दो परिवारों की सेक्स कहानी 3

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प्रेषक : जय …

“दो परिवारों की सेक्स कहानी 2” से आगे की कहानी …

हैल्लो दोस्तों कैसे हो आप? आप सभी का जय एक बार फिर से हाजिर हूँ आप सभी के सामने अपनी कहानी का नया भाग लेकर। दोस्तों यह कहानी मेरी पिछली कहानी का तीसरा और आखरी भाग है।

दोस्तों सुबह आशीष की पहले नींद खुल गई तो उसने अपने आपको नंगी संजना के ऊपर पाया और फिर उसे लगा कि यह उसने क्या कर दिया? और वो वहीं पर बैठकर अपने ऊपर धित्कार देने लगा और मन ही मन सोचना लगा कि यह उसने कल रात को जोश में आकर क्या कर दिया उसने सुबह सुबह हितेश को फोन लगा दिया और उसको बीती हुई सभी बातों को बता दिया, लेकिन उसे क्या पता था कि हितेश ने भी दिल्ली में रहकर उसकी पत्नी के साथ कल रात को ठीक वही सब किया था जो आशीष ने देहरादून में रहकर किय था, लेकिन हितेश ने आशीष को वो सब कुछ नहीं बताया और अब वो उसे बुरा, भला कहने लगा और उसने उससे कहा कि तू संजना को जितनी जल्दी हो सकता है उतनी जल्दी दिल्ली लेकर आ जा नहीं तो में तेरी पत्नी को सब कुछ बता दूँगा, आशीष उसकी बात को तुरंत मान गया और वो अगले ही दिन संजना को लेकर दिल्ली आ गया अब उसने हितेश को फोन लगाया और हितेश ने उसे मिलने के लिए एक होटल में बुलाया। तो आशीष संजना को होटल में अकेला छोड़कर हितेश से मिलने निकल पड़ा कुछ देर बाद हितेश और आशीष मिल गए।

हितेश : साले में तुझे जान से मार दूँगा।

आशीष : भाई प्लीज तू मुझे एक बार माफ़ कर दे, यह सब मुझसे अंजाने में हुआ है और मैंने यह सब जानबूझ कर नहीं किया।

हितेश : साले अगर में भी तेरी पत्नी के साथ ऐसा करता और फिर में तुझसे कहता कि मैंने जानबूझ कर यह सब नहीं किया फिर तुझे कैसा लगता बोल?

आशीष : भाई प्लीज मुझे माफ़ कर दे।

हितेश : हाँ ठीक है, लेकिन एक शर्त पर में तुझे माफ़ करूँगा और मेरी शर्त यह है कि में तेरे सामने एक बार तेरी पत्नी को चोदूंगा।

आशीष : ( अब बहुत गुस्से से बोला ) कुत्ते, साले, हरामजादे यह क्या कह रहा है तू में तुझे जान से मार दूँगा कमीने?

हितेश : हाँ ठीक है में आज ही तेरी पत्नी को सब कुछ साफ साफ बता देता हूँ और में उसे यह भी कह दूँगा कि यह सब तेरा पहले से ही सोचा हुआ एक षड्यंत्र था और तूने ही जानबूझ कर कल रात को मेरी पत्नी के साथ ज़बरदस्ती की है।

आशीष : ( बहुत डरते हुए ) भाई तू ऐसा क्यों कर रहा है और तुझे ऐसा क्या मिलेगा? में दिव्या से बहुत प्यार करता हूँ और में उसके साथ किसी और को यह सब करते हुए नहीं देख सकता।

हितेश : हाँ में भी तेरी तरह संजना से बहुत प्यार करता हूँ, लेकिन तूने तो मेरी संजना के साथ सोच समझकर बहुत कुछ किया है, क्यों मुझे भी तो उस बात का बहुत दुःख है?

