राजस्थानी चाची की चूत का बुखार

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प्रेषक : राज …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राज है और में राजस्थान के अजमेर जिले का रहने वाला हूँ। दोस्तों यह मेरी कामुकता डॉट कॉम पर दूसरी कहानी है। अब आप मेरी आज की सच्ची घटना को सुनिए, इस कहानी में मैंने अपनी पड़ोसन को उसी के घर में बहुत जमकर चुदाई के मज़े दिए और अपने मन की उस इच्छा को पूरा किया, क्योंकि में कुछ दिनों से उसके सुंदर गोरे बदन को देखकर उस तरफ आकर्षित होने लगा था और में उस मौके की तलाश में था कि कब में उसको अपने सामने बिना कपड़ो के देखूंगा और में पहली बार देखकर अपने होश खो बैठा, मुझे क्या पता था कि उसकी सुंदरता उन कपड़ो के हट जाने के बाद मुझ पर जादू कर देगी, वो बिना कपड़ो के एकदम काम की देवी जैसी नजर आई और मैंने वो सब उसके साथ किया और अब आप लोग मेरी उस कहानी को पढ़े और उसके मज़े ले। दोस्तों मेरा घर अजमेर के वैशाली नगर में है और में यहीं के एक कॉलेज में बी.ए. तीसरे साल का छात्र हूँ और यह बात दो महीने पहले की है, जब हमारे घर के सामने वाले घर में एक परिवार रहता था और उस घर में जो अंकल थे, वो मेरे पापा के बहुत करीबी दोस्त बन चुके थे, उनकी एक 7 साल की बेटी है, जिसका नाम निशा है और उनकी पत्नी जिसका नाम प्रिया है। दोस्तों में अपनी पड़ोसन प्रिया आंटी को हमेशा चाची कहकर बुलाता हूँ, प्रिया चाची की उम्र 33 साल की है, वो भी हमारे ही कॉलेज से अपनी आगे की पढ़ाई कर रही है और मेरी वो प्रिया चाची दिखने में बहुत ही हॉट सेक्सी है और उनके फिगर का आकार 40-36-40 है और वो हमेशा ही साड़ी पहनती है। दोस्तों वो अपनी साड़ी भी कुछ इस तरह से पहनती है कि पीछे से उनकी गोरी गदराई हुई कमर साफ साफ दिखती है और में उनके बड़े बड़े आकर्षक बूब्स को हमेशा ही अपनी चोर नजर से छुप छुपकर देखा करता हूँ, ऐसा करने में मुझे बड़ा मज़ा आता और वो जब भी कपड़े सुखाने ऊपर छत पर आती है तो वो अपनी साड़ी को उठाकर अपने पेट पर अटका देती है, जिसकी वजह से उनके बूब्स ब्लाउज के अंदर से बड़े बड़े साफ दिखाई देते है और वो जब भी नहाकर बाथरूम से आती है तो वो सीधा उनकी बालकनी में आकर अपने गीले बाल सुखाती है और उस समय उनके गीले कपड़ो से उनका गोरा बदन और उनके बूब्स बहुत ही मस्त लगते है।

दोस्तों में किसी भी काम से उनके घर पर जाता हूँ, तब मेरी नज़र हमेशा उनके बूब्स पर ही होती है, लेकिन वो कभी भी मेरी तरफ इतना ध्यान नहीं देती है कि में घूर घूरकर उनके बूब्स को देख रहा हूँ और मेरी चाची की गांड भी इतनी मस्त है कि उसको देखकर हमेशा मेरा मन उनको एक बार छूकर महसूस करने का होता है और में हमेशा अपने मन में उनके विचार लिए उनके आगे पीछे बहुत दिनों तक ऐसे ही घूरता रहा और उनको ताकता झांकता रहा, लेकिन फिर एक दिन उस भगवान ने मेरे मन की बात को सुनकर मुझे आगे बढ़ने का वो मौका दे दिया। एक यह उस दिन की बात है, जब होली का दिन था, चाची