पापा मम्मी की लाडली बेटी

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प्रेषक : श्रुति …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम श्रुति है और में 18 साल की हूँ। दोस्तों मैंने कामुकता डॉट कॉम की बहुत सारी कहानियों को पढ़ा है और वो सभी मुझे बहुत अच्छी भी लगी और फिर इसलिए मेरे मन में एक दिन विचार आया कि क्यों ना में भी अपने जीवन की उस सच्ची घटना जो मेरे साथ घटी उसके बारे में आप सभी दोस्तों को लिखकर बता दूँ। दोस्तों मेरे घर में मेरी मम्मी पापा और मेरे अलावा और कोई नहीं है में हमारे घर में इकलोती हूँ, मेरे बूब्स का आकार 34-28-32 है और में बहुत ही गोरी दिखने में बहुत सुंदर लगती हूँ। दोस्तों मुझे भी आप सभी की तरह सेक्सी फिल्मे, कहानियों को भी पढ़ने का बहुत शौक है और अब मेरी इस पहली चुदाई की वजह से मेरा बदन पहले से भी ज्यादा निखर गया है इसलिए में पहले से भी ज्यादा सुंदर आकर्षक दिखने लगी हूँ और अब में आपको सीधे कहानी की तरफ ले चलती हूँ। दोस्तों यह चार साल पहले की बात है जब मैंने अपनी जवानी की देहलीज पर अपना पहला कदम रखा था और सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं जानती थी और वैसे मैंने कई बार मेरी मम्मी को पापा की गोद में बैठे हुए देखा था, लेकिन तब मेरी समझ में कुछ नहीं आया, लेकिन फिर मेरे साथ घटी उस एक घटना ने मुझे सब कुछ बता समझा दिया।

अब एक बहुत बड़ी चुदक्कड़ लड़की बन गयी हूँ, दोस्तों मेरे पापा अक्सर मुझे घूरकर देखा करते थे, तब में यही बात मन में सोचती थी कि वो मेरे पापा है और इन सब बातों को मैंने को बाप बेटी के प्यार के रूप में ले लिया जैसा हमेशा एक बाप अपनी बेटी से करता है। एक बार में अपने स्कूल से वापस आई तब मैंने देखा कि मेरी चूत से खून निकल रहा है और तब तो में चूत का मतलब भी नहीं जानती थी। फिर में खून देखकर बहुत डर गयी और मैंने अपनी माँ को बताया कि मेरे पेशाब करने वाली जगह से खून निकल रहा है। अब माँ तुरंत समझ गयी कि मेरे महीना बैठ गया है और फिर माँ ने मुझसे कहा कि ज़रा दिखा में भी तो देखूं कि मेरी चूत ने कैसी चूत को पैदा किया है? और में तेरे पापा को बताऊँ कि देख साले तेरे लिए मैंने एक ऐसी चूत का जुगाड़ किया है जो तेरे लंड और मेरी चूत से बनी है। अब तू चल दिखा मुझे अपनी चूत, दोस्तों में अपनी माँ की कोई भी बात का मतलब नहीं समझ पा रही थी कि चूत क्या होती है और लंड क्या होता है? फिर मैंने माँ के कहने पर अपनी पेशाब वाली जगह को दिखा दिया और मेरी पेशाब करने वाली जगह को देखकर माँ बड़ी खुशी हुई और वो कहने लगी वाह क्या मस्त चूत है?

