पड़ोसन की बेटी ने मजा दिया

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प्रेषक : कल्प …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम कल्प है और में गुजरात का रहने वाला हूँ और में भी आप लोगों की तरह सेक्सी कहानियों को पढ़ने का शौक रखता हूँ। में पिछले कुछ सालों से कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेता आ रहा हूँ और ऐसा करने में मुझे बहुत मज़ा आता है और वैसे तो मुझे चुदाई करना बहुत अच्छा लगता है और मुझे उसका एक बहुत अच्छा अनुभव भी है। एक दिन ऐसे ही इन कहानियों को पढ़कर मेरे मन में भी अपनी एक सच्ची घटना को लिखकर आप सभी तक पहुँचाने के बारे में विचार आया और तब मैंने मन ही मन में सोचा कि क्यों ना में भी अपनी उस घटना को लिखकर आप लोगों तक पहुंचा दूँ और आज में वैसा ही करने जा रहा हूँ। दोस्तों यह मेरी कामुकता डॉट कॉम पर पहली कहानी है और यह मेरी बिल्कुल सच्ची कहानी है।

दोस्तों आज से एक महीने पहले की बात है तब हमारे घर के सामने वाले घर में एक परिवार रहता है जिसमें तीन लड़कियां है, सबसे बड़ी लड़की तो कुछ इतनी ख़ास नहीं है, लेकिन उससे छोटी वाली लड़की बहुत ही सुंदर है और वो मुझे थोड़ी सी शरारती भी लगती थी और वो हर कभी मेरे घर पर आ जाती थी, लेकिन मेरे मन में उसके लिए ऐसी कोई भी गलत बात नहीं थी, इसलिए में उससे बहुत अच्छी तरह बातें उसकी बातों का जवाब दिया करता था। उसका मेरे लिए व्यहार अभी कुछ दिनों से मुझे कुछ ज्यादा ही बदला बदला सा लगने लगा था।

दोस्तों वो लड़की अभी कुछ दिन से मुझे देखकर हर कभी मुस्कुरा देती थी और वो जब भी मुझसे बातें करती तो उसके बात करने का तरीका बड़ा ही अलग सा होता था उसका मुझसे हंस हंसकर बातें करना मेरी समझ में अब एक अलग ही दिशा की तरफ इशारा करके मुझे उसकी तरफ अब बढ़ने पर मजबूर कर रहा था और मैंने जब पहली बार उसकी तरफ ध्यान से देखना शुरू किया तो मुझे उसके बूब्स कुछ बड़े से लगे और तब मैंने मन ही मन में अहसास किया कि वो अब उम्र में बड़ी होने के साथ साथ अपने बदन से भी बड़ी होने लगी है और उसके ऊपर अब उसकी चढ़ती जवानी का असर दिखने लगा था। उसका यह सब मेरे साथ अब करना बिल्कुल स्वभाविक था और अब मेरा मन उसके साथ सेक्स करने का भी करने लगा था, क्योंकि उससे पहले मेरे मन में उसके लिए वो विचार बिल्कुल भी नहीं थे और अब मैंने आगे बढ़ने के बारे में सोच लिया था। अब मैंने उस दिन मन ही मन में सोचा कि ऐसा क्या किया जाए कि यह अपने आप मेरे साथ अपनी चुदाई के मज़े लेने के लिए तैयार हो जाए? एक दिन में अपने घर पर बिल्कुल अकेला ही था कि वो एक फिल्म की सीडी के लिए मेरे पास आ गई, वैसे तो उसका मेरे घर पर हर कभी आना जाना लगा रहता था, लेकिन आज उसके मन की बातें मुझे उसके चेहरे से साफ साफ पता चल रही थी और अब वो मुझसे कहने लगी कि मुझे विवाह फिल्म देखनी है क्या आप मुझे लाकर दोगे? तो मैंने उससे कहा कि में कल तुम्हे वो फिल्म की सीडी जरुर लाकर दे दूँगा और फिर मैंने उसको अपने पास रखी हुई कुछ दूसरी फिल्म की सीडी दिखाकर उससे कहा कि इनमें से तुम्हे कोई फिल्म चाहिए तो तुम देख लो अगर तुम्हे पसंद आए तो तुम उनको अपने साथ लेकर भी जा सकती हो। अब वो मेरे कहने पर कुर्सी पर बैठ गयी और वो सभी सीडी देखने लगी। दोस्तों में अक्सर जब भी कामुकता डॉट कॉम की सेक्सी कहानी को पढ़ता हूँ तो में उसका एक प्रिंट भी निकालकर अपने घर ले आता हूँ और फिर में रात को बहुत आराम से उसके मज़े लेते हुए उसको पढ़ता हूँ। फिर उस दिन भी रात को जो कहानी मैंने पढ़ी थी उसका प्रिंट पेपर मैंने पहले से ही फ़्रिज़ पर रख दिया था और में कुछ देर बाद बाथरूम में चला गया, लेकिन जब में वापस आया तो मैंने देखा कि उसके एक हाथ में गुरु फिल्म की सीडी थी और एक हाथ में उस कहानी का पेपर भी था और वो उसको पढ़ रही थी। फिर कुछ देर बाद जब उसको इस बात का अहसास हुआ कि कोई है तो उसने वो पेपर तुरंत वहीं रख दिया और अब वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और बोली कि यह सीडी में ले जा रही हूँ और वो मेरी तरफ देखकर हंसती हुई चली गयी।

