मेरी सुहागरात की कहानी

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प्रेषक : मोना …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम मोना है, में पंजाब की रहनी वाली हूँ और मेरा बूब्स का आकार 34-28-34 है। काले लम्बे बाल और मेरा रंग एकदम गोरा है। दोस्तों में दिखने में बहुत सुंदर हूँ, इसलिए मेरे मौहल्ले के सभी लड़के मेरे पीछे पागल है। एक दिन की बात है, मेरी सहेली ऋतु का मेरे पास फोन आया और हम दोनों बहुत देर तक बातें करते रहे, उसकी अभी-अभी शादी हुई थी। फिर उसने मुझसे कहा कि वो और उसका पति हर दिन सेक्स करते है उस काम में मुझे बहुत मज़ा आता है और फिर उसने कहा कि अब तो में एक दिन भी सेक्स के बिना नहीं रह सकती हूँ। अब बातों ही बातों में मेरे दिल के अरमान भी जाग चुके थे और में उसकी वो सभी बातें सुनकर जोश में आकर गरम हो चुकी थी। फिर उसने मुझसे कहा कि क्या तुमने कभी सेक्स का मज़ा नहीं लिया? तब मैंने उसको कहा कि नहीं। फिर ऋतु पूछने लगी तुम्हारा मन तो करता होगा ना? तब मैंने कहा कि हाँ करता तो है, लेकिन में अपनी चूत अपने पति को ही दूँगी, यह मैंने उसके लिए संभाल कर रखी हुई है। अब उसने मुझसे कहा कि तेरा कुछ नहीं हो सकता तू पुराने विचारों वाली लड़की है। फिर मैंने उसको कहा कि कुछ भी हो में वो सब करूँगी तो अपने पति के साथ ही, नहीं तो कभी नहीं करूंगी।

अब उसने मुझसे कहा कि एक काम कर मेरे साथ लेस्बियन मज़े कर ले, तुझे थोड़ा सा आराम मिल जाएगा। फिर मैंने उसको कहा कि अभी नहीं में बाद में में सोचकर बताउंगी। फिर में पूरे दिन अपनी सहेली की वो सभी बातें सोचती रही और आखिरकार मैंने हाँ कह ही दिया और उसको फोन करके बता दिया और अब उसको पूछा क्या तेरा पति कुछ नहीं कहेगा? तब उसने कहा कि हम उनको पता ही नहीं चलने देंगे। फिर मैंने कहा कि वो कैसे? तब उसने कहा कि कल सुबह तुम मेरे पास आ जाना, मेरा पति सुबह के समय ऑफिस चला जाता है और शाम को घर आता है, उस बीच तक हम कितनी ही बार अपना काम कर लेंगे और फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है। फिर अगले दिन में तैयार होकर उसके घर के लिए चल पड़ी, वैसे उसका घर थोड़ी ही दूर था। अब मैंने पहुंचकर देखा कि उसके घर का दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था, मैंने अपनी गाड़ी को उसके घर के अंदर ही खड़ी कर दिया। फिर गाड़ी की आवाज़ को सुनकर ऋतु बाहर आ गई, उसने उस समय लाल रंग का नाईट गाउन पहना हुआ था और वो उस समय बहुत सेक्सी लग रही थी। फिर वो मेरे पास आकर मुझसे गले मिली, हम दोनों बहुत खुश थी, क्योंकि हम दोनों उसकी शादी के बाद उस दिन पहली बार मिल रही थी।

फिर हम अंदर चले गये, उसका घर बहुत अच्छा था, उसके घर के अंदर की सजावट बहुत अच्छी थी, हर तरफ़ लकड़ी का काम हुआ था और वो सब देखकर मुझे ऐसा लगा जैसे उसका पति बहुत अमीर था। फिर मैंने कहा कि तुम्हारा पति करता क्या है? तब उसने मुझसे कहा कि हमारा आयात निर्यात का अपना काम है। फिर हम दोनों ने चाय पी, तब उसने मुझसे कहा कि जिस काम के लिए तुम यहाँ आई हो क्या वो अब हम शुरू करे? तब मैंने उसको कहा कि हाँ क्यों नहीं? में इसलिए तो तुम्हारे पास आज आई हूँ। फिर उसने कहा कि तुम अपने कपड़े खोलो, मैंने कहा कि हाँ ठीक है, तुम भी खोल दो। फिर मैंने मुख्य दरवाजा किया और बेडरूम में पहुँच गई, उस समय मैंने हरे रंग का टॉप और डेनिम जींस पहनी थी। फिर उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया और उसके बाद वो मेरे होंठो पर चूमने लगी, पहले तो मुझे थोड़ा सा अजीब सा लगा, लेकिन फिर मुझे उसके साथ वो सब करने में मज़ा आने लगा। अब में भी उसका साथ देने लगी थी, करीब दस मिनट तक हम एक दूसरे के होंठो को चूमते चाटते रहे। फिर दस मिनट के बाद हम दोनों ने एक दूसरे को छोड़ा, तब ऋतु मुझसे कहने लगी कि ऐसे मज़ा नहीं आता बिल्कुल नंगे होते है।

