दोस्त ने मेरी माँ की बीन बजाई

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प्रेषक : जय

हैल्लो दोस्तों, बहुत दिनों बाद अब मुझको एक चान्स मिला माँ की चुदाई देखने का और वो ही में आप सब से शेयर करना चाहता हूँ। मेरी माँ एक सेक्सी रांड है उसके साइज़ इस तरह है।

बूब्स : 40

कमर : 36

गांड : 38

बात तब की है मेरे पापा बाहर गये हुये थे माँ तो हमेशा इसी मौके पर रहती है कि कब पापा जाये तो क़िसी शिकारी को बुलाये माँ मेरे को बोली तुम्हारा दोस्त भूपी बहुत टाइम से नहीं आया कहीं तुम ने झगड़ा तो नहीं किया? मैंने कहा नहीं तो माँ बोली चलो आज उसको डिनर पर बुला लो तुम्हारी मुलाकात हो जायेगी, मैने कहा ओके मैने भूपी को कॉल करके डिनर पर बुलाया।

भूपी : ओके में आ जाऊँगा मुझको तो पता था की पहले भी माँ ने भूपी से जंगल में अपनी बीन बजवाई है तो आज भी उसको सैर ज़रूर करवायेगी। करीब 8:15 पर भूपी आ गया और हम बातें करने लगे। भूपी साथ में 4 बोतल बियर की लाया था तो हमने पीना शुरू किया और करीब बियर ख़त्म करने के बाद हमने खाना खाया। डिनर करते करते हमको 12:15 हो गये और मैने भूपी से कहा यहीं सो जाओ सुबह चले जाना क्योंकी 26 जनवरी की वजह से रात को चेकिंग बहुत होगी।

भूपी : जय तुम सही बोल रहे हो यहीं रुक जाता हूँ भूपी बोला में यहीं लॉबी में सो जाता हूँ क्योंकि मुझे सुबह जल्दी जाना है और में तुमको डिस्टर्ब नहीं करना चाहता तो मैने कहा ठीक है तुम लॉबी में दीवान पर सो जाओ में अपने रूम में और माँ अपने रूम में फिर माँ अपने रूम में चली गयी और भूपी लॉबी में दीवान पर लेट गया मैने भी कहा यार में भी सोने जा रहा हूँ।

मैने अपना रूम का दरवाज़ा लॉक किया और टेबल के उपर कुर्सी रख के वेंटिलेटर से झाँकने का प्रोग्राम फिट कर लिया और मैने लॉबी में भी नज़र रखी हुई थी थोड़ा सा पर्दा पीछे करके की कब भूपी जायेगा इधर में माँ के रूम में बार बार झाँक रहा था कोई 5 मिनिट के बाद माँ बाथरूम से गाउन पहन के बाहर निकली और फिर अपने दरवाजे का लॉक खोल के दरवाज़ा थोड़ा सा खुला रख दिया करीब 1:00 बजे माँ का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई और फिर डोर लॉक हो गया अब रूम में मेरी माँ और भूपी दोनो थे।

माँ : उस रात जंगल में शिकार किया था तुमने आज पिंजरे में करो।

भूपी : जब सिक्यूरिटी साथ हो तब जंगल में ही करना पड़ता है।

माँ : कोई भी हो शिकारी तो शिकार कर ही लेता है।

भूपी : आंटी तुम्हारी बातों से ही खड़ा हो जाता है।

माँ : थैंक्स।

भूपी : आंटी चलो अब अपना मिल्क प्लांट और गार्डन तो दिखाओ माँ ने अपना गाउन उतारा और अन्दर माँ ने बिकनी स्टाइल पेंटी पहनी हुई थी जो की पीछे से उसकी गांड में फंसी हुई थी और दूध के ड्रम पीले कलर की ब्रा से ढके हुये थे।

भूपी : आंटी जैसे जैसे ओल्ड हो रही हो चुदक्कड लगती जा रही हो।

माँ : चूत मरवाने वाली चुदक्कड़ और मारने वाले चोदू माँ हँसने लगी।

भूपी : आंटी रांड़ जैसी बातें कर रही हो और लग भी रही हो।

माँ : तो फिर रांड़ को बड़ी रांड़ बनाओ।

भूपी : ओह हो आंटी आंटी तुमने कभी कुतिया को चुदते देखा है।

माँ : हाँ बहुत बार।

भूपी : देखा ना कैसे फंसा के रखती है कुत्ते को और बाकी कुत्ते कैसे तड़प रहे होते हैं।