और उनकी बेटी निशा ने मुझे अपने घर पर किसी बहाने से बुलाया और फिर मुझ पर उनकी बेटी ने पानी डाल दिया और वो मुझे अब रंग लगाने के लिए ज़िद करने लगी। फिर जब मैंने उनको रंग लगाने के लिए मना किया तो तब चाची ने मुझसे कहा कि तुम इस बच्ची का दिल रखने के लिए इससे थोड़ा सा रंग लगवा लो। तब मैंने उनको कहा कि नहीं चाची में अभी कुछ देर पहले ही नहाकर सीधा आपके पास आया हूँ, इसलिए में और रंग नहीं लगवा सकता और तभी निशा ने कहा कि मम्मी आप भैया को जबरदस्ती कसकर पकड़ लो, में इनको आज रंग लगा ही देती हूँ, आज में भी देखती हूँ कि यह मुझसे कैसे रंग नहीं लगवाते है और फिर चाची ने निशा की बात को सुनकर तुरंत मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया, जिसकी वजह से उनके एकदम मुलायम बड़े आकार के बूब्स मेरी पीठ पर छूने लगे थे। दोस्तों अपनी जिंदगी में पहली बार कोई औरत मेरे इतना करीब थी, जिसकी वजह से मेरी हालत बहुत खराब हो रही थी, लेकिन में मन ही मन बहुत अच्छा महसूस करने लगा था और अब चाची के वो दोनों नरम नरम बूब्स मेरी पीठ से रगड़ रहे थे और में उनकी गोलाई को बहुत अच्छी तरह से महसूस कर रहा था और निशा मेरे चेहरे पर रंग लगा रही थी। उस समय मेरी गांड अपनी चाची की चूत से चिपकी हुई थी। फिर जब निशा ने मुझे रंग लगा दिया, तब वो कहने लगी कि मम्मी अब आप भी भैया को रंग लगा लो, लेकिन दोस्तों इस बार मैंने चाची से अपने रंग लगाने की बात सुनकर बिल्कुल भी आना कानी नहीं की और अब चाची ने मुझसे कहा कि देख अगर ज़्यादा नाटक करेगा तो ग़लती से यह रंग आँख में भी जा सकता है। अब में बिना हिले अपने वो रंग चाची से लगवाने लगा और ऐसा करने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था, आंटी ने मेरे पूरे चेहरे पर अपने नरम हाथों से धीरे धीरे बहुत प्यार से वो रंग लगाया और फिर उन्होंने मेरे हाथ पर भी रंग लगाया।

दोस्तों उस दिन मैंने निक्कर पहनी हुई थी और चाची नीचे झुककर मेरे पैरों पर भी रंग लगाने लगी और मैंने उनको ऐसा करने से मना कर दिया, लेकिन आंटी ने ज़बरदस्ती वो रंग लगा दिया और उसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि अब तू तेरी यह शर्ट भी ऊपर कर ले। फिर मैंने उनको कहा कि देखो चाची जी आप तो मुझे रंग लगा रही है, लेकिन जब में भी आपको रंग लगाऊंगा तब आपका क्या हाल होगा, क्या इसका आपको पता है? चाची ने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए मुझसे कहा कि हाँ आज तो तू भी लगा लेना। फिर में उनके मुहं से यह बात सुनकर बहुत खुश हुआ, क्योंकि मुझे अब उनको अच्छी तरह से छूने के साथ साथ रंग लगाने का मौका जो मिलने वाला था, इसलिए में चुपचाप उनसे रंग लगवाता रहा और जैसे उन्होंने कहा में करता रहा। फिर जब मेरी रंग लगाने की बारी आई तो चाची ने मुझसे रंग लगवाने से साफ मना कर दिया और उन्होंने अपने कमरे के अंदर जाकर उसका दरवाजा भी बंद कर दिया। फिर मैंने उनको बार से बहुत बार आवाज देकर कहा कि चाची यह आपकी