दोस्त के बाप के साथ उसकी माँ को चोदा

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प्रेषक : आदित्य …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम आदित्य है और आज में आप लोगों के लिए अपने जीवन में हुई सच्ची और बहुत ही मजेदार चुदाई की घटना लेकर आया हूँ, जिसमें मैंने अपने दोस्त के पापा के साथ मिलकर उसी की माँ की जमकर चुदाई की है। मेरे दोस्त का नाम प्रेम था। दोस्तों ये कहानी मेरे पहली बार सेक्स करने की है और उस समय में परीक्षा की तैयारी कर रहा था। उन दिनों दिसंबर का महीना था, उन दिनों हल्की फुल्की ठंड थी। दोस्तों अब में आपका समय ज्यादा ख़राब ना करते हुए सीधा अपनी कहानी पर आता हूँ। दोस्तों में उन दिनों अपने दोस्त के साथ मिलकर उसके घर पर पढ़ने जाया करता था, क्योंकि मुझे अपने एग्जॉम की तैयारी करनी थी। मेरा दोस्त भी मेरी ही क्लास में था और उसका भी एग्जॉम मेरे ही साथ था, इसलिए हम दोनों एक साथ पढ़ते थे।

दोस्तों जब में उसके घर जाता था तो में उसकी माँ को देखता था, क्या बताऊँ दोस्तों उसकी माँ क्या मस्त माल थी? वो बहुत सेक्सी और सुंदर थी और में उनको आंटी कहकर बुलाता था। मुझे तो उनको देखकर यह लगता था कि प्रेम के पापा उसकी माँ को रोज चोदते होंगे और क्यों ना चोदे? क्योंकि जिसकी इतनी सेक्सी पत्नी होगी, वो तो चोदेगा ही। उनके बूब्स का साईज इतना बड़ा था कि उनके ब्लाउज से कब बाहर आ जाये? और उनकी कमर का क्या कहना? और जब में उनको पीछे से देखता तो क्या बड़ी-बड़ी गांड थी उनकी? दोस्तों मुझे तो लगता था कि काश में इनको चोद पाता, इनकी गांड को जमकर मार पाता। अब में प्रेम के घर पढ़ने के बहाने आंटी को देखने जाया करता था। अब जब में और प्रेम पढ़ते रहते थे, तो आंटी हम लोगों के लिए चाय नाश्ता लेकर आती थी।

फिर जब वो मुझे चाय देने के लिए झुकती थी, तो उनके ब्लाउज में से उनके बूब्स दिखने लगते थे, जिसको देखकर मेरा तो दिन ही बन जाता था। दोस्तों यह एक दिन की बात है, जब में प्रेम के घर गया था, मुझे उससे कॉपी लेनी थी, जो मैंने उसे दी थी। दोस्तों फिर जब में उसके घर गया तो मैंने देखा कि शायद प्रेम घर पर नहीं था। तो तब मैंने आंटी को आवाज लगाई, लेकिन वो आई ही नहीं। तो तब में उनके बैडरूम की तरफ गया तो मैंने देखा कि उनके बैडरूम का दरवाजा खुला था। फिर मैंने रूम में अंदर झांका तो मैंने देखा कि आंटी अपने बेड पर नंगी लेटी हुई थी और अपनी चूत को अपनी उंगलियों से सहला रही थी और आह, आह की आवाज निकाल रही थी। अब वो बहुत जोश में थी और दोस्तों अब यह सब देखकर तो मेरा लंड भी एकदम से खड़ा हो गया था। अब मुझे आंटी को ऐसे देखकर बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर तभी अचानक से आंटी की नजर मुझ पर पड़ गयी और उन्होंने जल्दी से उठकर अपनी नाइटी पहनी और मुझसे पूछा कि क्या हुआ बेटा? तुम्हें कुछ काम है। तब मैंने कहा कि आंटी प्रेम घर पर है क्या? तो तब उन्होंने कहा कि प्रेम घर पर नहीं है। तब मैंने कहा कि मुझे उससे कॉपी लेनी थी। तो तब आंटी ने कहा कि तुम रुको, में लाकर देती हूँ और मुझसे कहा कि बेटा तुमने जो देखा वो किसी से मत कहना। तब मैंने कहा कि ओके आंटी और फिर आंटी वो कॉपी लेने प्रेम के कमरे में चली गयी। अब तो मेरे दिमाग में बस उनकी चूत और बूब्स ही दिखाई दे रहे थे और अब में अपने लंड को कपड़े के अंदर ही हिला रहा था और अब मुझे बहुत मजा आ रहा था। तभी आंटी आ गयी और फिर उन्होंने मुझे ऐसे देखा। अब वो मुस्कुराने लगी थी, तो तब में शर्मा गया और आंटी से कहा कि में तो ऐसे ही कर रहा था। तब आंटी ने कहा कि बेटा में सब समझती हूँ और इतना कहकर मुझे अपने रूम के अंदर ले गयी और मुझे अपने बेड पर पटक दिया और मेरे ऊपर ही लेट गयी थी।

