जीजू संग मस्ती 2

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प्रेषक : गुमनाम
“जीजू संग मस्ती 1” से आगे की कहानी… अंदर आने के बाद रेणु मुझे ध्यान से देख कर बोली, “क्या बात है दीदी! कुछ गबराई कुछ  सरमाई, या खुदा ये माजरा क्या है फिर बात बदल कर बोली सुबह जीजू आये थे..कहाँ हैं” मैं बोली,  ऊपर सो रहे हैं में भी सो गयी थी” “जीजू के साथ?”
 हँसते हुय वह बोली. तू भी सोएगी” मैने पलट वॉर किया लेकिन वह भी मंजी हुई खिलाडी थी बोली, “हे दीदी! इतना बड़ा  भाग्य मेरा कहाँ?” उसे समझा पाना मुश्किल था।  बात बढ़ने से कोई फ़ायदा भी नही था।  क्योकि वह हमराज़ थी. इस लिये बोली, “जा अपना काम कर..काम खत्म कर जीजू के लिये चाय बना देना।  मैं देखती हूँ की जीजू जागे की नही.. नीचे का मैं दरवाजा बंद कर ऊपर आ गयी।  रेणु से मैं निश्चिंत थी. वो बचपन से ही इस घर में आ रही है और सब कुछ जानती और समझती है। दीदी के कमरे में लूँगी पहन कर बैठे जीजू मेरा इंतजार कर रहे थे.  जैसे ही मैं उनके पास गयी मुझे दबोच लिया. मैं उनसे न चुदने की नाकाम कोशिश करते हुये बोली, “रेणु बर्तन धो रही है अब उसके जाने तक इंतजार करना पड़ेगा

जीजू बोले, “अरे! उसे समय लगेगा तब तक एक-दो बाजी हो सकती है.. वे मेरी बोब्स  को खोलकर एक बोब्स के निप्पल को मुहँ में लेकर चूसने लगे और उनका एक हाथ मेरी चूत  तक पहुँच गया। बाथ-रूम मे जीजू चूत चूस कर पहले ही गरमा चुके थे. अब मैं अपने आप को रोक ना सकी और लूँगी को हटा कर लंड को हाथ मे ले लिया।
मैं बोली, “जीजू यह तो पहले से भी मोटा हो गया है..”“हाँ.. जब यह अपनी प्यारी चूत को प्यार करेगा तो फूलकर मोटा हो जायगा..”“है..! मेरे चोदु सनम! इस शेतान ने मेरी मुनिया को दीवाना बना दिया है….  अब इसे उससे मिलवा दो…”  मैने उनके लंड को हाथ मारते हुये कहा. जीजू ने मेरे कपडे उतार दिये. जिससे मैं अपनी नग्नता छुपाये हुये थी और मुझे पलंग पर लिटा कर मेरे पैरों को फैला दिया।
 