फिर मैंने सोचा कि इसने तो जब उस पेपर को अपने हाथ में लिया है तो यह कहानी भी जरुर उसने पढ़कर देखी होगी और फिर में मन ही मन में सोचने लगा कि यही एक बिल्कुल सही तरीका है इसको अपने काम के लिए तैयार करने का और अब में हर दिन एक कहानी का प्रिंट निकालकर लाता और उसको में जानबूझ कर जब वो घर में बिल्कुल अकेली होती तो में उसके घर के दरवाजे पर रख देता और फिर में कुछ देर के बाद देखता तो वो पेपर वहां पर नहीं होता था और अब मुझे पूरा पूरा विश्वास हो गया था कि वो जरुर उन सभी कहानियों को पढ़ती है।

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एक दिन मेरे घर पर मेरे बड़े भैया आए हुए थे और वो कुछ देर बाद मेरी मम्मी से बोले कि आप मेरे साथ चलो, मैंने अपना एक घर लिया है और उसको देखकर आप मुझे बताए कि वो कैसा है क्योंकि कुछ दिनों बाद मुझे उसका मुहूर्त भी करना है? तब मेरी मम्मी तो हंसी ख़ुशी उनके साथ चली गई और वो मुझसे भी कुछ देर बाद वहां पर आने के लिए बोल गई, लेकिन में अपने काम की वजह से वहां पर नहीं गया और एक दिन मेरे ऑफिस की छुट्टी थी इसलिए में उस दिन घर पर अकेला ही था और मेरी अच्छी किस्मत से उस दिन उसकी माँ भी बाज़ार गयी हुई थी, इसलिए वो भी अपने घर में एकदम अकेली थी। तो में फिल्म देख रहा था और एक कमसिन कुंवारी लड़की की कहानी का पेपर उसी जगह पर रखा हुआ था, तभी अचानक से वो आ गयी और वो मुझसे पूछने लगी कि कौन सी फिल्म देख रहे हो? तब मैंने उससे कहा कि मुझे इसका नाम तो पता नहीं है हाँ, लेकिन यह बहुत मजेदार फिल्म है तुम भी बैठो ना और अब वो भी मेरे कहने पर बैठकर फिल्म देखने लगी। फिर मैंने देखा कि उसकी नज़र बार बार उसी पेपर पर पड़ रही थी जो फ्रिज के ऊपर रखा हुआ था, तभी कुछ देर मेरे मोबाईल की घंटी बज गई और में उस पर बात करता हुआ उसी समय उस कमरे से बाहर चला गया और करीब दस मिनट के बाद जब में वापस अंदर आया तो मैंने देखा कि वो अब उस फ्रिज के पास खड़ी हुई थी और उस समय मेरी तरफ उसकी पीठ थी। में धीरे से उसके पास चला गया, तो मैंने देखा कि वो उस कहानी को बहुत ध्यान से पढ़ रही थी और में कुछ देर तक उसके पीछे ही चुपचाप खड़ा होकर उसको देखता रहा। फिर मैंने कुछ आवाज़ की जिसकी वजह से उसको लगे कि में अब रूम में आ गया हूँ और तभी वो जल्दी से कुर्सी पर जाकर दोबारा बैठ गयी, लेकिन उस कहानी का पेपर अभी भी उसके हाथ में ही था। फिर में भी अब बेड पर बैठ गया और फिल्म देखने लगा, जिसकी वजह से उसको यह लगे कि मैंने कुछ भी नहीं देखा और कुछ देर बाद मैंने उसके हाथ में वो पेपर देखकर उससे कहा कि यह क्या है? और इससे पहले वो उस पेपर को अपने पीछे करती मैंने उसके हाथ से वो ले लिया और उसको खोलकर देख लिया। फिर मैंने उसकी तरफ देखा तो वो अब बहुत डरकर एकदम चुप बैठकर मेरी तरफ देख रही थी, तब मैंने उससे पूछा कि क्या तुम्हे यह कहानी अच्छी लगती है? लेकिन वो कुछ नहीं बोली। फिर मैंने उससे कहा कि तुम अभी छोटी हो और यह सब तुम्हे अभी नहीं पढ़ना चाहिए, तब वो बोली कि में इतनी छोटी भी नहीं हूँ, में सब कुछ समझती हूँ। फिर मैंने उससे कहा कि अगर तुम सब कुछ समझती हो तो यह बताओ कि यह कहानी पढ़ती हो तो तुम्हे यह कैसी लगती है? अब वो कहने लगी कि यह मुझे पढ़ने में बहुत अच्छी लगती है, मैंने उससे पूछा कि बस अच्छा ही? तुम्हे और कुछ नहीं लगता इसको पढ़कर? वो अब बोली कि नहीं और कुछ नहीं। तब मैंने उससे कहा कि तुम क्या ऐसा काम