कुंवारी लड़की की गांड चुदाई

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प्रेषक : नरेन्द्र …

हैल्लो दोस्तों, कैसे हो आप सब? मेरा नाम नरेन्द्र है और में दिल्ली गुडगाँव में रहता हूँ। मेरी उम्र 23 साल है। दोस्तों आज में आपको अपनी पहली सेक्स की स्टोरी सुनाता हूँ, जब मेरी उम्र 18 साल थी। मेरे दोस्त अक्सर सेक्स की बातें किया करते थे। में उनकी बातें बड़े ध्यान से सुनता था और मन ही मन सोचता था कि काश मुझे भी किसी लड़की से सेक्स करने को मिल जाए। मेरा रंग थोड़ा काला था इसलिए में ये भी सोचता था कि मुझसे कोई लड़की सेक्स के लिए तैयार नहीं होगी। फिर एक बार में अपने चाचा जी की लड़की के ससुराल गया। में वहाँ अक्सर चला जाता था। अब की बार जब में गया तो मैंने वहाँ उनकी जेठानी की लड़की को देखा, जिसकी उम्र 18 साल थी मगर हाईट थोड़ी बढ़ गई थी और उसकी चूचीयाँ भी उठी हुई थी और उसके सूट के अंदर उसके उभार नजर आ रहे थे, उसकी चूचीयाँ एकदम नुकीली थी, लेकिन समस्या ये थी की में उसे कैसे चोदूं? पता नहीं वो मानेगी भी या नहीं। ख़ैर वो मुझे भाई ही कहती थी। मेरा लंड उस वक़्त 8 इंच का था और अब मेरा मन कर रहा था कि में उसे चोद दूँ, लेकिन ये मुमकिन नहीं था।

फिर दिनभर में उससे इधर–उधर की बातें करता रहा, मगर में चाहता था कि वो मुझसे पूरी तरह फ्रेंक हो जाए। उसका 18 साल का जवान गोरा बदन देखने लायक था, वो एकदम कच्ची कली थी। फिर शाम को जब हमने सोने का प्लान बनाया तो मैंने जानबूझकर अपनी चारपाई उसकी चारपाई के पास ही बिछा ली और फिर सभी लोग टी.वी देखने लगे। में आपको बता दूँ कि वहाँ कमरे तो और भी थे, लेकिन अभी वहाँ पर लाईट की फिटिंग का काम चल रहा था, उनके घर में केवल एक ही कमरे में कूलर था बाकि में लाईट का कनेक्शन नहीं हुआ था। अब मेरी दीदी भी वही पर अपने लड़के के साथ सो गई थी। अब हम सब एक ही कमरे में अलग-अलग चारपाई पर सो रहे थे।

फिर कुछ देर बाद टी.वी बंद कर दिया और लाईट बंद कर दी, लेकिन मेरी आँखों में नींद कोसो दूर थी। अब में तो 18 साल की लड़की को चोदना चाहता था। फिर मैंने देखा कि सब सो चुके है, अब बस में और मेरा लंड जाग रहा था। फिर मैंने अपनी नजर घुमाकर देखा तो वो भी सो रही थी, उसका दुपट्टा उसकी चूचीयों पर नहीं था। तब उसकी नुकीली चूचीयाँ देखकर मेरा मन किया कि अभी उन्हें पकड़कर रगड़ दूँ, लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो पाई। उसने अपनी टांगे मोड़ी हुई थी, जिससे उसका सूट साईड में गिर गया था और उसकी टांग से लेकर चूतड़ तक साफ झलक मिल रही थी। फिर मैंने हिम्मत करके अपना एक हाथ उसकी चारपाई पर रख दिया और धीरे-धीरे अपने हाथ को आगे ले जाने लगा तो थोड़ी देर के बाद मेरा हाथ उसकी चूचीयों पर पहुँच गया। अब मेरा दिल बहुत तेज तेज धड़क रहा था।

