गाँव में सुहागरात का मजा

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प्रेषक : राहुल …

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम राहुल है और आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालो को अपना एक सच्चा सेक्स अनुभव बताने जा रहा हूँ। दोस्तों यह कोई फेक कहानी नहीं मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है जिसको में बहुत दिनों से बताने के बारे में सोच रहा था और आज मैंने इसको लिखकर आप लोगो के लिए तैयार भी कर लिया है और अब में उम्मीद करता हूँ कि यह सभी पढ़ने वालो को जरुर पसंद आएगी और अब आप लोगो का ज्यादा समय बर्बाद ना करते हुए में अपनी आज की कहानी की तरफ आता हूँ। दोस्तों यह बात आज से करीब बस दो महीने पहले की है जब में अपने ऑफिस के काम से लखनऊ के पास एक छोटे से गाँव में गया हुआ था। फिर वहां पर मुझे उस गाँव के प्रधान से मिलना था और में जब उस प्रधान के घर गया तब मैंने उसके घर का दरवाज़ा खटखटाया उसके बाद में बाहर खड़ा दरवाजे के खुलने का बस इंतजार ही कर रहा था कि थी मैंने देखा कि एक करीब 25 साल की बहुत ही सुंदर सी औरत ने दरवाजा खोल दिया। फिर में उसको अपनी चकित नजरों से बस देखता ही रह गया, उसकी लम्बाई करीब 5.6 इंच थी, उसका रंग बहुत गोरा था और उसने एक नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी। दोस्तों में उसकी सुन्दरता को बड़ा ही मधहोश होकर कुछ देर घूरकर देखता ही रह गया मुझे कुछ भी खबर नहीं थी।

फिर जब उसके पूछने पर मुझे थोड़ा सा होश आया तब मैंने उसको कहा कि में प्रधान साहब से मिलना चाहता हूँ क्योंकि मुझे उनसे कुछ काम था। अब उस सेक्सी औरत ने मुझे अंदर आने को कहा और अंदर एक कमरे में ले जाकर बैठा दिया और फिर वो मुझसे बोली कि आप यहाँ बैठ जाए, में अभी पापा को जाकर बोलती हूँ वो अभी कुछ काम कर रहे है अभी कुछ देर बाद वो आ जाएँगे। फिर में उसके मुहं से यह बात सुनकर तुरंत समझ गया कि यह प्रधान की बेटी है थोड़ी देर में वो मेरे लिए पानी लेकर आ गई और मुझे पानी का गिलास देकर वापस चली गयी, कुछ देर बाद प्रधान साहब उस कमरे में आए और उसके बाद मैंने उनको अपना उनके पास आने का कारण बता दिया कि में क्यों उनके पास गया था? और बहुत देर तक हमारी बात चलती रही क्योंकि हमारी कंपनी उस गाँव में एक प्रॉजेक्ट का काम शुरू करना चाहती थी, जिसके लिए हमे प्रधान से बात करनी थी और प्रधान मेरी बातों से बहुत खुश हुआ क्योंकि उस प्रॉजेक्ट से उसके गाँव का बहुत विकास होने वाला था और उस विकास का पूरा श्रय उस प्रधान को मिलने वाला था। अब इसलिए प्रधान खुश होकर मुझसे बोला कि आपको मुझसे जो भी मदद चाहिए में तुरंत आपके वो सब काम पूरे करवा दूंगा आपको मेरी तरफ से सभी तरह की मदद मिलेगी बस आप जल्दी से काम को शुरू करवाओ।

