ट्यूशन वाली लड़की को जवान कर डाला

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प्रेषक : दिनेश …

हैल्लो दोस्तों, आज में जो कहानी आप लोगों को सुनाने जा रहा हूँ यह आज से करीब एक साल पुरानी घटना है। जब में अपनी पढ़ाई को पूरी करने के बाद किसी भी छोटी या बड़ी नौकरी की तलाश में था, लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी मुझे कोई भी नौकरी नहीं मिल रही थी और में नौकरी ढूढने की वजह से अब बहुत थक चुका था, इसलिए एक दिन मैंने मन ही मन सोचा कि अब कुछ ना कुछ किया जाना चाहिए। फिर मैंने बहुत बार सोचकर अब बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने का विचार अपने मन में कर लिया था, जिसमें में बहुत जल्दी सफल भी रहा, क्योंकि मुझे एक घर में एक लड़की को पढ़ाने का काम मिल गया था। मेरी वो स्टूडेंट जिसको में पढ़ाता था उसका नाम किरण था और उसकी उम्र 18 साल थी। वो बहुत ही आकर्षक और सुंदर थी। वो दूध जैसी गोरी, उसका साफ रंग, हल्के भूरे रंग के बाल, नीली आंखे, गुलाबी होंठ और उसका फिगर उस समय करीब 30-24-28 था। वो बहुत खुले विचारों की, हंसमुख स्वभाव की लड़की थी। उसका अपनी पढाई के अलावा किसी चीज़ किसी और काम में उसकी कोई रूचि नहीं थी। उसके पास एक कंप्यूटर और नेट भी था, लेकिन वो नेट को बस अपनी पढ़ाई के लिए काम में लेती थी। दोस्तों में पिछले कुछ सालों से कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ और एक दिन मैंने अपनी भी उस कहानी को आप सभी तक पहुँचाने के बारे में सोचा जिसको में आज तक नहीं भुला सका, क्योंकि यह मेरे जीवन का सबसे पहला सेक्स अनुभव और मेरी सच्ची घटना है जिसमें मैंने पहली बार किसी चूत को अपने सामने देखकर अपने पूरे होश खोकर मैंने उसको बहुत जमकर चूसा और उसके मज़े।