अब मैंने कहा कि हाँ ठीक है, वो कहने लगी कि पहले में नंगी होती हूँ, उसके बाद तुम होना और एक झटके में उसने अपना नाईट गाउन अपने बदन से अलग कर दिया, तब मैंने देखा कि उसने नीचे कुछ नहीं पहना था। फिर मैंने उसको कहा कि यह क्या है? तब वो कहने लगी कि में तो ऐसे ही रहती हूँ, उसके बूब्स का आकार 36 था, उसके निप्पल हल्के भूरे रंग के थे और मैंने देखा कि उसके बूब्स एकदम गोलमटोल आकार में थे। अब मेरी बारी थी, फिर मैंने अपना टॉप निकाला और फिर अपनी डेनिम की जींस को भी उतार दिया, उसके बाद में सिर्फ़ ब्रा-पेंटी में थी, मैंने काले रंग की ब्रा पेंटी पहन रखी थी। फिर में अपनी ब्रा के हुक खोलने लगी, तब वो बोली कि ऐसे नहीं में खोलती हूँ, अपने आप तो हम सभी लड़कियां हमेशा ही खोलती है, लेकिन दूसरे के हाथों से खुलवाना का अपना ही मज़ा है। फिर मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है और वो अब मेरी ब्रा को खोलने लगी। फिर जब उसकी उंगलियों ने मेरी पीठ पर छुआ तब मेरे बदन के अंदर करंट सा दौड़ने लगा। अब उसके निप्पल मेरे बदन को छू रहे थे, जिसकी वजह से में बहुत उत्तेजित हो चुकी थी। फिर उसने मेरी पेंटी को उतार दिया और उसी समय मेरी चूत पर अपना एक हाथ रख दिया। अब में तो उस स्पर्श की वजह से मानों जन्नत में पहुँच गई थी।

फिर उसने मुझे सीधा किया और उसने मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए, जिसकी वजह से उसके बूब्स और मेरे बूब्स आपस में छुकर दब रहे थे। अब उसके निप्पल मेरे निप्पल को छूकर चुम्मा कर रहे थे और में तो वो सब महसूस करके मानों सातवें आसमान पर थी। फिर उसने मेरे होंठ छोड़े और वो अब मेरी गर्दन को चूमने लगी, उसके बाद उसने मेरे एक बूब्स को अपने एक हाथ में पकड़ लिया और मेरे उसने मेरे बूब्स को चूसना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से मेरी चूत तो बस पानी-पानी हो रही थी। फिर उसने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया और कभी वो मेरी चूत के होंठो को चुम्मा करती, तो कभी चाटती। फिर वो बहुत देर तक ऐसे ही करती रही, जिसकी वजह से मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था और में मस्ती में आकर तड़पने लगी थी और उसी समय मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। दोस्तों मेरे साथ ऐसा जिंदगी में पहली बार हुआ था। अब मेरा काम पूरा हो चुका था और में उस मज़े की वजह से जन्नत में पहुँच चुकी थी। फिर ऋतु ने मुझे सहारा देकर उठाया और कहा कि जैसे मैंने उसके साथ किया है ठीक वैसा ही में भी उसके साथ करूँ। अब में उसकी वो बात सुनकर शुरू हो गई, सब कुछ ठीक था, लेकिन मुझे उसकी चूत को चाटने में थोड़ी परेशानी हो रही थी।

