प्यासी आंटी की चूत में मिला जन्नत का मजा

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प्रेषक : अभी …

हैल्लो दोस्तों, जिस तरह से पढ़ाई की कोई सीमा नहीं होती है, ठीक उसी तरह से प्यार करने में कोई उम्र नहीं होती। दोस्तों में पटना का रहने वाला हूँ और में 24 साल का जवान सुंदर मस्त दिखने वाला लड़का हूँ, मेरा रंग गोरा और में शरीर से हट्टाकट्टा हूँ। दोस्तों मुझे हमेशा मेरी शोभा आंटी की बहुत याद आया करती थी, वो दिखने में बहुत गोरी सुंदर और सुशील है। दोस्तों मेरी शोभा आंटी इतनी सुंदर हॉट सेक्सी लगती है कि कभी कभी मुझे मेरे अंकल की किस्मत पर जलन होने लगती है कि इतनी सुंदर आकर्षक पत्नी को जो उन्होंने पाया था।

दोस्तों मेरी शोभा आंटी का रंग बहुत गोरा एकदम दूध जैसा सफेद, वो दिखने में मस्त माल किसी को भी एक ही बार में अपना दीवाना बना दे ऐसी नजर आती और हर कोई उनको घूर घूरकर अपनी चकित नजरो से देखता। दोस्तों हर कोई उनको एक बार पाना चाहता है और ठीक वैसा ही मेरा भी हाल था। मेरी आंटी के बूब्स का आकार 38-28-39 और एकदम मस्त गदराया हुआ उनका वो गोरा बदन मुझे भी बिल्कुल पागल बनाए जाता था। दोस्तों वैसे तो में बहुत सारी औरतों को हमेशा देखा करता था, लेकिन मेरी शोभा आंटी की तरह सुंदर नजर आने वाली कोई भी नहीं थी, इसलिए मेरी नजर हमेशा उन्ही के ऊपर टिकी रहती थी। फिर में मौका मिलते ही उनको अपनी चोर नजर से देखा करता था, मेरे मन में उनके लिए बहुत सारे गंदे गंदे विचार आया करते थे, लेकिन मेरी आंटी की मेरे अंकल को बिल्कुल भी कदर नहीं थी और इसलिए वो उनके ऊपर इतना ध्यान नहीं देते। फिर वो कभी भी शराब पीकर शोभा आंटी को मारते-पीटते रहते और शोभा आंटी बेचारी चुपचाप हर दुःख दर्द को सह लेती थी वो किसी को भी अपने पति की उन हरकतों के बारे में नहीं बताती थी। फिर उस दिन में अपनी कंपनी के काम की वजह से कुछ दिनों उनके पास रुकने के इरादे से गया और में उनके घर पर पहुंचा, तब शोभा आंटी मुझे अचानक से आया हुआ देखकर बहुत खुश हो गयी।

अब उनकी खुशी का कोई भी ठिकाना नहीं था, उनकी खुशी उनके उस हंसते मुस्कुराते हुए चेहरे से मुझे साफ साफ नजर आ रही थी। फिर मुझे देखते ही उन्होंने तुरंत मुझे बड़े ही प्यार से अपने गले लगा लिया और फिर उन्होंने मुझे मेरे सर पर अपने प्यारे से नरम होंठो से चूम लिया। अब मेरे आने की खुशी को शोभा आंटी के उस खिले, चमकते हुए चेहरे पर देखने लायक थी, वो मुझे देखकर इतनी खुश थी कि वो कई देर तक मुझे दरवाजे से अंदर बुलाना ही भूल गई। फिर कुछ देर बाद मुझे अंदर आने को कहा में आकर बैठ गया और कुछ देर तक हमारे बीच यहाँ वहां की बातें होने के बाद में अब उठकर बाथरूम में जाकर नहाने पहुंच गया और गरम पानी से नहाकर में बाथरूम से बाहर निकलकर। अब अपनी शोभा आंटी और अंकल के साथ बैठकर दोबारा बातें करने लगा और उस दिन मेरे आने की खुशी में शोभा आंटी ने खाने में बस मेरी पसंदी का खाना बनाया था और वो खाना इतना स्वादिष्ट बना था कि आप पूछो ही मत में बता नहीं सकता। फिर लंबे सफ़र की वजह से में बहुत थका हुआ था और इसलिए में पास वाले कमरे में सोने चला गया और फिर अंकल भी मेरे जाने के बाद शराब की दुकान पर शराब पीने चले गये।

