पड़ोस की किरन की चूत चोदी

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प्रेषक : कमल …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम कमल है, जैसा कि आप सभी लोग अच्छी तरह से जानते है कि में दिल्ली का रहने वाला हूँ और आप सभी को तो पता भी होगा कि में कामुकता डॉट कॉम का कितना बड़ा चाहने वाला हूँ। अब तक मैंने बहुत सारी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लिए है, वो सभी मुझे बहुत अच्छी लगी और आज में अपनी सच्ची कहानी को सुनाने जा रहा हूँ। यह मेरे जीवन का सबसे मजेदार सेक्स अनुभव है और यह बहुत मस्त भी है। दोस्तों यह घटना मेरे साथ नवंबर 2005 में घटित हुई और यह तब की बात है, जब हमारे पड़ोस में एक नये किराएदार रहने के लिए आए। दोस्तों वो लोग दो बहनें और एक छोटा भाई और उनकी माँ भी उनके साथ ही रहती थी, बड़ी बहन का नाम नजमा और छोटी बहन का नाम किरन था। दोस्तों उन दोनों बहनों का फिगर बड़ा ही मस्त कमाल का था, इसलिए मेरी नजर हमेशा उनके गोरे बड़े आकार के बूब्स पर ही टिकी रहती और में जब अपनी छत पर बैठकर अपने पेपरों की तैयारी किया करता था, तब छोटी बहन किरन मुझे छुप छुपकर देखा करती थी। दोस्तों उस समय उसकी उम्र करीब बीस साल होगी, लेकिन उसका वो सेक्सी फिगर बड़ा ही कमाल का आकर्षक था और मेरे हिसाब से उसके बूब्स का आकार 34-28-34 होगा।

दोस्तों उसके बूब्स तो बहुत बड़े उभरे हुए थे और इसलिए उसके बूब्स को देखकर हमेशा मेरे मुहं में पानी आने लगता था और जब भी वो मटकती हुई चलती थी। तब उसके बूब्स कूल्हे हिलते थे वो देखने में बड़े मस्त लगते थे। फिर मेरी नजर हमेशा उनको घूरकर देखा करती थी और फिर धीरे धीरे में अब उसकी तरफ देखने लगा था और वो भी अब मेरी तरफ देखकर हर कभी मुस्कुरा देती थी। एक दिन शाम को मैंने थोड़ी सी हिम्मत करके उसको अपने पास बुला लिया और वो भी चली आई। अब मैंने उसको पूछा कि आपका नाम क्या है? और में उस समय अंदर से डर भी रहा था कि कहीं वो मुझसे गुस्सा ना हो जाए? लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जैसा मैंने सोचा था। फिर उसने बड़े ही प्यार से मेरी तरफ मुस्कुराकर मुझे अपना नाम किरन बता दिया और अब मैंने उसको कहा कि जैसा आपका नाम है वैसी ही आप कितनी प्यारी हो? में उसकी तारीफ करता रहा, जिनको सुनकर वो खुश होती चली गई और उसके बाद हम दोनों बहुत देर तक इधर ऊधर की बातें करते रहे। अब मैंने उसको पूछा कि क्या आपने मेरी बातों का बुरा तो नहीं माना? तब वो मुझसे कहने लगी कि नहीं ऐसी कोई भी बात नहीं है, मुझे क्यों आपकी किसी बात का बुरा लगेगा? अब मैंने उसको कहा कि इसका मतलब यह है कि अब तो हर दिन ही हमारी बात हो सकती है?

