गायत्री भाभी की चूत का समागम

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प्रेषक : राकेश …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राकेश है। मेरी उम्र 38 साल की है। ये बात आज से 12 साल पहले की है। मेरा नाम राकेश है और में हिमाचल प्रदेश का रहने वाला हूँ। उस समय हम लोग अपने नये घर में शिफ्ट हुए थे, जब नवम्बर दिसम्बर का महीना था, जिस एरिया में हमारा घर था, वो एरिया कुछ ज्यादा अच्छा नहीं था इसलिए में वहाँ के लोगों से ज्यादा बातचीत नहीं करता था। वहीं मेरे घर से एक मकान छोड़कर दूसरे मकान में एक फेमिली रहती थी। पति पत्नी और उनका एक बेटा, उनका बेटा 7-8 साल का था, पति की एक बुक शॉप थी। में उन्हें भैया कहकर बुलाता था, उनकी पत्नी का नाम गायत्री था, उनकी उम्र यही कोई 32 साल की होगी, वो बहुत खूबसूरत थी और उनकी बॉडी भी स्लिम थी। उनका हमारे घर पर आना जाना था इसलिए में उनसे अक्सर बातें करता रहता था।

फिर एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि राकेश आप मेरे बेटे पीयूष को कोचिंग पढ़ा दोगे? उसके एग्जॉम होने वाले है, अगर तुम उसे एक महीने पहले से ही पढ़ा दो तो वो अच्छे नम्बरों से पास हो जाएगा। तब मैंने कहा कि ठीक है भाभी, में पीयूष को पढ़ा दिया करूँगा, लेकिन दिन में तो में ऑफिस चला जाता हूँ तो शाम को ही पढ़ा पाऊँगा। तब भाभी ने कहा कि ठीक है। सच में भाभी इतनी खूबसूरत थी कि क्या बताऊँ? लेकिन मैंने उन्हें कभी गलत नजर से नहीं देखा था। फिर अगले दिन से में रात में कभी 7 बजे तो कभी 8 बजे जाकर पीयूष को पढ़ाने लगा। अब जब में पीयूष को पढ़ाता तो भाभी भी वही बैठी रहती थी और मुझसे बातें करती थी।

फिर एक बार उन्होंने मुझसे पूछा कि क्यों राकेश तुम्हारे कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? तो में घबरा गया कि भाभी क्या पूछ रही है? क्योंकि इससे पहले कभी ऐसी बात हमारे उनके बीच में नहीं हुई थी। मैंने इनकार में अपना सिर हिला दिया। तो वो कहने लगी कि तुम तो लड़कियों की तरह शर्मा रहे हो। तब मैंने कहा कि नहीं भाभी ऐसी कोई बात नहीं है, सच में मेरे कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। फिर उस दिन उसके बाद कोई बात नहीं हुई। फिर एक दिन में पीयूष को पढ़ा रहा था, तो तभी भाभी ने अंदर से आवाज देकर मुझे अंदर आने के लिए कहा। में पीयूष को किताब पढ़ने के लिए देकर अंदर चला गया। फिर में अंदर गया तो भाभी ने कहा कि मुझसे ये गैस का रेगुलेटर नहीं बदल रहा है, तुम बदल दो जरा। तब मैंने कहा कि ठीक है में बदल देता हूँ और ये कहकर गैस का रेगुलेटर बदलने के लिए आगे बढ़ा। अब भाभी वही गैस सिलेंडर के बगले में खड़ी थी और रेगुलेटर को बदलने की कोशिश कर रही थी।

फिर उस समय पता नहीं किस तरह से मेरा हाथ भाभी की गांड से टच हो गया? तो भाभी ने कुछ नहीं कहा। अब उसके बाद रेगुलेटर बदलते समय भाभी का हाथ बार-बार मेरे हाथ में आ जा रहा था, भाभी का हाथ बहुत ही सॉफ्ट था। फिर किसी तरह से मैंने रेगुलेटर बदल दिया और फिर में पीयूष को पढ़ाने चला गया। फिर उसके दूसरे दिन भी मुझे भाभी ने अंदर बुलाया और कहने लगी कि कल तुम्हारे भैया कुछ बुक्स लेकर आए थे, तुम्हें पढ़नी हो तो वो वहाँ रखी है, वहाँ से ले लो और ये कहते हुए उन्होंने टेबल की तरफ इशारा कर दिया। फिर मैंने वो बुक ली और वहाँ से चला गया, उन बुक्स में कुछ हॉट पिक्चर और कुछ स्टोरी थी। फिर मैंने वो सभी बुक्स पढ़ी और किताब पूरी पढ़ने के बाद मैंने सोचा कि बुक वापस रख दूँ और यही सोचकर में उनके घर चला गया। उस समय दोपहर के 2 बज रहे थे।