फिर शोभा आंटी मेरे पास कुछ देर तक बैठकर कुछ अपना काम कर रही थी और थोड़ी ही देर के बाद मुझे कब नींद लगी। उसके बाद अचानक रात को करीब तीन चार बजे में जब नींद से उठा, तब उस समय मुझे पास वाले कमरे से मेरी शोभा आंटी की कुछ आवाज़ आने लगी थी। अब मैंने देखा कि वो धीरे से अंकल को हिला हिलाकर जगाने की कोशिश कर रही थी, में एकदम दबे पैरों से पास के कमरे की तरफ जाकर देखने की कोशिश करने लगा। अब वो द्रश्य देखकर मेरी आंखे फटी की फटी रह गई, क्योंकि वो द्रश्य मेरे लिए बिल्कुल भी विश्वास करने वाला नहीं था और में ऐसा पहली बार देख रहा था। फिर वो सब कुछ देखकर मुझे पूरी सच्चाई का पता उसी रात को चल गया। दोस्तों मैंने देखा कि मेरी शोभा आंटी उस समय पूरी तरह से नंगी थी, उनके तन पर एक भी कपड़ा नहीं था और आंटी के वो गोरे एकदम तने हुए बड़े आकार के बूब्स को देखकर मेरा 6 इंच का लंड एकदम से तन सा गया था। अब मैंने अपनी चकित नजरों से देखा कि शोभा आंटी की उस चूत पर मुझे बहुत सारे काले और घने बाल दिखाई दे रहे थे, जिसको देखकर में एकदम पागल हो चुका था।

दोस्तों मैंने अपनी शोभा आंटी को पहले हमेशा कपड़े में ही देखा था, लेकिन उनको आज में पहली बार पूरा नंगा और उनके उस गोरे जिस्म को बिना कपड़ो के देखकर मेरी नियत उन पर बिल्कुल खराब हो चुकी थी। दोस्तों मैंने उस दिन पहली बार उनका वो रूप देखा था, मेरी शोभा आंटी उनके पूरे नंगे बदन में एकदम गोरी और किसी बिना कपड़ो वाली परी की तरह दिखाई दे रही थी। अब मैंने देखा कि वो अंकल के लंड को अपने एक हाथ में लेकर ज़ोर ज़ोर से हिलाकर उन्हे उस गहरी नींद से जगाने की कोशिश किए जा रही थी, लेकिन अंकल शराब के उस समय बहुत नशे में होने की वजह से नींद से उठ ही नहीं पा रहे थे। फिर उस समय मुझे ऐसा लग रहा था कि काश अंकल की जगह में होता और आंटी मेरे लंड को पकड़कर ज़ोर ज़ोर हिलाकर मुझसे अपनी चुदाई करने के लिए कहती। फिर बेचारी शोभा आंटी जब अंकल को बहुत देर उठाने के बाद भी जब वो नहीं उठे उसके बाद वो पूरी रात अपनी फूटी हुई उस किस्मत पर रोती हुई अपने बिस्तर पर सोने की कोशिश करने लगी थी। फिर में भी एकदम चुपचाप अपने कमरे में चला गया, लेकिन जब अपने बिस्तर पर सोने की कोशिश करके भी करवटे बदल बदलकर में सो नहीं पा रहा था।

दोस्तों उसकी वजह थी वही कुछ देर पहले देखा हुआ सेक्सी मनमोहक द्रश्य जिसकी वजह से अब भी शोभा आंटी का वो कामुक नंगा बदन मेरी आँखों के सामने मुझे दिखाई दे रहा था और अब मुझे मेरी शोभा आंटी कम और एक प्यासी चुदाई के लिए तरसती हुई औरत ज्यादा दिखाई दे रही थी। अब मेरे दिमाग़ में सिर्फ़ यही चल रहा था कि में अपनी शोभा आंटी को किस तरह चोदकर उनकी चुदाई के मज़े लूँ? इस तरह के विचार मुझे बार बार परेशान किए जा रहे। फिर उस सोचा विचारी में कब सुबह हुई मुझे पता भी नहीं चला और फिर सुबह उठकर नहाने के बाद में अपने काम से चला। फिर उसी दिन में जब अपने काम से घर आया तब मैंने देखा कि शोभा आंटी ने मेरा कमरा एकदम साफ करके चमका दिया था और यह देखकर में तो एकदम से डर गया। दोस्तों वो डर इसलिए था क्योंकि, मेरे कमरे में मैंने बहुत सारी नंगी फोटो की किताबे छुपा रखी थी। अब मैंने देखा कि मेरी आंटी ने वो सभी किताबे एक जगह पर ठीक तरह से जमाकर रख दिया था। फिर मैंने एकदम से टेंशन में आकर शोभा आंटी को पूछा कि शोभा आंटी क्या आपने किसी किताब को खोलकर देखा तो नहीं?