दोस्तों कुछ देर की बहस, झगड़ने के बाद आशीष ने मजबूरी में हाँ बोल दिया और हितेश मन ही मन बहुत खुश हो गया उसकी ख़ुशी उसके चेहरे से साफ साफ नजर आ रही थी। फिर अगले दिन हितेश, दिव्या को लेकर उसी होटल में पहुंच गया जहाँ पर आशीष रुका हुआ था और वो उसका रूम नंबर पता करके सीधा उसके रूम में पहुंच गया जिसकी वजह से उसे अचानक वहां पर देखकर अब आशीष की गांड फट गई। अब दिव्या और संजना तो अपनी फटी आखों से लगातार देखती ही रह गई कि इनमे से हितेश कौन है और आशीष कौन सा है? तो कुछ देर बाद संजना ने आशीष से पूछा कि यह कौन है हितेश? तो हितेश ने कहा कि वो नहीं में हितेश हूँ और इसने तुम्हारे साथ सब कुछ जानते समझते हुए भी जानबूझ कर संभोग किया है। तो उसके मुहं से यह पूरी बात सुनकर दिव्या एकदम से बहुत घबरा गई और अब वो रोने लगी, आशीष दिव्या को सम्भालने, चुप करवाने लगा और अब वो कहने लगा कि दिव्या यह सब मुझसे अंजाने में हुआ है। तो दिव्या ने कहा कि तुमने ऐसा क्यों किया क्या में तुम्हे खुश नहीं रखती थी? तो संजना भी हितेश से वो सारी बातें पूछने लगी, लेकिन हितेश ने संजना को चुपके से इशारा कर दिया कि चुपचाप बस मज़े करो और वो मान गई। ( दोस्तों दिव्या ने आशीष को नहीं बताया कि वो भी हितेश के साथ सेक्स कर चुकी है) फिर हितेश ने आशीष को दिव्या से अलग कर दिया और अपनी बात याद दिलाई और अब वो ठीक आशीष के सामने दिव्या की साड़ी को उतारने लगा यह सब देखकर आशीष का मुहं पूरी तरह से उतर गया और वो अपना मुहं दूसरी तरफ घुमाकर देखने लगा तो हितेश ने संजना को इशारा कर दिया कि वो उसके पास जाकर आशीष को संभाल ले। दोस्तों इधर दिव्या का बहुत बुरा हाल था तो उसने हितेश से पूछा कि तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो? तो हितेश ने कहा कि आशीष ने भी उसकी पत्नी के साथ यह सब किया था। तो दिव्या ने कहा कि तुमने भी तो मेरे साथ किया था और जब तक ये बात दिव्या ने कही तो हितेश उसे पूरा नंगा कर चुका था और उसके जिस्म से खेलने लगा था और दिव्या अब धीरे धीरे गरम होने लगी और हितेश ने अपने सारे कपड़े उतार दिया और दिव्या के साथ बेड पर लेट गया और अब वो उसके बूब्स को चूसने, दबाने लगा और उधर आशीष, दिव्या को देखकर जला जा रहा था और उसने गुस्से में संजना को अपनी बाहों में भर लिया और मन ही मन यह बात सोचकर कि में भी इसकी पत्नी को नहीं छोड़ूँगा और उधर हितेश दिव्या की चूत तक पहुंच चुका था और अब वो उसकी चूत को चाट रहा था और दिव्या सिसकियाँ आहें भर रही थी और इस सिसकियों की वजह से आशीष और भी पागल होता जा रहा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब आशीष ने संजना को पूरा नंगा करके उसके जिस्म से खेलने लगा था और उसके ऊपर हवस सवार हो चुकी थी और वो एक बदले की भावना में संजना को चूमे, चाटे जा रहा था और उधर हितेश ने दिव्या की चूत पर अब अपना लंड लगाकर एक ज़ोर का झटका मारा जिससे उसका आधा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया, जिसकी वजह से दिव्या की एक बहुत ज़ोर की चीख सी निकल गई, जिसे सुनकर आशीष और भी पागल हो गया। दोस्तों दूसरे तीसरे झटके के बाद हितेश का पूरा लंड दिव्या की चूत में था और पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ गूँज रही थी और दिव्या की आह्ह्ह्हह्ह आईईईईइ उफ्फ्फफ्फ्फ़ आशीष को पागल किए जा रही थी। उधर आशीष अब संजना की चूत में उंगली कर रहा था और फिर उसने बदले की भवना से संजना को घोड़ी बनाया और वो अपना थूक उसकी गांड के छेद पर लगाने लगा। संजना अब घबरा गई जो अब तक बहुत मज़े ले रही थी उसे अब लग गया कि अब आशीष हितेश का बदला लेगा और वो उससे छूटने की कोशिश करने लगी, लेकिन आशीष की पकड़ बहुत मज़बूत थी और आशीष ने अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखकर इतना ज़ोर का झटका मारा कि उसका आधा लंड एक ही झटके में उसकी गांड में पहुंच चुका था जिसकी वजह से संजना की चीख उसके गले में ही दबकर रह गई और वो बेहोश हो गई और बेसुध होकर चुपचाप पड़ी रही।

