साधू की बीवी के साथ कामसूत्र

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प्रेषक : महेश …

हैल्लो दोस्तों, में कई दिनों से कामुकता डॉट कॉम की स्टोरीयाँ पढ़ रहा हूँ तो मुझे लगा कि मुझे भी अपनी स्टोरी जरूर शेयर करनी चाहिए, जो मैंने कई दिनों से अपने भीतर समेटकर रखी हुई है। अब में जो स्टोरी आपको बताने जा रहा हूँ शायद इन बातों अभी दुनिया अनजान है। आज से 14 साल पहले की बात है। में अपने घर से किसी कारण से भाग गया था, जब में 18 साल का था तो में भागकर बनारस जा पहुँचा। अब मेरे पास रहने के लिए जगह नहीं थी तो में गंगा किनारे बैठा रहा और अब मुझे वहाँ बैठे काफ़ी समय बीत गया और रात भी काफी हो गयी थी। अब मुझे भूख भी लगी थी, लेकिन मेरे पास खाने को कुछ नहीं था।

अब में सिर्फ़ गंगा के बहते पानी को देख रहा था कि अचानक से मेरे पीछे से मुझे कोई कुछ कह रहा है ऐसी आवाज़ सुनाई दी, तो मैंने मुड़कर देखा तो एक 40-45 साल का साधु जैसे वेश में कोई था। फिर उसने मुझसे पूछा कि भागकर आए हो क्या? तो में तो चौंक गया और दबी हुई आवाज़ में हाँ कहा। तो उसने कहा कि खाना खाया, तो मैंने कहा कि नहीं, तो उसने कहा कि चलो मेरे साथ। अब में समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ? लेकिन मुझे भूख बहुत ज़्यादा लगी थी तो में उनके साथ चला गया। फिर जब में उनके घर पहुँचा, तो वो काफ़ी अमीर घर से दिख रहा था। फिर उन्होंने अपनी पत्नी को बुलाया, जो अपने बेडरूम में आराम कर रही थी। फिर वो बाहर आई और उसको देखकर मुझे अच्छा लगा, वो बहुत ही सुंदर थी। जैसे किसी मेनका ने फिर से किसी ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए अवतार लिया हो।

फिर उन्होंने मुझे खाना देने को कहा तो फिर उनकी पत्नी किचन में चली गयी। फिर मैंने उनका नाम पूछा, तो उन्होंने अपना नाम मोहन बताया। फिर मोहन ने मुझे हाथ धोने के लिए बुलाया, तो में अपने हाथ धोकर खाना खाने बैठा। फिर उन्होंने मुझे बहुत ही प्यार से खाना दिया और खाना खाकर मुझे सोने के लिए एक कमरा दिखाया, तो में सोने चला गया। तो उनकी पत्नी ने मुस्कुराते हुए कहा कि यहाँ कोई चिंता की बात नहीं है, आप आराम से सोना और दरवाजे को लॉक मत करना। अब उन्होंने ऐसा क्यो कहा? अब तक तो मुझे पता नहीं था और मेरे मन में भी कोई ऐसे गलत ख्याल नहीं थे तो में सोने के लिए बेड पर लेट गया और अब मेरी आँख लग गयी थी। फिर मुझे आधी नींद में लगा कि कोई मेरे पैर दबा रहा है, अब में समझ नहीं पा रहा था तो मैंने अपनी आँखे खोलकर देखा, तो मोहन और उसकी पत्नी दोनों थे। अब में तो चौंक गया और उठकर बोला कि ये आप क्या कर रहे हो?

तो वो बोले कि आप हमारे अतिथि है तो हमारा सेवा करने का फर्ज़ बनता है और यह हमारी काम मर्जी है, हमारे में अतिथि ही भगवान होते है और बीज के दिन {पूरे दिन के बाद जो दूसरा दिन होता है वो} इसका बहुत महत्व होता है, आज बीज है आप हमको ना मत बोलिए। तो मैंने कहा कि ठीक है करो, अब में तो अपनी आँखे बंद करके बैठ गया था, अब मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। फिर धीरे-धीरे पैर दबाते-दबाते उसकी पत्नी का हाथ मेरी जांघो की तरफ बढ़ा, अब में तो पागल हो रहा था कि पता नहीं ये कौनसी सेवा कर रहे है? और अब पता नहीं क्या-क्या होगा? फिर थोड़ी देर में उन्होंने अपनी पत्नी को इशारा किया, तो उनकी पत्नी उठ गयी और वो जब वापस आई तो उसके हाथ में एक थाली थी, जिसमें फूल, सिंदूर, चावल आदि थे। अब में कुछ समझ नहीं पा रहा था, फिर पति ने मेरी पेंट को खोलना शुरू किया। अब में अपने आपको कोस रहा था कि में कहाँ आ गया?? पता नहीं ये कौनसी सेवा कर रहे है? और अब आगे क्या होगा?

