दोस्त की मामी की गांड में थूक लगाया

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प्रेषक : अरमान …

हैल्लो दोस्तों, हमारे पड़ोस में मेरा एक दोस्त रवि रहता है, रवि पड़ोस में अकेला रहता है, उसके सभी पेरेंट्स गाँव में रहते है। फिर एक बार उसकी मामी किसी काम के सिलसिले से मुंबई आई और उसके घर पर करीब 2 महीने रही। अब सबसे पहले उसकी मामी के बारे में आप लोगों बता दूँ। उसकी मामी का नाम फरीदा है, वो करीब 40 साल की साँवली, सुड़ोल, शादीशुदा महिला है, वैसे तो वो हाउस वाईफ है, लेकिन गाँव में मशहूर समाज सेविका है, उसके चूतड़ और बूब्स काफ़ी बड़े-बड़े और भारी है, वो शक्ल सूरत से खूब सेक्सी और 30 साल से कम लगती है।

में अक्सर शनिवार या रविवार जो कि मेरी छुट्टी के दिन है, रवि के साथ गुजारता हूँ। अब जब से उसकी मामी आई है तब से में उसकी मामी से 2-3 बार मिल चुका हूँ। वो जब भी मुझसे मिलती तो मुझे अजीब निगाहों से देखती थी। मुझे देखकर उसकी नजरों में एक अजीब सा नशा छा जाता था, या यूँ कहिए उसकी नजर में सेक्स की चाहत झलक रही हो ऐसा मुझे क्यों महसूस हुआ था? यह में बता नहीं सकता हूँ, लेकिन मुझे हमेशा ही लगता था कि वो नजरों ही नजरों से मुझे सेक्स की दावत दे रही हो।  अब में जब भी उनसे मिलता तो कम ही बातचीत करता था, मगर जब वो बातें करती तो उनकी बातों में दोहरा अर्थ होता था जैसे अरमान तुम खाली समय में कुछ करते क्यों नहीं? तो तब मैंने कहा कि मामी जी क्या करूँ आप ही बताए? तो तब वो बोली कि तुम्हें खाली समय का और मौके का फ़ायदा उठाना चाहिए। तब मैंने कहा कि जरूर फायदा उठा लूँगा अगर मौका मिले तो।

तब वो बोली कि मौका तो कब से मिल रहा है? लेकिन तुम कुछ समझते नहीं और ना ही कुछ करते हो? अब में उनकी बातें सुनकर चौंक गया था और बोला कि मामी जी आपकी बातें मेरे दिमाग में नहीं घुस रही है। तब वो बोली कि देखो अरमान आज और कल यानि शनिवार और रविवार तुम्हारी छुट्टी होती है, तुम्हें कुछ पार्ट टाईम जॉब करना चाहिए, ताकि तुम्हारी आमदनी भी हो ज़ाएगी और टाईम पास भी होगा। अब इस तरह की दोहरे शब्दों में मामी जी बातें करती थी और वो जब भी मुझसे बातें करती थी, तब रवि या तो बाथरूम में होता या फिर किसी काम में व्यस्त होता था। फिर एक दिन जब में सुबह करीब 11 बजे रवि के घर पहुँचा तो घर पर उसकी मामी थी।

अब मुझे रवि कहीं नजर नहीं आया था। तब मैंने पूछा कि मामी जी रवि नजर नहीं आ रहा है, कहाँ गया वो? तो तब मामी बोली कि वो बाथरूम में कब से नहा रहा है? में उसका बाहर निकलने का इंतज़ार कर रही हूँ। तो तब में बोला कि लेकिन वो तो ज़्यादा समय बाथरूम में लगाता ही नहीं है और तुरंत 5 मिनट में आ जाता है। तब मामी हँसते हुए बोली कि अरे भाई  बाथरूम और बेडरूम ही तो ऐसी जगह है जहाँ से कोई भी जल्दी निकलना नहीं चाहता है। तो में उसका कोई जवाब नहीं दे सका और वो भी चुप रही। फिर थोड़ी देर के बाद रवि बाथरूम से नहा धोकर बाहर आया। अब उसके बाथरूम से बाहर आते ही मामी ज़ी बाथरूम में घुस गयी थी और मेरी तरफ नशीली नजरों से देखती हुई बोली कि घबराना मत, में ज्यादा समय नहीं लगाऊँगी, आप लोग नाश्ते के लिए मेरा इंतज़ार करना और यह कहते हुए वो बाथरूम में घुस गयी और फिर करीब 20 मिनट के बाद वो तैयार होकर हमारे साथ नाश्ता करने लगी।

