मौसी को चूत में ऊँगली करके चोदा

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प्रेषक : दिनेश …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम दिनेश है और मेरी उम्र 25 साल है। दोस्तों आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालों की सेवा में अपना सबसे मस्त मज़ेदार सेक्स अनुभव लेकर आया हूँ, जिसमें मैंने अपनी मौसी को उन्ही के घर पर बहुत जमकर चुदाई के मज़े देकर उनकी प्यास को बुझाकर पूरी तरह से संतुष्ट किया और यह सब मैंने कैसे किया आप लोग खुद ही पढ़कर इसके मज़े ले। दोस्तों यह तब की घटना है जब में 21 साल का था और मेरी मौसी की उम्र 40 साल थी और वो दिखने में बहुत ही सुंदर थी, उनके बड़े आकार के बूब्स और वो मटकते हुए गोल कूल्हे मुझे हमेशा अपनी तरफ आकर्षित किया करते थे। दोस्तों में अपनी मौसी को जब भी देखता था तो मुझे उनके सेक्सी बूब्स नजर आकर मेरे मन में उनकी वजह से गुदगुदी होने लगती थी और उनका वो सुडोल गोरा बदन बहुत ही मस्त था। एक बार उन्होंने मुझे अपने यहाँ रहने के लिए बुलाया और में भी खुश होकर पूरे एक महीने के लिए उनके घर रहने चला गया। दोस्तों उनका घर बहुत ही छोटा था और उनके उस घर में सिर्फ़ दो कमरे थे, एक रसोई और दूसरा उनका हाल था।

फिर जब में उनके यहाँ रहने गया तब मौसी ने मुझे देखकर खुश होते हुए तुरंत मुझे अपने गले से लगा लिया, जिसकी वजह से उनके बूब्स मेरी छाती से दब गये और मुझे भी उस दिन बड़ा मज़ा आया। फिर मैंने भी उन्हे अपने गले से लगा लिया और उनके गाल पर एक चुम्मा भी कर दिया, लेकिन उनको बुरा नहीं लगा। अब वो मुझे देखकर बहुत खुश थी मुझे उनके चेहरे से साफ पता चल रहा था कि वो कितना खुश थी। दोस्तों मेरी मौसी घर में ज्यादातर समय गाउन ही पहना करती थी, जिसकी वजह से जब भी वो घर का काम करने के लिए नीचे झुकती थी, तब मुझे उनके बूब्स का वो द्रश्य देखकर मेरा सात इंच लंबा लंड खड़ा होने लगता था और वो मुझसे बहुत प्यार करती थी। एक बार मौसी किसी काम के लिए नीचे झुकी और उसी समय तुरंत मैंने देखा कि उस समय मौसी ने ब्रा नहीं पहनी थी। अब मुझे उनके बूब्स साफ दिखाई देने लगे थे और उस द्रश्य को देखकर मेरा बड़ा बुरा हाल हो गया था। में अपनी चकित नजरों से घूरकर उनकी गोरी बड़ी बड़ी निप्पल को देखने लगा था। फिर में ज्यादा जोश में आकर अपने को काबू में ना रख सका और उसी समय में बाथरूम में जाकर मुठ मारकर अपने लंड को शांत करके वापस आ गया।

अब मेरा दिल अपनी हॉट सेक्सी मौसी की चुदाई करने के लिए बहुत मचल रहा था, लेकिन उनके साथ ऐसा कुछ भी करने की मेरी हिम्मत ही नहीं हो रही थी। दोस्तों में मेरी मौसी और मौसाजी रात के समय एक ही पलंग पर सोते थे और उनका वो पलंग आकार में बड़ा था, इसलिए हम तीनों को एक ही पलंग पर सोने में कोई दिक्कत नहीं होती थी। फिर सबसे पहले मौसी उसके बाद मौसाजी और फिर में लेट जाता और हम तीनों इस तरह एक ही कतार में सोते थे। दोस्तों हर रात को सोने से पहले मेरी मौसी मुझे और मेरे मौसाजी को दूध ज़रूर देती थी, जिसको पीकर हम सभी सो जाते थे और रात को सोते समय कमरे में बहुत अंधेरा रहता था और कोई किसी की शक्ल भी नहीं देख सकता, इतना अंधेरा रहता था। एक बार मेरी देर रात को अचानक से आँख खुल गई और फिर मुझे कुछ महसूस हुआ कि शायद उस समय मेरे मौसाजी मौसी की चुदाई कर रहे थे। फिर मैंने जब गौर से देखा तब मुझे नजर आया कि मौसाजी मौसी के ऊपर लेटे हुए थे और मौसी नंगी नीचे लेटी हुई थी और मौसाजी मेरी मौसी की जमकर चुदाई कर रहे थे। अब मौसी बीच बीच में आहह ऊह्ह्ह आऊच उऊह्ह्ह कर रही थी।