यह बात सुनकर वो कहने लगी कि हाँ जरुर मुझे आपसे बातें करने में किसी भी तरह की कोई भी आपत्ति नहीं है। फिर इस तरह से हम दोनों हर दिन ही शाम को छत पर बैठे कई घंटो तक बातें किया करते थे और हमें मौका मिलने पर हम रात को भी साथ में बैठकर हंसी मजाक इधर उधर की बातें किया करते थे। एक दिन वो मुझसे कहने लगी कि मेरे हाथ बहुत ठंडे हो रहे है और तभी मैंने उसी समय उसका हाथ पकड़ लिया और मैंने छूकर महसूस किया कि उसका वो हाथ बहुत ठंडा था और उसके हाथ को इस तरह अचानक से पकड़ने पर भी उसने मुझसे कुछ भी नहीं कहा और इसलिए अब मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ गई। फिर कुछ देर बाद मैंने उसके हाथ पर चूम लिया, लेकिन तभी उसने एक झटका देकर अपने हाथ को पीछे हटा लिया। अब मैंने उसको पूछा कि क्यों क्या हुआ, जो तुमने मेरे हाथ को इस तरह से झटक दिया? वो मुझसे कहने लगी कि कुछ नहीं उसके बाद कुछ देर बातें करके हम अपने अपने घर चले गए। फिर अगली रात को कुछ देर बातें करने के बाद मैंने हिम्मत करके उसको कहा कि में तुम्हे एक बार चूमना चाहता हूँ। अब वो मुझसे कहने लगी कि इस समय नहीं कहीं कोई हमें देख ना ले मुझे बहुत डर लगता है।

फिर मैंने उसको कहा कि रात के अँधेरे में हमे कौन देखने आएगा? चलो ठीक है फिर आज रात को करते है और इस तरह से मैंने उसी रात को उसको सबसे पहले उसके हाथ पर और फिर उसके बाद उसके चेहरे पर चूमा और तब उसने भी मेरे चेहरे पर एक चुम्मा दिया और फिर में तुरंत समझ गया कि उसकी तरफ से मुझे हाँ है और उसी समय मैंने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए, थोड़ी देर के बाद वो भी मुझे अपनी तरफ से जवाब देने लगी और फिर धीरे धीरे मेरे हाथ आगे बढ़ते हुए उसकी कमर पर चले गये। अब में उसकी कमर को कुछ देर सहलाता रहा, उसके बाद मेरा एक हाथ अब ज्यादा आगे बढ़ते हुए उसके बूब्स पर जा पहुंचा। फिर मैंने उसके बूब्स को छूकर महसूस किया कि उसके वो मस्त बड़े आकार के बूब्स बहुत नरम थे और यह मेरा पहला अनुभव था, जिसका में पूरी तरह से फायदा उठाकर मज़े ले रहा था और मेरे साथ उसको भी बड़ा मज़ा आ रहा था। तभी मैंने उसको पूछा कि क्या यह इतने नरम होते है? तब वो कहने लगी कि हाँ और क्या? लेकिन मुझे तो आज ही पहली बार पता चला है कि यह इतने मुलायम मजेदार होते है। फिर उसी समय हमे कुछ शोर सुनाई दिया और हम लोग नीचे चले गये। दोस्तों अब हम दिन ही ऐसे मज़े लेने लगे, में उसको चूमते हुए उसके बूब्स को कपड़ो के अंदर हाथ डालकर दबाने और निप्पल को भी निचोड़ने लगा था।