यह सब देखकर हितेश ने आशीष से कहा कि हरामजादे, कुत्ते क्या तू आज मारेगा उसे? फिर आशीष को इस बात का अहसास हुआ कि उसने यह बहुत ग़लत कर दिया है। फिर वो संजना को होश में लाया और उसने कहा कि प्लीज मुझे माफ़ कर दो और अब वो संजना की चूत में अपना लंड डालकर उसे धीरे धीरे धक्के देकर चोदने लगा और उधर हितेश ने अपनी चुदाई की स्पीड को बढ़ा दिया, जिसकी वजह से दिव्या की आहहहह आईईईई प्लीज थोड़ा धीरे ऊह्ह्हह्ह्ह् की आवाजें कमरे में गूंजने लगी और कुछ देर के धक्को के बाद हितेश, दिव्या की चूत के अंदर ही झड़ गया और वो उसके ऊपर ही पूरी तरह से निढाल होकर पड़ गया। अब आशीष भी संजना को लगातार ज़ोर ज़ोर से पूरे जोश में आकर चोद रहा था और थोड़ी देर बाद हितेश ने उठकर आशीष को संजना को चोदते हुए देखा तो उसकी नज़र सीधी संजना की गांड पर गई जो अब पूरी तरह से खून से सनी हुई थी और उसे बहुत दर्द हो रहा था। अब हितेश ने दिव्या हो घोड़ी बनाया और उसने गुस्से में आकर अपना लंड उसकी चूत में दोबारा डाल दिया और अब उसे चोदने लगा, लेकिन जब उसका लंड पूरा तनकर खड़ा हुआ तो उसने थोड़ा सा थूक दिव्या की गांड पर लगा दिया और वो अपना लंड उसकी गांड के छेद पर रखकर रगड़ने लगा। तो दिव्या यह सब देखकर बिल्कुल घबरा सी गयी और अब वो उससे कहने लगी कि प्लीज वहां पर मत डालो मुझे दर्द होगा, तुमने देखा नहीं संजना को कितना हुआ और वो उस दर्द से एकदम छटपटाने लगी थी, लेकिन हितेश अब कहाँ सुनने वाला था उसने कहा कि में बहुत आराम से अंदर डालूँगा, में आशीष की तरह कोई भूखा दरिन्दा नहीं हूँ जो किसी का दुःख दर्द ना समझे और वो अब आहिस्ता आहिस्ता दबाते हुए अपना लंड उसकी गांड में डालने लगा और उसकी वजह से दिव्या को इतना दर्द नहीं हुआ जितना संजना को हुआ था और कुछ देर बाद हितेश ने अपना पूरा लंड दिव्या की गांड में उतार दिया।

अब वो दिव्या की गांड मारने लगा और दिव्या आहह्आअहह उह्ह्ह्ह आईईईइ प्लीज थोड़ा धीरे मर गई में उह्ह्ह्ह माँ प्लीज धीरे करो की आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी। दोस्तों अब संजना और दिव्या की सिसकियों चीखने की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही ही और वो दोनों मर्द उन दोनों को लगातार जोरदार धक्के देकर चोदने में लगे थे और उधर आशीष भी अब उस सेक्स के पूरे पूरे मज़े ले रहा था और उसने थोड़ी देर चूत मारने के बाद संजना की गांड में अपना लंड डाल दिया और अब वो भी उसकी गांड मारने लगा और फिर थोड़ी ही देर में वो उसकी गांड में ही झड़ गया और बिल्कुल निढाल होकर संजना के ऊपर ही गिर गया और उधर हितेश भी अब झड़ने वाला था और उसने अपनी स्पीड को बढ़ा दिया और अपना सारा माल दिव्या की गांड में ही डाल दिया। फिर कुछ देर बाद हितेश उठकर बाथरूम में चला गया और अब आशीष सीधा उठकर दिव्या के पास चला गया और वो उससे कहने लगा कि प्लीज तुम मुझे एक बार माफ़ कर दो। फिर हितेश उठकर आया और आशीष से कहने लगा कि तुम भी मुझे माफ़ कर दो और अब वो संजना को वहां से लेकर चला गया, जिसकी वजह से आशीष उसे कभी माफ़ नहीं कर पाया और दिव्या ने भी कभी आशीष को नहीं बताया कि हितेश ने उसके साथ क्या क्या किया था? क्योंकि वो यह बात बहुत अच्छी तरह से जानती थी कि अगर उसने आशीष को सब कुछ सच सच बता दिया तो आशीष उसे कभी माफ़ नहीं करेगा ।।

धन्यवाद …

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