अब मेरी मदमस्त रसीली चूत उनके सामने थी. उन्होने उसे फिर अपनी जीभ से छेड़ा. कुछ देर तो उनकी दीवानगी का मज़ा लिया लेकिन मैं पर्म सुख के लिय बेचैन हो उठी और उन्हे अपने ऊपर खीच लिया और बोली, “राजा अब उन दोनो को मिलने दो..जीजू मेरी निप्पल को मुहँ से निकाल कर बोले, “किसको.. मैने उनके लंड को चूत के मुहँ पर लगाते हुय बोली इनको…..चूत  और लंड को….समझे मेरे सनम……. मेरी चूत के राजा….. अब चोदो भी…” इस पर उन्होने एक  जबर दस्त शॉट लगाया और मेरी चूत को चीरता हुआ पूरा लंड अंदर समा गया, “हाईईईईईईई मररर्र्ररर डाला ओह मेरे सनम …… मेरी मुनिया तो प्यार करना चाहती पर इस मोटू को दर्द पंहुचाने में ज़्यादा मज़ा आता है……. अब रुके क्यो हो?……… कुछ पाने के लिय कुछ तो सहना पड़ेगा……ओह माआआ…… अब कुछ ठीक लग रहा है……. हाँ अब तिककककककक हाईईईईईईईईईई फाड़ डालो इस लालची चूत को…..”
मैं चुदाई में नीचे से गांड उठा-उठा कर उनके लंड को चूत में ले जा रही थी और जीजू उपर से कस-कस कर शॉट पर शॉट लगाते हुय बोल रहे थे, “ है चुदसी राणिीईईई.. तुम्हारी बिना झांट वाली चूत ने तो मेरे लंड को पागल बना दिया है….वह इस साली मुनिया का दीवाना हो गया है…..इसे चोद चोद कर जब तक यहाँ हूँ जन्नत की सैर करूँगा…. रानी बहुत मज़ा आ रहा है….”
मैं चुदाई के नशे में जीजू को कस कस कर धक्के लगान के लिय प्रोत्साहित कर रही थी.हाँ राजा !!!!!! चोद लो अपनी साली के बुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर कूऊऊ और जोर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर सीईय फर्रर्र्र्र्ररर डूऊऊऊ इस  सलिइीईईईई बुर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर को ओह राज्ज्जज्ज्जाआअ मैं जन्नत क्ीईईईई सैर कर रही हूऊओन………..चोदो राजा छोद्द्द्दद्डूऊ और ज़ोर सीईईई हाईईईईई कस कस कर मारो….ओह बस उई माआअ मैं गइईईई…….” मेरी चूत ने चमेलि रस छोड़ दिया पर जीजू धक्के पर धक्के लगाये  जा रहे थे. झरने का नाम ही नही ले रहे थे।
 