दोस्तों वो इन सभी कामों से इतनी गरम होकर जोश में आ जाती कि वो बस सिसकियाँ लेते हुए मुझे मज़े लेने से मना नहीं करती, मैंने उसकी ऐसी हालत कर दी थी कि उसने बहुत बार मुझे अपनी चुदाई की तरफ इशारा किया। अब हम दोनों ही किसी खास मौके का इंतज़ार कर रहे थे, जिसका फायदा उठाकर में उसकी प्यासी चूत में अपने लंड को डालकर उसकी चूत को पूरी तरह से शांत कर दूँ। एक दिन हमे वो मौका मिल ही गया, जिसका हमें इतने दिनों से इंतजार था। दोस्तों उस दिन मेरे सभी घर वाले एक शादी में दूसरे शहर में गए हुए थे और घरवालों ने दूसरे दिन तक वापस आने की बात भी मुझसे कही थी। दोस्तों में उस मौके को पाकर मन ही मन बहुत खुश था, क्योंकि मुझे उस दिन कैसे भी करके उसकी चुदाई के मज़े लेने थे और यह बात सोचकर, मैंने मिलकर उसको कहा कि आज हम दोनों के पास बहुत अच्छा मौका है, क्योंकि मेरे सभी घर वाले मेरे किसी रिश्तेदार की शादी में बाहर जा चुके है और में घर में अकेला हूँ और अब तुम जल्दी से मेरे घर आ जाओ हम आज बहुत मज़े मस्ती करेंगे। अब वो मुझसे पूछने लगी कि घर आकर क्या करना है? मैंने उसको कहा कि हम दोनों आराम से बैठकर बहुत सारी बातें करेंगे, क्योंकि हमे अकेले घर में रहने से किसी का डर भी नहीं होगा, कोई भी हमे देखने रोकने टोकने वाला नहीं है।

फिर वो मुझसे कहने लगी कि हाँ ठीक है, लेकिन मुझे अपने घर भी जाना है और इस वजह से में तुम्हारे पास ज्यादा देर नहीं रहूंगी। अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है, तुम अपनी मर्जी से जब चाहो चली जाना तुम्हे कौन रोकने वाला है? और फिर कुछ देर के बाद वो मेरे घर पर आ गई, में उसको देखकर बहुत खुश था और सबसे पहले तो हम दोनों ने आराम से बैठकर कुछ देर इधर उधर की बातें की और उसके बाद मैंने सही मौका देखकर उसके होंठो पर किस कर दिया और वो भी कुछ देर बाद गरम होना शुरू हो गई, जिसकी वजह से वो अब मुझसे लिपट गई और वो मुझे अपने गले से लगाकर मेरे अंदर पूरी तरह से डूबने लगी और उसके बूब्स भी अब मेरी छाती से दबने लगे थे और हम दोनों उस समय बहुत जोश में आ चुके थे। फिर मैंने सही मौका देखकर उसको अपनी बाहों में लेकर धीरे धीरे बेड पर लेटा दिया और उसके बाद मैंने उसकी गोरी गर्दन, उसके सुंदर गोल चेहरे पर चूमना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से वो पागल होने लगी। अब मैंने उसके बूब्स को कपड़ो के ऊपर से ही दबाना उनको मसलना शुरू कर दिया। मेरे ऐसा करने की वजह से वो भी अब धीरे धीरे पहले से ज्यादा गरम होती जा रही थी।

फिर मैंने उसकी हालत को देखकर तुरंत उसकी कमीज़ को पूरा ऊपर कर दिया और तब मैंने देखा कि उसने अपनी कमीज के नीचे काले रंग की ब्रा पहनी हुई थी और वो उसके गोरे कामुक जिस्म पर बहुत जच रही थी। दोस्तों वो काली बार उसकी सुन्दरता को और भी बढ़ा रही थी, जिसको देखकर में बिल्कुल पागल हुआ जा रहा था। अब मैंने सबसे पहले उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को चूमा और उसके बाद मैंने उस ब्रा को भी उसकी कमर पर पीछे हाथ डालकर हुक को खोलकर उतार दिया। अब उसने मेरी भी शर्ट को उतार दिया और अब मेरे सामने पहली बार उसके एकदम नंगे गोलमटोल आकर्षक बूब्स थे। दोस्तों उन पर में शुरू से ही फिदा था, में उनको हमेशा इस हालत में देखने के लिए सोचा करता था और उनको पूरा नंगा देखना मेरा एक सपना था और फिर में उसके पूरे नंगे बूब्स को देखकर बिल्कुल पागल हो गया था। अब में उसके एक बूब्स को चूसने लगा और दूसरे को अपने एक हाथ से दबाने उसका रस निचोड़ने लगा था, यह सब करने की वजह से नीचे मेरा तनकर खड़ा लंड अब उसकी चूत पर कपड़ो के ऊपर से ही छूकर चूत को महसूस करके मस्त होता रहा और अब में ऊपर से हिल रहा था और वो नीचे से। फिर में उसी समय अपने एक हाथ को उसकी चूत पर ले जाकर उसकी चूत को अपने हाथ से धीरे धीरे मसलता उसको सहलाता गया।

