जयपुर की किरण की चुदाई

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प्रेषक : विक्की …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विक्की है, मेरी उम्र 27 साल है और में जयपुर का रहने वाला हूँ। में एक मेनेजमेंट प्रोफेशनल हूँ और एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता हूँ। में काफ़ी दिनों से कामुकता डॉट कॉम की स्टोरी पढ़ाता आ रहा हूँ और इनका बहुत बड़ा फैन भी हूँ।। यह मेरी लाईफ का पहला अनुभव है और काफ़ी रोमांटिक है। यह बात तब की है, जब हमारे पड़ोस में नए किराएदार आए थे, वो 2 बहनें और 1 छोटा भाई और माँ थी। बड़ी बहन का नाम नजमा और छोटी का नाम किरण था, उन दोनों का फिगर कमाल का था।

में अपनी छत पर बैठकर एग्जॉम की तैयारी किया करता था, तो छोटी बहन किरण मुझे छुप-छुपकर देखती थी। उसकी उम्र 19-20 की होगी, उसका फिगर कमाल का था, मेरे ख्याल से 34-28-34 होगा, उसके बूब्स तो कमाल के थे, उसके बूब्स देखकर मेरे मुँह में पानी आने लगता था, जब वो चलती थी तो उसके बूब्स हिलते थे। अब आहिस्ता-आहिस्ता में भी उसकी तरफ देखने लगा था। अब वो भी मेरी तरफ देखकर मुस्करा देती थी। फिर एक शाम मैंने हिम्मत करके उसको बुला लिया। फिर मैंने उससे कहा कि आपका नाम क्या है? और अंदर से डर भी रहा था कि कहीं वो गुस्सा ना हो जाए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। फिर उसने अपना नाम किरण बताया। फिर मैंने पूछा कि आप कितनी पढ़ी हो? और फिर इधर ऊधर की बातें होती रही। फिर तभी मैंने पूछा कि आपने माइंड तो नहीं किया? तो वो कहने लगी कि नहीं ऐसी कोई बात नहीं है। फिर मैंने कहा कि इसका मतलब है अब तो रोज ही बात हो सकती है? तो वो कहने लगी कि जरूर।

फिर इस तरह से हम रोज शाम को छत पर बातें करते और मौका मिलने पर रात को भी बातें करते थे। फिर एक दिन वो कहने लगी कि मेरे हाथ बहुत ठंडे हो रहे है। फिर मैंने उसका हाथ पकड़ लिया तो वो बहुत ठंडी थी। फिर मैंने उसके हाथ पर किस कर दी, तो उसने अपना हाथ पीछे हटा लिया। फिर मैंने कहा कि क्या हुआ? तो वो कहने लगी कि कुछ नहीं। फिर अगली रात मैंने उससे कहा कि में तुमको किस करना चाहता हूँ। तो वो कहने लगी कि कही कोई देख ना ले, मुझे डर लगता है।

फिर मैंने कहा कि चलो रात को और फिर इस तरह से मैंने रात को उसको पहले हाथ पर और फिर उसके चेहरे पर किस किया तो उसने भी मेरे चेहरे पर किस कर दी। अब में समझ गया था कि सिग्नल ग्रीन है। फिर मैंने उसके लिप्स पर अपने लिप्स रख दिए, तो थोड़ी देर में वो भी जवाब देने लगी। अब आहिस्ता- आहिस्ता मेरे हाथ उसकी कमर पर चले गये थे और फिर मेरा एक हाथ उसके बूब्स पर चला गया, उसके बूब्स बहुत नर्म थे। यह मेरा पहला अनुभव था। फिर मैंने कहा कि यह इतने नर्म होते है क्या? तो वो कहने लगी कि और क्या? ख़ैर फिर हमें कुछ शोर सुनाई दिया, तो हम लोग नीचे चले गये। फिर तो हम दोनों रोज ही मज़े लेने लगे और अब हम किसी खास मौके का इंतज़ार कर रहे थे। फिर एक दिन मेरे सारे घरवाले एक शादी में चले गये और उन लोगो को अगले दिन वापस आना था। तो तभी मैंने उससे कहा कि आज मौका अच्छा है, घर आ जाओ तो वो कहने लगी कि घर आकर क्या करना है? तो मैंने कहा कि आराम से बैठकर बातें करेंगे, किसी का डर नहीं होगा। फिर वो कहने लगी कि ठीक है। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर कुछ देर बाद वो मेरे घर पर आई, तो पहले तो हमने आराम से बैठकर कुछ बातें की। फिर मैंने उसके लिप्स पर किस की। अब वो भी गर्म होना शुरू हो गयी थी और फिर वो मुझसे लिपट गयी और गले से लगाकर दबाने लगी और अब उसके बूब्स मेरी छाती में दब गये थे। फिर मैंने उसको बेड पर लेटा दिया और उसकी गर्दन और चेहरे पर किसिंग करनी स्टार्ट कर दी और उसके बूब्स को कपड़ो के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया। अब वो भी गर्म हो रही थी। फिर मैंने उसकी कमीज ऊपर कर दी, उसने ब्लेक कलर की ब्रा पहनी हुई थी। फिर मैंने पहले उसकी ब्रा के ऊपर से किस की और फिर उसकी ब्रा भी उतार दी और फिर उसने मेरी शर्ट भी उतार दी। अब उसके बूब्स मेरे सामने पूरे नंगे थे, जिन पर में शुरू से ही फिदा था।

