस समय बड़े जोश मस्ती में आ चुके थे। अब मैंने जल्दी से अपने पीछे की तरफ मुड़कर अपनी मामी और सीमा की तरफ देखा वो उस समय भी सो रही थी, लेकिन अब चाहता तो में भी यह था कि में उसको अपना लंड चूसते हुए देखूं इसलिए जब निशा ने मेरा लंड छोड़ दिया, तब मैंने एक बड़ी गहरी राहत की साँस ली, लेकिन अभी मेरी प्यारी बहन की वो आग बुझी कहाँ थी?

वो अब भी बड़ी प्यासी थी, मुझे उसका जोश देखकर बड़ा आश्चर्य था क्योंकि उसने अब खड़ी होकर अपनी उस मेक्सी को ऊपर उठा दिया और उसके बाद उसने अब अपनी पेंटी को भी उतार दिया। फिर उसके बाद वो बिस्तर के अंदर वापस मेरे पास घुस गयी और अपने बदन को मेरे जिस्म से लिपटाकर फुस फुसाकर मुझसे कहा कि तुम अब बिल्कुल भी मत हिलना आज सब कुछ मुझे ही करने दो। दोस्तों मेरा लंड अब जोश में आकर पत्थर की तरह सख्त हो चुका था और मुझसे वापस चिपकते हुए निशा ने अपनी जांघो को थोड़ा सा खोल दिया और उसके बाद उसने तुरंत ही मेरे खड़े लंड को उनके बीच में लेकर अपनी चूत के मुहं पर एकदम ठीक निशाने पर रख लिया। फिर उसके बाद अब आगे पीछे हिलाते हुए उसने मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया और एक बार फिर से मामी और सीमा की तरफ देखते हुए उसने अपने आपको ज़रा सा नीचे सरका लिया और अब ऊपर उठते हुए मेरे लंड को उसने पूरी तरह अपनी चूत के अंदर डाल लिया। दोस्तों उसके बाद तो बाप रे बाप निशा की चूत की वो गरमाहट ने मुझे एकदम पागल ही बना दिया, उस समय मेरी बहन की चूत से गरम और कोई जगह उस पूरे घर में शायद नहीं थी और मेरा लंड उस गरमाहट का अब पूरा पूरा फ़ायदा उठा रहा था और निशा के कहे अनुसार में बिना हिले वैसे ही लेटा रहा।

फिर निशा अब उछल उछलकर अपने आप को मेरे लंड से चोद रही थी और में अपनी साँस को रोके उसके साथ पूरा मज़ा वो आनंद ले रहा था। अब निशा की चूत रह रहकर हर बार मेरी जांघो से टकरा रही थी और उसकी वो गीली, गरम चूत मेरे लंड पर ऊपर नीचे फिसल रही थी। दोस्तों निशा को लगातार यह मेहनत का काम करने के बाद झड़ने में करीब दस मिनट का समय लगा और जब वो झड़ने लगी, तभी उसने अपने दांतो के बीच मेरे होंठों को भींच लिया और वो बहुत ज़ोर से थरथराई और झड़ने के बाद निशा ने मेरे ऊपर से हटकर अपनी चूत को मेरे लंड से आजाद करवाया और फिर वो मुझसे कहने लगी कि में ज़रा पेशाब करके अभी वापस आती हूँ और वो मुझसे यह बात कहकर चलती बनी। दोस्तों मुझे उसकी इस हरकत के ऊपर बहुत गुस्सा आया, लेकिन में अभी तक नहीं झड़ा था, मेरा लंड अब भी वैसे ही तनकर खड़ा हुआ था। फिर उस समय मुझे इतना ज्यादा गुस्सा आया कि मैंने अपनी दूसरी बहन सीमा को अपने पास आते हुए ना देखा मुझे पता ही नहीं चला कि वो कब मेरे पास आ चुकी थी। अब सीमा ने मेरी तरफ अपने एक हाथ को आगे बढ़ाकर धीरे से वो मुझसे बोली चलो अब उठो यहाँ से इसके आगे के मज़े में तुम्हे दे देती हूँ।