बिल्कुल बात ग़लत है, देखो आपने अभी मुझे जबरदस्ती रंग लगा दिया है और अब मेरी बारी आई है तो आप मुझसे मना कर रही है, लेकिन फिर भी चाची ने दरवाजा नहीं खोला, जिसकी वजह से में बहुत उदास हो गया और में कुछ देर उनके घर पर रुकने के बाद वापस अपने घर चला आया। फिर करीब दो घंटे के बाद चाची के भाई और उनके साथ वो कुछ रिश्तेदार भी होली खेलने आ गए, जिसकी वजह से चाची को बाहर उनके सामने आना पड़ा और तब उन्होंने चाची को जबरदस्ती पकड़कर रंग लगा दिया और उन्होंने अंकल को भी रंग लगाया। फिर थोड़ी देर के बाद वो सभी लोग वापस चले गये और चाची अपने घर का दरवाज़ा बंद करना भूल गई और वो रंग से भरा हुआ उनका आँगन पानी डालकर धोने लगी। तभी में उनके घर पर चला गया और मुझे देखकर वो उठकर दोबारा अपने कमरे में भागने लगी, लेकिन तभी मैंने तुरंत उनका पीछे से हाथ पकड़कर उनको खींच लिया, जिसकी वजह से मेरा लंड उनकी गांड से जाकर टकरा गया और अब में उनको रंग लगाने लगा और उनके चेहरे पर रंग लगाते लगाते मेरा एक हाथ उनके बूब्स पर जा लगा। तब मैंने महसूस किया कि उनके बूब्स इतने मुलायम थे कि उसकी वजह से मेरा लंड खड़ा होकर 6 इंच लंबा हो गया, क्योंकि इससे पहले मैंने कभी किसी के बूब्स को छूकर महसूस नहीं किया था और उनको रंग लगाने के बाद में वापस अपने घर चला गया। फिर जब में अपने बाथरूम में जाकर नहा रहा था, तब मेरे विचारों में सिर्फ़ चाची ही आ रही थी, जिसकी वजह से मेरा लंड अब झटके मारने लगा था, उसी समय मैंने बाथरूम में उनके नाम की मुठ मारकर अपने लंड की प्यास को शांत किया और मुझे ऐसा करके जन्नत के जैसा मज़ा आया। उसके बाद में कुछ देर बाद बाहर आ गया। एक दिन अंकल ने मेरे पापा से कहा कि अंकल के मामा जी की म्रत्यु हो गई है और उस वजह उनको उसी समय जैसलमेर जाना है, लेकिन अभी निशा के पेपर है, इसलिए में अकेला ही वहां पर जा रहा हूँ, प्लीज आप लोग प्रिया और नेहा का अपनी तरफ से पूरा पूरा ध्यान रखना, वैसे में दो दिन के बाद वापस आ जाऊंगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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दोस्तों यह बात मेरी मम्मी ने मुझे बताई और उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारे अंकल दो दिन के लिए बाहर गए हुए है, तो इसलिए तुझे आज रात को निशा और मेरी प्रिया चाची के घर पर उनके साथ ही रहना है, क्योंकि वो घर में अकेली रहेगी और फिर मुझे उनके मुहं से यह बात सुनकर बड़ा मज़ा आया और में खुश हो गया। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि आज में अपनी चाची को जी भरकर देखूंगा, मुझे उनके पास पूरी एक रात रहने का मौका मिलेगा और किस्मत अच्छी रही तो में आगे कुछ उनके साथ कर भी सकता हूँ। फिर में खाना खाकर ख़ुशी ख़ुशी उनके घर पर सोने के लिए चला गया। दोस्तों में बता दूँ कि उनके घर में दो कमरे है, वहां पर पहुंचते ही चाची ने मुझसे कहा कि तू भी आज हमारे पास इस कमरे में ही सो जा, दूसरे कमरे में अकेला