शादीशुदा बहन की कुंवारी चूत

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प्रेषक : गोपी …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम गोपी है और आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालों के लिए अपने जीवन की एक सच्ची घटना के बारे में बताने आया हूँ। दोस्तों मेरे परिवार में हम पांच लोग है, मेरी तीन बहन और मेरी माँ रहती है और में मेरे घर में बड़ा और एक अकेला भाई हूँ इस वजह से मुझे पैसे कमाकर अपनी बहनों की शादी करके सभी को अपने अपने घर विदा कर दिया। दोस्तों मैंने किसी तरह अपनी सभी बहनों की शादी करके में फ्री हो गया और अब मुझे अपने बारे में सोचने के लिए समय ही नहीं मिला और इसलिए मुझे पता ही नहीं चला कि कब में 32 साल का हो गया? दोस्तों में उन दिनों अपने गाँव में आया हुआ था और मुझे बड़े दिनों के बाद देखकर मेरी माँ बड़ी खुश थी। फिर माँ बहुत खुश होकर मुझसे बोली कि चल अब हम सभी तरह की जिम्मेदारियों से फ्री हो गये है इसलिए अब हम तेरी शादी के बारे में सोचते है। फिर में अपनी माँ के मुहं से यह बात सुनकर बड़ा खुश था, लेकिन उसी दिन मेरे आने के तीन चार घंटे के बाद ही मेरी छोटी बहन भी आ गई, जिसको देखकर मेरी माँ और में बड़े खुश हुए।

फिर मैंने देखा कि वो अपने चेहरे से बड़ी ही उदास नजर आ रही थी और फिर उसने मेरे उस उदासी की वजह पूछने के बाद हम दोनों को उसने बताया कि वो आज ही अपने पति को तलाक देकर आ रही है। दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनते ही हम दोनों के तो पैरों के नीचे से ज़मीन ही निकल गई और हम दोनों ने मिलकर उसको बहुत प्यार से समझाया और उससे कहा कि ऐसे नहीं हो सकता, अभी तो हमने तेरी शादी की थी और अभी हम लोगों पर तेरी उस शादी का बहुत कर्जा बाकी है, लेकिन उसने पता नहीं मेरी माँ से अकेले में ले जाकर ना जाने क्या कहा? जिसके बाद मेरी माँ भी मुझसे कहने लगी कि हाँ अब रीमा हमारे साथ ही रहेगी। दोस्तों में तो अब उस समस्या अपनी बहन के साथ हुए उस काम की वजह से बड़ा उदास हो गया, क्योंकि अब जाकर तो में अपनी शादी की बात सोच रहा था, लेकिन अब मेरे साथ वो एक और मुसीबत आ चुकी थी। फिर मेरा उदास उतरा हुआ चेहरा देखकर मेरी माँ ने मुझसे कहा कि गोपी तू बिल्कुल भी चिंता मत कर, हम दोनों मिलकर इसका कोई उपाय कुछ रास्ता जरुर निकालते तू थोड़ा सा पहले शांत हो जा।

अब मेरी माँ ने मुझे बताया कि वो जो लड़का था वो अच्छा नहीं था और माँ ने कहा कि उस लड़के मुझे कुछ कमी भी थी इसलिए तेरी बहन रीमा उसको छोड़कर वापस अपने घर आ गई है। फिर उसी समय माँ मुझसे कहने लगी कि गोपी तेरा भी अब तबादला दिल्ली में हो गया है और वो नई जगह होने की वजह से तुझे भी समस्या आती होगी, इसलिए तू एक काम कर अपनी बहन रीमा को तू अपने साथ ले जा और वहाँ पर अपने साथ रख ले, क्योंकि इसके तेरे साथ रहने पर तुझे भी खाने पीने में इसकी मदद मिल जाएगी और तू देखना इसको वहीं कहीं कुछ नौकरी काम मिल जाए तो करवा देना, जिसकी वजह से यह भी अपने पैरों पर खड़ी हो जाएगी। अब मैंने अपनी माँ की वो बातें सुनकर बोला कि हाँ ठीक है और फिर दो चार दिन के बाद हम दोनों वापस दिल्ली आ गये। फिर मैंने हम दोनों के लिए कुछ दिनों बाद पहले वाला घर छोड़कर दूसरा एक बेडरूम वाला फ्लेट ले लिया और हमारा पूरा सामान साथ में ले जाकर उसको मैंने अपने नये घर में सेट किया। दोस्तों मेरी बहन रीमा ने भी घर के सामान जमाने में मेरी मदद की फिर उसके बाद में हर दिन सुबह अपने चला जाता और फिर में शाम को करीब 8-9 बजे तक वापस आ जाता था। दोस्तों मेरा वहां पर एक दोस्त ही पक्का दोस्त था और वो भी हर कभी मेरे घर आता था उसका नाम अशोक था।