फिर नाश्ता करते वक्त रवि ने कहा कि यार आज मुझे ऑफिस के काम के सिलसिले में सूरत जाना है और में कल रात को या सोमवार दोपहर को वापस आऊंगा अगर सोमवार दोपहर को आऊंगा तो तुम्हें कल फोन कर दूँगा। अगर तुम्हें एतराज़ ना हो तो क्या तुम जब तक में नहीं आता हूँ? मेरे घर रुक जाना, ताकि मामी को बोर महसूस नहीं होगा और ना ही मुझे उनकी चिंता रहेगी, क्योंकि वो मुंबई में पहली बार आई हुई है। तब मैंने कहा कि ठीक है नो प्रोब्लम और फिर वो 12 बजे वाली ट्रेन से सूरत चला गया तो में भी उसे ट्रेन में बैठाने के लिए बोरीवली गया। अब जब में वापस आ रहा था तो एक रेस्टोरेंट में जाकर 3 पैग विस्की पी और वापस आकर रवि के घर गया। अब घर पर मामी जी हॉल में बैठकर कोई किताब पढ़ रही थी और मुझे नशीली निगाहों से देखा और बोली कि रवि को बैठने की सीट मिल गयी थी क्या? तो तब  मैंने कहा कि हाँ, क्योंकि ट्रेन बिल्कुल खाली थी।

तब मामी बोली कि मैंने खाना बना लिया है भूख लगी हो तो बोल देना। तो तब मैंने कहा कि अभी भूख नहीं है जब होगी तो बोल दूँगा। फिर मैंने मामी की निगाहों में अजीब सा नशा देखकर उनसे पूछा कि मामी जी आप करती क्या है? फिर थोड़ी देर तक मेरी नजरों से नजरे मिलती रही और फिर वो बोली कि समाज सेवा। यह सुनते ही अचानक से मेरे मुँह से निकल गया कभी हमारी भी सेवा कर दीजिए, ताकि हमारा भी भला हो जाए। तब वो हल्की सी मुस्कुराई और बोली कि तुम्हारी क्या प्रोब्लम है? तो तब मैंने कहा कि वैसे तो कुछ खास नहीं है, लेकिन बता दूँगा जब उचित समय होगा। फिर वो मेरी आँखो में आँखे डालती हुई बोली कि यहाँ तुम्हारे और मेरे अलावा कोई नहीं है बेझिझक अपनी प्रोब्लम कह डालो, शायद में तुम्हारी प्रोब्लम हल कर दूँ? तो तब मैंने कुछ नहीं कहा और उनसे पूछा कि आप किस प्रकार की समाज सेवा करती हो? तो तब वो बोली कि में जरूतमंद लोगों की जरूरत पूरी करने की मदद करती हूँ, उनकी समस्या हल करती हूँ।