सो कर तू क्या करेगा, यहाँ रहेगा तो हम से बातें ही कर लेना, वैसे भी मैंने तेरा बिस्तर भी यहीं पर लगा दिया है। फिर मैंने उनसे कहा कि हाँ ठीक है और फिर में भी उनके पास ही लेट गया और हम सभी ने कुछ देर बातें करने के बाद हम सो गए और फिर देर रात को जब मेरी नींद खुली और में पानी पीने के लिए उठा, तो मैंने देखा कि चाची की साड़ी का पल्लू उनके बदन से नीचे गिरा हुआ था और उनके ब्लाउज के दो बटन भी खुले हुए थे, जिसमें से साफ साफ नजर आ रहा था कि उन्होंने अपने ब्लाउज के अंदर काली रंग की ब्रा पहनी हुई थी और उनके बूब्स बहुत ही बड़े एकदम गोरे थे, एकदम सीधा सोने की वजह से वो बूब्स बड़े गले के ब्लाउज से उभरकर बाहर आ रहे थे और उनका वो गोरा गोरा मुलायम पेट भी अब मुझे साफ दिखाई दे रहा था, जिसको में करीब दस मिनट तक लगातार घूर घूरकर देख रहा था और मेरा मन अपनी चाची के उस गोरे सेक्सी बदन को हाथ लगाकर महसूस करने का हो रहा था, उसकी वजह से मेरे होश उड़ चुके थे और मेरा दिमाग वो सेक्सी द्रश्य देखकर अपना काम करना पहले से ही बंद कर चुका था। तभी अचानक से चाची की नींद खुल गई और उन्होंने मुझे अपने सामने खड़ा हुआ देखकर मुझसे पूछा कि प्रवीण तुम यहाँ क्या कर रहे हो, क्या तुम्हें नींद नहीं आ रही है? तुम्हें कुछ परेशानी है तो मुझे बताओ में उसको दूर कर देती हूँ। फिर में एकदम से डर गया और मैंने उनसे कहा कि नहीं मुझे कोई भी परेशानी नहीं है चाची, फिर में तो बस पानी पीने के लिए उठा था और अब में वापस बिना पानी पिये ही जाकर सो गया, लेकिन मुझे पूरी रात नींद नहीं आई और में सारी रात चाची के उस गोरे बदन के बारे में ही सोच रहा था और अब भी मुझे वो सब नजर आ रहा था। फिर सुबह जब में सोकर उठा तो मैंने देखा कि तब तक निशा अपने स्कूल जा चुकी थी और चाची उस समय रसोई में अपना काम कर रही थी और जब में उठा तो चाची ने मुझसे कहा कि प्रवीण में तेरे लिए चाय बना देती हूँ और जब चाची रसोई में जाकर मेरे लिए चाय बनाकर लाई, तब में अख़बार पढ़ रहा था और उस दिन शनिवार था और जब भी उस दिन रंगीन अख़बार आता था, उसमें फिल्मो की ख़बरे आती थी, उस अख़बार में उस दिन मल्लिका शेरावत की बहुत ही हॉट, सेक्सी फोटो छपी थी और में उस फोटो को बहुत ध्यान से देख ही रहा था कि तभी चाची भी आ गई और वो मुझसे पूछने लगी, क्या यह तेरी पसंद की हिरोईन है? तब मैंने उनको कहा कि नहीं और उसी समय उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या तूने इसकी मर्डर फिल्म देखी है? और अब उनके मुहं से वो बात सुनकर मेरी हिम्मत थोड़ी बढ़ गयी। फिर मैंने उनसे पूछ लिया कि क्या चाची आपने देखी है वो फिल्म? तब उन्होंने मुझसे कहा कि हाँ तेरे अंकल और मैंने एक बार उसकी वो फिल्म सीडी पर देखी है। फिर मैंने उनसे कहा कि चाची जी जहाँ तक मुझे अंदाजा है, यह तो बहुत ही गंदी फिल्म है और इस फिल्म में बहुत ही गंदे गंदे द्रश्य भी है।