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फिर उसी समय मैंने छुकर महसूस किया कि उसने अपनी सलवार के नीचे पेंटी नहीं पहनी थी और वो सलवार चूत के रस से बिल्कुल गीली हो चुकी थी। फिर कुछ देर बाद ही उसने बेकाबू होकर अपनी चूत का पानी छोड़ दिया, उसके बाद वो धीरे धीरे ठंडी हो गयी और जब मैंने दोबारा से उसके बूब्स को चूसना दबाना शुरू किए, तब वो एक बार फिर से गरम होना शुरू हो गयी। अब हम दोनों पूरी तरह से जोश में आ चुके थे, तभी उसी के साथ ही मेरे घर की घंटी बज गई और उस आवाज को सुनकर हम दोनों एकदम से डर गए। अब हम दोनों ने तुरंत ही अपने कपड़े ठीक किए, उसके बाद मैंने उसको एक सुरक्षित जगह देखकर छुपा दिया और मैंने जब जाकर दरवाजे को खोलकर देखा, तब बाहर मेरा चचेरा भाई खड़ा हुआ था। फिर मैंने उसको कुछ देर अंदर बैठाकर इधर उधर की बातें करने के बाद बहाने से उसको बाहर पास की दुकान से ठंडा लाने के लिए भेज दिया और फिर अंदर आकर मैंने किरन को उसके घर पर भेज दिया। उस दिन मुझे बहुत दुख हुआ कि में उसके साथ कुछ भी ना कर सका, लेकिन उसके बूब्स ने मुझे वो पूरा मज़ा दे दिया था, उस तरह दो चार दिन गुज़र गए और हम लोग कोई भी अच्छा मौका मिलने पर बातें भी कर लेते थे। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब हम एक दूसरे को चूम भी लिया करते थे, क्योंकि अब मौसम बहुत बदल चुका था और इसलिए हमे वैसे मौके कुछ कम ही मिला करते थे। फिर एक बार मुझे पता चला कि उसके घर पर दो दिनों के लिए कोई भी नहीं था, क्योंकि उसकी मम्मी और बहन उनके गाँव किसी काम से चली गई और इस वजह से किरन और उसका छोटा भाई घर पर अकेले थे। फिर जब किरन ने मुझसे मिलकर यह सभी बातें मुझे बताई, तब मेरी खुशी का कोई भी ठिकाना ना रहा और फिर मैंने उसको कहा कि में आज ही रात को करीब 1.:00 बजे के बाद ऊपर छत पर आ जाऊंगा और तुम मुझे वहीं पर मिलना। अब उसने मुझसे कहा कि हाँ ठीक है, इतना कहकर वो अपने घर चली गई। फिर जब में ठीक समय छत पर गया, तब मैंने देखा कि वो मेरा वहां पर पहले से ही पहुंचकर इंतजार कर रही थी, में उसको देखकर और वो मुझे देखकर बहुत खुश हो रही। फिर पहले तो बहुत देर तक हम दोनों बहुत सारी बातें करते रहे और वो मुझसे कह रही थी कि वो कुछ दिनों से देखकर महसूस कर रही है कि में अब उसको समय नहीं देता हूँ, में अपने कामो में बहुत व्यस्त रहने लगा हूँ।

