सोनिया को चोदा बरसात में

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प्रेषक : गुमनाम …

दोस्तों आज, में आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालो की सेवा में एक बार फिर से अपनी एक सच्ची घटना को लेकर हाजिर हुआ हूँ। दोस्तों यह सिर्फ़ एक महीने पहले पुरानी बात है, में एक कॉलेज का छात्र हूँ और मेरे साथ एक लड़की पढ़ती है जिसका नाम सोनिया है। वो लड़की हमारे घर से ज़्यादा दूर नहीं रहती सिर्फ़ बीस मिनट का पैदल रास्ता है और हम दोनों एक साथ ही कॉलेज से घर आते जाते है और हमारे घर की तरफ से सिर्फ़ हम दोनों ही उस कॉलेज में पढ़ने जाते है। दोस्तों इस वजह से कुछ दिनों में हमारे बीच दोस्ती भी बहुत गहरी हो चुकी थी। दोस्तों अब में आप सभी को सोनिया के बारे में थोड़ा विस्तार में बताता हूँ उसकी उम्र बीस साल रंग गोरा, लम्बाई 5.6 इंच वो एक ऐसी सीधीसाधी लड़की है, जो बहुत सुंदर नजर आती है। दोस्तों यह घटना ऐसे घटित हुई कि हमारे कॉलेज की छुट्टी हो जाने के बाद हम दोनों अपने घर वापस आ रहे थे कि तभी अचानक से तेज बारिश शुरू हो गयी। दोस्तों जुलाई अगस्त के महीनों में हरयाणा पंजाब में मानसून का समय होता है और इसलिए बारिश आना कोई बड़ी बात नहीं थी, लेकिन बड़ी तेज बारिश का अचानक से आना हमारे लिए बड़ा चकित करने वाली बात थी। दोस्तों उस समय वो बारिश इतनी तेज थी कि उसकी वजह से कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था और चलना बड़ा ही मुश्किल था।

फिर हम दोनों मेरे घर के बहुत ही पास पहुंच चुके थे और जैसे तैसे हिम्मत करके हम दोनों मेरे घर पहुँच गये। अब मैंने उसी समय सोनिया से कहा कि यह बारिश तो आज रुकने तक का नाम ही नहीं ले रही तुम एक काम करो जब तक यह कम ना हो जाए तुम यहीं पर रूक जाओ उसके बाद चली जाना। अब वो मुझसे कहने लगी कि पहले घर के अंदर तो घुसो और उसके बाद जो भी करना होगा वो बात सोचेंगे। अब मुझे मेरे घर के दरवाजे पर ताला लगा हुआ नजर आया और उसको देखकर में एकदम चकित रह गया और मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया कि में अब क्या करूं? तभी मुझे ध्यान आया कि घर की दूसरी चाबी हमेशा मेरे पास ही होती है, जिसकी मदद से मैंने वो ताला खोल दिया और उसके बाद अंदर जाकर मैंने अपने पापा को फोन किया। फिर उन्होंने बताया कि उन्हे किसी जरूरी काम की वजह से बाहर जाना पड़ा और इस वजह से वो कल तक वापस आएँगे। दोस्तों सोनिया अब तक दरवाजे पर ही खड़ी थी, मैंने उसको अंदर भी नहीं बुलाया क्योंकि किसी के घर में ना होने अकेले में एक कुंवारी लड़की का घर में आना अच्छा नहीं लगता। अब मेरे मन में एक विचार आ गया और मैंने सोचा कि क्यों ना में सोनिया के पापा को फोन करके बता दूँ कि इस समय सोनिया मेरे घर है और वो आकर उसको अपने साथ ले जाए।