दोस्तों मुझे बिल्कुल भी पता नहीं था कि उस समय उसके दिमाग़ में क्या सब चल था, लेकिन वो जो कुछ भी था में उसको अब मना नहीं करने वाला था। फिर हम दोनों वहां से निकलकर पास वाले दूसरे कमरे में पहुंच गये, जहाँ पर पहले से सूटकेस और कुछ सामान रखा हुआ था, उस कमरे का दरवाज़ा बंद करते ही सीमा मुझसे चिपक गयी। अब वो मेरे लंड को अपने एक हाथ से सहलाते हुए मुझसे कहने लगी कि निशा तो बहुत बड़ी चुदक्क्ड़ है उसको अपनी चूत को शांत करने का बहुत शौक है यह उसकी मजबूरी भी है इसलिए वो चुदाई करवाते समय पागल हो जाती है। दोस्तों अब तक मेरा लंड एक बार फिर से पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया था, सीमा ने मेरा लंड अब छोड़ दिया और मुझे उसके कपड़े खुलते हुए नजर आए। फिर उसके अगले दो सेकिंड के बाद ही अब सीमा की गांड और चूत मेरे लंड से लगे हुए थे वो मुझसे कहने लगी चलो अब तुम मुझे चोदो। अब वो मेरे सामने अपने दोनों पैरों को ऊपर उठाकर पूरा खोलकर किसी प्यासी अनुभवी रंडी की तरह लेटी हुई मुझसे अपनी चुदाई का आग्रह करने लगी थी। अब में क्यों भला पीछे हटता? मैंने भी बड़े प्यार से अपना एक हाथ उसके कूल्हों पर घुमाना शुरू किया और उसकी चूत के पास तक पहुंचा दिया और फिर दूसरे हाथ से मैंने अपना लंड पकड़कर सीमा की चूत के खुले होंठो पर रख दिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर उसके बाद अपने एक हल्के से धक्के के साथ ही अब मेरा लंड मेरी दूसरी बहन की कामुक रेशमी मुलायम चूत में चला गया, तब मुझे महसूस हुआ कि सीमा की वाह क्या कसी हुई चूत थी? मुझे तो उसकी चुदाई करने का आज असली मज़ा आने वाला था। अब में उसी पलंग के नीचे खड़ा होकर सीमा की कमर को पकड़कर ज़ोर ज़ोर से धक्के मार मारकर उसकी चुदाई के मस्त मज़े ले रहा था और सीमा भी अपनी चूत को आगे पीछे करते हुए मेरे लंड से अपनी जांघो को मिला रही थी। दोस्तों हम दोनों उस समय बड़े जोश में थे हमारी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, मेरे हर एक धक्के के साथ वो भी अपने कूल्हों को झटके देकर मेरा पूरा साथ दे रही थी और इस वजह से हम दोनों जोश और मस्ती के समुद्र में गोते लगा रहे थे, लेकिन में अब झड़ने वाला था। फिर इसलिए मैंने झड़ने से पहले एक बार उसको पूछना उचित समझा में उसको कहने लगा में अब झड़ने वाला हूँ क्या में तुम्हारी चूत में झड़ जाऊँ? तभी उसके मुहं से सिसकियों के साथ बड़ी धीमी कांपती आवाज में निकला हाँ ठीक है, में अब उसको और भी तेज ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगा। उसके मुहं से अब आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह सिसकियों की आवाज आ रही थी। अब में उसको कहने लगा हाँ आज में तुझे अच्छी तरह जमकर चुदाई के असली मज़े दूंगा, उसको यह बोलते हुए में धक्के देकर सीमा की चूत में झड़ने लगा।

