पड़ोसन की चुदाई की शुभारम्भ

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प्रेषक : विक्की …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विक्की है और में वर्धा का रहने वाला हूँ। आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को अपनी एक सच्ची कहानी, मेरा सेक्स अनुभव सुनाने आया हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह आप लोगों को जरुर पसंद आएगी। दोस्तों यह बात उन दिनों की है, जब में 19 साल का था और में उस समय एक कॉलेज में पढ़ता था और उन दिनों मेरा लंड किसी भी छोटी छोटी बात पर बहुत ज्यादा उठता था और इसलिए में तब किसी ना किसी को चोदने के विचार अपने मन में बनाता रहता था। फिर उस समय मेरे पड़ोस में एक मस्त सेक्सी आंटी रहती थी, जिसका नाम सरला था और उसकी सुन्दरता उसके गोरे गदराए बदन से हमेशा झलकती थी और वो दिखने में ऐसी लगती कि मानो कि सेक्स की देवी आपके सामने खड़ी हो। दोस्तों उसको देखकर मुझे हर दम लगता था कि वो ही है जो मेरी सेक्स की प्यास को बुझा सकती है और इसलिए में हमेशा उसकी मेरे साथ चुदाई के सपने देखा करता था। दोस्तों वो भी अपने मन में मेरे साथ कुछ ऐसा ही करने की इच्छा रखती थी, क्योंकि वो हमेशा मुझसे हंस हंसकर बातें किया करती और कभी गलती से मेरा हाथ उनको छू जाता, लेकिन वो मुझसे कुछ ना कहती। फिर में उसके बूब्स को घूर घूरकर देखा करता और तब भी वो मुझसे कुछ नहीं कहती वो बस मेरी तरफ हमेशा मुस्कुरा देती।

दोस्तों माफ करना में आपको बताना भूल गया कि उनकी एक लड़की भी है, वो भी दिखने में अपनी माँ की तरह मस्त हॉट माल लगती है, लेकिन वो उम्र में थोड़ी छोटी जरुर है फिर भी बड़ी कामुक लगती है। दोस्तों वो दोनों माँ बेटी ही घर में अकेली ही रहती थी और अब आप सोच रहे होंगे कि उन आंटी के पति कहाँ गये? क्योंकि वो एक ट्रक ड्राइवर है इसलिए वो महीने महीने भर अपने घर पर नहीं आते है और हाँ अब में आप लोगो को उनके घर के बारे में भी बता देता हूँ। उनका घर बिल्कुल मेरे घर के पास वाला है और मेरे कमरे को ही लगकर उनका बाथरूम है जो कच्ची ईटो का है और वो उनके घर के बिल्कुल पीछे वाले हिस्से में बना हुआ है। वो दोपहर का समय था में अपने बेड पर लेटा हुआ था और तभी वो आंटी शक्कर मांगने के लिए हमारे घर पर आ गई और उस समय मेरे घर पर कोई ना होने की वजह से वो सीधे मेरे कमरे में आकर मेरे बेड पर बैठ गई और फिर वो मेरे सर के बालों के ऊपर अपना एक हाथ घुमाने लगी। फिर मैंने अपनी आँखों को खोलकर देखा कि उनकी गांड मेरे मुहं के ठीक सामने थी और मैंने भी सही मौका देखकर धीरे से उनकी गांड को चूम लिया और उन्हे इस बात का पता भी नहीं चला।

