सपना या हकीकत

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प्रेषक : असलम …

हैल्लो दोस्तों, में असलम कामुकता डॉट कॉम से अभी नया ही जुड़ा हूँ, लेकिन मैंने अब तक ना जाने कितनी सेक्सी कहानियाँ पढ़कर उनके मज़े लिए है, जो मुझे बहुत अच्छी मन को भा जाने वाली, जिनको पढ़कर मज़ा तो मुझे आता ही था और उसके साथ साथ में जोश से भी भर जाता हूँ। खैर अब आप वो सभी बातें जाने दीजिए, में अब आप सभी को अपना पूरा परिचय देते हुए जिस काम के लिए मतलब में जो सच्ची घटना आप सभी को सुनाना चाहता हूँ उसको शुरू करता हूँ। दोस्तों में 25 साल का हट्टाकट्टा, दिखने में अच्छा, मेरा गोरा रंग, किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित करने वाला नौजवान हूँ। दोस्तों अब में बताना शुरू करता हूँ कि मैंने अपनी मामी की लड़की को कैसे चोदा में उसकी चुदाई की दास्तान को अब आप सभी को सुनाना शुरू करता हूँ। तो हुआ यह कि में गर्मियों की छुट्टियों में अपने मामाजी के घर गया हुआ था, मेरे मामाजी की बड़ी लड़की, जिसका नाम रेशमा है और मुझे शुरू से ही बहुत पसंद है। दोस्तों में उसको बहुत प्यार करता हूँ। वो दिखने में बहुत सुंदर होने के साथ साथ बहुत ही हंसमुख स्वभाव की बड़ी ही प्यारी लड़की है, जिसने मेरी रातों की नींद को छीन लिया था।

फिर जब में उनके घर था, तब सुबह सुबह के समय रेशमा ही मुझे नींद से उठाने के लिए आती थी, ऐसा हर दिन होता था। एक बार जब वो मुझे उठाने आई तो में उस समय कुछ ऐसी हालत में था कि वो मुझे उस हालत में देखते ही हंसते हुए वहां से तुरंत भागकर बाहर चली गयी। फिर मैंने अचानक उसके इस तरह से चले जाने की तरफ थोड़ा सा ध्यान दिया और तब मुझे पता चला कि पेंट की चेन से मेरा तनकर खड़ा लंड बाहर निकला हुआ था, क्योंकि बीती रात को में मुठ मारने के बाद अपनी पेंट की चेन को लगाना गलती से भूल गया था। फिर में जल्दी से उठ गया और पेंट की चेन को लगाकर में तुरंत ही रेशमा के पीछे चला गया, वो सीधे उसके कमरे में जाकर घुस गयी थी। अब मैंने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया, तब उसने कुछ देर बाद दरवाजा खोल दिया और अब उसने मुझसे पूछा क्या काम है? मैंने उससे कहा कि तुम मुझे देखकर इस तरह से क्यों कमरे से बाहर निकलकर भागकर यहाँ चली आई? तो वो मुझसे कुछ नहीं बोली बस वो अपने मुहं पर अपने एक हाथ को रखकर लगातार पागलो की हंसती ही रही। फिर में कुछ देर रुककर वहां से चला गया और उसके बाद में नहाकर अपने मामा के खेत पर ऐसे ही चक्कर लगाने सैर करने चला गया, क्योंकि ऐसा में हर कभी करता था और मुझे खेतो की हरयाली बहुत पसंद थी।

