पड़ोसन की बदबूदार चूत चाटनी पड़ी

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प्रेषक : सौरभ …

हैल्लो दोस्तों, में सौरभ आप सभी की सेवा में एक बार फिर से अपनी नई सच्ची घटना को आप तक पहुँचाने आया हूँ। दोस्तों एक बार मुंबई में हमारे पड़ोस में एक नये किराएदार रहने के लिए आए हुए थे, उस मकान में सिर्फ़ दो ही सदस्य थे, एक माँ और एक उनका बेटा। माँ करीब 40 साल की एक विधवा औरत थी और उनका लड़का जिसका नाम हरीश था, वो करीब बीस साल का था और दोस्तों हरीश की माँ पुणे के एक सरकारी स्कूल में टीचर थी और उनका तबादला अभी कुछ दिनों पहले मुम्बई में हुआ था, इसलिए उन्होंने मेरे बिल्कुल पास का मकान किराए पर ले लिया था। उनका मकान मेरे मकान के एकदम पास होने की वजह से मेरी दोस्ती बहुत ही कम दिनों में हरीश से हो गयी थी और जब भी में अपने दफ़्तर से आता या मेरी छुट्टी होती थी, तो हरीश पूरे दिन भर मेरे घर पर ही मेरे साथ रहता था और वो मेरे साथ टी.वी. देखता रहता था, क्योंकि उनके घर में टी.वी. नहीं थी, वैसे तो हरीश भी पुणे के एक अच्छे बड़े कॉलेज में पड़ता था और यहाँ पर वो अपनी माँ के साथ उसकी कुछ दिनों की छुट्टियाँ बिताने आया था। दोस्तों हरीश की माँ रंग में थोड़ी सी साँवली थी, लेकिन उनकी आँखे, नाक और होंठ बहुत सेक्सी थे, जिसकी वजह से वो बहुत अच्छी लगती और उनका पूरा जिस्म भरा हुआ था, जिस कारण उनके कूल्हे और बूब्स भी बड़े आकर्षित थे और मुझे कुछ दिनों बाद पता चला कि हरीश के पिताजी का देहांत भी अभी तीन साल पहले ही एक दुर्घटना में हुआ था। हरीश जब भी मेरे घर पर होता तो उसको बुलाने जब उसकी माँ आती थी, तब वो भी कुछ देर बैठकर बातें करती या फिर वो भी वहीं पर बैठकर कुछ देर टी.वी. देखने लगती थी, जिसकी वजह से मेरा भी उनसे बातें कभी कभी हंसी मजाक करना अब शुरू हो चुका था। फिर कुछ दिनों बाद कॉलेज की छुट्टियाँ ख़तम होते ही हरीश दोबारा पूना चला गया और वो जाने से पहले मुझसे कहने लगा कि सौरभ तुम मेरी माँ का पूरा ख्याल रखना और में जाकर उसको ट्रेन में बैठाकर आ गया, जिस कारण उसकी माँ मुझे एक बहुत भला इंसान समझने लगी थी और में उस समय हरीश की माँ को आंटी कहकर बुलाता था।