फिर मैंने कुछ दिनों बाद घ्यान दिया कि मेरा वो दोस्त मेरे पीछे से भी मेरे घर आता था। एक दिन में थोड़ी जल्दी ही अपने ऑफिस से अपने घर आ गया और फिर मैंने देखा कि मेरा वो दोस्त अशोक उस समय मेरे घर ही था और रीमा ने दरवाजा खोलने में भी उस दिन बड़ी देर लगा दी और उनके चेहरे से मुझे पता चला कि अंदर कुछ गलत चल रहा था। फिर कुछ देर बाद अशोक मुझसे बोला कि में इतनी देर से आपका ही इंतज़ार कर रहा था, लेकिन मैंने उसको कुछ भी नहीं कहा और थोड़ी ही देर में वो वापस अपने घर चला गया। अब मैंने देखा कि मेरी बहन रीमा मुझसे आंख भी नहीं मिला पा रही थी और उसी समय मैंने उसको पूछा यह अशोक यहाँ पर क्यों आया था? वो अपने अटकते हुए शब्दों में कहने लगी कि भैया वो तो आपसे मिलने आया था। अब मैंने उसको कहा कि फिर वो मुझसे मिला क्यों नहीं मुझे देखते ही तुरंत ही क्यों भाग खड़ा हुआ और क्या उसको मेरे घर पर आने का समय पता नहीं है? यह सभी बातें सुनकर रीमा एकदम चुप हो गयी। फिर मैंने उसको ज़्यादा कुछ भी नहीं कहा हाँ, लेकिन आज की उस घटना की वजह से मुझे दुख ज़रूर हुआ।

फिर मैंने रीमा से कहा क्या तुझे पता है कि अशोक एक शादीशुदा आदमी है और वो दो बच्चो का बाप भी है। अब उसने यह सब सुनकर बड़े ही आश्चर्य से कहा नहीं मुझे यह सब पहले पता नहीं था। फिर में बिल्कुल चुप होकर उसी समय बाथरूम में चला गया, उस दिन पूरे घर में अजब का सन्नाटा सा था और अब रीमा मुझसे आँख नहीं मिला रही थी। में थोड़ी देर बाद फ्रेश होकर बाहर निकल गया। फिर में कुछ देर बाद अपने एक दोस्त जिसका नाम जॉन था उसके घर गया। वो भी अपनी बहन जिसका नाम मेरी था उसके साथ रहता था, मेरी एक हॉस्पिटल में नर्स का काम करती थी। फिर में उनके घर में बिना दरवाजे को बजाए जा घुसा, तभी मैंने देखा कि मेरी अपने भाई जॉन की गोद में बैठी हुई थी और वो दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे। दोस्तों में उस द्रश्य को देखकर एकदम से चकित हो गया और चकित होकर में मन ही मन सोचने लगा कि कोई भाई अपनी बहन के साथ ऐसे कैसे बैठ सकता है? फिर मुझे देखकर अचानक से मेरी एकदम से उठकर अंदर दूसरे कमरे में चली गयी। अब जॉन एकदम से शांत होकर मुझसे बोला कि आना गोपी क्या तू वहां खड़ा मूर्ति बन गया, चल यहाँ मेरे पास आकर बैठ।