बिना बालों वाली यह चूत सचमुच बड़ी कामुक लग रही, उफ्फ्फ वाह देखो तो यह लंड के लिए कैसे अपने आंसू टपका रही है? तब मैंने माँ से कहा कि माँ मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा, यह लंड, चूत क्या होता है? फिर माँ ने मुझसे कहा कि जिसको तू पेशाब की जगह बताती है उसको चूत कहते है, जो हर लड़की की होती है और जिस जगह से लड़के पेशाब करते है उसको लंड कहते है और जब लंड और चूत दोनों को आपस में मिलाया जाता है, तब जाकर एक बच्चा पैदा होता है। फिर माँ मुझे अपने कमरे में ले गयी जहाँ पर माँ ने मुझे एक सेक्सी फिल्म दिखाई जिसको देखकर में पागल सी होने लगी। अब मैंने देखा कि एक आदमी अपना लंड बाहर निकालकर एक लड़की के मुहं में डालता है और लड़की उसको बड़े मज़े से चूस रही है और वो खुश होकर कह रही है वाह इसका क्या स्वाद है? फिर उसके बाद में तो एकदम दंग रह गयी, जब उसने अपना लंड लड़की की छोटी सी चूत में डाल दिया और उस लड़की ने भी बड़ी आसानी से डलवा लिया और वो मज़े से चुदने भी लगी। दोस्तों में तो बिल्कुल पागल सी हो गयी और तब माँ ने मुझसे पूछा क्यों अब कुछ समझ आया चूत क्या होती है और लंड क्या होता है? वो सब देखकर मेरा मन भी अब चुदाई करवाने को कहने लगा था, लेकिन में माँ से शरम के मारे कुछ कह ना सकी।

दोस्तों आज मेरी समझ में आ गया था कि क्यों उस दिन मेरी माँ पापा की गोद में बैठी थी। अब माँ ने देखकर कहा कि वाह मेरी चूत ने एक रसीली चूत को पैदा किया है और यह तेरे उस साले बाप के लंड का भी कमाल है जो उसकी वजह से इतनी रसीली चूत को पैदा करवाया। फिर में अपनी चूत की तारीफ़ को सुनकर खुश हो रही थी और मुझे बहुत अच्छा भी लग रहा था और अब में बहुत खुलकर माँ से बात करने लगी। अब मैंने पूछा माँ जब चूत और लंड को आपस में मिलाते है तब क्या सही में बच्चा होता है? तो फिर आप एक बार और पापा के लंड से अपनी चूत को मिलाओ, जिसकी वजह से मुझे एक लंड मिल सके मतलब कि मेरा भाई, मुझे एक भाई चाहिए प्लीज। अब माँ ने मुझसे कहा कि लंड और चूत को मिलने से बच्चा पैदा नहीं होता, इसके लिए लंड को चूत में पूरा अंदर डालना होता है उस काम को करने में बहुत मज़ा भी आता है। अब माँ ने मुझसे पूछा एक बात बता कहीं तेरा मन भी तो चुदने को नहीं कर रहा? अगर ऐसी बात है तो तू मुझे बोल दे, में तेरी चूत के लिए लंड का जुगाड़ कर दूँगी और वैसे भी तेरी चूत लंड के लिए रो रही है।

दोस्तों यह बात सुनकर में बड़ी खुश थी क्योंकि माँ ने मेरे दिल की बात कह दी जिसको कहने के लिए में शरमा रही थी, लेकिन में जानबूझ कर नाटक करते हुए कहने लगी कि जाने भी दो, माँ मुझे शरम आती है। अब माँ ने मुझसे कहा कि अरे अपनो के सामने कैसी शरम? और वैसे भी तेरी चुदाई के लिए तुझे लंड घर में ही मिल जाएगा। फिर मैंने झट से पूछा कि वो कैसे? माँ ने कहा कि देख तेरा बाप चुदाई का बड़ा प्यासा है, तू बस उसके सामने जैसा में कहती हूँ वैसे ही कपड़े पहन और जैसा में तुझसे कहूँ तू उसको वैसे ही बोल, उसके बाद फिर तू देखना वो कैसे तेरी चुदाई करते है? तुझे पता नहीं यह सभी मर्द हर एक चूत के बहुत दीवाने होते है, इन्हे बस चूत चाहिए चाहे वो बीवी की हो या बेटी की, इनका तो बस एक ही नारा है चूत तो बनी ही लंड के लिए है, चाहे वो बीवी की हो, साली की हो या बेटी की हो। दोस्तों में तो अपनी माँ के मुहं से यह बात सुनकर बिल्कुल पागल हो चुकी थी और माँ ने मुझे प्यासी रंडी बना दिया था, इसलिए मुझे भी अब एक लंड चाहिए था चाहे वो अब मेरे बाप का ही क्यों ना हो? वैसे भी माँ ने मुझसे कहा था कि मेरी चूत और तेरे बाप के लंड ने एक रसीली चूत को पैदा किया है और फिर बाप से ही क्यों ना अपनी चुदाई के मज़े लिए जाए?