फिर जब में घर के अंदर गया तो मैंने देखा कि भाभी ने केवल पेटीकोट और ब्लाउज पहन रखा है और उनके ब्लाउज के 2 बटन खुले है, जिससे उनकी चूचीयाँ साफ-साफ दिख रही थी। अब उनकी चूचीयों को देखकर तो मेरे लंड में जैसे करंट दौड़ने लगा था। अब भाभी ने मुझे देख लिए था, लेकिन उसके बाद भी ऐसे बर्ताव किया कि जैसे उन्होंने मुझे नहीं देखा है। फिर उसके बाद अचनाक से मेरी तरफ देखते हुए बोली कि अरे राकेश तुम कब आए? मैंने तो तुम्हें देखा ही नहीं, आओ अंदर आ जाओं। फिर उसके बाद में अंदर आकर बैठ गया। तब वो मेरे पास आई और बोली कि एक बात बताओ तुमने आज तक कभी किसी लड़की या औरत को नंगा देखा है? तो तब मैंने कहा कि नहीं भाभी, आज तक नहीं देखा है। अब वो मेरे बगल में बैठी थी और जब बातें कर रही थी तो में बार-बार उनकी चूचीयों की तरफ देख रहा था, जिसको भाभी ने मुझे देखते हुए देख लिया था।

फिर वो बोली कि अगर देखना है तो मुझसे कहो, में तुम्हें ऐसे ही दिखा दूँगी। में घबरा गया कि भाभी यह क्या बोल रही है? फिर उसके बाद भाभी ने मेरे चेहरे पर अपना एक हाथ रखते हुए बोला कि कभी किसी के साथ कुछ किया है या नहीं? तो में चुप रहा और मैंने कुछ नहीं बोला। फिर भाभी अपना एक हाथ मेरे चेहरे और सीने पर घुमाने लगी। तब मैंने भाभी से कहा कि भाभी में आपको किस करना चाहता हूँ और यह कहते हुए उनके चेहरे को अपनी तरफ खींचकर उनके होंठो पर किस करने लगा था, उनके होंठ बहुत ही रसीले थे। अब में उनके होंठो को चूसने लगा था और भाभी मेरे होंठो को चूसने लगी थी। फिर हम दोनों करीब 2 मिनट तक ऐसे ही किस करते रहे। फिर उसके बाद भाभी बोली कि तुम तो कह रहे थे कि तुमने कभी कुछ नहीं किया है, लेकिन तुम्हें देखकर लगता नहीं है कि तुमने कभी कुछ नहीं किया है। तब में कुछ नहीं बोला और भाभी के ब्लाउज के एक बटन को खोलकर उनकी चूचीयों को हल्का-हल्का दबाने लगा था। अब उनको भी अच्छा लग रहा था इसलिए वो कुछ नहीं बोली थी। फिर मैंने उनके ब्लाउज को पूरा खोल दिया। तब भाभी कहने लगी कि तुम तो बहुत तेज हो, पहले तो तुमने किस करने को कहा और अब मेरे बूब्स दबाने लगे।

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फिर तब मैंने कहा कि भाभी आप बहुत खूबसूरत हो और में आपको चोदना चाहता हूँ। तब भाभी बोली कि इसलिए तो तुम्हें वो बुक्स दी थी कि वो देखकर तुम कुछ समझो और में बिना कुछ कहे भाभी की एक चूची पर अपना मुँह लगाकर चूसने लगा था और दूसरी चूची को अपने एक हाथ से दबाने लगा था। अब भाभी भी मस्ती में आकर उूउऊहह, आहह, हहाआआआआआअ, आआ और ज़ोर से चूसो राकेश, बहुत अच्छा लग रहा है, चूसते रहो, उूउउहह, हाआआ, मज़ा आ रहा है राकेश, ज़ोर से चूसो और ज़ोर से। अब में अपनी पूरी स्पीड से भाभी की चूचीयों को चूसने लगा था। अब उनकी चूची चूसते हुए में अपने हाथ भाभी के पेटीकोट के अंदर डालकर उनकी जांघो को सहलाने लगा था। अब तब तक भाभी भी मस्त हो चुकी थी। फिर भाभी की जांघो को सहलाते हुए में भाभी की चूत को भी हल्के-हल्के सहलाने लगा। अब भाभी मस्ती में आआआआअ, आआआआ, आहह, उूउफफ्फ, उफफफफफ्फ, उफफफफफ्फ किए जा रही थी।