फिर करीब दो घंटे के बाद रेशमा भी खेत पर टहलाने के लिए आ गयी, उस समय मेरे मामाजी खेत में अपना काम कर रहे थे और में खेत में बने उनके छोटे से कमरे में जहाँ वो अपने खेत के औजार काम के सामान रखते है, वहां पर बैठकर गन्ने के खेतो को निहार रहा था। अब रेशमा मेरे पास आई, लेकिन मुझे पता नहीं चला और अब वो धीरे से मेरे पीछे खड़ी होकर देखने लगी और फिर अचानक से वो कुछ देर बाद ज़ोर से चिल्ला गई। फिर में डर गया, लेकिन वो अब ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी और वो मुझसे कहने लगी कि असलम तुम कितने डरपोक हो? तभी मैंने उससे कहा कि डरपोक में नहीं हूँ बल्कि तुम हो जो सुबह ही तुम डरकर मेरे कमरे से बाहर भाग गयी। अब वो जल्दिबाजी में बोल पड़ी कि में तो तुम्हे उठाने के लिए आई थी, लेकिन वो अब थोड़ा सा उसी शब्द पर रुक गयी। फिर मैंने अब उससे पूछा लेकिन क्या? अब वो मुझसे कहने लगी कि मुझे शरम आती है। अब मैंने उससे कहा कि हम तो दोनों अच्छे दोस्त है ना फिर यह शरम कैसी? तो वो कहने लगी कि नहीं में तुम्हे वो बात नहीं बता सकती। अब मैंने उससे कहा कि अब बता भी दो रेशू क्यों तुम इतना शरमा रही हो? वो बोली कि हाँ ठीक है में बताती हूँ। में जब सुबह तुम्हारे कमरे में आई थी, तब मैंने देखा कि तुम्हारी पेंट की चेन खुली हुई थी और तुम्हारा वो दिख रहा था।

में : वो मतलब क्या दिख रहा था?

रेशू : तुम अब इतने भी भोले मत बनो, तुम्हे सब पता है कि में क्या कहना चाहती हूँ?

में : मुझे सच में मुझे नहीं पता कि तुम मुझसे क्या कहना चाहती हो?

दोस्तों उस समय में जानबूझ कर उसके सामने एकदम अंजान बन रहा था।

रेशू : तुम्हारी यह लुल्ली मुझे नजर आ रही थी।

में : इसको लुल्ली नहीं लंड कहते है।

रेशू : हाँ वही वो जो भी है तुम बस इशारे में समझ गए ना, इससे ज्यादा में कुछ नहीं कहने वाली वैसे थी तुमने मेरी जुबान को यह कहलाकर गंदा करवा दिया।

में : तो क्या हुआ एक तुम ही इस दुनियां में अकेली नहीं हो यह एक बार सभी को कहना होता है, क्योंकि ऐसा सभी के साथ उस समय पर होता है जब उसका वो समय आता है और तुम्हे भी बहुत कुछ आगे जाकर करना ही पड़ेगा तुम कौन सी बचने वाली हो?

अब रेशू मेरे मुहं से वो पूरी बात सुनकर एक बार फिर से अपने मुहं पर हाथ रखकर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी तो मैंने उससे कहा कि सबका मतलब लड़को का तुम लड़कियों की भी तो एक जैसी ही होती है।

रेशू : क्या चीज़ एक जैसी है भला हम लड़कियो की?

में : वही जिसको चूत कहते है।

रेशू : हाँ अच्छा तो तुम्हे भी पता है कि उसको क्या कहते है?

में : हाँ मुझे तो सब कुछ पता है और उसका इस्तमाल क्या है और कैसे क्या काम किया जाता है? यह भी में अच्छी तरह से जानता हूँ।

रेशू : इस्तमाल मतलब क्या? सिर्फ़ पेशाब करने के लिए ही तो वो होती है?

में : नहीं वो एक और एक काम में इस्तमाल होती है।

रेशू : वो और कौन सा काम जिसको में अब तक नहीं जानती?

में : लड़के का लंड उसके अंदर डालकर उसकी चुदाई करने के लिए भी वो काम आती है।

रेशू : हाए तौबा तौबा तुम असलम कितनी गंदी गंदी बातें करते हो?

में : अरे इसमे गंदा क्या है? यह तो हम सभी के जीवन की एक सच्चाई है, सोचो इस दुनिया में अगर तुम्हारे पापा तुम्हारी माँ को नहीं चोदते तो तुम कहाँ से पैदा होती, तुम्हारा जन्म कैसे होता? यह सब हुआ तभी तो तुम्हारा मेरा सभी का जन्म हुआ है।

रेशू : हाँ यह तो तुम्हारी बात सच है, लेकिन क्या सिर्फ़ वो डालने से ही बच्चा पैदा हो जाता है?