फिर में उसके पास बैठ गया और उसके बाद हम दोनों गप्पे मारने लगे और कुछ देर बाद जॉन मुझसे कहने लगा कि चल हम आज मिलकर पेक लगाते है, क्योंकि वैसे भी हमे साथ बैठकर पिये बहुत दिन निकल चुके है। अब मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है और फिर हम दोनों साथ में बैठकर विस्की पीने लगे और थोड़ी देर के बाद मुझे बड़ा अच्छा ख़ासा नशा होने लगा था। दोस्तों मेरे दिमाग़ में लेकिन अब भी वोह सब बातें चल रही थी, इसलिए मैंने धीरे से अब जॉन से पूछ ही लिया यार अभी कुछ देर पहले मैंने देखा कि तुम्हारी बहन तुम्हारी गोद में बड़े ही अजीब तरह से बैठी थी यह सब क्या था? जॉन बोली कि यार आजकल के समय में थोड़ा बहुत यह सब चलता है, हम दोनों पूरी तरह से जवान हो चुके है और कभी कभी एक दूसरे के साथ ऐसे ही मज़े लेकर अपना मन बहला लेते है। दोस्तों इतनी ही देर में उसकी बहन मेरी भी आ गयी और फिर जॉन ने अपनी बहन मेरी के लिए भी एक पेग बना दिया और उसके बाद हम तीनों ही साथ में बैठकर पीने लगे थे। फिर कुछ देर के बाद मेरी आँखों के सामने भी अपनी जगह से उठकर मेरी एक बार फिर से अपने भाई जॉन की गोद में बैठ गयी। अब जॉन उसके कंधो को सहलाने लगा था और वो उसको किस भी करने लगा था।

दोस्तों इन सभी कामो की हद तो जब हो गयी, जब मैंने देखा कि मेरा वो दोस्त अब मेरे सामने ही अपनी गोद में बैठी अपनी जवान सुंदर बहन के बूब्स पर भी अपने हाथ को फेरने लगा था। अब में यह सब देखकर वहां से उठकर जाने लगा था, लेकिन तभी जॉन मुझसे कहने लगा कि बैठ ना तू ऐसे अचानक से उठकर खड़ा क्यों हो गया। दोस्तों वो बहुत अच्छी तरह से समझ गया था कि मेरे दिमाग़ में क्या सब चल रहा है? इसलिए वो अब मुझसे कहने लगा कि देख गोपी तू मेरा विश्वास कर मुझे या मेरी बातों को गलत मत समझ में तेरा अच्छा ही चाहता हूँ, देख यह उम्र ही कुछ ऐसी है जिसमें हम सभी पागल हो जाते है हमे बाद में हमारी गलतियों के बारे में सोचकर पछतावा होता है, क्योंकि इस उम्र में आकर सभी कुंवारी लड़कियाँ और लड़के भी पागल हो जाते है और हमारी सेक्स या उससे जुड़ी हुई बातें करना सुनना अच्छा लगता है और कभी कभी हमारा देख में तो तुझे भी समझा रहा हूँ कि तू जवान है और तेरे घर में भी जवान बहन बैठी है, तुम दोनों एक दूसरे की आग क्यों नहीं बुझाते? फिर उसी समय मैंने उसको कहा कि तुम अब चुप हो जाओ, इसके आगे मुझे कुछ भी नहीं सुनना।

