रेलगाड़ी में आंटी की गांड का हलवा

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प्रेषक : मंजोत …

हैल्लो दोस्तों, में मंजोत एक बार फिर से आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को अपनी आज एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ और वैसे इससे पहले भी में बहुत सारी कहानियाँ लिखकर आप सभी तक पहुंचा चुका हूँ, लेकिन इस बार कुछ ऐसा अलग हुआ जो में आप लोगो को बताए बिना नहीं रह सका। दोस्तों करीब एक सप्ताह पहले में अपनी मौसी के घर जो की दिल्ली में है में अपनी कुछ दिनों की छुट्टियाँ बिताने के लिए वहां पर चला गया। में बहुत खुश था और जब में उस ट्रेन से जा रहा था तो मैंने मेरे लिए ए.सी अपार्टमेंट में एक सीट बुक कराई ए.सी अपार्टमेंट के एक कॅबिन में दो लोगों की सीट एक साथ होती है और जब में ट्रेन में गया तो मैंने देखा कि वहां पर पहले से ही एक आंटी मुझे बैठी मिली वो दिखने में मुझे अच्छे घर की पढ़ी लिखी औरत नजर आ रही थी और जिस औरत को में पहली बार देखकर इतना सभ्य और सीधीसादी समझ रहा था दोस्तों कुछ देर बाद मुझे पता चला कि वो तो बहुत बड़ी चुदक्कड़ थी। उसको चुदाई जैसे काम का बहुत अच्छा अनुभव था और वो तो एक रंडी की तरह कुछ देर बाद मेरे साथ हरकते करने लगी थी, लेकिन मुझे उन सभी बातों से क्या? में तो उसकी चुदाई करने में लगा रहा। फिर मैंने अपना सभी सामान सही जगह पर रख दिया और उसके बाद में समय बिताने के लिए अख़बार पढ़ने लगा। वो दोपहर का समय था, तो कुछ देर बाद मुझे ज़ोर से भूख लगने लगी थी और अब मैंने देखा कि आंटी ने अपने बेग से कुछ खाने ले लिए बाहर निकाला और वो खाने लगी। उस समय में उनकी तरफ देख रहा था, तभी आंटी ने भी मेरी तरफ देखा और वो मुझसे खाने के लिए पूछने लगी तो मैंने उनको मना नहीं किया और में भी उनके साथ खाना खाने लगा और खाना खाते खाते हम दोनों हंस हंसकर इधर उधर की बातें भी करने लगे। फिर उन्होंने तब मुझे बताया कि वो एक स्कूल की अध्यापक है और वो अपने किसी रिश्तेदार के घर पर शादी समारोह में जा रही है और फिर धीरे धीरे रात हो गयी।