अब मेरी हथेली के नीचे उसके निप्पल थे, बस अब मेरे हाथ की मुट्ठी बंद करने की देर थी कि रूई जैसे गोले मेरे हाथ में होने थे, मगर अब मुझे थोड़ी घबराहट हो रही थी कि कहीं वो जाग ना जाए। फिर थोड़ी देर तक मैंने अपना हाथ उसकी चूचीयों पर रखे रखा और फिर जब मैंने देखा कि वो गहरी नींद में सो रही है। तब मैंने अपने हाथ को हिलाना शुरू कर दिया और में कभी इस चूची पर तो कभी उस चूची पर अपना हाथ फैर रहा था, लेकिन अब तक मैंने उसकी चूचीयों को दबाया नहीं था, मगर उसके निप्पल को अपनी उंगलियों से छूकर देख रहा था। अब मुझे बड़ा मजा आ रहा था। फिर थोड़ी देर के बाद मेरी हिम्मत बढ़ी तो मैंने उसकी चूचीयों को हल्के हल्के दबाना शुरू कर दिया। तो वो फिर भी नहीं जागी शायद वो गहरी नींद में सो रही थी। अब उसके साँस लेने से उसकी छाती उठ बैठ रही थी। फिर में अपनी चारपाई से नीचे उतरकर उसकी चारपाई के पास जाकर बैठ गया।

अब मेरा दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा था। अब वहाँ सभी लोग सो रहे थे, लेकिन फिर भी मेरे लंड ने मुझे उसके पास ले जाकर खड़ा कर दिया था। अब मेरा लंड बुरी तरह से खड़ा हुआ था। अब मेरा मन कर रहा था कि में अपना लंड उसकी चूत में घुसा दूँ। अब में उसकी चारपाई के पास जाकर बैठ गया था। अब उसका चेहरा मेरी तरफ था और उसके होंठ बहुत ही पतले थे। फिर मैंने हिम्मत करके अपने होंठ उसके होंठो पर टिका दिए। अब उसकी गर्म गर्म साँसे मुझे बहुत अच्छी लग रही थी। अब मेरा एक हाथ उसकी चूची को हल्के हल्के दबा रहा था। फिर मैंने अपने होंठो में उसके होंठो को भर लिया और उन्हें चूसने लगा था। अब मेरी हालत खराब हो रही थी, मुझे नहीं पता था कि कब मैंने उसकी चूची की निप्पल को पकड़कर दबा दिया? तो तब वो एकदम से हिली और करवट बदलकर सो गई।

अब में उससे एकदम से दूर हट गया था। अब में डर से काँप रहा था। फिर थोड़ी देर के बाद जब मुझे लगा कि वो सो गई है, तो में फिर से उसके पास बैठ गया, मगर अब उसकी कमर मेरी तरफ थी, उसकी सलवार उसके चूतडों से हट चुकी थी और उसके चूतड़ और जांघे मुझे नजर आ रही थी। फिर में हिम्मत करके उसकी चारपाई पर उसके पीछे जाकर सो गया। तब मैंने सोचा कि जो होगा देखा जाएगा, अब तो में उसको चोदकर ही रहूँगा, मेरा लंड 8 इंच का है और अब वो पूरी तरह से तना हुआ था। अब मुझे बार-बार उसे अपने हाथ से एडजस्ट करना पड़ रहा था, वर्ना अब तक तो वो मेरी पेंट में से बाहर आ जाता। फिर मैंने उसके पीछे से अपना एक हाथ उसके ऊपर रख लिया और अपना लंड उसके चूतडों पर सटा दिया था। अब मेरा लंड उसके चूतडों पर रगड़ मार रहा था। फिर मैंने अपना एक हाथ उसके ऊपर से ले जाकर उसकी चूचीयों पर रख दिया और धीरे-धीरे उन्हें दबाने लगा। फिर जब मैंने देखा कि वो अब तक नहीं जागी है, तब मेरी हिम्मत और बढ़ गई और अब मैंने अपने हाथ से और तेज-तेज दबाना शुरू कर दिया था। फिर जब मेरा मन भर गया तो मैंने अपना हाथ उसके कुर्ते के नीचे घुसा दिया।