अब आंटी मेरे मुहं से वो बात सुनकर थोड़ी सी मुस्कुराती हुई मुझसे कहने लगी कि मुझे क्या पता था कि मेरा बेटा अब इतना बड़ा हो गया है? फिर में उनकी उस बात और उनकी उस शरारती हंसी को देखकर उनके शब्दों को सुनकर तुरंत समझ गया था कि मेरी आंटी ने मेरी वो सभी सेक्सी किताबे खोलकर जरुर देखी है। फिर मेरे मन में एक विचार आया और में मन ही मन में सोचने लगा कि अब जाने भी दो जो हुआ सो अच्छा ही हुआ, होने वाली बात को कौन रोक सकता है? यह सब मेरी किस्मत में लिखा था। फिर दूसरे दिन मैंने जानबूझ कर डीवीडी प्लेयर में एक सेक्सी फिल्म को लगाकर छोड़ दिया और उसके बाद में अपने काम से जाते समय शोभा आंटी को कहकर गया कि शोभा आंटी अगर तुम्हे घर में अकेलापन लगे तो आप टीवी को चालू करके फिल्म देख लेना। फिर में जब घर से बाहर गया, तब शोभा आंटी ने टीवी का जब बटन दबाया तो उसके साथ ही डीवीडी प्लेयर भी चालू हो गया और टीवी के ऊपर वो सेक्सी फिल्म शुरू हो गयी। अब उस सेक्सी फिल्म को देखकर शोभा आंटी बहुत गरम हो चुकी थी, शायद शोभा आंटी ने वो सेक्सी फिल्म दिन में चार-पांच बार चालू करके देखी होगी।

फिर शाम को जब में अपनी नौकरी से वापस घर आया, तब मुझे शोभा आंटी के चेहरे पर कुछ अलग सा जोश भरा नशा दिखाई दे रहा था और उसको देखकर में मन ही मन बड़ा खुश था। फिर में खुश होता हुआ फ्रेश होने के लिए जब बाथरूम में गया और बाथरूम से नहाने के बाद में सिर्फ़ अब अंडरवियर ही पहनकर बाहर आ गया। अब मैंने देखा कि उस समय शोभा आंटी का मेरी तरफ देखने का तरीका बिल्कुल अलग था और उसकी आँखों में मुझे एक अलग सी प्यास दिखाई दे रही थी। फिर में तुरंत समझ गया था कि शोभा आंटी ने वो सेक्सी फिल्म जरूर देखी होगी और इसलिए वो अब मुझे इतनी कामुक उतावली सी नजर आ रही थी। फिर रात का खाना खाने के बाद में अपने कमरे में सोने चला गया और शोभा आंटी अपने कमरे में जाकर सो गई और तभी अचानक से रात को करीब तीन बजे मेरी नींद खराब हो गयी और मैंने उसी समय उठकर देखा कि बाहर हॉल में टीवी की रौशनी मुझे दिखाई दे रही थी। अब मैंने बाहर जाकर देखा, शोभा आंटी एक बार फिर से फिल्म देख रही थी और शोभा आंटी एक बार फिर से पूरी नंगी होकर अपने एक हाथ से अपनी चूत में अपनी एक ऊँगली को डालकर ज़ोर ज़ोर से अपने हाथ को आगे पीछे कर रही थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब वो उस समय इतनी जोश में आ चुकी थी कि वो अपने दूसरे हाथ से अपने बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा भी रही थी, उनके मुहं से हल्की हल्की सिसकियों की आवाज भी बाहर आ रही थी। फिर यह सब देखकर मेरा लंड एक बार फिर से तनकर झटके मारने लगा था और अब मुझे बिल्कुल भी काबू करना बहुत मुश्किल हो चुका था, क्योंकि उस रात को घर में सिर्फ़ में और शोभा आंटी हम दोनों ही थे। फिर में हिम्मत करके झट से हॉल में चला गया और शोभा आंटी अचानक से मुझे देखकर डर सी गयी। उनके दोनों हाथ अपनी एक जगह पर रुक गए। अब उनके चेहरे पर पसीने की बहुत सारी बुँदे आ चुकी थी, वो मुझे देखकर बिल्कुल घबरा सी गई और फिर आंटी ने घबराकर उस समय अपने मन ही मन में सोचा कि अब में क्या करूं और क्या नहीं? उनके समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। वो बहुत परेशान सी नजर आ रही थी। फिर मैंने उनसे पूछते हुए कहा कि आंटी यह सब क्या चल रहा है? आंटी डर की वजह से अपनी धीमी आवाज में बोली कि कुछ नहीं बेटे बस मुझसे अब रहा नहीं गया, में कब तक अपने को रोककर ऐसे ही बैठी रहूँ? मुझे भी कुछ करने की इच्छा होती होगी, लेकिन मुझे कोई भी नहीं समझता और यहाँ तक कि मेरे पति तुम्हारे अंकल के पास भी मेरे लिए बिल्कुल भी समय नहीं है।