 मैने कहा, “जीजू ज़रा जल्दी! रेणु चाय ले कर आती होगी”“मैं तो कब से चाय लेकर खड़ी हूँ. चाय ठंडी हो गयी और मैं गर्म..यह रेणु की आवाज़ थी।
मैं चुदाईके तूफान में इस कदर खो गयी थी की चमेली की तरफ ध्यान ही नही गया। मैं जीजू को अपने उपर से हटाते हुय बोली, “तू कब आई..” “जब आप सनम से चुदवा रही थी और चुदकर रानी को जीजू चोद रहे थे..”“अच्छा! ठीक है! यह सब छोड़ जब तू यहाँ आकर मर ही गयी तो चूत खुजलाना छोड़ आ जीजू को संभाल..मैं उठी और रेणु के सारे कपडे उतार दिय और उसे जीजू के पास पलंग पर धकेल दिया. जीजू ने उसे दबोच लिया।
उन्होने अपना लंड उसके चूत में लगा कर धक्का दिया. उसके मुहँ से एक कराह सी निकली. मोटा लंड जाने से दर्द हो रहा था। मैं धीरे-धीरे उसके बोब्स को मसलने लगी जिससे उसकी उत्तेजना बड़ती जाये और दर्द कम. धीरे-धीरे जीजू अपना पूरा लंड रेणु की चूत में घुसा दिया।  अब उसकी तरफ से पूरा सहयोग मिल रहा था. जीजू अब अपने लंड को रेणु की चूत में अंदर बाहर करने लगे और रेणु भी अपने कमर को उठा कर जीजू के लंड को अपने चूत में आराम से ले रही थी।
दोनो एक दूसरे से जुड़े हुये थे रेणु बोल रही थी, “दीदी! जीजू मस्त चुदाई करते हैं…. जीजू चोद  दो…. और ज़ोर सेऔर ज़ोर से….  मुझे भी आने देना आज बहुत दीनो की प्यसस्स्स्स्सस्स बुझीईईईई गीईईई अब आ जाओ दीदी के सनम…..ऑ..माआअ मैं गइईई…” जीजू के अंदर उबाल पहले से ही उठ रहा था जो बाहर आने को बेचैन था। थोडी देर मे दोनो का साथ खत्म हो गया. थोरी देर रेणु के शरीर पर पड़े रहने के बाद जब जीजू उठे तो मैं रेणु से बोली, “गर्मी शांत हो गयी? जा अब जीजू के लिय फिर से स्पेशल चाय बना कर ला क्यों की जीजू ने तेरी स्पेशल चुदाई की है..” “दीदी आप भी……” वह अपने कपडे उठाने लगी तो मैने खीच लिये और बोली, “जा ऐसे ही जा” “नही दीदी कपडे दे दो.., चाय लेकर जीजू के सामने नंगे आने मे शर्म लगेगी.. में  बोली, “ जा भाग चाय लेकर आ.., नंगी होकर चुदाने में शर्म नही आई.., अच्च्छा जा हम लोग भी यहाँ नंगे रहेंगे..शैतान रेणु यह कहते हुय नंगी ही भाग गयी, “नंगे रह कर चुदाई करते रहेंगे.. रेणु नीचे चाय बनाने चली गयी।
जीजू मुझे चिडाते हुये बोले, “मालकिन की तरह नौकरानी भी जबरदस्त है.. में बोली, “जीजू उसे ज़्यादा भाव ना दीजियेगा नही तो वह जॉक की तरह चिपक जायेगी। पर जीजू वह है बड़ी भली, बस सेक्स के मामले मे ही थोडी कमजोर है..” “आने दो देखता हूँ कमजोर है की खिलाडी है..
रेणु के जाने के बाद साफ-सफाई के लिये हम दोनो बाथरूम में आ गये. हम दोनो के नंगे जिस्म पर पानी की फुहार पड़ने लगी. बाथरूम में लगे शीशे में मैं देख रही थी, मेरे उत्तेजीत बदन पर पानी पड़ रहा था।  मेरे तने मुम्मो से टपकता पानी जो पैरों के बीच मेरी चूत से होता हुआ पेंरो  पर छोटी-छोटी धार बनाते हुये नीचे गिर रहा था। मेरी चुचियों से गिरता हुआ पानी आज बहुत अच्छा लग रहा था. जीजा के चोडे सीने से बहता पानी उनके लंड से धार बनकर बह रहा था।  जैसे वह मूत रहे हों. मैने उनका लंड हाथ में ले लिया और खोलने और बंद करने लगी।
लंड हाथ में आते ही सजग हो गया और मेरी चूत को देख कर अकड़ने लगा. मैने जीजू के नंगे शरीर को अपने छाती से चिपका कर उनके होट अपने होटो में ले लिया. मेरी कसी हुई चुचियाँ जीजू के सिने में रगड खाने लगी। मैने उनके लंड को पकड कर अपने चूत से सटा लिया और थोडा पैर फेला कर उसे अपने चूत पर रगड़ने लगी।
 
जीजू मेरे बोब्स को दबाते और सहलाते हुये मेरे होटो को चूस रहे थे और उनका लंड को मेरी मुनिया अपने होटो से सहला रही थी। बैठकर नहाने के लिय रखे स्टूल पर मैने अपना एक पैर उठा कर रख लिया और उनके लंड को चूत में आगे बड़ाने का मौका मिल गया। शीशे में दिख रहा था उनका लंड अंदर बाहर होते हुये. मेरी प्यारी चूत से खिलवाड कर रहा था. मेरी मुनिया उसे पूरा अपने मुहँ मे लेने की कोशिश कर रही थी। कुछ देर बाद में अपने को छुड़ा कर बाथटब को पकड कर झुक गयी। मेरी गांड उठी हुयी थी और जीजू ने उस पर अपने लंड को लगा कर धक्का दिया. पूरा लंड गप से चूत में समा गया।
फिर क्या था लंड और चूत का खेल शुरू हुआ. शीशे मे जैसे ब्लू फिल्म चल रही हो,  जिसकी हेरोइन मे थी और हीरो थे मेरे जीजा. जीजू का लंड मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था. जिससे चूत बावली हो रही थी पर मुझे शीशे में लंड का घुसना और निकलना बहुत अच्छा लग रहा था।  शावर से पानी की फुहार हम दोनो पर पड़ रही थी.  हम लोग उसकी परवाह ना कर तन की आग मिटाने मे लगे थे।
 