तब मैंने कहा कि मेरी भी जरूरत पूरी कर दो ना। तब वो बोली कि जब वक्त आएगा तो कर दूँगी और फिर वो चुप रही और किताब पढ़ने लगी। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने उनसे पूछा कि मामी जी आप क्या पढ़ रही है? कुछ खास सब्जेक्ट है क्या इस किताब में? तो तब  वो मुस्कुराते हुई बोली कि इस किताब में बहुत अच्छा आर्टिकल है पत्नी और पति के सेक्स के विषय में और फिर वो पढ़ने लगी। फिर थोड़ी देर के बाद उसने पूछा कि अरमान ये सेडक्षन का मतलब क्या होता है? तो में सोचने लगा और वो मेरी तरफ कातिल निगाहों से देखती हुई बोली कि बताओं ना। अब मेरी समझ में नहीं आ रहा था की हिन्दी में उसे कैसे बताऊँ? अब वो लगातार मेरी तरफ देख रही थी। अब उसकी आँखों में नशा छाने लगा था। अब में भी उसे गोर से देख रहा था, उसके होंठ सूख रहे थे और वो अपने होंठो पर अपनी जीभ फैर रही थी। फिर मैंने सोचा कि आज मामी को पटाने का अच्छा मौका है। तो तब वो फिर से बोली कि बताओ ना, क्या मतलब होता है?

फिर उसकी इस अदा को देखते हुए मैंने कहा कि शायद चुदास। तब वो बोली कि क्या कहा? क्या मतलब होता है इसका? तो तब  मैंने कहा कि क्या तुम चुदास नहीं समझती हो? तो तब वो बोली कि कुछ-कुछ, क्या यही मतलब होता है? तब मैंने कहा कि हाँ शायद यानि की कैसे समझाऊँ तुम्हें मामी ज़ी? मुझे समझ नहीं आ रहा है। तब वो हँसते हुए बोली कि चुदास का मतलब सेक्स करने की चाहत तो नहीं। तो में उसे एकटक देखने लगा। अब उसके होंठो पर चंचल मुस्कुराहट थी। तब मैंने कहा कि आप ठीक समझी। फिर वो मेरी आँखों में अपनी आँखें डालकर बोली कि किस शब्द से बना है चुदास?  तब मैंने उसकी आवाज में कपकपी महसूस की। फिर मेरे दिल ने कहा कि गधे वो इतना चान्स दे रही है तो तू भी बेशर्म बन जा वरना पछताएगा। फिर मैंने कहा कि चुदास चोदना शब्द से बना है। तो वो खिलखिलाकर हंसने लगी और किताब के पन्ने पलटने लगी। अब में सोचने लगा था कि अब क्या करूँ? तो तभी अचानक से उसने पूछा कि ये वेजाइना क्या होता है? तो तब मेरे दिल ने कहा कि साली जानबूझकर ऐसे सवाल पूछ रही है।

फिर मैंने बिंदास होकर कहा कि योनि को वेजाइना कहते है। तो तब उसने फिर से पूछा कि यह योनि क्या होती है? तो तब मैंने कहा कि क्या आप योनि नहीं जानती हो? तो तब वो बोली कि नहीं। तो तब मैंने कहा कि चूत समझती हो। तो उसने झट से अपने मुँह पर अपना एक हाथ रखा और किताब के पन्ने पलटती हुई बोली कि हाँ। फिर मैंने हिम्मत करके कहा कि चुदास की बहुत चाहत हो रही है क्या?  तो तब उसने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा कि चुदास की प्यास? तो तब मैंने कहा कि वाकई चुदास की प्यास लगी है। तो तब वो बोली कि में भी 2 साल से प्यासी हूँ, क्योंकि 2 साल पहले मेरा पति से तलाक हो गया था। तब मैंने कहा कि ओह इसका मतलब 2 साल से तुम्हारी चूत ने लंड का पानी नहीं पिया है।

