विनीता आंटी की चूत का भक्त

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प्रेषक : जीत …

हैल्लो दोस्तों मेरा नाम जीत है और में अभी 26 साल का हूँ और प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करता हूँ। दोस्तों में आज आप सभी को अपनी एक सच्ची चुदाई की घटना के बारे में बताने आया हूँ, जिसमें मैंने अपने पड़ोस में रहने वाले एक मस्त माल को अपने जाल में फंसाकर उसकी चुदाई करके उसकी चूत को हमेशा के लिए अपना बना लिया, वैसे तो में भी कामुकता डॉट कॉम पर बहुत लंबे समय से सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ, लेकिन मुझे उम्मीद है कि मेरी यह कहानी सभी पढ़ने वालो को जरुर पसंद आएगी और अब आप सुनकर मज़े लेना शुरू करे। दोस्तों मेरी कॉलोनी में एक आंटी रहती है। उनका नाम विनीता है और उनकी उम्र 35 साल है वो दिखने में बहुत ही सुंदर मस्त सेक्सी औरत है। उसका वाह क्या मस्त फिगर है वो ऊपर से लेकर नीचे तक बहुत मस्त माल है। उसको देखकर बस मेरा मन करता है कि में उसको लगातार देखते ही रहूँ और उसका क्या गजब का बदन है जब भी देखता हूँ मेरा लंड तनकर खड़ा हो जाता है। मेरा मन बस करता है कि में बस उस साली को चोद दूं और में बस दिन रात यही सपना देखता रहता और जैसी वो दिखने में है ठीक वैसा ही उनका व्यहवार बोलने बात करने किसी बात को समझाने का तरीका भी है, वो अपनी मीठी सुरीली आवाज से बहुत प्यार से हंसकर सभी बातों का जवाब दिया करती है और वो बड़ी ही हंसमुख स्वभाव की औरत है, इसलिए हर कोई उनकी तरफ आकर्षित होकर उनको अपना सपना बनाने की गलती कर बैठता है और ठीक मैंने भी ऐसा ही किया, जब से मैंने उनको पहली बार देखा था। में उसी दिन से उनको पाना चाहता था, क्योंकि में मन ही मन उनको प्यार करने लगा था और वो मेरे सपनों की रानी बन चुकी थी।