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फिर मैंने उसको समझाया कि अब मेरे घरवालों को हमारे मिलने और मेरे इधर उधर घंटो तक गायब रहने पर कुछ शक हो गया है, इसलिए मुझे थोड़ी सी अहतियात रखना सही है और इसलिए में तुमसे दुरी बनाकर उसको दिखा रहा था जिसकी वजह से वो हम पर अपनी नजर रखना छोड़ दे। दोस्तों वैसे ही कुछ देर बातें करने के बाद मैंने अब उसको कहा कि मुझे अब बहुत सर्दी लग रही है और वो भी मुझसे कहने लगी कि हाँ सर्दी तो अब मुझे भी थोड़ी थोड़ी महसूस हो रही है। अब मैंने उसको कहा कि अब हम दोनों ऐसा करते है कि हम तुम्हारे कमरे में जाकर वहीं बैठकर आराम से बातें करते है, यहाँ तो कोई भी इधर उधर दूसरी छत पर से आ सकता है। अब वो मेरी बात को सुनकर सहमत होकर मुझसे कहने लगी कि हाँ ठीक है और उसके बाद में उसके घर चला गया और हम दोनों जाकर सीधा किरन के कमरे में बैठ गये। फिर पहले हम दोनों ने बहुत बातें की और फिर उसके बाद मैंने उसका एक हाथ पकड़ लिया, वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज इस तरह से मेरे साथ तुम कुछ भी ना करो, मुझे कुछ कुछ होने लगता है। अब मैंने उसको कहा कि में ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा, लेकिन मुझे अब बड़ी सर्दी लग रही है, इसलिए तुम मुझे थोड़ा सा गरम ही कर दो और फिर मैंने उसको यह बात कहते हुए उसको अपने गले से लगा लिया।

अब वो भी अब मेरा पूरा साथ देने लगी थी और इसलिए धीरे धीरे मेरे हाथ अब आगे बढ़ते हुए उसके बूब्स पर पहुंच गये और अब में उसकी कमीज़ के अंदर से भी अपने हाथ को डालकर उसके मज़े लेने लगा था। अब वो गरम होकर अपने मुहं से सस्शह्ह्ह आहह्ह्ह्ह की आवाज़ें निकालने लगी, में उसके गरम बूब्स को सहलाने लगा था, जिसकी वजह से उसकी निप्पल तनकर खड़ी होने लगी। तभी उसने एकदम जोश में आकर अपनी कमीज़ को ऊपर उठा दिया और उसके बाद बिना देर किए अपनी ब्रा को ऊपर करके उसने मेरे सामने अपने बूब्स को बाहर निकाल दिया। अब में उसका जोश देखकर उसके बूब्स की निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा और साथ ही में उस बूब्स को अपनी पूरी ताकत लगाकर दबाने भी लगा था और उस समय मेरा एक हाथ उसकी कमर पर था। फिर उसके बाद मेरा वो हाथ नीचे जा पहुंचा और मैंने हाथ लगाकर महसूस किया कि उसकी चूत उस समय एकदम गीली हो चुकी थी और हम दोनों बहुत देर उसी तरह एक दूसरे को चूमते प्यार करते हुए गरम करते रहे। दोस्तों में उसके साथ बहुत आराम से और भरपूर मज़ा लेकर उसकी पहली चुदाई का पूरा मज़ा लेना चाहता था और इसलिए मैंने पहले उसको पूरी तरह से गरम करके पागल किया। फिर उसके बाद में अपने एक हाथ को उसकी सलवार के अंदर ले जाकर उसकी गरम कामुक चूत पर फेरने लगा था।