यह बात मन ही मन सोचकर मैंने हाँ कह दिया था। अब माँ ने मेरे लिए कुछ अलग कपड़े खरीदे और मुझसे कहा कि देख जब में कहूँ तब तू इन्हे पहन लेना और मैंने भी हाँ कर दिया। फिर माँ ने मुझसे कहा कि आज से जब भी तेरे पापा घर में आए उसके पहले ही तू कपड़ो के अंदर से ब्रा और पेंटी को उतार देना, जिसकी वजह से तेरे पापा की नज़र तेरे हिलते हुए बूब्स पर जाए और उनका लंड किसी चूत के लिए पागल हो जाए। फिर उनको जब कोई चूत नहीं मिलेगी तब वो तुझे ही पटककर तेरी चुदाई करने लगेंगे और बस तू उनकी हर बात को हाँ में अपना सर हिलाकर करती जाना, क्यों ठीक है चल में अब दुकान जाती हूँ और मिठाई ले आती हूँ। अब मैंने उनको पूछा कि मिठाई किस लिए? माँ ने कहा कि आज तू चुदाई के लायक बन गयी है जब लड़की का महीना बैठने लगता है तब वो लंड लेने के लायक हो जाती है। फिर माँ बाजार से मिठाई ले आई और आस पड़ोस में भी बाँट दी। फिर जब पापा घर पर आए तब माँ ने कहा कि तू जाकर पापा को मिठाई दे और जैसा में कहती हूँ वैसा ही जाकर बोलना। दोस्तों पहले तो में शरमाने लगी, लेकिन मेरी चूत की हालत को देखकर मुझे तरस आया और में पापा के पास गयी और जैसा माँ ने मुझसे कहा था वैसा ही कहा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब में बोली की पापा मुबारक हो, आप यह मिठाई खाओ, तब पापा ने पूछा कि यह किस खुशी में? मैंने कहा कि पहले खाओ तो सही उसके बाद में बताती हूँ, अच्छा अब यह बता कि यह मिठाई किस खुशी? दोस्तों में कुछ कहती उसके पहले माँ आ गयी। अब वो बोली कि यह मिठाई इसलिए थी क्योंकि आज तुम्हारे घर में एक चूत से दो चूत हो गयी है तुम्हारी और हमारी बरसो की मेहनत रंग लाई है, देखो आज तुम्हारे सामने एक नयी जवान चूत खड़ी है। अब पापा मुझे घूरकर देखने लगे और वो मुस्कुराने लगे, में शरमा गयी और फिर माँ ने कहा कि आज से इसका महीना बैठ गया है, देखो इसकी चूत रो रही है और इतना कहकर माँ ने मेरी स्कर्ट को तुरंत ऊपर उठाकर मेरी चूत पापा के सामने कर दी। अब मेरी चूत को देखते ही पापा बोले वाह ऊह्ह्ह क्या मस्त चूत है? बिना बालो में चाँद की तरह लग रही है। फिर मैंने गौर से देखा कि पापा का लंड यह सब देखकर खड़ा हो चुका था, माँ ने कहा अब देर किस बात की? आज तुम्हारे लंड से बनी चूत तुम्हारे सामने है, तुम क्या इसका उद्घाटन नहीं करोगे? अब में शरमा रही थी, पापा ने मुझसे पूछा बेटी तुम्हारी चूत तो अभी छोटी है तुम्हे बहुत दर्द होगा इसलिए अभी नहीं, जब तुम और बड़ी हो जाओगी तब में तुम्हारी चुदाई ज़रूर करूंगा।