फिर रात को खाना खाने के बाद जब आंटी उठकर हाथ धोने के लिए जाने लगी तो उनका पैर अचानक से सूटकेस से टकरा गया और वो नीचे गिर गई। फिर यह घटना देखकर मैंने तुरंत जाकर उनको उठा दिया और उनको उठाते समय मेरा हाथ उनके बूब्स पर लग गया। उनका स्पर्श मेरे लिए बहुत अच्छा था उसकी वजह से में एकदम पागल हो गया, लेकिन फिर भी मैंने अपने ऊपर बहुत कंट्रोल किया। दोस्तों जब आंटी बाहर थी तब मैंने अपने कपड़े बदलने शुरू किए और अभी मेरे आधे कपड़े भी नहीं बदले थे कि उस समय आंटी वापस आ गई और अब में अगर अपना वो काम बंद कर देता तो शायद उनको बुरा लगता। यह बात मन ही मन में सोचकर में अपने कपड़े बदलता रहा। अब मैंने अपना लोवर पहन लिया और में हाथ धोने के लिए बाहर चला गया और जब तक में वापस आया तब तक आंटी अपनी जगह पर लेट चुकी थी। फिर मैंने देखा कि उस समय आंटी की साड़ी का पल्लू नीचे लटका हुआ था और उनके वो बड़े आकर के गोरे बूब्स उनके ब्लाउज में से बाहर झूलते लटकते हुए साफ नजर आ रहे थे और उनकी साड़ी भी जांघो तक आ चुकी थी। दोस्तों यह मस्त सेक्सी नजारा देखकर मेरा लंड तुरंत तनकर खड़ा हो गया और अब मैंने सोचा कि में उनके बूब्स को पकड़कर ज़ोर से दबा दूँ। यह बात मन में सोचकर में बहुत धीरे से आंटी की तरफ बढ़ा और फिर मैंने आंटी के बूब्स पर धीरे से अपना एक हाथ रख दिया, लेकिन आंटी को कुछ भी पता नहीं चला। उस बात का फायदा उठाकर मैंने जैसे ही आंटी के बूब्स को ज़ोर से दबाए, अब आंटी जाग गयी और वो ज़ोर से ऊँची आवाज में मुझसे पूछने लगी कि तुम क्या कर रहे हो? तो मैंने मन ही मन में सोचा कि अगर अब में हट गया तो बात बड़ जाएगी और में फंस जाऊंगा और इसलिए में उनके साथ अब ज़बरदस्ती पर उतर आया, मैंने आंटी के दोनों हाथों को अपने पैरों के नीचे दबा लिया, जिसकी वजह से वो बिल्कुल भी हिल ना सके और फिर में जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से उनके बूब्स को लगातार दबाने लगा और वो बार बार मुझसे कह रही थी कि प्लीज तुम मुझे छोड़ दो, लेकिन में तब भी लगा हुआ था। फिर कुछ देर बाद मैंने आंटी को दो सीट के बीच वाली जगह पर लेटा दिया और में खुद उनके ऊपर चड़ गया। में उनके बूब्स को पहले की तरह दोबारा अपने पूरे दम से दबाने मसलने लगा, लेकिन आंटी अब भी वैसे ही चिल्ला रही थी। फिर मैंने आंटी की आवाज को दबाने के लिए उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और में अब उनको किस करने लगा उसके साथ साथ में अपने एक हाथ से आंटी के बूब्स को भी दबा रहा था और अब मैंने सही मौका देखकर अपना दूसरा हाथ आंटी की साड़ी के अंदर डाल दिया। उस समय आंटी ने अपने दोनों पैरों को बहुत टाइट करके चिपका रखा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर मैंने अपनी ताकत से आंटी के दोनों पैरों को खोल दिया और अब में उनकी पेंटी पर अपना हाथ फेरने लगा और कुछ देर के बाद मैंने अपनी एक उंगली को आंटी की चूत के अंदर डाल दिया और में अपने दूसरे हाथ से आंटी के बूब्स को अब भी वैसे ही दबाता रहा। तब मैंने महसूस किया कि कुछ देर के बाद अब आंटी के निप्पल अब पहले से ज्यादा सख्त होकर खड़े होने लगे थे और आंटी के मुहं से वो बहुत अज़ीब अज़ीब आवाज़े आ रही थी। अब आंटी धीरे धीरे मुझसे कह रही थी उूउऊहह प्लीज आह्ह्ह आईईईइ नहीं मनोज प्लीज तुम ऐसा मेरे साथ मत करो। दोस्तों में उनके मुहं से यह शब्द सुनकर बिल्कुल दंग रह गया और में मन ही मन में सोचने लगा कि यह मनोज कौन है? लेकिन में अब भी अपना काम करता रहा और फिर मैंने अपनी दो उँगलियों को उनकी चूत में डालकर में अपने हाथ को आगे पीछे करके हिलाने लगा था और फिर करीब पांच मिनट तक लगातार ऐसा करने के बाद आंटी ने अब मुझसे कहा कि अमित तुम तो अभी कुछ देर पहले मेरे सामने बहुत भले लड़के बन रहे थे और अब यह सब क्या? में बिल्कुल चुप रहा और बस उनकी वो बातें सुनता रहा। फिर आंटी ने मुझसे कहा कि अब बस सुनता ही रहेगा या कुछ करेगा भी? तो मैंने उनकी बातें सुनकर जोश में आकर आंटी का ब्लाउज उतार दिया और उसके बाद मैंने उनकी ब्रा को भी खोल दिया, जिसकी वजह से आंटी के वो दोनों बड़े बड़े आकार के बूब्स अब मेरे सामने पूरे बाहर आ गये और उनको बिना कपड़ो के देखकर में बिल्कुल पागल हो गया। उसके बाद मैंने आंटी की साड़ी को भी अब बिना देर किए तुरंत उतार दिया और तब मैंने देखा कि उन्होंने अपनी साड़ी के नीचे पेंटी नहीं पहनी थी और फिर मैंने उनके दोनों पैरों को पूरा फैला दिया और में उनकी चूत को चूसने चाटने लगा। तो वो जोश में आकर बार बार मुझसे कह रही थी उूऊउफ़्फ़्फ़्फ़ आह्ह्ह्ह हाँ और ज़ोर से और ज़ोर से आईईईईईई प्लीज हाँ ऐसे ही चूसते रहो। मैंने फिर मौका देखकर अपना लोवर भी उतार दिया और अब मैंने उनके सामने अपना 5 इंच का लंड बाहर निकाल लिया। फिर उसको देखकर आंटी डर गयी और वो बोली कि यह तो बहुत मोटा लंबा है, इससे तो मुझे आज बड़ा दर्द होने वाला है। में ऐसा लंबा दमदार लंड आज पहली बार देख रही हूँ, चलो आज तुम मुझे इसका भी मज़ा चखा दो। अब में आंटी के दोनों पैरों को फैलाकर उनके बीच में बैठ गया और में अपना लंड उनकी चूत के मुहं पर रगड़ने लगा, जिसकी वजह से आंटी के मुहं से ज़ोर ज़ोर से आह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़ आईईईई की आवाज आ रही थी। फिर मैंने सही मौका देखकर एक ज़ोर का झटका दे दिया जिसकी वजह से मेरा आधा लंड उनकी गीली खुली हुई चूत के अंदर चला गया और आंटी उस दर्द की वजह से चिल्ला उठी और मेरे दोबारा से जोरदार धक्का लगाने पर अब मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अंदर चला गया, लेकिन अब आंटी को दर्द पहले से ज्यादा हो रहा था वो आईईईईइ उफफ्फ्फ्फ़ माँ में मर गई प्लीज धीरे धीरे करो इसने मेरी चूत को अंदर से पूरा छीलकर रख दिया है इसकी रगड़ ने मेरे जिस्म में आग लगा दी है। अब मैंने अपने लंड से उसको ज़ोर ज़ोर से झटके लगाने शुरू किए और थोड़ी देर के बाद उन्हे मज़ा आने लगा। फिर में अपनी तरफ से वैसे ही ज़ोर ज़ोर से झटके मारता रहा और अपनी तरफ से लगातार झटके मारते मारते मैंने आंटी के बूब्स को भी चूसना उनको दबाना शुरू कर दिया जिसकी वजह से उन्हे बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था, इसलिए वो अब मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी थी और करीब बीस मिनट के बाद में झड़ गया और मैंने अपना वीर्य आंटी की चूत में निकाल दिया। मुझे वीर्य निकालते समय बहुत शांति भरा अहसास हुआ और मेरा पूरा बदन एकदम हल्का बेजान सा हो गया था और उसी समय मैंने महसूस किया कि अब आंटी भी मेरे साथ झड़ चुकी थी उनकी चूत और मेरे लंड से बाहर निकला हुआ वो सफेद चिपचिपा प्रदार्थ बहकर अब आंटी की चूत से बाहर बहने लगा था।