फिर उन्होंने मेरी पूरी पेंट उतार दी और मेरा इनर भी निकाल दिया और मेरा शर्ट भी निकाल दिया। अब में बिल्कुल नंगा हो गया था, अब में अपनी आँखे बंद किए हुए था, में जिंदगी पहली बार अपने होश में किसी के सामने इस तरह से नंगा था, अब मुझे शर्म भी आ रही थी। फिर उन्होंने कहा कि आप इस तरह से डरिए मत, ये एक पुरानी परंपरा है जो हमें तंतरा में आगे ले जाती है। अब मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ये तंतरा क्या होता है? फिर मेरे पूछने पर उन्होंने मुझे बताया कि अलग-अलग पोजिशन में स्त्री और पुरुष काम की साधना करते है और उससे ऊर्जावान बनते है। फिर उन्होंने मुझे समझाया कि किस तरह से खजुराहो के पोस्टर बनाए गये, वो असल में अलग-अलग मुद्राए है, जिससे तंतरा बनता है, अब में सब समझ रहा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर उन्होंने कहा कि ये पूरी साधना है हम इस पर बाद में चर्चा करेंगे। अब में तो बहुत उत्साही था, लेकिन में अभी-अभी नया ही आया हूँ इसलिए मैंने ज़्यादा बोलना ठीक नहीं समझा। फिर उन्होंने अपनी पत्नी को साथ बैठाकर मेरे लंड की पूजा करना शुरू की और पहले उसे पानी से धोया और फिर दूध से धोया और फिर उनकी पत्नी टावल से मेरा लंड पोछने लगी। अब मेरे भीतर कामवासना जागने लगी थी और मेरे लंड देवता प्रसन्न होने लगे थे। अब उनकी पत्नी मुझे देखकर मुस्कुराने लगी थी। अब मुझे तो ऐसा लग रहा था कि अभी में उनको पकड़कर उनकी पूजा को पूर्ण ही कर दूँ, लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ? फिर उनकी पत्नी ने मेरे लंड पर सिंदूर और चावल लगाया, अब में तो यह सब देखकर दंग रह गया था कि आज के जमाने में भी ऐसा होता है। फिर उसके बाद उन दोनों ने मुझसे कहा कि आप हमें सेवा का लाभ दीजिए, तो मैंने कहा कि इतना तो आपने कर लिया, अब क्या करना बाकी है? तो उन्होंने मुझे सीधा लेटा दिया और मोहन मेरे पैर दबाने लगे और उनकी पत्नी मेरे पास आने लगी और फिर उसने मुझे चूमना शुरू किया, अब में तो दंग रह गया था।

फिर वो धीरे-धीरे मेरे ऊपर आ गयी और अब जाकर असली पूजा शुरू होने जा रही थी। दोस्तों उस स्त्री की सुंदरता को में आज तक नहीं भूला हूँ। नन्हें ताज़ा-ताज़ा गुलाब के फूल खिलने पर जो गुलाबी रंग पंखुड़ियो का होता है, वैसे तो उसके होंठ थे, उसकी मादक आँखे, हरा भरा तन मानो जैसे सालों से कबूतर मुक्त होने को तरस रहे हो, केले के पेड़ के तने जैसी उसकी जांघे, तो आप सोचो उसकी चूत कैसी होगी? अब में ये सोचकर तो पागल हुए जा रहा था। फिर मैंने उनके गुलाबी होंठो के लिप्स को चूसना शुरू किया और उसकी पीठ पर अपना हाथ फैरने लगा। तो इतने में मुझे लगा कि मेरे लंड में कुछ हल्की गर्मी लग रही है तो मैंने देखा तो मोहन ने मेरा लंड अपने मुँह में लिया हुआ था। फिर मैंने सोचा कि आज जो होता है होने दो। फिर मैंने उनके होंठो का अमृतपान करते-करते उनका ब्लाउज खोलना शुरू किया और उनका ब्लाउज खोलते ही मेरी आँखे फट गयी। अब में इतने भरावदार और कड़क बूब्स देखकर हैरान हो गया था।

