रंडी की जंगल में मस्त चुदाई

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प्रेषक : प्रतीक …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम प्रतीक है और यह मेरी कामुकता डॉट कॉम पर पहली कहानी और मेरा सच्चा सेक्स अनुभव है, जिसको आज में आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ। वैसे में पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके बहुत मज़े लेता आ रहा हूँ और आज में अपनी भी एक सच्ची घटना आप लोगों के लिए लेकर आया हूँ और अब आप सभी का समय खराब ना करते हुए में सीधे अपनी आज की कहानी पर आता हूँ। दोस्तों में 25 साल का एक अच्छा दिखने वाला, गोरा भूरा अच्छी कदकाठी का लड़का हूँ और मुझे शुरू से ही सेक्स करना और सेक्सी कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता। दोस्तों यह तब की बात है जब में चुदाई करने के लिए बहुत तड़प रहा था, क्योंकि उससे कुछ दिनों पहले ही मेरी गर्लफ्रेंड से भी मेरा बात करना उससे मिलना एकदम बंद हो चुका था और जिस वजह से मैंने बहुत दिनों से किसी की चुदाई भी नहीं की। मेरा लंड अब किसी भी चूत को जमकर चोदने के लिए मचल रहा था। फिर मैंने अपने कुछ दोस्तों से अभी कुछ दिनों पहले ही सुना था कि हमारे शहर से करीब बीस किलोमीटर दूर एक जंगल है। वहां पर रंडियों का एक छोटा सा गाँव है और जहाँ पर हर एक तरह की बहुत सारी रंडियां मिलती है। उनको बस कुछ पैसे दो और जितनी देर चाहो उनकी चुदाई का पूरा मज़ा लो।

फिर अपने दोस्तों की वो चुदाई की बातें सुनकर में एकदम पागल हो गया, इसलिए में चूत की तलाश में एक दिन में और मेरा एक दोस्त उधर ही उस जंगल की तरफ घूमने चले गए, क्योंकि मुझे अब कैसी भी रंडी मिल जाए वो मुझे चुदाई के लिए चलेगी। मेरे मन में यह विचार चल रहे थे और मुझे तो बस उसकी चूत में अपना लंड डालकर लंड का पानी उस रंडी की चूत में निकालकर अपने लंड को कैसे भी शांत करना था। में एक चूत की तलाश में था, लेकिन बहुत देर ढूंढने के बाद भी मुझे कोई भी चूत मतलब रंडी नहीं मिली, जिसकी वजह से में मन ही मन बहुत उदास हो गया और फिर ऐसे ही करीब 5-6 दिन तक हम हर दिन वहां पर जाते, लेकिन हमें कोई नहीं मिलती और अब में यह काम हर दिन करके बहुत उदास और थक चुका था और में चुदाई के लिए कुछ ज्यादा ही तड़प भी रहा था, क्योंकि मेरी गर्लफ्रेंड से मेरी लड़ाई हुए अब बहुत दिन हो गये थे और मुझे इस बीच कोई नई गर्लफ्रेंड भी नहीं मिली थी और मेरा वो कमीना दोस्त हर रोज़ मुझे अपनी उसकी गर्लफ्रेंड के साथ उसकी चुदाई की नई नई कहानियाँ सुनाता था, जिसकी वजह से मेरा लंड और भी ज्यादा जोश में आकर खड़ा हो जाता और चुदाई के लिए तरसने लगता। फिर एक दिन मेरी उस खराब किस्मत ने मेरा साथ दे ही दिया और एक दिन जब हम दोनों जंगल की तरफ जा रहे थे तो हमे रास्ते से एक औरत सामने से आती हुई नज़र आई और वो उस समय पूरे नशे में थी और वो रास्ते में आने जाने वालो से लिफ्ट माँग रही थी। दोस्तों वो दिखने में इतनी ज़्यादा सुंदर नहीं थी और वो थोड़ी सी सांवली भी थी। उसने पुराने कपड़े मतलब साड़ी और ब्लाउज पहना हुआ था वो वहीं के आसपास से किसी गाँव से थी। फिर जब हम दोनों उसके पास पहुंचे तो उसने हमें भी रोक लिया और हम रुके तभी हम उससे कुछ पूछते उससे पहले ही वो हम दोनों से पूछने लगी कि क्या तुम्हे चुदाई करनी है? एक आदमी का 200 रूपया लगेगा। दोस्तों उसके मुहं से वो बात सुनकर में मन ही मन बहुत खुश हो गया, क्योंकि मुझे चुदाई करने के लिए एक चूत मिल गई थी, चाहे वो कैसी भी हो और मैंने अभी तक उसको नहीं देखा था, लेकिन फिर भी में बहुत खुश था और उसकी चुदाई के सपने देख रहा था। अब में तो कितने पैसों में भी उसकी चुदाई के लिए तैयार था, लेकिन मेरा दोस्त उससे थोड़ा पैसा कम कम करने के लिए बोल रहा था और अब वो रंडी ना नकुर करने लगी, लेकिन उसको भी आज सुबह से कोई भी ग्राहक नहीं मिला था, इसलिए वो भी अब मान गई और 300 में वो हम दोनों से उसकी चुदाई करवाने को तैयार हो गई और फिर हमने उससे चुदाई करने की जगह के बारे में पूछा जहाँ पर कोई ख़तरा ना हो और हम मज़े से चुदाई का आनंद ले सके? तो उसने हमसे बोला कि हम लोग जंगल के थोड़ा अंदर चलते है और में एक जगह जानती हूँ वहां पर कोई भी नहीं आएगा और तब वो मेरे दोस्त से कहने लगी कि तुम यह तुम्हारी गाड़ी को यहीं पर रोड से एक तरफ खड़ा कर दो, यहाँ पर कुछ नहीं होता कोई नहीं आता।