दोस्तों बाद में चुदाई करने की बात सुनकर में उनको कहने लगी कि देखो पापा में तुम्हारी ही चूत हूँ और फिर यह तुम्हारे ही किसी काम आ जाए तो इसका भी कल्याण हो जाएगा और मेरा भी, देखो पापा तुम्हारी चूत तुम्हारे लंड के लिए रो रही है क्या तुम इसको चुप नहीं करवाओगे? प्लीज। अब पापा ने मुझसे कहा कि तुझे बहुत दर्द होगा। फिर मैंने उनको कहा कि अभी जो दर्द हो रहा है उस दर्द का में क्या करूँ? वैसे भी थोड़ा बहुत दर्द तो होता ही है, अगर आप अपनी इस चूत को अपने लंड के लायक समझते हो तो प्लीज आज तुम मुझे अपनी बेटी से अपनी रखेल बना दो, इस दुनिया की नज़र में हम दोनों बाप बेटी ही रहेंगे। अब पापा कहने लगे कि पगली में तो चाहता हूँ कि तेरी चुदाई करूं, क्योंकि यह तो मेरी किस्मत है जो मेरे लंड से पैदा हुई चूत में मेरा लंड जाएगा। दोस्तों मुझसे यह बात कहकर पापा ने मुझे अपनी बाहों में पकड़ लिया और वो मुझे चूमने लगे जिसकी वजह से मेरे मुहं से सिसकियाँ निकल रही थी आह्ह्ह ऊऊऊह्ह्ह्हह और ज़ोर से करो पापा। फिर पापा ने मुझे ऊपर से नंगा कर दिया और मेरे छोटे बूब्स को हाथ में पकड़कर मुहं में भरकर चूसने लगे, जिसकी वजह से में पागलो की तरह कसमसा रही थी और बोल रही थी वाह आह्ह्ह्ह पापा ज़ोर से चूसो यह संतरे तुम्हारे ही है ऊफ्फ्फ और पापा जोश में आकर ज़ोर से चूसने लगे।

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अब माँ मेरे नीचे आ गई और मुझे नीचे से नंगा करके मेरी चूत को वो चाटने लगी, जिसकी वजह से में तो जैसे पागल सी हो गयी थी और कह रही थी, हाँ चाटो अपनी बेटी की चूत को चाटो। फिर पापा ने मुझे बेड पर लेटा दिया और मेरे पूरे शरीर को मसलने और रगड़ने लगे, में बता नहीं सकती थी कि मुझे कितना मस्त मज़ा आ रहा था? में पागलों की तरह कसमसा रही थी जब मुझसे रहा नहीं गया। अब मैंने कहा कि प्लीज पापा मुझे अपना लंड दीजिए ना, में भी उसको हाथों में लेकर चूसना चाहती हूँ। अब पापा कहने लगे कि इसमे पूछने की क्या बात है यह लंड तेरा ही तो है यह ले यह बात कहकर जब पापा ने अपने सारे कपड़े उतारे उसके बाद देखकर में एकदम दंग रह गई। दोस्तों मेरे पापा का काला लंड जो तनकर खड़ा था वो सात इंच का लग रहा था, में उसकी लम्बाई को देखकर घबरा गयी और कहने लगी कि इतना मोटा और लंबा मेरी चूत में कैसे जाएगा? अब पापा ने कहा कि पहले तू इसको अपने मुहं में ले। फिर में पापा के लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी, मुझे बहुत मज़ा रहा था और में करीब दस मिनट तक पापा के लंड को चूसती रही।