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फिर भाभी ने कहा कि राकेश तुम तो बहुत एक्सपर्ट लगते हो, मुझसे पहले कितनो के साथ चुदाई कर चुके हो? तो तब मैंने कहा कि भाभी चुदाई तो 3-4 लेडी के साथ की है, लेकिन जैसी चूचीयाँ आपकी है वैसी चूचीयाँ मैंने आज तक नहीं चूसी है, आपकी चूचीयाँ बहुत टेस्टी है और ये कहते हुए मैंने अपनी उंगली भाभी की पेंटी के अंदर उनकी चूत में डाल दी। भाभी ने सस्स्स्स्सस्स्स, आह, आआआआआआ करते हुए सिसकारी ली, आह अब बहुत अक्चा लग रहा है। फिर मैंने झटके से भाभी की पेंटी उतार दी और कहा कि भाभी सच में आप बहुत खूबसूरत हो। तब भाभी ने मुझसे कहा कि ये क्या भाभी-भाभी लगा रखा है? तुम मुझे कुछ और कहकर बुलाया करो। अब तब तक मैंने गायत्री के सभी कपड़े उतार दिए थे। तब गायत्री भाभी मेरी जानेमन ने मुझे हल्का सा धक्का देकर बेड पर लेटा दिया और फिर वो मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर चूसने लगी और चूसते-चूसते बोल रही थी कि मेरे राजा तेरा लंड तो एकदम मस्त है, जब ये लंड मेरी चूत में जाएगा तो मेरी चूत को भी बहुत मज़ा आएगा और अब वो मेरे लंड को ज़ोर-जोर से चूसे जा रही थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर जब मुझसे भी नहीं रहा गया तो में भी अपना लंड उनके मुँह में अंदर बाहर करने लगा था। अब वो मेरे लंड को इस तरह से चूस रही थी कि में जल्दी ही हल्के होने की स्टेज में आ गया था और ज़ोर-ज़ोर से अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा था और फिर थोड़ी देर के बाद में उनके मुँह में ही झड़ गया था। फिर उन्होंने अपनी जीभ से ही मेरे लंड को साफ किया और कहा कि बहुत दिनों के बाद ऐसा मज़ा आ रहा है और फिर वो बाथरूम में चली गयी। फिर करीब 10 मिनट के बाद वो बाथरूम से निकलकर आई और मेरे बगल में बैठ गयी और मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़कर हिलाने लगी थी और में उनके होंठो को चूसने लगा था।

फिर थोड़ी देर तक उनके होंठो को चूसने के बाद मैंने कहा कि में आपकी चूत चूसूँगा और उनकी दोनों टांगे फैलाकर उनको बेड पर लेटा दिया और फिर में उनकी चूत को अपनी दो उंगलियो से फैलाकर उनकी रसीली चूत को अपनी जीभ से हल्के-हल्के चूसने लगा था और वो आआआआआआआआआअ, आअहह, आहह, पूरा चूस लो मेरी चूत को, वववववववव, ओूऊऊऊऊऊऊ, आहह, आहह, आहह, बहुत अच्छा लग रहा है और अब वो भी अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी थी। तब में उनकी चूत में अपनी पूरी जीभ डालकर चूसने और चाटने लगा और वो ज़ोर-ज़ोर से आआआआआआ, आआहह, चूस लो मेरी चूत का पूरा रस, चूस लो, आआआआअहह, आहह। अब उनकी चूत पूरी गीली हो चुकी थी और अब में उनकी चूत का रस बड़े मज़े से चूसता जा रहा था। फिर उन्होंने सिसकारी लेते हुए कहा कि राकेश अब अपना लंड डाल भी दो मेरी चूत में, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है। फिर मैंने अपने लंड को गायत्री भाभी की चूत पर रखकर एक हल्का सा धक्का लगाया कि मेरा आधा से ज्यादा लंड उनकी चूत के अंदर चला गया और वो ज़ोर से सस्स्स्स्सस्स्स, आआआआआआआआ, आआआआआअ जल्दी से पूरा डाल दो कहने लगी।