फिर मैंने प्रधान को बोला कि इस प्रॉजेक्ट की वजह से मुझे कुछ दिन इस गाँव में ही रहना पड़ेगा और इसलिए आपको मेरे लिए एक कमरे का इंतजाम भी करना होगा और साथ में कोई आदमी जो मेरे लिए खाना, चाय, पानी का इंतजाम भी कर सके और वो मेरे कपड़े भी धो सके। अब प्रधान मुझसे बोला कि मेरा घर बहुत बड़ा है आप इसी में रह लीजिए यहाँ पर आपको कोई भी परेशानी नहीं होगी, लेकिन तभी मैंने उसको मना किया कहा कि मुझे कई बार देर रात को भी बाहर जाना पड़ेगा और मुझे मेरे काम की वजह से कई लोगो को अपने पास बुलाना भी पड़ेगा इसलिए मुझे कोई अलग मकान का इंतजाम आप करके दो। अब वो बोला कि मेरा एक मकान इस गाँव से कुछ दूरी पर बाहर एक खेत के पास बना हुआ है आप उसको देख लीजिए अगर आपको पसंद हो तो आप वहीं पर रह लीजिए। अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है और में प्रधान के साथ उसका मकान देखने चला गया और वो मकान मुझे पसंद आ गया क्योंकि वो बिल्कुल अलग हटकर बना हुआ था जिसकी वजह में वहां पर जैसे भी रहूँ किसी को कोई परेशानी नहीं होने वाली थी और इसलिए मैंने तुरंत ही उस मकान के लिए हाँ कर दिया। अब मैंने उनको पूछा कि मेरे खाने और कपड़े धोने का भी आपके पास क्या कोई इंतजाम है कि नहीं?

वो मुझसे कहने लगा कि सर यह सभी काम तो में अपनी विधवा बेटी को बोल दूंगा वो यह सब कर देगी, वो आपके लिए घर से खाना बनाकर ले आया करेगी और आपके कपड़े भी वो खुद धो देगी, क्योंकि वैसे भी घर में उसका समय नहीं निकलता। फिर वो उदास होकर मुझसे कहने लगा कि साहब मैंने बचपन में ही उसकी शादी कर दी थी और अभी कुछ समय पहले उसका गौना (विदाई) भी नहीं हुआ था कि उसका पति किसी बीमारी की वजह से मर गया। अब इसलिए वो बहुत दुखी परेशानी भी रहती है आपके लिए काम करके उसका मन भी लगा रहेगा। दोस्तों इस तरह मेरे लिए मकान और खाने का इंतजाम हो गया, इसलिए में मन ही मन बहुत खुश था और में अगले दिन ही अपना पूरा सामान लेकर वापस उसी गाँव में रहने के लिए आ गया, लेकिन जब में पहुंचा तब तक शाम हो चुकी थी और वहां पहुंचकर मैंने देखा कि प्रधान के साथ कुछ आदमी खड़े हुए है। फिर उन लोगो ने मेरा सारा सामान घर में सेट कर दिया और उस काम को करते हुए हमे रात के करीब 9 बज चुके थे। अब प्रधान ने मुझसे कहा कि में अब वापस अपने घर जा रहा हूँ और में तुरंत ही आपके लिए खाना भिजवा देता हूँ, तब तक आप नहा लीजिए जिसकी वजह से आपकी थकावट दूर हो जाएगी।

फिर प्रधान मुझसे यह बात कहकर अपने साथ वाले लोगो को भी अपने साथ ही लेकर चला गया और मैंने उन सभी के जाते ही दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और उसके बाद में नहाने के लिए बाथरूम में चला गया। फिर उसके बाद मैंने नहाकर एक टीशर्ट और बरमुडा पहन लिए और उसके बाद में कमरे में आकर टीवी देखने लगा। तभी कुछ देर बाद दरवाजे पर खटखटाने की आवाज हुई, तब मैंने उठकर जाकर जैसे ही दरवाज़ा खोला उस समय मैंने देखा कि उस दिन वाली वो औरत मेरे सामने दरवाज़े के बाहर खड़ी हुई थी, आज उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट थी और वो मेरी तरफ हल्का सा मुस्कुराती हुई मुझसे कहने लगी कि साहब में आपके लिए खाना लाई हूँ, मैंने खुद यह खाना बनाया है, लेकिन अब आप शहर वालो को पता नहीं यह पसंद भी आएगा कि नहीं? अब मैंने उसको अंदर आने के लिए कहा तब वो अंदर आ गई और उसके बाद वो मेरे लिए खाना निकालने लगी। दोस्तों जितनी देर वो मेरे लिए खाना लगा रही थी उतनी देर ही में उसके गोरे गदराए हुए बदन को अपनी चकित नजरो से घूरकर निहार रहा था। दोस्तों वो क्या मस्त जवानी थी, उसको देखकर मेरा मन कर रहा था कि अभी में उसको पकड़कर अपनी बाहों में भर लूँ और खाने की जगह उसको ही खा जाऊं, लेकिन मैंने अपने मन को बहुत बस में किया और फिर में उसके सामने बैठकर खाना खाने लगा।