फिर ठीक उसी के बाद मैंने अपनी एक ऊँगली को उसकी चूत के अंदर डालना शुरू किया, जिसकी वजह से वो अब आअहह ऊहह्ह्ह्ह स्सीईईइ करने लगी और उसी समय मैंने उसको अपना पांच इंच का लंड उसके हाथ में पकड़ा दिया। अब वो मेरे लंड को पकड़कर धीरे धीरे ऊपर नीचे करनी लगी, शायद उसको ऐसा करने में बड़ा मज़ा आ रहा था। दोस्तों उसकी चूत छोटी और टाइट भी बहुत थी, इसलिए वो मेरे मोटे लंबे लंड को छुकर डरते हुए मुझसे कहने लगी कि में इसको अपने अंदर कैसे ले सकती हूँ? में इससे मर ही जाउंगी, यह मुझे बहुत दर्द देगा और कहीं में इसकी वजह से गर्भवती हो गई तो क्या होगा? अब में उसको बड़े प्यार से समझा रहा था कि तुम इन सभी बातों की बिल्कुल भी चिंता मत करो, ऐसा कुछ भी नहीं होगा, में बहुत धीरे धीरे करूंगा जिसकी वजह से तुम्हे दर्द कम होगा और रही बात गर्भवती होने की उसका भी एक पक्का इलाज मेरे पास है, लेकिन वो मेरी सभी बातें सुनने के बाद भी मुझसे मना कर रही थी। अब मुझे उस पर तरस आ गया और मैंने उसको कहा कि चलो रहने दो इसी तरह हम थोड़ा सा प्यार कर लेते है और हम दोनों उसके बाद उसी तरह से चूमते हुए और ऊपर से ही प्यार करते रहे। फिर मैंने उसको पूछा क्यों अब तो तुम खुश हो ना? मैंने ऐसा कुछ भी नहीं किया, में सिर्फ़ तुम्हारी मर्ज़ी का काम कर रहा हूँ?

अब वो मुझसे कहने लगी कि में अगर ना चाहूँ तो तुम कुछ भी नहीं कर सकते थे? तब मुझे उसकी वो बात सुनकर एकदम से जोश आ गया और मैंने उसको कहा कि अगर में चाहूँ तो अभी भी तुम्हारे साथ बहुत कुछ कर सकता हूँ। फिर वो मुझसे कहने लगी कि ऐसा हो ही नहीं सकता तुम मेरी मर्जी के बिना मेरे साथ कुछ भी नहीं कर सकते? और फिर क्या था? सबसे पहले मैंने उसके दोनों हाथ कसकर पकड़े और अपने एक हाथ से मैंने उसकी सलवार उतारी और फिर अपना लंड पेंट की चेन खोलकर बाहर निकाला, उसके बाद उसकी नंगी रसभरी चूत के गुलाबी होंठो पर रख दिया। फिर उसके बाद में अपने लंड से उसकी चूत के दाने को सहलाते हुए उसको पूछने लगा हाँ अब तुम बोलो में क्या करूं तुम्हारे साथ? अब वो मुझसे कहने लगी कि कुछ नहीं प्लीज तुम अब मुझे छोड़ दो प्लीज में तो तुमसे बस ऐसे ही थोड़ा सा मजाक कर रही थी, मेरे कहने का वो मतलब नहीं था शायद तुम्हे मेरी बातों का बुरा लग गया ऊह्ह प्लीज तुम मुझे माफ कर दो। फिर मैंने उसको कहा कि अब नहीं अब बहुत देर हो चुकी है, में तुम्हारी चुदाई किए बिना तुम्हे अब नहीं छोड़ सकता। फिर इतना कहकर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखकर थोड़ा सा ज़ोर लगा दिया और वो दर्द की वजह से ज़ोर से चिल्लाने लगी, उसको बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन अब तो सब खत्म था।

