दोस्त की बीवी निशा की ठुकाई

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प्रेषक : राहुल …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राहुल है और में पटना बिहार का रहने वाला हूँ। दोस्तों यह घटना मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है जो मेरे दोस्त की पत्नी के साथ हुई उसकी चुदाई के ऊपर आधारित है जो दिखने में बहुत ही हॉट सेक्सी लगती थी। धीरे धीरे वो मुझे पसंद आने लगी और वो भी मुझे मन ही मन प्यार करने लगी और फिर उसके बाद हम दोनों के बीच क्या हुआ में अब आप सभी को अपना और उसका परिचय देते हुए पूरी तरह विस्तार से सुनाता हूँ। दोस्तों मेरा नाम राहुल है में 30 साल का हूँ में दिखने एकदम ठीक ठाक लगता हूँ और मेरा रंग गोरा मेरी लम्बाई 5.7 इंच और मेरा लंड 7 इंच लंबा 2 इंच मोटा भी है जिसको देखकर किसी भी चूत का पानी बाहर आने को बैचेन हो जाए और मुझे वैसे शुरू से ही सेक्स में बहुत रूचि रही है, में हमेशा किसी के साथ चुदाई करने के लिए बड़ा ही व्याकुल रहता हूँ और उस दिन भगवान ने मेरे मन की बात को सुनकर वो मौका दिया, जिसके बारे में सोचकर में आज भी बहुत खुश हो जाता हूँ और मेरे अंदर एक खुशी की लहर दौड़ जाती है। दोस्तों यह कहानी तीन साल पुरानी है मेरी पड़ोसी भाभी जिसका नाम निशा है उनकी लम्बाई 5.4 इंच है और वो उम्र में 32 साल की है और उनके फिगर का आकार 36-32-36 है वो बहुत गोरी और आकर्षक है और निशा की गांड बड़ी भारी और बूब्स भी ठीक वैसे ही है।

दोस्तों मेरा एक पड़ोसी जिसका नाम सागर है। उसकी शादी को हुए तब चार साल तीन महीने हुए थे पिछले 6 महीने पहले उसके काम में बहुत तेज़ी आने की वजह से सागर रात को भी देर रात तक काम करता था और उसको अपने इस काम की वजह से शहर से भी कई बार बाहर जाता पड़ता। दोस्तों मेरे घर और उसके घर की छत के बीच सिर्फ़ एक तीन छत का फासला था, उस दिन में और उसकी पत्नी मेरी निशा भाभी बहुत देर तक बातें करते रहे जिसकी वजह से हमारे बीच एक दोस्त जैसा रिश्ता बन गया। वो अब मुझसे सभी बातें खुलकर बताने लगी थी और में भी उसके साथ बड़ी मस्ती मजाक के साथ अब ऐसे बातें भी कहने लगा था जिनका दो मतलब होता है और जिसको ठीक तरह से समझकर भी वो बुरा नहीं मानती, बस हल्का सा मुस्कुरा जाती। फिर मैंने उन्हे उसी समय बातों ही बातों में पूछ लिया क्या आपको कभी सागर की कमी महसूस नहीं होती? तब उसने थोड़ा सा उदास होकर कहा कि उनके यहाँ मेरे साथ रहने पर भी में उनकी कमी को हमेशा महसूस करती हूँ। अब मैंने उनसे पूछा कि ऐसा क्यों? तब उसने एक गहरी सांस ली और कहा कि मेरे नसीब में पति का सुख कभी भी नहीं है, उनके मुहं से यह बात सुनकर एकदम चकित होकर मैंने उनको कहा कि आप ऐसा क्यों कहती हो? क्या वो आपको प्यार नहीं करता? अब वो कहने लगी नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, लेकिन बात कुछ ऐसी है जिसको तुम नहीं समझ सकते क्योंकि तुम अभी शादीशुदा नहीं हो ना इसलिए। फिर मैंने उनसे बहुत बार पूछा तब जाकर वो उदास होकर मुझसे कहने लगी कि वो कभी भी मुझे ठीक तरह से संतुष्ट नहीं कर पाते।