दोस्तों खाना खाते हुए मैंने ऐसे ही उसके साथ थोड़ी बहुत बात करना शुरू किया, मैंने सबसे पहले अपने बारे में उसको कुछ बातें बताई और उसने भी मुझे अपने बारे में सब कुछ बता दिया और उसके बनाए हुए खाने की मैंने उसको बहुत तारीफ भी कि जिसको सुनकर वो बहुत खुश थी। अब ऐसे ही कुछ दिन तक हम दोनों के बीच चलता रहा, जिसकी वजह से अब वो मुझसे बहुत हद तक खुल चुकी थी और वो अब मुझसे बहुत बार हंसी मज़ाक भी कर लेती और मेरे मजाक करने से उसको बुरा भी नहीं लगता था। दोस्तों मुझे पता चला कि उसका नाम रागिनी था और एक दिन जब वो सुबह मेरे लिए चाय और नाश्ता बनाकर ले आई, तब मैंने जाकर दरवाज़ा खोला और फिर में वापस उल्टे पैर आकर पलंग पर आकर दोबारा लेट गया। अब उसने अंदर मेरे पास आकर मुझसे पूछा कि क्यों क्या हुआ साहब आज आप कुछ ठीक नहीं लग रहे है? क्यों आपकी तबियत तो ठीक है ना? तब मैंने उसको कहा कि हाँ आज मुझे मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही है, मेरा पूरा बदन टूट रहा है और सर भी भारी भारी सा हो रहा है।

अब वो मेरा सर छुकर देखने लगी और उसके बाद वो मुझसे कहने लगी कि आपको बुखार तो नहीं है, मुझे ऐसा लगता है कि आप काम करके बहुत तक गये है इसलिए आपको आज ऐसा महसूस हो रहा है। अब आप आइए में आज आपकी मालिश कर देती हूँ इसकी वजह से आपको बहुत आराम मिल जाएगा। फिर मैंने उसको ऐसा करने से मना किया, लेकिन वो नहीं मानी और वो खुद ही जाकर तेल लेकर आ गई और उसके बाद उसने जमीन पर एक चटाई को बिछा दिया और फिर वो मुझसे कहने लगी आप इस पर अपनी इस टीशर्ट को उतारकर लेट जाए। अब मैंने वैसा ही किया और में सिर्फ केफ्री को पहनकर नीचे लेट गया, उसके बाद वो मेरे दोनों पैरों पर तेल लगाकर मालिश करने लगी और मुझे उसके नरम मुलायम हाथों का स्पर्श पाकर बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था जिसकी वजह से में मन ही मन बहुत खुश था। दोस्तों उसने उस समय एक गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी, उस समय वो थोड़ा झुककर मेरे पैरों पर तेल लगा रही थी इसलिए उसके बड़े आकार के गले वाले ब्लाउस से गोरे गोरे बूब्स बाहर आ रहे थे। फिर यह सब देखकर मेरा लंड धीरे धीरे तनकर खड़ा हो गया और कुछ देर बाद मैंने देखा कि वो अपनी तिरछी नजर से मेरे लंड को देख रही थी।