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फिर तब वो अपना सिर झुकाकर बोली कि आज तक तुम्हारे जैसा कोई मिला ही नहीं। तब में बोला कि अगर मिल जाता तो। तब वो बोली कि तो में अपनी चूत को उसके लंड पर कुर्बान कर देती। तब में बोला कि आओ, मेरा लंड तुम्हारी चूत पर न्योछावर होने के लिए बेकरार है और तुरंत उसे अपनी बाँहों में ले लिया और उसके होंठो में अपने होंठ डालकर चुंबन करने लगा। तब मैंने महसूस किया कि उसके हाथ मेरे लंड की तरफ बढ़ रहे थे और फिर उसने मेरी पैंट की चैन खोलकर मेरे लंड को पकड़ लिया और फिर धीरे-धीरे उसे सहलाने लगी थी। अब मेरा लंड लोहे की तरह सख्त हो गया था। फिर मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो में पैंट और अंडरवेयर निकालकर बिल्कुल नंगा हो गया। फिर उसने मेरे लंड को पकड़कर अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी थी। अब मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। अब वो कभी मेरे लंड के सुपाड़े को चूसती तो कभी अपनी जीभ से मेरे लंड को जड़ तक चाट रही थी और फिर उसने ऐसा करीब 15 मिनट तक किया। फिर आख़िर में मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उसके मुँह में अपना बहुत सारा वीर्य डाल दिया। फिर हम दोनों सोफे पर आकर बैठ गये। अब मेरा लंड फिर से सामान्य हो गया था, वो अब भी साड़ी पहने हुई थी।

फिर मैंने उसकी साड़ी में अपना एक हाथ डालकर उसकी जाँघो को सहलाया और फिर अपने एक हाथ को उसकी चूत पर ले गया, उसकी पेंटी गीली हुई थी, उसकी पेंटी इतनी गीली थी जैसे पानी से भीग गयी हो। फिर मैंने उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को मसलना शुरू किया। अब वो बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी थी। फिर मैंने उसकी पेंटी में अपना एक हाथ डाला तो उसकी चूत फूली हुई थी और गर्म बत्ती की तरह सुलग रही थी। फिर में उसकी चूत की दरार में अपनी एक उंगली डालकर उसकी चूत के दाने को मसलने लगा, जिस कारण वो गर्म होने लगी थी। फिर मैंने उसे सोफे पर लेटाकर उसकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर सरकाया। अब उसकी पेंटी उसकी चूत के अमृत से तरबतर थी। फिर मैंने उसकी पेंटी को पकड़ा और उसकी जांघो तक सरका दी। फिर उसने खुद उठकर अपनी पेंटी निकाल दी और फिर सोफे पर लेट गयी थी। अब उसके घुटने ऊपर थे और टाँगे फैली हुई थी। अब मुझे उसकी साँवली चूत बिल्कुल साफ-साफ दिखाई दे रही थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाली तो मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने आग को छू लिया हो, क्योंकि उसकी चूत काफ़ी गर्म हो चुकी थी। फिर में धीरे-धीरे अपनी एक उंगली उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा। अब उसके मुँह से आअहह, उूउउफफफ्फ की आवाजें निकल रही थी। फिर मैंने अपनी दो उंगलियाँ उसकी कोमल चूत में घुसा दी। अब उसकी चूत चिकनी होने से मेरी दोनों उंगलियाँ आराम से अंदर बाहर हो रही थी। फिर मैंने लगभग 10-15 बार अपनी उंगलियों से उसकी चूत घिसाई की। अब इधर मेरा लंड भी फूलकर तन गया था। फिर में उठकर खड़ा हुआ और उसे लेकर बेडरूम में ले गया। अब वो अपनी आँखें बंद किए मेरे अगले कदम का इंतज़ार करने लगी थी।