फिर हम उसका कहना मान गये और वहीं पर सड़क के नीचे अपनी बाइक को खड़ा करके हम उसके साथ जंगल के अंदर चलने के लिए बोले, क्योंकि वो बिल्कुल सुनसान जंगल था और वहां पर कोई डर नहीं था और अब वो हमारे आगे आगे चलने लगी। मेरे दोस्त ने कुछ देर बाद ब्लाउज के ऊपर से उसके बूब्स पकड़ लिए और वो उनको दबाने लगा। तभी वो उसकी तरफ देखकर उसको गाली देकर बोली कि अरे बेसबर कुत्ते तू मेरे साथ सब कुछ कर लेना, पहले तू जंगल के अंदर तो चल, क्या मेरी चुदाई और मेरे साथ पूरे मज़े तू यहीं बीच रास्ते में ले लेगा तो वहां पर पहुंचकर क्या करेगा। दोस्तों वो कुछ देर पैदल चलने के बाद हमे एक साफ सुथरे पेड़ के नीचे ले गयी, जिसके नीचे बहुत सफाई शांति भी थी और अब वो हम दोनों से कहने लगी कि में तुम एक एक से अपनी चुदाई करवाऊँगी एक साथ नहीं और हम उसकी वो बात मान गये, क्योंकि हमे तो बस चुदाई से मतलब था और मेरा दोस्त मेरी उत्सुकता को देखकर मुझसे बोला कि पहले तू इसको चोद ले, तू इसकी चुदाई के मज़े ले और उसके बाद में अपना काम इसके साथ थोड़ा आराम से कर लूँगा, क्योंकि तुम्हे चुदाई किए हुए बहुत समय हो गया है और तुझे इसकी ज्यादा जरूरत है और वो इतना कहकर हम दोनों से थोड़ा दूर चला गया और किसी के आने जाने पर नजर रखने लगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब में उस रंडी के पास गया और उसके बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा और उसके निप्पल को निचोड़ने लगा और मैंने अपने हाथों से छुकर महूसस किया कि उसने उस समय ब्रा नहीं पहनी थी। उसके बूब्स थोड़े से ढीले भी थे, लेकिन उस समय तो हम चुदाई के लिए बहुत तड़प रहे थे, इसलिए जो मिल जाए वही हमारे लिए सही था। फिर उस रंडी ने अपने पास से एक कपड़ा निकाला और उस कपड़े को उसने नीचे ज़मीन पर बिछा दिया और वो उस पर तुरंत नीचे लेट गयी और अब वो मुझे अपने ऊपर आने के लिए बोल रही थी। फिर में जैसे ही नीचे झुका तो उसके मुहं से मुझे देसी दारू की बदबू आ रही थी, लेकिन उस समय कौन इस बातों पर इतना ध्यान देता? इसलिए में उसके ब्लाउज को खोलने लगा, तो वो मुझसे मना करके बोली कि खोलो मत और उसने अपने ब्लाउज को खुद ही ऊपर खींच दिया जिसकी वजह से मेरे सामने उसके काले बड़े निप्पल वाले बूब्स मेरे सामने आ गए जो ज्यादा ढीले होने की वजह से बहुत नीचे तक लटक रहे थे और में उसके बूब्स को दबा रहा था और उसकी निप्पल को भी मसल रहा था। में बहुत खुश था और अब जोश में आकर अपने एक हाथ से उसकी साड़ी और पेटीकोट को उठाकर मैंने उसकी चूत पर रख दिया। तब मैंने देखा कि उसने काले रंग की पेंटी पहनी हुई थी और पेंटी की साईड से मैंने उसकी चूत में अपनी एक उंगली को उसकी चूत के अंदर डाल दिया और में अपनी ऊँगली से उसकी चुदाई करने लगा। मेरी ऊँगली उसकी गीली फटी हुई चूत में बहुत आराम से अंदर बाहर हो रही थी। फिर वो मुझसे बोली कि प्लीज अब तुम जल्दी से मेरी चुदाई कर दो और यह काम तुम बाद में भी कर सकते हो वरना कोई आ जाएगा तो तुम्हारा लंड ऐसे ही खड़ा तमाशा देखता रह जाएगा और  तुम्हारे हाथ से मेरी चुदाई का यह मौका चला जाएगा।