फिर मैंने ऐसे ही उसके साथ बात करते हुए उसको पूछा कि रागिनी तुम्हारी उम्र कितनी है? वो बोली कि 25 साल, मैंने उसको कहा क्या तुम्हारा मन नहीं करता कि तुम्हारी दोबारा से शादी हो? वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर थोड़ा सा उदास होकर कहने लगी कि साहब कौन सी औरत यह नहीं चाहेगी कि उसको उसका मर्द प्यार करे और में भी तो एक औरत ही हूँ? लेकिन मेरी बुरी किस्मत से मेरा मर्द तो बिना मुझे छुए ही मर गया। अब तो मुझे शायद ऐसे ही अपना यह पूरा जीवन ऐसे ही काटना पड़ेगा और मुझे उस प्यार के लिए सदा ही तरसते रहना पड़ेगा। अब मैंने उसको पूछा क्या शादी के बिना प्यार नहीं हो सकता? वो बोली कि आप तो जानते है कि में गाँव में रहती हूँ और इस गाँव के प्रधान की बेटी हूँ इसलिए इस गाँव में कोई भी ऐसा है ही नहीं जो मुझे प्यार कर सके। अब मैंने सही मौका देखकर उसको कहा क्या में भी नहीं हूँ जो तुम्हे प्यार कर सके? अब वो यह शब्द सुनकर थोड़ा सा शरमाकर बोली कि धत आप क्यों मुझ जैसी गाँव की लड़की को प्यार करेंगे? अब में उसको कुछ नहीं बोला और में तुरंत ही उठकर बैठ गया और फिर में कुछ देर उसकी उसकी आँखों में आंखे डालकर देखने लगा और वो भी कुछ देर तो मुझे लगातार देखती ही रही, लेकिन फिर उसने शरमाकर अपनी आँखों को बंद कर दिया।

फिर मैंने अब उसको अपनी बाहों में भरकर अपनी छाती से लगा लिया, जिसकी वजह से उसके बूब्स मेरी छाती से दब रहे थे, लेकिन वो कुछ नहीं बोली और उसने भी मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया। फिर उसके बाद मैंने उसके गरम होंठो पर अपने होंठ रखकर उसको चूसना शुरू कर दिया और ऐसा करते हुए ही मेरा एक हाथ उसके नरम नरम बूब्स को सहलाने लगा। अब उसने झट से मेरा हाथ पकड़ लिया और वो मुझसे कहने लगी कि अभी यह मत करो क्योंकि में बिल्कुल कुंवारी हूँ और मेरे मन का एक अरमान था कि जब भी में पहली बार अपनी चुदाई करवाऊ तब वो बिल्कुल सुहागरात की तरह हो। फिर वो कहने लगी कि आज मेरे बापू दोपहर के समय हमारी रिश्तेदारी में काम से जाने वाले है, इसलिए में आज रात को जब आपका खाना लेकर आउंगी तब में यहीं पर रुक जाउंगी क्योंकि घर पर मुझे कोई और रोकने वाला नहीं होगा। फिर तब आप मुझे अपनी दुल्हन बनाकर बहुत सारा प्यार करना। अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है, लेकिन अभी जब शुरुआत हो ही गयी है तो कम से कम तुम मुझे कुछ पीला तो दो और यह बात कहकर मैंने उसका ब्लाउज ऊपर सरकाकर उसके एक बूब्स को बाहर निकालकर बहुत ज़ोर से चूसना शुरू किया, जिसकी वजह से वो आअहह उफ्फ्फ करने लगी। फिर कुछ देर तक जमकर बूब्स के मज़े लेने के बाद मैंने उसको छोड़ दिया वो उसके बाद अपने कपड़े ठीक करके हंसती हुई खुश होकर अपने घर चली गयी।

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दोस्तों उसके चले जाने के बाद मुझे मन ही मन बहुत खुशी महसूस हुई और मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, में पूरा दिन बस उसकी चुदाई के सपने ही देखता रहा। फिर शाम को करीब पांच बजे जब में चुदाई के सपनों में खोया हुआ था उसी समय किसी ने दरवाज़ा खटखटाया। अब मैंने दरवाज़ा खोलकर देखा, उस समय बाहर एक आदमी खड़ा हुआ था और उसके हाथ में एक बहुत बड़ा सा पैकेट था। फिर उसने मुझसे कहा कि प्रधान जी के घर से यह सामान में आपके लिए लेकर आया हूँ, उन्होंने यह आपको देने को बोला था। अब मैंने वो पैकेट लेकर में अंदर आ गया और फिर मैंने जब उसको खोलकर देखा तो उसमे बहुत से फूल थे और एक चिठ्ठी भी थी जिसमे रागिनी ने लिखा था कि में यह फूल अपनी सुहाग रात मानने के लिए भेज रही हूँ आप इन फूलो से मेरी सुहागरात को हमेशा के लिए यादगार बना देना। अब मैंने खुश होकर अंदर बेडरूम में जाकर पलंग पर एक नई सफेद रंग की चादर को बिछा दिया और वो सारे फूल मैंने उस पर डाल दिए और फिर मैंने वो पूरा कमरा ऐसे सजा दिया जैसे ठीक सुहागरात में सजाया जाता है और उस काम को खत्म करके में खुद भी नहाकर कुर्ता पज़ामा पहनकर तैयार हो गया।