अब मुझे उसकी कोई भी चीखने की आवाज सुनाई नहीं दे रही थी, में बहुत जोश में था। फिर मैंने उसी समय अपने एक हाथ को उसके मुहं पर रख दिया और फिर से ज़ोर लगाना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से वो दर्द से मचलने लगी क्योंकि उसको बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन मैंने दो झटकों में ही अपना पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। अब उस वजह से वो बहुत ज़ोर से तड़प उठी, वो कुछ देर तक मुझसे छूटने की लगातार कोशिश करती रही। फिर मैंने उसका दर्द देखकर अपने लंड को हिलाना छोड़ दिया, उसके बाद में थोड़ी देर उसी तरह उसके ऊपर पड़ा रहा। फिर जब कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि अब उसको दर्द कम मज़ा आने लगा था, इसलिए वो भी अब नीचे से अपने कूल्हों को हिलाने लगी थी। अब में भी उसके मुहं से अपने हाथ को हटाकर उसको धक्के लगाने लगा था, वो अब जोश में आकर सिसकियाँ लेने लगी थी और साथ ही साथ वो मुझसे कहने लगी, उफफ्फ्फ्फ़ हाँ उह्ह्ह्ह और ज़ोर से करो आह्ह्ह्ह हाँ और ज़ोर से वाह इस खेल में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है, हमने पहले ऐसा क्यों नहीं किया? तुम अब तक कहाँ थे आज तुमने मुझे बहुत मस्त मज़ा दिया है आहह्ह्ह ऊओह्ह्ह हाँ ज़ोर से धक्के लगाओ, हाँ पूरा अंदर तक जाने दो।

फिर में भी उसकी जोश भरी बातें सुनकर अपने पूरे ज़ोर से धक्के लगा रहा था, जिसकी वजह से उसका पूरा जिस्म हिलने लगा था। फिर कुछ देर लगातार धक्के खाने के बाद अब उसकी चूत ने एक बार फिर से पानी छोड़ दिया था, लेकिन में अभी भी बहुत गरम था और कुछ देर बाद वो एक बार फिर से नीचे से अपने कूल्हों को हिलाने लगी और अब वो पहले से भी ज्यादा गरम जोश में थी और इसलिए हम दोनों की तरफ से बहुत तेज धक्के लग रहे थे। फिर धक्के देने के साथ साथ में उसके एक बूब्स को चूस भी रहा था और दूसरे बूब्स को अपने एक हाथ से दबा भी रहा था, जोश की वजह से उसकी दोनों निप्पल तनकर खड़ी थी। अब एक बार फिर से वो पानी छोड़ने वाली थी और में भी अब झड़ने के करीब ही था और फिर उसने दो चार धक्कों के बाद पानी छोड़ ही दिया। फिर में थोड़ी देर के लिए रुक गया, करीब दो मिनट के बाद मेरा भी अब बर्दाश्त से बाहर हो गया और उसी समय मैंने जल्दी से अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकालकर अपना सारा गरम गरम वीर्य उसके पेट पर छोड़ दिया जो सरकता हुआ उसके पूरे पेट पर फेल गया। अब मैंने उसके चेहरे की तरफ देखा वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी, उसकी हंसी से मुझे उसकी संतुष्टि का पता चल चुका था और कुछ देर हम उसी तरह से एक दूसरे की बाहों में एकदम चिपककर पड़े रहे।

फिर उसके बाद मैंने उठकर अपने कपड़े पहने और किरण ने भी अपने कपड़े पहन लिए और उसके बाद जब में उसके कमरे से बाहर जाने लगा, तभी अचानक से उसने मेरा एक हाथ पकड़ लिया और फिर वो मुझसे बोली कि जाने की इतनी भी क्या जल्दी है? जाते जाते एक बार तुम मुझे अपने गले से तो लगा लो और वैसे भी सभी काम तो तुमने अब तक अपनी मर्जी से कर लिए मेरी भी तो एक बार इच्छा पूरी कर दो। फिर कुछ देर हम एक दूसरे की बाहों में चिपककर खड़े रहे और उसके बाद में वापस अपने घर आ गया। दोस्तों यह था मेरा वो सच्चा सेक्स अनुभव जिसमें मैंने अपनी पड़ोसन की कुंवारी चूत को चोदकर उसकी चूत का भोसड़ा बनाकर उसको चुदाई के असली मज़े और वो पूरा सुख दे दिया, जिसको उसने पहले कभी भी महसूस नहीं किया था, लेकिन मैंने उसको पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया जिससे वो भी बहुत खुश थी ।।

धन्यवाद …

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