में जब भी अपने ऑफिस जाता तो में आंटी जी को अपने घर की चाबी देकर चला जाता और में जाने से पहले उनको कहता था कि अगर आप बोर हो रही हो तो निसंकोच मेरे कमरे का ताला खोलकर आप टी.वी. देख लेना और किसी चीज की जरूरत पड़े तो भी आप उसको काम में ले सकती हो, इसलिए वो अक्सर मेरे घर पर ना रहने या रहने पर भी बिना किसी संकोच के आ जाया करती थी और वो टी.वी. देख लिया करती थी। हम लोग बहुत ही कम समय में बहुत अच्छी तरह से एक दूसरे से घुल मिल गये थे और वो अक्सर मेरे लिए कुछ ना कुछ अपने घर से जरुर बनाकर लाती थी। दोस्तों उस दिन शनिवार का दिन था और मेरे ऑफिस की छुट्टी थी तो जल्दी सुबह दरवाजे पर लगी घंटी को बजाकर आंटी जी ने आकर मुझे उठाया और फिर उन्होंने मुझे चाय बनाकर दी। फिर मैंने उठकर पानी पीकर दोबारा उनके सामने आकर बैठकर में चाय पीने लगा, उनके हाथों का स्वाद बहुत अच्छा था, जैसे उनके हाथों में कोई जादू था, उनके हाथों से बनी हर एक चीज मुझे बहुत स्वादिष्ट लगती थी, जिसकी वजह से में उनकी हमेशा तारीफ करता रहता था, जिसकी वजह से वो मुझसे बड़ी खुश रहती और हम दोनों की बहुत ही कम समय में बड़ी अच्छी तरह से बनने लगी थी और फिर उस दिन भी वो मुझसे बोली कि सौरभ आज दोपहर का खाना तुम मेरे यहाँ पर ही खा लेना तो मैंने उनसे हाँ कह दिया और उसके बाद वो चली गई और में नहा धोकर फ्रेश हुए और में समय बिताने के लिए टी.वी. पर फिल्म देखने लगा। करीब 1:30 बजे वो मुझे खाना खाने के लिए बुलाने आ गई और में उनके साथ उनके घर पर चला गया। मैंने वहां पर जाकर खाना खाया और फिर में खाना खाने के कुछ देर बाद अपने घर पर आकर लेट गया, मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई और में गहरी नींद में सो गया। करीब तीन बजे आंटी ने दरवाजे पर लगी घंटी बजाई। मैंने उठकर दरवाजा खोल दिया और देखा तो बाहर आंटी खड़ी हुई थी।

