अंकल और आंटी को कसरत सिखाई

0
loading...

प्रेषक : यश …

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम यश है और में गुजरात के राजकोट शहर का रहने वाला हूँ। में 27 साल का हूँ और मेरा लंड सात इंच लंबा है। दोस्तों में आज आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों को जो कहानी सुनाने जा रहा हूँ, वो एक अंकल आंटी और मेरी है और इस कहानी में आज में आप सभी को बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैंने उन दोनों पति पत्नी को कसरत सिखाते हुए चुदाई का खेल उनके साथ खेलना शुरू किया और हम तीनों ने ही इसमें पूरा पूरा मज़ा लेकर खुश होकर हिस्सा लिया और बड़े मज़े किए। दोस्तों यह बात आज से करीब तीन साल पहले की है, उन दिनों में सूरत शहर अपने अंकल के घर गया था और वो एक अपार्टमेंट की तीसरी मंजिल पर रहते है और वो पूरा अपार्टमेंट बस पांच मंजिल का है। फिर में वहां पर पहुंचने के दूसरे दिन सुबह के करीब सात बजे पांचवी मंजिल पर कसरत करने चला गया और उस समय मैंने बरमूडा और टी-शर्ट पहनी हुई थी। फिर छत पर पहुंचकर मैंने अपनी टी-शर्ट को भी उतार दिया, क्योंकि में हर दिन सिर्फ़ बरमूडे में ही कसरत करता हूँ ऐसा इसलिए क्योंकि टी-शर्ट पसीने से भीग जाती है। अब मैंने अपनी टी-शर्ट को निकल दिया और सिर्फ़ बरमूडे में ही में कसरत करने लगा था और जब में कसरत कर रहा था तो उसी समय छत पर एक अंकल मुझे लगातार अपनी एक नज़र से घूरकर देख रहे थे।

फिर जब मैंने उनकी तरफ देखा तभी अंकल ने अपनी नज़र को हटा लिया, लेकिन एक बार फिर से वो थोड़ी देर बाद मुझे देखने लगे। दोस्तों वो उम्र में करीब 55 साल के थे उन्होंने लूँगी और बनियान पहन रखा था, में करीब एक घंटे तक कसरत करता रहा और वो हर बार मुझे ही देख रहे थे और साथ ही साथ अपनी लूँगी के ऊपर से वो अपने लंड को मसल भी रहे थे। फिर जब मैंने अपनी कसरत को खत्म किया, तब वो मेरे करीब आ गए और अब वो मुझसे पूछने लगे कि मैंने आपको पहले कभी यहाँ पर नहीं देखा क्या आप यहाँ पहली बार आए है? मैंने उनको कहा कि हाँ में कल ही पहली बार अपने अंकल के घर आया हूँ। फिर उसने मेरे कंधे पर अपने एक हाथ को रख दिया और वो मेरे गठीले बदन पर अपने हाथ को फिरते हुए मुझसे बोले तुम्हारा बदन तो बहुत ही अच्छा है, क्या तुम मुझे भी कसरत करना सिखाओगे? दोस्तों वो मुझसे बातें करते जाते और मेरे कंधे पर अपने हाथ को फिराते जाते। फिर मैंने उनको कहा हाँ क्यों नहीं? में यहाँ पर दो तीन दिन रुकने वाला हूँ और में आपको यह सब जरुर सिखा दूँगा। अब अंकल ने मुझसे कहा कि में चौथी मंजिल पर रहता हूँ और तुम जब कल सुबह कसरत करने आओ, तब मुझे भी आवाज़ देना में भी आ जाऊंगा।