अब सीमा भी उसी समय मेरे साथ साथ ही झड़ने लगी इसलिए उसका पूरा शरीर बिल्कुल अकड़ गया और उसकी चूत मेरी लंड से चिपक गयी, उसी समय मुझे सहारा दो यह बात कहकर उसने पीछे की तरफ अपने हाथों को बढ़ाकर मेरी गांड को पकड़ लिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उसकी चूत से बाहर ना निकले और जब सीमा पूरी तरह से झड़ चुकी तब मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया। फिर उसके बाद हम दोनों ने जल्दी से अपने अपने कपड़े पहन लिए और आगे वाले कमरे में वापस आकर हम दोनों ने देखा कि अब निशा, सीमा की जगह पर अपनी दोनों आँखों को बंद करके लेटी हुई है। अब हम दोनों भी बिना किसी आवाज के उस कंबल के नीचे घुस गये और एक दूसरे से चिपककर सो गये। फिर दूसरे दिन सुबह मैंने उठकर देखा कि बाहर अब तक बर्फ और वो तूफान सभी कुछ थम चुका था, हम सभी ने उठकर एक साथ बैठकर गरम गरम चाय के मज़े लिए और उसके बाद मेरी मामी ने निशा और सीमा को किसी काम से बाज़ार कुछ सामान लाने के लिए भेज दिया। फिर कुछ देर बाद में रसोई में था वो मुझे रसोई में छोड़कर पास वाले दूसरे कमरे में चली गयी, लेकिन मैंने इतना ध्यान नहीं दिया और में अपने काम में लगा हुआ था।

फिर करीब दो मिनट के बाद ही उनकी मुझे बुलाने की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी और में जब चलकर उस कमरे में पहुंचा तब उसके बाद में वहां का वो द्रश्य अपनी चकित आँखों से देखता ही रहा गया। दोस्तों क्योंकि उस समय सामने गद्दे पर मेरी मामी बिल्कुल नंगी होकर एकदम सीधी लेटी हुई थी, में उनके गोरे बदन पर बड़े आकार के बूब्स और उस पर तनकर खड़े उनके हल्के गुलाबी रंग के निप्पल को में बिल्कुल चकित होकर घूरता ही रह गया। अब मेरी मामी मुझसे अपनी चूत को सहलाते हुए कहने लगी मुझे पहले ही यह सब कर लेना चाहिए था। चलो अब देख क्या रहे हो? वो दोनों अभी कुछ देर में घूमकर वापस आ जाएँगे और उसके पहले हमे यह काम खत्म करना है। फिर में जल्दी से अपने पूरे कपड़े उतारकर मामी के पास में गद्दे पर लेट गया, मामी फिर मेरे ऊपर 69 के आसन में आ गई, उसके बाद मेरी तरफ देखते हुए उन्होंने अपनी चूत को मेरे मुहं पर रख दिया और दूसरी तरफ मामी ने अपना सर नीचे झुकाया और मेरा लंड अपने मुहं में लेकर उन्होंने चूसना शुरू किया। दोस्तों वाह क्या मस्त मज़ा मुझे आ रहा था? इधर में अपनी मामी की जांघो को खोलकर उनकी चूत को अपनी जीभ से चाट रहा था और उधर मेरी मामी मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर किसी अनुभवी रंडी की तरह लोलीपोप समझकर चूस रही थी।

अब उसी समय मामी के कूल्हों को पकड़कर मैंने उनकी चूत को अपने पास खीच लिया और अपनी जीभ को पहले से भी ज्यादा अंदर तक डाल दिया, जिसकी वजह से मामी के शरीर में एक करंट दौड़ गया और वो मेरा लंड अपने गले तक उतारकर और भी जोश में आकर ज़ोर से चूसने लगी। दोस्तों मैंने उस चूत को चाट चाटकर अपनी मामी को दो बार झड़ने पर मजबूर किया और अब मेरा लंड भी झड़ने के लिए बड़ा बैचेन था और इसलिए मैंने अपने लंड को मामी के मुँह से बाहर निकाला। अब क्षण भर के लिए उनके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी आ गयी, मैंने उनको कहा कि आप ऐसे ही लेटे रहो और फिर में अपने घुटनों के बल आ गया। दोस्तों शायद आप सभी लोगों को यह बात सुनकर कुछ अजीब लगे, लेकिन में अब अपनी उस हॉट सेक्सी मामी की चुदाई करने के लिए तैयार था और वैसे में क्यों ना उनको चोदता? में उनकी चुदाई करने से पहले ही अपनी दोनों बहनों को तो चोद ही चुका था, उनके बाद अब मेरी मामी ही बची थी। अब अपनी मामी की गीली चूत को पूरा खोलते हुए मैंने अपना लंड सही जगह पर लगाया और एक हल्के झटके से अंदर डाल दिया और तब मुझे यह बात जानकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि मेरी मामी की चूत सीमा की चूत की तरह ही ठीक वैसी ही कसी हुई थी।