तब मैंने एक और ज़ोर का धक्का मारा तो मेरा पूरा लंड गायत्री की चूत में घुस गया और वो आहह, आआअहह, आहह और जोर से चोदो मुझे, आज मुझे जी भरकर चोदो और अब में अपनी पूरी स्पीड से उनकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करने लगा था। अब वो भी अपनी कमर उठा-उठाकर मेरा साथ दे रही थी और बोले जा रही थी आज मेरी चूत को फाड़ डालो, इसे खूब चोदो, चोदते रहो और फिर वो बोलते-बोलते झड़ गयी, लेकिन में उसी तरह से अपनी स्पीड से उन्हें चोदे जा रहा था, उनकी चूत में से रस निकल रहा था और पच-पच की आवाज़े आने लगी थी। तब मैंने उनसे कहा कि में आपको दूसरी स्टाइल से चोदना चाहता हूँ। तब वो बोली कि कौन सी स्टाइल से चोदोगे अब मुझे? तो तब मैंने कहा कि आप जमीन पर लेट जाओ और अपने दोनों पैरों को उठाकर बेड पर रख दीजिए और फिर उन्होंने ऐसा ही किया।

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फिर में उनके दोनों पैरो के बीच में गया और उसके दोनों पैरो को फैलाकर अपने दोनों कंधे पर रखकर उनकी चूत के छेद पर अपना लंड रखकर धक्के मारने लगा। अब इस तरीके से उन्हें भी अच्छा लगने लगा था और बोली कि बहुत मज़ा आ रहा है मेरे राजा, जैसे चोदना हो चोदो मुझे। फिर मुझे करीब 10 मिनट तक उसको उस स्टाइल में चोदने के बाद लगा कि अब में झड़ने वाला हूँ। तब मैंने उनसे कहा कि अब में झड़ने वाला हूँ, में अपना वीर्य कहाँ गिराऊँ? तो तब उन्होंने कहा कि मेरी चूत में ही गिरा दो और फिर मैंने अपना पूरा वीर्य उनकी चूत में ही गिरा दिया और फिर में बेड पर आकर लेट गया। तभी उनकी नजर घड़ी पर गयी तो देखा कि 5 बजने वाले है। तब वो बोली कि पीयूष के आने का टाईम हो गया है, अब तुम शाम को आना और फिर मैंने अपने कपड़े पहने और चला आया।

फिर जब में शाम को पीयूष को पढ़ाने के लिए गया, तो 15-20 मिनट के बाद उन्होंने मुझे अंदर रूम में बुलाया और बातें करने लगी और कल दिन में आने के लिए बोली। तब मैंने कहा कि ठीक है। तभी उन्होंने मेरे होंठो पर ज़ोर से किस किया और कहने लगी कि जो मज़ा तुम्हारे साथ आता है, वो मुझे उनके साथ (उनके पति) नहीं आता है। तो तभी मैंने भाभी से कहा कि अभी कुछ दिनों पहले जो आपके यहाँ आई थी, वो लड़की कौन थी? तो तब गायत्री भाभी ने कहा कि वो मेरे मामा की लड़की थी। तब मैंने कहा कि वो भी बहुत खूबसूरत और सेक्सी लगती है। तो तब भाभी कहने लगी कि मेरी शादी से पहले हम दोनों ने कई बार साथ में सेक्स किया है। तब मैंने भाभी से कहा कि उसे भी यहाँ बुला लो, में आप दोनों की चुदाई एक साथ करना चाहता हूँ। तो तब उन्होंने कि ठीक है अगले महीने तुम्हारे भैया (उनके पति) 10 दिन के लिए दिल्ली जाने वाले है, तो तब में उसको यही बुला लूंगी, फिर तुम जैसे चाहो हम दोनों को चोदना और फिर मैंने हल्के से उनकी चूचीयों को दबाते हुए उनको होंठो पर एक किस किया और फिर में दूसरे रूम में पीयूष को पढ़ाने चला गया ।।

धन्यवाद …

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