करके महसूस करना पसंद करोगी? तब वो बोली के नहीं मुझे ऐसा करने में बहुत डर लगता है, मैंने कहा कि अगर तुम इस काम में इतना डरोगी तो कभी भी तुम इसके वो मज़े नहीं ले सकती और फिर में तुम्हारे साथ हूँ और कुछ ग़लत नहीं होने दूँगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब वो बोली कि हाँ ठीक है, लेकिन कैसे करना है यह सब? तो मैंने उससे पूछा कि तुम सबसे पहले मुझे यह बात बताओ कि तुम्हारी माँ कहाँ गई है और वो कब तक वापस आ जाएँगी? वो कहने लगी कि वो अभी कुछ देर पहले बाज़ार गई है और शायद वो दो घंटे के बाद वापस आ जाएगी। फिर उसके मुहं से यह बात सुनकर मैंने खुश होकर तुरंत उठकर दरवाजा बंद कर दिया और फिर मैंने उसको अब बेड पर बैठने के लिए कहा तो उसने उस समय टी-शर्ट और जींस पहनी हुई थी, सबसे पहले तो मैंने उससे कहा कि टी-शर्ट को उतार दो तब वो मुझसे बोली कि नहीं मुझे शरम आती है और तब मैंने ही उसके कपड़ो को खोलना शुरू किया और सबसे पहले तो मैंने उसके होंठो को किस किया, जिसमें उसने भी मेरा पूरा पूरा साथ दिया और करीब दस मिनट तक हमारा वो चूमना चलता रहा और फिर उसको किस करते करते मैंने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और में बूब्स को दबाने मसलने लगा, जिसकी वजह से उसको अब कुछ कुछ मज़ा आने लगा था। फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को उतार दिया और उसके बूब्स आकार में ज्यादा बड़े नहीं थे और उसके निप्पल गुलाबी रंग के थे जो अब तनकर खड़े हो चुके थे, लेकिन थे वो बहुत मस्त आकर्षक। में अब उसके बूब्स को सक करने लगा और अब शायद उसको मेरे साथ और भी ज्यादा मज़ा आने लगा था, इसलिए वो लेट गयी और में उसके बूब्स को चूसने लगा और धीरे से उसकी जींस का बटन भी मैंने खोल दिया और मैंने अपना एक हाथ उसकी पेंटी के ऊपर से ही जींस के अंदर डाल दिया और फिर में उसकी चूत को अपने हाथ से सहलाने लगा।

फिर मैंने महसूस किया कि वो अब जोश में आकर गरम हो गई थी और मैंने बिना देर किए उसकी जींस को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने पेंटी में थी और उसकी आखों में एक अजीब सा नशा था ऐसा जैसे उसने बहुत विस्की पी रखी हो। फिर मैंने उसकी पेंटी को भी उतार दिया और अब मैंने देखा कि उसकी चूत बहुत ही छोटी थी और चूत पर हल्के भूरे रंग के बहुत छोटे छोटे बाल भी थे, लेकिन उसकी चूत बिल्कुल गुलाबी थी। अब मैंने अपना एक हाथ जब जैसे ही उसकी चूत पर रखा तो वो जैसे बिल्कुल पागल सी हो गयी और में उसकी चूत के दाने को अपनी एक ऊँगली से सहलाने लगा था, जिसकी वजह से वो अब जोश में आकर बिल्कुल बिन पानी की मछली की तरह मचलने लगी थी और वो अपने दोनों हाथों से अपने बूब्स को दबाने उनको सहलाने लगी थी और साथ ही साथ उसके मुहं से आह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ की आवाजें भी अब आने लगी थी। फिर मैंने उसकी मदहोशी को समझकर तुरंत उसकी चूत पर अपनी जीभ को रख दिया और में उसकी चूत के नरम गुलाबी रसभरे होंठो को किस करने लगा। वो तो मेरे ऐसा करने से जैसे बिल्कुल पागल ही हो गयी थी और उसकी दोनों आखें अब बंद थी और उसके मुहं से आईईईई स्स्सईईइ आह्ह्हह की वो आवाज़ निकलकर अब पहले से तेज हो चुकी थी और अपने बूब्स को दबाने की वो गती अब पहले से तेज हो गयी थी, जिसका मतलब बिल्कुल साफ था कि वो अब पूरी तरह से गरम होकर जोश में आ चुकी है और उसका वो गोरा बदन मुझे भी बहुत कामुक बना रहा था।