दोस्तों यह सब देखकर मेरा लंड जोश में आकर तनकर खड़ा हो गया और मैंने उसी समय मौका देखकर अपने लंड को पकड़कर उस चुदाई को देखकर वहीं पर मुठ मारना शुरू किया और वो दोनों आपस में बहुत देर तक चुदाई के मज़े लेते रहे। फिर वो सब देखकर मुझे पता ही नहीं चला कि मुझे कब नींद आ गयी, लेकिन दोस्तों अब मेरा मन अपनी मौसी की चुदाई करने के लिए और भी ज्यादा खराब होने लगा और में उनकी चुदाई के सपने देखने लगा था। अब में चार पांच दिन तक रोज़ जल्दी सोने का बहाना करके लेट जाता और मौसी की चुदाई को देखकर मज़े करता। एक बार मैंने देखा कि मौसी नंगी होकर अपनी दोनों आँखों को बंद करके लेटी हुई थी और मौसाजी उनकी चूत में अपना मुहं डालकर चूस रहे है। अब वो सब देखकर मुझसे रहा नहीं गया। फिर मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके उस समय अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर मौसी के एक बूब्स पर रख दिया, लेकिन अँधेरा होने की वजह से मौसी को कुछ भी पता नहीं चला कि वो हाथ किसका हाथ था। अब मेरे अंदर और भी हिम्मत आ गई और में ज़ोर ज़ोर से मौसी के बूब्स को दबाने लगा। दोस्तों मौसी के बूब्स इतने बड़े थी कि वो मेरे हाथ में ही नहीं आ रहे थे और मौसी भी बड़े मज़े से अपने बूब्स को दबवा रही थी और में अपने दूसरे हाथ से अपने लंड को पकड़कर मुठ मार रहा था।

फिर थोड़ी देर बाद मेरा पानी निकल गया और उसके बाद मैंने मौसी के बूब्स से हाथ को हटा लिया और उसके बाद में सो गया। दोस्तों मैंने इन दोनों की चुदाई में मैंने एक बात पर ध्यान दिया कि वो दोनों मेरे भी उनके पास लेटे होने की वजह से कोई भी बात नहीं करता था। फिर शनिवार का दिन आ गया और रविवार के दिन मौसाजी की छुट्टी होती है इसलिए वो शनिवार रविवार की रात को मौसी को बहुत जमकर चोदते है और इसलिए शायद मौसी भी थोड़ी ज्यादा तैयारी पहले से ही करके रखती होगी। अब मुझसे रहा नहीं गया और में मन ही मन विचार बनाने लगा था अब मुझे कैसे भी करके अब मौसी की चुदाई पूरी करनी थी। फिर में रात होने का इंतज़ार करने लगा, रात को मौसी ने मुझे रसोई में अपने पास बुलाया और मेरे हाथ में दूध का गिलास देकर कहा कि यह ले इसको तू अपने मौसाजी को जाकर दे आ। फिर मैंने उनकी नज़र बचाकर नींद की दो गोलियों को मौसाजी के दूध में मिला दिया और मैंने वो दूध मौसाजी को दे दिया और उसी समय मौसाजी ने वो पी भी लिया। दोस्तों उस रात को मौसी ने मेक्सी पहनी हुई थी, कुछ देर बाद वो दोनों लेट गये और में भी बल्ब को बंद करके लेट गया, करीब एक घंटे के बाद मैंने मौसाजी को हल्के से हिलाकर देखा उन पर नींद की गोली का असर हो गया था और वो गहरी नींद में सो गये थे।