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फिर में थककर कुछ देर आंटी के ऊपर लेट गया और में उनके निप्पल से खेलने लगा, लेकिन मेरा लंड अभी भी आंटी की चूत के अंदर ही था। फिर कुछ देर के बाद में उठा और मैंने आंटी को अब उठने के लिए कहा तो उसके बाद मैंने आंटी को उनकी सीट के साथ सहारा देकर डॉगी की तरह अपने सामने बैठा दिया। उसके बाद में आंटी की गांड को चूसने लगा और मुझे आंटी की गांड बहुत स्वदिष्ट लगी ऐसा करने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और वो मुझे बहुत नमकीन लग रही थी। अब मैंने अपनी उंगली को आंटी की गांड में डाल दिया और उसके बाद मैंने धक्का लगा लगाकर उसकी गांड को खोल दिया। वो आकार में बहुत बड़ी थी। फिर मैंने उनकी चूत को चूसना शुरू किया, लेकिन आंटी ने मुझसे अब कहा कि में अपनी जीभ को उनकी गांड में डाल दूँ। फिर मैंने उनसे कहा कि मुझे ऐसा करना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा क्योंकि उसमे आपकी टट्टी है, तब आंटी ने मुझसे कहा कि तू एक बार डालकर तो देख ले उसके बाद तू मुझसे कुछ कहना। अब मैंने धीरे धीरे अपनी जीभ को उनकी गांड के छेद में डालना शुरू किया मुझे ऐसा करने में बहुत घिन्न आ रही थी, लेकिन कुछ देर के बाद मुझे मज़ा आने लगा और मेरी जीभ को अब आंटी की टट्टी लग रही थी इसलिए मैंने आंटी को कहा कि आंटी मेरी जीभ को आपकी टट्टी लग रही है। फिर आंटी ने कहा कि तो क्या हुआ? टट्टी भी तो हमारे शरीर का ही एक हिस्सा होती है और जो हम खाना खाते है यह टट्टी वही होती है। फिर मैंने कहा कि में क्या करूं आंटी? तो आंटी ने कहा कि मेरी टट्टी को चाटकर देख, अब मैंने उनसे ऐसा करने से साफ साफ मना कर दिया नहीं में ऐसा कभी भी नहीं कर सकता। अब आंटी ने मुझसे कहा कि इससे पहले तूने मेरे साथ अपनी ज़ोर ज़बरदस्ती की थी, लेकिन अब मेरी बारी है में जैसा कहूँ वैसा चुपचाप करता जा। फिर आंटी वहां से उठी और मुझे सीट के बीच वाली जगह पर लेटा दिया और वो मेरे मुँह पर बैठ गयी उसके बाद वो अपनी गांड को अपने दोनों हाथों की उँगलियों से खोलनी लगी, आंटी ने एक जोरदार झटका दिया और आंटी की गांड मेरे मुहं पर पूरी खुल गयी और अब मुझे उनकी टट्टी साफ साफ दिखने लगी। अब आंटी ने जबरदस्ती अपनी गांड को मेरे मुँह पर रख दिया और मुझसे चूसने चाटने के लिए कहा। में धीरे धीरे चूसने लगा और मुझे अब ऐसा करने में बड़ा मज़ा आ रहा था, लेकिन आंटी को बिल्कुल भी मज़ा नहीं आ रहा था क्योंकि में इस काम को करने में इतना अनुभवी नहीं था, इसलिए में धीरे धीरे अपना काम कर रहा था। फिर आंटी ने मुझे अब उठा दिया और अब वो खुद नीचे लेट गयी और उन्होंने मेरी गांड को अपने मुँह पर रख लिया और वो अपने दोनों हाथों की उँगलियों से मेरी गांड को खोलने लगी जिसकी वजह से मेरी गांड पूरी खुल गयी, दोस्तों में भी सुबह से टट्टी करने नहीं गया था इस वजह से मेरी टट्टी भी गांड में थी और जब आंटी ने मेरी गांड खोली उस वजह से मेरी थोड़ी सी टट्टी बाहर आ गई और आंटी उसको चूसने लगी और आंटी ने थोड़ी सी टट्टी खा भी ली। फिर मैंने कहा कि आंटी आप यह क्या कर रही हो? तो आंटी ने कहा कि जो मैंने तुझे सुबह खाने के लिए दिया था वो में वापस ले रही हूँ। फिर में उठ गया और आंटी को मैंने फिर से कुतिया की तरह बैठा दिया, लेकिन आंटी ने मुझसे कहा कि मेरी गांड में टट्टी है इस वजह से तुम मेरी गांड नहीं मार सकते, लेकिन मैंने उनको कहा कि में अब आपकी गांड मारना चाहता हूँ।

