माँ और मौसी के साथ नंबर का खेल

0
loading...

प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, आज में आप सभी को मेरा सेक्स अनुभव जो मुझे अपनी माँ और मौसी के साथ मिला उसे में आप लोगों को आज वही कहानी, अपना अनुभव सुनाने यहाँ पर आया हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी आप लोगों को जरुर अच्छी लगेगी। दोस्तों एक बार मेरी माँ और मेरी मौसी को किसी काम से आगरा जाना पड़ा, लेकिन मुझे कुछ ज़रूरी काम था इसलिए में उनके साथ नहीं जा रहा था, लेकिन फिर उन दोनों ने मुझसे आग्रह किया कि में भी उनके साथ आगरा चलूं, क्योंकि वो दोनों अकेली थी इसलिए वो मुझे भी अपने साथ लेकर जाना चाहती थी। फिर मजबूरी में मुझे अपना वो काम अधूरा छोड़कर उनके साथ जाना पड़ा और फिर आगरा पहुंचकर उनका वो काम निपटाते हुए मुझे शाम के 7 बज गये और अब हम उस काम की वजह से इतना लेट हो गए कि हमें वापस अपने घर पर जाना मुमकिन नहीं था, इसलिए हमने एक रात को आगरा में ही बिताने का विचार बनाया इसलिए हम पास ही की एक होटल में चले गये और हमने वहां पर पहुंचकर एक सिंगल रूम ले लिया। तभी बातों ही बातों में माँ को याद आया कि उस दिन मेरा 18th जन्मदिन था और फिर उन दोनों ने मिलकर मुझे मेरे जन्मदिन की मुबारक दी और मैंने उनको मुस्कुराकर धन्यवाद कहा।

फिर जब हम तीनों सोने लगे तो उसी समय मेरी मौसी मुझसे कहने लगी कि बेटा आज तुम 18 साल के हो गये हो चलो बताओ कि एक लड़की के बारे में तुम क्या क्या जानते हो? तो उनके मुहं से यह बात सुनकर में हंसने लगा और उनसे पूछने लगा कि मौसी आप यह मुझसे क्या कह रही हो? अब मौसी बोली कि चलो आज हम दोनों तुम्हारी परीक्षा लेते है, बताओ कि हम दोनों में से कौन ज़्यादा सेक्सी और हॉट है? दोस्तों में अब उनके मुहं से उस सवाल को सुनकर घबरा गया और में मन ही मन सोचने लगा, लेकिन कुछ देर बाद मेरी माँ ने भी मुझसे यही सवाल पूछा तो मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया कि में क्या बोलूं उनको उस बात क्या जवाब दूँ? में लगातार सोचता रहा और फिर मैंने मुस्कुराकर कहा कि इस बात का जवाब तो बहुत ही मुश्किल है उसके लिए मुझे पहले चेक करना पड़ेगा तब जाकर में अपना जवाब आप लोगों को दे सकता हूँ। फिर तुरंत मौसी बोली कि तेरी जैसे मर्ज़ी पड़े तू हमें आज अच्छी तरह से चेक कर ले और जो तेरी मर्ज़ी पड़े तू कर ले, लेकिन इस बात का जवाब मुझे सच सच दे। तब मैंने कहा कि हाँ ठीक में आपके दस टेस्ट लूँगा और उसके बाद में अपना जवाब आप लोगों को बताऊंगा और फिर में इतना कहकर मौसी की तरफ बड़ा और उनसे चिपककर उनके नरम होठों पर मैंने अपने होंठ रख दिए और में उनके होंठो को चूस रहा था और कभी में उनका ऊपर का होंठ और कभी उनका नीचे का होंठ चूस रहा था।

loading...