अब मैंने उनको अपनी जगह पर सरका दिया और उनकी जगह में खुद आकर लेट गया, उस समय मौसी का मुहं दूसरी तरफ था तो उन्हे पता नहीं चला। अब मैंने पहले अपने सारे कपड़े उतार दिए और मौसी की कमर पर अपना हाथ रख दिया, मुझे लगा कि मौसी सो गयी है, लेकिन वो जागी हुई थी। अब मैंने अपना हाथ उनके बूब्स पर रख दिया और उन्हे मेक्सी के ऊपर से दबाने लगा और में उनसे चिपककर लेट गया, जिसकी वजह से मेरा लंड मौसी की गांड को छू रहा था और मैंने अब अपने एक पैर को मौसी के पैरों के बीच में डाल दिया और अपने पैर से मौसी की चूत को रगड़ रहा था। अब मौसी थोड़ी देर के बाद गरम होने लगी थी। फिर थोड़ी देर के बाद मौसी ने अपना मुहं मेरी तरफ किया और मैंने उनके होंठो पर अपने होंठो को रख दिया आहह्ह्ह उनके होंठो का वाह क्या मस्त स्वाद था? में तो बिल्कुल पागल हो गया। अब में अपना हाथ उनकी मेक्सी के अंदर डालकर मौसी के बूब्स को दबाने लगा था, मौसी ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया और वो दबाने लगी। उस दिन भी मौसी ने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी। अब मैंने मौसी की मेक्सी को उतार दिया और में उनके ऊपर लेट गया और अब में अपने बदन से उनका बदन रगड़ने लगा था जिसकी वजह से उनके बूब्स मेरी छाती से रगड़ रहे थे और मेरा लंड उनकी पेंटी के ऊपर से उनकी चूत पर रगड़ रहा था।

दोस्तों मुझे यह सब करके बहुत अच्छा लग रहा था। में उनके होंठों को चूमते हुए उनके गाल पर भी चूमने लगा था और उसके बाद में उनके गले पर भी चूमने लगा, जिसकी वजह से मौसी को भी बहुत मज़े आ रहे थे। अब मौसी धीमी आवाज़ में कहने लगी कि आज क्या हुआ है तुम्हे? आज तो तुम बहुत अच्छी तरह से कर रहे हो, लेकिन में कुछ नहीं बोला में अपने काम में लगा रहा। अब में चूमते हुए उनके बूब्स की दरार तक आ गया। मैंने उनके बूब्स की दरार पर हल्का सा काट लिया और उस दर्द से मौसी पूरी तरह से हिल गयी। फिर में उनके एक बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा और दूसरे बूब्स को अपने हाथ से दबाने लगा, जिसकी वजह से मेरी मौसी पागल होती जा रही थी। अब मैंने उनके निप्पल पर काट लिया और वो दर्द की वजह से धीरे से कहने लगी आआहहहह राम सस्स्ईई धीरे करो यह तुम्हारे लिए ही तो है और मैंने उनके एक बूब्स को रगड़ रगड़कर लाल कर दिया था। फिर वो सिसकियाँ लेते हुए मुझसे कहने लगी कि ऊईईइ प्लीज आराम से करो मुझे जलन होने लगी है। अब मैंने मौसी के पेट पर चूमना शुरू किया और उनकी नाभि पर भी चूमने लगा था, उसके बाद में उनकी नाभि में अपनी जीभ को अंदर बाहर करने लगा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब उन्होंने जोश में आकर मेरे बाल पकड़ लिए और मेरा मुहं अपनी नाभि में दबाने लगी और उन्हे डर था कि पास में लेटा हुआ में कहीं कहीं उनकी चुदाई से जाग ना जाऊं, इसलिए वो ज्यादा आवाज नहीं कर रही थी। फिर में मौसी की चूत की तरफ अपना मुहं करके उनकी जाँघ पर पागलों की तरह किस करने लगा और फिर हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गए। फिर में अपनी मौसी की प्यारी चूत जो अभी तक पेंटी में क़ैद थी उस पर मैंने अपना एक हाथ रख दिया। मुझे मौसी की पेंटी गीली महसूस होने लगी थी। अब मैंने सूंघकर महसूस किया वहां से बड़ी ही मादक खुशबू आ रही थी और में अपनी जीभ से उनकी पेंटी को चूत के ऊपर से चाटने लगा और दूसरी तरफ मौसी मेरे लंड के चारो तरफ़ से अपनी जीभ से चाट रही थी और कभी वो मेरे आंड को भी चाट रही थी और दबा भी रही थी। दोस्तों मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा था और अब उन्होंने मेरे लंड का टोपा अपने मुहं में रखकर वो अंदर बाहर कर रही थी, मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने एक हल्का सा झटका मार दिया, जिसकी वजह से मेरा चार इंच लंड उनके मुहं में चला गया। दोस्तों इस हमले से मेरी प्यारी मौसी की आँख से आँसू निकलने लगे थे, लेकिन उन्होंने मेरा लंड बाहर नहीं निकाला वो और भी चूस रही थी और इधर में मौसी की पेंटी निकालने लगा।