फिर वो मुझसे बोली कि सौरभ तुम मुझे माफ़ करना मैंने तुम्हें नींद से उठाया, वो क्या है कि में घर में अकेली बोर हो रही हूँ, क्या में यहाँ पर कुछ देर रुककर टी.वी. देख सकती हूँ अगर तुम्हें इसमें कोई परेशानी ना हो तो? फिर मैंने उनसे मुस्कुराते हुए कहा कि आंटी जी यह भी क्या कोई पूछने की बात है? आप तो यहाँ पर कभी भी आकर टी.वी. देख सकती हो, मुझे आपके आने से कभी कोई भी परेशानी नहीं होती है, मुझे तो आपकी मदद करना हमेशा बहुत अच्छा लगता है और फिर मैंने टी.वी. को चालू कर दिया। उसके बाद वो टी.वी. के रिमोट को पकड़कर फिल्म देखने लगी। फिर मैंने उन्हें एक तकिया लाकर दे दिया और मैंने उनसे कहा कि आंटी जी आप आराम से सोफे पर तकिया लगाकर लेटकर यह सब देख सकती है, मुझे उसममें कोई भी आपत्ति नहीं है, इसको भी आप अपना ही घर समझो। दोस्तों उस समय आंटी जी मेक्सी पहने हुई थी, वो अब मेरे कहने पर सोफे पर तकिया लगाकर लेटकर फिल्म देखने लगी और में भी ज़मीन पर चटाई बिछाकर दूसरे तकिए पर सर रखकर लेट गया और फिल्म देखने लगा। कुछ देर बाद वो फिल्म मुझे अच्छी नहीं लगी थी, इसलिए ना जाने कब मुझे उसको देखते देखते नींद आ गई और में दोबारा सो गया। करीब पांच बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि टी.वी. अब भी चालू थी, लेकिन आंटी जी सोफे पर अपने दोनों पैर घुटनो के बल ऊँचे करके लेटी हुई थी और उन्हें भी अब तक नींद आ चुकी थी और उनके दोनों पैर ऊपर होने की वजह से मुझे उनकी नंगी चूत दिखाई दी, क्योंकि उन्होंने अपने कपड़ो के नीचे ना जाने क्यों पेंटी वगेरा कुछ नहीं पहना हुआ था? अब में उनकी चूत को देखकर एकदम पागल सा हो गया और मेरा लंड तुरंत तनकर खड़ा हो गया। मुझे अपनी आखों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उनकी गोरी गोरी जांघे उनके बीच में उनकी वो उभरी हुई चूत मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी और मेरा लंड अब जोश में आ चुका था और में उस अनुभव को किसी भी शब्दों में लिखकर नहीं बता सकता कि मेरे अंदर क्या चल रहा था और में क्या महसूस कर रहा था? तभी में कुछ देर बाद उठकर बाथरूम में चला गया और में पेशाब करके कुछ देर बाद वापस अपनी जगह पर आकर सो गया, लेकिन मेरी नजर बार बार आंटी की चूत की तरफ जा रही थी और कुछ देर बाद में आंटी की तरफ से हलचल को देखकर अपना मुहं दूसरी तरफ करके सो जाने का नाटक करने लगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर करीब 6 बजे आंटी जी ने मुझे उठाया और उन्होंने मुझे चाय बनाकर पीने के लिए दी और मैंने उठकर चाय पी और वो भी कुछ देर बाद चाय पीकर अपने घर पर चली गयी और जब वो जाने लगी तो मैंने उनसे कहा कि आंटी जी में अब बाज़ार जा रहा हूँ और तुम खाना मत बनाना, में बाज़ार से आपका और मेरा खाना पेक करवाकर ले आउंगा। फिर वो बोली कि हाँ ठीक है और वो उसके बाद अपने घर पर चली गयी और में बाजार चला गया और में एक बोतल विस्की लेकर आया और साथ ही साथ में रात के खाने के लिए पराठे, पुलाव, पालक, पनीर और चना मसाला की सब्जी ले आया। अपने घर पर आकर मैंने टी.वी. को चालू किया और इंग्लीश फिल्म देखने लगा और उसी समय मैंने अपने लिए पेग भी तैयार किया ही था कि तभी दरवाजे की घंटी बजी और मैंने उठकर दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि दरवाजे के बाहर आंटी खड़ी हुई थी, वो मुझसे बोली कि सौरभ मुझे आज तुम्हारे कहने पर खाना नहीं बनाना था और मेरे पास और कोई काम ही नहीं था, इसलिए अब में घर में बैठे बैठे बोर हो रही थी तो तुम्हें आता हुआ देखकर में यहाँ पर चली आई, क्यों मैंने ठीक किया ना? तो मैंने उनसे कहा कि आपने बिल्कुल अच्छा किया, क्योंकि में भी घर पर अकेला बोर हो रहा था और अब आप आ गई है तो हम दोनों साथ में टी.वी. देखेंगे और बातें भी करेंगे और मेरी बात सुनकर वो अंदर आकर सोफे पर बैठ गयी। दोस्तों जब दरवाजे पर घंटी बजी थी, तब उसी समय मैंने विस्की का गिलास उठाकर अपने बेडरूम में रख दिया था। अब थोड़ी देर तक में और आंटी फिल्म देख रहे थे कि तभी मैंने उनसे पूछा आंटी जी अगर आप बुरा ना मानो तो क्या में आपके सामने विस्की पी सकता हूँ?