फिर सोनिया ने हमारे घर वाले फोन से अपने पापा को फोन किया और उनको वो सब बता दिया, लेकिन उसके पापा कहने लगे कि इस हालत में वहां पर नहीं आया जा सकता। दोस्तों क्योंकि अब बारिश पहले से भी तेज हो चुकी थी और एक तेज गति के तूफान का रूप धारण कर लिया था। फिर मैंने उसके पापा से फोन पर बात करके उनको कहा कि अंकल आज घर पर मम्मी नहीं है, हम दोनों अकेले ही है इसलिए आप सोनिया को आकर ले जाओ, अगर किसी ने हम दोनों को साथ में देख लिया तो वो लोग पता नहीं क्या क्या कहेंगे? अब अंकल मुझसे कहने लगे कि बेटा मुझे तुम पर पूरा भरोसा है और तुम सोनिया का पूरा ध्यान रखना और बारिश के रुक जाने पर में उसको आकर ले जाऊंगा। अब मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है अंकल आप बिल्कुल भी चिंता मत करो। यह मेरे पास एकदम सुरक्षित रहेगी। फिर फोन को नीचे रखकर मैंने सोनिया की तरफ देखा और मेरे तो होश ही उड़ गये, क्योंकि वो उस समय ठंड की वजह से बड़ी बुरी तरह से कांप रही थी। दोस्तों उस बारिश के साथ साथ तेज गति की हवा भी थी, इसलिए अब ठंड बहुत ही ज़्यादा हो चुकी थी और उसकी आंखे बंद होने लगी थी। अब में उसकी उस हालत को देखकर डर गया और मन ही मन सोचने लगा कि कहीं सोनिया की तबीयत ज़्यादा खराब ना हो जाए।

फिर में उसके लिए एक टावल और मेरी जींस और एक गरम टी-शर्ट लेकर आया और मैंने सोनिया को कपड़े बदलने के लिए कहा और अब मैंने देखा कि उसके हाथ पैर ठंड की वजह काम नहीं कर रहे थे, वो बिल्कुल जम गए थे। अब में उसकी हालत को देखकर और भी ज़्यादा डर गया। फिर मैंने जल्दी से उसको दूध में पत्ती डालकर तेज कड़क चाय बनाकर पीने के लिए दे दी और जैसे तैसे उसने चाय को खत्म किया। फिर में उसको अपनी बाहों का सहारा देकर बाथरूम तक ले गया और उसको कपड़े देकर अंदर भेज दिया, लेकिन अब मुझे डर था कि कहीं वो कपड़े भी ना पहने सके। फिर जैसे तैसे करके वो कपड़े बदलकर बाहर आ गयी, लेकिन वो अब भी सर्दी की वजह से कांप रही थी और बाथरूम से बाहर आकर वो सोफे पर बैठ गयी। अब मैंने उसको एक चादर ओढ़ने के लिए दे दी जिसको वो तुरंत ओढ़कर बैठ गयी और मैंने एक बार फिर से हम दोनों के लिए चाय बनाई, क्योंकि ठंड मुझे भी लग रही थी, लेकिन उसकी ठंड को देखते हुए में खुद को भूल गया था। अब मैंने उसको दोबारा चाय लाकर दी और हम दोनों पीने लगे, मैंने देखा कि वो अपनी दोनों आखों को बंद करके चाय पी रही थी। फिर चाय को पीते हुए मुझे छींक आ गयी और तब उसने अपनी आँखें खोली, मेरी हालत भी ज़्यादा ठीक नहीं थी।