अब मौसी ने अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर पेंटी निकालने में मेरी मदद की और अब मौसी की वो चूत मेरे सामने थी जो मुझे रोज़ परेशान किया करती थी। अब में अपनी जीभ को मौसी की चूत पर ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर की तरफ फिरा रहा था, जिसकी वजह से मेरी मौसी का बड़ा बुरा हाल था। फिर मैंने अपने हाथ की दो उंगली से मौसी की चूत को खोला और उसमे अपनी जीभ को डाल दिया और अब में अपनी जीभ से चुदाई करने लगा। अब मेरी प्यारी मौसी पागलों की तरह अपनी गांड को ऊपर नीचे करने लगी। कुछ देर बाद में अपनी तीन उंगली से उनकी चूत की चुदाई करने लगा था और इसी दौरान मेरी मौसी दो बार झड़ चुकी थी और में उनका रस पी गया था। फिर मैंने अपनी एक उंगली को उनकी चूत के रस से भिगोकर उनकी गांड के छेद पर रख दिया और उनके ऊपर नीचे होने की वजह से मेरी उंगली उनकी गांड के अंदर बाहर होने लगी थी और उधर मेरे लंड का भी बड़ा बुरा हाल था। दोस्तों मौसी ने जोश में आकर चूस चूसकर मेरे लंड का पानी निकाल दिया था। मौसी एक बार फिर से मेरे लंड को खड़ा करने के लिए उसको चूस रही थी, क्योंकि उन्हे अब अपनी चूत की भी सेवा करवानी थी। फिर करीब दस मिनट के बाद मेरा लंड एक बार फिर से खड़ा होने लगा था और अब में मौसी की चूत को छोड़कर उनके मुहं के पास आ गया।

अब मौसी मेरा चेहरा पकड़कर मेरा कान अपने मुहं के पास लाकर मुझसे कहने लगी कि जान आज सेक्स करने में बहुत मज़ा आ रहा है। आज तुम इनता सब कहाँ से सीखकर आए हो? मैंने उनके होंठों पर अपनी उंगली रखकर उन्हे चुप करा दिया, क्योंकि में कुछ नहीं बोल रहा था। अब मैंने अपने होंठ प्यारी मौसी के होंठों पर रख दिए और उन्होंने अपना मुहं खोला और अपनी जीभ को मेरे मुहं में डाल दिया, मैंने उनकी जीभ को अपने होंठो से पकड़कर अपनी जीभ से चूसने लगा और मेरी प्यारी मौसी की जीभ बहुत ही स्वादिष्ट थी। अब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उनके दोनों बूब्स को अपने हाथों में लेकर ज़ोर दे दबा दिया और दर्द की वजह से उनके मुहं से चीख निकलती निकलती रह गयी, क्योंकि उनके मुहं को मेरे मुहं ने बंद किया हुआ था। अब मेरा लंड मौसी की चूत पर दस्तक दे रहा था और मौसी से भी रहा नहीं गया, इसलिए वो मेरे कान में धीरे से कहने लगी कि जान अब मुझसे ज्यादा सहा नहीं जाता। फिर मैंने मौसी का एक हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया, मौसी ने अपने दोनों पैरों को पूरा फैलाकर मेरा लंड अपनी चूत के दरवाजे पर रख दिया, लेकिन में मौसी को और भी ज्यादा तड़पाना चाहता था और इसलिए मैंने लंड को अंदर नहीं डाला।