अब उनके बड़े-बड़े बूब्स मेरे सीने से टकराने लगे थे, जिससे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। दोस्तों अब में समझ गया था कि अब क्या होने वाला था? में जिस काम के सपने देखता था, वो आज होने वाला था। अब आंटी बहुत जोश में थी और अब उनको देखकर ऐसा लग रहा था कि वो आज मुझे पूरा खा जाएंगी। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि में कब से चाहती थी कि मुझे कोई जवान लड़का चोदे? में कब से चाहती थी कि तू मुझे चोदे आदित्य बेटा? लेकिन बोलती तो कैसे? तो तब मैंने कहा कि में भी आंटी आपको चोदने के सपने रोज देखता था, लेकिन कहता भी तो कैसे? आप मेरे दोस्त की माँ जो थी। फिर आंटी ने कहा कि ये सब बातें छोड़ो बेटा, आज मुझे बस तुम चोद दो। तो तब मैंने कहा कि हाँ बिल्कुल आंटी और में आज आपको ऐसे चोदूंगा कि आपको ऐसे अंकल ने भी नहीं चोदा होगा।

फिर मैंने उनको अपने ऊपर से हटाया और बेड पर पटककर उनकी नाइटी का नाड़ा खोला तो तब मैंने देखा कि उन्होंने ना ही ब्रा पहनी थी और ना ही पैंटी। अब में अपनी उंगलियों से उनकी चूत को सहलाने लगा था। अब उनको बहुत मज़ा आ रहा था। अब में अपनी एक उंगली उनकी चूत में अंदर बाहर करने लगा था, जिससे उन्हें बहुत मज़ा आने लगा था। अब उनके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी थी और अब वो आह, आह, ऊह, आई की आवाजें निकालने लगी थी। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने देखा कि उनकी चूत से पानी आने लगा है। तो तब में समझ गया कि वो झड़ने वाली है। फिर मैंने झट से अपना मुँह उनकी चूत पर लगा दिया और अपनी जीभ से उनकी चूत को चाटने लगा था। तभी आंटी झड़ गयी और फिर मैंने उनका सारा पानी पी लिया। दोस्तो मैंने ऐसा कभी नहीं पिया था, वो थोड़ा नमकीन सा था। अब आंटी तो झड़ चुकी थी, लेकिन मेरा लंड खड़ा का खड़ा था। फिर मैंने आंटी से कहा कि आंटी आप तैयार हो मेरा लंड लेने के लिए? तो तब आंटी ने कहा कि हाँ मेरे बेटे, मेरे राजा जल्दी दे दो अपने लंड को, में तुम्हारा लंड लेने के लिए तड़प रही हूँ। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकालने के लिए अपनी पैंट खोली। तो तब मैंने किसी के आने की आवाज सुनी, तो तब मुझे लगा कि शायद प्रेम आ गया है। तब मैंने झट से अपनी पैंट का बटन लगाया और आंटी से कहा कि शायद प्रेम आ गया है। फिर उन्होंने झट से अपने कपड़े पहने और मुझसे कहा कि तुम यही कही छुप जाओ, में देखती हूँ। फिर वो गयी तो उन्होंने देखा कि प्रेम आ चुका था। फिर उन्होंने प्रेम से कहा कि बेटा आ गए, जाओ हाथ मुँह धो लो, में खाना लगाती हूँ। अब प्रेम बाथरूम में हाथ मुँह धोने चला गया था। फिर आंटी कमरे में आई और मुझसे कहा कि आज शायद हमारा सपना पूरा नहीं होगा, तुम अभी जाओ, लेकिन कल तुम रात को पढ़ने के बहाने आना, में प्रेम को बोल दूंगी कि कल रात तुम पढ़ने आओगे और रातभर यही रहोगे, तो तब हम अपने सपने को पूरा करेंगे। तो तब मैंने कहा कि ठीक है आंटी। अब में वहाँ से चला आया था। अब में अपने घर आ गया था और बस यही सोचने लगा कि कल रात कब होगी? फिर जब वो रात आ गयी, जिस दिन में आंटी की चूत फाड़ने वाला था।