फिर मैंने कहा कि हाँ ठीक है और फिर दूसरे दिन करीब सात बजे मैंने अंकल के दरवाजे की घंटी बजाई, तब अंदर से आंटी ने आकर दरवाजा खोल दिया। अब मैंने देखा कि आंटी ने उस समय बिना बाहं का एक गाउन पहना हुआ था और उनकी उम्र करीब 50 साल की होगी, लेकिन वो दिखने में बहुत ही सुंदर थी। दोस्तों उस आंटी के होंठ तो किसी जवान लड़की जैसे साफ और एकदम गुलाबी थे, मुझे उसके गाउन से उसकी गोरी छाती के बीच का हिस्सा साफ साफ नजर आ रहा था और उसके वो बूब्स आकार में बड़े और थोड़े नीचे झुके हुए थे, शायद आंटी ने अपने गाउन के अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी। में कुछ देर उनको लगातार देखता ही रहा। अब आंटी ने मुझे अंदर आने को कहा। फिर में अंदर जाकर सोफे पर बैठ गया और मैंने देखा कि उस समय अंकल ब्रश कर रहे थे। अब आंटी मेरे पास आकर बैठ गयी और वो मुझसे कहने लगी कि तुम्हारे अंकल ने मुझे बताया था कि तुम उनको कसरत करना सिखाने वाले हो। अब मैंने उनको कहा कि हाँ में उनको सिखाने वाला हूँ आंटी। अब आंटी ने मुझसे पूछा क्या तुम मुझे भी यह सब सिख़ाओगे? मैंने तुरंत कहा कि हाँ क्यों नहीं, लेकिन इस गाउन में आप कैसे यह सब कर सकती हो? अब तक अंकल ने अपना को काम खत्म किया और उन्होंने बोला कि वो मेरा ट्राउज़र और टी-शर्ट पहन लेगी।

फिर मैंने उनको कहा हाँ ठीक है और तभी आंटी ने कहा, लेकिन में कभी भी ट्राउज़र पहनकर घर से बाहर नहीं निकली हूँ क्या तुम हमारे कमरे में ही मुझे यह सब नहीं सिखा सकते? अब मैंने उनको कहा हाँ क्यों नहीं? आपका कमरा भी बहुत बड़ा है और फिर अंकल ने मुझसे कहा कि तुम अपनी टी-शर्ट को उतार दो, यहाँ पर तुम्हे शरमाने की कोई ज़रूरत नहीं। फिर मैंने अपनी टी-शर्ट को उतार दिया और उसके बाद आंटी मेरी छाती को लगातार देखती ही रह गयी, वो बहुत चकित थी और फिर अंकल ने भी अपनी लूँगी और बनियान को निकाल दिया और सिर्फ़ बरमूडा पहन लिया। अब मैंने देखा कि उसके बूब्स बिल्कुल लड़कियों जैसे थे और उसके बदन पर एक भी बाल नहीं था और उसकी तोंद भी निकली हुई थी। फिर मैंने कसरत सिखना शुरू किया, पहले तो कुछ देर आसान कसरत करवाई और फिर उसके बाद मैंने उसको आगे झुकने को कहा और अपने हाथ पैरों के पंजे को छूने को कहा। अब वो दोनों सिर्फ़ आधे ही झुक पाए और फिर उसके बाद पीछे झुकने को कहा, लेकिन वो झुक ही नहीं पा रहे थे और वो पीछे की तरफ गिर जाते। फिर मैंने अंकल की कमर को पकड़ा और पीछे झुकने को कहा। फिर जैसे ही वो पीछे झुके तब मेरा लंड उसके लंड से टकराने लगा।

अब उसका लंड तुरंत खड़ा हो गया जो बरमूडे से साफ नजर आ रहा था और फिर मैंने उनको दूसरी बार झुकने के लिए कहा तो दूसरी बार मेरा लंड उसके लंड से टकरा गया और अब उसने अपनी कमर को हिलाया जिसकी वजह से मेरा लंड से उसके लंड से घिसने लगा। फिर मैंने आंटी को कमर से पकड़ा, तब मुझे महसूस हुआ कि उसकी कमर बहुत ही मुलायम थी और जैसे ही वो पीछे की तरफ झुकी मेरा लंड उसकी चूत को ट्राउज़र के ऊपर से छू गया। अब तो मेरा लंड भी टाइट हो गया और फिर मैंने उनको दूसरी बार झुकने के लिए कहा और मेरा सात इंच लंबा लंड उसकी चूत को छू गया। अब मैंने उसको थोड़ी देर ऐसे ही झुकाए हुए रखा और मेरा लंड उसकी चूत पर ही था। मैंने अपने लंड को थोड़ा सा और धक्का दिया, जिसकी वजह से अब मुझे उसकी मुलायम चूत का अहसास मेरे लंड पर होने लगा था। फिर उसको जैसे ही मैंने सीधा किया और उसने मेरे टाइट लंड की तरफ देखा जो बरमूडे से साफ नजर आ रहा था और मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा था। अब मैंने आंटी को तीसरी बार झुकने के लिए कहा, एक बार फिर से मेरा लंड ट्राउज़र के ऊपर से उसकी चूत को छूने लगा और फिर आंटी भी अपनी चूत को मेरे लंड पर अपनी कमर को हिलाकर रगड़ने लगी थी और अंकल यह सब देख रहे थे, लेकिन उसने कुछ हम दोनों से भी नहीं कहा।

loading...