फिर रात को करीब 8:30 बजे रागिनी आ गई और मैंने उसको अंदर लेकर तुरंत दरवाजे को बंद करके बाहों में लेने की कोशिश कि तो वो मुस्कुराते हुए बोली जानू थोड़ा सा इंतजार तो करो तुम्हे इतनी भी क्या जल्दी है। अब मैंने देखा कि उसके हाथ में एक छोटा सा बेग था और वो हंसते हुए मुझसे बोली कि आप थोड़ा सा सबर करो सबर का फल हमेशा मीठा होता है और में जब आपको कहूंगी तब आप कमरे के अंदर आ जाना और तब तक उधर आकर देखना भी नहीं। अब वो मुझसे यह सब बातें कहकर उस कमरे के अंदर चली गयी और में बाहर बैठा हुआ इंतजार करता रहा करीब 30 मिनट के बाद अंदर से आवाज़ आई जानू अब आप आ जाओ। फिर में उठकर उस कमरे के अंदर चला गया, उसके बाद तो में बस उसको चकित होकर देखता ही रह गया क्योंकि उसने उस समय एक लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी और थोड़े से गहने और बहुत अच्छा मेकअप करके वो बिलकल दुल्हन बनी हुई थी। फिर पलंग पर थोड़ा सा घुंघट निकालकर वो शरमाई हुई नई दुल्हन की तरह बैठी हुई थी। अब मैंने झट से दरवाज़ा अंदर से बंद किया और में उसके पास जाकर पलंग पर बैठ गया और फिर मैंने अपने दोनों हाथों को आगे बढ़ाकर उसका घुंघट उठा दिया। फिर उसी समय उसने शरम से अपनी नज़रे नीचे झुका रखी थी मैंने उसकी आँखों पर अपने होंठ रख दिए।

अब उसने अपना बदन धीरे धीरे पूरा ढीला छोड़ दिया, मैंने उसको बाहों में लेकर अपनी छाती से लगा लिया और में थोड़ी देर ऐसे ही बैठा रहा, मैंने तब महसूस किया कि उसकी दिल की धड़कन बहुत तेज चल रही थी फिर वो उठी और पास से गरम दूध का गिलास उठाकर वो मुझे देने लगी और कहा कि इसको आप पी लीजिए। फिर मैंने उस दूध के गिलास को उसके हाथ से लेकर एक तरफ रख दिया और उसको कहा कि जानू इस वक़्त यह दूध पीने का समय नहीं है मुझे तो कुछ और ही पीना है। तो उसने मेरी बात को सुनकर शरमाकर धीरे से मुझसे पूछा कि आपको और क्या पीना है? मैंने उसके दोनों बूब्स को अपने एक हाथ से सहलाते हुए कहा कि मुझे यह पीना है। अब उसने शरमाकर धत बोला और कहा कि आप तो बहुत वो हो। फिर मैंने ऐसे ही उसके बूब्स को सहलाते हुए उसको गरम करना शुरू किया और धीरे धीरे उसका पल्लू हटाकर उसके ब्लाउज के बटन को में खोलने लगा और उसने अपने हाथ से अपना चेहरा शरम से ढक लिया और वो बोली कि मुझे शरम आ रही है। अब मैंने उसका पूरा ब्लाउज उतार दिया और फिर साड़ी को भी खोल दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने पेटीकोट और ब्रा में थी।