में : नहीं उसको डालकर अंदर बाहर भी करना पड़ता है।

रेशू : क्या यह काम करते समय गंदा नहीं लगता?

में : अरे यह काम करने के लिए तो हर एक जवान लड़की तरसती है, वो मन ही मन सोचती है कि कब उसकी प्यासी चूत में कोई लंड जाए और फिर उसको वो धनाधन धक्के देकर चोदे?

रेशू : हाँ मुझे भी कभी कभी वहां पर खुजली होने के साथ साथ कुछ करने की इच्छा होती है।

में : हाँ अब तुम जवान जो हो चुकी हो, तुम्हे ऐसा महसूस होना अब स्वभाविक है।

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फिर मैंने उससे यह बात कहते हुए उसकी तरफ आँख मार दी और वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी, में उसके पास गया और उसको मैंने झट से अपनी बाहों में भर लिया। में उसकी कमर को अपने दोनों हाथों से सहलाने लगा। अब मेरी छाती उसके बूब्स से एकदम चिपककर मुझे बड़ा मस्त मस्ती का मज़ा दे रहे थे और उसी समय मैंने उससे बोल दिया रेशू में तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ। तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। तो वो कहने लगी कि हाँ प्यार तो में भी तुमसे बहुत करती हूँ असलम, लेकिन मुझे यह बात तुमसे कहने में ना जाने कैसा लगता था इसलिए में अब तक चुप ही थी। अब मैंने धीरे धीरे उसको अपनी बाहों में कसना शुरू किया और उसके में बालों में हाथ फेरते हुए उसके गले और गालों को चूमने लगा जिसकी वजह से वो मदहोश होकर बेहोश सी होने लगी थी और अब वो मुझसे कहने लगी। असलम यह तुम क्या कर रहे हो? आह्ह्ह ऊफ्फ्फ मुझ पर नशा सा छा रहा है, प्लीज ऐसा मत करो में अपने आप को काबू में नहीं कर सकती, मुझे पता नहीं क्या हो रहा है तुम अब बस भी करो। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

दोस्तों यहाँ पर वैसे भी अब रुकना कौन चाहता था। में तो खुद ही उसको जोश में लाकर पागल करने की बात किए यह सब काम कर रहा था। फिर मैंने उसको चूमते हुए ही अपनी बाहों में उठा लिया और पास वाले कमरे के अंदर ले गया, वहां पर मैंने देखा कि घास पर नीचे जमीन पर पड़ी हुई थी, मैंने उसको धीरे से घास पर बैठा दिया और में उसके ऊपर आकर उसके होठों पर किस करने लगा। फिर कुछ देर बाद में धीरे धीरे उसके कुर्ते के बटन खोलने लगा, उसके बाद मैंने उसकी सलवार का नाड़ा भी ढीला कर दिया, लेकिन उसने मेरा बिल्कुल भी विरोध नहीं किया में लगातार उसको चूमते हुए उसके बूब्स को सहलाते, दबाते हुए जोश में पागल किए जा रहा था जिसकी वजह से वो मस्ती में आकर बड़ी खुश नजर आ रही थी। फिर मैंने उसकी सलवार, कुर्ता दोनों को ही उतारकर एक तरफ फेंक दिया, जिसकी वजह से वो अब ब्रा और पेंटी में ही मेरे ऊपर अपने गोरे, गदराए, जोश से भरे हुए, बदन की बिजलियाँ गिरा रही थी। अब मुझसे यह सब देखकर बिल्कुल भी सहन नहीं हुआ और मैंने उसके बाकि बचे हुए ब्रा, पेंटी को भी उतारकर अपने सामने मैंने उसको पूरा नंगा कर दिया।