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फिर मैंने अपना बैग लिया और प्रेम के घर जाने लगा तो तभी मेरी माँ ने पूछा कि कहाँ जा रहे हो? तो तब मैंने कहा कि माँ में प्रेम के घर जा रहा हूँ और आज शायद रात को घर ना आऊँ। प्रेम मेरा सबसे अच्छा दोस्त था, इसलिए माँ मुझे उसके घर जाने से नहीं रोकती थी और प्रेम का घर मेरे घर से ज्यादा दूर नहीं था। अब में प्रेम के घर जाने के लिए निकल गया था। फिर में प्रेम के घर पहुँच गया और दरवाजा खटखटाया। तब आंटी ने दरवाजा खोला और बोली कि आ गए बेटा। तब मैंने कहा कि हाँ आंटी, में आ गया और फिर में अंदर आया। अब में और प्रेम पढ़ने के लिए बैठ गए थे। अब हमें पढ़ते-पढ़ते बहुत रात हो गयी थी। फिर आंटी प्रेम और मेरे पीने के लिए दूध लाई और कहा कि बहुत रात हो गयी है, इसे पियो और जाकर सो जाओ, अब कल पढ़ लेना। फिर हमने दूध पीया और फिर में और प्रेम कमरे में सोने चले आए, वो कमरा प्रेम का था। तभी मैंने देखा कि प्रेम को बहुत तेज नींद आ रही थी। फिर में और प्रेम सो गए।

फिर मैंने देखा कि प्रेम गहरी नींद में सो गया था। अब मुझे नींद आ ही नहीं रही थी, क्योंकि मुझे आज आंटी को चोदना जो था। फिर मैंने देखा कि थोड़ी देर के बाद आंटी कमरे में आई। अब मैंने दरवाजा नहीं लगाया हुआ था। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे कमरे में चलो। तब मैंने कहा कि वहाँ तो अंकल भी होंगे। तब आंटी ने कहा कि मैंने प्रेम और उनको नींद की दवाई दूध में मिलाकर पी दी है, वो सो रहे है। फिर में खुश होकर उनके साथ उनके रूम में चला आया। तब मैंने देखा कि अंकल सो रहे थे। अब आंटी अपने कपड़े खोलने लगी थी, आज उन्होंने नाइटी के अंदर बहुत ही सेक्सी सी ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी। अब वो सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी और बहुत ही सेक्सी लग रही थी। अब मेरा लंड बिल्कुल खड़ा हो गया था। फिर आंटी ने मुझे पलंग पर गिराया और फिर मेरी पैंट और शर्ट खोलने लगी थी। अब में भी सिर्फ अपने अंडरवियर में था। फिर आंटी ने मेरे लंड को पकड़ लिया और मेरी अंडरवियर के ऊपर से ही हिलाने लगी थी। अब मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था। फिर मैंने आंटी से कहा कि मेरा लंड आप अपने मुँह में लेकर चूसो। तब आंटी ने मेरे लंड को मेरी अंडरवियर में से बाहर निकाला और जोर-जोर से चूसने लगी। दोस्तों मुझे तो बस अब जन्नत का अहसास हो रहा था। फिर लगभग 15-20 मिनट के बाद मैंने आंटी के मुँह में ही अपना सारा पानी छोड़ दिया। अब आंटी का मुहँ मेरे लंड से निकले गर्म-गर्म सफ़ेद रंग के पानी से भर चुका था। फिर आंटी ने मेरा सारा पानी पी लिया और कहा कि मज़ा आ गया आदित्य बेटा। अब मेरा लंड फिर से उनकी चूत फाड़ने के लिए तैयार हो चुका था। फिर आंटी ने कहा कि अब मेरी चूत में अपना लंड डालकर इसकी भूख शांत कर दो, ये बहुत तड़प रही है बेटा, प्लीज। तब मैंने कहा कि रुको तो मेरी रानी, इतनी जल्दी भी क्या है? अब में अपनी एक उंगली उनकी चूत में डालकर अंदर बाहर करने लगा था। अब आंटी तड़पने लगी थी और बोली कि प्लीज बेटा अब यह उंगली से नहीं तुम्हारे मोटे लंड से ही शांत होगी।

फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत पर रखा और एक ज़ोरदार धक्का मारा, लेकिन मेरा लंड अंदर नहीं गया था। फिर मैंने अपने लंड पर थोड़ा थूक लगाया और फिर एक और ज़ोरदार धक्का मारा तो मेरा लंड पूरा अंदर घुस गया, जिससे आंटी के मुँह से जोरदार चीख निकल गयी थी और अब उनकी आंखों में से आँसू निकल गए थे। तब मैंने देखा कि अंकल अचानक से उठ गए है तो तब में डर गया। फिर उन्होंने मुझे और आंटी को देखा कि हम लोग बिल्कुल नंगे थे और मेरा लंड आंटी की चूत के अंदर था। अब में सोचने लगा था कि अब क्या होगा? फिर आंटी ने अंकल से कहा कि उठ गए जानू, तो आइए और आप भी शुरू हो जाइए और फिर अंकल भी पूरे नंगे हो गए। तब मैंने देखा कि अंकल का लंड मुझसे बड़ा और मोटा था। फिर अंकल हम दोनों के पास आ गए और आंटी के बूब्स को मसलने लगे थे।