फिर जब मैंने उसकी चूत पर अपने होंठ रखे, तब वो सिसकियाँ लेते हुए आहह ऊह्ह्ह्ह करने लगी और उसकी चूत का स्वाद बड़ा ही नमकीन था। अब में कभी उसकी चूत के होंठो को चूमती, तो कभी चाट लेती और कभी अपनी एक ऊँगली को उसकी चूत में डालकर अंदर बाहर करते हुए चूत रस को पीने लगती। दोस्तों मेरे ऐसा करने के थोड़ी ही देर में उसने पानी छोड़ दिया, मैंने उसका सारा पानी पी लिया। फिर हम दोनों ने एक दूसरे के होंठो पर चुम्मा किया और शांत हुई, फिर उसने मुझसे पूछा क्यों कैसा लगा? तुम्हे मज़ा आया ना? तब मैंने उसको कहा कि हाँ मुझे बहुत मजा आया, ऐसा मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था। फिर उसने कहा कि जब तुम्हे एक लड़की के साथ इतना मज़ा आया तो लड़के के साथ कितना आता होगा? तब मैंने कहा कि मुझसे ज्यादा तुमको पता है। अब वो बोली कि क्या तुम लड़के के साथ मज़ा करना चाहती हो? तब मैंने कहा कि करना तो चाहती हूँ, लेकिन मेरे मन की इच्छा है कि में अपनी चूत में पहला और आखरी लंड अपने पति का ही डलवाऊँ। अब वो मुझसे कहने लगी मैंने कब कहा कि तू किसी और का लंड डलवा? तू शादी करके डलवा ले। फिर मैंने उसको कहा कि लड़का भी अच्छा होना चाहिए, तब ऋतु बोली कि एक लड़का तो है।

अब मैंने उसको पूछा कि वो कौन है? तब ऋतु बोली कि मेरा एक देवर है, वो बहुत अच्छा दिखता है और वो तुझे पसंद भी करता है, उसने तुझे मेरी शादी में पहली बार देखा था और तब का वो तेरा दीवाना है, तुमसे बात करने का और यह सब काम करने का तो बस एक बहाना था, में असल में तुम्हारे साथ तुम्हारी शादी की बात करना चाहती थी। अब अगर तुम हाँ करो तो में तुम्हारे मम्मी-पापा से इस बारे में बात करूँ? दोस्तों वो लड़का एकदम ठीक ठाक था और वो अमीर भी था। मैंने वो सभी बातें सोचकर उसको हाँ कर दिया और कहा कि मम्मी-पापा से बात करने का काम तुम्हारा है। फिर इस तरह से उसने मेरी शादी की बात चला दी और धीरे-धीरे बात आगे बढ़ने लगी और फिर बहुत ही कम समय में हमारी शादी भी तय हो गई। अब हमारी फोन पर बातें होने लगी थी और हमारी एक-दो बार मुलाकात भी हुई, लेकिन मैंने उसको चूमने से ज्यादा कुछ नहीं करने दिया। फिर आखिरकार बहुत ही जल्दी मेरी सुहागरात का वो दिन भी आ ही गया जिसका मुझे बड़ी बेसब्री से इंतजार था। फिर ऋतु ने मुझे मेरे बेडरूम में पहुँचा दिया और वो हंसते हुए मुझे मेरी सुहागरात के लिए बधाई देकर चली गई। फिर थोड़ी देर में मोनू (मेरा पति) अंदर आ गया, पास में एक दूध का गिलास रखा था, मैंने उसको वो दूध पिलाया और उसने खुश होकर उसको पी लिया।

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दोस्तों मैंने उस रात को लाल रंग का लहंगा चोली पहना हुआ था और मैंने नीचे बहुत सेक्सी लाल रंग की बिकनी पहनी हुई थी। अब उसने मुझसे पूछा क्या तुम तैयार हो? तब मैंने यह बात सुनकर शरम से अपना सर नीचे झुका दिया। फिर उसने अपने एक हाथ से मेरा चेहरा अपनी तरफ़ घुमाया और अपने होंठो को मेरे होंठो पर रख दिए, जिसकी वजह से मेरे तो जैसे अंदर आग लग रही थी। में बहुत प्यासी थी और में भी जोश में आकर उसको चूमने लगी थी। फिर बहुत देर तक हमने एक दूसरे के होंठो को चूसकर मज़ा किया। अब उसने अपनी जीभ को मेरे मुँह में डाल दिया और मैंने उसकी जीभ को चूसना शुरू कर दिया। ऐसा करने से मुझे अब बहुत मज़ा आ रहा था, लेकिन अंदर से डर भी लग रहा था कि जब वो मेरी चूत में अपना लंड रखेगा, तब क्या होगा? फिर मैंने डरना बंद किया और अपने मन में कहा कि पगली आज नहीं तो कल मोनू तुम्हारी चूत को चोदकर जरुर फाड़ेगा ही, फिर आज क्यों नहीं? तभी उसने मेरी चोली को खोलना शुरू किया और धीरे-धीरे उसको उतार दिया, जिसकी वजह से अब में उसके सामने लहंगा और ब्रा में थी। अब लाल रंग की सेक्सी ब्रा में मेरे बूब्स एकदम कयामत लग रहे थे।