दोस्तों उसने सफेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी, उसी समय मैंने उसको बाहों में लिया और पीछे से उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और अब में उसकी नरम मुलायम पीठ को सहला रहा था और उसकी गोरी सुराही जैसी गर्दन पर अपने होंठ से रगड़ रहा था। अब मेरे यह सब करने की वजह से उसके मुहं से हल्की हल्की आहह्ह्ह उह्ह्ह्ह की आवाज निकल रही थी और मैंने उसकी पीठ को सहलाते हुए अपना हाथ उसके पेटीकोट में डालते हुए उसकी गांड को भी सहलाना शुरू कर दिया। अब ऐसे ही मैंने ज़ोर लगाकर उसके पेटीकोट का नाड़ा भी तोड़ दिया और जैसे ही नाड़ा टूटा उसका पेटीकोट फिसलकर नीचे आ गया। अब वो मेरे सामने सिर्फ पेंटी में थी। फिर मैंने उसको ऐसे ही बेड पर अपनी बाहों में लेकर लेटा दिया और में खुद खड़ा होकर अपने कपड़े उतारने लगा और अब में खुद भी सिर्फ अंडरवियर में उसके सामने आ गया और धीरे से में उसके ऊपर लेटकर मैंने उसके होंठो से अपने होंठ मिला दिए। फिर उसके दोनों हाथ उसके सर की सीध में रखकर अपने हाथ की उँगलियों में उसकी उँगलियाँ फंसाकर उसको मैंने कसकर पकड़ लिया और अब में उसके होंठो का रस पीने लगा था और ऐसे ही रस को पीते पीते मेरा खड़ा लंड उसकी चूत के ऊपर पेंटी को रगड़ रहा था।

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दोस्तों उस समय उसने अपनी दोनों आँखों को बंद किया हुआ था और फिर मैंने अपने एक हाथ से अपना अंडरवियर उतार दिया और में पूरा नंगा हो गया। फिर उसके बाद मैंने उसकी पेंटी को भी उतार दिया और फिर ऐसे ही में उसके ऊपर लेट गया, उसके सर पर उसको चूमना शुरू किया और धीरे धीरे में नीचे की तरफ आने लगा। दोस्तों फिर जैसे ही मेरे होंठ उसकी चूत तक पहुंचे उसने अपने दोनों हाथों से मेरा सर पकड़ लिया और अब उसके मुहं से सिसकियाँ निकलने लगी, उसकी चूत बिल्कुल गुलाबी रंग की थी और वो बिल्कुल साफ बिना बालो की थी। दोस्तों शायद उसने मेरे पास आने से पहले ही अपनी चूत के बालो को साफ किया था, मैंने ध्यान से देखा कि उसकी चूत से हल्का सा पानी निकल रहा था। अब मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू किया थोड़ी देर बाद में खड़ा हुआ और उसके सर की तरफ जाकर उसके सर के नीचे एक हाथ लगाकर मैंने उसका सर थोड़ा सा उठा दिया और उसके होंठ पर मैंने अपना लंड रगड़ दिया और उसने ऐसा करते ही अपना मुहं हल्का सा खोल दिया। फिर मैंने उसी समय अपना लंड उसके मुहं में दे दिया, जिसको उसने बहुत ही प्यार से चूसना शुरू कर दिया में उसके बूब्स को सहला रहा था ऐसे ही करीब दस मिनट तक में उसको अपना लंड मुहं में डालकर हल्के हल्के धक्के देता रहा।