दोस्तों अब में अपनी कहानी की तरफ आता हूँ। में हर रोज़ उसको 7 से 10 बजे तक पढ़ाने जाता था और वो भी अपना पूरा मन लगाकर मेरी हर एक बात को अच्छी तरह से समझती और मन लगाकर पढ़ाई करती थी और में भी उसको मन लगाकर पूरी मेहनत से समझाने की कोशिश किया करता, क्योंकि वो लड़की सुंदर होने के साथ साथ बहुत समझदार भी थी, जिसको पढ़ाने में मुझे बहुत मज़ा आता था। दोस्तों तब तक मेरे मन में उसके लिए कोई भी गलत विचार या ऐसी कोई भी बात नहीं थी इसलिए में उसको अपनी उस नजर से कभी भी नहीं देखता और ना ही उसके मन के ऐसा कुछ चल रहा था, लेकिन एक दिन ऐसा हुआ और वो मेरे लिए जीवन भर याद रखने वाली बात बन गई। मेरे साथ ऐसा क्या हुआ अब आप सभी विस्तार से सुनकर उसके मज़े लीजिए। दोस्तों यह बात 15 तारीख की है जब में हर हर दिन की तरह उस दिन भी अपने ठीक समय पर उसके घर पहुंच गया और तब मुझे पता चला कि वो उस दिन घर पर बिल्कुल अकेली थी, क्योंकि उस दिन उसके मम्मी पापा और उसका भाई एक प्रोग्राम में गए हुए थे। फिर मैंने हर दिन की तरह उस दिन भी घर पहुंचकर दरवाजे पर लगी घंटी को बजाया और फिर कुछ देर बाद उसने आकर दरवाजा खोला और वो मुझसे बोली कि सर आप आ गए? दरवाजा बंद करके अंदर आ जाए और वो मुझसे इतना कहकर खुद अपना बेग लेने दूसरे रूम में चली गई और में जहाँ पर में उसको हर दिन पढ़ाता था उस कमरे में जाकर खड़ा हो गया जब वो वापस मेरे आई तब वो मुझसे कहने लगी कि सर मेरा पीसी बहुत दिनों से ना जाने क्यों बहुत ज्यादा प्रोब्लम कर रहा है, प्लीज आज आप ज़रा मेरा पीसी देखकर उसको ठीक कर दें। मुझको उसके हेंग होने पर काम करते समय बहुत समस्या होती है और वैसे भी आज घर में भी कोई नहीं है और घर के सभी लोग किसी प्रोग्राम में गए हुए है इसलिए हम इस काम को करने के बाद पढ़ाई को थोड़ी देर से भी शुरू कर सकते है। फिर मैंने उससे पूछा कि मुझे बताओ किरण कहाँ है तुम्हारा पीसी चलो में आज सबसे पहले उसको देख लेता हूँ कि उसकी क्या समस्या है? और वो मुझको लेकर अपने पढ़ाई वाले रूम में ले गई और उसने पीसी के सामने रखी कुर्सी पर बैठकर पीसी को चालू कर दिया और उसके मेरे लिए एक दूसरी कुर्सी अपने पास में खींच ली और उस पर उसने मुझे बैठने के लिए बोला और में उस कुर्सी पर बैठ गया। दोस्तों उसने उस दिन हल्के नीले कलर का सलवार कमीज़ पहना हुआ था जो कि बहुत सिल्की था और इस वजह से उसकी चुन्नी बार बार नीचे खिसक रही थी और उस वजह से मुझे उसके वो गोरे गोरे बूब्स को देखने का मौका मिल रहा था और जब कई बार उसका दुपट्टा नीचे खिसका तो मैंने उससे बोला कि किरण तुम ऐसा करो कि इस दुपट्टे को उतारकर कहीं रख दो, क्योंकि तुम बार बार इसको सही करती हो और यह बार बार गिर जाता है और वैसे भी आज घर पर में और तुम ही तो हो। फिर उसने थोड़ा शरमाते हुए अपना वो दुपट्टा अपने कंधो से नीचे उतारकर पास वाली टेबल के ऊपर रख दिया और फिर उसने पीसी का पासवर्ड डालकर अपने पीसी को शुरू कर दिया। में उस समय उसके पास दूसरी कुर्सी पर बैठा हुआ था और में पीसी को देख रहा था। तभी अचानक से मेरी नज़र किरण की छाती पर चली गई तो में देखता ही रह गया उसके बूब्स बहुत ही गोरे टाईट और गोलमटोल उभरे हुए थे और उसकी वो कमीज़ भी बहुत टाइट होने की वजह से वो और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थी। मेरी नज़र उसके बूब्स पर ही जाकर रुक गई। तभी अचानक से उसी समय किरण ने मेरी तरफ देखकर मुझसे बोलना चाहा तभी उसने देखा कि मेरा पूरा ध्यान उसके बूब्स पर था कि में उसके बूब्स की तरफ घूर घूरकर देख रहा हूँ।