फिर उसी समय मैंने उसकी बात को सही मान कर बिना देर किए उसकी पेंटी को एक झटका देकर पूरा नीचे उतार दिया और उसके बाद मैंने अपनी जींस को और उसके साथ साथ अपनी अंडरवियर को भी नीचे उतारकर एक साइड में रख दिया, जिसकी वजह से में अब नीचे से पूरा नंगा था और लंड तनकर बहुत कड़क हो चुका था। फिर मैंने उसको मेरा लंड चूसने के लिए बोला, लेकिन वो यह काम करने के लिए मुझसे मना करने लगी और वो मुझसे बोली कि वो कभी भी किसी का लंड नहीं चूसती चाहे तुम मेरी कैसे भी चुदाई कर सकते हो मेरी गांड भी तुम मार सकते हो। फिर मैंने उससे कहा कि तुम अगर मेरा लंड नहीं चूसोगी तो कम से कम थोड़ा सा अपने हाथों से हिला दो और इतना तो तुम कर सकती हो ना और अब वो बिना कुछ बोले मेरी इस बात को मान गयी और वो बहुत ही प्यार से मेरे लंड को पकड़कर हिलाने लगी और में भी उसके ढीले बूब्स को दबा रहा था और थोड़ी देर बाद जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैंने उसको एक कंडोम दे दिया और उससे बोला कि तुम अब इसको मेरे लंड पर पहनाओ। मेरी बात को सुनकर उसने पहले लंड को पकड़कर अच्छे से हिलाया यौर फिर कंडोम को उस पर चढ़ा दिया।

अब में उसको लेटाकर उसकी साड़ी और पेटीकोट को ऊपर करके उसकी चूत पर ठीक जगह पर अपने लंड को सेट करके में उसके ऊपर लेट गया और धीरे से उसकी चूत में अपने लंड को डालने लगा। दोस्तों उस समय मैंने महसूस किया कि उसकी चूत बिल्कुल भी टाइट नहीं थी, क्योंकि वो एक रंडी थी और उसकी चूत को अब तक बहुत सारे लंड ने हर दिन चोदा, जिसकी वजह से मेरा लंड एक ही बार में फिसलकर पूरा का पूरा अंदर चला गया, लेकिन दोस्तों ऐसे समय जो भी मिल जाए उसी से काम चलाना ठीक रहता है और ठीक वैसा ही मैंने भी किया। में अब उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाते हुए अपने लंड से उसकी फटी चूत मतलब उस भोसड़े में धक्के लगाता जा रहा था और उसकी लगातार चुदाई करते हुए में उसके बूब्स को भी ज़ोर से दबा रहा था और उसके निप्पल को भी खींच रहा था और उनको भी जोश में आकर निचोड़ रहा था। फिर कुछ देर बाद मैंने उसके दोनों पैरों को अपने दोनों कंधो के ऊपर रख लिया और उसके बाद मैंने दोबारा अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और धक्के देने लगा, वो भी मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी और वो बार बार मुझसे बोल रही थी कि प्लीज थोड़ा सा धीरे करो आह्ह्हह्ह्ह् उफ्फ्फ्फ़ प्लीज थोड़ा आराम से करो, लेकिन में तो अपनी पूरी तेज़ी के साथ धक्के देकर उसको चोद रहा था, क्योंकि मैंने बहुत दिनों से चुदाई नहीं की थी और में वो सारी कसर आज उसकी चूत में अपने लंड को अंदर बाहर करके निकाल रहा था।

फिर करीब दस मिनट की दमदार चुदाई के बाद में उसकी चूत में कंडोम में ही झड़ गया और में उसके निप्पल को खींचकर उठ गया और मैंने वो कंडोम अपने लंड से निकालकर वहीं पर फेंक दिया। उसके बाद मैंने एक बार फिर से उसके बूब्स को दबा दिया और में वहां से उठकर चला गया और मैंने अपने दोस्त को उसके पास भेज दिया और अब में दूर से उन दोनों की चुदाई को देख रहा था। मेरे दोस्त ने पहले उसकी चूत में बहुत देर तक अपनी ऊँगली डाली और फिर उसके बाद उसने ऊपर लेटकर बहुत देर तक चुदाई के मज़े लिए। उसने उस रंडी को अपने सामने घोड़ी बनाकर अपना लंड डाल दिया और जोरदार धक्के देकर उसकी चुदाई के मज़े लिए और जब उसका भी काम पूरा हो गया तो हमने उस रंडी को पैसे दिए और वहां पर से निकल गये, लेकिन कुछ भी कहो खुली हवा में किसी रंडी को चोदकर मुझे बहुत अच्छा लगा, जिसकी मुझे उम्मीद भी नहीं थी और में उस मज़े को किसी भी शब्दों में लिखकर आप सभी को नहीं बता सकता ।।

धन्यवाद …

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