मेरी प्यारी चुदक्कड़ भोज़ाई

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प्रेषक : गुमनाम …

हैल्लो दोस्तों, मेरी उम्र 43 साल है और में कोलकाता का रहने वाला हूँ। मेरी लम्बाई 5.9 इंच होने के साथ ही मेरे लंड का आकार सात इंच है और मेरा गठीला शरीर दिखने में बहुत अच्छा है। दोस्तों में अपने पांच भाई बहनों में सबसे छोटा हूँ इसलिए मुझे घर के सभी लोग प्यार से छोटू कहते है, मेरी भाभी जिनका नाम किरण है और वो उम्र में 44 साल की होने के साथ ही उनके बूब्स का आकार 36-32-38 है और वो दिखने में बहुत सुंदर लगती है। दोस्तों मेरी भाभी मुझसे बहुत खुली हुई होने की वजह से उनकी मेरे साथ बहुत हंसी मजाक बातें होती है। मेरा भाई दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते है और वो 49 साल के है, तथा वो हमेशा कुछ नर्वस से रहते है। दोस्तों उनके अलावा मेरी तीन बहने है और वो तीनों शादीशुदा है, लेकिन उनमे से मेरी एक बहन विधवा है और वो यहीं हमारे घर पर रहती है और अब वो अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है, उसका नाम शैलजा है। दोस्तों हम लोग एक मध्यमवर्गीय परिवार से है। हमारे परिवार में माँ, बाप और पांच भाई बहन है। दोस्तों मेरे पापा एक सरकारी ऑफिस में थे, लेकिन अब उनकी नौकरी पूरी हो गई है इसलिए वो अब घर पर ही रहते है और आज कल चारो धाम यात्रा पर गये हुए है।

अब घर पर में मेरी भाभी किरण और शैलजा है। शैलजा अक्सर अपने कॉलेज में रहती है और मेरी भाभी उनकी शादी को पूरे तीन साल हो चुके है और उनको माँ ना बन पाने का बहुत दुख है, इसलिए वो हमेशा थोड़ा उदास रहती है। दोस्तों मेरे भैया अभी तक यहीं थे, लेकिन अभी पांच दिन पहले ही वो दुबई अपने काम की वजह से वापस चले गये है और वो मेरे लिए मैदान खुला छोड़ गये है। अब शैलजा के कॉलेज चले जाने के बाद में अक्सर भाभी से छेड़खानी और हर कभी उनकी चुदाई भी किया करता हूँ और मेरी भाभी के साथ मेरी शर्त लगी है कि जब तक वो गर्भवती नहीं हो जाती में उनकी ऐसे ही जमकर चुदाई करता रहूँगा। एक दिन जब मेरे भैया अपनी नौकरी पर दुबई नहीं गए थे उसके दो दिन पहले की यह बात है। फिर उस दिन मेरे भैया और भाभी मुझे बड़े मुड में नजर आ रहे थे और वो दोनों आपस में बातें कर रहे थे, उन्ही के पास में भी बैठा हुआ था। फिर उसी समय भाभी थोड़ा सा उदास होकर भैया से कहने लगी कि आप दुबई चले जाते हो उसके बाद मेरा मन नहीं लगता और अब आप ही मुझे बताए कि में अकेली क्या करूं? तभी भैया बोले कि अरे मेरी जान तुम्हारे पास तुम्हारा मन लगाने को यह छोटू है ना और वैसे भी इसको सब अधिकार है इसलिए यह तुम्हारे साथ कुछ भी कर सकता है।