फिर मैंने कुछ देर बाद बिस्तर से उठकर रसोई से लाकर उन्हे शक्कर दी, तब उन्होंने मेरे गाल पर चुम्मा करके मुझसे धन्यवाद कहा और फिर वो मुझे अपनी सेक्सी अदाए दिखाती हुई मुझे अपनी तरफ आकर्षित करती हुई अपने घर पर चली गई। अब मेरे लंड ने भी अंदर ही अंदर उनकी चूत को सलामी दी और फिर मुझे उसकी तरफ आगे बढ़ने और उसकी चुदाई करने का कुछ ज्यादा ही मन करने लगा था और अब इस बात को मैंने अपने मन में ठान लिया था कि अब मुझे कैसे भी करके मुझे अपनी आंटी की चुदाई करके अपने लंड को शांत करना है। फिर उसी रात को मैंने एक विचार बनाया और दूसरे दिन उस विचार के हिसाब से मैंने उसके बाथरूम की एक ईट को थोड़ा सा बाहर निकालकर उस जगह मेरे अंदर झांककर देखने के लिए एक छोटा सा छेद बना लिया था। फिर जैसे ही वो नहाने के लिए अपने उस बाथरूम के अंदर गई तो मैंने भी सही मौका पाकर अपनी आँखों को उस छेद पर लगा दिया। अब वो अंदर आकर नहाने के लिए धीरे धीरे अपने एक एक कपड़े उतार रही थी और फिर मैंने देखा कि कुछ देर बाद वो मेरे सामने बाथरूम में ब्रा और पेंटी में खड़ी थी। दोस्तों में उसके वो ब्रा से बाहर निकलते हुए बड़े आकार के गोरे बूब्स को देखकर बड़ा चकित था।

फिर बूब्स को देखकर मेरा तो लंड तुरंत तनकर खड़ा हो गया और उसके बाद जो कुछ हुआ उसको तो देखकर में बिल्कुल ही दंग रह गया। अब उसने अपनी ब्रा को खोलकर वो अपने दोनों हाथों से अपने दोनों बूब्स को दबाने लगी और आहे भरने लगी उसके मुहं से आहह उउउहह सिसकियों की आवाज आने लगी और फिर कुछ देर बाद उसने अपनी पेंटी को भी निकाल फेंका। दोस्तों में आप सभी को किसी भी शब्दों में नहीं बता सकता कि उस सेक्सी मनमोहक द्रश्य को देखकर मेरा हाल क्या हो रहा था? आप मान लो कि किसी भूके शेर को अपना शिकार दिख गया हो, लेकिन वो उस समय किसी पिंजरे में बंद हो उसको खा ना सके, ठीक मेरी हालत भी ऐसी ही हो रही थी और उससे भी ज्यादा हालत मेरे लंड की खराब हो रही थी। फिर उसने मेरे देखते ही देखते अपने एक हाथ की दो उँगलियों को अपनी चूत में डाल दिया और वो अब धीरे धीरे अपनी उँगलियों को अंदर बाहर करने लगी और वो अपने एक हाथ से अपने बूब्स को भी दबा रही थी। फिर उस सेक्सी द्रश्य और उसकी हालत को देखकर मुझे ऐसा लगा कि शायद उसने भी बहुत दिनों से सेक्स नहीं किया था, शायद इसलिए वो अपनी चूत में ऊँगली डालकर अपनी चूत को कुछ आराम दे रही थी।

अब मैंने मन ही मन में सोच लिया था कि आंटी की में उस काम में मदद ज़रूर करूँगा और में उसकी चूत की खुलजी को अपने लंड से जरुर मिटा दूंगा और में यह बात सोचकर बहुत खुश था। फिर उस दिन रात को बहुत ज़ोर ज़ोर से बादल गरज रहे थे और बिजलियाँ भी चमक रही थी और कुछ देर बाद हल्की सी बारिश भी शुरू हो गई थी। फिर आंटी बिगड़ता हुआ डरावना मौसम देखकर बहुत डर गई और इसलिए उसने मुझे अपने घर पर सोने के लिए बुला लिया। अब में अंदर से बहुत खुश था और में अपने घर से अपने कुछ जरूरत के सामान लेकर आंटी के घर पर सोने चला गया, आंटी उस समय फिल्म देख रही थी और में भी उनके पास कुर्सी पर बैठकर फिल्म देखने लगा। फिर उस समय उनकी बेटी डरकर रोने लगी, आंटी ने उसको अपनी गोद में लेकर वो उसको सुलाने की कोशिश करने लगी और उस वजह से उनके बूब्स बाहर निकालकर झांकने लगे। अब में आंटी को अपनी खा जाने वाली नजर से घूर घूरकर देखता ही रह गया और जैसे ही उसने मेरी तरफ देखा में दोबारा फिल्म देखने का नाटक करने लगा। फिर थोड़ी देर के बाद उसने अपने बेटी को लेटा दिया और उन्होंने एक गोली खा ली, मैंने जब उससे पूछा कि यह गोली आपने क्यों खाई? उन्होंने कहा कि यह नींद की गोली है इसके बिना मुझे नींद नहीं आती और अब वो अपनी बेटी के साथ पलंग पर लेट गई और में सोफे पर लेट गया।