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फिर करीब पांच मिनट के बाद मौसी एक बार फिर से मेरे कान में कहने लगी कि अब डाल भी दो क्यों तुम मुझे तड़पा रहे हो? दोस्तों इतना सुनना था कि मैंने एक जोरदार झटका मार दिया और मेरा लंड पूरा का पूरा मौसी की चूत में चला गया। मौसी के हलक से एक हल्की सी चीख निकली, लेकिन मैंने उसी समय अपना हाथ मौसी के मुहं पर रख दिया। दोस्तों मौसी की चूत मुझे थोड़ी कसी हुई लगी शायद मौसाजी का लंड मेरे लंड से थोड़ा छोटा और पतला भी होगा, मौसी ने मेरा हाथ अपने मुहं से हटा दिया और वो कहने लगी कि आज तुम्हे क्या हो गया है? क्या तुम आज मुझे मार ही डालोगे? क्या बात है मुझे आज आपका लंड भी थोड़ा बाड़ा बाड़ा लग रहा है क्या बात है? क्या आज आपने कोई दवाई ली है? अब मैंने उनके होठों पर अपने होंठ रखकर उनको एक बार फिर से चुप करवा दिया और में मौसी की चूत में जोरदार धक्के देकर लंड को डालता गया और मौसी धीरे से बोलती जा रही थी ऊईईईइ माँ मर गई आआहह मेरी चूत फट गई आईईईई। दोस्तों मौसी शायद भूल गयी थी कि घर में उसका भांजा भी सो रहा है, लेकिन मौसी को क्या पता था कि भांजा ही उनकी चुदाई कर रहा है, मौसाजी तो नींद की गोली लेकर सोया पड़ा है।

अब मौसी मज़े मस्ती की वजह से नीचे से उछल उछलकर मुझसे चुदवा रही थी और इस दौरान मौसी दो बार झड़ चुकी थी, लेकिन में अभी भी नहीं झड़ने वाला था। दोस्तों में मौसी को वैसे ही जोरदार धक्के देकर बीस मिनट तक लगातार चुदाई करता रहा, लेकिन अब में थकने लगा था और इसलिए मैंने मौसी को पकड़कर अपने ऊपर बैठा लिया और में नीचे लेट गया। अब मौसी तुरंत समझ गयी थी कि में क्या चाहता हूँ। फिर वो मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत पर सेट करके एकदम से मेरे लंड पर बैठ गयी और अपना मुहं मेरे मुहं के पास लाकर मुझे चूमने लगी थी और वो धीरे से बोली कि जान इतना मज़ा तो मुझे हमारी सुहागरात वाली रात को भी नहीं आया था, जितना मज़ा आज आप मुझे दे रहे हो। दोस्तों मौसी जानती थी कि मौसाजी जी सेक्स करते हुए बोलते नहीं थे, इसलिए उन्हे कोई शक भी नहीं हो रहा था। अब मैंने मौसी की गांड के नीचे हाथ रखा और उसको ऊपर नीचे करने लगा, जिसकी वजह से मौसी को इशारा मिल जाए कि में अब क्या चाहता हूँ? मौसी मेरा इशारा समझकर तुरंत ही मेरे लंड पर ऊपर नीचे होकर चुदाई कर रही थी, जिसकी वजह से ऐसा लग रहा था कि में मौसी को नहीं मौसी मुझे चोद रही हो।

दोस्तों इस आसन में हिलते हुए मौसी के बूब्स बड़े ही मस्त लग रहे थे और मैंने हाथ को आगे बढ़ाकर मौसी के बूब्स को तुरंत पकड़ लिया और मौसी को अपनी तरफ खींच लिया, जिसकी वजह से मैंने मौसी को अपने से चिपका लिया और मौसी मेरा लंड अपनी चूत में ले रही थी। अब मैंने मौसी के एक बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसना शुरू किया और मौसी जोश में आकर अपने दूसरे बूब्स को खुद ही दबाने लगी थी और यह सब करते हुए मौसी एक बार और झड़ गई। अब मौसी का पानी मेरे लंड से पेट पर आ रहा था। फिर मैंने अपना हाथ अपने लंड के पास लाकर मौसी की चूत का पानी छुआ, जिसकी वजह से मेरा हाथ पूरा गीला हो गया और फिर में उस हाथ को अपने मुहं के पास लाकर चाटने लगा और उसका स्वाद मुझे अच्छा लग रहा था। दोस्तों मैंने एक बार फिर से चूत के पास अपने हाथ को रखा तो वो दोबारा गीला हो गया और इस बार में मौसी के मुहं के पास उन्ही की चूत का पानी लगा हुआ हाथ ले गया। दोस्तों पहले तो वो अपना मुहं इधर उधर करती रही और फिर मैंने उनके बाल पकड़कर अपना हाथ उनके मुहं में दे दिया, जिसको उन्होंने चाट लिया।

