दोस्त ने अपनी माँ को रगड़कर चोदा

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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, में एक बार फिर से हाजिर हूँ आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को अपनी एक सच्ची घटना को सुनाने के लिए। में सूरत का रहने वाला हूँ और में अपनी पढ़ाई की वजह से अहमदाबाद में रहता हूँ। आप सभी की तरह मुझे भी सेक्सी कहानियों को पढ़ना बड़ा अच्छा लगता है। दोस्तों यह कहानी मेरे दोस्त प्रदीप की माँ की है। यह कहानी एक साल पहले की है जब में कॉलेज की छुट्टियों के समय अपने दोस्त प्रदीप के घर गया। प्रदीप की माँ आनंद की एक बहुत बड़ी कंपनी के मकान में रहती है और उसके पिताजी प्रदीप के बचपन में ही गुजर गये थे। दोस्तों हम उस दिन शाम को करीब 7 बजे उसके घर पहुंचे और जैसे ही हम उसके घर के अंदर गये तो मैंने वहाँ एक बड़ी कमाल की सुंदर औरत देखी। उसकी लम्बाई 5.3 होगी और उसके फिगर का आकार करीब 38-30-36 होगा, उसने हल्के नीले रंग की साड़ी पहनी थी और काले रंग का पतले कपड़े का ब्लाउज पहना हुआ था जिसमें से उसकी सफेद रंग की ब्रा साफ दिखाई दे रही थी। उसके पूरे बदन पर कहीं भी चर्बी जमी हुई नहीं थी और वो एकदम गोरी उसके बदन पर एक भी दाग नहीं था, वो प्रदीप की माँ थी जिसका नाम भारती था। फिर आंटी ने हम दोनों को देखकर खुश होते हुए खाट पर बैठने के लिए कहा और पीने का पानी लाकर दिया, उसके बाद हम फ्रेश हुए और फिर बाहर घूमने चले गये, रात को करीब 9 बजे वापस आकर हम दोनों ने खाना खाया जो बहुत स्वादिष्ट बना था, इसलिए मैंने आंटी के बने खाने की उसने तारीफ भी करना उचित समझा और फिर उसके बाद हम दोनों छत पर जाकर बातें करने लगे।

फिर जब हम नीचे आए तो मैंने देखा कि प्रदीप की माँ ने हमारे लिए बिस्तर पहले से ही लगा दिया था, उनका वो घर आकार में छोटा था, इसलिए वहाँ सिर्फ़ एक ही कमरा था और वहाँ पर एक ही खाट थी, इसलिए उन्होंने मेरा बिस्तर ऊपर लगाया था और उन दोनों का बिस्तर नीचे लगाया था। फिर मैंने अपने कपड़े बदले और में खाट पर लेट गया। उसके बाद प्रदीप की माँ ने खिड़की दरवाजे बंद किए और हमारे सामने ही उन्होंने अपनी साड़ी को उतार दिया। फिर उसके बाद उन्होंने अपने ब्लाउज को भी उतारना शुरू कर दिया और मेरे देखते ही देखते उन्होंने अपना ब्लाउज भी उतार दिया, जिसकी वजह से आंटी का गोरा जिस्म हल्की रौशनी में भी ब्रा के अंदर बड़ा सेक्सी नजर आ रहा था। दोनों बूब्स ब्रा में एकदम कसे हुए थे, बड़े आकार के ब्रा में फंसे हुए बूब्स को देखकर मेरा लंड हरकत में आ चुका था और फिर ऐसे ही वो वहाँ का बचा हुआ काम करने लगी। दोस्तों उनको इस हालत में देखकर मेरी हालत खराब हो गयी और मेरा लंड तनकर झटके देने लगा था, लेकिन फिर भी कुछ बातें सोचकर मैंने अपने लंड को शांत किया। फिर उसके बाद उन्होंने मेरी तरफ अपनी पीठ को करके अपनी उस ब्रा को भी उतार दिया और उसके बाद दूसरा ब्लाउज पहन लिया और वो उठकर लाइट को बंद करके प्रदीप के पास सो गयी।

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दोस्तों में उस दिन बहुत थका हुआ था, इसलिए मुझे कुछ मिनट में ही नींद आ गयी और आधी रात के बाद अचानक से मेरी नींद खुल गयी, क्योंकि उस समय मुझे किसी के सिसकने की आवाज़ सुनाई दी और तब मैंने अपनी आखों को खोलकर नीचे देखा तो वहाँ का वो नज़ारा देखकर में एकदम चौंक गया, क्योंकि मैंने देखा कि प्रदीप उसकी माँ को चूम रहा था और उसकी माँ का ब्लाउज उस समय पूरा खुला हुआ था और प्रदीप उसकी माँ के बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था, जिसकी वजह से उसकी माँ के मुहं से सिसकियों की आवाज बाहर आ रही थी। अब प्रदीप थोड़ा नीचे की तरफ बढ़ गया और वो अपनी माँ के बूब्स पर टूट पड़ा। उसको यह सब करते हुए देखकर मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि वो कई दिन से भूखा हो और शायद वो सच में भूखा था, क्योंकि उसने पिछले एक महीने से उसकी माँ को चोदा नहीं था, लेकिन दोस्तों मैंने पहली बार किसी औरत को अपने बेटे के साथ इस तरह यह सब करते हुए देखा था, इसलिए मुझे अपनी आखों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं था और में बड़ा चकित हुआ और यह सब देखकर में अपनी आखों को फाड़ फाड़कर देखे जा रहा था और अब तक प्रदीप की माँ भी पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और वो ज़ोर ज़ोर से आवाज़ करने लगी।