दोस्तों में कभी कभी जब मुझे मेरी मम्मी किसी काम से उनके पास भेजती थी, तो में उनके घर भी चला जाता था और उसके अलावा तो में उनको ऐसे ही कभी घर से बाहर तो कभी उनकी छत पर कपड़े सुखाते हुए या कभी बाहर बाजार जाते हुए देखा करता था और दोस्तों वैसे तो मेरी वो विनीता आंटी मुझसे हर कभी आते जाते मिल ही जाती थी, क्योंकि वो एक सरकारी स्कूल में टीचर है और उनका स्कूल और मेरा ऑफिस एक ही रोड पर है, इसलिए अक्सर करके हम दोनों की हर कभी मुलाकात भी हो जाती थी और सबसे चकित करने वाली बात तो यह थी कि मुझे अपनी उस आंटी की चुदाई करने के बाद पता चला कि मैंने उसके ऊपर डोरे नहीं डाले थे, बल्कि मेरी उस आंटी ने मुझे अपने जाल में फंसा लिया था और वो भी मुझसे अपनी चुदाई के सपने देख रही थी। दोस्तों यह तब की बात है जब कुछ दिनों के लिए मैंने मेरी गाड़ी को सर्विस के लिए भेज दिया था और एक दिन सुबह के समय उसी वजह से में अपने घर से कुछ दूरी पर खड़ा होकर किसी रिक्शे के रुकने का इंतजार कर रहा था और तभी विनीता अपनी गाड़ी से वहाँ से गुजर रही थी और उसने मुझे देखकर तुरंत मेरे पास लाकर अपनी गाड़ी को रोककर मुझे बैठने के लिए कहा। उस समय उसके मुझे देखने का वो अंदाज़ बिल्कुल अजीब ही था, लेकिन मुझे कुछ भी समझ में नहीं आया और में उसके कहने पर बैठ गया। फिर कुछ देर चलने के बाद उसने मुझे अपने ऑफिस के पास ले जाकर छोड़ दिया और फिर जाते समय उसके पूछने पर मैंने अपनी गाड़ी वाली बात को उससे कह दिया और फिर उसके कहने पर में कुछ दिनों तक विनीता से वैसे ही लिफ्ट लेकर अपने ऑफिस तक जाने लगा। अब मेरी विनीता से बहुत बातें होने लगी थी जिसकी वजह से हम दोनों के बीच की वो दूरी कुछ हद तक कम हो चुकी थी और उस बात का फायदा उठाकर में कभी कभी जानबूझ कर सड़क पर गड्डे के आ जाने पर बहाने से उसकी कमर को पीछे से पकड़ लिया करता था और में कभी कभी उसके कंधे पर हाथ भी रख देता था, लेकिन उसने मेरा कभी भी कोई विरोध नहीं किया, क्योंकि शायद अब उसको भी मेरा यह सब करना अच्छा लगने लगा था और मैंने ध्यान देकर देखा कि वो अब बहुत सेक्सी कपड़े पहना करती थी। वो जब कभी साड़ी पहनती तो उसका वो ब्लाउज उसके बदन से बहुत कसा हुआ होता था, जिसकी वजह से उसके 40 इंच के बूब्स तने हुए ही रहते थे और उसकी वो साड़ी को कमर पर बहुत कसी हुई रहती थी। उसके बूब्स आकार में बहुत बड़े बड़े थे, जिसको देखकर ही मेरा लंड बुरी तरह से कड़क हो जाता था और जब कभी वो सलवार, कमीज पहनती और वो भी बहुत कसी हुई और उस पर बड़े गले वाली कमीज को वो हमेशा पहना करती, जिसकी वजह से उसके बूब्स बहुत ही उभरे हुए सेक्सी लगते थे और उसकी गांड भी एकदम कसी हुई रहती थी। उसकी गांड का आकार भी 44 इंच था और उसकी कमर का आकार 34 इंच था। दोस्तों वो पूरा का पूरा बड़ा ही जबरदस्त माल थी, इसलिए आसपास के बहुत सारे लोग उसके चक्कर में थे। हर कोई उसको पहली बार देखकर ही उसकी तरफ आकर्षित हो जाता और हर कोई उसकी चुदाई करने के सपने देखा करता था। ठीक वैसा ही मेरा भी हाल था और में भी मन ही मन अब उसकी चुदाई के सपने देखने लगा था। एक दिन में ऐसे ही उससे मिलने उसके घर चला गया और उस समय वो मेरे सामने वाले सोफे पर बैठी हुई थी और उस दिन उसने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी और बहुत ही कसा हुआ ब्लाउज पहना था, जिसको देखकर लगता था कि वो उसके बूब्स के आकार से बहुत छोटा था, लेकिन तब भी उसने वो ब्लाउज पहन रखा था। सच में वो बड़ी ही मस्त लग रही थी, में बातें करते समय उससे अपनी नजर को बचाकर थोड़ी देर में उसके बूब्स को देख लेता और कभी कभी उससे मेरी नज़र भी मिल जाती। उस समय वो मेरे सामने बैठकर कोई किताब पढ़ रही थी। बाद में मुझे पता चला कि वो एक बड़ी मज़ेदार कहानी को पढ़कर हंस रही थी।