फिर आंटी ने एक अख़बार लिया और उस पर उन्होंने अपनी थोड़ी सी टट्टी कर दी और उसको बाहर फेंक दिया। फिर आंटी ने अपनी गांड में पानी वाली बोतल डालकर उसको धो लिया और सारा पानी उसमे डाल दिया और उसके बाद बोतल को अपनी गांड से वापस बाहर निकाल दिया। अब आंटी ने अपनी गांड में उंगली डाली और ज़ोर ज़ोर से उसको आगे पीछे करके घुमाई उसके बाद आंटी ने वो पानी बाहर एक बोतल में निकाल दिया और उसको भी बाहर फेंक दिया और अब उन्होंने मुझसे कहा कि हाँ यह ले अब तू मेरी गांड मार ले। फिर आंटी दोबारा उसी तरह से बैठ गई और मैंने अपना लंड उनकी गांड के मुहं पर रखा और एक ज़ोर का झटका मारकर अपना लंड अंदर डाल दिया मुझे ऐसा करने में बहुत मेहनत करनी पड़ी, लेकिन आंटी की गांड इतनी ज्यादा खुली नहीं थी, जिस वजह से साइड से फट गई और उससे खून बाहर निकल आया, लेकिन में तब भी आंटी की गांड में अपने लंड को वैसे ही धक्के मारता रहा। फिर कुछ देर के बाद में झड़ने वाला था, इसलिए मैंने अपना लंड आंटी की गांड से बाहर निकाला लिया और आंटी के मुँह में दे दिया। वो मेरा लंड चूसने लगी और अब हम दोनों बहुत थक चुके थे, लेकिन फिर भी पूरी रात भर हम दोनों ने उस चलती हुई गाड़ी में पांच बार सेक्स किया और फिर उसके बाद हम सो गये। फिर जब हम सुबह उठे तो मैंने देखा कि हम दिल्ली पहुंच चुके थे। हम दोनों एक दूसरे के साथ उस पूरी रात को बिताकर मज़े मस्ती करके बहुत खुश थे। फिर उन्होंने मुझे उसकी मस्त दमदार चुदाई करने की वजह से धन्यवाद दिया और उसके बाद हम बाय कहकर चल पड़े। वो अपने रास्ते पर चली गयी और में अपने घर की तरफ निकल गया ।।

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धन्यवाद …

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