फिर मैंने कहा कि पापा अब आप मुझे चोदना शुरू करो, लेकिन में डरने के साथ साथ घबरा भी रही थी कि कैसे यह इतना मोटा लंड मेरी छोटी सी चूत में जाएगा मुझे कितना दर्द होगा? अब पापा ने मुझे कमर के बल लेटा दिया और वो मेरे पैरों के पास आ गए और अपना लंड मेरी चूत के पास रखा और अंदर डालने की नाकाम कोशिश करने लगी और लंड था कि जाने का नाम ही नहीं ले रहा था। फिर में और भी ज्यादा घबरा गयी और सोचने लगी कि कैसे यह लंड अंदर जाएगा? मैंने कहा कि पापा आप ज़ोर लगाकर डाल दो, देखा जाएगा, लेकिन तभी माँ ने कहा कि रूको में क्रीम लेकर आती हूँ और वो क्रीम ले आई। अब माँ ने बहुत सारी क्रीम मेरी चूत में डाल दी जिसकी वजह से मेरी चूत चिकनी हो गयी और जब पापा ने अपना लंड मेरी चूत में डालना शुरू किया, तब थोड़ा सा अंदर चला गया। अब मुझे हल्का हल्का दर्द महसूस होने लगा था और उसी समय पापा ने एक जोरदार झटका मार दिया जिसकी वजह से आधे से ज्यादा लंड मेरी चूत में चला गया। दोस्तों दर्द की वजह से मेरे मुहं से चीख निकल गयी आईईईईइ माँ में मर गई ऊऊईईईईईईई ओह्ह्ह्ह प्लीज अब इसको बाहर निकालो आईई भगवान मुझे बचा ले। अब माँ ने कहा कि अरे साले तूने तो अपनी बेटी की चूत को फाड़ दिया देख इसकी चूत से कितना खून बह रहा है?

फिर मैंने माँ से कहा कि कोई बात नहीं है माँ यह चूत पापा की ही है अगर यह आज फट जाती है तो भी मुझे कोई गम नहीं होगा, पापा आप पूरा लंड मेरी चूत में डाल दीजिए। अब आप मेरे दर्द और चूत के फटने की परवाह मत कीजिए और फिर पापा ने पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया, में दर्द की वजह से चिल्लाती रही और पापा मेरी चूत को चीरते रहे, पूरे पलंग पर खून फैल गया। फिर थोड़ी देर तक मुझे दर्द रहा, लेकिन उसके बाद में पापा ने मुझे ऐसे मज़े से चोदना शुरू किया कि में आसमान की सैर करने लगी और मुझे उनके हर झटके में बड़ा मज़ा आने लगा था। अब में ज़ोर से सिसकियाँ लेकर कह रही थी ऊफ्फ्फ हाँ चोदो अपनी बेटी की चूत को चोदो अहह हाँ फाड़ डालो इसको यह तुम्हारी ही चूत है और चोदो ज़ोर से आह्ह्ह्ह ऊऊईईईईईईईईई बड़ा मज़ा रहा है। फिर इसके बाद अचानक पापा ने अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकालकर वो अब मेरी गांड में डालने लगे। अब मैंने उनको कहा कि पापा ऐसे गांड में नहीं जाएगा, आप थोड़ा सा क्रीम लगाकर चिकना कर दो और उसके बाद फिर आप देखो कैसे नहीं जाता आपका लंड मेरी गांड में? अब पापा ने बहुत सारी क्रीम मेरी गांड में लगाकर चिकना कर दिया और अब पापा ने अपने लंड को मेरी गांड में डाला, जिसकी वजह से मुझे बहुत तेज दर्द हुआ, लेकिन में सहन करती रही।

फिर जैसे ही उन्होंने एक ज़ोरदर झटके से लंड को मेरी गांड में पूरा डाला, में तो दर्द की वजह से चिल्ला उठी। फिर माँ ने मुझे कसकर पकड़ लिया और में रोने लगी, लेकिन पापा ने मेरे रोने की परवाह नहीं की और मेरी गांड को पूरा फाड़कर ही दम लिया। दोस्तों उनके हर झटके ने मुझे बहुत दर्द दिया और में दस मिनट तक रोती रही और पापा मेरी गांड को फाड़ते रहे, जिसकी वजह से कुछ देर बाद मुझे मज़ा आने लगा था और में भी उछल उछलकर मज़ा लेने लगी थी। अब में उनको कहने लगी हाँ फाड़ दो आप मेरी गांड को अपने लंड से, यह साली बहुत दर्द करती है ऊफ्फ्फ आज आप इसको इतना फाड़ देना कि दोबारा कभी दर्द ना करे और पापा में चाहती हूँ कि मेरी गांड का इतना बड़ा छेद हो जाए कि अगली बार गांड मारते समय आपका लंड मेरी गांड में बड़े ही आराम से चला जाए। दोस्तों मुझे मुहं से यह बात सुनकर पापा ने कहा कि तू बिल्कुल भी चिंता मत कर।