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फिर वो बोली कि हाँ ठीक है मुझे तुम्हारे पीने से कोई भी आपत्ति नहीं है, तुम पी सकते हो, लेकिन ज़्यादा मत पीना और फिर उनका वो जवाब सुनकर में बहुत खुश हुआ और मैंने उनको कहा कि आंटी जी हर छुट्टी के दिन में केवल चार पेग जरुर पीता हूँ और बाकी के दिन तो में हाथ भी नहीं लगाता। फिर वो मुस्कुराकर मुझसे कहने लगी कि हाँ ठीक है, तुम बड़े समझदार हो इसलिए ऐसे काम करते हो और अब में तुरंत अपने बेडरूम में जाकर विस्की का अपना पहले से तैयार रखा गिलास ले आया और फिर में उनके पास में ही बैठकर धीरे धीरे पीने लगा। तभी वो अचानक से उठकर किचन में चली गई और वो मेरे लिए पापड़ ले आई और अब में विस्की को पीने के साथ साथ पापड़ भी खाने लगा और वो फिल्म देखती रही। फिर करीब 9:30 बजे वो फिल्म खत्म हो गई, लेकिन तब तक मुझे कुछ ज्यादा ही नशा हो चुका था। अब आंटी से मैंने खाना लगाने के लिए कहा तो वो उठकर रसोईघर में चली गई और उन्होंने हम दोनों के लिए खाना लगा दिया, लेकिन ज्यादा नशा होने की वजह से में खाना ना खा सका और आंटी ने मेरी उस हालत को बहुत अच्छी तरह से समझ लिया था, इसलिए वो खाना खाने के बाद मेरे साथ वहीं पर रुकने के लिए बोलने लगी। उन्होंने मुझसे कहा कि मैंने तुम्हें कहा था कि तुम थोड़ा हिसाब से ही पीना, लेकिन तुमने मेरी बात नहीं मानी। फिर में उनसे माफ़ी मांगने लगा तो वो हाँ ठीक है कहकर मुझे अपनी बाहों का सहारा देकर बेड पर लेटाने लगी और में लेट गया और वो सोफे पर जाकर बैठ गई और टी.वी. देखने लगी और ना जाने कब मुझे नींद आ गई और जब दो घंटे बाद मेरी आँख खुली तो मैंने उनको पानी पिलाने के लिए कहा तो वो अब भी टी.वी. देख रही थी और उन्होंने मुझसे मेरे नशे के बारे में पूछा। फिर मैंने कहा कि अब में पहले से ठीक हूँ, लेकिन मुझे अब बहुत सर्दी लगने लगी है। फिर वो बोली कि अब तुम कुछ ओढ़ लो तुम्हारी सारी सर्दी खतम हो जाएगी और अब में अपने घर पर जाकर सो जाती हूँ, लेकिन मैंने उनको नाटक करते हुए साफ मना किया और मैंने उनसे कहा कि आप भी मेरे पास ही सो जाए और अगर आप कहे तो में जमीन पर चटाई बिछाकर भी सो सकता हूँ। फिर वो मेरे कहने पर मेरे साथ बेड पर लेट गई, क्योंकि उनको अभी भी मेरी हालत में वैसा कोई सुधार नहीं नजर आ रहा था, क्योंकि में जानबूझ कर नाटक जो कर रहा था।

अब हम दोनों एक ही बेड पर एक ही कंबल में थे। मुझे उनके बदन की गरमी महसूस हो रही थी और में उनसे बातें करने लगा। कुछ देर बाद मैंने आंटी से बड़ी हिम्मत करके कहा कि अगर वो मुझे अपने से लिपटा लें तो मेरी सर्दी कम हो जाएगी। दोस्तों मेरी इस बात पर आंटी ने गुस्से में आकर मुझे एक कसकर थप्पड़ रसीद कर दिया और फिर वो तुरंत उठकर मुझे बुरा भला अलग कहने लगी, लेकिन तभी में ज्यादा नाटक करने लगा और अब मेरी हालत उनको और ज्यादा खराब होती नजर आ रही थी और मेरी आखें बंद होने लगी थी। तभी उस जालिम औरत को मेरे ऊपर थोड़ा सा रहम आ गया और उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे पास आजा और जैसे ही में उससे लिपटा तो मेरे बदन में 440 वॉल्ट का करंट का झटका लगने लगा और थोड़ी देर बाद जब मेरा नशा कम हुआ तो मुझे मस्ती चड़ने लगी। मैंने उनकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया, लेकिन अभी भी उस पर कोई खास असर नहीं हुआ था, लेकिन फिर भी में अपना काम करता रहा और वो अपनी दोनों आखें बंद करके लेटी हुई थी, जब मैंने उनके बूब्स को कुछ देर सहलाने उनको चूमने के बाद दबाया, जो शायद मेरे जोश में होने की वजह से कुछ ज्यादा ज़ोर से दब गये थे, जिसकी वजह से उसके मुहं से आह्ह्हह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ की आवाज निकल गई।

