मेरी पहली चुदाई वंदना आंटी के साथ

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प्रेषक : वंदना …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम वंदना है। में कामुकता डॉट कॉम की सभी स्टोरियाँ पहले से ही पढ़ती आई हूँ। यह स्टोरी पढ़कर मुझे भी लगा कि मुझे भी अपनी कोई स्टोरी आप लोगों के साथ शेयर चाहिए, तो में आज आप लोगों के सामने मेरी एक सच्ची स्टोरी पेश करने जा रही हूँ। मुझे आशा है कि आप लोगों को मेरी यह स्टोरी बहुत पसंद आएगी। मेरा नाम वंदना है, में 22 साल की हूँ और मेरा फिगर साईज 30-35-40 है और में मेरे मम्मी पापा की अकेली लड़की हूँ और मेरा भाई सन्नी 25 साल का है, मेरी माँ 40 साल की है और मेरे पापा गुजर चुके है, मेरी माँ कॉलेज की प्रिन्सिपल है। ये घटना मेरी ज़िंदगी की सबसे अच्छी घटना है। यहीं से मेरी ज़िंदगी ने एक नया मोड लिया है। ये घटना करीब 10 महीने पहले मेरे साथ हुई है और मुझे ऐसा लगता है जैसे अभी-अभी हुई है।

फिर एक रात को में नींद से जाग उठी, क्योंकि मुझे प्यास लग गयी थी तो में किचन की तरफ गयी और फ्रिज में से पानी निकाला और पानी पीया और फिर से मेरे रूम की तरफ चल दी। तो तभी मुझे माँ के रूम से अजीब सी आवाज़ सुनाई दी तो मैंने चाबी के छेद में से अंदर देखा तो में चौंक उठी। अब में अंदर का नज़ारा देखकर चकरा गयी थी क्योंकि अब मेरी माँ और सन्नी भैया पूरे नंगे होकर एक दूसरे को चूम रहे थे। में ज़िंदगी में पहली बार किसी औरत और मर्द को इस हालत में देख रही थी। अब माँ सन्नी भैया का लंड अपने हाथ में लेकर उसे हिला रही थी और भैया माँ की चूत को चाट रहे थे। अब माँ ज़ोर से बोल रही थी मादरचोद अपनी माँ की चूत और ज़ोर से चूस, ये चूत तेरी माँ को बहुत सताती है और ये कहकर माँ ने भैया का लंड अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लग गयी।

अब माँ भैया के लंड को बहुत अच्छी तरह से चूस रही थी और भैया अपनी गांड उठा-उठाकर अपना लंड अंदर बाहर कर रहे थे। फिर भैया ने एक झटका लगाया और उनके लंड ने माँ के मुँह में सफेद पानी छोड़ दिया। तो माँ ने भैया के लंड का पूरा पानी पी लिया और बोली कि बेटा तेरा पानी पीना बहुत अच्छा लगता है। अब इधर मेरी हालत ये सब देखकर पतली हो गयी थी, अब मेरे हाथ अपने आप मेरी जांघो पर चले गये थे और मेरी चूत को रगड़ रहे थे, तो तब में वहाँ से चली गयी और रूम में जाकर अपने पूरे कपड़े उतारकर नंगी हो गयी और अपनी चूत में उंगलियाँ डालकर आग बुझाने की कोशिश करने लग गयी और थोड़ी देर में शांत हो गयी और फिर मुझे कब नींद आ गयी ये मुझे मालूम ही नहीं पड़ा। फिर सुबह 9 बजे में उठी अपने कपड़े पहने और सुबह के सारे काम निपटाकर नहाने चली गयी, अभी भी मेरी आँखों के सामने रात के सीन आ रहे थे और में मदहोश होती जा रही थी।