फिर कुछ देर के बाद मैंने देखा कि वो अब गहरी नींद में सो रही थी, लेकिन मुझे अब भी नींद नहीं आ रही थी, मेरी आँखों के सामने तो वो बाथरूम वाली घटना ही बार बार घूम रही थी। फिर में थोड़ी सी हिम्मत करके उसके पास में जाकर बैठ गया और बड़ी हिम्मत से मैंने उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके बूब्स को सहला दिया, लेकिन उसकी तरफ से कोई भी हलचल नहीं हुई। अब उस वजह से में बिल्कुल निडर हो गया और धीरे से में उसकी नाभि को चूमने लगा और अपने एक हाथ से में उसकी साड़ी को ऊपर करके उसकी गोरी भरी हुई जांघो को सहलाने लगा, उन पर अपना हाथ घुमाने लगा और चूमने भी लगा। फिर मैंने कुछ देर बाद सही मौका देखकर अपना एक हाथ उसकी पेंटी में डाल दिया और अब में उसकी चूत की गरमी को महसूस करने लगा, लेकिन तब भी उसकी तरफ से कोई भी हलचल नहीं हुई। अब मैंने उसकी पेंटी को नीचे कर दिया, जिसकी वजह से दोस्तों अब मेरे सामने वो उभरी हुई प्यासी चूत थी जो आज सुबह में दो फुट की दूरी से देख रहा था। अब उसको देखकर में अपने होश खो बैठा में तुरंत नीचे झुककर उसकी रसभरी चूत को चाटने लगा।

दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि उसका स्वाद बड़ा ही मस्त कमाल का था और फिर मैंने कुछ देर अपनी जीभ को घुमाने के बाद अब अपनी दो उँगलियों को उसकी चूत में डाल दिया और में धीरे धीरे उनको अंदर बाहर करने लगा। फिर उसी के साथ में अपने एक हाथ से उसके ब्लाउज के बटन को खोलकर उसके बूब्स को भी दबाने लगा, करीब दस मिनट तक हमारे बीच यह सब ऐसे ही चलता रहा। तभी मुझे ऐसा लगा कि वो अब जागने वाली है और में तुरंत सोफे पर जाकर लेट गया और ना जाने कब मुझे नींद भी आ गई। फिर जब दूसरे दिन सुबह में उठा तब उसने मेरे बालों पर अपने एक हाथ को घुमाकर मुझे एक हल्की सी मुस्कान दी, लेकिन में समझ नहीं सका कि इसका क्या मतलब था? और में अपने घर पर आकर सोचने लगा कि शायद उसको यह बात पता तो नहीं चल गई कि कल रात को में उसके साथ सेक्स करना चाह रहा था? और उसकी वो सेक्सी मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि वो भी मुझसे अब अपनी चुदाई करवाना चाहती है। अब इस वजह से मेरी हिम्मत और ज्यादा बढ़ गई और फिर मैंने मन ही मन सोच लिया था कि आज रात को में जरुर उसकी जमकर अच्छी तरह से चुदाई करूँगा, उसकी और मेरी हम दोनों की प्यास को में बुझा दूंगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब तो में सिर्फ़ बड़ी बेसब्री से रात होने का इंतजार कर रहा था, क्योंकि मुझे अब अपने लंड को कैसी भी शांत करना था। फिर हर रोज की तरह में आज भी आंटी के घर में सोने चला गया, वो उस समय भी टीवी देख रही थी और में भी उसके पास में बैठकर टीवी देखने लगा और उसकी बेटी उस समय पहले से ही सो रही थी। फिर करीब रात के 11 बज रहे थे और अब बाहर बारिश भी ज्यादा ज़ोर से शुरू हो गई थी। तभी अचानक से एक बिजली चमकी और वो उस जोरदार आवाज की वजह से डरकर मुझसे लिपट गई और तब मैंने उसके बड़े आकार के बूब्स को अपनी छाती पर महसूस किया। अब वो बूब्स तेज चलती सांसो की वजह से ऊपर नीचे हो रहे थे और में उनके मज़े ले रहा था। फिर वो मेरी तरफ हंसती मुस्कुराती हुई मुझसे दूर हट गई और हम वापस टीवी देखने लगे। फिर उसने मुझसे पूछा क्यों विक्की कल रात को मेरे ब्लाउज के बटन तुमने ही खोले थे ना? अब मैंने कहा कि हाँ आंटी मैंने ही आपके ब्लाउज को खोलकर आपके बूब्स को दबाए भी थे और में यह बात भी बहुत अच्छी तरह से जानता हूँ कि आप भी सेक्स की बहुत भूखी हो।