अब आंटी तुरंत खड़ी हो गयी, जिसकी वजह से उसके बूब्स मेरी छाती को छू गये, मेरा लंड तो अब और भी ज्यादा टाइट हो गया था। अब हम तीनों बहुत थक चुके थे, हम तीनों को पसीना निकल रहा था इसलिए हम तीनो सोफे पर बैठ गये और बातें करने लगे। अब मैंने उनको पूछा क्या आपके घर में आप दोनों ही रहते है? तब उसने कहा कि हमारे दो लड़के भी है, लेकिन वो दोनों अभी अमेरिका में है इसलिए यहाँ पर बस हम दोनों ही अकेले रहते है। दोस्तों मैंने उनसे थोड़ी देर और बातें की और फिर उसके बाद में अपने घर चला गया और दूसरे दिन एक बार फिर से में सुबह उसी समय उनके घर पहुंच गया। फिर दूसरे दिन भी मेरे दरवाजा बजाने के बाद आंटी ने ही आकर दरवाजा खोला, मैंने देखा कि आज वो दोनों पहले से ही तैयार हो चुके थे। दोस्तों आंटी ने उस दिन ट्राउज़र और एकदम टाइट टी-शर्ट पहनी हुई थी जिसमे से उसके बड़े आकार के बूब्स साफ नजर आ रहे थे, वो सब देखकर मेरा लंड तो तुरंत तनकर खड़ा हो गया। अब आंटी ने मुस्कुराकर मुझे अंदर बुलाया और में अंदर आकर सोफे पर बैठ गया। अब में सोफे पर बैठा हुआ था और उसी समय आंटी और अंकल ने मुझसे कहा कि यार हम दोनों के तो पैर आज बहुत दर्द कर रहे है, इसलिए आज हम कसरत नहीं कर पाएँगे। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने उनको कहा कि थोड़े दिनों तक तो यह ऐसे ही दर्द करेंगे, लेकिन उसके बाद में यह सही हो जाएँगे और आज हम वैसे भी आसान कसरत ही करेंगे और बाद में आप अपने पैरों की मसाज़ कर लेना उसके बाद आपका यह दर्द अपने आप चला जाएगा। फिर वो दोनों मेरी वो बातें सुनकर तैयार हो गए, उसके बाद हमने सिर्फ़ आधे घंटे तक ही कसरत की और फिर उसके बाद हम सोफे पर बैठ गये। अब अंकल ने मुझसे कहा क्यों ना तुम भी हमारे साथ ही मसाज़ कर लो? मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है और फिर आंटी एक कटोरी में तेल लेकर आ गई, उसके बाद नीचे ज़मीन पर एक चादर बिछाई और अंकल उसके ऊपर लेट गये। दोस्तों अंकल ने उस समय सिर्फ़ बरमूडा ही पहन रखा था, अब आंटी उसकी छाती पर तेल लगाने लगी और में उसके पैरों पर तेल लगाने लगा। अब मुझे छूकर महसूस हुआ कि अंकल के पैर बिल्कुल लड़कियों जैसे मुलायम थे और एक भी बाल नहीं था। फिर मैंने उसकी जाँघो पर तेल लगाया और धीरे धीरे उसकी जाँघो को मसलने लगा, अब अंकल का लंड टाईट हो गया और बरमूडे से साफ दिखने लगा था।