फिर आंटी ने मुझसे पूछा कि प्रवीण क्या तेरी कोई गर्लफ्रेंड है? तब मैंने उनको कहा कि नहीं है और मैंने उनको कहा कि हाँ, लेकिन मेरे एक दोस्त की जरुर एक गर्लफ्रेंड है और वो उसके साथ हर कभी ग़लत ग़लत काम किया करता है। अब चाची ने मुझसे पूछा कि क्या ग़लत काम? क्या वो उसके साथ सेक्स करता है? उसी समय मैंने उनको कहा कि हाँ, तब उन्होंने मुझसे कहा कि यह कोई ग़लत काम होता है? और अब मैंने उनसे कहा कि चाची में समझता हूँ कि आप क्या कहना चाहती है, लेकिन मैंने आज तक किसी लड़की को एक बार छुआ भी नहीं है, लेकिन मेरा मन बहुत होता है कि में किसी लड़की को किस करूँ और उसको छूकर महसूस करूं और उसी समय मैंने चाची को कहा कि चाची आप मुझे बहुत ही अच्छी लगती है, प्लीज क्या में आपको सिर्फ़ एक बार किस कर दूँ, अगर आपको मेरी इस बात का बुरा ना लगे तो? दोस्तों मेरी उस बात को सुनकर पहले तो चाची ने मुझसे कहा कि नहीं तुम मेरे बेटे जैसे हो, यह तुम्हारा काम इसलिए मेरे साथ बिल्कुल ग़लत होगा, इसके लिए तुम अपनी कोई गर्लफ्रेंड बना लो। उसके बाद तुम उसके साथ जी भरकर किस करते रहना। फिर मैंने दोबारा उनसे कहा कि चाची प्लीज सिर्फ़ एक बार आप मुझे किस करने दीजिए ना प्लीज, किसी को भी इसके बारे में पता नहीं चलेगा। दोस्तों पहले मना करने के बाद चाची ने कुछ देर सोचकर मुझे कहा कि हाँ ठीक है, लेकिन देख तू यह बात बाहर कभी भी किसी को बताना मत, वरना तेरे साथ मेरी बहुत बदनामी होगी और तू मुझे सिर्फ़ एक बार ही किस करेगा। फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है, मुझे आपकी सभी बातें मंजूर है और आप जैसा चाहती हो ठीक वैसा ही होगा।

दोस्तों उस समय चाची ने नीले रंग की साड़ी पहनी हुई थी और वो हमेशा साड़ी इतनी टाईट पहनी थी कि उनके बूब्स उस ब्लाउज में और भी ज्यादा बड़े बड़े लग रहे थे और अब चाची अपनी दोनों आखें बंद करके मेरे पास बैठ गई और अब उन्होंने मुझसे कहा कि देख तू मेरे साथ कुछ भी शरारत करने की कोशिश नहीं करेगा और सिर्फ़ एक ही बार किस करेगा। फिर मैंने उनको हाँ कहकर उनके नरम गुलाबी होंठो पर किस करना शुरू कर दिया। फिर मैंने सही मौका देखकर उनके पूरे होंठो को अपने मुहं में ले लिया और में उनको चूसने लगा। तभी चाची ने अपने एक हाथ का इशारा करके मुझसे कहा कि बस अब बंद कर दे और उसी समय मैंने कुछ सेकिंड उनके रसभरे होंठो से दूर हटकर कहा कि नहीं चाची आज में नहीं रुक सकता, में उनको लगातार चूमता रहा और मुझे ऐसा करने में बड़ा मज़ा आ रहा था और फिर मैंने कुछ देर बाद जोश में आकर उनको पीछे बेड पर हल्का सा धक्का दे दिया और में तुरंत उनके पेट के ऊपर चढ़कर बैठ गया और अब मैंने उनके गोरे गोरे गाल, गले पर भी किस करना शुरू कर दिया।