फिर मैंने अंकल से पूछा कि में आंटी को चोद रहा हूँ, इससे आपको कोई परेशानी नहीं है क्या? तो तब उन्होंने कहा कि नहीं बेटा, बल्कि में तो चाहता था कि में अपनी इस चुदक्कड़ बीवी को किसी के साथ मिलकर चोदूं, ताकि इसकी प्यास बुझ सके। अब क्या था? तो में फिर से आंटी को चोदने में लग गया। अब में आंटी के ऊपर लेटकर उनकी चूत में अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा था। अब अंकल यह सब देख रहे थे और मुझसे बोले की बेटा इससे पहले तुमने किसी को चोदा है? तो तब मैंने कहा कि नहीं। तब उन्होंने कहा कि तुमको देखकर लग नहीं रहा है कि यह तुम्हारा पहला सेक्स है। तब मैंने कहा कि मैंने यह सब ब्लू फ़िल्म देखकर सीखा है अंकल। तो फिर अंकल ने कहा कि बेटा तुमने कभी दो आदमियों को एक औरत को एक साथ चोदते हुए देखा है। तब मैंने कहा कि नहीं, तो तब अंकल ने कहा कि आज देख भी लो और अनुभव भी कर लो। फिर अंकल आंटी की गांड की छेद में अपनी एक उंगली को डालकर अंदर बाहर करने लगे।

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अब आंटी दर्द के मारे चिल्ला रही थी और रोने लगी थी, क्योंकि उनकी गांड में बहुत दर्द हो रहा था। अब थोड़ी देर के बाद आंटी को मज़ा आने लगा था। तो तब आंटी ने कहा कि मेरे दोनों राजा मेरी चूत और गांड को आज फाड़ डालो, तुम दोनों मुझे एक साथ चोदो। फिर क्या था? अंकल पलंग पर नीचे लेट गए। अब उनके ऊपर आंटी लेट गयी थी और अपनी चूत में अंकल का लंड लेकर ऊपर नीचे होने लगी थी। फिर अंकल ने मुझसे कहा कि बेटा तुम भी चलो पीछे से शुरू हो जाओ, मैंने तुम्हारे लिए ही तो इसकी गांड के छेद को बड़ा किया है और फिर अंकल ने पूछा कि तुम्हें अपनी आंटी की गांड मारने में दिक्कत तो नहीं है ना? तो तब मैंने कहा कि नहीं अंकल, बल्कि मुझे तो और खुशी होगी। फिर मैंने आंटी की गांड के छेद पर अपना लंड रखा और एक ज़ोर से झटका मारा, लेकिन मेरा लंड अंदर नहीं गया था। तब अंकल ने कहा कि ये अंदर ऐसे थोड़े जाएगा और फिर अंकल ने मेरे लंड पर बहुत सारा अपना थूक लगाया और बोले कि अब कोशिश करो। तब मैंने फिर से एक ज़ोर का धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड आंटी की गांड के अंदर चला गया था।

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फिर में और अंकल आंटी को जानवरो की तरह चोदने लगे। अब आंटी बहुत चिल्ला रही थी, क्योंकि एक साथ उनके दोनों छेदों में दमदार डंडा जो घुसा हुआ था। अब 20-25 मिनट तक ऐसे ही चोदने के बाद आंटी बहुत जोश में आ गयी और बोलने लगी कि और ज़ोर से करो मेरे हरामजादो और ज़ोर से करो, आह, आह, ओह माई गॉड। फिर मैंने और अंकल ने अपनी स्पीड और बढ़ाई और आंटी को ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगे थे। अब पूरे कमरे में फच-फच और आह, आह, ऊह, ऊह, ऊई की आवाज गूँज रही थी। अब में और अंकल दोनों झड़ने वाले थे और फिर थोड़ी देर के बाद में मैंने अपना सारा पानी आंटी की गांड में ही छोड़ दिया और अब अंकल ने भी अपना सारा पानी आंटी की चूत में ही छोड़ दिया था। अब लंड बाहर निकालते ही आंटी की चूत और गांड में से पानी बहने लगा था। फिर आंटी ने मेरा और अंकल का लंड अपने मुँह से चाट-चाटकर साफ किया। फिर हम सब एक दूसरे के साथ पलंग पर सो गए। अब मुझे जब भी कोई मौका मिलता है तो में आंटी की गांड और चूत मारने आ जाया करता हूँ और हम दोनों खूब मजा करते है ।।

धन्यवाद …

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