अब आपको भी किसी से अपनी चुदाई करवाने की जरूरत महसूस होने लगी है और इसलिए प्लीज आंटी आप मुझसे ही आपकी चुदाई करवा लो, में आपकी बहुत अच्छी तरह चुदाई करूंगा और में आपको अपनी तरफ से एकदम खुश कर दूंगा, प्लीज आप मुझे एक बार यह मौका देकर देखो। दोस्तों आंटी से यह शब्द कहते ही उन्होंने मुझे अपने पास लेकर एक जोरदार मेरे होंठो पर चुम्मा किया और करीब पांच मिनट तक वो मेरे होंठो को चूसती रही। फिर में भी उसके नरम गुलाबी होंठो को चूसकर उनके मज़े लेता रहा। फिर कुछ देर बाद उसने मुझसे कहा कि तुम मुझे सिर्फ़ सरला कहो और इतना कहकर उसने मुझे हल्का सा धक्का देकर पलंग पर गिरा दिया और वो मेरी शर्ट को उतारकर मेरी छाती को चूमने लगी। फिर वो मुझे चूमते हुए अब मेरी पेंट के ऊपर से ही मेरे लंड को चूमने लगी थी, जिसकी वजह से में बहुत गरम होने लगा था। अब मैंने आंटी से पूछा क्या आप मेरे लंड के दर्शन नहीं करना चाहेगी? वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर शरमा गई और मैंने उसी समय अपनी पेंट को उतार दिया और मेरा तनकर खड़ा लंड तुरंत बाहर आकर उसकी चूत को सलामी देने लगा। अब वो मेरा लंबा मोटा लंड देखकर बहुत हैरान हो गई और वो चकित होकर अपने मुहं पर एक हाथ रखकर मुझसे कहने लगी कि हाए राम इतना बड़ा लंड तो मेरे पति का भी नहीं है?

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यह बात कहकर वो मेरे लंड को तुरंत झपटकर ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी और अपने मुहं में लेकर चूसने लगी। अब में उसके सामने पूरा नंगा हो गया था, लेकिन वो अभी भी पूरे कपड़ो में थी। अब मैंने उसकी साड़ी को निकालकर दूर फेंक दिया और अब में उसकी पीठ के पीछे से उसके दोनों बूब्स को दबाने लगा और फिर मैंने उसके ब्लाउज को भी उतारकर फेंक दिया। फिर उसको मैंने पलंग पर उल्टा लेटा दिया और में उसके ऊपर चड़ गया, में उसकी गोरी नंगी पीठ को चूमने लगा और अब मेरा लंड उसके पेटीकोट को खोलकर उसकी गांड में जाने की कोशिश कर रहा था। फिर मैंने ज़रा सी भी देर ना करते हुए तुरंत उसका पेटीकोट भी अब उतार फेंका, तब मैंने देखा कि वो गुलाबी रंग की पेंटी और काले रंग की ब्रा पहने हुए थी। अब वो सेक्सी द्रश्य देखकर मुझे अब मेरे लंड को रोकना कुछ समझाना बड़ा ही मुश्किल हो गया था और इसलिए में जोश में आकर उसको अब पागलों की तरह चूमने लगा था, जिसकी वजह से वो मदहोश होती जा रही थी। अब में उसको पूरी नंगी देखना चाहता था और इसलिए मैंने उसके दोनों बूब्स के बीच में अपना एक हाथ डाला और उसकी ब्रा को एक जोरदार झटका देकर उतारकर फेंक दिया और उसी साथ में उसकी पेंटी को भी मैंने फाड़कर फेक दिया था और में उसकी आजाद चूत को चूमने लगा वो अब तक बहुत गरम हो चुकी थी।