फिर कुछ देर बाद अचानक से वो किताब उसके हाथ से छूटकर नीचे गिर गई और तब वो उस किताब को उठाने के लिए नीचे झुकी। फिर मैंने देखा कि वो क्या गजब का द्रश्य था। उसके एकदम कसे हुए दो बहुत ही मोटे उभरते हुए बूब्स ठीक मेरे सामने थे और उसने उस समय वो ब्लाउज बहुत ही गहरे गले का पहना हुआ था, इसलिए नीचे झुकते ही मुझे उसके बूब्स बड़ी गहराई तक नजर आ गए और में पहली बार ऐसा मनमोहक द्रश्य देख रहा था, इसलिए मेरी आखें फटी की फटी रह गई। अब वो उस किताब को वापस अपने हाथ में लेकर पढ़ने लगी थी, लेकिन उसने अब अपनी साड़ी का पल्लू ऊपर नहीं किया था, जिसकी वजह से अब मुझे उसके कसे हुए मोटे गोरे बूब्स उभरकर ब्लाउज से मुझे साफ नजर आ रहे थे, जिसको में अपनी चकित नजरों से पागलों की तरह देखता ही रहा। मेरी आखें हटने का नाम ही नहीं ले रही थी। फिर वो ऐसे ही बहुत देर तक उस किताब पढ़ती रही, जिसकी वजह से मेरे लंड का बड़ा बुरा हाल होता जा रहा था। फिर वो कुछ देर के बाद उठकर रसोई में चली गयी और उसने मुझे पानी लाकर दिया। मैंने पानी पिया और उसके बाद हम दोनों ने कुछ देर बातें करना शुरू किया। तब उसने मुझसे चाय के बारे में पूछा, लेकिन मैंने उसको मना कर दिया और फिर में वापस अपने घर चला आया। उसके बाद में पूरा दिन और रात बस उसी के बारे में सोचता हुआ उसकी चुदाई के सपने देखता रहा। में उसको देख देखकर पागल हो चुका था और मेरे होश बिल्कुल भी ठिकाने पर नहीं थे। फिर दो चार दिन के बाद जब में उसके घर गया तो मैंने देखा कि उस दिन वो अपने घर में बिल्कुल अकेली थी। मैंने सोफे पर बैठकर उससे उसके घरवालों के बारे में पूछा तब उसने कहा कि आज में अकेली हूँ घर में कोई भी नहीं है और फिर मैंने तुरंत खड़ा होकर उससे कहा कि ठीक है तो में अब चलता हूँ। फिर वो मुझसे कहने लगी कि बैठो ना, तुम अचानक से खड़े क्यों हो गए, अभी चले जाना, तुम्हे इतनी भी क्या जल्दी है जाने की, तुम मेरे पास थोड़ी देर तो रूको, में क्या तुम्हे खा जाउंगी जो तुम मुझे अकेला देखकर उल्टे पैर वापस भागने लगे? दोस्तों में उसके इतना सब कहने के बाद वहीं रुक गया और अब मैंने उसको गौर से देखा, उसने आज मेक्सी पहनी हुई थी, जिसमें वो बहुत ही सेक्सी नजर आ रही थी बड़े गले की और जालीदार मेक्सी होने की वजह से मुझे उसके अंदर का सब कुछ साफ नजर आ रहा था मैंने देखा कि उसने अपनी मेक्सी के अंदर काले रंग की ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी और वो पेंटी तो उसके कूल्हों में एकदम फंसी हुई थी। यह सब देखकर मेरा लंड पूरी तरह से तन गया था, जो मेरी पेंट के ऊपर से साफ नजर आ रहा था और वो भी मेरे लंड को ही बड़े ध्यान से देख रही थी। अब उसने मुझसे पूछा क्या तुम कुछ लेना चाहोगे? तो मैंने उससे कहा कि हाँ कुछ ठंडा हो तो चेलगा, तभी वो उठकर गई और मेरे लिए कोल्डड्रिंक लाने के लिए चली गई। उस समय में उसके मटकते हुए कूल्हों को ही बड़ा चकित होकर घूरकर देखा रहा था। उसके कूल्हे इधर उधर मटक रहे थे, वो गजब के आकर्षक लग रहे थे। फिर वो मेरे लिए ठंडा लेकर आई और उसने मुझे वो लाकर दे दिया। मुझे देने के लिए जैसे ही वो झुकी तो मुझे उसके दोनों बूब्स के बीच की दरार साफ साफ दिखाई देने लगी और में अपनी आखें फाड़ फाड़कर बस उसके बूब्स को ही देखने लगा और में उसके हाथ से ठंडा लेना ही भूल गया। अब वो भी मुझसे कुछ नहीं बोली, क्योंकि उसको पता चुका था कि में उसके बूब्स को देख रहा हूँ। उसने बड़े आराम से मुझे अपने बूब्स का वो मनमोहक द्रश्य कुछ देर देखने दिया, लेकिन तभी मुझे होश आया कि मुझे उसके हाथ से ठंडा लेना है तभी मैंने जल्दी से वो ले लिया। अब वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए मुझसे कहने लगी कि तुम्हे इतनी भी क्या जल्दी है आराम से देख लो उसके बाद ले लेना? दोस्तों में उसके मुहं से यह बात सुनकर बिल्कुल हैरान बहुत चकित हो गया और अब मेरी समझ में आ गया था कि वो भी अब मेरे साथ कुछ करने के लिए तैयार है, इसलिए मैंने हिम्मत करके उससे कहा कि नहीं अब में पहले ठंडा पी लूँ। उसके बाद फिर में इन्हे बड़े आराम से देखूँगा। वैसे यह पर्दे के पीछे छुपे हुए देखने में इतना मज़ा नहीं आता।