अब उसने मेरी तरफ देखकर मुझसे कहा कि में एकदम ठीक हूँ प्लीज तुम भी अब यह कपड़े बदल लो। अब में भी अपने कपड़े बदलने चला गया और में कपड़े बदलकर आया तो मैंने देखा कि वो वहीं पर लेट गयी और में मुस्कुराकर अंदर चला गया और तभी मुझे ध्यान आया कि वो सोफा उसके लिए बहुत छोटा है। फिर में उसको अंदर चलकर सोने के लिए कहने के लिए बाहर आया और देखा कि वो अब भी ठंड की वजह से कांप रही थी। अब में उसको उसी हालत में छोड़कर रसोई में खाना लेन के लिए चला गया, क्योंकि मुझे पता था कि मेरी मम्मी मेरे लिए जरुर खाना बनाकर गई होगी। फिर मैंने वो खाना गरम किया और सोनिया के लिए ले आया, सोनिया को उठाया वो काँपते हुए उठी, खाना देखकर वो थोड़ी सी शांत हुई और वो खाना खाने लगी उसके बाद वो दोबारा से सोने लगी। अब मैंने उसको कहा कि तुम मम्मी के बेडरूम में जाकर सो जाओ, यहाँ पर ठंड ज़्यादा है और वो मुस्कुराकर अंदर चली गयी। दोस्तों में अब बारिश के रुकने का इंतजार करने लगा, लेकिन मुझे बाहर का वो द्रश्य देखकर बारिश का रुकना मुश्किल ही लग रहा था और अब दोपहर के 1:30 बज चुके थे। अब सोनिया अंदर से दरवाजा बंद करके सो चुकी थी। दोस्तों मेरे मन में अब तक उसके बारे में कोई भी ग़लत विचार नहीं थे और में बाहर सोफे पर बैठकर अपने मोबाइल में गेम खेलने लगा।

फिर मुझे पता ही नहीं चला कि कब खेलते हुए मेरी आँख लग गई और में भी गहरी नींद में सो गया। फिर करीब चार बजे मुझे अचानक सोनिया की आवाज़ सुनाई दी और में हड़बड़ाकर उठ गया और सबसे पहले मैंने बाहर की तरफ देखा, लेकिन बारिश अब भी हो रही थी। दोस्तों पहले की तरह ज्यादा तेज तो नहीं थी, लेकिन इतनी कम भी नहीं थी कि उस हालत में बाहर निकला जा सके और फिर मैंने सोनिया से पूछा क्या काम है? वो कहने लगी कि मुझे डर लग रहा है। अब मैंने उसको पूछा क्या में तुम्हारे पापा को बुला लूँ? तब उसने हाँ में अपना सर हिला दिया। फिर मैंने उसको अपना मोबाइल दे दिया और वो अपने पापा से बात करने लगी। मैंने ध्यान से देखा कि वो थोड़ी उदास थी, शायद अंकल अब भी नहीं आ रहे थे, यह बात मुझे उसके उदास चेहरे को देखकर पता चली। अब मैंने उसको पूछा कि क्या हुआ? वो बोली कि प्लीज तुम मेरे पास बैठ जाओ, मुझे अकेले में डर लगता है। फिर मैंने उसको कहा कि तुम टीवी देख लो फिर तुम्हे डर नहीं लगेगा, लेकिन वो बार बार जिद करने लगी और में उसके पास बैठ गया। अब में टीवी को चालू करके एक पुराना क्रिकेट मेच देखने लगा, वो कुछ नहीं बोली और मेरी तरफ देखती रही।