तभी उन्होंने मुझसे कहा कि प्लीज़ यह सब मत करो मुझे कुछ अजीब सा होने लगा, चलो अब दूर हटो मुझसे, लेकिन में अब कहाँ सुनने वाला था, क्योंकि मुझे इस दिन का तो बहुत दिनों से बड़ा इंतजार था, इसलिए मैंने उनसे कहा कि प्लीज़ अब आप मुझे बिल्कुल भी ना रोको, मुझे कुछ देर और करने दो और मुझे बहुत अच्छी तरह से पता था कि उनको भी अब मेरे यह सब करने की वजह से बड़ा मज़ा आ रहा था, वो भी मुझसे यही सब कामों की उम्मीद कर रही थी, वो मुझे हल्का सा नाटक दिखा रही थी, इसलिए में उनके मना करने पर भी लगा रहा, लेकिन जब मैंने उनके होंठो पर अपने होंठ रखे तो उनको एक अजीब सा करंट का झटका सा लगा। उसके बाद तो वो जैसे बिल्कुल पागल हो गई थी और मैंने सही मौका देखकर तुरंत उनकी कमीज़ को उतार दिया। तब मैंने देखा कि आंटी ने सफेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी और उसके बड़े आकार के सुंदर बड़े आकर्षक बूब्स अब उस छोटी सी ब्रा से बाहर आने के लिए बहुत बैताब हो रहे थे। फिर मैंने उनको अपनी बाहों में भरकर अपने दोनों हाथों को उनकी कमर के पीछे ले जाकर उनकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और ब्रा को उतार दिया, जिसकी वजह से उनके दोनों कबूतर ब्रा के पिंजरे से एकदम आजाद होकर मस्ती करने लगे और जब मेरी नज़र उनके बूब्स पर पड़ी तो में देखता ही रह गया, वाह क्या मस्त बूब्स थे और उन पर गहरे भूरे रंग की निप्पल बहुत गज़ब लग रहे थे।

फिर उसके बाद मैंने एक एक करके उनके बूब्स को अपने मुहं में लेकर चूसना दबाना शुरू किया, जिसकी वजह से हम दोनों को मज़े के साथ साथ अब पूरा जोश भी आ चुका था। फिर आंटी ने भी कुछ देर बाद पूरी तरह से जोश में आकर अह्ह्ह्ह आईईईइ हाँ और ज़ोर से चूसो इन्हें तुम आज इनका पूरा रस निचोड़ दो सिसकियाँ लेते हुए मेरा सर को पकड़कर अपने मुहं पर दबा दिया और उन्होंने मुझे एक ज़ोरदार किस किया। उसके बाद उसने एक झटके में जल्दी से मेरे सारे कपड़े अंडरवियर को भी नीचे उतार दिया और जैसे ही आंटी ने मेरे लंड को अपनी चकित नजरों से देखा तो उनके होश उड़ गए और फिर उन्होंने लंड को अपने हाथ में लेकर मुझसे कहा कि आज बड़े दिनों के बाद में किसी का लंड देख रही हूँ, इसकी एक झलक पाने को में पिछले बहुत सालों से तरस रही हूँ और आज तुम इससे मेरी पूरी प्यास को बुझा दो प्लीज।