तभी उसकी बहन मेरी बीच में बोली पड़ी क्यों तुम्हे इसकी बात में ऐसा क्या गलत लगा जो तुम इसको चुप होने के लिए कह रहे हो? क्यों तुम्हे जब अच्छा लगेगा जब तुम्हारी वो बाहर जाकर किसी दूसरे से अपनी चुदाई करवाकर आएगी और तुम अच्छी तरह से जानते हो कि तुम्हारा वो दोस्त अशोक तुम्हारी बहन के कितना पीछे पड़ा है और इस समय रीमा भी अपने पूरे शबाब में है गोपी प्लीज तुम मेरी बातों को सुनकर ज्यादा बुरा मत मानो, क्योंकि वैसे भी तुम दोनों एक ही गम के मारे हुए हो और उसका इलाज़ भी तुम दोनों के पास है तो तुम क्यों नहीं इस काम को करते। दोस्तों उनकी बातें सुनकर मेरा भी दिमाग़ अब बड़ा खराब होने लगा था और फिर में उन्ही बातों को सोचते हुए अपने घर पहुँचा, रीमा ने दरवाज़ा खोला। अब में अच्छे ख़ासे सुरूर में था, रीमा मुझसे पूछने लगी कि भैया अगर आप कहे तो क्या में आपके लिए खाना लगा दूँ? मैंने हाँ में अपना सर हिला दिया और अब तो मेरी नज़र ही बदल गयी थी, क्योंकि मुझे ऐसे लग रहा था कि जैसे में रीमा को पहली बार देख रहा हूँ। अब रीमा अपनी गांड को मटकाते हुए किचन में चली गयी, रीमा के बूब्स भी बड़े ग़ज़ब के थे और उनका आकार करीब 34 इंच होगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब में सच में पागल हो रहा था और मन ही मन अपने दोस्त और उसकी बहन की वो बातें सोचकर सोचने लगा था कि आख़िर इतनी मस्त चूत के होते हुए में आज तक क्यों इतना परेशान रहा? लेकिन वो मामला मेरी बहन का था, इसलिए में कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहता था। फिर आज तो एक दारू का सुरूर और उस पर रीमा के शबाब का सुरूर मुझे पता था कि मुझे रीमा जैसी सुंदर लड़की कभी नहीं मिल सकती, कहाँ में सांवला और कहाँ मेडम सी गोरी मेरी बहन और में ना जाने क्या क्या बातें सोचकर उधेड़बुन में लगा हुआ था। फिर रीमा उस समय रसोई में रोटी बना रही थी और उस समय रीमा की पीठ मेरी तरफ थी, में हिम्मत करते हुए उसके पीछे से अपनी बहन के पास चला गया और रीमा को मैंने तुरंत अपनी बाहों में भर लिया। अब रीमा मेरी इस हरकत की वजह से एकदम चकित हो गयी और कहने लगी ओह्ह्ह ओह यह आप है, में तो डर ही गयी। फिर उसी समय मैंने अपना मुहँ रीमा के गालों के पास रख दिया और बड़े ही प्यार से मैंने उसको पूछा क्यों तू अभी तक मुझसे नाराज़ है। मैंने तो वैसे ही तेरे से पूछा था। दोस्तों मेरा हाथ उस समय रीमा के पेट और उसके बूब्स के बीच में था। अब वो मुझसे कहने लगी नहीं भैया में आपसे कभी भी नाराज़ नहीं हो सकती, आप तो मेरे इस दुनिया में सबसे प्यारे भैया हो।

फिर मैंने उसको कहा हाँ में भी तुझे बहुत प्यार करता हूँ और इतना कहकर मैंने उसकी गर्दन पर एक बार चूम लिया और उस समय मेरा लंड जोश में आकर पूरे तनाव में था जो रीमा को मेरे लंड की गरमी का अहसास भी दिला रहा था। अब तो में उसकी तरफ से बिल्कुल भी विरोध ना देखते हुए रीमा को जमकर चूमने लगा था। फिर मैंने उसकी पीठ उसके कान उसके गाल और अपना एक हाथ भी मैंने उसके पूरे शरीर पर फेरना शुरू किया जिसकी वजह से मुझे उस दिन पहली बार किसी जवान लड़की का बदन क्या होता है पता चला था? और में उस काम को करने के बाद किसी दूसरी दुनियां में जाकर मज़े लेकर मन ही मन खुश हो रहा था। फिर कुछ देर यह सब करने के बाद अब रीमा मुझसे कहने लगी कि अरे भैया आप यह सब क्या कर रहे हो? आज आपको यह क्या हो गया है? दोस्तों उसको मेरे मन में चल रही वो सभी बातें मेरी बदली हुई नियत के बारे में बिल्कुल भी पता नहीं था इसलिए वो यह सोच रही थी कि में उसके साथ ऐसे ही मस्ती करके उसको परेशान किए जा रहा हूँ, लेकिन मेरे मन में तो अब उसकी चुदाई के विचार आने लगे थे। फिर मैंने उसको कहा कि आज मुझे तेरे ऊपर प्यार आ रहा है।