अब में उनके इतने से इशारे में ही तुरंत समझ गया कि इसके पति से इसकी चुदाई ठीक से नहीं होती और वो इसको चुदाई के वो मज़े नहीं दे पाता जिसके लिए यह बहुत तरस रही है, इसको अपने पति से मस्त मज़ेदार चुदाई की उम्मीद है जो शायद इसकी अभी तक नहीं हुई और इसलिए यह इतना तरस रही है। दोस्तों उनका बेडरूम मकान के ऊपर वाले हिस्से में ही था। यह सभी बातें सुनकर मैंने मन ही मन सोच लिया था कि मेरे पास इसकी चुदाई करने का सबसे अच्छा मौका बस आज ही है, इसलिए मैंने हिम्मत करके आगे बढ़ने का विचार किया और में उनको कहने लगा आपको इतना सोचने या इस समस्या के लिए इतना गहराई तक सोचने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि आपको लगता है कि आपको कुछ कमी महसूस हो रही है तो में किस दिन आपके काम आऊंगा, मेरा भी तो कोई फर्ज बनता है, आप इतना मत सोचो, आपके साथ में हूँ ना। फिर मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो शरमाते हुए कहने लगी कि तुम क्या करोगे और फिर मैंने उनसे पूछा कि आप रात के समय दरवाजा खुला रखकर सोती है, यह बात कहते हुए में ऊपर खड़ा हो गया और उस समय मैंने सिर्फ़ बरमूडा पहना था। उस समय मेरा लंड उसमे तंबू बना हुआ था और मुझे उसको बस वही दिखाना था, इसलिए में अब अपने लंड को एक हाथ से मसलने लगा और अब मैंने उससे कहा आप बहुत सुंदर हो और मुझे आप बहुत अच्छी भी लगती हो यह बात में आपको बहुत समय से बताने के बारे में सोच रहा था, लेकिन मुझे आज मौका मिला है।

फिर उसने पहले मुझे अब बड़े ही अजीब तरह से ऊपर से नीचे तक देखा और फिर वो मेरे लंड वाले हाथ को देखकर मुस्कुराने लगी। वो कुछ देर तक लगातार घुरकर बस मेरे लंड को ही देख रही थी और में उसके मन में मेरे लिए चल रहे अब उन सभी विचार बातों को ठीक तरह से समझ चुका था। मुझे पूरी तरह से समझ आ चुका था कि इसको अब मुझसे क्या चाहिए और यह मेरे साथ चुदाई करने में कोई भी नाटक या नखरा नहीं करेगी और यह सभी बातें मन में सोचकर मैंने उससे कहा कि आप क्या रात को इसी कमरे में सोती है? वो कहने लगी हाँ क्यों क्या हुआ तुम यह सब क्यों मुझसे पूछ रहे हो क्यों तुम्हारे क्या इरादे है? तो मैंने भी बिना किसी डर या संकोच के उससे कह दिया कि भाभी क्या में आपको प्यार कर सकता हूँ? वो झट से बोल पड़ी नहीं, अगर किसी को पता चल गया तो क्या होगा? मैंने उनको बड़े प्यार से समझाते हुए कहा कि कैसे किसी को पता चलेगा? यह काम बस हम दोनों के बीच में होगा और वैसे ही इसका मज़ा तो मुझसे ज्यादा आपको मिलने वाला है हो सकता है कि आपके मन की इच्छा मेरे साथ पूरी हो जाए में आपको इतना प्यार करूंगा कि आप मेरे साथ सदा खुश ही रहोगी।

फिर वो मेरे मुहं से यह सभी बातें सुनकर कुछ बातें सोचती रही और उसके बाद वो कहने लगी, लेकिन नहीं मुझे डर लगता है, हम इस मज़े के चक्कर में बदनाम ना हो जाए, यह सब बहुत गलत है और उस समय जब वो मुझसे बात कर रही थी तब भी उनकी नज़र मेरे लंड पर ही टिकी हुई थी और अब मैंने उसके मन की हालत उस इच्छा को समझते हुए उससे कहा कि आप आज रात को यह छत का दरवाजा खुला ही रखना और मेरा इंतजार करना में जरुर आऊंगा और यह सभी बात सुनकर उसने मुझसे कुछ नहीं कहा और में लगातार उसकी गोरी उभरी हुई छाती को ही देखे जा रहा था और फिर वो अंदर चली गयी। दोस्तों में मन ही मन बहुत खुश होता हुआ अपने कमरे में आकर उस मेरी चुदाई की प्यासी पड़ोसन के साथ आज रात होने वाली उस चुदाई के बारे में सोचकर बड़ा खुश होता रहा और मेरा मन अब उसकी चुदाई के लिए बड़ा ही व्याकुल हो चुका था। मैंने अपने मन में ठान लिया था कि आज मुझे कैसे भी करके उसकी मस्त मज़ेदार चुदाई करके उसकी चुदाई की प्यास चूत की उस आग को बुझाना था, जिसमे वो शादी हो जाने के बाद भी अब तक जल रही थी।