अब मैंने महसूस किया कि उसकी चूत भी अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वो मेरे सर के बालों के ऊपर से अपना हाथ घुमाकर मुझसे कहने लगी। अब देर मत करो में तुम्हारी रंडी बनने के लिए बड़ी बेताब हो रही हूँ, मेरे विक्की राजा अब तुम मुझे चोदकर मेरी इस बरसों की प्यास को बुझा दो में कब से तुम्हारी इस चुदाई का इंतजार कर रही थी और आज मुझे यह मौका मिला है, तुम आज मुझे बहुत जमकर अच्छी तरह से चोदो। दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनते ही मेरा लंड अब तनकर आसमान की तरफ देखने लगा और में अपने लंड को उसकी गांड पर रखकर धीरे धीरे रगड़ने लगा। अब वो मुझसे बोली कि विक्की आज तक मेरी गांड किसी ने नहीं मारी तुम आज इसका उद्घाटन अपने लंड से कर दो और आज तुम इसको फोड़कर रख दो। फिर उसके मुहं से यह बात सुनकर हम कुत्तो के आसन में आ गये और में अपने लंड को उसकी खुली गांड में धक्का मारकर अपना पूरा लंड अंदर डालकर उसकी जमकर गांड मारने लगा। फिर करीब पंद्रह मिनट लगातार उसकी गांड मारने के बाद मैंने देखा कि उसकी गांड अब पूरी तरह से लाल हो चुकी थी और वो पागलों की तरह दर्द की वजह से चिल्लाने लगी आहहहह् उईईईईईइ माँ मर गयी।

अब वो मेरे धक्कों से पागल हुई जा रही थी और कहने लगी आज तुम फाड़ दो मेरी गांड ऊउईईईइ प्लीज अब इसको बाहर निकाल लो नहीं तो में मर ही जाउंगी प्लीज मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अब मैंने धक्के देना बंद करके उसको कहा कि बस थोड़ी देर तुम ऐसे ही रुक जाओ में अभी इसको बाहर निकाल दूंगा, क्योंकि अब में झड़ने भी वाला हूँ। फिर उसको यह कहते ही उसने झटके के साथ लंड को अपनी गांड से बाहर निकालकर मेरे लंड को तुरंत अपने मुहं में ले लिया और चूसने लगी और उसी समय में उसके मुहं में झड़ गया। फिर वो मेरा पूरा वीर्य पी गई, तब मैंने उसकी तरफ देखा वो मुझे संतुष्ट और बहुत खुश नजर आ रही थी। दोस्तों अब तक हम दोनों ही एक एक बार झड़ चुके थे और फिर हम दोनों ही पलंग पर लेटे हुए थे। उस समय में अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रखकर बूब्स को मसलने लगा, निप्पल को दबाने लगा और अब में उससे बोला कि सरला मुझे तुम्हारे यह रसीले आम चूसने है। अब वो मेरी तरफ हंसती हुई बोली कि हाँ जरुर चूसो ना मेरे राजा, तुम्हे इनको चूसने के लिए किसने मना किया है? आज तुम मेरे साथ अपनी हर एक इच्छा को पूरा कर लो, कुछ भी बाकि मत रहने दो।