अब में क्या करूं? वो हमेशा अपनी दूसरी दुनियां में खुश रहते है और अब हर कभी अपने को शांत करने के कोई ना कोई नये तरीके ढूंढने लगी हूँ। अब मैंने आंटी की वो बातें सुनने के साथ उनके पूरे नंगे बदन को अपनी खा जाने वाली नजरों से उनके एक एक अंग को घूरते हुए निहारना भी शुरू किया। तभी मैंने शोभा आंटी को बोला कि शोभा आंटी तुम इतनी सुंदर हो यह बात आज मैंने जाना, सच में अंकल बहुत नसीब वाले है जो उन्हे आपके जैसी सुंदर समझदार पत्नी मिली है। फिर मेरे मुहं से यह बात सुनकर आंटी मुझसे कहने लगी कि बेटा हाँ तेरे अंकल नसीब वाले जरुर है, लेकिन उन्हे मेरी असली कीमत नहीं पता, एक जानकार को ही असली हीरे की कीमत पता होती है, बेटा क्या आज रात तू जन्नत का असली सफ़र करना पसंद करेगा? अब उनके मुहं से यह बात सुनकर में तो सातवें आसमान में उड़ने लगा था और तभी मैंने आगे बढ़कर अपने दोनों हाथ से आंटी की काली घनी ज़ुल्फो को घुमाकर आंटी के होंठो पर अपने होंठ रखकर, एक प्यारा सा चुम्मा कर लिया। फिर धीरे धीरे आंटी की नरम नरम गांड पर में अपने गरम हाथ घुमाने लगा और फिर धीरे धीरे शोभा आंटी का पूरा शरीर मुझे अपनी तरफ से साथ देने लगा था।

फिर उसके बाद मैंने आंटी के दोनों बूब्स को एक एक करके अपने होंठो में लेकर आम की तरह चूसना शुरू किया। अब धीरे धीरे आंटी सिसकियाँ लेते हुए मुझसे कहने लगी अभि ऊईईईईई उफ्फ्फफ्फ मेरे बेटे और ज़ोर से चूस हाँ यह बूब्स सिर्फ़ तेरे लिए ही इतने दिनों से मैंने बचाए रखे है आह्ह्हह्ह हाँ और ज़ोर से दबा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अब में भी बड़े जोश से शोभा आंटी के सारे बदन को मसलने लगा था और उस समय शोभा आंटी भी बहुत जोश में आ चुकी थी। फिर में धीरे धीरे उनके बूब्स को दबाते हुए निप्पल को खींचकर उनको जोश में लाकर वहीं ज़मीन पर लेटाकर आंटी के गोरे गोरे पैरों को अब पूरा फैलाकर आंटी की चूत को अब मैंने अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया था। अब मेरे ऐसा करने की वजह से मेरी शोभा आंटी को अब और भी ज्यादा मज़ा आने लगा था और अब तो आंटी का पूरा ध्यान मेरे 6 इंच के बड़े लंड पर अटकी पड़ी थी, में भी उस समय सिर्फ़ अंडरवियर में था। अब मेरे तने हुए लंड को आंटी ने स्पर्श करते ही वो और भी ज़्यादा जोश से भरकर मचलने लगा था और फिर लंड ने उनके स्पर्श से अब हल्के हल्के झटके मुझे देने शुरू कर दिए थे। अब आंटी ने मेरी अंडरवियर को उतारकर मेरे लंड को अपने नरम हाथ में लेकर वो ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी थी।