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फिर वो मुस्कुराते हुए मुझसे कहने लगी कि इसमे कौन सी बड़ी बात है? तुम अगर चाहो तो में तुम्हे अपने बूब्स वैसे भी दिखा सकती हूँ जैसे तुम चाहते हो, लो देखो और फिर वो मुझसे यह शब्द कहकर अपनी मेक्सी को उतारने लगी। दोस्तों में अब पूरी तरह से समझ चुका था कि जो आग मेरे बदन में लगी है वो अब इसको परेशान करने लगी है और अब मेरे आगे बढ़ने की देर है। आज यह जरुर मुझसे अपनी चुदाई का खेल खेलना चाहती है। फिर में क्यों भला पीछे रहूँ और यह बातें अपने मन में सोचकर मैंने उससे कहा अभी नहीं मेरी जान, में तुझको अपने हाथों से नंगा करूँगा और तुम्हे भी बड़ा मज़ा आएगा। फिर वो बोली कि हाँ यह भी ठीक है, तुम मुझको नंगा करते समय अच्छे से मेरी इस जवानी के मज़े लेना, इतना कहकर वो मेरे पास आकर बैठ गयी और में उसके गोरे कामुक बदन को अपने हाथों से छूकर महसूस करने लगा। दोस्तों आज मेरे मन की मुराद पूरी हो रही थी, इसलिए में भगवान को मन ही मन धन्यवाद देता हुआ अपने काम को करने लगा। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

मैंने देखा कि उसका वो गोरा बदन वाकई में बहुत गजब का था, रुई की तरह एकदम मुलायम चिकना मुझे उसको सहलाने में बहुत मज़ा और उसको जोश आ रहा था। अब मैंने उसकी मेक्सी को ऊपर सरकाना शुरू किया और धीरे धीरे मैंने उसकी मेक्सी को उतारकर उसके बदन से अलग कर दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में रह गयी और दिखने पर वो वाह क्या गजब का माल लग रही थी। अब मैंने आगे बढ़कर उसके नरम गुलाबी रसभरे होंठो को चूमने शुरू किए और साथ ही में उसके बूब्स को दबाने भी लगा था, जिसकी वजह से अब वो धीरे धीरे गरम हो रही थी, जिसकी वजह से अब उसने मेरी शर्ट और पेंट को उतार दिया, जिसकी वजह से अब में भी उसके सामने सिर्फ़ अंडरवियर में था और वो मेरे अंडरवियर के पीछे छुपे खड़े हुए लंड को बड़े प्यार से देखने लगी, जो अब अंडरवियर से बाहर आने के लिए तरस रहा था। वैसे दोस्तों मेरा लंड बहुत ज़्यादा मोटा और लंबा नहीं है, मेरा लंड सिर्फ़ 6 इंच लंबा है, लेकिन एक बात और थी वो उस दिन मुझे पहली बार विनीता की चुदाई करने के बाद पता चली कि में बहुत देर तक बिना झड़े चुदाई कर सकता हूँ। अब उसने धीरे से मेरा लंड अंडरवियर के बाहर निकाल लिया और वो उसको अपने मुहं में लेकर चूसने लगी, जिसकी वजह से मुझे भी बड़ा मस्त मज़ा आने लगा और उसी समय मैंने भी धीरे से उसकी पेंटी को उतार दिया और फिर ब्रा को भी उतार दिया, जिसकी वजह से अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी। वो बहुत ही गजब की एकदम काम की देवी लग रही थी।

फिर कुछ देर बाद मैंने भी उसकी चूत को चटाना शुरू किया, जिसकी वजह से वो अब बहुत जोश में आकर उत्तेजित हो रही थी और मेरा लंड भी तनकर मुझे झटके दे रहा था। में उसी समय अब उसके ऊपर चड़ गया और मैंने अपना लंड उसकी चूत से सटा दिया और में कसकर पूरा दम लगाकर उसके बूब्स को रगड़ने दबाने लगा था, जिसकी वजह से वो अब सिसकियाँ ले रही थी और उसके मुहं से अब आईईईईई ऊह्ह्ह्हह्ह मेरे राजा अब जल्दी से तुम मुझे चोद दो, तुम इतना भी मुझे मत तरसाओ आह्ह्ह्ह प्लीज अब तुम मेरी चुदाई कर दो, मेरी यह चूत साली तुम्हारे लंड के लिए बहुत तरस रही है अब तुम इसको फाड़ दो, डाल दो पूरा लंड इसके अंदर और मुझे वो मज़े दो, जिसके लिए में अब पागल हुई जा रही हूँ। दोस्तों सच कहूँ तो अब मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था और मुझे भी उसकी चुदाई की जल्दी थी, इसलिए मैंने उसके कहते ही तुरंत अपना लंड एक जोरदार झटके से उसकी कसी हुई चूत में अंदर डाल दिया और वो दर्द की वजह से धीरे से सिसकी लेती हुई आईईईई माँ रे मार डाला, में मर गई ऊऊउईईईईइ यह कैसा दर्द है? कहती हुई छटपटाने लगी।