अब भाभी ने भैया से पूछा क्या यह वो सब भी मेरे साथ कर सकता? उसी समय भैया तुरंत कहने लगे कि बाहर वालों से तो घर वाला अच्छा है। फिर मेरे भैया जब अपनी नौकरी पर चले गये, तब एक दिन मेरी बहन शैलजा उसके कॉलेज में थी और मेरी मम्मी, पापा उनकी तीर्थ यात्रा पर जा चुके थे। अब मैंने मौका देखकर अपनी भाभी से कहा कि आज बहुत मन हो रहा है कि आपके साथ बैठकर कोई फिल्म देखी जाए। फिर भाभी मुझसे पूछने लगी कि तुम्हे कौन सी फिल्म देखनी है? मैंने उनको फिल्म का नाम बताया और फिर हम दोनों उस फिल्म को देखने चले गये। फिर कुछ देर के बाद उस फिल्म में कई बार चूमने के द्रश्य आने लगे थे और वो सब देखकर मेरा मन हुआ कि में उसी समय अपनी भाभी को चूम लूँ, लेकिन उनके साथ कुछ भी ऐसा वैसा करने की में हिम्मत ना कर सका। अब उस फिल्म का अंत होते होते में इतना गरम हो चुका था कि मैंने जोश में आकर भाभी के एक बूब्स को दबा दिया, मेरी इस हरकत की वजह से वो चकित हो गई और फिर वो मुझसे कहने लगी अच्छा तो तुम इसलिए मेरे साथ यह फिल्म देखना चाहते थे। फिर मैंने कहा कि हाँ भाभी उसके बाद हमारे बीच वैसे ही हँसी मज़ाक होता रहा और फिल्म के खत्म हो जाने पर हम दोनों वापस घर आ गये।

अब इतने में शैलजा के भी कॉलेज से वापस आने का समय हो गया था इसलिए हम दोनों चुप हो गये। फिर दूसरे दिन सवेरे ही शैलजा को कहीं जाना था और वो उठकर जल्दी से तैयार होकर चली गयी, मेरे हाथ में सुबह का सुहाना मौका था। अब मैंने तुरंत ही जाकर भाभी को पीछे से चूम लिया, लेकिन वो मेरे चूमने से नाराज़ ना होकर वो उसी समय मुझसे कहने लगी कि देखो छोटू आओ आज हम तुम एक समझौता कर लें, कि जब भी तुम चाहो मुझे चोद सकते हो, लेकिन में इस चुदाई की वजह से पूरे इन 21 दिनों में तुम्हे मुझे गर्भवती करना पड़ेगा। फिर मैंने अपनी भाभी के मुहं से यह बात सुनकर बहुत खुश होते हुए तुरंत हाँ भरकर कहा कि में अपनी चुदाई से तुम्हे निराश नहीं होने दूंगा। दोस्तों इस तरह से शुरू हुआ हमारा अपना यह सेक्स का सफ़र जिसकी वजह से हम दोनों की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था, क्योंकि आज भगवान ने मेरे मन की बात को सुनकर बिना किसी विरोध के मेरी भाभी को मेरा लंड लेने के लिए खुद ही तैयार कर दिया था। फिर हम दोनों तुरंत ही नहाकर कमरे में आ गये, क्योंकि उस दिन हमारी पहली चुदाई का दिन था और उससे अच्छा मौका हमे क्या पता कब मिलता?