फिर जब देर रात को सभी लोग सो गये तो मैंने अपनी छत पर जाकर देखा कि उसके कमरे के दरवाजा खुला हुआ था। मैंने उससे जैसा कहा उसने वैसा ही किया, जिसका मतलब एकदम साफ था कि उसकी तरफ से हम दोनों के बीच इस काम को करने के लिए हाँ है और अब में खुश होकर अपने छत की दीवार से कूदकर में निशा के पास उसकी छत पर चला गया और मुझे पहले से ही पता था कि मेरा वो दोस्त सागर जिसकी पत्नी की चुदाई के सपने में देख रहा हूँ वो उस रात को अपने काम की वजह से पटना से बाहर था और अभी वो दो तीन दिन बाद ही आने वाला था और मैंने तो ठान ही लिया था कि आज कुछ तो में जरुर इसके साथ करके ही रहूँगा और सभी के सो जाने के बाद मैंने एक कोशिश की और में पहले उनके करीब जाकर बैठ गया, वो उस समय लेटी हुई थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब मैंने नीचे झुककर उसकी तरफ देखा वो अपनी दोनों आखों को बंद करके लेटी हुई थी। मैंने धीरे से उनके बूब्स पर अपने एक हाथ को रखकर धीरे से बूब्स को सहलाया और उसकी तरफ से किसी भी तरह का विरोध ना ही हलचल को देखकर में तुरंत समझ गया कि वो बस सोने का नाटक कर रही है। उसको मेरा इस तरह से छूना और यह काम अच्छा लगने लगा है और अब में धीरे धीरे उसके बूब्स को दबाने भी लगा था और मुझे ऐसा लग रहा था कि वो नींद से उठी हुई थी और वो भी मेरे साथ मज़े लेकर गरम होकर मूड में आ रही है। फिर मैंने उनकी बड़े गले वाली कमीज़ में अपने हाथ को अंदर डालना शुरू किया और जब मेरा हाथ उनके मुलायम बूब्स पर गया तो मेरे हाथ में उनका मुलायम वाली ब्रा थी जो मुझे मेरे इस काम को करने में रुकावट पैदा कर रही थी। इस काम को करते हुए मेरी सांसे, धड़कने तेज हो चुकी थी और मेरा शरीर पसीने से नहा चुका था। फिर में सही मौका देखकर अपनी उँगलियों से उनकी ब्रा को हटाने की कोशिश करने लगा, लेकिन में इस काम को करने में नाकाम रहा, क्योंकि मेरे ऐसा करने से वो थोड़ा सा हिलने लगी और मैंने झट से अपना हाथ हटा लिया, लेकिन कुछ देर बाद में खुद ही बिल्कुल हैरान हो गया, क्योंकि अब मेरा लंड पर निशा का हाथ था और देखते ही देखते उसने अपने मुलायम हाथ से हल्के से मेरे लंड को मसलना शुरू किया।

दोस्तों मुझे तो बिल्कुल भी यकीन ही नहीं आ रहा था, उनके ऐसा करने से मुझे भी जोश आ गया और मैंने उन्हे अब अपनी पेंट की चैन को खोलकर अपना लंड उनके हाथ में दे दिया। उसके बाद उनसे कहा कि यह लो मसलो मेरे लंड को और उन्होंने सच में मेरे लंड को मसलना शुरू किया, जिसकी वजह से में तो जोश में अपकर अपने आपे में नहीं रहा और अब हम दोनों एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे। में तो जल्दी से निशा को अपने सामने पूरी नंगी उसको देखकर बहुत खुश हो गया और उसकी चूत को देखा तो निशा ने अपनी चूत के बालों को पहले से ही साफ करके अपनी चूत को एकदम चिकनी बड़ी कामुक बना रखी थी। मैंने उसकी चूत पर हाथ फैरना शुरू किया। फिर मेरे हाथ में उसकी चूत का चिकना जूस आ गया जिसको छूकर मैंने निशा को पूछा क्या तुम अब कुछ महसूस कर रही हो? तो वो बोली कि हाँ में बहुत कुछ महसूस कर रही हूँ। मुझसे अब बिल्कुल भी रहा नहीं जाता, अब तो राहुल तुम मेरी जी भरकर जमकर चुदाई कर दो और मेरे मन की इस इच्छा को आज तुम पूरा कर दो, प्लीज मुझे तुम इतना मत तरसाओ, क्यों तुम मुझे इतना पागल बना रहे हो? प्लीज जल्दी से अब कुछ करना शुरू करो।