फिर वो भूखे शेर की तरह उन पर टूट पड़ा और एक झटके में उसने मेरी ब्रा को भी खोल दिया, जिसकी वजह से अब मेरे दोनों बूब्स उसके सामने एकदम नंगे थे। अब वो मेरे गुलाबी रंग के उठे हुए निप्पल को देखकर मस्त हो गया और वो मुझसे कहने लगा कि में बहुत किस्मत वाला हूँ जो मुझे तुम मिली हो में तुम्हारे इस सुंदर बदन को पाकर धन्य हो गया। फिर में तो उसकी वो बातें सुनकर एकदम से शरमा गई। फिर वो अपने दोनों हाथों से मेरे बूब्स को दबाने लगा, जिसकी वजह से मुझे थोड़ा-थोड़ा दर्द भी हो रहा था और अब में आहह आहहह की आवाज़ निकाल रही थी, लेकिन मुझे मज़ा भी आ रहा था। फिर वो एक-एक करके मेरे दोनों बूब्स को चूसने लगा, मेरी चूत अब तक बिल्कुल गीली हो चुकी थी और जैसे-जैसे वो मेरे बूब्स को चूसता, में तो आहह ऊह्ह्ह्ह करने लगती। फिर उसने मेरे बूब्स को छोड़ा और वो मेरी नाभि को चूमने लगा, में तो बस ओह्ह्ह आह्ह्ह बस करो करने लगी थी। फिर उसने मेरा लहंगा ऊपर किया, उसके बाद मेरी लाल रंग की बिकनी उसको साफ-साफ नजर आने लगी थी और वो दो मिनट तक उसको घूरकर देखता रहा। फिर उसने मेरे कूल्हों को थोड़ा ऊपर उठाया और मेरी पेंटी को कूल्हों से हटा डाला और खींचकर उतार दिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब मेरी बिना बालों की एकदम गुलाबी कामुक चूत को देखकर वो तो पागल ही हो गया और बिना रुके उसने अपने होंठो को मेरी चूत पर रख दिया। अब में तो बस मस्त हो गई थी, मेरा मन भी कर रहा था कि जल्दी से वो अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाल दे, क्योंकि अब मेरी चूत जोश की वजह से बिल्कुल गीली हो चुकी थी। फिर उसने अपनी एक उंगली को मेरी चूत में डाल दिया, लेकिन मेरी चूत टाईट होने की वजह से उसकी उंगली बहुत मुश्किल से अंदर गई। अब मुझे थोड़ा-थोड़ा दर्द होने लगा था, क्योंकि उस समय पहली बार कोई चीज मेरी चूत के अंदर गई थी, मैंने ऊऊईईई माँ की आवाज़ निकाली, लेकिन मोनू ने मेरे दर्द की तरफ़ कोई ध्यान नहीं दिया। अब वो अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगा था, मेरा दर्द भी कुछ कम हो चुका था। फिर में थोड़ी देर में झड़ने वाली थी, इसलिए में सिकुड़ने लगी थी। अब मोनू को देखकर पता चल गया था कि में झड़ने वाली हूँ, उसने अपनी गति को और भी तेज कर दिया, मैंने अपनी आवाज को और तेज़ कर दिया और फिर मेरा पानी निकल गया आहह। अब बारी थी उस काम को खत्म करने की, मोनू उठ खड़ा और वो मेरी तरफ भूखे कुत्ते की तरह देखना लगा।