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तभी वो कहने लगी अच्छा यह प्यार बाद में करना, चलो अब पहले आप खाना खा लो और फिर हम दोनों खाने की टेबल पर साथ में बैठकर खाना खाने लगे। अब में अपने हाथों से रीमा को खाना खिलाने लगा था और उसी समय रीमा मुझसे पूछने लगी कि भैया क्या बात है आज क्यों आप मुझे इतना मस्का मार रहे हो? फिर मैंने उससे कहा कि कुछ नहीं बस ऐसे ही और उसके बाद मैंने जल्दी जल्दी अपना खाना खत्म किया और उसके बाद में बिस्तर पर आ गया। अब मैंने रीमा को आवाज़ लगाई और उससे कहा कि तुम भी जल्दी से आ जाओ, थोड़ी देर के बाद रीमा बेड पर आ गयी। दोस्तों वो सर्दियों के दिन थे और रीमा मेरे पास में आकर लेट गयी, वैसे तो वो रोज ही मेरे साथ ही सोती थी, लेकिन आज तो सब कुछ मेरे लिए बिल्कुल बदला बदला हुआ था। अब मैंने रीमा की पीठ मेरी तरफ थी, मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी कमर में डाल दिया और में उसके बिल्कुल सट गया और रीमा भी मेरा वो बदला बदला स्वभाव देखकर बड़ी चकित बहुत आश्चर्य में थी। अब मैंने अपनी लूँगी के नीचे से अंडरवियर को भी उतार दिया था और अपने लंड का टोपा उसकी गांड में दे दिया था।

फिर मैंने धीरे से उसका कुर्ता ऊपर कर दिया और अपना एक हाथ में उसके पेट पर फेरने लगा था और धीरे से मैंने अपना एक हाथ उसके बूब्स पर रख दिया। दोस्तों उस समय उसके वो दोनों गोल मुलायम बूब्स ब्रा की क़ैद में थे और मैंने धीरे से उसकी ब्रा को भी खोल दिया, जिसकी वजह से अब उसके बूब्स आज़ाद हो चुके थे और मैंने उन्हे सहलाना शुरू कर दिया। अब रीमा मुझसे कहने लगी क्यों भैया आज आपको क्या हो गया है प्लीज सोने दो ना, मुझे कल सुबह उठकर मुझे क्लास में भी जाना है, लेकिन में तो अपना मन बना चुका था। अब में उसको पागलों की तरह चूम रहा था और अब में आगे बढ़ते हुए धीरे से उसका कुर्ता उतारने लगा था। फिर वो मुझसे वही सब कहने लगी कि क्यों भैया आज आपको यह क्या हो गया है? प्लीज आप मुझे ज्यादा परेशान मत करो सोने दो ना, लेकिन आज तो दोस्तों मेरे सर पर सेक्स का भूत सवार था और उस पर दारू का नशा था, जो अब भी अपना काम कर रहा था। फिर मैंने जबरदस्ती उसका कुर्ता पूरा उतार दिया, लेकिन उसी समय मैंने देखा कि रीमा अपने बूब्स को शरम की वजह से ढकने की नाकाम कोशिश कर रही थी, क्योंकि उसके बूब्स ज्यादा बड़े आकार के थे वो ब्रा से बाहर निकलकर उभरते हुए मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे।

अब में अपने एक हाथ में रीमा के खुले हुए गोरे गोलमटोल बूब्स को देखकर बिल्कुल पागल हो गया था, क्योंकि मैंने आज तक किसी भी लड़की के बूब्स नहीं देखे थे। अब में दोनों बूब्स को बारी बारी से पागलों की तरह चूमने लगा था और वो मुझसे कहने लगी थी कि भैया प्लीज अब आप मुझे छोड़ दो, अरे यार आज आप मुझे इतना परेशान क्यों कर रहे हो, अब छोड़ दो मुझे, क्या कोई अपनी बहन के साथ ऐसा करता है? अब मैंने उससे कहा तू तो मुझसे कहती है कि तू मुझे बहुत प्यार करती है, क्या यह तेरा प्यार है? आज तक मैंने तुझसे कुछ नहीं माँगा और जब से अपने होश सम्भाले है, में तुम लोगो के लिए ही सब कुछ करता आ रहा हूँ और अगर मेरी ठीक समय से शादी हो जाती तो शायद यह दिन नहीं आता और तू कौन सी दूध की धुली है, तू खुद अशोक के साथ मज़े ले रही थी और अब तू मुझे क्यों मना कर रही है। फिर मैंने उसको कहा सुन रीमा हम दोनों एक ही आग में जल रहे है तो क्यों ना हम एक दूसरे का सहारा बन जाए? वैसे भी तू अच्छी तरह से जानती है कि मेरी शादी की उम्र कब की निकल चुकी है, लेकिन आज भी में शादी के बारे में सोच नहीं सकता, क्योंकि मेरे ऐसा करते ही सब कुछ बिखर जाएगा, कोई भी नयी लड़की आएगी वो ना जाने कैसा व्यहवार करे, उस समय क्या होगा मुझे नहीं पता? में अपने पूरे परिवार को ऐसे ही एक साथ रख सकूँ या नहीं, मुझे कुछ भी पता नहीं है।