अब में चाहता था कि में उसकी चूचीयों को नंगा कर दूँ, मगर में ऐसा नहीं कर पाया, क्योंकि उसका कुर्ता उसकी कमर के नीचे दबा हुआ था। फिर जब में उसके कुर्ते को ऊपर नहीं उठा पाया। तब मैंने सोचा कि चलो ऊपर से नहीं तो नीचे ही अपना हाथ घुसा देता हूँ। फिर में धीरे-धीरे अपना एक हाथ उसकी चूत के ऊपर ले गया और उसकी सलवाल के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा था। फिर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया तो नाडा ढीला होते ही मेरे हाथ को इतनी जगह मिल गई थी कि वो उसकी कुंवारी चूत तक आसानी से पहुँच जाता। फिर जैसे ही में अपना एक हाथ उसकी कुंवारी चूत पर ले गया तो मेरे सारे शारीर में करंट सा दौड़ गया, वाह क्या कोमल चूत थी उसकी? उसकी चूत पर छोटे-छोटे रोए आ रहे थे। अब में अपना आपा खो बैठा था और फिर मैंने अपने हाथ से उसकी चूत को अपनी मुट्ठी में भर लिया। अब बस मेरा इतना करना था कि उसकी नींद खुल गई और उसने एकदम से पीछे मुड़कर देखा और उठकर बैठ गई। तब मैंने अपना हाथ उसकी सलवार में से बाहर निकाल लिया। अब मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था।

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फिर उसने कहा कि तुम यह क्या कर रहे हो? अपनी चारपाई पर जाओ। यह बात उसने थोड़ी धीरे से कही थी ताकि किसी और को ना सुनाई दे। तब मैंने कहा कि मुझे अपनी चारपाई पर नींद नहीं आ रही है, में तुम्हारे पास ही सोऊँगा। तब वो बोली कि नहीं तुम अपनी चारपाई पर जाओ, नहीं तो में दीदी को जगा दूँगी। अब मुझे थोड़ा डर तो लग रहा था, लेकिन मैंने फिर भी हिम्मत करके कहा कि प्लीज यार सोने दो ना, तुम्हारा क्या जाता है? मुझे वहाँ नींद नहीं आ रही है। फिर वो कुछ सोचने लगी और बोली कि ठीक है सो जाओ, मगर दूर रहना। तब मैंने कहा कि में तो दूर ही हूँ और फिर वो सो गई। फिर में थोड़ी देर तक तो चुपचाप सोता रहा और फिर मैंने अपना एक पैर उसके ऊपर रख दिया और अपना लंड उसके कूल्हों पर सटा दिया। तब वो बोली कि पीछे हट जाओ। तो मैंने कहा कि सॉरी मुझे ऐसे ही सोने की आदत है और इतना कहकर मैंने अपना पैर तो उसके ऊपर से हटा लिया, मगर अपना लंड उसके कूल्हों पर सटा रहने दिया। इस पर वो कुछ नहीं बोली और चुपचाप सोती रही।

अब मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ गई थी। अब में अपना शरीर धीरे-धीरे हिला रहा था। अब मेरा लंड उसको टच कर रहा था। अब वो भी बैचेन हो गई थी और बोली कि प्लीज मुझे तंग मत करो, मुझे सोने दो। तब मैंने कहा कि में तुम्हें तंग कहाँ कर रहा हूँ? में तो सोच रहा था कि तुम्हें मज़ा आ रहा होगा, क्या तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा? तो वो चुप रही। फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी छाती पर रख दिया और अब में अपना एक हाथ उसकी चूची पर फैर रहा था। अब वो कसमसाने लगी थी। अब में समझ गया था कि उसे भी अब मज़ा आ रहा है। अब में उससे और सट गया था। अब मेरा लंड उसकी गांड में बिल्कुल गड़ रहा था। अब मैंने उसे अपने से बिल्कुल चिपका लिया था, मुझे पता था कि अब में चाहे जो करूँ, वो मना नहीं करेगी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब मैंने उसकी चूचीयों को दबाना शुरू कर दिया था और फिर मैंने अपने होंठ उसके होंठो पर रख दिए और उसे किस करने लगा था। अब में किस करते करते अपने हाथ को भी उसकी चूचीयों पर फैर रहा था। अब मैंने उसका सूट नीचे से ऊपर कर दिया था, उसने नीचे कुछ नहीं पहन रखा था, वाह क्या बदन था उसका? अब मुझे जोश आ गया था तो मैंने उसका सूट बिल्कुल उतार दिया। अब वो ऊपर से बिल्कुल नंगी थी, उसकी जवानी एकदम कच्ची कली की तरह लग रही थी। फिर मैंने अपने मुँह में उसकी चूचीयाँ भर ली और उन्हें चूसने लगा। फिर तब उसके मुँह से सिसकी निकल गई और बोली कि भैया प्लीज, ऐसे मत करो, मुझे कुछ हो रहा है। तब मैंने कहा कि क्या तुझे अच्छा नहीं लग रहा? में जानता था कि वो कहेगी कि अच्छा लग रहा है, लेकिन वो कुछ नहीं बोली, तो में फिर से चूसने लगा। अब मैंने चूस-चूसकर उसके निप्पल लाल कर दिए थे।