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फिर मैंने आंटी की सलवार को उतारने के लिये नाड़े को पकड़ा ही था, तभी अचानक से उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा कि अभी नहीं पहले तुम मेरी चूत को सलवार के ऊपर से सहलाओ। फिर मैंने आंटी से कहा और तुरंत वैसा ही किया, अभी में उनकी चूत को सहला ही रहा था कि आंटी ने अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया और मैंने भी उनका इशारा समझकर तुरंत एक झटका देकर सलवार को नीचे उतार दिया। अब वो सिर्फ सफेद कलर की पेंटी में थी। उसके बाद आंटी ने अपनी पेंटी को खुद ही उतार दिया। दोस्तों अब वो और में पूरी तरह से एकदम नंगे थे। फिर आंटी ने मुझसे कहा कि अब तुम मेरी चूत को चाटो और आज इसको वो मज़ा दे दो, जिसके लिए में अब तक पागल हुई आ रही हूँ। फिर जब में जोश में अपने होश खोकर अपना मुहं चूत के पास लेकर जाकर झुका, तभी वहाँ से मुझे एक बड़ी अजीब सी बदबू आ रही थी, जिसको सूंघकर मैंने अपने मुहं को चूत के पास से तुरंत हटा लिया और मैंने उनसे कहा कि नहीं में इसको नहीं चाट सकता। तभी आंटी ने मुझे धमकी देते हुए कहा कि अगर तुम इसको नहीं चाटोगे तो में तुमसे अपनी चुदाई नहीं करवाउंगी, तुम्हें मुझे चोदने से पहले इसको भी चाटना पड़ेगा।

फिर मैंने उनकी यह बात सुनकर हिम्मत करके अपने मन को मारकर चूत को चाटना शुरू कर दिया, लेकिन मुझे वो सब बड़ा अजीब सा लग रहा था। फिर मैंने महसूस किया कि मेरे चाटने के कुछ देर बाद उनके मुहं से आह्ह्ह्हहह सस्स्स्स्स्स्सस्स उफ्फ्फफ्फ्फ़ श्स्स्स्सस्स की आवाज़ें निकलने लगी थी, वो मेरी जीभ को अपनी चूत पर छू जाने की वजह से पूरी तरह से जोश में आ चुकी और वो अब अपनी चूत को जबरदस्ती मेरे मुहं पर अपने पूरे जोश के साथ दबा रही थी और में अपनी जीभ को चूत के अंदर बाहर करके चूत की चुदाई करने लगा था। करीब पांच, सात मिनट चूसने चाटने के बाद उनकी चूत से एक जोरदार पिचकारी निकली और उनका पूरा बदन तेज़ी से हरकत करने लगा और मैंने महसूस किया कि उनकी चूत से बड़ी मात्रा में पानी बाहर निकल रहा था और उसके कुछ देर बाद वो बिल्कुल ठंडी पड़ गई और मैंने सही मौका पाकर तुरंत ऊपर आकर आंटी के मुहं के पास अपना लंड ले जाकर सटा दिया, जिसको वो अपने मुहं में लेकर चूसने लगी और वो किसी अनुभवी की तरह मेरा लंड बहुत धीरे धीरे पूरा अंदर और बाहर निकालकर लंड के टोपे पर अपनी जीभ को घुमाकर चाटती। उसके बाद दोबारा पूरा अंदर ले लेती, जिसकी वजह से में बिल्कुल पागल हो चुका था, लेकिन में भी बहुत ज्यादा जोश में होने की वजह से करीब दो चार मिनट के बाद ही झड़ गया और मैंने अपना पूरा वीर्य उनके मुहं में निकाल दिया, जिसको आंटी ने बड़े चाव से चाट चाटकर चूसकर पूरा का पूरा गटक गई और लंड को पूरा चमका दिया।