फिर मैंने कुछ देर बाद उसको पलंग पर सीधा लेटा दिया और उसके दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर उसके दोनों हाथों में पकड़ा दिया और में उसके पैरों के बीच में आ गया, उसको बोला कि अब तुम थोड़ा सा बर्दाश्त करना क्योंकि तुम्हे अब हल्का सा दर्द होगा। अब वो मुझसे बोली कि हाँ में बस दुखदर्द को सहने के लिए तैयार हूँ और उसके बाद मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत के दाने पर रगड़ा जिसकी वजह से उसके मुहं से आह्ह्ह स्सीईईईइ की आवाज निकलने लगी और उसके पूरे बदन ने एक झटका खाया। फिर मैंने एक हाथ से उसकी कमर को पकड़ा और दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़कर उसका टोपा उसकी चूत के मुहं पर रख दिया और उसके बाद मैंने उसके दोनों कूल्हों को पकड़कर हल्का सा धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरे लंड का टोपा उसकी चूत में घुस गया। अब उसके मुहं से एक चीख निकल गयी, मैंने अपने लंड को वैसे ही रहने दिया और झुककर में उसके निप्पल को चूसने लगा और वो दर्द मज़े की वजह से आहह्ह्ह ऊहह्ह्ह्हह आईईई कर रही थी। फिर थोड़ी ही देर के बाद उसका दर्द कुछ कम हो गया, तब मैंने उसके बूब्स को सहलाते हुए धीरे धीरे अपने लंड को पहले से थोड़ा अंदर किया, लेकिन तभी थोड़ा सा अंदर जाने के बाद मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड किसी चीज से टकराकर वहीं पर रुक गया।

अब में तुरंत समझ गया कि वो उसकी चूत की सील थी और में अब समझ गया कि इसके टूटने के बाद अब यह ज़ोर से चिल्लाने वाली है। फिर मैंने उसको कसकर पकड़ लिया और उसके होंठो को अपने होंठो में दबा लिया, जिसकी वजह से वो ज्यादा ज़ोर से चिल्ला ना पाए। अब मैंने अपनी पूरी ताकत से एक ज़ोर का धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उसकी चूत की सील को तोड़ता हुआ पूरा का पूरा अंदर चला गया, लेकिन वो दर्द की वजह से बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी और वो अपना मुहं मेरे होंठो से छुड़ाने की कोशिश करने लगी जिसकी वजह से वो अपनी आवाज को बाहर निकाल सके, लेकिन मैंने उसको कसकर पकड़े रखा और अपना लंड भी अंदर डालकर में कुछ देर वैसे ही रुका रहा। फिर कुछ देर बाद वो धीरे धीरे शांत होने लगी, मैंने देखा कि दर्द की वजह से उसकी आँखों से आँसू बाहर निकल आए थे। फिर मैंने कुछ देर बाद उसको शांत देखकर उसके होंठो को आज़ाद कर दिया और अब में दोनों बूब्स को बारी बारी से अपने मुहं में लेकर उसका दूध किसी छोटे बच्चे की तरह पीने लगा।

दोस्तों अब उसके मुहं से आह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ की आवाज निकल रही थी जिसके बाद मैंने धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया और धीरे धीरे में अपने धक्को की गति को बढ़ाता चला गया, कुछ देर बाद अब उसको भी मेरे धक्को से मज़ा आने लगा था और वो अपनी गांड को उठा उठाकर मुझसे अपनी चुदाई करवाने लगी थी। फिर ऐसे ही में करीब दस मिनट तक उसको चोदता रहा इतनी देर में वो एक बार झड़ चुकी थी। अब उसको धक्के खाकर बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था और वो मुझसे कह रही थी आहह्ह्ह ऊफफ्फ्फ्फ़ हाँ और ज़ोर से चोदो मुझे मेरी 25 साल की उम्र में इतनी खुशी आज से पहले कभी नहीं मिली आअहह आज तुम मुझे पूरा निचोड़ दो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अब मैंने फिर से उसकी चूत से अपने लंड को बाहर निकाला और देखा कि पलंग पर बिछी चादर खून से भर चुकी है, लेकिन फिर वो सब देखकर अनदेखा करके मैंने उसको घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी गांड को पकड़कर फिर से अपने लंड को मैंने उसकी चूत में डाल दिया। अब में दोबारा ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर उसको चोदने लगा और मैंने अपने हाथ उसकी कमर से नीचे डालकर उसके दोनों लटकते हुए बूब्स को पकड़ लिया था, जो मेरे धक्को से बहुत बुरी तरह हिल रहे थे और में ऐसे ही तेज धक्के देकर उसको चोदता रहा।