अब में उसको बोला कि क्या आज मुझे खाओगी क्या जो ऐसे देख रही हो? वो कहने लगी कि हाँ खा जाउंगी, क्योंकि मुझे बड़ी तेज भूख लगी है और इतना कहकर उसने मेरे हाथ से रिमोट को लिया और चैनल को बदलने लगी। फिर वो एक कार्टून चेनल लगाकर मेरे पास आ गई और मेरे हाथ को पकड़कर कंधे पर अपना सर रखकर टीवी देखने लगी और कुछ देर बाद उसने फिर से चेनल बदल दिया और इस बार उसने एक गानो का चेनल लगा दिया। दोस्तों उस पर एक बहुत प्यार भरा गाना आ रहा था (आएगा मज़ा अब बरसात का तेरी मेरी दिलकश मुलाकात का) वो उसको देखती रही। फिर इसी बीच में उसको बोला क्या हुआ? वो बोली कि कुछ नहीं। अब मैंने उसको पूछा क्यों अब तो तुम्हे ठंड नहीं लग रही ना? वो कहने लगी कि थोड़ी सी लग रही है और वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दी। दोस्तों उसकी इस मुस्कान में शैतानी छुपी थी, लेकिन मैंने उसको अनदेखा कर दिया और फिर वो मुझसे पूछने लगी क्यों क्या हुआ? मैंने कहा कि कुछ नहीं। फिर वो मुझसे कहने लगी कि तुम कितने अच्छे हो ना तुमने आज मेरा कितना ध्यान रखा। अब मैंने भी उसका एक हाथ अपने हाथ में ले लिया और में उसकी उंगलियों से खेलने लगा, उसके बाद हम दोनों ऐसे ही बातें करते रहे, लेकिन हम दोनों के मन में कोई भी ग़लत विचार नहीं था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर कुछ देर बाद टीवी पर भीगे होंठ तेरे गाना आ गया और मैंने टीवी की तरफ इतना ध्यान नहीं दिया, लेकिन सोनिया उसको बड़े ध्यान से देख रही थी। अब मैंने उनको कहा कि तुम इतने गौर से क्यों देख रही हो? पहले नहीं देखा क्या? वो बोली कि हाँ देखा है, लेकिन आज इसको देखकर अजीब सा महसूस हो रहा है। फिर मैंने उसको पूछा तुम्हे अजीब सा क्यों लग रहा है? वो कहने लगी कि मुझे नहीं पता। दोस्तों मुझसे बात करते हुए उसकी आँखों में अचानक लाली आ गई थी और तेज चलती उन सांसो की गरमी मुझे महसूस होने लगी थी और मुझे उसके दिल की तेज धड़कने भी महसूस हो रही थी। अब में उसकी तरफ मुँह करके बैठ गया। उसका चेहरा मैंने अपने हाथों में ले लिया और फिर उसको पूछा क्यों सोनिया अचानक से आज तुम्हे क्या हुआ? उसने अपनी आँखों को बंद कर लिया और धीरे से मेरे अंगूठे पर अपने होंठ लगा दिए। अब उसकी गरम तेज सांस मेरे अंगूठे के ऊपरी हिस्से से टकरा रही थी और मेरा ध्यान उसकी छाती पर चला गया मैंने देखा कि उसकी छाती लगातार बड़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी। अब में तुरंत समझ गया कि सोनिया उस गाने के सेक्सी द्रश्य को देखकर गरम हो चुकी है और फिर में अपने होंठो को उसके होंठो के पास ले गया, लेकिन कुछ बात सोचकर बस आधा इंच की दूरी पर रुक गया।

अब उसकी गरम गरम सांसे मेरे होठों से टकरा रही थी और उन गरम सांसो ने मुझे भी गरम कर दिया था, लेकिन मैंने कुछ भी नहीं किया था और में एक मिनट तक उसी तरह से उसकी गरमी महसूस करता रहा। फिर अचानक उसने अपने होंठ मेरे होठों पर रख दिए और वो पागलों की तरह चूमने लगी और मैंने भी तुरंत आगे बढ़कर उसको अपनी बाहों में भर लिया और उसको अपनी छाती से लगा लिया। दोस्तों अब मैंने महसूस किया कि उसकी तेज चलती सांसो की वजह से उसकी छाती भी ऊपर नीचे हो रही थी और मेरी छाती से टकरा रही थी। दोस्तों इस हरकत ने मेरे अंदर एक तेज तूफान को ला दिया था, अब तक सिर्फ़ वो मुझे चूम रही थी, लेकिन अब में भी उसको चूमने लगा था और मैंने उसके पूरे चेहरे पर चुम्मे की बरसात कर दी। दोस्तों वो मुझसे ऐसे लिपट गई जैसे मिठाई पर चाँदी का लेप चिपका होता है और फिर उसने धीरे से मेरे कान में कहा में तुमसे प्यार करती हूँ और उसकी इस बात ने मेरे अंदर और जोश भर दिया। अब मैंने उसको कसकर अपने से चिपका लिया और में उसको चूमने लगा, मैंने अभी तक उसके बूब्स पर हाथ नहीं रखा था वो ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे हो रहे थे। फिर में उसकी गर्दन पर चूमने लगा और अपने एक हाथ से उसके बूब्स को दबाने लगा।