फिर उसने अपने कपड़े निकालना शुरू किया, वो सिर्फ अंडरवियर में रह गया था और उसका लड़ तनकर खड़ा था, जो मुझे साफ-साफ नजर आ रहा था। अब उसने मुझसे कहा कि तुम अब मेरी अंडरवियर को उतारो। फिर जब मैंने उसका अंडरवियर नीचे किया, तब उसका लंड एक ही झटके से बाहर आ गया, में उसका लंड देखकर दंग रह गई और मन ही मन सोचने लगी क्या किसी आदमी का लंड इतना बड़ा भी होता? दोस्तों मोनू का लंड करीब आठ इंच लंबा और तीन इंच मोटा था, लेकिन एक बात है मोनू का लंड बहुत गोरा और मोटा भी था और उसने अपने लंड के सारे बाल साफ किए हुए थे। फिर जब मैंने उसका अंडरवियर नीचे किया, तब उसका लंड मेरे चेहरे पर टच कर रहा था। अब उसने कहा क्या तुम इसको अपने हाथ में पकड़ोगी नहीं? तब मैंने अपना हाथ उसके लंड पर रखा और मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने कोई गरम चीज़ को पकड़ लिया हो और उसका लंड बहुत सख़्त भी था। अब में बहुत जोश में भी थी और मुझे डर भी लग रहा था। फिर उसने कहा क्या तुम इसको मुँह में नहीं लोगी? तब में वो शब्द सुनकर शरमा गई। अब मेरा मन तो कर रहा था कि में उसका सारा का सारा लंड खा जाऊं, लेकिन मुझे शरम बहुत आ रही थी और मैंने कुछ जवाब नहीं दिया।

फिर उसने कहा कि यहाँ पर एक चुम्मा तो दे दो। अब मैंने अपने कांपते हुए होंठ को उसके लंड पर रख दिया, मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने गरम गुलाब जामुन को छू लिया हो। फिर वो कुछ नहीं बोला और कुछ देर बाद मुझसे कहा कि आज के लिए इतना ही बहुत है, तुम कहाँ भागी जा रही हो? यह सब काम तो में तुमसे सारी जिंदगी करवाऊंगा, आज तो हमारी सुहागरात है। अब जो जरुरी काम है पहले में उसको तो पूरा कर लूँ। फिर पहले तो उसने मुझे सीधा लेटा दिया और मेरे दोनों पैरों को फैला दिया और उसके लंड को अपने एक हाथ में पकड़कर मेरे दोनों पैरों के बीच में आ गया। फिर उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा, लेकिन मेरी चूत बहुत टाईट थी, जिसकी वजह से उसका लंड अंदर जाने का नाम ही नहीं ले रहा था। अब वो थोड़ा सा ज़ोर लगाता, मेरी चीख निकल जाती। फिर करीब दस मिनट तक कोशिश करने के बाद भी उसका थोड़ा सा भी लंड मेरी चूत के अंदर नहीं गया और वो बड़ा उदास हो गया। अब मैंने उसको पूछा क्या हुआ? तब वो बोला कि में तुमको दुखी नहीं करना चाहता हूँ, तुम मेरा थोड़ा सा साथ दो। फिर मैंने कहा कि में अब नहीं चिलाऊँगी, तब वो दोबारा से मेरे पैरों के बीच में आ गया।

फिर मैंने उसको कहा कि तुम ऐसा करो थोड़ी सी क्रीम लगा लो, तब उसने कहा कि मेरे पास तो कोई क्रीम नहीं है और तब मैंने अपने पर्स से उसको क्रीम निकाल कर दी, उसने अपने लंड पर क्रीम लगा ली और वो लंड को दोबारा चूत के मुहं पर रखकर धक्के मारने लगा। अब क्रीम की वजह से उसका लंड थोड़ा चिकना हो गया था, उसने एक झटका लगाया, तब उसका लंड थोड़ा अंदर चला गया और मेरे मुहं से चीख निकल गई। फिर तुरंत उसने मेरे मुँह पर अपना एक हाथ रख दिया, मुझे बहुत दर्द हो रहा था और ऊपर से वो और भी ज्यादा ज़ोर लगा रहा था। अब मेरी आँखों से आँसू निकलने लगे थे, मुझे लगा कि में जैसे उस दर्द की वजह से मर ही जाउंगी। अब उसका लंड मेरे अंदर आधा जा चुका था, उसने ज़ोर लगाना बंद कर दिया और उसने मुझसे पूछा क्यों कैसा लग रहा है? तब मुझसे बोला नहीं गया और मैंने अपना सर ना में हिला दिया। फिर वो थोड़ी देर रुक गया और अब वो उसके आधे लंड को ही आगे पीछे करने लगा और थोड़ी देर तक ऐसा करने का बाद में थोड़ी शांत हुई और आहह ऊह्ह्ह्ह करने लगी। अब वो तुरंत समझ गया कि मेरा दर्द अब कम हो गया है, में थोड़ी ठीक हूँ और इसलिए उसने अपने धक्कों की गति को अब बढ़ा दिया था।