फिर मैंने उनकी ब्रा खोली, बाप रे दोस्तों जैसे वनीला आइसक्रीम के ऊपर चैरी रखने के बाद जैसे लगता है, वैसे तो उसके बूब्स और निपल थे। फिर मैंने उसके दोनों बूब्स के ऊपर अपने हाथ रखकर दबाना शुरू किया, अब इतने कड़क बूब्स को दबाने का जो मज़ा आ रहा था, वो पढ़कर नहीं आ सकता यार। फिर उसने मौन करना शुरू किया, तो उसके पति ने उसकी साड़ी, पेटीकोट खोलना शुरू किया, वो अब सिर्फ़ पेंटी में थी। फिर मैंने उसकी चिकनी जांघे सहलाना शुरू किया और अपना मुँह उसके राईट बूब्स पर रखकर चूसने लगा और अपने दूसरे हाथ से उसका लेफ्ट बूब्स मसलने लगा था। अब वो जोर-जोर से मौन कर रही थी उुउऊहह, अब मुझे और जोश चढ़ने लगा था तो मैंने धीरे-धीरे उसकी पेंटी उतारना शुरू किया, उसके कूल्हें भी कमाल के थे।

अब हम दोनों नंगे ही एक दूसरे को खूब सहला रहे थे, अब मेरा 7 इंच का लंड देवता बेताब हो रहा था। फिर मैंने उसको नीचे लिया और धीरे से उसके ऊपर चढ़ने लगा। तो उसके पति ने मुझे रोक दिया तो अब में कुछ समझ नहीं पाया कि उसने ऐसा क्यों किया? अब मुझे थोड़ा गुस्सा आने लगा था कि मुझे इतना गर्म कर दिया और अब रोक रहा है, लेकिन वो कुछ और ही बता रहे थे। फिर उन्होंने कहा कि आज आपका पहला संभोग है तो वो अलग तरह के आसन में होना चाहिए। फिर उन्होंने मुझसे कहा कि आप अपने पैर फैलाकर बैठ जाइए, तो में अपने पैर फैलाकर बैठ गया और फिर उन्होंने अपनी पत्नी को मेरे सामने अपना मुँह करके अपने दोनों पैरो को मेरी कमर के बाजू में डालकर मेरे ऊपर बैठने को कहा, तो वो वैसे ही बैठ गयी। फिर मोहन ने अपनी पत्नी को कहा कि महेश का लिंग हाथ में लेकर अपनी योनि में यानि चूत में डालो, तो उसने वैसे ही करना शुरू किया। अब उस पोजिशन में उसकी टाईट चूत में जिस तरह से मेरा लंड अंदर जा रहा था, तो में मस्ती में आ गया था।

 

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अब वो भी सिसकियाँ भरने लगी थी। फिर मोहन ने मुझसे कहा कि आप धीरे-धीरे आगे पीछे होना शुरू कर दे, तो मैंने वैसा ही करना शुरू किया। फिर उसने अपनी पत्नी को कहा कि जब महेश अपना लंड अंदर करता है, तो तब तुम अपनी चूत को ढीली करना और जब लंड बाहर आता है, तो तब तुम अपनी चूत को टाईट करना, तो उसने वैसा ही करना शुरू किया। अब मेरा मज़ा धीरे-धीरे नशे की तरह चढ़ने लगा था। अब वो भी अपनी आँखे बंद करके पूरा आनंद ले रही थी, अब में भी पूरा डूब चुका था। अब हम एक दूसरे को ऐसे लिपटे हुए थे जैसे हम दो नहीं एक ही हो, फिर ये लगभग 40-50 मिनट तक चला। फिर मैंने कहा कि मेरा ऑर्गॅज़म होने वाला है, तो उसने कहा कि मेरा भी होने वाला है। तो मोहन ने मुझे कहा कि जब ऑर्गॅज़म होगा तो तब तुम अपने लंड को बिल्कुल ढीला छोड़ना और अपनी पत्नी को कहा कि तुम अपनी चूत को एकदम टाईट करके जैसे मुँह से सक करते है, वैसे अपनी चूत से लंड को सक करना है, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी।

अब में उसके कूल्हों को अपने हाथों से जोर लगाकर उसे ऊपर नीचे करने लगा था और फिर मेरा ऑर्गॅज़म होने लगा तो मैंने अपने लंड को ढीला छोड़ दिया, तो उसको भी उसी टाईम ऑर्गॅज़म होने लगा और उसने अपनी चूत को टाईट कर दिया, जैसे लॉक कर देते है। ओह माई गॉड वैसा करने पर जो एक्सपीरियन्स हुआ, वो नॉर्मल ऑर्गॅज़म में कभी नहीं हो सकता। फिर हम एक दूसरे से बहुत देर तक चिपककर बैठे रहे और बाद में मुझे उन्होंने कई सारे कामसुत्रा के आसन सिखाए और बताया कि आज जो हमने किया, वो तारा तंतरा था। फिर में वहाँ 2 साल रहा और बहुत रहस्य जानकर फिर से मुंबई अपने घर आ गया ।।

धन्यवाद …

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