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अब मैंने भाभी को अपनी बाहों में लेकर चूमना शुरू कर दिया और उनको चूमते हुए ही मैंने उसके ब्लाउज में अपने एक हाथ को डालकर उसके बूब्स को भी में दबाने लगा था। फिर उसके बाद धीरे धीरे मैंने उसके ब्लाउज के बटन को भी खोलना शुरू कर दिया। दोस्तों फिर जैसे जैसे ब्लाउज का बटन खुलता जाता भाभी के चेहरे पर खुशी की एक चमक आती जा रही थी। फिर भाभी का पूरा ब्लाउज उतारकर मैंने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया, जिसकी वजह से अब भाभी मेरे सामने अपने 34 इंच के गोरे गोलमटोल बूब्स को लेकर खड़ी थी। अब वो मेरी तरफ देखकर हंसकर मुझे ही देख रही थी और वो मुझसे कह रही थी कि छोटू तुमने यह सब कहाँ से सीखा? मुझे लगता है कि तुम्हे यह सब करना का बहुत अच्छा अनुभव है वाह मज़ा आ गया। फिर मैंने उनकी बातें सुनकर मुस्कुराकर उनको कहा कि आप सभी लोगो को करते देखकर मैंने अंदाजा लगाया और फिर यह सब करना सीख लिया। फिर में उसके बूब्स को दबाने सहलाने लगा थी और वो जोश में आकर लगातार सिसकियाँ भरती जा आह्ह्ह उफ्फ्फ रही थी। अब मेरा हाथ उसके पेटिकोट पर था और मैंने उसके पेतोकोट का नाड़ा पकड़कर एक झटका देकर खोल दिया और नाड़ा खुलते ही पेटीकोट नीचे गिर गया, जिसकी वजह से भाभी अब मेरे सामने एकदम नंगी हो चुकी थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब उसकी बारी थी और वो मेरी टी-शर्ट को उतारकर मेरे जिस्म को चूमने लगी और मुझे उसके जिस्म से बड़ी ही भीनी भीनी खुशबू आ रही थी, जिसकी वजह से में मस्त हो रहा था। फिर वो मेरी टी-शर्ट को उतारकर मेरी पेंट की चेन को खोल रही थी और उसके बाद मेरे लंड को पकड़कर उसको सहलाने लगी थी, जिसकी वजह से मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा होकर आसमान की तरफ देखने लगा था और फिर उसने मेरे लंड को चूमना चूसना शुरू कर दिया। अब में अपने दोनों हाथों से उसके बूब्स को दबा भी रहा था और वो मेरे लंड को चूस रही थी। दोस्तों मेरे बहुत जोश में होने की वजह से लंड को चूसते हुए अब थोड़ा सा वीर्य भी बाहर निकलने लगा था जिसको भी उसने चाटकर अंदर गटक लिया था। अब में उसकी चूत को चूसने के साथ साथ अपनी जीभ से चूत के दाने को टटोलते हुए चूत की गहराईयों को भी नापने लगा था, कुछ देर धीरे धीरे करने के बाद फिर तेज़ी से अपनी रफ़्तार को बढ़ाकर में अपनी जीभ को अपनी भाभी की चूत के अंदर बाहर करने लगा था। अब भाभी मेरे यह सब करने की वजह से बड़ी ही आनंदित हो रही थी और उनके मुहं से सिसकियों की आवाजे धीरे धीरे निकल रही थी। अब वो मुझसे कहने लगी ऊफ्फ्फ आह्ह्ह सीईईई वाह मज़ा आ गया हाँ करो ऐसे ऊईईईइ हाँ ऐसे ही करो मुझे बहुत मज़ा आ रहा है।

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दोस्तों इस आनंद को उठाते हुए हम दोनों को करीब आधा घंटा हो गया था और हम दोनों की तरफ से कोई कमी नहीं आ रही थी, कभी वो जोश में आकर मुझे कसकर अपने गले लगाती और कभी में उसको अपने गले से लगा रहा था। दोस्तों एक दूसरे को चूमते चाटते हुए हमे बहुत समय लग चुका था और उसी समय भाभी मुझसे कहने लगी कि छोटू अब तुम अपना पूरा काम कर भी डालो, नहीं तो शैलजा वापस आ जाएगी। फिर हम दोनों तुरंत ही पलंग पर चले गये और अब भाभी को पलंग पर लेटाकर में उसकी गोरी गदराई हुई जांघो को सहलाने लगा था, जिसकी वजह से भाभी आनंदित हो रही थी और उसने अपने दोनों पैरों को पूरा फैला दिया था। अब मुझे भाभी की खुली हुई कामुक चूत साफ नज़र आने लगी थी और मेरे लंड का भी बड़ा बुरा हाल था, क्योंकि आज पहली बार वो चूत बिना कपड़ो के मेरे साथ थी, जिसको में बस सपनों में देखा करता था। मैंने कई बार अपनी भाभी के नाम से मुठ मारकर अपने लंड को शांत किया था। फिर मैंने भगवान का नाम लेकर भाभी की चूत के खुले होंठो पर अपने लंड का टोपा रखकर एक ज़ोर का धक्का लगा दिया और भगवान ने भी मेरा साथ देकर मेरा आधा लंड उस एक ही धक्के में अंदर कर दिया।