अब मेरी वो सभी बातें सुनकर रीमा एकदम से शांत हो गयी, वो ना जाने क्या सोचने लगी थी और कुछ देर तक हमारे बीच वो एक चुप्पी सी रही। फिर कुछ देर बाद रीमा मुझसे कहने लगी, उस उसके पहले उसने अपना पूरा बदन बिल्कुल ढीला छोड़ दिया और अब वो बोली हाँ भैया आप शायद ठीक ही बोल रहे है, हम सब परिवार के लोग कितने मतलबी किस्म के इंसान है। हम सभी लोग हमेशा बस अपने बारे में ही सोचते रहे, कभी हमने आपके बारे में कुछ भी नहीं सोचा, काश मुझे पहले यह सब अपने भाई के लिए सोचना चाहिए था, जिसने हमारे लिए हमेशा अपनी सारी कुर्बानी दे दी, भाई में आपसे बहुत प्यार करती हूँ। दोस्तों मुझसे यह सब कहते हुए रीमा तुरंत मेरी छाती से लिपट गयी, जिसकी वजह से अब उसके वो खुले हुए आजाद गदराए हुए बूब्स मेरी छाती से टकरा रहे थे। अब वो मुझसे कहने लगी भैया आप आज जो भी चाहे वो सब मेरे साथ कर सकते है, आज से में बस आपकी ही हूँ इसलिए आज आप पूरी तरह से जैसे चाहो भोगो अपनी इस जवान बहन रीमा का यह सोने सा बदन, आप इसका जैसे चाहो वैसे मज़े ले सकते है, में आपको कुछ भी नहीं कहूंगी।

दोस्तों अब मेरी बहन का वो कामुक बदन मेरी बाहों में मचल रहा था और में भी अब उसकी चुदाई करके उस सुख का अनुभव लेने के लिए तड़पने लगा था, क्योंकि आज मेरा पहली बार चुदाई करना का वो सपना जो पूरा होने जा रहा था। फिर मैंने बिना देर किए जल्दी से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसकी पेंटी को भी उतारने में मैंने ज्यादा देर नहीं की, जिसकी वजह से अब रीमा मेरे सामने उस अवस्था में थी में जिसके बारे में किसी भी शब्दों में लिखकर आप सभी को नहीं बता सकता। दोस्तों उस द्रश्य को देखकर मेरी आंखे एकदम चकित हो चुकी थी में उसके गोरे कामुक बदन को बहुत चकित होकर देखकर पागल हुआ जा रहा था और अब उसकी वो गोरी चिकनी चिकनी जांघे मुझे अपने पास बुला रही थी। फिर मैंने भी अब अपने सभी कपड़े उतार दिए और उसके बाद मेरे लंड का आकार देखकर रीमा एकदम सिहर गयी और वो मुझसे कहने लगी कि भैया प्लीज ज़रा सम्भलकर धीरे से करना। फिर मैंने उससे कहा कि रीमा तू बिल्कुल भी मत घबरा, तुझे कुछ भी नहीं होगा। यह सब कहकर मैंने उसको हिम्मत दी और फिर मैंने उसके दोनों पैरों को पूरा फैलाकर अपने तनकर खड़े लंड को एक जोरदार धक्के के साथ उसकी चूत के अंदर पहुंचा दिया।