अब में उसकी बात को सुनकर जोश में आकर दोनों बूब्स को पूरी तरह से मदहोश होकर बड़े मज़े लेकर चूसने लगा, वो बहुत मस्त रस भरे मजेदार थे, जिनको चूसने दबाने में मुझे बहुत ही अलग मज़ा आ रहा था। अब वो उसी समय मेरे सर को अपनी छाती पर दबाते हुए मुझसे कहने लगी, वाह मेरे राजा मज़ा आ गया तुम बहुत अच्छे बूब्स चूसते हो, क्योंकि इस तरह से मेरे बूब्स को आज तक किसी ने नहीं चूसा, वाह आज तुमने तो मुझे जन्नत का असली मज़ा दे दिया हाँ ऐसे ही लगातार लगे रहो। फिर मैंने उसको कहा कि अभी तो जन्नत का असली मज़ा बाकी है मेरी रानी और ज्यादा जोश में आने की वजह से उसके बूब्स से दूध भी बाहर आने लगा था। अब मैंने सरला से पूछा कि में इस दूध का क्या करूं? तब वो मुझसे बोली कि तुम इस दूध को अपने लंड पर लगाकर अपने लंड को चिकना करो और फिर डाल दो मेरी प्यासी चूत में और मुझे चुदाई के मस्त मज़े दो। फिर हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गये, में उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदने की कोशिश करने लगा और वो भी पागलों की तरह मेरे लंड को चूसने लगी थी और अब उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

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फिर मैंने कुछ देर बाद तुरंत उसको बेड के ऊपर एकदम सीधा लेटा दिया और उसके दोनों पैरों को मैंने अपने कंधे के ऊपर रख लिया। फिर मैंने सही मौका पाकर एक ज़ोर का धक्का लगाकर अपना पूरा का पूरा लंड उसकी चिकनी कामुक चूत में डाल दिया और जब मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया तब वो दर्द से चिल्लाने लगी उउऊईईईई माँ उफ्फ्फ्फ़ में मर गयी आह्ह्ह्ह यह कैसा दर्द है? में इसको नहीं सह सकती ऊफफ्फ्फ्फ़ इससे मेरी चूत के अंदर एक अजीब सी जलन हो रही है, प्लीज बाहर निकालो तुम इसको तुम्हारा आह्ह्ह्ह लंड बहुत मोटा है। फिर में उसका वो दर्द देखकर वैसे ही रुक गया और जब कुछ देर बाद उसका छटपटाना कम होने लगा, तब में अपनी तरफ से धीरे धीरे धक्के देकर चुदाई करने लगा। अब जिसकी वजह से उसको भी बड़ा मज़ा आने लगा था, वो भी मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी और करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद में उसकी चूत में झड़ गया और वो भी इस बीच दो बार झड़ चुकी थी। अब वो मुझसे कह रही थी, विक्की आज तुमने तो मुझे सच में जन्नत के मज़े दिए है तुम बहुत अच्छी जमकर चुदाई करते हो मुझे तुम्हारे साथ अपनी चुदाई करवाकर बहुत अच्छा लगा और में तुम्हारा यह अहसान कभी नहीं भूलूंगी।

फिर हम दोनों एक दूसरे से चिपककर सो गए, में सुबह करीब आठ बजे उठा और तब मैंने देखा कि वो उस समय उठ चुकी थी और अब चाय बना रही थी। अब में चुपचाप उठकर रसोई में चला गया, वो उस समय मेक्सी में थी और मैंने उसको पीछे से अपनी बाहों में भरकर मेक्सी को तुरंत ऊपर करके अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया। फिर अपना एक हाथ आगे ले जाकर उसकी गरम गीली चूत में डाल दिया और अब मैंने धक्के देने शुरू किए। मेरा लंड उसकी गांड में पूरा अंदर बाहर होने लगा, में मज़े लेने लगा आगे से चूत को अपनी ऊँगली से चोदने लगा। दोस्तों इस तरह से मैंने उसकी वहीं रसोई में भी एक बार चुदाई के मज़े लिए और अब जब भी हमे ऐसा कोई अच्छा मौका मिलता है, हम उसका पूरा फायदा उठाते है और चुदाई के बहुत जमकर मज़े लेते है ।।

धन्यवाद …

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