फिर मैंने कुछ देर चूसने के बाद अपनी माँ के होठों पर अपने होंठ रख दिए और में करीब दस मिनट तक उनको चूसता रहा और उसके बाद मैंने अपनी माँ को 9 और मौसी को 10 नंबर दिए। फिर मैंने उसके बाद मौसी की तरफ बढ़कर उनके पल्लू को नीचे किया और उनके बूब्स को अपने दोनों हाथों में लेकर दबाने लगा। ऐसा करने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, क्योंकि वो बहुत ही बड़े आकार के थे और कुछ देर के बाद माँ का पल्लू नीचे करके मैंने तुरंत अपनी मम्मी के बूब्स को पकड़ लिया और उनके बूब्स को बहुत देर दबाने के बाद मैंने माँ को 10 और मौसी को 9 नंबर दिए। फिर मैंने मौसी का ब्लाउज खोल दिया और में उनकी ब्रा के ऊपर से बूब्स को दबाने लगा और उनकी निप्पल को निचोड़ने लगा और इसके बाद मैंने अपनी माँ का ब्लाउज भी खोल दिया और अब में उनके बूब्स को दबाने लगा। इस बार भी मैंने अपनी माँ को 10 और मौसी को 9 नंबर दिए। फिर मौसी की ब्रा को खोलकर मैंने उनके बूब्स पकड़ लिए और बहुत देर तक बूब्स से खेलने के बाद में अब उनके निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा। फिर उसके बाद अपनी माँ की ब्रा को खोलकर उनके निप्पल को भी चूसने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, लेकिन इस बार मौसी को 10 और माँ को मैंने 9 नंबर दिए। अब मैंने मौसी की साड़ी और उनके पेटीकोट और पेंटी को भी उतार दिया। फिर जैसे ही मैंने उनकी नंगी चूत पर अपना एक हाथ रखा तो मुझे एक ज़ोर का झटका लगा और तब मैंने महसूस किया कि उनकी चूत बहुत टाइट थी। फिर माँ के कपड़े उतारकर जब मैंने उनकी चूत पर अपना हाथ रखा तो उसका मज़ा ही कुछ और ही था और में अपनी माँ की चिकनी, कामुक चूत को छूकर उस समय क्या महसूस कर रहा था? में वो सब किसी भी शब्दों में नहीं बता सकता और अब माँ मेरी मौसी से एक नंबर से आगे हो गयी थी। फिर इसके बाद मैंने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और अब मेरा 6 इंच का लंड तनकर तैयार खड़ा था जो उन दोनों की चूत को सलामी दे रहा था। मैंने अब आगे बढ़कर उसको अपनी मौसी के मुहं में डाल दिया और मेरा लंड उनके गले की नली को अंदर तक जाकर छू रहा था, जिसकी वजह से उनको साँस लेने में भी थोड़ी कठिनाई हो रही थी और उनकी आँखों से आंसू बाहर आने लगे थे, लेकिन फिर भी वो बिना किसी विरोध के मेरे साथ मज़े ले रही थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर कुछ देर बाद मैंने अपने लंड को मौसी के मुहं से बाहर निकालकर अपनी माँ के मुहं में डाल दिया और मेरा लंड अब मेरी माँ के मुहं में अटखेलियाँ करने लगा और वो मेरी माँ के गले के अंदर तक घुस गया था, जिससे वो बहुत टाईट हो गया था। फिर मैंने कुछ देर बाद लंड को बाहर निकाला और माँ को 10 और मौसी को 9 नंबर दिए। अब माँ 2 नंबर से आगे चल रही थी और इसके बाद मैंने मौसी की चूत में अपना लंड डालकर ज़ोर से दो चार धक्के मारे और मेरा लंड उनकी बच्चेदानी को छू रहा था। फिर कुछ देर बाद मैंने लंड को बाहर निकालकर अपनी माँ की चूत को देखने लगा, क्योंकि अब मेरी माँ की बारी थी और मुझे माँ की चूत कुछ अपनी सी लग रही थी। मैंने तुरंत अपना लंड उसमें डाल दिया और बहुत देर तक ज़ोर से धक्के लगाने के बाद मैंने लंड को बाहर खींच लिया। फिर माँ को 10 और मौसी को 9 नंबर मिले और अब माँ 3 नंबर से आगे थी। फिर इसके बाद मौसी की गांड की बारी थी और मैंने पहले अपनी मौसी की गांड में अपना लंड डालकर कुछ देर धक्के दिए और उसके बाद अपनी माँ की गांड में अपना लंड डालकर धक्के दिए और मेरा लंड बारी बारी से मौसी और माँ की गांड के अंदर घुसा। उन दोनों की गांड के मज़े मैंने लिए और अब मौसी 10 नंबर ले गयी और माँ को 8 ही मिले।

फिर में नीचे झुका और मैंने पहले मौसी की चूत पर अपने होंठ रख दिए। फिर मैंने महसूस किया कि उनकी चूत के होंठ बहुत मुलायम थे और मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था और मैंने उनको कुछ देर तक चूसा और उसके बाद मैंने अपनी माँ की चूत पर भी अपने होंठ रखे तो वो बहुत रसीली थी, लेकिन मौसी इस बार बराबर ही रही और दोनों बराबर हो गई। फिर मैंने कहा कि अब पांच मिनट में आप दोनों में से जो भी मुझे ज़्यादा मज़ा देगा वो ही सेक्सी और हॉट होगा। अब आप दोनों शुरू हो जाओ। मेरी यह बात सुनकर मौसी ने मुझे नीचे लेटा दिया और अपनी चूत को उन्होंने मेरे मुहं पर रखकर वो मेरे मुहं पर बैठ गयी और अपनी चूत को मेरे मुहं पर रगड़ने लगी, जिसकी वजह से मेरी जीभ अब उनकी चूत की गहराइयों में घूम रही थी। तभी कुछ देर बाद माँ ने नीचे झुककर मेरे लंड हो चूसना शुरू कर दिया। अब वो दोनों ही अपने अपने काम में लगी रही, वाह दोस्तों मुझे बहुत ही अजीब सा नशा छा रहा था और में मज़े लेता रहा। फिर कुछ देर बाद मौसी की चूत से ढेर सा जूस निकला और वो सीधा मेरे मुहं में घुस गया और उधर मेरे लंड से मेरा गरम गरम वीर्य लंड से बाहर निकलकर माँ के मुहं में भर गया, वो बाहर तक बह रहा था और वो उसको चाट रही थी और फिर वो दोनों ही बराबर नंबर पर थी। इस तरह यह खेल खत्म हुआ और में पेशाब करने जाने लगा तो माँ अपना मुहं खोलकर मेरे सामने नीचे बैठ गयी और उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हे कहीं और जाने की कोई जरूरत नहीं है, तुम यहीं पर मूत लो और मौसी भी उनके साथ थी। अब मैंने बारी बारी से उन दोनों को अपना पेशाब पिलाया और दोनों बड़े मज़े से मेरा पूरा पेशाब पी गई और फिर उसके बाद उन दोनों ने अपने पेशाब से मुझे नहला दिया ।।

धन्यवाद …

loading...
इस कहानी को Whatsapp और Facebook पर शेयर करें ...

Comments are closed.