अब इसी दौरान मैंने अपना एक हाथ उसकी पेंटी के अंदर घुसा दिया था। अब में अपनी उंगली से उसकी चूत को छेड़ रहा था और वो मचल रही थी। अब मुझसे रुकना मुश्किल हो रहा था, लेकिन अगर में उसके साथ सेक्स करता तो हो सकता है कि बाकी लोग जाग जाते, सभी यही सो रहे थे इसलिए मैंने उससे छत पर चलने को कहा तो वो मना करने लगी। तब मैंने कहा कि में जा रहा हूँ, अगर तुम आना चाहो तो आ जाना और फिर में छत पर चला गया। मुझे पता था कि वो जरूर आएगी, क्योंकि अब वो भी गर्म हो चुकी थी। अब में वहाँ थोड़ी ही देर ही रुका था कि वो आ गई और बोली कि मुझे यहाँ क्यों बुलाया है? नीचे ही ठीक था। तब मैंने कहा कि जो में तुम्हारे साथ करना चाहाता हूँ, वो नीचे नहीं हो सकता था। तब वो बोली कि तुम क्या करना चाहते हो? तो तब में बोला कि इतनी जल्दी क्या है? बता दूँगा और ये कहकर मैंने उसे फिर से पकड़ लिया और उसे किस करने लगा था।

अब में अपने एक हाथ से उसके कपड़े हटाने लगा था। तब उसने कुछ नहीं कहा और हल्का हल्का विरोध करती रही, जिसे मैंने नजर अंदाज कर दिया था। अब थोड़ी देर में वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी, वाह क्या बदन था उसका? बिल्कुल कच्ची कली और उसकी चूत के तो क्या कहने? अब मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए थे। अब में उसकी चूत पर किस कर रहा था और वो बुरी तरह मचल रही थी। अब उसके मुँह से सिसकी निकल रही थी। फिर मैंने उसे बैठा दिया और अपना लंड उसके होंठो पर लगा दिया और उससे बोला कि तुम भी मेरे पप्पू पर किस करो। फिर पहले तो वो मना करती रही, लेकिन जब मैंने थोड़ा ज़ोर दिया, तो वो मान गई। फिर थोड़ी देर तक किस करने के बाद मैंने थोड़ा सा धक्का लगाकर अपना लंड उसके होंठो के बीच में फंसा दिया, वाह क्या नज़ारा था? पतले पतले होंठो में मेरा लंड था, दोस्तों वो बहुत ही सेक्सी सीन था। फिर थोड़ी देर के बाद जब मुझसे कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने उसे लेट जाने के लिए कहा तो वो लेट गई। फिर मैंने उसकी दोनों टांगो को अलग-अलग किया और अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा था। अब वो भी चुदने के लिए तैयार थी।

फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर बिल्कुल निशाने पर रख दिया और धीरे से एक झटका मारा, लेकिन वो अंदर नहीं जा पाया, कारण यह था की उसकी चूत बहुत छोटी थी। फिर मैंने अपने मुँह से थोड़ा सा थूक निकालकर उसकी चूत पर लगाया और थोड़ा अपने लंड पर भी लगाया और फिर से उसकी चूत पर रख दिया। अब वो थोड़ी डर रही थी और कह रही थी कि आराम से करना, तुम्हारा लंड बहुत मोटा है। तब मैंने कहा कि तुम चिंता मत करो, तुम्हें बहुत मज़ा आएगा और इतना कहकर मैंने एक झटका मारा तो मेरा लंड एकदम से टप की आवाज करता हुआ उसकी चूत में फंस गया। तभी वो एकदम से उछल पड़ी और झटपटाने लगी आहह निकालो इसे, मुझे नहीं लेने मज़े, मुझे दर्द हो रहा है, आहह, प्लीज निकालो, सीसस्शहस्स आहह, फट गई मेरी चूत, आह निकालो जल्दी। अब उसने तो हाए तोबा मचा दी थी। तब मैंने कहा कि थोड़ी देर रुक जाओ, सब ठीक हो जाएगा, मगर वो नहीं मानी। तब मैंने सोचा कि ये ऐसे नहीं मानेगी और फिर इसके साथ ही मैंने उसे कसकर पकड़ा और अपने होंठ उसके होंठो पर टिका दिए।

अब मेरा आधा लंड उसकी चूत में जा चुका था। अब में धीरे-धीरे अपनी कमर हिलाने लगा था, तो थोड़ी देर के बाद वो कुछ शांत सी हुई। तब मैंने उससे पूछा कि क्या अब भी दर्द हो रहा है? तब उसने कहा कि हो तो रहा है, लेकिन ज्यादा नहीं। अब मैंने धीरे-धीरे करके अपना लंड उसकी चूत में पूरा घुसा दिया था। अब उसके माथे पर पसीने की बूंदे दिखाई दे रही थी। अब वो बड़ी मुश्किल से मेरे लंड को झेलने की कोशिश कर रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी। अब वो मेरे नीचे पड़ी सिसकियाँ भर रही थी। अब मुझे भी और उसे भी मज़ा आने लगा था। अब में जैसे-जैसे झटके मार रहा था, तो उसकी छोटी-छोटी चूचीयाँ हिल रही थी। फिर मैंने उसकी दोनों टांगे उठाकर अपने कंधे पर रख ली और पूरे जोश के साथ उसे चोदने लगा था। अब वो फुल मज़ा ले रही थी।

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फिर मैंने उसकी दोनों टांगो को मोड़कर उसके सीने से लगा दिया और झटके मारने लगा तो थोड़ी देर के बाद हम दोनों अपनी चरम सीमा पर पहुँच गये। अब वो बहुत खुश थी। फिर उसने कहा कि उसे बहुत मजा आया है। फिर हमने थोड़ी देर रुककर फिर से सेक्स किया और हमें इस बार और ज्यादा मज़ा आया था। फिर जब हम जाने लगे तो उसने देखा कि उसकी टांगो पर खून लगा हुआ है तो तब वो बोली कि लगता है मेरी चूत फट गई है। तब मैंने कहा कि नहीं पहली बार सेक्स करते वक़्त ऐसा होता है, अब नहीं होगा। फिर हम अपने कपड़े पहनकर नीचे आ गये। फिर में वहाँ 2 दिन रहा और हर रात मैंने उसकी चूत मारी और एक बार मैंने उसकी गांड भी मारी। अब उसे भी बहुत मजा आया था। फिर वो बोली कि इस काम में तुम्हें शायद चूत मारने में इतना मज़ा नहीं आता होगा जितना मुझे तुमसे चूत और गांड मरवाने में आता है।

तब मैंने पूछा कि तुम्हें किस काम में ज्यादा मज़ा आया? तो वो बोली कि गांड मरवाने में और बोली कि तुम भी कभी गांड मरवाकर देखना कि इसमें मज़ा आता है या नहीं? तो जब तो मैंने उससे कह दिया कि मुझे गांड मरवाने की जरूरत नहीं है, में तो सिर्फ़ मारता हूँ, लेकिन अब कही ना कही में सोच रहा था कि क्या वास्तव में गांड मरवाने में मज़ा आता है? और फिर में वहाँ से आ गया। फिर में जब भी वहाँ गया और मुझे कोई मौका मिला तो तब मैंने उसकी खूब चुदाई की और खूब इन्जॉय किया ।।

धन्यवाद …

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