फिर उसके बाद मैंने मन ही मन में सोचा कि हो भी क्यों ना? क्योंकि जहाँ तक मुझे पता था मेरे मामा की म्रत्यु के बाद से वो किसी भी मर्द के साथ नहीं रही थी और उस समय मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कि में एक 40 वर्ष की औरत का भोसड़ा नहीं बल्कि एक जवान लड़की की नई कुंवारी चूत की पहली बार चुदाई कर रहा हूँ। अब एक हाथ से मामी की कमर और दूसरे से उनके एक लटकते हुई बूब्स को पकड़कर में अपनी पूरी ताकत से धक्के देकर उनकी चुदाई करने लगा। अब मामी बड़ी तेजी से हांफते हुए मुझसे कहने लगी कि तुम्हे तो सज़ा मिलनी चाहिए, मैंने पूछा क्यों मामी? वो बोली क्योंकि तुमने इससे पहले आज तक मुझे कभी नहीं चोदा तुमने इतने दिनों से मुझे यह मज़े क्यों नहीं दिए? में कब से इन सभी के लिए तरस रही थी, आज तुम मुझे जमकर मेरी चुदाई करके असली मज़े दो मेरी इस प्यास को बुझा दो। अब मैंने उनको अपना जवाब देकर कहा कि सच तो यह है कि मामी में तो जाने कब से तुमको चोदना चाहता था और यह शब्द कहते हुए मैंने अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकाल लिया। फिर लंड को एक हाथ से पकड़कर मैंने उनकी गांड के छेद पर रख दिया और मामी ने पीछे मुड़कर मेरी तरफ एक अजीब तरह से देखा, लेकिन उन्होंने मुझसे वो सब करने के लिए मना नहीं किया।

अब मुझे तीन ज़ोरदार धक्के लगाने पड़े, जिसके बाद आख़िर मेरे लंड का टोपा मामी की गांड में गुस गया और उसके बाद तो मेरा वो काम एकदम आसान हो गया और मेरा लंड बड़े आराम से मामी की गांड के अंदर चला गया। अब मैंने उनसे पूछा क्या तुम तुम्हारी यह गांड इसके पहले भी मरवा चुकी हो? अब उसने कहा कि हाँ, लेकिन तुम ज़रा मुझसे तमीज से बात करो। अब मैंने कहा कि आप मेरी इस गलती के लिए मुझे माफ करना और इतना कहकर में उनकी गांड को वैसे ही धक्के मारता रहा और अब मेरे झड़ने का वो ठीक समय आ ही गया, जिसका मुझे कब से इंतजार था और जैसे ही मैंने अपने आप को झड़ने के लिए तैयार किया वैसे ही किसी के चलकर आने की आहट मेरे कानो में पड़ी। फिर उसके बाद जब मैंने घूमकर देखा तो कमरे के दरवाज़े में निशा और सीमा अपने हाथों में कोई पैकेट लिए खड़ी थी। अब निशा की आवाज़ सबसे पहले निकली, उसने चकित होकर कहा हे भगवान और उसकी आंखे खुली की खुली रह गई। तभी सीमा तुनककर बोली चल अब पीछे हट भी जा कल रात को तो तू बड़ी कूद कूदकर चुदवा रही थी। अब निशा ने कहा कि हाँ वो सब ठीक है, लेकिन मैंने अपनी गांड थोड़ी मरवाई थी, इसमे तो बड़ा दर्द हो रहा होगा, निशा मामी की तरफ देखते हुए कहने लगी।