दोस्तों उस एक पहले धक्के से ही मेरा लंड उसकी कामुक चूत में 1/4 चला गया और दर्द की वजह से वो ज़ोर से चिल्ला उठी ऊईईई माँ में मर गई ऊफ्फ्फ्फ़ भैया प्लीज आप इसको बाहर निकाल लो वरना में इस दर्द की वजह से मर ही जाऊंगी आह्ह्ह आपका यह बहुत मोटा लंबा है और मेरी चूत इसके सामने छोटी है यह इसमे कैसे जाएगा, आप कोई भी ज़ोर जबरदस्ती अब मत करो, इसको प्लीज बाहर निकाल लो। दोस्तों उस समय मेरे सर पर तो उसकी चुदाई करने का भूत सवार था, इसलिए मुझे उसका कुछ भी कहना दुख दर्द नजर नहीं आ रहा था। अब मैंने रीमा की पतली कमर को कसकर पकड़कर उसको जोश में आकर लगातार धक्के देने शुरू किए और मेरे दो चार धक्को से ही मेरा पूरा लंड रीमा की चूत में जा चुका था, लेकिन अब उसका बड़ा बुरा हाल था और वो सिसकियाँ लेते हुए लगातार मुझसे आग्रह करके कह रही थी, भैया प्लीज इसको अब आप बाहर निकाल लो, आप बाद में दोबारा कर लेना अभी मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है आईईईइ प्लीज भाई मेरी बात मान जाओ। दोस्तों फिर मैंने धक्के देते हुए नीचे की तरफ ध्यान देकर देखा कि खून से उसकी चूत और लंड दोनों ही तरबतर थे, जो यह साबित कर रहे थे कि मेरे प्यारी सेक्सी बहन रीमा अभी तक 24 केरेट सोने की तरह पूरी तरह से शुद्ध है और उसकी चूत की सील अभी तक बंद ही थी।

अब मुझे यह सब देखकर अपनी बहन की चूत में पहली बार अपने लंड को डालकर धक्के देते हुए अपनी इस किस्मत पर नाज़ हो रहा था कि मेरी किस्मत कितनी अच्छी है जो पहली बार में मुझे कुंवारी चूत की चुदाई करने का यह मौका मिला, जिसकी वजह से में मन ही मन बहुत खुश भी था। दोस्तों सभी बातें सोचते हुए भी मैंने रीमा की चूत में अपने उन तेज धक्को की स्पीड को कम नहीं किया में उसको वैसे ही धक्के देकर लगातार चोदता रहा। फिर कुछ देर बाद जब रीमा का दर्द कम हुआ तब जाकर उसको भी मेरे साथ मज़ा आने लगा था और वो जोश में आकर अब अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर मेरा पूरा साथ देते हुए मुझसे कहने लगी हाँ भाई प्लीज आप और भी ज़ोर से मारो हाँ ऐसे ही मुझे अब दर्द नहीं है आपको आज से हमेशा मेरी इस तरह की चुदाई करनी होगी, मुझे आपके साथ यह सब करने से बड़ी खुशी मिली कि आज से में आपके कुछ काम आ सकती हूँ यह मेरी अच्छी किस्मत है। दोस्तों उसके बाद मैंने भी उसके मुहं से यह सभी बातें सुनकर खुश होकर बड़ी तेज गति से जोश में आकर धक्के देते हुए उसकी चुदाई के मज़े लेने शुरू किए, जिसकी वजह से अब मेरा पूरा पूरा लंड उसकी गीली चूत की गहराइयों में अंदर बाहर हो रहा था और करीब बीस मिनट के बाद मैंने अपना पूरा वीर्य धक्को के साथ उसकी चूत की गहराइयों में निकालकर पूरा अंदर तक पहुंचा दिया।

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फिर उसके बाद में थककर उसके ऊपर लेट गया और एक बूब्स को चूसने और दूसरे को दबाने सहलाने लगा था। अब वो मुझसे कहने लगी वाह भैया मज़ा आ गया, आज आपने मुझे पूरी एक औरत बना दिया है और इस सुख को पाने के लिए में कितना तरसी हूँ में आपको किसी भी शब्दों में बोलकर बता नहीं सकती, आज से आप मेरे दूसरे पति हो मुझे आपके साथ यह ऐसे ही मज़े चाहिए आप मुझे कभी भी चुदाई के लिए मना मत करना, आज से मेरा पूरा जिस्म बस आपका है।

दोस्तों यह थी मेरी पहली चुदाई अपनी प्यासी तरसती हुई बहन के साथ मैंने उसकी चुदाई करने बड़े मज़े लिए और उसको भी अपनी चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट किया, मुझे उम्मीद है कि सभी पढ़ने वालों को यह जरुर पसंद आएगी।

धन्यवाद …

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