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फिर उसके बाद एक दो धक्को के बाद मेरा पूरा का पूरा लंड भाभी की चूत के अंदर चला गया। अब भाभी के मुहं से बड़ी जोरदार चीख की आवाज निकल गई और मैंने उनका मुहं अपने एक हाथ से बंद कर दिया और फिर में लगातार धक्के लगा रहा था। अब वो मेरे बदन को चूमने लगी और फिर में उसके बूब्स को चूमते हुए धक्के देने लगा था और इस तरह करते हुए मैंने अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया। फिर वो जोश में आकर पूरी तरह से मुझसे चिपक गयी और में उसको लगातार धक्के देते हुए चुदाई के मज़े लेने लगा था। अब भाभी भी जोश में आकर अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर मेरे हर एक धक्के के साथ धक्के लगाकर लंड को ज्यादा से ज्यादा अंदर लेने की कोशिश करने लगी थी। दोस्तों इस तरह हम दोनों करीब आधे घंटे तक तेज कभी हल्के धक्के देकर झड़ने के बाद थककर वैसे ही चिपके पड़े रहे और मेरा लंड हल्के हल्के झटके देते हुए अपने वीर्य को भाभी की चूत की गहराईयों में निकाल रहा था। अब शैलजा के आने का समय हो गया था, इसलिए एक दूसरे को चूमते हुए हम अलग हो गये, लेकिन अब हमारे मन में एक चिंता यह थी कि अगर शैलजा को इस बात का पता चल गया तो उसके बाद क्या होगा? क्योंकि अभी हमे 21 दिन लगातार ऐसे ही चुदाई करनी है और आने वाला सप्ताह तो पूरा उसका छुट्टियों का है।

अब भाभी को मैंने आग्रह करके कहा कि हमारे इस जाल में हमे शैलजा को भी फंसना पड़ेगा, नहीं तो हम दोनों को यह सब करना बड़ा महंगा पड़ेगा। अब हम दोनों उस समस्या के बारे में अभी सोच ही रहे थे कि तभी उसी समय शैलजा भी आ गयी और उसी समय भाभी ने मुस्कुराते हुए धीरे से मुझसे कहा कि यह काम तुम मेरे ऊपर छोड़ दो। अब तुम जाकर मेरे पास दो तीन सेक्सी फिल्म की सीडी लाकर छोड़ दो। फिर तुम देखना में उसको कैसा पटा लूँगी। फिर मैंने उनकी यह बात सुनकर खुश होकर कहा कि हाँ ठीक है में आपको लाकर दे देता हूँ और मैंने चार सेक्सी फिल्म की सीडी लाकर अपनी भाभी के हाथ में चोरीछिपे पकड़ा दी और उसके बाद में खाना खाकर अपने घर से बाहर अपने एक दोस्त के पास निकल गया और में सारा दिन बाहर रहकर भाभी का वो जादू देखने को बहुत बैताब हो रहा था। फिर शाम हुई और में अपने घर आ गया। भाभी ने हंसकर हाँ में जवाब दिया, जिसको सुनकर मेरी तबीयत मस्त हो गयी और मैंने तुरंत उनको पूछा क्या में अब शैलजा की भी चुदाई कर सकता हूँ? भाभी हंसते हुए कहने लगी कि हाँ, लेकिन तुम्हे थोड़ा सा इंतजार और अपने दिमाग से काम करना होगा वो धीरे धीरे तुम्हारे बस में जरुर आ जाएगी, क्योंकि वैसे तो मैंने आज उसको इतना गरम कर दिया है कि उसको अब कोई भी कैसा भी लंड अपनी चूत की प्यास को बुझाने के लिए चाहिए और वैसे भी प्यार और सेक्स कभी भी कोई भी रिश्ते नहीं समझता ।।

धन्यवाद …

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