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फिर उसने उसी समय अचानक से अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर अपना वो दुपट्टा टेबल से उठा लिया और उसको अपनी छाती पर डाल लिया और अब वो बहुत अजीब तरह से मेरी तरफ देखकर बोली कि सर प्लीज आप पीसी को देखो ना इसके साथ में क्या समस्या है और यह बार बार इतना हेंग क्यों होता है? तो मैंने उसकी आवाज सुनकर होश में आकर एकदम से पीसी की तरफ अपनी नज़र कर ली और फिर में उसको चेक करने लगा। अब कुछ देर बाद माउस से काम करते समय मेरी कोहनी बहुत बार उसके बूब्स के साईड पर लग रही थी, जिससे कि उसके बूब्स साईड से मेरी कोहनी से दब भी रहे थे। यह सब मुझसे अनजाने में हो रहा था, लेकिन जब मुझे इस बात का अहसास हुआ तो में अब जानबूझ कर अपनी कोहनी को उसके बूब्स की तरफ ले जा रहा था मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था, लेकिन बहुत बार ऐसा करने से वो अब कुछ कुछ समझ गई थी कि में यह सब जानबूझ कर रहा हूँ इसलिए वो अपनी कुर्सी को थोड़ा सा आगे करके मुझसे थोड़ी सी दूरी बनाकर बैठ गई। अब में एक बार फिर से माउस से पीसी को चेक करने लगा और मैंने धीरे से अपनी कोहनी को थोड़ा सा पीछे करके में दोबारा से उसके बूब्स को छूने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसका पूरा ध्यान अब अपने पीसी पर था वो तो मुझे अपना पीसी ठीक करते हुए देख रही थी और फिर मैंने अपनी कोहनी को पीछे करके उसके बूब्स पर रगड़ना शुरू कर दिया और एक बार फिर से उसका वो दुपट्टा नीचे सरककर गिराने लगा। वो बार बार नीचे आ रहा था। फिर मैंने दोबारा उससे बोला कि किरण तुम अपना यह दुपट्टा नीचे उतार दो ना, तुमने दोबारा इसको अपने से लगा लिया। अब वो मुझसे कहने लगी कि सर में इसको जरुर हटा दूंगी, लेकिन एक बार फिर से आप मुझे वैसे ही देखने लगेंगे और मुझे आपका इस तरह से मुझे घूर घूरकर देखना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। मुझे बहुत अजीब सा महसूस होता है। फिर मैंने उसको बोला कि किरण में तुम्हे देख ही तो रहा था, मैंने तुम्हारे साथ कुछ भी तो गलत नहीं किया? तुम वैसे भी आज इस ड्रेस में बहुत अच्छी लग रही हो, इसलिए मेरी नजर अपने आप बार बार तुम्हारे ऊपर जा रही है। फिर वो मेरी उस बात को सुनकर थोड़ा सा शरमा सी गई और अब में भी समझ गया कि इसको भी मेरा यह सब करना बुरा नहीं लग रहा है। वैसे भी वो एक लड़की है तो उसको मेरे इस तरह से देखने पर पहली बार थोड़ा अजीब सा या शरम भी तो आएगी ही और वो सब आना एक स्वभाविक कारण है। तभी मैंने थोड़ी हिम्मत करके उसका दुपट्टा अपने ही हाथ से खुद ही उतारकर एक साइड में रख दिया, लेकिन वो मुझसे कुछ नहीं बोली। फिर मैंने एक बार फिर पीसी को देखना शुरू किया और मैंने अपनी कोहनी से उसके बूब्स को हल्के से दबाना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से वो अब थोड़ा अजीब सा महसूस करने लगी। फिर में उसकी उस बैचेनी को देखकर मेरी हिम्मत अब थोड़ी सी ज्यादा बढ़ गई और मैंने सही मौका देखकर अपना एक हाथ उसकी जांघ पर रख दिया और अब मैंने धीरे धीरे उसकी जांघ को अपनी ऊँगली से सहलाना शुरू कर दिया। उसकी जांघे बहुत मुलायम भरी हुई थी और फिर कुछ देर बाद वो मुझसे कहने लगी कि प्लीज सर अब आप आपका यह हाथ यहाँ से हटा लें। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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फिर मैंने उससे पूछा कि क्यों किरण क्या हुआ तो वो कहने लगी कि मुझे पता नहीं, लेकिन आपके हाथ रखने से मेरे पूरे शरीर में कुछ अजीब सा महसूस हो रहा है। फिर मैंने उससे पूछा कि क्यों मेरे हाथ लगाने से तुम्हे ऐसा क्या हुआ? तो वो शरमा गई, लेकिन मुझसे कुछ ना बोली जिसकी वजह से मेरी थोड़ी और हिम्मत बढ़ गई और में उसके मन की बात को बिना कहे समझ गया और मैंने बिना देर किए उसका एक हाथ पकड़कर अपने हाथ से पकड़ लिया और मैंने अपने हाथ को उसके बूब्स के क़रीब करके बूब्स को धीरे से दबा दिया और सहलाने लगा। फिर वो अब मेरी इस हरकत से शायद नाराज होकर अपनी उस कुर्सी पर से उठकर बाहर जाने लगी, लेकिन उसी समय मैंने उसको पीछे से जाकर अपनी बाहों में जकड़ लिया वो बहुत बेकाबू हो रही थी और बोली कि सर प्लीज आप छोड़ दें मुझे, यह सब गलत है, लेकिन मैंने उसको उसी समय पकड़कर पीछे की तरफ से उसकी गर्दन पर किस कर दिया। अब वो बोली कि सर प्लीज यह सब सही नहीं है, आप प्लीज छोड़ दीजिए मुझे, तब मैंने उससे बोला कि नहीं किरण प्लीज तुम आज मुझे बहुत अच्छी लग रही हो, प्लीज आज कोई घर पर भी नहीं है यह हमारे लिए बहुत अच्छा मौका है। फिर वो कहने लगी कि सर प्लीज आप छोड़ दो मुझे यह सब बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता और फिर मैंने उससे पूछा क्यों पहले भी क्या कभी किसी ने तुम्हारे साथ यह सब करने की कोशिश की है? तो वो बोली कि जी नहीं, लेकिन में ऐसी लड़की नहीं हूँ जैसा आप मुझे समझ रहे है प्लीज आप ऐसा ना करें और अब आप चले जाए यहाँ से, लेकिन मैंने उसको एक बार फिर से अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसकी गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया और वो मुझसे अपने आप को छुड़ाने की कोशिश करती रही, लेकिन मैंने उसको चूमना तब भी जारी रखा और उसने अपने को छुड़ाने की बहुत कोशिश की, लेकिन मैंने उसको ज़ोर से पकड़ा हुआ था और में उसकी गर्दन पर किस करता जा रहा था और फिर मैंने कुछ देर बाद पीछे से ही उसके दोनों बूब्स को अपने हाथों में लेकर दबाना और गर्दन पर किस करना शुरू कर दिया। फिर वो अब भी अपने आप को छुड़ाती रही और मुझसे कहने लगी कि प्लीज सर अब आप छोड़ दें मुझे, यह सब मेरे साथ ना करें, में कोई ऐसी लड़की नहीं हूँ प्लीज छोड़ दें मुझे, लेकिन में तो उसके गोरे सेक्सी बदन को अपनी बाहों में लेकर उसके मुलायम बूब्स को दबाकर बिल्कुल पागल होकर अपने होश खो बैठा था और में उसकी गर्दन को चूस रहा था और उसके बूब्स को दबा रहा।