अब उसके नंगे बूब्स देखकर तो में पागल ही हो गया था। अब में उसके एक बूब्स को चूसने लगा था और दूसरे को अपने हाथ से प्रेस करने लगा था। फिर में काफ़ी देर तक उसके बूब्स को सक करता रहा और नीचे से मेरा लंड उसकी चूत पर कपड़ो के ऊपर ही था। अब में ऊपर से हिल रहा था और वो नीचे से हिल रही थी। फिर में अपना एक हाथ उसकी चूत पर ले गया, उसने सलवार के नीचे पेंटी नहीं पहनी थी और उसकी सलवार चूत से निकले पानी से गीली हो रही थी। फिर कुछ देर में ही उसने अपना पानी छोड़ दिया और फिर वो कुछ ठंडी हो गयी। फिर जब मैंने फिर से उसके बूब्स चूसना स्टार्ट किए तो वो फिर से गर्म होना शुरू हो गयी और साथ ही मेरे घर की डोरबेल बजी तो मैंने उसको छुपा दिया और फिर जब मैंने जाकर दरवाजा खोला तो बाहर मेरा एक कज़िन था। फिर मैंने बहाने से अपने कज़िन को बाहर से एक कोल्डड्रिंक लेने भेजा और किरण को उसके घर भेज दिया। उस दिन मुझे काफ़ी दुख हुआ कि में ज्यादा कुछ नहीं कर सका, लेकिन उसके बूब्स ने मुझे पूरा मज़ा दिया था।

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फिर इसी तरह से दिन गुज़रने लगे। अब हम लोग मौका मिलने पर बातें भी कर लेते थे और किस वगैरह भी, क्योंकि अब मौसम काफ़ी चेंज हो चुका था इसलिए अब हमें मौका कम ही मिलता था। फिर एक बार मुझे पता चला कि उसके घर पर 2 दिन के लिए कोई भी नहीं है, उसकी माँ और बहन अपने गाँव गयी है और किरण और उसका एक छोटा भाई घर पर अकेले है। फिर जब किरण ने मुझे यह सब बताया तो मेरी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा। फिर मैंने उससे कहा कि में रात को 1 बजे के बाद छत पर आऊंगा। फिर जब में छत पर गया, तो वो मेरा इंतजार कर रही थी, तो पहले तो हम काफ़ी देर तक बातें करते रहे। अब वो मुझसे कह रही थी कि अब में उसको टाईम नहीं देता हूँ और बहुत बिज़ी हो गया हूँ। फिर मैंने उसे समझाया कि अब मेरे घरवालों को कुछ शक हो गया है इसलिए थोड़ी समझदारी से काम कर रहा हूँ। ख़ैर फिर कुछ देर बातें करने के बाद मैंने उससे कहा कि मुझे काफ़ी सर्दी लग रही है, क्या करूँ? तो वो कहने लगी कि मुझे भी बहुत सर्दी लग रही है।

फिर मैनें कहा कि ऐसा करते है तुम्हारे रूम में जाकर बैठकर आराम से बातें करते है, यहाँ तो इधर उधर से कोई भी छत पर आ सकता है। तो वो कहने लगी कि ठीक है और फिर में उसके घर में चला गया। अब हम जाकर किरण के रूम में बैठ गये थे। फिर पहले तो हमने थोड़ी बहुत बातें की और फिर मैंने उसका हाथ पकड़ लिया, तो वो कहने लगी कि ऐसा ना करो। फिर मैनें कहा कि मुझे सर्दी लग रही है, थोड़ा गर्म ही कर दो और फिर मैंने उसको गले से लगा लिया। अब वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी थी। फिर आहिस्ता-आहिस्ता मेरे हाथ उसके बूब्स पर चले गये और उसकी कमीज के अंदर चले गये। अब वो सस्शह, आहह की आवाज़ें निकालने लगी थी। फिर उसने अपनी कमीज ऊपर उठा दी और अपनी ब्रा से अपने बूब्स बाहर निकाल दिए, तो में उसके बूब्स को चूसने लगा। अब मेरा एक हाथ उसकी पीठ पर था और एक हाथ उसकी चूत पर था, जो अब बहुत ज्यादा गीली हो गयी थी।