फिर उसी समय प्रदीप ने उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और वो उनको चूमने लगा, थोड़ी देर के बाद उसने अपनी माँ को अपनी दबी हुई आवाज़ में कहा कि मेरी प्यारी रानी थोड़ा सा कंट्रोल कर वरना वो उठ जाएगा। फिर उसकी माँ ने कहा कि अब मुझसे बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं हो रहा है, में कई दिनों से में प्यासी हूँ, तुम अब जल्दी से करो, वरना में मर ही जाउंगी और उसके बाद प्रदीप ने अपना एक हाथ उसकी माँ के पेटीकोट के अंदर डाल दिया और वो उनके दोनों कूल्हों को बारी बारी से मसलने दबाने लगा था। उसी के साथ वो अपनी माँ के गले के पास ज़ोर ज़ोर से चूम रहा था, उसकी माँ ने प्रदीप को कसकर अपनी बाहों में जकड़ा हुआ था और प्रदीप के सर में हाथ डालकर प्रदीप को सहला रही थी। अब प्रदीप ने उसकी माँ की पेंटी को उतार दिया और वो अपनी माँ की चूत में उंगली डालकर चूत को टटोलने सहलाने लगा। फिर कुछ देर तक वो दोनों इसी तरह एक दूसरे को चूमते रहे और फिर प्रदीप उसकी माँ के पैरों के बीच में आ गया। उसने पेटीकोट को पूरा ऊपर उठा दिया और अब वो नीचे आकर उनकी चूत को चाटने लगा। यह सब करते हुए प्रदीप ने अपनी माँ के दोनों बूब्स को अपने हाथों में ले लिया और वो उनकी चूत को चाटते हुए ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब उसकी माँ भी जोश में आकर प्रदीप के सर को पकड़कर अपनी चूत पर दबा रही थी और वो अपने कूल्हों को ऊपर उठा उठाकर प्रदीप की जीभ को अपनी चूत के अंदर लेने की कोशिश कर रही थी। तभी थोड़ी देर के बाद प्रदीप की माँ ने उससे कहा कि अबे मादारचोद अब जल्दी से मेरी चूत में तू अपना लंड डालकर मेरी प्यास को बुझा दे, तू क्यों मुझे इतना तरसा रहा है। फिर अपनी माँ की यह बात सुनकर प्रदीप ने अपनी माँ के पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और उसको पूरा नीचे उतार दिया। उसके बाद वो उसकी माँ के बूब्स पर बैठ गया और अपनी माँ के मुहं में उसने अपने लंड को डाल दिया। फिर करीब पांच मिनट के बाद प्रदीप ने अपना लंड मुहं से बाहर निकाला और वो अपनी माँ के पास में लेट गया और प्रदीप ने अपना लंड अपनी माँ के हाथ में दे दिया। उसकी माँ ने प्रदीप के लंड को अपनी चूत के दरवाजे पर रखा और प्रदीप ने सही मौका देखकर एक जोरदार धक्का मारकर अपना पूरा लंड अपनी माँ की चूत में डाल दिया। फिर प्रदीप ने अपनी माँ के पैर पकड़कर उनको अपने पैरों पर खींच लिया और उसके बाद उसने तेज धक्के देकर अपनी माँ की चुदाई करना चालू कर दिया।

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उस समय प्रदीप अपने एक हाथ से उसकी माँ के पैर को सहला रहा था और उसकी माँ भी प्रदीप की कमर को पकड़कर प्रदीप का लंड अपनी चूत में ले रही थी। वो दोनों जोश में आकर एक साथ अपनी कमर को हिलाकर चुदाई का असली मज़ा ले रहे थे और उन दोनों के मुहं से हल्की हल्की सिसकियों की आवाज निकल रही थी और में अपनी आखों से चुदाई की असली ब्लूफिल्म को देख रहा था वो दोनों एक दूसरे को ऐसे चूम रहे थे जैसे कि वो एक दूसरे को खा जाएगें। फिर करीब दस मिनट की चुदाई के बाद प्रदीप अपनी माँ के ऊपर आ गया और वो ज़ोर ज़ोर से अपनी माँ को धक्के देकर उसकी चुदाई करने लगा। फिर करीब पांच मिनट की चुदाई के बाद वो दोनों एक दूसरे से लिपट गये और अब वो धीरे धीरे शांत भी पड़ गये। वो दोनों इसी तरह एक दूसरे से लिपटकर एक दूसरे के होंठो को चूमने लगे थे और मुझे कब नींद आ गयी मुझे पता ही नहीं चला। फिर जब में दोबारा उठा तो मैंने देखा कि प्रदीप की माँ उसके ऊपर थी और वो अपनी कमर को हिलाकर अपनी चूत मरवा रही थी। इस काम को करने में प्रदीप अपनी माँ का पूरा पूरा साथ दे रहा था और उसको देखकर ऐसा लगा रहा था जैसे वो उछल उछलकर प्रदीप को चोद रही हो और प्रदीप भी उसको नीचे से धक्के दे रहा था। उस समय वो दोनों बहुत जोश में थे और उनका पूरा बदन पसीने से गीला, सांसे उखड़ी हुई और शरीर कांप रहा था। फिर भी वो अपने काम को करते रहे। फिर कुछ देर उनकी चुदाई को देखने के बाद में वापस सो गया, लेकिन वो अब भी लगे हुए थे ।।

धन्यवाद …

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