दोस्तों बस मैंने यह बात उसके मुहं से सुनते ही निशा को अपने दोनों हाथों से उठाया और उसको बेड पर लेटा दिया उसके बाद में निशा के नरम गुलाबी रसभरे होंठो पर में किस करने लगा। फिर उसके दोनों बूब्स को अपने हाथों से पकड़कर बहुत प्यार से मसलना शुरू किया और फिर एक निप्पल को अपने मुहं में लेकर बड़े मज़े से चूसा। अब तो निशा गरम होकर जोश में आकर बहुत चुदाई की कमी महसूस करने लगी गयी और फिर वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज जान अब तुम मेरी चूत को चाटो, मैंने निशा के दोनों पैरों को पूरा फैलाया और उसकी चूत के एकदम बीच में अपने होंठ को लगाया और उसके बाद में चूत के होंठो को चूसने लगा और चूत के दाने को में अपनी जीभ से टटोलने लगा। फिर उसके बाद मैंने अपनी पूरी जीभ को चूत में डाल दिया और दाने को अपने दोनों होंठो के बीच में लेकर चूसने लगा, जिसकी वजह से अब तो निशा मज़े मस्ती की दूसरी दुनिया में थी।

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फिर वो मुझसे बोली कि वाह जान तुम्हे एक औरत की चुदाई करना बहुत अच्छी तरह से आता है वाह तुमने तो मुझे खुश ही कर दिया वाह मज़ा आ गया हाँ ऐसे ही तुम लगे रहो और फिर मैंने करीब दस मिनट तक निशा की चूत को चाटा और दाने को अपने मुहं में लेकर चूसा तभी निशा का पहली बार झड़ने का नंबर आ गया इसलिए वो जोश में आकर मेरा सर अपनी चूत पर दबाकर और भी तेज झटके लेने लगी और में वैसे ही मज़े देता हुआ उसकी चूत को चाट रहा था। उसका करीब एक मिनट तक वो झड़ने का काम चला और में उसके पानी को चूसता रहा। उसके बाद फिर निशा ने मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और बड़े ही प्यार से वो मेरे लंड को चूसने लगी और साथ ही चारो तरफ अपना हाथ लंड पर घुमाने लगी और करीब मेरे आधा लंड चार इंच अपने मुहं में भर लिया। उसने अपनी जीभ से मेरा पूरा लंड चाटा और यह काम करने के बाद वो मुझसे बोली अब तुम मेरी चुदाई करो, में बहुत तड़प रही हूँ और मुझसे अब ज्यादा देर रुकना बड़ा मुश्किल होता जा रहा है।

फिर यह बात सुनकर उसका जोश देखकर मैंने तुरंत ही निशा की गांड के नीचे एक तकिया रख दिया और उसके दोनों पैरों को पूरा फैला दिया फिर में अपने लंड को जब नीचे लेकर आया तो निशा ने मेरा लंड अपने हाथ से पकड़कर अपनी चूत के छेद पर रख दिया। तब मैंने लंड को उसकी चूत में डालने के लिए दबाव दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उसकी चूत के अंदर घुस गया। शायद दर्द की वजह से निशा की आखें बड़ी हो गई और मैंने उससे पूछा क्या तुम्हे कोई तकलीफ़, दर्द तो नहीं हो रहा है? तो निशा बोली कि नहीं सिर्फ़ मुझे ऐसा अहसास हुआ जैसे मेरी चूत में कुछ जलन सी महसूस हुई हो। वो जो कुछ भी था बहुत ही अजीब सा था, ऐसा मुझे पहली बार हुआ है। अब मैंने उसकी बात की तरफ से अपने ध्यान को बिल्कुल हटाते हुए अपने लंड का उसकी चूत पर और भी दबाव दिया, जिसकी वजह से मेरा आधा लंड उसकी चूत में जा चुका था और फिर में निशा के होंठो पर किस करने लगा और धीरे धीरे में अपने लंड को अंदर बाहर करके मैंने उसकी चुदाई करना शुरू किया।