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अब तक मेरा तीन इंच लंड उसकी चूत के अंदर जा चुका था और कुछ देर वैसे ही रुके रहने के बाद मैंने अपना लंड वापस बाहर निकालकर दोबारा एक ज़ोर का धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड अब अंदर जा चुका था। तो वो दर्द की वजह से आईईई आह्ह्ह रे मार डाला रे फाड़ दिया ऊईईईईई तूने मेरी चूत को इतना कहकर वो अपनी गर्दन को इधर उधर घुमाने लगी थी। अब में कस कसकर धक्के लगाने लगा, जिसकी वजह से कुछ देर बाद वो भी मस्त हो गयी और वो पता नहीं क्या क्या बड़बड़ा रही थी ऊईईईईई आईई रे मार डाला जालिम, बहुत मज़ा आ रहा है मेरे राजा और कसकर डालो, हाँ ऐसे ही जाने दो आह्ह्ह अब मुझे मज़ा आ रहा है और तेज धक्के देकर तुम फाड़ दो ऊउफ़्फ़्फ़्फ़ मेरी चूत को साले आज में देखती हूँ कि तूने कितना दूध पिया है, अपनी माँ के बूब्स से आज तू मेरे भी बूब्स से पीकर मुझे दिखा में भी देखती हूँ कि तेरे लंड में कितनी ताकत है, दे मुझे ज़ोर से धक्के मेरी चूत की प्यास को तू आज बुझा दे।

दोस्तों में भी उसकी वो बातें सुनकर जोश में आ गया इसलिए में अब और भी जोश में आकर उसको धक्के देकर चोदने लगा और में उससे बोला चल अब चुप कर साली कुतिया साली छिनाल आज में तेरी चूत को पूरी तरह से फाड़ ही डालूँगा समझी रंडी साली, मेरी यह बातें सुनकर वो और भी मस्त हो गयी मुझसे कहने लगी ऊऊईईईईईई हाँ और ज़ोर से चोदो मेरे राजा आअहह मज़ा आ गया और जमकर चोदो फाड़ डालो आज तुम मेरी चूत को आह्ह। दोस्तों अब मुझे उसकी चुदाई करते हुए करीब 30 मिनट हो चुके थे, इस बीच वो अब तक दो बार झड़ चुकी थी, लेकिन मेरा लंड अब भी वैसे ही अपने काम में लगा हुआ था। तभी मेरा ध्यान उसकी गांड की तरफ चला गया और तब मैंने छूकर महसूस किया कि उसका छेद बड़ा ही कसा हुआ लगा, जिसको देखकर में उसकी गांड मारने के बारे में बस सोच ही रहा था कि उतने में वो मुझसे बोल पड़ी। उसने मेरे मन की बात को शायद बिना कहे ही सुनकर मेरी इच्छा को समझ लिया था। अब उसने उसी समय मुझसे पूछा क्यों तेरा क्या इरादा है क्या तू आज मेरी गांड भी मारेगा? तब मैंने उससे कहा कि हाँ आज में बिना चोदे तो तुझे नहीं छोड़ने वाला, चाहे वो तेरा कोई भी छेद ही क्यों ना हो? फिर मैंने उससे यह बात कहकर तुरंत ही अपने लंड को उसकी चूत से बाहर निकाल लिया और अब उसको मैंने अपने सामने कुतिया की तरह उसके हाथों पैरों पर खड़ा कर दिया, जिसकी वजह से अब उसकी गांड का गुलाबी छेद मुझे साफ नजर आ रहा था। मेरा लंड उसकी चूत के रस से पहले से ही गीला एकदम चिकना था। अब मैंने उसकी गांड से अपना लंड सटा दिया और हल्के से धक्का लगाया तो मेरा लंड दो इंच उसकी गांड में घुस गया, लेकिन वो दर्द की वजह से चिल्लाने लगी आह्ह्ह्हह्ह में मर गई ऊफ्फ्फ्फ़ मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है, लेकिन मैंने उसकी एक भी बात नहीं सुनी और मैंने दोबारा धक्का लगा दिया। लंड पूरा अंदर जाने के बाद में बार बार वैसे ही धक्के लगाने लगा। फिर करीब दस मिनट के बाद वो थोड़ा सा शांत हो गयी, क्योंकि अब उसको भी दर्द कम होने के बाद मज़ा आ रहा था और वो सिसकने लगी और मुझसे कहने लगी कि आईईइ वाह मुझे तो आज पहली बार पता चला कि इसमे तो चूत से भी ज़्यादा मज़ा आता है हाँ और ज़ोर से चोदो मेरे राजा ऊऊईईई रे वाह मुझे बहुत मज़ा आ रहा है चोदो हाँ आईईईईई और ज़ोर से मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा है।