फिर मैंने उसकी कमीज़ उसके बाद उसकी ब्रा के अंदर अपना एक हाथ डालकर मैंने उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और वो लगातार चीखती रही और मुझसे मना करती रही कि प्लीज सर आप अब छोड़ दें मुझे। मेरे साथ ऐसा कुछ भी ना करें प्लीज। अब मैंने उसको उसके बूब्स से कसकर पकड़ा हुआ था और में उसके बूब्स की निप्पल को हल्के से सहला रहा था। फिर कुछ देर बाद में सही मौका देखकर अपना एक हाथ उसकी सलवार में ले गया और उसकी पेंटी के अंदर अपना हाथ डालकर अब में उसकी मासूम सी चूत को सहलाने लगा था। तभी मैंने महसूस किया कि थोड़ी देर उसकी चूत को सहलाने और अपना हाथ उस पर घिसने से वो भी अब धीरे धीरे मस्त होनी लगी और उसकी वो मुझसे अपने आप को छुड़ाने की कोशिश उसका वो विरोध अब बहुत कम हो गया था और कुछ देर वो विरोध बिल्कुल खत्म सा हो गया था, लेकिन वो अब रो रही थी।

फिर मैंने उसकी चूत के अंदर अपनी एक ऊँगली को डालने की कोशिश की तो वो चीख पड़ी और बोली कि प्लीज सर अब बस करो और मेरी इस हरकत की वजह से वो अब शायद झड़ गई, क्योंकि मुझे उसकी चूत गीली महसूस हुई वो मेरी बाहों में एकदम निढाल हो गई थी, लेकिन मैंने फिर भी उसकी चूत को सहलाना अब भी जारी रखा। वो धीरे धीरे बहुत ढीली पड़ गई और अब वो एकदम मस्त हो गई।