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अब में उनके मुहं से यह बात सुनकर बहुत खुश हो गयी और सही में मेरे पापा ने मेरी गांड को इतना बड़ा कर दिया था कि में अब बड़े ही आराम से उनका लंड अपनी गांड में ले रही थी। अब पापा झड़ने के करीब थे और में भी उनके पहले ही झड़ गयी, लेकिन अब मैंने पापा से कहा कि पापा में आपका वीर्य पीना चाहती हूँ, क्योंकि इसमे बहुत सारे विटामिन होते है इसलिए में इसको ऐसे बरबाद नहीं होने दूँगी, प्लीज पापा मुझे अपना वीर्य पिलाओ ना। फिर पापा ने मेरी गांड से अपना लंड बाहर निकाला और मेरे मुहं पर रखकर हिलाने लगे और जैसे ही उनका वीर्य मेरे मुहं में आया, मैंने जल्दी से उसको चूसकर पी लिया वाह मज़ाआ गया वो बड़ा ही स्वादिष्ट था इसलिए में वो सारा का सारा वीर्य गटक गयी। फिर हम दोनों वैसे ही पूरे नंगे होकर बेड पर लेट गए। दोस्तों मुझे अब अपने पापा के गांड का छेद बड़ा करवाकर बड़ी खुशी हुई और में मन ही मन अपने पापा को धन्यवाद कहने लगी। अब तो हम दोनों हर दिन ही सेक्स करते है और वो भी हर बार नये नये तरीक़ो से हम दोनों चुदाई के मज़े लेते है।

दोस्तों एक बार पापा ने मुझसे कहा कि बेटी तुमने तो मेरा वीर्य पी लिया है, अब तू थोड़ा सा मेरा पेशाब भी पीकर देखो कितना स्वाद आता है? अब में पापा की हर बात को उनके कहने से वैसे ही करती रही फिर में इस काम को करने के लिए कैसे मना कर सकती थी? अब उन्होंने मुझे गिलास में डालकर अपना पेशाब दे दिया और में पेशाब को ठंडे की तरह मज़े से पीने लगी और मुझे उसका बड़ा अजीब सा स्वाद आया। फिर मैंने उनको कहा कि पापा आपने इसमे तो शक्कर ही नहीं डाली, लेकिन पापा तो मेरी बात को ठीक तरह से समझे ही नहीं। अब मैंने कहा कि अपना वीर्य भी तो इसमे डालो उसके बाद देखना में आपका पेशाब और वीर्य को कैसे झट से पी जाउंगी? फिर पापा ने अपना वीर्य भी उसमे मिला दिया और में झट से वीर्य और पेशाब को मिलाकर पी गयी। अब तो पापा ने मुझे कह दिया कि आज से हमारे घर में जब भी हम अकेले होंगे तब कोई भी दरवाजा बंद नहीं होगा, चाहे वो बाथरूम का हो या कमरे का अगर पेशाब भी करना है, तब तुम दरवाजा खुला ही रखकर बैठना, क्योंकि एक पल के लिए भी में तुम्हारी चूत से दूर नहीं रहना चाहता हूँ। अब तो में पापा के सामने ही नंगी नहाती और बाथरूम का काम भी करती हूँ, लेकिन उनके सामने ही करती हूँ पापा एक बार मुझे देखते और एक बार मेरी चूत को और में शरमाकर अपने काम करने लगती हूँ ।।

धन्यवाद …

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