अब अंकल पूरे चिकने हो गये थे, फिर अंकल ने मुझे चादर पर लेटा दिया और वो मेरे पैरों पर तेल लगाने लगे और आंटी मेरी छाती पर तेल लगाने लगी, उनके नरम हाथों के स्पर्श से मेरा लंड तो तुरंत टाईट हो गया और बरमूडा टेंट की तरह खड़ा हो गया। अब अंकल ने मेरे घुटनों के ऊपर मेरी जाँघो पर तेल लगाया और धीरे धीरे वो मेरी जाँघो को मसलते हुए अपना हाथ ऊपर बढ़ा रहे थे और अब आंटी मेरी नाभि तक पहुंच चुकी थी। दोस्तों मेरा लंड तो पूरा टाईट होकर खड़ा हो गया, अंकल मेरे लंड तक पहुंच गया और अपना हाथ वो कभी कभी मेरे लंड से टकराने लगे थे। फिर अंकल ने उसी समय अपना एक हाथ मेरे लंड पर रख दिया, लेकिन मैंने कोई विरोध नहीं किया, उसके बाद वो अपना हाथ बरमूडे के ऊपर से मेरा लंड पर घुमाने लगे और आंटी ने अपना हाथ ऊपर से मेरे बरमूडे में डाल दिया और मेरे लंड को पकड़ लिया और वो मेरे लंड से खेलने लगी। फिर अंकल ने मेरा बरमूऊडा उतार दिया और उसके बाद मेरा सात इंच लंबा लंड देखकर उन दोनों की आंखे फट गयी। वो दोनों एकदम चकित होकर मेरे लंड को घूर घूरकर देखने लगे थे, जैसे वो लंड ना होकर कोई डरा देने वाला जीव हो।

अब में पूरा नंगा उस चादर पर लेटा हुआ था और अब अंकल ने मेरे लंड को अपने मुहं में भर लिया और वो चूसने लगे। मुझे तो बहुत मज़ा आ रहा था और आंटी ने मेरे होंठो को अपने मुहं में ले लिया और वो भी चूसने लगी और उन्होंने कुछ देर बाद अपनी जीभ को मेरे मुहं में डाल दिया। अब में भी उसकी जीभ को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा था। ऐसा करने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था। फिर मैंने आंटी के होंठो को अपने मुहं में ले लिया और में उनको चूसने लगा था और उधर अंकल तो मेरे लंड को पूरा अपने मुहं में लेकर चूस रहे थे, जिसकी वजह से मुझे तो दोनों तरफ से ही बहुत मस्त मज़ा आ रहा था। फिर अंकल ने अपना बरमूडा निकाल दिया, मैंने देखा कि उसका लंड आकार में बहुत छोटा था और वो लम्बाई में करीब चार इंच का था। फिर में आंटी के बूब्स को दबाने लगा और उसकी टी-शर्ट को निकाल दिया, उसका वाह क्या मस्त बदन था, किसी जवान लड़की जैसा गोरा गदराया हुआ बदन था और उसकी नाभि बहुत गहरी और बड़ी भी थी। दोस्तों में तो पागलों की तरह उसके बूब्स को चाटने चूसने लगा और अब तो अंकल भी आंटी के बूब्स को चाटने लगे, एक बूब्स को में चाट रहा था और दूसरा बूब्स अंकल चाट रहे थे।

फिर मैंने उसकी निप्पल को अपने मुहं में ले लिया और अपनी जीभ को में उस पर फेरने लगा और अब जोश मज़े की वजह से आंटी के मुहं से वो आवाज़ निकल रही थी हाँ और ज़ोर से चूसो मेरे बूब्स को पूरा मसल दो आहहहह ऊफ्फ्फ्फ़ चूसो मेरे बेटे मेरा पूरा बूब्स चूस लो। फिर में अपनी जीभ को उसकी नाभि पर फेरने लगा और मैंने अपनी जीभ को उसकी नाभि में डाल दिया और में चूसने लगा। अब आंटी पूरी तरह से कामुक हो चुकी थी। वो जोश में आकर सिसकियाँ लेते हुए मचल रही थी। फिर मैंने आंटी का ट्राउज़र और पेंटी को निकाल दिया, जिसकी वजह से अब हम तीनो ही पूरे नंगे हो चुके थे और अब में उसकी चूत को चूसने लगा था। तभी अंकल ने अपना लंड आंटी के मुहं में डाल दिया और आंटी उनका पूरा लंड अपने मुहं में लेकर चूसने लगी थी और मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत में डाल दिया और में अपनी जीभ को अंदर बाहर करने लगा था। तभी अंकल ने मेरा लंड हाथ में ले लिया और वो उसको चूसने लगे और उसी समय अंकल ने मेरी तरफ अपनी गांड को करके मुझसे कहा कि तुम अपना लंड मेरी गांड में डाल दो।