फिर कुछ देर बाद सही मौका देखकर मैंने ज़ोर से एक धक्का मार दिया और उसी के साथ मैंने अपना पूरा 7 इंच लंड उसकी चूत में डाल दिया। अब निशा मेरे सर को पकड़कर लंड को अपनी चूत में अंदर बाहर कर रही थी और वो कुछ देर बाद मुझसे बोली कि ठहरो तुम ऐसे ही अपने लंड को मेरी चूत में थोड़ी देर रखो मुझे ऐसा बहुत मज़ा आता है। फिर मैंने अपने लंड को उसकी चूत में वैसे ही रखा और अब में उसके बूब्स को भी मसलने लगा था। फिर करीब दो मिनट के बाद निशा मुझसे बोली कि बस अब तुम जी भरकर जैसे तुम्हारी मर्जी हो मेरी चुदाई करो और मैंने अब अपने लंड को आधा से ज़्यादा उसकी चूत से बाहर निकालकर तेज गति के धक्के देकर अब में अपने लंड को उसकी चूत में अंदर बाहर करके चुदाई करने लगा था। मैंने पूरी बीस मिनट तक उसकी वैसे ही तेज धक्को के साथ चुदाई की और फिर निशा का दूसरी बार झड़ने का नंबर आया, इसलिए वो मुझे एकदम टाइट पकड़कर झटके लेने लगी। फिर मैंने भी अपनी तरफ से धीरे धीरे धक्को के साथ उसकी चुदाई को चालू रखा और करीब दो मिनट तक निशा का वो झड़ने का काम चला और फिर वो अपने दोनों हाथों को बेड पर फैलाकर मुझसे बोली वाह मेरी जान राहुल आप तो इस काम में गजब के अनुभवी हो। ऐसा मज़ा देकर सागर ने कभी भी मुझे नहीं चोदा। तुमने आज मुझे पूरी तरह से खुश संतुष्ट किया है तुम्हारे साथ मुझे सभी सुख वो ख़ुशी मिली है जिसको में बोलकर नहीं बता सकती कि में क्या महसूस कर रही हूँ।

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फिर मैंने उससे कहा कि मेरी जान अभी तुम्हारी यह चुदाई खत्म नहीं हुई है। मेरा वीर्य नहीं निकले तब तक यह खत्म होगी, निशा बोली हाँ मुझे पता है बस तुम अब अपनी इस जान को जी भरकर चोदो और मुझे बहुत मज़ा आता है। फिर मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर मेरा लंड पूरा उसकी चूत के बाहर निकाल दिया और उसके बाद लंड पर तेल लगाकर उसको चिकना कर लिया। फिर चूत में वापस डाला और अब तो वो भी जोश में आकर तेज तेज धक्के मारने लगी और निशा उस समय बहुत ही जोश में आकर पागल हो गयी। फिर वो मुझसे कहने लगी हाँ आज तुम फाड़ दो मेरी इस चूत को, पूरा लंड अंदर डाल दो, वाह मज़ा आ गया, जाने दो पूरा अंदर आह्ह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़। अब मुझे पसीना आने लगा और निशा अपनी साड़ी को लेकर मेरे चेहरे को साफ करने लगी और मुझे किस देने लगी। पूरे बीस मिनट तक मैंने उसकी खूब जमकर चुदाई के मज़े लिए और उसके बाद में उससे बोला कि जान अब में झड़ने वाला हूँ। तो निशा मुझसे कहने लगी कि हाँ ठीक है तुम अंदर ही अपने वीर्य को डालना, लंड को चूत से बाहर मत निकलना और फिर मैंने उसके कहने पर अपने लंड का वीर्य धक्को के साथ उसकी चूत में छोड़ना शुरू किया और उसकी चूत में मैंने गरम गरम गरम पिचकारी मारी तो निशा अपनी चूत में वीर्य की गरमी को महसूस करके बहुत खुश हो गई।

फिर भी मेरे साथ में आह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह्ह करती रही और उसका पूरा बदन अब झटके खाने लगा। फिर करीब दो मिनट तक हम दोनों वैसे ही पड़े रहे और उसके बाद में निशा के ऊपर ही लेट गया। करीब दो मिनट के बाद मेरा लंड नरम होने लगा था और मैंने उठकर अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाला। मेरा पूरा लंड मेरे वीर्य से भरा चमक मार रहा था और उसके बाद हम दोनों उठकर बाथरूम में चले गये। निशा टॉयलेट सीट पर बैठी और वो मेरे लंड को देखने लगी। निशा मुझसे बोली कि राहुल तुम तुम्हारे लंड के वीर्य को तो देखो यह कितनी सारी मात्रा में निकल रहा है और मेरे पति सागर का एक चम्मच भी नहीं आता। फिर मैंने अपना लंड साबुन लगाकर मसलकर अच्छे से धोया और उसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहन लिए। उसके बाद मैंने निशा को अपनी बाहों में लेकर उसको बहुत जमकर किस करना शुरू किया और उससे पूछा क्या तुम्हारा यह राहुल चुदाई के लायक है? तो निशा ने बड़े प्यार से मुझे चूमते हुए वो मुझसे बोली कि धन्यवाद इस चुदाई के लिए, अब तो में हमेशा तुम्हारे साथ ही अच्छी तरह अपनी चुदाई के मज़े लूंगी ।।

धन्यवाद …

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