जीजू पीछे जाकर मेरी चुचियाँ पकड कर चूत मे धक्के लगाये जा रहे थे। शीशे में अपनी चुदाई देख कर मैं काफ़ी गर्म हो चुकी थी. इसलिये मैं अपनी गांड को आगे पीछे कर गपागप लंड को चूत में ले रही थी और बोलती जा रही थी, “जीजू ! बहुत अच्च्छा लग रहा है….इस चुदाई में  मेरे सनम जिंदगी का पूरा मज़ा ले लो….है !!!!!! मेरे बालम…… तुम्हारा लंड बडा जानदार है…… मारो राजा धक्का….. और ज़ोर से….. है राजा और ज़ोर से…. और ज़ोर से…… है! यस जालिम लंड से फाड दो मेरी बुर्र्र्र्र्र्र्ररर ब्ब्ब्ब्बबबाहुत अच्च्छाआआ लगगगगगगग रहा हाईईईईई….” पीछे से चुदाई में मेरे हाथ झुके-झुके दुखने लगे।
मैने जीजू से कहा, “राजा ज़रा रूको.., इस तरह पूरी चुदाई नही हो पा रही है.., लेट कर चुदने में पूरा लंड घुसता है तो झरने में बहुत मज़ा आता है.. मैने शावर बंद किया और वही गीले ज़मीन पर लेट गयी और बोली, “अब ऊपर आ कर चुदाई करो.. अब जीजू मेरे ऊपर थे और मेरी चूत मे लंड डालकर भरपूर चुदाई करने लगे। अब मेरे चूत में लंड पूरा का पूरा अंदर बाहर हो रहा था और मैं नीचे से सहयोग करते हुय बडबडा रही थी, “अब चुदाई का मजा मिल रहा है…… मारो राजा….मारो धक्का…. और ज़ोर से…… हाँ! राजा इसी तरह से……भर दो अपने मदन रस से चूत को….. अहह यसस्स्स्स्स्स्स्सस्स ओह. जीजू कस-कस कर धक्का मार कर मेरी चूत को चोद रहे थे. थोरी देर बाद उनके लंड से लावा निकाला और मेरी चूत की गहराई में झर गया ओर मैं भी साथ-साथ खत्म हो गयी. मैं पीरियड में थी इसलिये परवाह नही किया।
कुछ देर पड़े रहने के बाद मे चूत को साफ कर जल्दी बाहर निकल आई. बाहर आकर बिस्तर को ठीख किया कमरा ब्यवस्थित किया और भाभी के कमरे से एक ब्लू सीडी लाकर ड्रेसिंग टेबल के ड्रॉर में डाल दिया. तब तक जीजू टॉवेल लपेटे कर बाथ-रूम से बाहर आ गये। वह फ्रेस दिख रहे थे शायद उन्होने साबुन लगा कर ठीक से नहा लिये थे. उन्हे देख कर मैं भी फ्रेस हो कर आती हूँ..कह कर बाथ-रूम में घुस गयी. इस बीच रेणु चाय लेकर आई और कमरे के बाहर से आवाज़ दी.., “जीजू आँखे बंद करिये चाय लेकर आई हूँ.. मैं बाथरूम से निकल कर बाहर आने वाली थी।  तभी सोचा देखें ये लोग क्या करते हैं। मैं दरवाजे के शीशे से इन दोनो को देखने लगी।
जीजू बोले, “ आँख क्यों बंद करूँ.. रेणु बड़ी मासूमियत से बोली, “नंगी हूँ ना..जीजू बोले, “अब आ भी जाओ, चमेली बाथरूम में है.., मुझसे क्या शर्माना.. रेणु चाय लेकर नंगी ही अंदर आ गयी. इस बार चाय केटली में थी. चाय टेबल पर रख कर अपनी चुची और गांड इस अदा से हिलाया मानो कह रही हो `मागता है तो राजा ले ले,  नही तो मैं ये चली.’ फिर उसने जीजू का तौलिया खींच लिया। जीजू ने उसे अपनी बाहों मे भर लिया. वह अपने को छुडाती हुए बोली, “फिर चाय ठंडी करनी है क्या..?” “ चुदसी चमेली को बाथरूम से आ जाने दे साथ-साथ चाय  पियेंगे.., तब तक तू ड्रॉर से सिगरेट निकाल कर ले आ..” रेणु ने ड्रॉर से सिगरेट और माचिस निकाली।
एक सिगरेट अपने मुँह मे लगाकर सुलगा दिया और एक लंबी कश लगा कर सिगरेट को अपंनी चूत के मुहँ में लगाकर कर बोली, “जीजू अब मेरी चूत से सिगरेट निकाल कर पियो मस्ती आ जाएगी.. जीजा ने सिगरेट चूत से निकाल कर उसकी चूत को चूम लिया और फिर आराम से सिगरेट पीने लगे। रेणु बोली, “तब तक मैं अपना सिगरेट पीती हूँऔर उसने जीजा के लंड को अपने मुँह में ले लिया। जीजाजी ने सिगरेट खत्म होने तक लंड चुसवाने का मज़ा लिया। 
फिर उसे लिटा कर उसके ऊपर चढ़ गये और अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया. पहले तो रेणु तिलमिलाई फिर हर धक्के का मज़ा लेने लगी, “ जीजू आप आदमी नही सांड (बेल) है…… जहाँ चूत देखी डाल दिया….. अब जब मेरी चूत में घुसा ही दिया है तो देखूँगी की तुम्हारे लंड मे  कितना दम है….. चोदो राजा चोदो इस बार चुदाई का पूरा सुख लुंगी…. है मेरे जीजू फाड़ कर लाल कर दो इस चूत को….. और ज़ोर से कस-कस कर धक्का मारो….. ओह अहह इसस्स्स्सस्स बहुत मज़ा आ रहा है..” रेणु जानती थी की में बाथरूम में हूँ. इसलिए मेरे निकलने के पहले झरना चाह रही थी. जबकी मैं बाथ-रूम से निकल कर इन दोनो की चुदाई का खेल बहुत देर से देख रही थी. रेणु गंदे-गंदे शब्दों का प्रयोग कर जीजू को जल्दी झरने पर मजबूर कर रही थी और नीचे से गांड उठा-उठा कर जीजू के लंड को अपनी चूत में निगल रही थी।
 