दोस्तों बूब्स पर हाथ रखते ही उसके शरीर के अंदर करंट सा दौड़ गया और वो सिसकियाँ लेने लगी ऊह्ह्ह्ह आह्ह्ह मुझे इस आवाज़ ने अजीब सा संतोष दिया। फिर मैंने ऊपर से ही उसके बूब्स दबा दिए और वो आहें भरने लगी थी आहह्ह्ह उूफफफफफ फिर एक हाथ नीचे ले गया और उसकी चूत पर रख दिया, वहां पर हाथ लगते ही वो जोंक की तरह सिकुड़ गयी। अब में उसको चूम भी रहा था और उसकी चूत पर अपने एक हाथ को फेर भी रहा था। अब मुझे छूकर महसूस हुआ कि उसकी पेंटी गीली हो चुकी है और में तुरंत समझ गया कि वो पूरी तरह से गरम हो चुकी है, लेकिन में आज पूरा मज़ा लेना चाहता था इसलिए मैंने उसके कपड़े नहीं उतारे। अब में उसकी जांघो पर हाथ फेरने लगा था और वो मचलने लगी थी और आज किसी के आने का डर नहीं था, इसलिए में उसके साथ हर एक लम्हे का पूरा पूरा मजा लूटना चाहता था और हम दोनों इस तरह करीब बीस मिनट तक चूमते ही रहे। फिर उसने पेंट के अंदर से ही मेरा लंड पकड़ लिया और वो अपने मुलायम हाथ से सहलाने लगी। मैंने उसको कहा कि इसको छोड़ो अभी और मज़े करते है। अब यह बात कहकर मैंने उसकी टी-शर्ट को निकाल दिया और टी-शर्ट को उतारने के बाद में उसके आकर्षक रंगरूप और उसके बूब्स की गोलाईयों को देखकर एकदम हैरान रह गया।

दोस्तों में उसके बूब्स की सुन्दरता को किसी भी शब्दों में नहीं बता सकता और फिर मैंने उसके नंगे शरीर पर अपना एक हाथ रख दिया, जिसकी वजह से उसके शरीर में कपकपी सी हुई। फिर मैंने उसके बूब्स पर हाथ रखा जो मस्ती में मचल रहे थे या रब्बा क्या मस्त बूब्स थे एकदम नरम, लेकिन बोल की तरह बिल्कुल गोल गोल भी थे। अब में उनसे खेलने लगा और सोनिया भी अपनी सारी हदों को पार करती सी दिखी और फिर मैंने उसकी पेंट और पेंटी को भी उतार दिया, उसकी गोरी और भरी भरी जाँघ को देखकर पागल हो गया और उसको चूमने प्यार करने लगा था। दोस्तों उसको चुमते हुए ही मैंने अपना एक हाथ उसकी नंगी चूत के ऊपर रख दिया और वो महसूस करके एकदम से तिलमिला उठी आऊऊ सीईईईई करने लगी और उसकी सिसकियों की आवाज़ो से पूरे कमरे में प्यार भरा गरम माहौल था। अब मैंने उसकी जाँघो से दूर हटकर उसकी नाभि पर चूमना शुरू किया और उसने महसूस करके अपना मुलायम पेट अंदर कर लिया, उसके ऐसा करने से उसके बूब्स और भी सेक्सी लगने लगे थे, लेकिन फिर भी मैंने उसकी चूत से हाथ नहीं हटाया और में उसको लगातार मसलता ही रहा। अब में पूरी तरह से उसके दोनों पैरों के बीच में आ गया और में उसकी कुंवारी चूत को देखने लगा और मैंने देखा कि उसकी चूत पर हल्के छोटे बाल थे उनको देखकर अंदाजा लगता था कि वो यही कोई दस दिन पहले ही साफ हुए थे।