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दोस्तों मुझे थोड़ी देर तक तो चाची ने मना किया मेरे जोर जबरदस्ती का उन्होंने कुछ देर विरोध जरुर किया, लेकिन फिर वो धीरे धीरे शांत होने लगी थी और उस बात का फायदा उठाकर में अब मन ही मन बहुत खुश होकर उनको लगातार किस कर रहा था। फिर मैंने उनकी वो साड़ी उतारी, जिसकी वजह से अब मेरे सामने उनके बड़े बड़े बूब्स सिर्फ़ ब्लाउज में थे और मैंने तुरंत उनका ब्लाउज भी खोलना शुरू कर दिया और एक एक करके मैंने वो सारे हुक खोल दिए, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पेटिकोट में थी, लेकिन में अब भी नहीं रुका और मेरे सर पर तो जैसे कोई भूत सवार था। फिर उनकी ब्रा को भी खोलने के बाद में अपने सामने उनके एकदम गोरे बूब्स जिसकी निप्पल हल्के भूरे रंग की, जो अब जोश में आकर उठी हुई थी और में वो देखकर बिल्कुल पागल होकर उनके दोनों बूब्स को मैंने ज़ोर ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया और वो छटपटा रही थी, क्योंकि उनको मेरे उस पागलपन की वजह से बहुत दर्द हो रहा था, में उनकी निप्पल को ज़ोर लगाकर निचोड़ रहा था। फिर कुछ देर के बाद मैंने उनके मुलायम पेट पर भी बहुत से किस किए और अब में उनकी निप्पल को अपने मुहं में रखकर धीरे धीरे चूसने और दूसरे बूब्स को सहलाने भी लगा था, जिसकी वजह से वो अब गरम होकर सिसकियाँ लेने लगी थी, जिसकी वजह से में समझ चुका था कि वो अब पूरे जोश में आ चुकी थी और मुझे आगे बढ़ने का मौका भी मिल गया था। फिर उसी समय मैंने ज्यादा देर ना करते हुए उनके पेटिकोट का नाड़ा भी खोल दिया। तब मैंने देखा कि वो गुलाबी रंग की पेंटी पहने हुए थी और झट से मैंने उनकी पेंटी को भी उतार दिया और फिर मैंने अपनी चकित आखों से देखा कि उनकी चूत पर थोड़े से बाल भी थे। तभी चाची ने मेरा सर पकड़कर मेरा मुहं उनकी चूत के पास लगा दिया और में उनका वो इशारा तुरंत समझकर अब उनकी गीली रसभरी चूत को अपना पूरा मुहं अंदर घुसाकर चूसने लगा और अपनी जीभ से चूत की दोनों गुलाब की पंखुड़ियों को सहलाने और दाने को टटोलने लगा था, जिसकी वजह से चाची अब अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर मेरे सर को अपनी चूत पर ज़ोर से दबाकर जोश में मचल रही थी और में अपनी जीभ से उनकी चूत की चुदाई करता जा रहा था। दोस्तों कुछ भी कहो, लेकिन उनकी चूत के स्वाद के साथ साथ खुशबू भी बहुत शानदार थी, जिसकी वजह से में एकदम मदहोश हो गया था और थोड़ी देर तक चूत को चूसने के बाद मैंने अब उसके दोनों पैरों को फैलाकर अपना लंड चाची की गीली कामुक चूत में डालना शुरू कर दिया था। दोस्तों अब चाची को मेरा मोटा लंड अंदर लेने में बहुत दर्द हो रहा था, क्योंकि वो उनकी चूत को फैलाता, फाड़ता हुआ धीरे धीरे जगह बनाकर अंदर जा रहा था, लेकिन वो मुझसे कह रही थी कि प्लीज थोड़ा जल्दी से अब तू इसको मेरे पूरा अंदर डाल दे प्रवीण आह्ह्ह्हह्ह ऊईईईईईईई माँ में मर गई, मुझे इससे पहले कभी भी इतना दर्द नहीं हुआ जितना आज हुआ है। अब मैंने चाची की बातें सुनकर उनकी परेशानी को समझकर उसी समय चाची की कमर के नीचे एक तकिया लगा दिया और उन्होंने अपने अपने दोनों पैरों को मेरे कंधे पर रख दिया, जिसकी वजह से उनकी चूत अब पूरी तरह से खुल गई।