फिर मैंने अपनी शर्ट निकालकर उसकी साड़ी और पेटीकोट दोनों उतार दिए और अब हम बिल्कुल नंगे हो गये थे। फिर वो करवट लेकर लेट गयी। अब उसके चूतड़ साफ साफ झलक रहे थे। फिर मैंने उसकी गांड को अपने एक हाथ से सहलाया, क्या गांड थी उसकी? गोल मटोल गांड थी उसकी। फिर में करीब 5  मिनट तक उसकी गांड को सहलाता रहा और फिर उसकी कमर पकड़कर उसको सीधा लेटा दिया और जितना हो सका उतनी उसकी दोनों टाँगे फैला दी और फिर उसकी चूत की दरारों को फैलाकर अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटने लगा था। अब उसके मुँह से आह, उूउउफफफ्फ की नशीली आवाजें निकल रही थी। अब में अपनी जीभ से उसकी चूत के एक-एक भाग को चाट रहा था और बीच-बीच में उसकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था। अब वो बिल्कुल पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी। फिर वो बोली कि अब हटो अरमान, मेरी चूत काफ़ी गर्म हो चुकी है, अब अपना लंड मेरी गर्मा गर्म चूत में घुसेड़ दो राजा, उउफ़फ्फ अपने लंड से मेरी चूत की गर्मी और प्यास बुझा दो, मेरे अरमान आज इतना कस कसकर चोदो कि मेरे पूरे अरमान निकल जाए।

फिर जैसे ही मैंने उसकी चूत से अपना मुँह हटाया तो उसने अपनी दोनों टाँगे मोड़ ली। फिर में उसकी  उठी हुई दोनों टांगो के बीच में बैठ गया। फिर मैंने उसकी दोनों टांगे अपने हाथ से उठाकर अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा, जिस कारण उसके शरीर में झुरझरी मच गयी थी। अब मेरे लंड को उसकी चूत के मुँह पर रखते ही उसकी चूत की चिकनाहट के कारण अपने आप अंदर जाने लगा था। फिर मैंने कसकर एक धक्का मारा तो मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुस गया। अब उसकी गर्म-गर्म चूत के अंदर मेरे लंड की अजीब हालत थी। अब में धीरे-धीरे अपना लंड उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा था। उसकी चूत के घर्षण से मेरा लंड फूलकर और मोटा हो गया था। अब मेरे हर धक्के पर वो आआहह, ऊऊहह की आवाज़े निकालने लगी थी। फिर में करीब 20 मिनट तक उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करता रहा। फिर मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और दनादन अपने लंड को उसकी चूत में मूसल की तरह घुसाता रहा। अब उसने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया था।

अब में समझ गया था कि वो झड़ रही है और कहरा रही थी और बोल रही थी हाए अरमान 2 साल के बाद मेरी चूत की खुजली मिटी है, वाकई में तुम पक्के चुदक्कड़ हो, चोदो मुझे, ज़ोर-ज़ोर से चोद। अब मेरा लंच पच-पच की आवाज के साथ अंदर बाहर हो रहा था। अब पूरे कमरे में चुदाई की फच-फच, फच- फच की आवाज़े गूँज रही थी। अब मेरा लंड उसकी चूत को चोदता जा रहा था। अब कुछ देर के बाद उसके झड़ने के कारण मेरा लंड बिल्कुल गीला हो चुका था और अब वो निढ़ाल होकर लंबी-लंबी साँसे ले रही थी। फिर करीब 20-25 धक्को के बाद मेरे लंड ने आख़िर में जोरदार फव्वारा निकला और उसकी चूत में समा गया। फिर जब तक मेरे लंड से एक-एक बूँद उसकी चूत में समाती रही और में धक्को पर धक्के लगाता रहा। फिर आख़िर में मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके बाजू में लेट गया।