दोस्तों उसकी चूत एकदम सुर्ख गुलाबी और आकार में छोटी सी थी। फिर यह द्रश्य देखकर ललचाते हुए मेरी जीभ अपने आप ही उसकी चूत की पंखुड़ियों की तरफ चली गयी और चूत पर अपनी जीभ को लगाते ही वो सिहर उठी और पूरा कमरा एक बार फिर से उसकी आवाज़ से गूँज उठा आहुउऊुउउ माँ ऊईईईईईई आअहह और इतनी ही देर में उसकी चूत से पानी का फव्वारा निकल गया। अब में तुरंत समझ गया कि यह अब और इंतजार नहीं कर सकती नहीं और मैंने भी जल्दी से अपने कपड़े उतार दिए और मेरा सात इंच लंबा लंड देखकर उसकी आँखे फट गयी, लेकिन वो बोली कुछ नहीं। अब वो मेरे लंड को अपने एक हाथ में लेकर सहलाने लगी थी और उसी समय मैंने उसको कहा कि तुम इसको अपने मुँह में ले लो, लेकिन उसने ऐसा करने से साफ मना कर दिया। अब मैंने भी ज्यादा जिद नहीं की और में उसके दोनों पैरों के बीच में आ गया, उसकी चूत जोश मज़े की वजह से पूरी तरह गीली थी। अब वो मुझसे कहने लगी कि मुझे डर लग रहा है। तुम्हारा लंड बहुत मोटा है यह अंदर नहीं जाएगा और मेरा छेद बहुत छोटा है। फिर मैंने हंसते हुए उसको कहा कि यह अपना रास्ता खुद बना लेगा, तुम चिंता मत करो और फिर मैंने अपने लंड का टोपा उसकी चूत के छेद पर रख दिया, उसने पहले से ही अपनी दोनों आँखों को बंद कर लिया था।

अब में लंड को उसकी चूत के अंदर डालने की कोशिश करने लगा, लेकिन मेरी लाख कोशिशो के बावजूद लंड अंदर नहीं गया। फिर वो मुझसे कहने लगी कि मैंने तुमसे कहा था कि यह अंदर नहीं जाएगा और तुम अब रहने दो मत डालो और वैसे भी अगर यह अंदर चला गया तो मेरी चूत के चिथड़े चिथड़े कर देगा, प्लीज तुम मत डालो। फिर मैंने उससे कहा कि असली मज़ा तो यही है कि अगर यह अंदर नहीं गया तो समझो हम दोनों ने बहुत बड़ा पाप किया है। अब वो कहने लगी कि हाँ ठीक है डालो, लेकिन ज्यादा दर्द मत करना, क्योंकि मुझे दर्द से डर लगता है। दोस्तों बेड के पास ही क्रीम रखी थी, मैंने उसको लेकर अपने लंड पर लगाकर लंड को एकदम चिकना कर दिया और में दोबारा कोशिश करने लगा था। अब में उसके दोनों पैरों के बीच में आकर दोबारा उसकी चूत के छेद पर अपने लंड का टोपा रख दिया, लेकिन बात नहीं बनी। फिर मैंने उसके कूल्हों के नीचे तकिया रख दिया, जिसकी वजह से अब उसकी चूत थोड़ा सा ऊपर उठकर पूरी तरह से खुल गयी थी। अब मैंने उसकी चूत के छेद पर अपना लंड रखा और ज़ोर का धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड तीन इंच अंदर चला गया और वो दर्द की वजह से ज़ोर से चीख पड़ी आहह माँ मर गई आईईई प्लीज बाहर निकालो प्लीज ऊफ्फ्फ में मर जाउंगी और अब इतना कहकर वो रोने भी लगी।