फिर शॉवर ऑन होते ही मेरे बदन पर पानी गिरने लगा और पानी गिरने से में और मदहोश होती जा रही थी। फिर मैंने अपने पूरे कपड़े उतारे और मेरे बदन को कांच में देखने लग गयी और मेरे बूब्स को अपने दोनों हाथों में लेकर ज़ोर जोर से दबाने लग गयी। अब मेरे हाथ फिर से मेरी चूत पर चलने लग गये थे, मेरी चूत पर बाल थे तो मैंने वो साफ किए और अपनी चूत में उंगलियां डालकर अंदर बाहर कर रही थी। फिर शॉवर लेने के बाद मैंने खाना खाया और सोने चली गयी, अब मुझे भी किसी मर्द की ज़रूरत महसूस होने लग गयी थी। अब मुझे भी किसी मर्द के लंड को अपने हाथ में लेकर चूसने की और बाद में चूत में लेने की इच्छा होने लगी थी। अब हमारे घर पर माँ और भैया के चले जाने के बाद में, हमारा नौकर और नौकरानी ही रहते थे, वो एक शादीशुदा कपल था और वो हमारे बंगले में बने सर्वेंट रूम में रहते थे।

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में उन्हें आंटी और अंकल कहकर पुकारती थी, अंकल का नाम रवि, उम्र 35 साल और आंटी का नाम रेखा, उम्र 30 साल था। रेखा आंटी दिखने में बहुत सुंदर और भरे बदन की मालकिन थी, वो जब भी चलती थी तो वो उनकी गांड मटकाकर चलती है और उनके बूब्स भी बहुत बड़े-बड़े है, उनके कोई संतान नहीं है। रवि अंकल भी दिखने में अच्छे है और उनकी बॉडी भी अच्छी थी, वो हर रोज सुबह एक्सरर्साइज़ करते थे, तो में उनकी बॉडी की तरफ देखती ही रहती थी, मुझे उनकी पेंट का उभार बहुत अच्छा लगता था। अब में यही सोचते हुए सोने लग गयी थी कि इतने में किसी ने बाहर से दरवाजा बजाया तो मैंने दरवाजा खोला, तो सामने रेखा आंटी खड़ी थी। फिर आंटी ने कहा कि मुझे नींद नहीं आ रही थी इसलिए में तुम्हारे पास चली आई। तो मैंने कहा कि चलो कोई बात नहीं और फिर हम दोनों अंदर चली गयी और फिर हम दोनों बेड पर जाकर बैठ गये और बातचीत करने लग गये। तो तभी आंटी मेरे पास आई और मुझे अपनी बाँहों में भर लिया, तो मैंने कहा कि आंटी क्या कर रही हो? तो आंटी बोली कि प्यार कर रही हूँ।

फिर आंटी ने मेरे बूब्स दबाना शुरू किए, अब सच बोलूं तो आंटी ने जो किया था, वो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। में तो पहले से ही आंटी के शरीर की दीवानी थी, अब उनका छूना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, अब में भी आंटी के बूब्स को दबा रही थी। फिर मैंने कहा कि आंटी क्यों ना पूरे कपड़े उतार फेंके? अब में तो आंटी के बूब्स और गांड देखकर हैरान रह गयी थी। अब में पहली बार आंटी को इस हालत में देख रही थी और आंटी भी मुझे इस हालत में पहली बार देख रही थी। फिर आंटी ने मुझे किस करना शुरू किया, तो मैंने भी अपनी जीभ उनके मुँह में डालकर किस करना शुरू किया। अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, अब आंटी मेरे बूब्स दबा रही थी। अब में हवा में उड़ रही थी। अब मुझे मेरे बूब्स दबाना बहुत अच्छा लग रहा था। अब में आंटी को और ज़ोर से दबाने के लिए कह रही थी आआ आहहहहह आआ और ज़ोर से दबाना।