फिर वो कुछ देर बाद अपने मुहं में लंड को लेकर उसको अब चूसने और साथ ही साथ वो टोपे पर अपनी जीभ को घुमाकर उसको चाटने भी लगी थी। अब मुझे जिसकी वजह से बड़ा ही मस्त मज़ा आने लगा था और आंटी की वो गति अब पहले से भी और ज़्यादा बढ़ने से में भी बहुत गरम हो गया। फिर करीब दस बारह मिनट के बाद मैंने आंटी के मुहं में सफेद रंग की पिचकारी छोड़ ही दी। अब आंटी उस सफेद रंग के पानी को झट से नीचे गटक गई और फिर थोड़ी देर बाद मेरा तना हुआ लंड छोटा होता हुआ एकदम ठंडा पड़ गया। अब रात के चार बजे में और आंटी मेरे कमरे में जाकर मेरे पलंग पर चले गये और फिर आंटी ने मेरे लंड के साथ दोबारा से मस्ती करना शुरू किया। फिर मेरा लंड कुछ ही देर में एक बार फिर से तनकर खड़ा होकर हरा भरा हो गया और अब हम दोनों 69 के आसन में आ गये। दोस्तों उस समय मेरा लंड आंटी के मुहं में और आंटी की गीली गरम रस से भरी हुई चूत मेरे मुहं में थी, उसको चूसकर मुझे बड़ा ही मस्त मज़ा आ रहा था। अब एक बार फिर से करीब दस मिनट के बाद मेरे लंड से सफेद रंग का पानी बाहर निकल गया और अब हम दोनों एक दूसरे की बाहों में बाहें डालकर कुछ देर ऐसे ही पड़े रहे।

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फिर उसके बाद आंटी मुझसे कहने लगी कि बेटा अब मुझसे रहा नहीं जाता, प्लीज तुम आज अपनी आंटी की बहुत साल से प्यासी चूत को अब जमकर चोद ही डालो, मुझसे अब ज्यादा देर रहा नहीं जाता में बिल्कुल पागल हो चुकी हूँ, मुझे अब मेरी चूत में तुम्हारा यह प्यारा दमदार लंड चाहिए इसलिए तुम जल्दी से इसको मेरे अंदर डालकर मुझे धक्के देने शुरू करो। दोस्तों अब आंटी मेरे नीचे और में आंटी के ऊपर चढ़कर बैठ गया और उसी समय आंटी ने मेरे लंड को अपनी चूत के मुहं में डालने को कहा। फिर मैंने उनका तड़पना चुदाई के लिए प्यास को समझते हुए, लंड को आंटी की चूत में धीरे दबाव बनाते हुए अंदर डालना शुरू किया और करीब एक मिनट ज़ोर लगाने पर वो आधा अंदर चला गया। अब हम दोनों को बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था क्योंकि मेरा लंड जब आंटी की चूत में जाता तो एक अलग सा एहसास महसूस हो रहा था। फिर में बहुत जोश में आकर बड़े ज़ोर से धक्के मारने लगा था, जिसकी वजह से अब आंटी को बहुत दर्द होने लगा था और इसलिए वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी थी। अब में बिल्कुल भी रुकने वाला नहीं था इसलिए लगातार लगा रहा और मेरे धक्के खाकर आंटी अब ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी, उफफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह अभि बेटे प्लीज कुछ देर रूक जा मुझे बड़ा दर्द हो रहा है आह्ह्ह्हह थोड़ा आराम से बेटे ओह्ह्ह्ह।