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फिर मैंने अपने लंड को एक इंच बाहर किया और में उसको चूमने लगा था, करीब पांच मिनट के बाद वो थोड़ा सा शांत हो गयी और अब उसकी सिसकियाँ बंद हो गई। फिर मैंने सही मौका देखकर अचानक से उसके होंठो को दबाकर ज़ोर का धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा का पूरा लंड अब उसकी चूत के अंदर चला गया और वो उस दर्द की वजह से चीखना चिल्लाना चाहती थी, लेकिन कुछ वो ना कर सकी। फिर मैंने देखा कि उसकी चूत से खून की धार बहने लगी थी, वो दर्द की वजह से तड़पने लगी थी और छूटने की कोशिश करने लगी थी, लेकिन मैंने उसको नहीं छोड़ा और जब तक वो शांत नहीं हुई तक तक में उसको पागलों की तरह चूमता और उसके बूब्स को डबाता रहा। फिर करीब आठ मिनट के बाद मैंने धीरे धीरे से धक्के मारने शुरू किए वो अब मुझे थोड़ी सी शांत नजर आ रही थी, लेकिन उसको दर्द अभी भी था, आठ दस धक्को के बाद उसका वो दर्द एकदम खत्म हो गया। अब वो भी मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी और अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर वो खुद भी मेरे साथ मज़ा ले रही थी। दोस्तों में उसका वो जोश देखकर खुश होकर बहुत जोश में था और उसका दर्द कम होता देख मैंने अपने धक्को की रफ्तार को पहले से भी ज्यादा तेज कर दिया।

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फिर इस दौरान उसके सागर में एक लहर उठी और साहिल से टकराकर शांत हो गयी, लेकिन में अपने पूरे जोश में लगा हुआ था। फिर करीब दस मिनट की चुदाई के बाद में भी झड़ने के करीब पहुंच गया और में उसकी चूत के अंदर झड़ गया। अब में तेज तेज साँसे ले रहा था और उसकी भी ठीक वैसी ही हालत थी जैसी मेरी थी। दोस्तों मैंने देखा कि वो मेरे उस काम से बहुत खुशी थी और उसने मुझे अपनी छाती से लगाकर कुछ देर उसी तरह से वो लेटी रही और करीब पांच मिनट बाद में उसके ऊपर से हट गया और उठकर सीधा बाथरूम की तरफ जाने लगा और मैंने उसको भी उसको मेरे साथ आने के लिए कहा। फिर वो जैसी ही उठी तब उसने देखा कि पूरी चादर खून से लथपथ थी और उसकी चूत से भी खून निकल रहा था उस द्रश्य को देखकर वो घबरा गयी। अब मैंने उसका चेहरा अपने दोनों हाथों में ले लिया और फिर मैंने समझाया कि पहली बार ऐसा होता है। अब वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर थोड़ा सा शांत हो गयी और उठने लगी, लेकिन उसको उठने समस्या हो रही थी। फिर मैंने उसको सहारा देकर उठा दिया और उसको अपनी गोद में उठाकर में बाथरूम में ले गया और हम दोनों कुछ देर बाद धोकर वापस आ गये।

अब मैंने उसको दूसरे कपड़े पहनने के लिए दे दिए और देखा कि उसके चेहरे पर एक अजीब सी रौनक थी। फिर उस दिन हम दोनों ने दोबारा सेक्स के मज़े नहीं लिए, क्योंकि बाहर बारिश कम हो चुकी थी और 6:30 भी बज गये थे। फिर मैंने सोनिया के पापा को फोन करके उनको कहा कि वो आकर ले जाएँ और वो मुझसे बोले कि बेटा तू खुद ही आकर उसको यहाँ पर छोड़ जा और में उसको उसके घर पर छोड़ने चला गया। अब भी वो ठीक तरह से चल नहीं पा रही थी, लेकिन वो ठीक तरह से चलने की कोशिश करके चलने लगी थी और फिर उसको घर छोड़कर में वापस अपने घर आ गया और बाहर खाना खाने चला गया। फिर करीब रात को आठ बजे में खाना खाकर अपने घर आकर सो गया ।।

धन्यवाद …

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