जब की जीजू कई बार चुद चुकने के कारण झर ही नही रहे थे. एक बार रेणु झर चुकी थी. लेकिन जीजू उसके चूत मे लंड डालकर चोदे जा रहे थे. मैं उन दोनो के पीछे खड़े होकर घमासान चुदाई देख रही थी। मेरी चूत भी पनिया गयी पर मेरी हिम्मत इस समय और चुदाने  की नही हो रही थी। इस लिय रेणु को नीचे से मिमियाते देख बडा मज़ा आ रहा था।
रेणु ने एक बार फिर साहस बटोरा और बोली, “ओह मा! कितनी बार झराओगे मुझे लेकिन में मैदान छोड़ कर हटूँगी नही…. चोदो राजा और चोदो…….बड़ा मज़ा आ रहा है……छोड़ूऊऊ ओह बालम हरजाई ……और कस……कस कर चोदो और ज़ोर से मारो धक्के फाड़ दो चूत…….. ओह अहह एसस्स्स्स्स्स्सस्स हाँ! सनम आ बॅया भी जऊऊऊ चूत का कबाड़ा कर के ही दम लोगे क्या? अऊऊऊ अब आ भी जाऊओ जीजू ऊपर से बोले, “रूको रानी अब मे भी आ रहा हूँऔर दोनो एक साथ झर कर एक दूसरे में समा गये।
 