अब आंटी चीख चीखकर मुझसे कहने लगी आह्ह्ह ऊफ्फ्फ में मर गई यह लंड है या गरम तपता हुआ रॉकेट। तेरे अंकल का भी इतना कड़क और बड़ा लंड नहीं है, मैंने अपने जीवन कभी भी ऐसा नहीं देखा उफफ्फ्फ् हे भगवान यह किस पत्थर का बनाया हुआ है? आह्ह्ह बचाओ मुझे में मर ही जाउंगी। अब मेरे हर एक धक्के से आंटी बहुत देर तक परेशान हो गई, उसके चिल्लाने तड़पने से मुझे अब डर लगने लगा था कि कहीं उनकी वो आवाज घर के बाहर तो नहीं जायेगी और उसको सुनकर आसपास के लोग जाग तो नहीं जाएँगे और इसलिए वो बात सोचकर मैंने तुरंत ही मेरे दोनों हाथों को शोभा आंटी के मुहं पर रख दिया। अब मैंने दोबारा ज़ोर ज़ोर से धक्के देने शुरू किए, करीब बीस मिनट के बाद मैंने अपना सारा सफेद रंग का पानी अपने लंड का वो गरम लावा अपना वीर्य शोभा आंटी की चूत में निकाल दिया। फिर मेरे हल्के हल्के धक्के अब भी जारी थे, वीर्य के निकलने की वजह से उनकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी और इसलिए मेरा लंड बड़ी ही आसानी से अब फिसलता हुआ अंदर बाहर हो रहा था और कुछ देर बाद लंड धीरे धीरे छोटा भी होने लगा था। दोस्तों अब में और आंटी एकदम शांत हो चुके थे क्योंकि उन धक्को के बीच उनकी चूत ने भी अपना पानी छोड़कर आंटी को धीरे धीरे ठंडा कर दिया था।

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अब में आंटी की बाहों में बाहें डाले उनसे चिपका हुआ चुपचाप पड़ा रहा और वो रात कब सुबह में बदल गई मुझे उसका पता भी नहीं चला। फिर दूसरे दिन सुबह सवेरे शोभा आंटी बड़े ही प्यार से मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराकर मुझसे बोली कि बेटा ज़िंदगी में इतना प्यार ऐसा मज़ा मुझे पहले कभी नहीं मिला जो कल रात को तूने तेरी अपनी आंटी को दिया और इसलिए मुझे तेरे ऊपर बहुत गर्व है, मेरे लाल सच तेरे जैसा बेटा पाकर में अब भगवान से और कुछ नहीं माँगना चाहती हूँ, तूने आज मुझे वो मज़ा सुख दिया है जिसके लिए में कितने सालो से तरस रही थी। आज मेरे मन की सभी इच्छाए पूरी हो चुकी है मुझे और कुछ भी नहीं चाहिए, में इसी में पूरी तरह से संतुष्ट हूँ। दोस्तों अपनी आंटी के मुहं से वो सभी शब्दों को सुनकर मुझे अपने आप पर बहुत गर्व महसूस होने लगा था, जिसकी वजह से में बहुत खुश था। फिर उस रात को लगातार तीन बार आंटी की उस एकदम टाइट चूत को अपने लंड से चोदकर मुझे मेरे लंड में भी बहुत दर्द महसूस हो रहा था, लेकिन फिर भी उस दर्द में कुछ अलग सा नशा भी मुझे आ रहा था।

फिर उस दिन के बाद में और आंटी कई बार एक साथ हम बिस्तर हो चुके थे और तो और सेक्सी किताबों का और कामुकता डॉट कॉम की सेक्सी मनमोहक कहानियों को पढ़कर मैंने अपनी कामुक आंटी को हर रात को अलग अलग तरह से कभी बैठाकर तो कभी लेटाकर बहुत तरह से चोदा और हर बार उन्होंने मेरा पूरा पूरा साथ दिया। अब वो किसी अनुभवी रंडी की तरह मेरे लंड को थोड़ी थोड़ी देर बाद अपने मुहं में लेकर कभी अपने हाथ में लेकर उसको मुठ मारकर दोबारा अपनी चुदाई के लिए खड़ा करके अपनी चुदाई करवाने लगती, जिसमे वो कभी मेरे नीचे होती तो कभी में उनके नीचे होता। दोस्तों हमारी यह चुदाई ऐसे ही चलती रही और यहाँ में अपनी चुदक्कड़ हॉट सेक्सी आंटी के साथ उनकी चुदाई के मज़े ले रहा था और अंकल शराब के साथ मज़े ले रहे थे, उनको हमारे बीच क्या चल रहा था? इस बात से बिल्कुल भी मतलब नहीं था और इसलिए हम दोनों बिना किसी टेंशन के अपने उस काम में हर कभी जब भी हमे मौका मिलता लग जाते ।।

धन्यवाद …

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