अब मामी उन दोनों से कहने लगी देखो अगर तुम दोनों को मुझे बुराभला ही कहना है तो क्रपा करके कहीं और जाकर कहो, यह शब्द कहते कहते मामी का शरीर हिलने लगा और वो झड़ने लगी। फिर सीमा बोली कि हाँ मम्मी ठीक ही तो कहती है यह बात कहकर सीमा पीछे मुड़कर वापस जाने लगी, लेकिन निशा दो तीन और धक्को को देखने के लिए वहीं पर रुकी और फिर वो भी सीमा के पीछे चल पड़ी। अब धक्के मारते मारते मैंने मन ही मन में फ़ैसला किया कि अगर मुझे कोई अच्छा मौका मिला तो में एक बार निशा की गांड बहुत अच्छी तरह से जरुर मारकर रहूँगा। तभी में ज़ोर से धक्के देते हुए मामी की गांड में झड़ने लगा, मामी ने एक आवाज निकाली और अपने कूल्हों को मेरे लंड के चारो तरफ वो गोल गोल घुमाने लगी और अपनी गांड को कसकर मुझसे चिपका दिया। अब अपनी ताकतवर गांड से मामी ने मेरे लंड को इस तरह से कस लिया था, जैसे मेरा लंड अब बाहर निकालना मेरे लिए बहुत मुश्किल काम है और जब हम दोनों यह सब कर रह थे, उस समय मेरी बहनें रसोई में हम सभी के लिए नाश्ता तैयार कर रही थी। फिर चुदाई का काम खत्म करके खाना खा पीकर मैंने थोड़ा सा आराम किया और उसके बाद में सामान खोलने और जमाने में सबकी मदद करने लगा।

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फिर उसके बाद में एक हीटर खरीदने और लकड़ी का इंतज़ाम करने बाज़ार चला गया, वापस जब में आया तो मामी और बहने मीटिंग कर रही थी, वे लोग ना केवल जो कल रात और आज हुआ उसके बारे में बातें कर रही थी बल्कि आगे कैसे क्या होगा? यह भी बातें कर रही थी क्योकि में वहां नहीं था इसलिए मेरी सलाह भी किसी ने नहीं ली। फिर उनके सामने आते ही सीमा ने मुझे बताया कि एक बात हमारे बीच में तए की गयी है कि अगली बार किसका नंबर पहले आएगा? क्योंकि पिछली बार निशा सबसे पहले चुदी थी और मामी सबसे बाद में अब तेय किया गया कि अगली बार चुदाई की कतार में मेरी मामी पहले होगी। फिर दोपहर को खाने के बाद मामी ने मुझे अपने कमरे में बुला लिया में ज़मीन पर अपने घुटनों के बल बैठा हुआ था और अपनी मामी की चूत को चाट रहा था कि निशा और सीमा कमरे में दाखिल हुई मेरी दोनों बहने आज तक किसी बात पर सहमत नहीं हुई, लेकिन आज मैंने दोनों को कहते सुना कि अगली बार हम चारों एक साथ चुदाई के इस खेल में शामिल होंगे और अब मामी यह बात सुनकर ज़ोर से मुस्कुराई।

दोस्तों हम सभी लोग अब भी कुल्लू में ही रहते है और साथ में रहकर हमेशा जब भी हमारी इच्छा होती है हम चुदाई के वैसे ही जमकर मज़े भी करते है क्योंकि यहाँ पर हमे रोकने कहने सुनने वाला कोई भी नहीं है मेरी हर एक चुदाई से वो तीनो हमेशा ही पूरी तरह से संतुष्ट होकर बहुत खुश रहती है और हर बार चुदाई के समय मेरा पूरा पूरा साथ देती है उनका वो जोश हमेशा एक ही जैसा रहता है, मैंने तीनों को बारी बारी से और हर एक अलग तरह की चुदाई के असली मज़े दिए, उनकी चूत को चोदने के साथ साथ गांड भी मैंने उनकी बहुत बार मारी इसलिए उनको अब अपने किसी भी छेद में मेरे मोटे लंड को लेने से पहले जैसा दर्द नहीं होता, वो हंसी ख़ुशी मुझे अपनी चुदाई करवाती है। दोस्तों यह थी मेरी वो सच्ची कहानी जिसके बाद उनके साथ साथ मेरा भी पूरा जीवन एकदम बदल गया ।।

धन्यवाद …

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