जीजू रेणु के ऊपर थे उनका लंड रेणु के चूत में था.  मैने पीछे से जाकर जीजू के गांड मे अपनी चुची लगा दी. जीजू समझ गये बोले, “क्या करती हो..मैने चूची से दो-तिन धक्के उनकी गांड  में लगाए और बोली, “चोदु लाल की गांड मार रही हूँ… रेणु जीजू के नीचे से निकलती हुई बोली, “दीदी मैं भी चूची से जीजू की गांड मारूगी.. मेरी तुमसे बड़ी है..मैं हसते हुए बोली चल हट! मैं अपने जीजू की गांड किसी को मारने नही दूंगी जीजू हँसते हुए बोले, ”रूको चुदसियों ! जब मैं तुम दोनो की गांड मारूँगा तो पता चलेगा.. रेणु की चुदाई देख कर मे गर्म हो गयी थी. लेकिन माँ के आने का समय हो रहा था।
 
फिर चाय भी पीनी थी इसलिए मन पर काबू करते हुए बोली, “अब सब लोग अपने अपने कपडे  पहन कर शरीफ बन जाइए. माँ के आने का समय हो रहा है..”. फिर हम लोग अपने अपने कपडे  ठीक से पहन कर चाय की टेबल पर आ गये. रेणु केटली से चाय डालते हुए बोली, “दीदी देख लो चाय ठंडी हो गयी हो तो फिर से बना लाऊं.. जीजू चाय पीते हुए बोले,  ठीक है, रेणु इस बार केटली में चाय इसीलिए बना कर लाई थी की दुबारा चाय गर्म करने के लिए नीचे ना जाना पड़े और दीदी अकेले-अकेले…”  जीजू रेणु की तरफ गहरी नज़र से देख कर मुस्काराए.जीजू आप बड़े वो हैं..” रेणु बोली.वो क्या?”“ बड़े चोदु हैंसब हंस पड़े।
 
तभी नीचे बेल बजी. माँ होंगी.., मैं और रेणु भाग कर नीचे गयी. दरवाजा खोला तो देखा तो शिल्पा थी. अरे शिल्पा तू? आ अंदर आ जा..रेणु बोली आप की ही कमी थी..” “क्या मतलब” “अरे छोड़ो भी शिल्पा उसकी बात को वह हर समय कुछ ना कुछ बिना समझे बोलती रहती है. चल उपर अपने जीजू से मिलाऊ शिल्पा बोली, “मेरी बन्नो बड़ी खुश है लगता है जीजू से भरपूर मज़ा मिला है..फिर रेणु से बोली तब भी हिस्सा बता रही थी क्या?”
रेणु शर्मा गयी, “वो कहाँ., वो तो जीजू…..” मैने उसे रोका, “ अब चुप हो जा…. हाँ! बोल शिल्पा क्या बात है..शिल्पा बोली, “चाची नही है क्या?  माँ ने जीजू को कल रात को खाने पर बुलाया है.रेणु से फिर रहा ना गया बोली,  शिल्पा दीदी जीजू को….. कल की ……दावत देने आए है.. शिल्पा बोली, “चल तू भी साथ आ जाना हाँ..! जीजू कहा है…..चलो उनसे तो कह दु.. मैं बोली, “मुझे तो नही लगता माँ इसके लिए राज़ी होंगी., हाँ! तू कहेगी तो जीजू ज़रूर मान जाएँगे..” शिल्पा ने कहा पहले ये बता, तुम दोनो को तो कोई एतराज नही, बाकी मैं देख लूँगी. मुझे क्या एतराज हो सकता है और रेणु की माँ से भी बात कर लेंगे पर……”  शिल्पा बोली, “बस तू देखती जा, कल की कॉकटेल पार्टी मे मज़ा ही मज़ा होगा..
आगे की कहानी अगले भाग में  . . .
धन्यवाद …

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