अब में उसको लगातार तेज धक्के देकर चोदता ही जा रहा था। फिर करीब बीस मिनट तक मैंने अपने लंड को उसकी गांड के अंदर बाहर किया तो उसको जमकर चुदाई के मस्त मज़े दिए, लेकिन अब मेरा लंड झड़ने वाला था, इसलिए मैंने अचानक पहले से भी ज्यादा अपनी स्पीड को बढ़ा दिया और उससे कहने लगा कि वाह साली कुतिया क्या मस्त गांड है तेरी, अब तो तू मेरी हो चुकी है, अब में हर दिन तेरी ऐसे ही जमकर चुदाई किया करूँगा, साली रंडी तू बहुत मस्त औरत है, वाह मज़ा आ गया तेरी चुदाई करके, में बहुत दिनों से तेरी चुदाई के सपने देख रहा था और आज वो पूरा हो चुका है आह्ह्ह मेरा वीर्य अब निकलने वाला है, में अब झड़ने वाला हूँ और फिर मैंने धक्के देते हुए उससे यह बात कहते हुए अपना पूरा वीर्य उसकी गांड में निकाल दिया जो लंड के अंदर बाहर होने की वजह से अब उसकी गांड के छेद से बाहर निकलकर उसकी जांघो पर भी बह निकला और मेरा लंड एकदम चिकना होकर अब बड़े आराम से उसकी गांड में अपनी जगह बनाकर अंदर बाहर हो रहा था और फिर अचानक से धक्के देना बंद करके में उसके ऊपर लेट गया। हम दोनों बहुत देर तक वैसे ही एक दूसरे से चिपककर लेटे रहे। फिर कुछ देर बाद जब मेरा लंड और जोश शांत हुआ तो में उसके ऊपर से उठा और लंड को बाहर करके मैंने अपने कपड़े पहन लिए, तभी वो मुझसे बोली कि राजा अब तो तुम्हे मेरी हर दिन ऐसी ही चुदाई करनी पड़ेगी। तुम्हारे साथ मुझे बड़ा मस्त मज़ा आया और तुम्हारा लंड बहुत दमदार है। इसने मुझे चुदाई का असली मज़ा देकर मेरी चूत को पूरी तरह से संतुष्ट करके मेरा मन खुश कर दिया है। अब मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक है में हर दिन तुम्हारी मस्त चुदाई करूँगा मेरी रानी, जिसको तुम भी क्या याद रखोगी कि किसी असली मर्द से तुम्हारा पाला पड़ा है। वैसे में तुम्हारे इस जोश भरे बदन की जितनी तारीफ करो उतनी ही कम है तुम्हारी यह चूत किसी कुंवारी चूत से कम मज़ेदार नहीं है अगर किसी भी खेल को खेलते समय दोनों ही एक बराबर हो तो वो खेल बड़ा मस्त मज़ेदार होता है इस चुदाई का यह मज़ा तुम्हारी चूत की वजह से भी हमें मिला है, क्योंकि तुमने भी पूरे जोश में आकर मेरा पूरा पूरा साथ दिया है और में तुम्हारा यह ऐसा जोश देखकर बड़ा चकित हूँ और वैसे भी अनुभवी के साथ यह खेल खेलने का मज़ा ही कुछ और आता है। वही मज़ा आज तुमने भी मुझे दिया है और में तुम्हारे इस बदन का भक्त बन चुका हूँ। अब तुम जैसा कहोगी में ठीक वैसा ही तुम्हारे साथ करूंगा। दोस्तों उससे यह बातें कहकर में बाथरूम में जाकर अपने लंड को साफ करके में कपड़े पहनकर वापस अपने घर चला आया और में उस दिन बड़ा खुश था ।।

धन्यवाद …

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