अब हम दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे। फिर कुछ देर एक दूसरे के बदन से खेलने के बाद हम दोनों को एक बार फिर से मस्ती चड़ने लगी और आंटी ने मेरा लंड दोबारा अपने मुहं में लेकर चूसा, जिससे मेरा लंड बहुत कम समय में पहले से भी ज्यादा टाईट हो गया और आंटी अपनी दोनों जांघे खोलकर मेरा लंड चूस रही थी, जिसकी वजह से मुझे उनकी चूत का छेद अंदर तक पूरा साफ साफ नज़र आ रहा था। अब मैंने अपना लंड आंटी के मुहं से बाहर निकालकर उनकी चूत के मुहं पर रखा ही था कि आंटी ने झट से मेरा लंड अपने एक हाथ से पकड़कर अपनी चूत के खुले हुए होंठो पर रखकर अपनी तरफ से चूत को आगे बढ़ा दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उनकी गीली चूत के अंदर पूरा का पूरा चला गया और तब उनके मुहं से आस्स्स्स्स्स्शह उईईईईइ माँ मर गई की आवाज़ निकली और अब आंटी ने कुछ देर रुकने के बाद मुझसे धीरे धीरे आगे पीछे होने के लिए कहा। फिर में भी उनके कहने पर तुरंत आगे पीछे होने लगा था। अब मेरा लंड उनकी चूत की पूरी गहराई में जाकर डुबकी लगाकर वापस बाहर आ जाता और हम दोनों को ऐसा करने पर बहुत अच्छा लग रहा था और वो अपना सर कभी इधर तो कभी उधर घुमा रही थी और वो उसके साथ साथ आह्ह्हहह उफफ्फ्फ्फ़ वाह मज़ा आ गया, तुम बहुत अच्छी तरह से चुदाई करते हो, हाँ पूरा अंदर तक जाने दो की आवाजे भी निकाल रही थी।

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अब मैंने भी उनकी बातें सुनकर पूरी तरह से जोश में आकर अपने धक्कों की रफ़्तार को बढ़ा दिया था, जिसकी वजह से लंड पूरा अंदर चला जाता और उनकी जांघो से टकराने की वजह से अब थप ठप फच फच की आवाज भी आने लगी, क्योंकि उनकी चूत का पानी बाहर तक बहने लगा था और वो भी मेरे साथ साथ अपनी चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी और अब वो मुझसे कह रही थी कि आज तुम मेरी चूत को फाड़ डालो, इसको चोद चोदकर इसका भोसड़ा बना दो, मुझे उनकी यह बातें सुनकर और भी ज्यादा जोश आ रहा था। करीब 10-15 मिनट तक लगातार ताबड़तोड़ धक्के देने के बाद मैंने आंटी से कहा कि अब मेरा वीर्य बाहर आने वाला है और में अब किसी भी समय झड़ सकता हूँ।

फिर उन्होंने मुझसे कहा कि हाँ में भी अब झड़ने वाली हूँ, तुम अपना लंड मेरी चूत से बाहर मत निकालना, तुम पूरा वीर्य मेरी चूत के अंदर ही डाल देना, क्योंकि मेरी चूत बहुत दिनों से प्यासी है, मुझे उस मज़े को अपनी चूत के अंदर महसूस करना है और फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए और मैंने अपना पूरा वीर्य उसकी एक एक बूंद को आंटी की चूत गिरा दिया, जिसकी वजह से वो मुझे उनके चेहरे से बिल्कुल शांत और एकदम संतुष्ट नजर आई और हम दोनों बहुत खुश थे। उसके बाद भी में, आंटी बहुत देर तक एक दूसरे से लिपटे रहे और मेरा लंड अब भी उनकी चूत में था। दोस्तों उस रात को हम दोनों ने करीब तीन बार सेक्स के मज़े लिए और मैंने उनको हर बार बहुत जमकर चोदा और उसके बाद हम दोनों लिपटकर सो गए और जब मेरी आँख खुली तो सुबह हो चुकी थी। मैंने आंटी को बहुत प्यार से चूमते हुए उठाया और तभी वो मेरे गले लग गई, उन्होंने भी मुझे चूमना शुरू कर दिया और उस दिन के बाद जब भी हमारा दिल करता हम सेक्स कर लेते है। और मैंने उनको बहुत बार कभी दिन में तो कभी रात भर चोदा और उन्होंने मेरा हमेशा पूरा पूरा साथ दिया और कभी किसी बात के लिए मना नहीं किया, क्योंकि अब हम दोनों को जो भी चाहिए था, वो सब मिल चुका था और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे ।।

धन्यवाद …

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