दोस्तों मेरी थकान अब कम हो चुकी थी, इसलिए मैंने मौसी को नीचे लेटा दिया और उनके दोनों पैरों को पलंग के किनारे से नीचे उतार दिया और फिर में उनके दोनों पैरों के पास जाकर खड़ा हो गया। अब मैंने उनकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया, जिसकी वजह से उनकी चूत ऊपर उठकर और उभर गयी, मैंने मौसी के एक पैर को अपने कंधे पर रख लिया जिसकी वजह से मौसी की चूत और भी खुल गयी। अब मैंने मौसी का एक हाथ पकड़कर अपने लंड पर रखा और मौसी ने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के खुले हुए मुहं पर रख दिया और मेरा लंड दबा दिया। फिर में तुरंत उनका इशारा समझ गया और मैंने एक ज़ोर का झटका मार दिया, जिसकी वजह से एक ही बार में मेरा लंड उनकी चूत में पूरा चला गया। फिर में धीरे धीरे धक्के देकर मौसी की चुदाई कर रहा था और मौसी मुझसे कहने लगी थी ऊह्ह्ह जान थोड़ा ज़ोर से करो ना आह्ह्ह ऐसे मज़ा नहीं आएगा, तुम अपनी रफ्तार को पहले की तरह तेज करो। अब में एक बार फिर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा था और मौसी भी अपनी कमर को उठा उठाकर मुझसे चुदवा रही थी और उसी मौसी की चूत ने दोबारा से पानी छोड़ दिया। फिर मैंने यह महसूस किया तब मैंने अपनी दो उंगली को चूत के पानी से भीगोकर मौसी की गांड पर रख दिया और उनके हिलने की वजह से मेरी उँगलियाँ अंदर बाहर होने लगी।

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दोस्तों तब मुझे पता चला कि मौसी ने शायद कभी अपनी गांड नहीं मरवाई थी, इसलिए वो बार बार मेरी उंगली को हटा रही थी। फिर करीब बीस मिनट के बाद मुझे लगा कि में अब झड़ने वाला हूँ। फिर मैंने मौसी की चुदाई की रफ्तार को और भी तेज कर दिया और मेरे साथ साथ मौसी भी एक बार झड़ गई। अब में अपना लंड चूत में डाले हुए मौसी पर गिर गया, मौसी मुझे चूमने लगी और कहने लगी कि जान जैसा आज तुमने मुझे चोदा है वैसे रोज़ क्यों नहीं चोदते हो? अब में चूमते हुए कहने लगा कि मेरी प्यारी मौसी जान आज से पहले तुमने मुझे मौका दिया ही कहाँ था? मेरे मुहं से यह बात सुनना था कि मौसी एकदम चकित हो गयी और वो मुझसे पूछने लगी कि तेरे मौसाजी कहाँ है? मैंने कहा कि मौसी वो तो सो रहे है और इतनी देर से में ही आपकी चुदाई कर रहा था, मेरी मौसी जान। अब मौसी मुझे अपने से अलग करने लगी, लेकिन मैंने मौसी को नहीं छोड़ा और फिर मैंने उनको कहा कि आप बहुत नमकीन हो मौसी, मेरा दिल करता है कि में आपको हमेशा ऐसे ही चोदता रहूँ। दोस्तों मौसी से यह बात कहते हुए में दोबारा से मौसी की चूत में उंगली करने लगा और उनके बूब्स को दबाने लगा और मौसी को भी मेरी चुदाई अच्छी लगी थी, इसलिए वो मान गयी।

अब वो कहने लगी कि चल बदमाश तू मुझे अब यह बता कि यह सब कैसे हो गया? तभी में चुदाई के समय सोच रही थी कि आज तेरे मौसाजी को यह क्या हो गया है? जो वो इतनी देर से बड़े तेज तेज धक्के देकर मुझे चोद रहे है, तूने आज मुझे बहुत मज़े दिए है आज मुझे पूरी तरह से खुश कर दिया। फिर मैंने उनको वो सब साफ साफ बता दिया और वो मेरी पूरी बात को सुनकर बड़ी चकित हुई। दोस्तों इस तरह मेरा अपनी मौसी के साथ उनकी ना खत्म होने वाली चुदाई का सिलसिला बन गया जो आज तक भी चल रहा है और में अब भी जब चाहता हूँ अपनी मौसी की चुदाई करके आ जाता हूँ ।।

धन्यवाद …

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