माँ : पर कुतिया को मज़ा आता होगा ना इतने सारे लंड एक साथ।

भूपी : आंटी तुम्हारा मन करता है बहुत लंड लेने का।

माँ : हाँ कम से कम 5 लंड एक साथ।

भूपी : आंटी तुम्हारी भोसड़ी का भोसड़ा बना देंगे।

माँ : आज तक क़िसी ने चूत नहीं मारी चूत ने सब को मारा है अब देख ले मेरी चूत ने तेरे अंकल को मारा तेरे को मारा यह मारी क्या देख।

भूपी : दिखाओ तो ज़रा।

माँ : माँ ने अपनी पेंटी पीछे की और बोला देखो क्या बिगड़ा है इसका।

भूपी : आंटी… ऊऊऊऊ माई गॉड।

अच्छा आंटी 5 लंड का क्या करोगी।

माँ : एक मुँह में 2 एक एक हाथ में एक गांड में और एक चूत में।

भूपी : आंटी पहले मेरा तो लो।

माँ : ने अपनी पेंटी उतारी और दोनो टाँगे खोल दी और बोली ले अब इसको कुत्ते की तरह चाट।

भूपी : मानो पागल हो गया हो और कुत्ते की तरह माँ की चूत चाटने लगा।

माँ : ब्रा के बाहर से अपने बूब्स दबा रही थी।

माँ : लाओ अब अपना लॉली पोप दो मेरे को चूसना है।

भूपी खड़ा हो गया और माँ के मुँह में अपना लंड डाल दिया माँ उम्म्म उम्म उम्म्म यूम्म कर के चाटने लगी।

भूपी : साली रांड़ अपने दूध के ढक्कन तो हटा माँ तुम ही हटा दो में कुल्फी खा रही हूँ और भूपी ने माँ की ब्रा खोल दी।

अब माँ के बूब्स उसकी छाती से नीचे लटक रहे थे और उस पर काले निप्पल ऐसे लग रहे थे जैसे आइसक्रीम के कप पर काले रंग का अंगूर (ग्रेप्स) पड़ा हो।

भूपी : आह ह आंटी तुम अगर ऐसे चूसती रही तो मेरा लंड घोड़े (हॉर्स) जितना हो जायेगा बहुत खीच के चूसती हो।

माँ : इसलिये तो खीच के चूसती हूँ ताकि तेरा घोड़े जितना हो जाये क्योंकी मेरी चूत भी तो कुछ टाइम बाद घोड़ी जैसी हो जायेगी तो अगर इतना ही रहा तो दोनो को ऐसा लगेगा जैसे कुत्ता घोड़ी की चूत मार रहा हो।

भूपी : ऊऊऊ आंटी उफफफफ्फ़… ओहूओ …उम्म बहुत मजेदार चूसती हो।

माँ : लो अब तुम्हारा तो टनाटन खड़ा हो गया है चलो अब मेरा रनवे तुम्हारे प्लेन का इंतज़ार कर रही है और माँ दोनो टांगे खोल के लेट गयी। भूपी माँ के उपर आया और माँ ने अपनी दोनो टांगे भूपी के शोल्डर पर रखी और बोली लो अब गेट खुला है अपने मेहमान को सैर करवाओ गार्डन की भूपी ने अपना लंड सीधा माँ की चूत में डाला।

माँ : युप्पप्प्प… हूओन्न हून्णन्न् हूओन्न…। अहमम्म आह हा अहहा उफ़फ्फ़।

भूपी : आंटी वॉवव…।ह्म्‍म्म्म मुसाफिर को अन्दर गार्डन में मज़ा आ रहा है।

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माँ : उसको बोलो की अन्दर अच्छी तरह उछल कूद मचा और गार्डन को पूरा खराब कर दे एक तेरे अंकल का मुसाफिर है जो अन्दर जाने से ही डरता है और अगर जाता भी है तो नहा के आ जाता है ज़ोर से चोदो ना और ज़ोर से उफफफ्फ़ हम उफफफफफ्फ़ अहहह्ह्ह।