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अब हम दोनों की साँसे तेज चल रही थी। अब वो दाहिनी तरफ करवट लेकर लेटी हुई थी। फिर करीब 15-20 मिनट तक हम ऐसे ही लेट रहे। फिर मेरी नजर उसकी गांड पर पड़ी। अब उसकी गांड का ख्याल आते ही मेरा लंड फिर से हरकत करने लगा था। फिर मैंने अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद पर रखकर घुसाने की कोशिश की, उसकी गांड का छेद बहुत टाईट था। फिर मैंने बहुत सारा थूक उसकी गांड के छेद पर और अपनी उंगली पर लगाया और दुबारा से उसकी गांड में अपनी एक उंगली घुसाने की कोशिश करने लगा। अब गीलेपन के कारण मेरी उंगली थोड़ी सी उसकी गांड में घुस गयी थी। अब मेरी उंगली घुसते ही वो कसकसाहट करने लगी थी। फिर वो तड़पकर आगे खिसकी जिस वजह से मेरी उंगली उसकी गांड के छेद से बाहर निकल गयी थी और मुड़कर बोली कि क्या कर रहे हो? तो तब मैंने कहा कि तुम्हारी गांड सचमुच बहुत खूबसूरत है। तब वो बोली कि उंगली क्यों घुसा रहे हो? लंड सो गया है क्या? तो उसकी यह बातें सुनकर में बहुत खुश हुआ और उसे पेट के बल लेटा दिया और अपने दोनों हाथों से उसके चूतडों को फैला दिया, जिससे उसकी गांड का छेद और खुल गया था।

फिर वो धीरे से बोली कि अरमान नारियल तेल या कोई चिकनी चीज मेरी गांड और अपने लंड पर लगा लो तो आसानी रहेगी। तब मैंने कहा कि मेडम मेरे पास इससे भी अच्छी चीज है, वैसलीन और फिर में उठकर ड्रॉयर से वैसलीन ले आया और बहुत सारी वैसलीने अपने लंड पर और उसकी गांड पर लगाई और फिर उसकी गांड मारने को तैयार हो गया। फिर मैंने अपना लंड उसकी गांड के सुराख पर लगाया और थोड़ा ज़ोर लगाकर पुश किया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी गांड में थोड़ा सा घुस गया और फिर थोड़ा ज़ोर लगाकर और पुश किया तो मेरा सुपाड़ा उसकी गांड में समा गया। मेरा सुपाड़ा उसकी गांड मे घुसते ही वो बोली कि अरमान थोड़ा आहिस्ते-आहिस्ते डालो, बहुत दर्द हो रहा है, 2 साल हो गये गांड मरवाए। अब में सिर्फ़ अपने सुपाड़े को ही धीरे-धीरे उसकी गांड में अंदर बाहर करने लगा था।

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फिर थोड़ी देर के बाद ही उसकी गांड का छेद मेरा पूरा लंड खाने के काबिल हो गया। तब मुझे लगा कि अब मेरा लंड पूरा उसकी गांड में घुस जाएगा और ऐसा ही हुआ। अब उसकी गांड का छेद चिकनाहट की वजह से मेरा लंड थोड़ा-थोड़ा और अंदर समाने लगा था और फिर 2-3 मिनट की मेहनत के बाद मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी गांड में घुस गया। अब में धीरे-धीरे अपना लंड उसकी गांड में अंदर बाहर करने लगा था। अब उसकी गांड टाईट होने की वजह से मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। अब उसे भी अपनी गांड मरवाने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो अपने मुँह से उउफ्फ, आह की आवाज़े निकाल रही थी। फिर 30-35 धक्को के बाद मेरे लंड ने अपने घुटने टेक दिए और उसकी गांड में बहुत सारा वीर्य छोड़ दिया।  अब वो भी अपनी गांड को सिकोड़ने लगी थी। अब हम दोनों निढ़ाल होकर बिस्तर पर लेट गये थे। फिर जब तक मेरा दोस्त नहीं आया। मैंने उसकी मामी की कई बार चूत और गांड मारी।

फिर जब में वापस अपने घर आने लगा, तो तब मामी बोली कि कैसी रही मेरी समाज सेवा? तो तब मैंने हंसकर कहा कि मामी जी आप सच्चे तन मन से समाज सेवा करती हो और फिर में अपने घर आ गया। फिर मुझे जब कभी भी कोई मौका मिला तो मैंने उसकी खूब चुदाई की और खूब मजे लिए और बहुत इन्जॉय किया ।।

धन्यवाद …

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