अब वो मज़े से आआहहहह उह्ह्ह्ह करके मुझसे अपनी चुदाई करवाती रही, तभी कुछ देर बाद वो अचानक से ज़ोर से चिल्लाकर कहने लगी मेरी चूत फिर से झड़ने वाली है और ज़ोर से चोदो हाँ पूरा अंदर तक डालो तेज तेज धक्के लगाओ और इतना बोलते ही उसका पूरा बदन झटका खाया और वो फिर से झड़ गयी। फिर थोड़ी देर धक्के देने के बाद मुझे लगा कि अब में भी झड़ने वाला हूँ क्योंकि मैंने कंडोम नहीं लगाया था इसलिए मैंने बिना देर किए लंड को उसकी चूत से बाहर निकालकर उसकी गांड के ऊपर अपने वीर्य की पिचकारी को छोड़ दिया और उसके बाद हम ऐसे ही पूरे नंगे कुछ देर एक दूसरे को बाहों में लेकर लेट गये और उसके बाद वो उठकर बाथरूम में चली गयी। अब मैंने देखा कि उसको ठीक तरह से चला भी नहीं जा रहा था क्योंकि उसकी चूत आज फट चुकी थी में भी उसके पीछे बाथरूम में चला गया और में उसको बोला कि तुम मेरा भी लंड साफ करो। फिर उसने खुश होकर अपनी चूत और मेरा लंड पानी से धोकर साफ किया, जिसकी वजह से मेरा लंड एक बार फिर से तनकर खड़ा हो गया और उसी समय मैंने उसको लंड चूसने के लिए कहा। अब वो तुरंत ही मेरे पैरों के पास वहीं ज़मीन पर बैठकर मेरे लंड को अपने एक हाथ में पकड़कर लोलीपोप की तरह चूसने लगी और कुछ देर बाद मैंने उसको उठाया।

फिर दोबारा उसको अपने साथ कमरे में ले आया और वहां पर रखी एक टेबल पर उसकी गांड को टीकाकर उसके दोनों पैर ऊपर उठाकर अपने कंधो पर रखकर मैंने उसके सामने खड़े होकर उसकी चूत में अपना लंड दोबारा से डाल दिया। अब एक बार फिर से मैंने उसको बहुत बुरी तरह से धक्के देकर चोदा। दोस्तों इस वाली चुदाई में उसको भी बहुत मज़ा आया और इस तरह उस रात को हम दोनों ने अपनी पहली सुहागरात में करीब तीन बार चुदाई के जमकर मज़े लिए सुबह उसकी दर्द की वजह से ऐसी हालत हो चुकी थी कि वो बिल्कुल भी चल नहीं पा रही थी इसलिए वो बहुत ही मुश्किल से अपने घर चली गयी। दोस्तों उसका बाप तीन दिन बाद वापस आने वाला था और दिन के समय मुझे भी अपने प्रॉजेक्ट के कामो की वजह से व्यस्त रहना पड़ता था और इसलिए वो तीन दिन तक रोज रात को आकर मेरी पत्नी बन जाती थी और हम दोनों बहुत जमकर मस्त चुदाई करते। फिर दूसरी रात को मैंने उसकी पहली बार गांड भी मारी और तब उसकी गांड से भी बहुत खून निकला, लेकिन मज़ा बड़ा आया वो मेरे साथ वो सब करके तीन रातो में इतनी संतुष्ट हो चुकी थी कि उसने मुझे अब पूरी तरह से अपना पति ही मान लिया था और मैंने भी उसकी चुदाई में अपनी तरफ से कोई भी कसर ना छोड़कर अपना एक सच्चे पति का धर्म निभाया और उसको हमेशा पूरी तरह से संतुष्ट किया, उसने मुझसे जैसे कहा वैसे ही मैंने उसके साथ किया और कभी भी मैंने उसकी चूत में अपने वीर्य को नहीं डाला क्योंकि में नहीं चाहता था कि उसकी अपने गाँव में इज्जत खराब हो, वो सभी के सामने वैसी ही सीधीसादी बनी रहे।

दोस्तों यह थी मेरी वो सच्ची घटना, में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को इसको पढ़कर बड़े मज़े आने वाले है क्योंकि जब में चुदाई करके इतना खुश था तो आपको पढ़कर भी तो मज़ा आएगा ।।

धन्यवाद …

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