फिर 20-25 धक्के लगाने के बाद उसने एक बहुत ज़ोर का झटका लगाया और अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत के अंदर डाल दिया, ऊईईईई माँ में मर गई और में रोने लगी। अब मुझे बहुत दर्द हो रहा था और मैंने उसको कहा कि तुम इसको अब जल्दी से बाहर निकालो वरना में मर ही जाऊँगी और तब जाकर वो थोड़ी देर तक रुक गया, लेकिन उसने अपना लंड बाहर नहीं निकाला और मुझे शांत होने दिया। फिर जब कुछ देर बाद मैंने रोना बंद किया, तब उसने धीरे-धीरे से धक्के मारने शुरू किए, मुझे बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन वो तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। फिर जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ, तब में आहहहह ऊह्ह्ह्ह के साथ उसके साथ ताल मिलाने लगी। अब मोनू अच्छी तरह से समझ गया था कि अब मुझे दर्द नहीं हो रहा है, मज़ा आने लगा है और यह बात सोचकर उसने अपने धक्कों की गति को बढ़ा दिया। अब मुझे भी उसके धक्के खाने में बहुत मज़ा आ रहा था और में अपनी गांड को ऊपर उठा उठाकर उसका पूरा पूरा साथ देने लगी थी। फिर में थोड़ी देर में अपना पानी छोड़ने लगी, मेरा काम पूरा हो चुका था, लेकिन मोनू अभी भी धक्के लगाए जा रहा था। फिर मैंने कहा कि मेरा काम हो चुका है, तुम प्लीज़ जल्दी-जल्दी करो ऊऊह्ह्ह उसका बदन बड़ा ही गरम था।

अब उसने मेरे मुहं से यह बात सुनकर अपनी गति को पहले से ज्यादा बढ़ा दिया, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे रेल का इंजन चल रहा हो। फिर उसने एक और झटका लगाया उसी के साथ अपना सारा का सारा वीर्य मेरी चूत के अंदर छोड़ दिया और उसका गरम-गरम वीर्य मेरे अंदर जाते ही मुझे एक अजीब सी संतुष्टि मिली। अब मैंने अपनी दोनों आँखों को बंद कर लिया था और खोलने का मन नहीं कर रह था। फिर मोनू मेरे ऊपर लेटा रहा और फिर करीब दस मिनट के बाद हम एक दूसरे से अलग हुए। अब मुझसे हिला भी नहीं जा रहा था, मोनू ने मुझे खींचकर सहारा दिया, तब मैंने अपनी चूत पर हाथ लगाकर देखा तो उसमे से खून और वीर्य निकल रहा था। फिर मुझसे मोनू ने कहा कि इसको तुम बाथरूम में जाकर साफ कर लो, तब तक में चादर बदलकर दूसरी बिछा देता हूँ। अब मैंने उसको कहा कि मुझसे तो हिला ही नहीं जा रहा है, मोनू ने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और मुझे बाथरूम में ले गया और अपने हाथों से मेरी चूत को साफ करने लगा। दोस्तों गरम-गरम पानी डालते ही मुझे कुछ आराम मिला, वो मुझसे पूछने लगा कि मोना कैसा लगा? तब में शरम की वजह से कुछ नहीं बोली। दोस्तों मुझे मज़ा तो बहुत आया था, लेकिन में कुछ नहीं बोली।

फिर साफ करने के बाद मोनू ने मुझे खड़ा किया और फिर हम दोनों पलंग की तरफ़ चल पड़े, मुझसे चला नहीं जा रहा था और में लंगड़ा लंगड़ाकर चल रही थी। फिर पलंग पर जाते ही में लेट गई और मुझे नींद आ गई करीब एक घंटे के बाद मुझे लगा कि कोई मेरे बूब्स को दबा रहा है, तब मैंने देखा कि वो मोनू था। फिर मैंने उसको पूछा कि यह क्या कर रहे हो? तब वो बोला कि दुबारा मन कर रहा है और में उसकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगी उसके बाद हम दोनों एक बार फिर से शुरू हो गये। दोस्तों उस रात को हम दोनों ने दो बार सेक्स के मज़े लिए और ऐसा करने में मुझे बहुत मज़ा आया था। फिर इस तरह से मेरी रात को दो बार चुदाई होने लगी और रविवार को तो तीन बार चुदाई होने लगी थी। फिर में और ऋतु कभी कभी लेस्बियन काम भी कर लेते थे ।।

धन्यवाद …

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