फिर हम काफ़ी देर तक इसी तरह से किस करते रहे। अब में सेक्स को बहुत आराम-आराम से और भरपूर इन्जॉय से करना चाहता था इसलिए मैनें पहले उसको फुल गर्म किया और फिर में अपना एक हाथ उसकी सलवार के अंदर ले जाकर उसकी चूत पर फैरने लगा। फिर मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत के अंदर की, तो वो ऊह, आअहह, ऊहह करने लगी। फिर मैंने उसको अपना 7 इंच का लंड पकड़ा दिया, तो वो उसको पकड़कर ऊपर नीचे करनी लगी। उसकी चूत बहुत छोटी और टाईट थी। अब वो डर रही थी कि कही वो प्रेंग्नेट ना हो जाए। अब में उसको समझा रहा था कि कुछ नहीं होगा, लेकिन वो इनकार कर रही थी। फिर मुझे उस पर तरस आ गया और फिर मैंने उससे कहा कि चलो रहने दो, इसी तरह प्यार कर लेते है और फिर हम इसी तरह किस और ऊपर से ही प्यार करते रहे। फिर मैंने उससे कहा कि अब तो खुश हो ना, मैंने कुछ नहीं किया, सिर्फ़ तुम्हारी मर्ज़ी चली है। फिर वो कहने लगी कि में अगर ना चाहूँ तो तुम कुछ कर भी नहीं सकते थे।

फिर तभी मुझे जोश आ गया और फिर मैनें कहा कि में चाहूँ तो में अभी भी बहुत कुछ कर सकता हूँ। तो वो कहने लगी कि ऐसा हो ही नहीं सकता। फिर क्या था? सबसे पहले मैंने उसके दोनों हाथ पकड़े और अपने एक हाथ से उसकी सलवार उतारी और फिर अपना लंड अपनी पेंट की चैन से बाहर निकालकर उसकी चूत पर रख दिया और उससे कहा कि अब बोलो, तुम्हारे साथ क्या करूँ? तो वो कहने लगी कि कुछ नहीं मुझे छोड़ दो, प्लीज। फिर मैंने कहा कि अब नहीं और फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखकर थोड़ा सा जोर लगाया तो वो चिल्लाने लगी कि बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन अब तो सब साफ़ था। फिर मैंने अपना एक हाथ उसके मुँह पर रखा और फिर ज़ोर लगाना शुरू कर दिया। तो वो मचलने लगी, लेकिन मैंने 2 झटकों में ही अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया, तो वो बहुत तड़पी। अब मैंने हिलना छोड़ दिया था और थोड़ी देर तक इसी तरह से पड़ा रहा।

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फिर थोड़ी देर के बाद उसको मज़ा आने लगा, तो वो नीचे से अपनी कमर हिलाने लगी। तो में भी धक्के लगाने लगा। अब वो चिल्ला रही थी और ज़ोर से करो और ज़ोर से, इसमें तो बहुत मज़ा आता है, पहले क्यों नहीं किया? आहह, ऊओ, ज़ोर से और अब में पूरे ज़ोर से धक्के लगा रहा था। फिर उसने अपना पानी छोड़ दिया, लेकिन में अभी भी गर्म था। फिर कुछ देर के बाद वो फिर से नीचे से हिलने लगी। अब वो पहले से भी ज्यादा गर्म थी। अब दोनों तरफ से खूब धक्के लग रहे थे। अब में उसका एक बूब्स भी चूस रहा था और उसके एक बूब्स को अपने हाथ से दबा रहा था। अब वो फिर से अपना पानी छोड़ने वाली थी और अब में भी करीब ही था और फिर आख़िरकार उसने अपना पानी छोड़ दिया तो में थोड़ी देर के लिए रुक गया।

फिर 2 मिनट के बाद मेरे भी बर्दाश्त से बाहर हो गया और फिर मैंने भी जल्दी से अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकालकर अपना सारा पानी उसके पेट पर छोड़ दिया। फिर कुछ देर तक हम इसी तरह से एक दूसरे की बाँहों में पड़े रहे। फिर मैनें उठकर अपने कपड़े पहने और किरण ने भी अपने कपड़े पहन लिए। फिर में जब बाहर जाने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा कि एक बार गले से तो लग जाओ और फिर कुछ देर तक हम एक दूसरे की बाँहों में खड़े रहे। फिर में वापस अपने घर आ गया और फिर उसके बाद हमने 2-3 बार मौका मिलने पर सेक्स किया। अब वो कहती थी कि तुम बहुत अच्छा चोदते हो और फिर कुछ दिनों के बाद ही वो लोग अपना घर छोड़कर कहीं और चले गये ।।

धन्यवाद …

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