भूपी : आंटी अब कुत्तिया बनो ना।

माँ : एक मिनिट थोड़ा डोर खोल के धीरे से देखो जय के कमरे का दरवाज़ा बंद है ना कहीं जाग ना रहा हो।

भूपी : जय की माँ की चूत सो रहा होगा 2 बियर इसलिये तो पिलाई थी।

माँ : जय की माँ की चूत ही तो मार रहा है थोड़ा देख और फिर आ जा।

भूपी ने हल्का सा दरवाज़ा खोल के देखा और बोला दरवाज़ा बंद है सो रहा होगा मस्ती में सो रहा है और साले को पता ही नहीं इधर माँ का भरतपुर लुट रहा है।

माँ : भरतपुर के साथ साथ माउंट एवरेस्ट की छोटीइयाँ भी लूट रही हैं।

माँ : कुत्तिया बन गयी बेड पर और फिर बोली अभी भरतपुर में नहीं उसके पीछे वाले रास्ते (गांड) में डालना।

भूपी : आंटी तुमने तो मन की बात छीन ली।

माँ : वो अलमारी खोलो उसमे क्रीम पड़ी है निकालो और लगाओं थोड़ी सी मेरी गांड में।

भूपी ने क्रीम निकाली और माँ की गांड खोल के उसके बीच में लगा दी और थोड़ी सी अपने लंड पर लगा ली।

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फिर भूपी ने माँ के दोनो चुत्तड को हाथ से साइड पर किया और उसकी गांड में लंड डाला।

माँ : उम्म्म……हहह……आ……।ऊऊऊ ओफफफफ्फ़ और एक हाथ से अपनी चूत को मसल रही थी माँ के बूब्स आगे पीछे हिल रहे थे जैसे किसी झुले पर बैठो हों माँ की गांड बड़ी और बिल्कुल सफेद है। जैसे भूपी उसको झटका मारता तपाक तपाक की आवाज़ आती माँ मानो पागल हो गयी थी बोल रही थी ह्म्‍म्म्म उफ़फ्फ़ उफफफफ्फ, मेरी चूत फाड़ दो आज बहुत दिनो से क़िसी का पानी नहीं पिया इसने भूपी बोला पाइप तो डाली है अन्दर पीओं ना माँ उन्न्ञननणणन् हेमर की तरह अपने लंड को ठोको ना हहहम उफफफ्फ़।। फुउफ्फ चोदो चोदो प्लीज़ फुक मी फुक मी।

भूपी : आंटी आपको तो बड़ा लंड चाहिये कम से कम मेरा जितना नहीं तो छोटा लंड तो आपकी गांड में ही फिनिश हो जायेगा अन्दर तो जा ही नहीं पायेगा।

माँ : तुम्हारा तो ठीक है पर इसी तरह मेरे पास आते रहे तो लम्बा कर दूँगी…। आह ह ऊऊ। फिर माँ घोड़ी स्टाइल में से घुटने हटा कर उल्टी लेट गयी और भूपी का लंड उसकी गांड में फंसा रहा जैसे ही माँ लेटी भूपी बोला उफफफ्फ़ आंटी आपके लेटने से आपकी गांड इतनी टाइट हो गई है की लंड बाहर नहीं खीच रहा।

माँ : बोली ज़ोर से खीचो और फिर ज़ोर से धक्का मारो तेरा लंड अच्छा घिसेगा और तुम्हारी लंड फसाने की हसरत भी पूरी हो जायेगी।

भूपी ने अपना लंड माँ की गांड से बाहर निकाला और उस पर अच्छी तरह से अपनी थूक लगा के फिर माँ के पीछे घुसा दिया माँ सिसकारी ले रही थी ऊओन ऊमम ह्म्‍म्म्म और भूपी भी आनंद ले रहा था।

भूपी : आंटी अंकल भी आपकी गांड मारते हैं क्या।

माँ : उनका इस इतनी बड़ी चूत में मुश्किल से जाता है तो गांड में कहाँ से घुस जायेगा तुम्हारा इतना हार्ड होने के बाद फंस गया उनका तो अन्दर ही रह जायेगा।