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दोस्तों वो तो जोश मस्ती की वजह से जैसे अब बिल्कुल बेहोश सी होकर लेटी हुई थी और अब मैंने भी बिना देर किए फटाफट अपने पूरे कपड़े उतार लिए और उसके बाद में उसके ऊपर चड़ गया, मैंने सर से लेकर पैर तक उसको चूमा, उसके बदन के हर एक अंग को मैंने बहुत प्यार किया उसका वो गोरा, चिकना, कामुक बदन मुझे बार बार चूमने के लिए मजबूर कर रहा था। फिर मैंने फिर कुछ सेकिंड के बाद उसके 34 इंच के बूब्स को चूसना, दबाना शुरू किया, उसके वो दोनों बूब्स तो मखमल जैसे मुलयम लग रहे थे। फिर यह सब करने के बाद में उसके पेट से होते हुए अब उसकी चूत पर पहुँच गया, तब मैंने देखा कि उसकी चूत बाहर से थोड़ी गोरी थी, लेकिन वो अंदर से एक खिले हुए सुंदर गुलाब की तरह गुलाबी रंग की थी जिसको देखकर में बहुत आकर्षित हुआ मुझसे रहा नहीं गया। फिर मैंने जैसे ही उसकी चूत को चूमना, चूसना शुरू किया वो तो जैसे बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी और वो सिसकियाँ लेते हुए मुझसे कहने लगी आह्ह्ह्ह स्स्सीईई प्लीज अल्तमश जल्दी से तुम इसका कुछ करो वरना में मर ही जाउंगी ऊफ्फ्फ्फ़ ऊऊईईईईइ मुझे ना जाने क्या हो रहा है, तुम जल्दी से इसको कैसे भी शांत करो।

फिर मैंने भी उसका वो जोश देखकर बिना समय खराब किए अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाकर चिकना और फिर उसकी चूत के रसभरे होंठो पर रख दिया। अब मैंने उससे कहा कि रेशू इसको पहली बार अंदर डालने की वजह से तुम्हे थोड़ा सा दर्द होगा और उसको तुम्हे सहन करना पड़ेगा, अगर तुम ज्यादा ज़ोर से आवाज करोगी तो बाहर के लोग अंदर आकर हमे देख सकते है, इसलिए तुम आवाज कम ही करना। अब वो जोश में होने की वजह से कहने लगी कि आज तुम मुझे कितना भी दर्द दो में वो सब सहन कर लूँगी, लेकिन तुम अब बातें कम काम की तरफ ज्यादा ध्यान देकर प्लीज इसकी प्यास को बुझा दो, वरना में मर ही जाउंगी। अब मैंने भी तुरंत ही एक ज़ोर का धक्का लगा दिया, लेकिन पहली बार तो मेरा लंड उसकी कसी हुई चूत से फिसलकर बाहर आ गया। फिर मैंने दोबारा एक बार फिर से लंड को अंदर डालने की कोशिश की और इस बार में कामयाब भी रहा। मेरे लंड का टोपा उसकी चूत के अंदर घुस गया और वो दर्द की वजह से ज़ोर से चीख पड़ी। फिर मैंने तुरंत ही उसके मुहं पर हाथ रखकर उस आवाज को दबा दिया और फिर मैंने एक ज़ोरदर धक्के लगा दिया, जिसकी वजह से मैंने अपना पूरा लंड उसकी चूत के अंदर कर दिया।