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फिर मैंने सही मौका देखकर उसकी सलवार को नीचे करने की कोशिश की तो मैंने देखा कि उसकी उस सलवार में ईलास्टिक होने की वजह से मुझे उसको नीचे करने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी और झट से उसकी सलवार नीचे हो गई। फिर उसके साथ साथ मैंने उसकी पेंटी को भी नीचे करके पहली बार किसी कुंवारी चूत को अपने सामने देखा कि यह वो पहली चूत थी जिसके दर्शन में अपने सामने कर रहा था। उस बिना बालों वाली चिकनी चूत को देखकर में बिल्कुल पागल हो चुका था और मुझे नहीं पता था कि में अब उसके साथ क्या करूंगा और में क्या करने जा रहा हूँ? और अब मैंने बिना देर किए उसको पास वाले सोफे पर एकदम सीधा लेटा दिया और में अपनी जीभ को उसकी कुंवारी, कामुक चूत पर रखकर मैंने उसकी चूत को पहले ऊपर से चाटना उसके बाद उसकी गुलाब जैसी कोमल पंखुड़ियों को फैलाकर अंदर से चूसना शुरू कर दिया में अपनी जीभ से उसकी चूत के उस लाल दाने को भी टटोल रहा था, जिसकी वजह से वो एकदम जोश में आकर उछल पड़ती। दोस्तों वो मस्ती से मस्त होती जा रही थी और अब वो मोन करनी लगी आह्ह्ह्ह हम्मम्मम्मम प्लीज सर अब मत करो आह्ह्हह्ह आपको आपकी माँ की कसम है प्लीज छोड़ दें मुझे आईईईईइ सुउुउउ ऊऊउईईईई प्लीज सर छोड़ दो ना अम्म्म्मम्‍म्म्मम ओह्ह्ह्हह। फिर मैंने उसकी चूत के छेद को थोड़ा सा खोला और अपनी जीभ को उसकी चूत के छेद में डालकर में अपनी जीभ से उसकी चूत की चुदाई करने लगा। फिर मेरे ऐसा करने की वजह से वो और भी ज्यादा जोश में आकर मस्त हो गई और उसने आवाजें निकालना शुरू कर दिया अहह्ह्ह्हह्ह बस नहीं आह्ह्ह्हह एम्म्म प्लीज छोड़ दो ऊउफ़्फ़्फ़्फ़ ऊऊह्ह्ह्ह प्लीज छोड़ दो मुझे और वो ऐसे मचलते हुए एक बार फिर से झड़ गई उसने मेरा सर अपनी चूत पर ज़ोर से दबा दिया, जिसकी वजह से मेरे मुहं में ही उसकी चूत का पानी निकल गया। में उसको तब भी चाटता रहा और वो आह्ह्ह्हह ओईईईईई प्लीज बस करो एम्मअहह ओईईई बस करो प्लीज सर, लेकिन में तब भी उसकी चूत को चाटता और अपनी जीभ से चोदता रहा और अब वो अपने कूल्हों को ऊपर उठाकर मेरे साथ मना करते हुए मज़ा लेती थी।

दोस्तों वो सच में बहुत ही प्यारी मासूम लड़की थी और वो बहुत जवान भी थी और में उसकी चूत को चाटता रहा और इतने में उसके घर की घंटी बजी और मैंने जल्दी से उसके ऊपर से हटकर अपने कपड़े ठीक किए और मेरे साथ वो भी खड़ी होकर अपने कपड़े पहनकर ठीक करने लगी। फिर बाद वो दरवाजा खोलने चली गई और में उसी समय वहाँ से उसको छोड़कर सीधा अपने घर पर भाग आया और उसके बाद में कभी भी दोबारा उसके घर पर नहीं गया और ना मैंने उससे मिलने की कोई भी कोशिश करना उचित समझा ।।

धन्यवाद …

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