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फिर आंटी ने मुझसे कहा कि मुझे आंटी मत कहना और रेखा कहकर बुलाना, तो मैंने कहा कि ठीक है रेखा जान जरा ज़ोर से दबाना। अब रेखा मेरे निपल अपने मुँह में लेकर चूस रही थी उफफफफफफफ्फ़ क्या मज़ा था? में बयान नहीं कर सकती। फिर रेखा मेरी चूत की तरफ गयी और बोली कि वंदना बाल कब साफ किए? तो मैंने कहा कि कल ही साफ किए रेखा और फिर वो मेरी चूत को जोर-जोर से चूसने लग गयी उफफफफफ्फ़। अब में उनका सिर पकड़कर दबाने लग गयी थी, अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। तो वो ज़ोर-जोर से मेरी चूत को चूसने लग गयी और बोली कि वंदना क्या चूत है तेरी एकदम मक्खन? चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है उूउउ और अब में अपने हाथों सें खुद ही अपने बूब्स को दबा रही थी और मेरी अजीब सी आवाज़े बाहर आ रही थी एयाया आआअ एयाया और और अंदर डालो रेखा डार्लिंग तुम्हारी जीभ को, तो वो और ज़ोर-जोर से मेरी चूत को चूसने लग गयी। फिर में शांत हो गयी और मेरा पानी निकल गया, तो वो रेखा ने बड़े प्यार से मेरा पूरा पानी पी लिया और मेरी चूत साफ करने लग गयी। तो इतने में मुझे पेशाब आ गयी और मैंने रेखा के मुँह में ही पेशाब छोड़ दी।
अब वो तो हैरान रह गयी और कुछ नहीं बोल पाई और उसे मेरा पूरा पेशाब पीना पड़ा। फिर थोड़ी देर के बाद वो बोली कि क्या टेस्ट है तेरे पेशाब का? तो फिर मैंने कहा कि तुमने तो मेरी चूत चूस ली, लेकिन अब मुझे तुम्हारी चूत चूसने दो, तो रेखा ने हाँ कर दी। अब में उसकी चूत को चूमने जा रही थी, आज में ज़िंदगी में पहली बार किसी की चूत को चूसने जा रही थी। फिर मैंने उसकी टांगो को चूमना शुरू कर दिया, तो उसके मुँह से आवाज़े निकलने लग गयी और आख़री में उसकी चूत को चाटने लग गयी और अपनी जीभ बाहर निकाली और उसकी चूत को फैलाया और अपनी जीभ अंदर डाल दी, आह क्या स्वाद था उसकी चूत का? और उसकी चूत थी भी वैसी बड़ी और साफ सुथरी। अब मुझे उसकी चूत का स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था ऐसा लग रहा था जैसे उसने उसकी चूत पर चंदन लगाया हो।

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फिर मैंने अपनी जीभ से चूसना शुरू किया, तो वो चिल्ला उठी और मेरे बाल पकड़कर मेरे सिर को अपनी चूत पर ज़ोर से दबाने लग गयी और बोली कि साली कुतिया और ज़ोर से चूस ना उूउउफफफ्फ़ माँ और ज़ोर से चूस कुतिया, ऐसी गंदी गंदी गालियाँ बक रही थी, आज मेरा पूरा पानी निकाल दे और मेरा पूरा पानी पी जाओ, उऊआ ममाँ उउउ ऐसी आवाज़े निकाल रही थी। फिर मैंने शरारत से अपनी एक उंगली उसकी चूत के अंदर डाली, तो वो बोली कि ऐसे ही कर वंदना मेरी जान बहुत अच्छा लग रहा है और फिर मैंने मेरी एक उंगली उसकी गांड के छेद पर रख दी और अंदर डालने की कोशिश करने लग गयी। तो वो बोली कि डालना मेरी गांड में उंगली कर उूउउ आ और फिर वो ज़ोर से झड़ गयी। तो मैंने उसका सारा पानी पी लिया, क्या लाजवाब टेस्ट था? आहहहहहहह। फिर मैंने उसकी गांड को भी चाटाना शुरू किया, तो वो सिहर उठी और अपनी गांड को आगे पीछे करने लग गयी। तो मैंने उसकी गांड के छेद को फैलाया और फिर से चाटने लग गयी, तो अब रेखा को बहुत गुदगुदी होने लग गयी थी। फिर हम दोनों शांत हो गये और एक दूसरे को पकड़कर सो गये ।।

धन्यवाद …

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