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दोस्तों मैंने देखा कि वो दर्द की वजह से बहुत छटपटा रही थी, वो अपने दोनों पैरों को पटक रही थी, जिसकी वजह से में समझ चुका था कि उसका वो दर्द बहुत तेज है। फिर मैंने लंड को वैसे ही रहकर उसके होंठो को चूसा और बूब्स को दबाया सहलाने लगा। फिर कुछ देर बाद में अपने एक हाथ से उसकी चूत को भी सहलाने लगा और जब मुझे लगा कि अब उसको दर्द से राहत महसूस होने लगी है। वो धीरे धीरे शांत होने लगी थी। फिर मैंने अब उससे पूछा क्यों तुम्हे अब कैसा महसूस हो रहा है? क्या तुम्हे अच्छा लग रहा है रेशू? वो बोली कि तुमने तो आज मुझे मार ही डाला ऐसा दर्द मैंने पहली बार सहा है और अब मुझे थोड़ा सा ठीक लग रहा है, लेकिन हल्का हल्का सा दर्द अभी भी मुझे है, लेकिन तुम मेरे इस दर्द की बिल्कुल भी फ़िक्र ना करो, तुम इसके आगे का काम शुरू करो। दोस्तों मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर खुश होकर अब हल्के धक्के लगाने शुरू किए जिसकी वजह से अब मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में अंदर, बाहर हो रहा था। में मस्ती में आकर धक्के देता रहा और वो धीमी आवाज के साथ आह्ह्ह ऊफ्फ्फ्फ़ करती हुई अपनी पहली चुदाई के मज़े मेरे लंड से लेने लगी। दोस्तों हम दोनों, लेकिन ज़्यादा देर तक टिक नहीं पाए और करीब पांच सात मिनट में ही में झड़ गया और मैंने अपने लंड से निकला वो गरम गरम वीर्य उसकी चूत में ही निकाल दिया। वीर्य से चिकना होकर लंड फिसलता हुआ पूरा अंदर जाकर उसके बदन को जोश से भरने लगा था और तब तक उसकी चूत भी मेरे लंड के साथ ही अपना पानी छोड़कर धीरे धीरे ठंडी होती चली गई।

दोस्तों एक साथ झड़ने की वजह से हमारा जोश भी ठंडा हो गया, लेकिन फिर भी मुझे उसकी चिपचिपी चूत के अंदर अपने लंड को डालने निकालने में बड़ा मज़ा आ रहा था। मेरा लंड उसकी चूत की दीवारों को अपने आकार में फैलाकर जाने के लिए रास्ता बनाते हुए उसको मज़े दिए जा रहा था, लेकिन कुछ देर बाद में पूरी तरह से निढाल होकर उसी के ऊपर पड़ गया और में उससे पूछने लगा क्यों रेशू तुम्हे कैसा लगा? वो कहने लगी कि आज तुमने मुझे एक पूरी औरत बना दिया है असलम में आज एक लड़की से औरत बन चुकी हूँ और में आज बहुत ही खुश हूँ। फिर मैंने उससे कहा कि मैंने, लेकिन रेशू अपने वीर्य को तुम्हारे अंदर ही छोड़ दिया है। तब वो कहने लगी कि कोई बात नहीं है में कल इसके समाधान के लिए कोई गोली ले लूँगी, तुम्हे इसके लिए इतना सोचने या घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मेरे पास इसका एक इलाज है। अब मैंने उसके मुहं से वो बात सुनकर बहुत खुश होकर उससे कहा कि चलो अब तुम जल्दी से उठो और अपने कपड़े पहन लो, वरना बाहर से कोई आ गया। उसने हमें देख लिया तो बहुत बड़ी मुसीबत हम दोनों के सामने खड़ी हो जाएगी। फिर हम दोनों ने तुरंत ही उठकर अलग होकर अपने कपड़े पहन लिए और फिर उसके बाद हम दोनों बाहर आकर वापस बैठ गये, हम बातें हंसी मजाक करने लगे। दोपहर को करीब दो बजे मेरे मामाजी हमारे पास आ गए और अपने मुहं हाथ धोकर कुछ देर बैठकर आराम करने के बाद हम सभी घर के लिए चल पड़े। दोस्तों यह थी मेरी वो सच्ची चुदाई की घटना जिसके बाद हम दोनों बहुत खुश रहने लगे थे, क्योंकि उसको भी अब वो मिल चुका था जिसके बारे में उसने शायद सोचा भी नहीं था और में उसकी चुदाई करके ख़ुशी से झूम उठा था मुझे तो अपने जीवन का सब कुछ मिल चुका था मेरे लिए वो दिन अपने जीवन के वो दिन थे जो मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है उस मज़े को में अपने पूरे जीवन नहीं भुला सकता ।।

धन्यवाद …

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