भूपी : आंटी आपकी फुदी मारने का अलग ही मज़ा है।

माँ : हंस के बोली दूसरे का माल चोदने में सब को मज़ा आता है फिर माँ बेड पर लेट गयी साइड पोज़ में और भूपी उसके पीछे लेट गया माँ ने लेफ्ट टाँग उठाई और भूपी का लंड पकड़ के अपने इंडिया गेट पर रख दिया भूपी ने पीछे से धक्का मारा और फिर सारा का सारा साँप माँ के बिल में घुस गया माँ आ अहहा हहा… उफ़फ्फ़ उफ़फ्फ़ की आवाज़ कर रही थी और भूपी भी मस्त था और ऊवन्णन्न् ओन्न्‍णणन् ऊओ उफफफफफफफफ्फ़ की आवाज़ कर रहा था और माँ का भोसड़ा फाड़ रहा था अपनी ड्रिल मशीन से और माँ के फुटबॉल जैसे बूब्स दबा रहा था फिर भूपी बेड पर लेट गया और माँ भूपी पर चड गई माँ की पीठ (बॅक) भूपी के मुँह की तरफ थी और माँ का चेहरा टांगो की तरफ और फिर माँ उसके साँप के उपर उठक बेठक करने लगी साँप कभी बाहर आ रहा था कभी अन्दर जा रहा था और माँ के बूब्स कभी माँ के मुँह के साथ लग रहे थे और कभी पेट(बेल्ली) के साथ लग रहे थे और आ आ आ आ ऊऊओ म ह्म्‍म्म्म। की आवाज़ें कर रही थी और भूपी भी आवाजे कर रहा था और माँ को बीच बीच में गाली दे रहा था ऊओ उफफफफफ्फ़ साली रंडी तेरी भोसड़ी तो मेरे लंड को अन्दर खीच रही है।

माँ : यह भोसड़ी नहीं लड़कों के गन्ने (शुगरकेन) से रस निकालने वाली मशीन है तेरा गन्ना भी चूस लेगी और फिर माँ तेज़ तेज़ झटका मारने लगी भूपी बोला आंटी अभी सोफे पर आ जाओ भूपी सोफे पर बेठ गया और माँ उसके उपर बेठ के अपनी चूत से ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगी माँ भूपी……।। ऊऊ…भूपीईईईईई।।

मेरा पानी निकलने वाला है हाँ आंटी जल्दी निकालो अपना मेरा भी होने वाला है फिर माँ और तेज़ हुई ताप तपा ताप… ताप तपा ताप…। तक तक अटका ऊऊ… उफ़फ्फ़……एका एक माँ का चूत का इजिन तेज़ हो गया और बोली भूपी प्लीज़ बूब्स चूसो ना होने वाला है भूपी एक बूब्स चूसने लगा और दूसरा दबाने लगा माँ और तेज़ हुई और फिर भूपी के साथ चिपक गयी

भूपी : साली रांड़ तेरा तो हो गया भोसड़ा शांत अब इस को भी तो कर।

माँ : जल्दी से उसके उपर से उठी और सोफे के नीचे बेठ के उसकी मूठ मारने लगी भूपी उसके बूब्स दबा रहा था।

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भूपी : साली रंडी कितना पानी था तेरे अन्दर मेरा सारा पेट (बेली) और थाइस भर दी माँ हंसने लगी और उसकी मूठ मारती रही भूपी आंटी मेरा पानी अपने बूब्स पर डालना ऊऊऊ आह हमम्म…।।आंटी तेज़ मारो ना मूठ और फिर भूपी का सार माल निकल गया और माँ ने अपने बूब्स पर गिरा दिया और अपने हाथ से उसको बूब्स पर मालिश करने लगी भूपी हंसने लगा और बोला जब भी अंकल घर ना हो मुझको बुला लिया करो ना ताकि में आपकी भोसड़ी का टेस्ट इस साँप को चखाता रहूं।

माँ : ठीक है भूपी जब भी कभी मौका मिले तुमको या हम कहीं बाहर मिलें और वहाँ मौका मिल जाये तो मेरा बिल तुम्हारे साँप के लिये तैयार है बस अंकल नहीं होने चाहिये जय को तो आगे पीछे कर लिया करेंगे और फिर भूपी लॉबी में आ के सो गया और माँ ने अपनी चूत और बूब्स साफ करके गाउन पहना और सो गयी ।।

धन्यवाद …

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