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फिर मैंने अपनी एक उंगली को उसकी चूत के अंदर डाल दिया, जिसकी वजह से वो एकदम तड़प गयी क्योंकि उसकी चूत एक तो कुंवारी थी और दूसरी उसका आकार भी छोटा था इसलिए उसके साथ ऐसा हुआ और कुछ देर लगातार मेरी ऊँगली उसकी चूत के अंदर जाते ही उसने अब अपने दोनों कूल्हों को ऊपर उठा दिया और अब में अपनी ऊँगली को धीरे धीरे उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा था, जिसकी वजह से मुझे कुछ देर बाद उसकी गरम चूत अब थोड़ी गीली चिपचिपी सी महसूस होने लगी, जिसकी वजह से मेरी ऊँगली अब बहुत आसानी से उसकी चूत के अंदर फिसलती हुई जा रही थी और में लगातार करीब दस मिनट तक अपनी ऊँगली को उसकी चूत में डालता रहा और वो अब मेरे साथ पूरे पूरे मज़े लेने लगी थी। अब हम दोनों खुश होकर अपना काम करते रहे, जिसमें हम दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था। तभी उसी समय मुझे बाहर से एक कार के रुकने की आवाज़ आई, तो मैंने उसको वैसे ही छोड़कर खिड़की से बाहर झांककर देखा कि कौन है? तब मैंने देखा कि उसकी माँ अब वापस आ चुकी थी, लेकिन वो तो इन सभी बातों से बिल्कुल बेखबर बेड पर वैसे ही लेटी हुई अब बिन पानी की मछली की तरह वो तड़प रही थी। फिर मैंने उसके पास में आकर उसके कान में कहा कि तुम्हारी माँ आ गई है, तब वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज आप थोड़ा जल्दी से अपना काम करके मुझे ठंडा कर दो, मुझसे अब रहा नहीं जाता आह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़। अब मैंने अपनी एक उंगली को उसकी चूत में डालकर उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया और में उसके होंठो को चूसने लगा।

फिर कुछ ही देर में वो अब झड़ चुकी थी और उसकी चूत से पानी बाहर निकलकर बहने लगा था जिसकी वजह से वो अब धीरे धीरे ठंडी हो गई। फिर उसने जल्दी से उठकर अपने कपड़े पहन लिए और उसने जाते समय मुझे एक बार किस किया और वो मुझसे बोली कि आज तक में इस मज़े मस्ती के बारे में इतना नहीं जान पाई थी कि यह अनुभव कैसा होता है, लेकिन आज आपने मुझे यह मज़े देकर बहुत कुछ सिखाने के साथ साथ बड़े मस्त मज़े भी दिए है, लेकिन आप ऐसे ही रह गए जल्द ही में अपने दोबारा यह सब करने का प्रोग्राम एक बार फिर से कोई अच्छा मौका देखकर बनाती हूँ तब आपको भी में वो मज़े अपनी तरफ से दूंगी जो आज आप मुझसे लेना चाहते थे, लेकिन ले ना सके और फिर वो मुझसे इतना कहकर वापस अपने घर चली गई और में उसी समय बाथरूम में जाकर अपना लंड हिलाने लगा। मैंने उसके नाम की मुठ मारकर अपने लंड को उस दिन शांत किया। अब में उसकी अगली चुदाई के बारे में विचार बनाने लगा वैसे तो उसको भी अब मेरे लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाने की बहुत जल्दी थी, क्योंकि चुदाई की वो आग अब हम दोनों के जिस्म में एक बराबर लगी थी, क्योंकि उसको अब मैंने बहुत बार मौका देखकर पकड़कर उसके बूब्स को दबाना उसको कई बार चूमने के साथ साथ पूरी तरह से गरम करके जोश में लाकर उसको चुदाई के लिए उकसा दिया था, इसलिए वो भी हर बार मेरे साथ यह सब करके खुश रहती और अपनी चुदाई के लिए ठीक समय और जगह के बारे में अपने विचार वो मुझे कभी भी बता देती थी ।।

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धन्यवाद …

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