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अब में धीरे धीरे उनकी चूत में अपना लंड डालने लगा और कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उनकी गोरी चूत में जाकर घुस गया और वो सीधा उनकी बच्चेदानी से टकरा गया और चाची ज़ोर से चिल्ला उठी, आह्ह्ह्हह्ह ऊह्ह्ह्ह प्लीज प्रवीण थोड़ा धीरे धीरे करो, वरना आज में इस दर्द की वजह से मर ही जाउंगी प्लीज थोड़ा सा धीरे करो, तुम्हारा लंड बहुत मोटा है, इतनी देर तक लगातार मैंने इससे पहले कभी अपनी चुदाई नहीं करवाई, तुम अब जल्दी से यह खेल खत्म करो, लेकिन में अब भी उनकी चूत पर ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहा था और उनके मुहं से ज़ोर की आवाज़ लगातार बाहर निकल रही थी उम्म्म्ममममम आह्ह्ह्ह उफफ्फ्फ्फ़ उस दिन हम दोनों ने करीब एक घंटे तक सेक्स किया और उस बीच चाची एक बार झड़ चुकी थी, जिसकी वजह से वो बिल्कुल निढाल होकर पड़ी थी और में उनकी चूत से बहते हुए रस की वजह से चिकनी चूत में अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा और कुछ देर धक्के देने के बाद मैंने भी अपना वीर्य उनकी ही चूत में तेज धक्को के साथ डाल दिया। अब चाची मेरे वीर्य को अपनी चूत में महसूस करके अपनी दमदार चुदाई की वजह से पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रही थी और मैंने ध्यान से देखा कि सेक्स करने के बाद चाची का मुहं अब बिल्कुल लाल हो गया था और उनकी आखों में से आँसू भी बाहर निकल रहे थे। तभी मैंने उनको प्यार से एक बार किस किया और कहा कि चाची आज तो आपने मुझे एक नया जीवन दे दिया है, जिसकी कल्पना अब तक मैंने कभी नहीं की थी। फिर चाची ने कहा कि हाँ वो सब ठीक है, लेकिन कुछ भी कहो तुम हो बड़े छुपे रुस्तम मुझे क्या पता था कि तुम इस काम के बारे में इतना सब इतनी अच्छी तरह से जानते हो, वाह मज़ा आ गया और तुम तो इस काम में बहुत ज्यादा अनुभवी हो और मुझे आज पहली बार पता चला, मना करने के बाद भी आज तुमने मेरे साथ यह सब किया है, लेकिन अब प्लीज तुम किसी को इस बात के बारे में कभी भी मत बताना, वरना तुम्हारे साथ साथ मेरी भी बहुत बदनामी होगी। फिर मैंने उनको कहा कि इस बात के बारे में सोचकर आप ज्यादा परेशान कभी मत होना, मेरी तरफ से कोई भी यह बात नहीं जान सकता और फिर चाची ने जल्दी से अपने कपड़े पहने और वो उठकर सीधी बाथरूम में नहाने चली गई और उनके वापस आने के बाद में भी अपने घर चला गया और दूसरे दिन अंकल भी वापस आ गये और उस दिन के बाद मैंने अच्छा मौका देखकर उनके साथ दोबारा सेक्स करने के लिए उनको बहुत बार कहा, लेकिन चाची जी ने मुझे हर बार मना कर दिया और दोस्तों उस चुदाई के बाद आज तक भी मैंने उनके साथ दोबारा सेक्स नहीं किया है, में हर बार उनको दूर से ही देखता रहता हूँ, उन्होंने मुझे आगे बढ़ने का कोई मौका नहीं दिया, लेकिन अगर मुझे दोबारा उनकी या किसी की भी चुदाई का मौका मिला तो में उसको आप लोगों तक जरुर लिखकर पहुंचा दूंगा ।।

धन्यवाद …

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