अब मैंने उसकी गांड की तरफ देखा, उसकी गांड बिल्कुल साफ थी और उसकी गांड पर एक भी बाल नहीं था और फिर में उसकी गांड को चूसने लगा था, जिसकी वजह से अंकल के मुहं से वो आवाज़ निकल गयी आहह्ह्ह हाँ और चाट तू मेरी गांड को ऊह्ह्ह्हह मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। फिर मैंने अपनी उंगली को तेल में डालकर चिकनी कि और अपनी ऊँगली को उसकी गांड में डाल दिया, उसके बाद अपनी उंगली को में अंदर बाहर करने लगा था। फिर मैंने कुछ देर बाद अपनी दो उँगलियों को उसकी गांड में डाल दिया और अब में अंदर बाहर करने लगा था। फिर कुछ देर बाद मैंने अपना लंड उसकी गांड पर रखा और एक ज़ोर का धक्का दिया, जिसकी वजह से मेरा टोपा गांड के अंदर चला गया और फिर मैंने दूसरा धक्का लगा दिया। अब तो मेरा पूरा लंड ही अंकल की गांड में घुस गया और में धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा था और फिर आंटी ने अंकल का लंड अपने मुहं में लेकर उसको चूसना शुरू किया और अंकल ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रहे थे ऊह्ह्ह्ह वाह क्या मस्त मज़ा आ रहा है आह्ह्ह तू अपना पूरा लंड मेरी गांड में डाल दे।

अब में उनकी वो बातें सुनकर जोश में आकर और भी ज़ोर से धक्के देने लगा था और उसी समय अंकल ने अपने लंड से वीर्य आंटी के मुहं पर छोड़ दिया और उसी समय वो मेरे लंड को अपनी गांड से बाहर निकालकर खड़े होकर पास वाले कमरे में चले गये। फिर मैंने अपने हाथ में तेल लिया और आंटी के दोनों बड़े आकार के मखमल जैसे बूब्स पर तेल लगाकर में मसाज़ करने लगा और में उसके दोनों बूब्स को मसालने लगा था। अब आंटी तो मेरे यह सब करने की वजह से पूरे तरह से जोश में आ चुकी थी और वो मुझसे कह रही थी कि तुम मेरे पूरे बदन को मसल दो और में भी जोश में आ गया था और अब में उसके बूब्स को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा था। फिर मैंने उसकी नाभि पर तेल लगाया और उसके बूब्स पर हाथ फेरने लगा था, फिर मैंने उसकी जाँघो पर तेल लगाया और चूमते हुए उसकी गदराई हुई जाँघो को भी मसलने लगा। अब आंटी से रहा नहीं जा रहा था, वो बहुत कामुक हो चुकी थी और अब वो मुझसे कहने लगी कि अब तू डाल दे अपना लंड मेरी इस प्यासी चूत में और मेरी मस्त चुदाई करके इसको शांत कर दे, क्योंक अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा। अब मैंने अपना सात इंच लंबा लंड उसकी चूत में डाल दिया और अब मेरे पहले ही धक्के में पूरा लंड उसकी चूत में डाल गया।

अब में अपना लंड उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा था और आंटी अपने मुहं से आवाज़ निकाल रही थी हाँ चोदो मेरे बेटे, अपनी आंटी को पूरी चोद डाल और में ज़ोर ज़ोर से धक्का देने लगा था और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में गहराई तक डाल रहा था और करीब आधे घंटे के बाद वो झड़ गयी और मेरा लंड अपने मुहं में लेकर चूसने लगी। तभी मैंने भी अपना वीर्य आंटी के मुहं में निकाल दिया और मेरा पूरा वीर्य आंटी पी गयी, मैंने देखा कि उनके चेहरे से बड़ी खुशी साफ साफ झलक रही रही वो मेरी चुदाई उस खेल से पूरी तरह से संतुष्ट थी ।।

धन्यवाद …

loading...
इस कहानी को Whatsapp और Facebook पर शेयर करें ...

Comments are closed.